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आंटी ने दिलाई पड़ोसन बुआ की गरम चूत - Antarvasna Sex Stories

नमस्कार दोस्तो, मैं आपका राज शर्मा!


हमारी बिल्डिंग में एक नई फैमिली आई उसमें एक अंकल, आंटी उनकी एक बहन और एक बेटा था.

अंकल की बहन की उम्र 28 साल, जिस्म 32 – 30 – 34, रंग हल्का सांवला था पर देखने में ऐसे लगती जैसे कामवासना की मूर्ति हो.


मैंने उसे देखा तो देखता रह गया और उसे घोड़ी बना कर चोदने के सपने देखने लगा।


उसका भतीजा उसे बुआ बोलता तो सब उसे बुआ बुलाने लगे.

मैं उसे रोज़ देखता और सोचता एक दिन मेरी रानी जरूर बनाउंगा।


एक दिन मैं कम्पनी से घर आया तो बुआ आंटी के रूम में थी और दोनों हंस कर बातें कर रही थी।


मैं अपने रूम में आ गया और लन्ड पकड़ कर बैठ गया.


तभी रेखा आंटी का ख्याल आया और मैंने उसकी मदद लेने की सोची.


रात को 12 बजे मेरे रूम के दरवाजे की कुन्डी खिसकी.

वो रेखा आंटी थी.


मैंने उसे रूम के अंदर किया और दरवाजा बंद कर दिया.

वो खुद मुझसे चिपक गई और मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और चूसने लगी.


मैंने उसे पलंग पर पटका और लन्ड को तुरंत उसकी मखमली चूत में घुसा दिया.

मैं साथ ही तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.


थोड़ी देर बाद रेखा को मैंने बोला- मुझे बुआ की गर्म चूत चाहिए!

वो गुस्से में आ गई.

और मैंने भी झटकों की रफ्तार तेज कर दी और रेखा को मनाने लगा.


उसने वादा लिया- तुम मुझे नहीं छोड़ोगे?

मैंने कहा- हां!


फिर चुदाई खत्म हो गई और वो चली गई।


5 दिन बाद मैं कम्पनी के ऑफिस में था कि रेखा का फोन आया- अभी अपने रूम में आ जाओ!


मैंने सुपरवाईज़र से हाफ डे लिया और रूम पर आया.


रेखा आंटी मेरे रूम में आ गई और बोली- राज, आज मैंने तेरे लिए स्पेशल पनीर बनाया है जल्दी नीचे आ जाओ.

और वो चली गई.


यह सुन मैं बहुत गुस्से में हो गया और नीचे आकर बोला- मुझे पनीर के लिए क्यों परेशान किया?

तभी बुआ आ गई और बोली- भाभी, मुझे पनीर नहीं खिलाओगी?

आंटी ने कहा- आओ.

और सब खाना खाने लगे.


मैं गुस्से में था, रेखा हंस रही थी।


थोड़ी देर बाद सबने खाना खा लिया तो आंटी ने मुझे इशारा किया कि इसे बिस्तर पर ले जाओ.


और मैं सब समझ गया और बिस्तर पर लेटा कर बुआ के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.


वो थोड़ी शर्म कर रही थी तो मना करती रही.

पर मैं नहीं रुका और धीरे धीरे उसके पजामे में हाथ डाल दिया और उसकी गर्म चूत में उंगली घुसा दी.

वो चीख पड़ी.


आंटी ने उसका मुंह बंद कर दिया और उसके बूब्स चूसने लगी.

मैंने बिना देर किए अपने और बुआ के कपड़े उतार दिए और उसकी मखमली गुलाबी चूत में अपनी जीभ घुसा दी.


धीरे धीरे बुआ की सिसकारियां निकलने लगी और वो भी गर्म हो गई.

बाद में रेखा आंटी ने मुझे बताया था कि उसने बुआ को सेक्स की गोली खिलायी थी, जिससे उसकी वासना भड़क जाए. उसी गोली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था।


रेखा ने भी खुद को नंगी कर दिया और मेरा लौड़ा अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.

