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"कशिश" पेंटी गिरने से पेंटी उतारने तक का सफ़र:३ - Free Sex Kahani


उस रात मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल हो रखी थी, एक उम्मीद, एक डर, और एक गुनाह का थोड़ा एहसास। मैं जानता था कि ये गलत है, लेकिन मेरा दिल मानने को तैयार नहीं था। और अब जब उसका पति शहर से बाहर था, तो उसको भोगने का एक अवसर सामने था, एक ऐसा मोड़ जो हमारी ज़िंदगी को एक नयी दिशा दे सकता था।


फ़िल्म देखते हुए मैने मेरा हाथ उसके बांये कंधे पे रख दिया, उस वक़्त फ़िल्म में अरिजीत सिंह का "गहरा हुआ...." गाना चल रहा था, और यालीना, हमज़ा के साथ बाइक पे घूम रही थी। धीरे धीरे मैं अपना हाथ उसके स्तन की तरफ़ बढ़ा रहा था, गाना खतम होने तक उसका स्तन मेरे हाथ में था।


वो गाना देखने में इतनी मशगूल थी कि शायद उसे पता ही नहीं चला या तो फ़िर वो उस स्पर्श का आनंद ले रही थी, इस लिए उसने शायद कोई विरोध नहीं किया। मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ी, मैं उसके स्तन को एक स्माइली बॉल की तरह धीरे धीरे दबाने लगा। मैंने उसकी निप्पल मेरी उंगली और अंगूठे के बीच पकड़ कर हल्का सा दबाया। वो "स....." कर के वो सीत्कार उठी, उसने मेरे सामने देखा तो उसकी आंखों में चमक सी आ गई। अंधेरे में भी मैं उसकी आँखों में वासना देख पा रहा था, वो थोड़ी मेरी तरफ़ झुकी, मैं भी थोड़ा करीब आके उसके सर की तरफ़ झुका।


मुझे उसकी तेज़ सांसे और हाथ में उसके दिल की तेज़ धड़कनें महसूस हो रही थी। वो थोड़ा सकपकाई.... वो कुछ बोलने जा रही थी, लेकिन वो कुछ बोले उससे पहले मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, मेरा दिल भी ज़ोर से धड़क रहा था। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, और फिर धीरे-धीरे उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों में उलझ गई, मैं समझ गया कि उसे कोई शिकवा नहीं था, बल्कि एक अनकही सहमति थी। उस ख़ामोशी में जैसे हज़ारों बातें हो गईं। मैं उसके होंठों को बेतहाशा चूमने लगा।


बेहद आहिस्ता और नर्मी से। उसने विरोध नहीं किया, बल्कि उसने मेरा हाथ अपनी जांघ पर रख दिया, मैं उसकी जांघे और पेट के निचले हिस्से को सहलाने लगा। ये चुम्बन हम दोनों के लिए एक लंबे समय से दबी हुई इच्छा का विस्फोट लग रहा था। मैं उसके निचले होंठ को हल्के से चूसने लगा, उसने आहिस्ता से मेरे ऊपरी होंठ को अपने होंठों में लेकर चूमा। मेरा एक हाथ उसका एक स्तन दबा रहा था, वही दूसरा हाथ उसकी जांघे, पेट, कंधे... उसके शरीर पे जहां तक मेरा हाथ पहुंच रहा था, वहां तक प्यार से सहलाता रहा, ये खेल बहोत देर तक ऐसे ही चलता रहा।


फ़िल्म खत्म होने के बाद हम सिनेमा हॉल से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठे, मौसम में दिसंबर की काफ़ी ठंड थी, रात के लगभग डेढ़ बज चुके थे। मैंने कार चलाते हुए कशिश तरफ़ तिरछी नज़र से देखा तब उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट, थोड़ी सी शरमाहट और उत्सुकता का अनोखा मिश्रण दिख रहा था।


मैंने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, कशिश!!

हम्मम, कहते हुए उसने मेरे सामने देखा।

अगर आप चाहो तो हम इसमें आगे बढ़ सकते है।

वो चुप रही...

उसकी वो चुप्पी मुझे थोड़ी चुभी, तो मैंने कहा, वैसे कोई ज़बरदस्ती नहीं है।

लेकिन क्या ये गलत नहीं हैं? उसने पूछा।

मैंने उसका हाथ पकड़ के चूमा और कहा, देखो हम सिर्फ अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं, अपने दिलों की, अपने जिस्मों की...


उसने कोई जवाब नहीं दिया। घर पहुंचने तक वो खामोश रही, लेकिन उसकी आँखो में और उसकी खामोशी में भी मुझे उसकी सहमति नज़र आ रही थी। इस लिए मैंने धीरे से पूछा, तो क्या सोचा? तुम्हारे घर या मेरे घर? मैंने आँख मारते हुए पूछा।


जहां तुम चाहो, वो बोली।

"आप" अब "तुम" में बदल गया था, तब मैं कन्फ़र्म समझ गया कि वो तैयार है।

वैसे हार्दिक.. एक बता दूं, ये रिश्ता सिर्फ़ "फ्रेंडस विथ बेनेफिट्स" का रहेगा। हम सिर्फ़ अपनी जिस्मानी जरूरतों को पूरा करेंगे, कोई इमोशनल अटैचमेंट नहीं रहेगा।

मैंने कहा, ठीक है, तो चलो मेरे घर...

हम लिफ्ट से मेरे फ्लैट में आए...


अंदर आकर मैंने सब शॉपिंग का सामान सोफे पर रखा और हम सोफे पर बैठे, वो मेरी बगल में बैठी।

मैंने उसको पूछा, ड्रिंक करोगी?


उसके हाँ कहने पर मैंने व्हिस्की के दो पैग बनाये। ड्रिंक लेते हुए उसने नज़रें नीची कर लीं, उसकी सांसें तेज़ थीं।

मैंने उसकी ठुड्डी पकड़ कर चेहरा ऊपर उठाया, हमारी आंखें मिलीं। मैंने उसको खड़ा कर के मेरी जांघ पर बिठाया।

उसने सामने से अपने होंठों को मेरे होंठों से जोड़ा, ऐसे ही कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे।

उसके बाद हमने अपना पैग खत्म किया और दूसरा पैग बनाया वो भी बातों बातों में और चुम्मा चाटी के साथ पूरा किया।


अब वो सोफे पर ही मेरी गोद में मेरे सामने मुँह रख के अपने दोनों पैर मेरी कमर पे लपेट के लोटस पोजीशन में बैठ गई, उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे, मैं उसको मेरी तरफ़ दबोच रहा था, मैं उनकी गर्माहट और कोमलता को अपनी छाती पर महसूस कर रहा था।


मैंने उसके गले को चूमना शुरू किया, उसने हल्की सी सिसकी भरी, उसका शरीर कांप रहा था। हमारे शरीर एक दूसरे से कस कर भिड़ गए। उसके होंठ नर्म और भीगे हुए थे। मेरी ज़बान उसके मुंह के अंदर गई, उसने भी अपनी ज़बान से मेरा स्वागत किया। हमारी लार का आदान प्रदान हो रहा था, मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर और ज़ोर से चूमा, हमारे दांत टकराए, इस बार कोई रोक-टोक नहीं थी, सिर्फ दो जिस्मों की आग बुझने की बेताबी थी।


उसके गले से लिपट कर मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए, फिर हल्के-हल्के काटने लगा। वो सिहर उठी, आआह्ह्ह्ह… उसके मुंह से एक मादक सी कराह निकली। ये आवाज़ मेरे लिए किसी संगीत से कम नहीं थी, जो मुझे उत्तेजित कर रही थी, मैंने उसके कान की लौ को चूमा और चूसा, फिर गर्दन पर अपनी ज़बान फेरी। उसका शरीर ढीला पड़ता गया, वो मेरे ऊपर अपना पूरा वज़न डाल रही थी, जैसे वो मेरे ऊपर सवार होके इस खेल में मुझे हराना चाहती थी।