मैं बुआ के बूब्स दबाने लगा.


कमरे में सिसकारियां भरने लगी।


थोड़ी देर बाद मैं बुआ के ऊपर आ गया और लन्ड को उसके मुंह में डालने लगा.

वो तुरंत चूसने लगी और बोली- राज, तेरा लौड़ा तो बहुत मजेदार है!

और लन्ड को तेज़ तेज़ चूसने लगी.


मैं झटके मार के लंड अंदर बाहर करने लगा और रेखा आंटी बुआ की चूत चाटने लगी।

बुआ को तो जैसे जन्नत मिल गई थी उसकी आंखों में चमक आ गई और लंड को गपागप चूसने लगी.


मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और अंदर-बाहर करने लगा.

अब बुआ पूरी गर्म हो गई और बोली- राज, मेरी चूत में लन्ड घुसा दो.


वो तड़पने लगी और आंटी बुआ की चूत में उंगली डाल कर चोदने लगी।


बुआ की आवाज तेज होने लगी, उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वो शांत हो गई।


आंटी ने उसके मुंह पर अपनी चूत रख दी और उससे बोली- चाट मेरी चूत!

आज मेरे दोनों हाथ में लड्डू थे।


मैंने कंडोम निकाला और रेखा आंटी को दिया.

उसने मेरे लंड पर कंडोम लगा दिया.


मैंने धीरे से बुआ की गर्म चूत में लन्ड को रख दिया और रगड़ने लगा.

बुआ की चूत के पानी से लंड चिकना हो गया.


मैंने एक झटके में अपना लौड़ा उसकी मखमली गुलाबी चूत में अंदर तक घुसा दिया.


उसकी चीख निकलने लगी तो आंटी ने अपनी चूत को उसके मुंह में रखकर आवाज रोक दी और वो छटपटाने लगी.


मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और अपना लंड बुआ की चूत में अंदर-बाहर करने लगा.


वो मचलने लगी.

मैं तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.


थोड़ी देर बाद रेखा उठ गई और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए.

मैं लंड को अंदर-बाहर करने लगा और रेखा आंटी के होंठों को चूसने लगा.


बुआ भी धीरे धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ाती जा रही थी.


मैंने पूछा- कैसा लग रहा है बुआ जी?

वो बोली- राज, फ़ाड़ दे मेरी चूत! तेरे लौड़े में जादू है!


मैं जोश में आ गया और लन्ड को तुरंत चौथे गियर में डाल दिया और झटकों की रफ्तार बढ़ा दी.

लंड चूत में अंदर-बाहर होने लगा … उउउईई ईईई अह ओहह सीईई ईईई के शोर से कमरा गूंजने लगा.


थोड़ी देर बाद दोनों की चूत से पानी निकल गया।


अब बुआ को मैंने लंड के ऊपर बैठने को बोला और मैं खुद बिस्तर पर लेट गया.

बुआ ने जैसे ही अपनी चूत को मेरे खड़े लंड पर रखा, लंड सट्ट से अंदर घुस गया.

उसकी सिसकारियां निकलने लगी.


मैंने झटके मारने शुरू कर दिए.

धीरे धीरे उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी.


फिर आंटी ने उसके मुंह में अपनी चूची लगा दी, वो चूसने लगी.


मैंने नीचे से उछल कर लंड की रफ्तार तेज कर दी.

अब फच्च फच्च फच्च फच्च की आवाज तेज होने लगी।


बुआ लंड पर मस्ती से उछलने लगी और बोली- राज, मुझे अपने लौड़े पर बैठाकर जन्नत की सैर करवा दो.


मैंने झटकों से लंड अंदर-बाहर करने लगा. फच्च फच्च फच्च उईई आआह हह उईई ईईईई आआह हहह की आवाज तेज होने लगी.


रेखा ने अपनी चूत को मेरे मुंह में रख दिया.

अब मैं एक चूत को लंड से दूसरी को जीभ से चोदने लगा.