मैंने देर ना करते हुए धीरे से उसका टॉप उतार लिया,

वो भी इतनी हॉर्नी हो गई थी कि मेरी टी शर्ट उसने फटाफट उतार दी। वो ऊपर से सिर्फ़ ब्रा में थी, उसकी छाती के कबूतर मानो पिंजरे से बाहर आने को बेताब हो रहे थे। मैंने धीरे से ब्रा का हुक खोला, और ब्रा खुलते ही उसके दोनों आज़ाद कबूतर उछल पड़े।


मैंने चूमते हुए, उनके कानों में धीरे से कहा, बेडरूम में चले?

वो बुदबुदाई, अ..मम्म.. तुम मुझे उठाके ले जाओ न!!!!

उसपे शायद व्हिस्की का और वासना का हल्का सा नशा सवार हो गया था।

मैंने उसको अपनी गोद में उठाया, अपने बेडरूम में ले आया।


बिस्तर पर उसे लिटा कर मैं उसके ऊपर झुक कर उसकी आँखों को चूमा, फिर नाक की नोक, फिर गाल, फिर ठोड़ी, और आखिर में होंठ। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, धीरे-धीरे सहलाते हुए नीचे की ओर बढ़ रहे थे। अब मैंने उसके प्लाज़ो जीन्स का बटन और चैन भी धीरे से खोल के उतार दी, मैंने अपनी पैंट भी उतार दी, और मैं भी सिर्फ़ अंडरवियर में था और वो सिर्फ पेंटी में थी, उसका पेट सपाट और गोरा था, बेहद आकर्षक पियर्सिंग की हुई गहरी नाभि। मैं उसकी पेंटी उतारने के लिए आगे बढ़ा, और थोड़ी देर रुक गया और उसे देखता रहा..


वो बोली, क्या हुआ?

मैंने पूछा क्या ये मेरे ऊपर गिरी थी, वही पेंटी है,?

वो बोली, हाँ, ये वही लक्की पेंटी है, इसकी वजह से आज मैं यहां तुम्हारे बेड पर हूँ।


मैंने पेंटी उतारते हुए कहा क्या बात है, जानेमन!! ये तो हम दोनों का "पेंटी गिरने से पेंटी उतारने तक का सुहाना सफर" हो गया। मैंने उसकी पेंटी सूंघी और चूमते हुए मैंने साइड में रखा। संगेमरमर जैसा सफ़ेद उनका जिस्म देखकर आँखें हटाने को मन नहीं कर रहा था, लेकिन मुझे आगे भी तो बढ़ना था!!

उसकी चूत के आसपास बाल नहीं थे, जैसे आज ही शेव की हुई थी, एकदम मुलायम, चुत के होंठ गुलाबी और चमकदार थे, शायद वो आज की रात के लिए पहले से ही तैयार थी।


मैंने झुक कर उसके गोरे गोरे पेट को चूमने लगा, उसकी नाभि को चूमा और उसकी गहरी नाभि में अपनी ज़बान डाल के चाटने लगा। वो छटपटाने लगी, वो अपनी उंगलियां मेरे बालों में उलझाने लगी। मैं उसके पेट और नाभि पर अपने होंठ रगड़ने लगा।


मेरा हाथ उसके ब्रेस्ट पर था और धीरे धीरे दबा रहा था, जो गोल, गोरे, उभरा हुआ और चोटी पर कड़क गुलाबी निपल्स। ये नज़ारा देखकर मेरे लंड में एक तेज़ सिहरन दौड़ गई। मैंने झुक कर उसके एक के बाद एक स्तन को अपने मुंह भरने लगा और आम की तरह चूसने लगा, मेरी ज़बान उसके निप्पल पर घूम रही थी, उसे चूस रही थी, हल्के से दांत गड़ा रही थी। उसकी कराहें तेज़ होती जा रही थीं, आआअह्ह्ह्ह… हार्दिक… बहुत अच्छा लग रहा है, मज़ा आ रहा है… उसने अपने हाथ से मेरा लंड अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ लिया।


मैंने हँसते हुए कहा वो हार्दिक नहीं है, "हार्ड डिक" है।

वो अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में भींच के बोली, यस,, हार्दिक.. fuck me with 'hard' 'dick'

मैं समझ गया कि अब रुकना मुमकिन नहीं, उसने मेरी अंडरवियर उतार दी। मेरा लौड़ा पूरी तरह कशिश को सलामी देते हुए उनके सम्मान में खड़ा था।


उसने शायद पहली बार किसी पराए मर्द का लंड इतने करीब से देखा था, उसकी आँखें फैल गईं, उसने अपने होंठों पर ज़बान फेरी। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया। उसने धीरे से पकड़ा, पहले सहमी हुई, फिर धीरे-धीरे सहलाने लगी। मेरा पुरुष तत्व देख के उसने अपना नीचे का होंठ दांत दबा लिया, उसकी उंगलियां मेरे लंड की नसों को छू रही थीं, एक अजीब सी गुदगुदी और करंट सी दौड़ रही थी।


मैंने उसकी टांगों को फैलाकर अपना सर उसकी जाँघों के बीच रख दिया। उसने शरमा कर अपना चेहरा तकिए में छुपा लिया। मैंने अपनी ज़बान उसकी चुत पर फेरी। वो पूरी तरह गीली थी, एक खास नमकीन और मीठी महक आ रही थी। मुझपे उसकी चूत का नशा छा रहा था।


मैंने उसकी चूत के भीतरी होंठों को अपनी ज़बान से खोला और उसकी भगशेफ को चूसने लगा। उह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… हां… वहीं… वो पागलों की तरह कराह रही थी। मैंने अपनी ज़बान से उसकी चूत को और गहराई तक चाटा, अंदर से गीलापन और बढ़ता जा रहा था। उसने मेरे बालों को ज़ोर से पकड़ लिया और मेरा सर अपनी चुत पर दबाने लगी।

मैं समझ गया कि वो अब तैयार है।

मैंने उसको अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए पूछा कि क्या तुम ये चूसोगी?

उसने सर हिलाते हुए हामी भरी।

मैंने अपना लंड उसके होठों के आगे रखा, उसने पहले सिर्फ फन पर चुम्बन लिया, फिर अपनी ज़बान से टोपा चाटने लगी। मैंने उसके सर को पकड़ कर हल्के से उसके मुँह के अंदर की ओर धकेला। उसने मेरे लंड के पूरे फन को अपने मुंह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। उसकी ज़बान मेरे लंड के सिर पर घूम रही थी, उसका एक हाथ मेरे गोटे पर था। उह्ह्ह्ह… कशिश… मैं कराह उठा। तुम तो चूसने में एक्सपर्ट लग रही हो!! उसने अपनी गति बढ़ाई, अब वो मेरे पूरे लंड को मुंह में लेके चूस रही थी।


हम 69 पोजिशन में आ गए, और जैसे वो अपने मुँह से मेरे लंड को चूस चूस के खींच रही थी, मैं भी जवाब में उसकी चूत चाटने लगा।


एक दूसरे को सिर्फ़ चूमना, चूसना, चाटना और चोदना.....

ऐसा लगता था, जैसे पूरे कमरे में सिर्फ़ और सिर्फ़ "च" का ही दौर चल रहा था।


मैं इतनी देर ज़ोर से चूत चाट रहा था कि अब वो जवाब दे गई, और मुँह से लंड निकाल के और बेड पे हाथ पटक के बोली, "बस" हार्दिक अब जल्दी से मुझे हार्ड डिक की सैर कराओ..