और दोनों की सिसकारियों से कमरा गूंजने लगा।

हम तीनों चुदाई का मज़ा लेने लगे।


अब बुआ की आवाज तेज और रफ्तार धीमी होने लगी.

और मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी।


मैं रेखा की चूत में जीभ अंदर बाहर करने लगा.


और तभी बुआ की चूत से पानी निकलने लगा और मेरे लौड़े को गीला कर दिया.

अब लंड गपागप अंदर बाहर होने लगा बुआ जोर जोर से चिल्लाने लगी और शांत हो गई।


रेखा की चूत ने भी पानी छोड़ दिया।

वो उठकर बाथरूम चली गई.


मैंने बुआ को लंड से नीचे उतार दिया और अपने होंठ उसके होठों पर रख कर दोनों चूसने लगे.


वो बोली- राज तुम कब झड़ोगे?

मैंने कहा- रानी क्या हुआ? अभी तो राज शर्मा की शुरुआत है।


फिर मैंने उसके मुंह में लन्ड घुसा दिया और वो चूसने लगी. मेरे लंड को उसने अपने थूक से नहला दिया.


उसे मैंने नीचे खड़ा किया और बेड पर झुका दिया और पीछे से अपना लौड़ा उसकी चूत में जैसे ही डाला, वो उछल पड़ी.


मैंने कमर पकड़ कर झटका दिया, उसकी चीख निकल पड़ी. मैंने लंड को रोक दिया और उसके गले को चूमने लगा.


तभी रेखा आंटी आ गई.


मुझे याद आया कि मेरे बैग में थोड़ी शराब रखी है.

मैंने रेखा से कहा- आंटी, पैग बनाओ!


उसने और मैंने एक एक पेग पीया।

बुआ ने मना कर दिया था तो मैंने उसे कहा- ठीक है।


अब मुझे मस्ती चढ़ने लगी और झटकों की रफ्तार बढ़ा दी.

बुआ की तो जान निकली जा रही थी।


फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और ऊपर आकर लंड को झटके से चूत में घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा.


मैंने झटके बढ़ाये ही थे कि बुआ की चूत ने जबाव दे दिया. अब गीला लंड फच्च फच्च फच्च फच्च करने लगा.


अब मेरा लंड भी धीरे धीरे आखिरी मंजिल तक पहुंचने लगा और मैं लंड को धीरे धीरे चलाने लगा।

बुआ साथ छोड़ चुकी थी।


आंटी समझ गई और उसने बोला- राज उठो!

मैंने लन्ड को बुआ की चूत से बाहर निकाल लिया.

बुआ थक गई थी उसकी आंखें बंद थी।


अब मेरा लंड रेखा के हाथ में था.

उसने कंडोम निकाल दिया और लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.


फिर मैंने रेखा को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत में थूक लगा कर लंड को घुसा दिया. धीरे धीरे मैं अंदर-बाहर करने लगा.

अब वो भी धीरे धीरे कमर चलाने लगी.


हम दोनों ने अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी और चूत लंड का घमासान युद्ध होने लगा.

हर झटके से दोनों की आवाज तेज होने लगी और अब दोनों जल्दी जल्दी करने लगे.


लन्ड पर चूत सरपट दौड़ने लगी।

दोनों के शरीर अकड़ने लगे और एक साथ दोनों का पानी निकल गया।


मैंने लंड निकाल कर बुआ के मुंह में डाल दिया.

वो लोलीपॉप के जैसे चूसने लगी और लंड को साफ़ कर दिया।


तब हम तीनों बाथरूम गये और अपने कामांग साफ करके आ गये।


फिर बुआ अपने रूम में चली गई और हम दोनों बिस्तर पर लेट गए.

हमें नींद आ गई.


जब हम जागे तो शाम हो गई थी.

तब मैं भी अपने रूम आ गया।


दोस्तो, यह मेरी सच्ची कहानी है आपको कैसी लगी यह Antarvasna Sex Stories? जरूर बताएं आपका राज शर्मा

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