मैं घुमके उसके ऊपर आ गया। मैंने बेड के बाजू के ड्रॉअर से कंडोम निकाला।

कंडोम देख के बोली, ये रहने दो, मैं स्किन टू स्किन फील करना चाहती हूँ, मैंने उनसे पूछा, प्रेग्नेंट हो गई तो?

होने दो, मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी।

लेकिन..!!

मैं कुछ बोलूं उससे पहले मेरी बात काटकर बोली, अरे टेंशन मत लो, मैं तुम्हारी एसेट्स से हिस्सा नहीं मांगूंगी।


मैंने ठीक है कहकर कंडोम वापस रख दिया और मेरा लंड उसकी चुत के द्वार पर रखा, मैंने बहुत आहिस्ता से अपने लंड का टोपा उसकी चुत में डाला। वो अभी भी बहुत टाइट थी, ऐसा लगा कि उसका पति उसको ठीक से चोदता नहीं होगा, उसकी चूत में अब भी कसावट महसूस हो रही थी।

उसने दर्द से अपने दांत भींच लिए, आ.. आह… धीरे… दुःख रहा है, उसने फुसफुसाकर कहा। मैंने आहिस्ता-आहिस्ता अपना लंड अंदर सरकाया, हर इंच के साथ एक नई गर्माहट और गीलापन मुझे घेर लेता था।

जब मेरा पूरा लंड अंदर चला गया, तो मैंने एक पल के लिए रुक कर उसे महसूस किया। उसकी चुत की दीवारें मेरे लौड़े को कस कर जकड़े हुए थीं। फिर मैंने पीछे हटकर और आगे बढ़कर चुदाई शुरू की। शुरुआत धीमी रखी, मैं उसे झटके दे रहा था और उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे।


उसकी आँखे रोल होने लगी, दर्द की जगह अब वो आनंद ले रही थी, उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कुराहट थी, उसने मेरी कमर पर अपनी टांगें लपेट दीं, जिससे मेरा लंड उसकी चुत में और गहराई तक जाने लगा। मैंने अपनी गति तेज़ कर दी, अब हमारे जिस्म टकराने लगे। कमरा हमारी कराहों से गूंज रहा था। आआअह्ह्ह्हह… हार्दिक… आज तो मैं तुम्हारे हार्ड डिक को सॉफ्ट डिक बना दूंगी और ज़ोर से… मुझे चोदो… वो बड़बड़ाई, और मैंने उसे तेज़ गति से चोदना शुरू कर दिया। मेरा लंड उसकी चूत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। चुदाई की एक गीली, चिपचिपी सी आवाज़ आ रही थी। मैंने उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और बटरफ्लाई पोज़ीशन में मैं उसे और गहराई तक चोद रहा था। मैं लगातार चोदते जा रहा था।


उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे, शरीर पसीने से भीग गया था। मेरा भी पसीना उसकी छाती पर टपक रहा था। हम दोनों एक लय में थे, जैसे हम सालों से एक दूसरे को जानते हों। वो चुदवाते हुए कराह रही थी, उह्ह्ह्ह…आ ह… मैं आ रही हूँ… उसकी चीख तेज़ हो गई और उसकी पूरी चुत सिकुड़ गई, मुझे लगा वो झड गई है।

उसकी इस हालत ने मुझे भी सीमा पर पहुंचा दिया। मैंने उसको पूछा, आह.... कशिश मेरा भी होनेवाला है, कहाँ निकालु?

वो बोली, रुकना मत, अंदर ही निकाल दो..


मैंने ज़ोर से दहाड़ मारी और अपना पूरा वीर्य उसकी योनि में उड़ेल दिया। उसकी चुत सिकुड़ कर मेरे लंड को पूरी तरह निगल चुकी थी, मुझे उसकी चूत की कसावट के साथ कंपन महसूस हो रही थी, आआअह्ह्ह्हह… उसकी एक लंबी कराह के साथ हम दोनों शांत हो गए।

मैं उसके ऊपर ही गिर पड़ा, हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रहे थे। ये पहली बार था कि हमने एक दूसरे को इतने करीब से ही नहीं अंदर तक जाना था।

पहली बार की चुदाई के बाद हम कुछ देर तक बिस्तर पर ही पड़े रहे, बिना कुछ बोले। मेरा हाथ उसके बालों को सहला रहा था और कशिश मेरी छाती पर अपनी उंगलियां फेर के बालों से खेल रही थी।


कैसा लगा? मैंने पूछा।

वो मेरी छाती में मुंह छुपाकर चुप्पी तोड़ी, ये सब एकस्ट्रा मैरिटल सेक्स मेरे लिए बहुत नया है, मैंने आज तक ये सब नहीं किया था, लेकिन कसम से बहोत मज़ा आया, ये रोमांचक था।


उसके पूरे गोरे शरीर पर मेरे निशान थे, गले पर, छाती पर।

मैंने उसकी आँखों में देखा और पूछा कि इस बात पे और एक एक ड्रिंक हो जाए?

उसने अपनी आँखें बंद करके हा में सर हिलाया।

कैसा लगा? मैंने पूछा।

वो मेरी छाती में मुंह छुपाकर चुप्पी तोड़ी, ये सब एकस्ट्रा मैरिटल सेक्स मेरे लिए बहुत नया है, मैंने आज तक ये सब नहीं किया था, लेकिन कसम से बहोत मज़ा आया, ये रोमांचक था।


उसके पूरे गोरे शरीर पर मेरे निशान थे, गले पर, छाती पर।

मैंने उसकी आँखों में देखा और पूछा कि इस बात पे और एक एक ड्रिंक हो जाए?

उसने अपनी आँखें बंद करके हा में सर हिलाया।


मैंने दो पैग बनाये, उस वक्त मुझे एक तरकीब सूझी, मैंने उसके बूब्स पर थोड़ी व्हिस्की गिरा के चाटने लगा,

मैंने इशारा करते हुए कहा कि तुम भी ऐसा करो, वो मुस्कुराते हुए तैयार हुई, मैने अपने पेट से धीरे धीरे व्हिस्की गिराई और अपने लंड से पीने को बोला। वो पैग खत्म होने तक ऐसा करने लगी।

मेरा पैग खत्म होने के बाद वो बोली, अब मेरी बारी...

मैं उसकी चूत पे मुँह लगा के तैयार हो गया, वो व्हिस्की गिराती और मैं उसकी चूत से पी रहा था, उसके बाद उसने अपने बूब्स पे व्हिस्की गिराई और मैं उसे भी चाट चाट के पी गया।

मेरी नज़र बार-बार उसकी जाँघे और उभरी हुई चुत पर जा रही थीं, जो अब भी गीली थी। मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। उसने मेरी ओर देखा और एक शरारती मुस्कान के साथ बोली, फ़िर से?

आज तो मैं तुम्हें सुबह तक छोड़नेवाला नहीं, बस सिर्फ़ चोदनेवाला हूँ। मैंने जवाब देते हुए कहा।

मैं पीठ के बल लेट के उसको मैंने अपने तने हुए लंड पर बिठा लिया, इस बार मैं चाहता था कि वो मेरे ऊपर रहे। मेरा खड़ा हुआ लौड़ा उसकी चूत के ठीक नीचे था। मैंने अपना लंड पकड़ के फिर से उसकी चुत में प्रवेश कराया। इस बार वो खुद ही नीचे बैठती गई, हर इंच को महसूस कर रही थी।

आआह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… करते हुए वो धीरे धीरे कराह रही थी। वो खुद अपनी मर्ज़ी से हिल रही थी। उसने अपने हाथ मेरी छाती पर रखे हुए थे, अपने हाथ से मेरे ऊपर वज़न डाल रही थी और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे और आगे पीछे लहरा रही थी।

उह्ह्ह्ह… हय,,, हार्दिक कैसा लग रहा है..? लहरों की तरह हिलते हुए उसने मुझे पूछा।


मैंने कहा, ऐसा लग रहा है, जैसे तुम झील का पानी हो और मैं पवन हूँ, आपस में दोनों के मिलन से जैसे पानी में लहरे ही लहरे उठती है, ठीक वैसे ही हमारे इस मिलन से तुम झील के पानी जैसी इस वक़्त मेरे ऊपर लहरा रही हो और अपना पानी छलका रही हो।


और मेरा हार्ड डिक क्या फील कर रहा है…हँ..?

आह... हार्ड डिक तो बस आपके समंदर में गोते लगाकर आपकी गहराईयों को नाप रहा है।


आज तो मैं आपके गोताखोर हार्ड डिक को सॉफ्ट ना कर दूँ तो कहना, उसने आँखें नचाते हुए कहा।

अच्छा!!! ऐसा??? तो हम आपकी चूत के चिंथरे ना उड़ा दे, तो कहना...


ऐसी बातचीत से लग रहा था, कि हमारे बीच एक दूसरे को हराने की होड़ लगी है। ऐसे वार्तालाप से वो उत्तेजित होकर अपनी स्पीड बढ़ाने लगी। उसकी जाँघों की मांसपेशियां मेरी कमर पे कस रही थीं। मैं भी हार मानने वाला नहीं था, मैंने भी उसकी कमर पकड़ कर और ज़ोर से उसको नीचे-ऊपर करने लगा। वो हल्की आवाज़ में चिल्ला रही थी, चोदो मुझे… और ज़ोर से चोदो... मैंने अपने कूल्हे उठाकर उसे जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। बिस्तर की चरमराहट, हमारे शरीरों की टकराहट, और हमारी कराहों ने पूरे कमरे को भर दिया।


उसके जिस्म से उसके पसीने की मादक खुश्बू के साथ उसके परफ्यूम की भी मीठी खुश्बू आ रही थी। इस तरह उसने काऊ गर्ल पोजीशन में मेरा लौड़ा अपने अंदर लिया। उसकी चूत एक बार की चूदाई में ही मेरे लिए एक पहचानी सी गुफ़ा लग रही थी, लेकिन फिर भी उतनी ही वो रोमांचक जगह लग रही थी।

जब उसकी आह... आह... के कराहने की आवाज़ और सीत्कारियाँ बढ़ने लगी, तब मुझे लगा, वो फिर से झड़ने वाली है। तब मैंने उसको घुमाके बिस्तर पे एकदम से पीठ के बल पटका और मैं उसके ऊपर आ गया, और उसकी चूत के पानी से चिप चिपा मेरा लंड वापस उसकी चूत में डाल दिया, उसकी टांगे मैंने अपने कंधों पर रखी, मैंने अपने दोनों हाथ की हथेलियां उनके दोनों हाथ की हथेलियों में उलझा दिए और ज़ोर से दबा के अपने हाथों का वज़न उसकी हथेलियों पर डाल दिया, और तेज़ी से उसकी चूत में लंड पेलने लगा। उसकी आह आह की मधुर आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी, थोड़ी ही देर में हम दोनों ने एक साथ लंबी आह भरी दहाड़ के साथ शांत हो गये, मैं थक के उसके ऊपर ही निढाल हो गया। मैंने अपने होंठ उसके गाल पे रख दिए। एक संतुष्टि के साथ वो मेरे कान में फुसफुसाई i love you... हार्दिक,,, यार... पहली बार ऐसा मज़ा आया...

मैंने कहा, i love you... as a friend कशिश...., मज़े लेती रहो।

वो मेरी ऐसी बात सुनकर हँस पड़ी।


10- 15 मिनिट तक हम ऐसे ही पड़े रहे, उसके बाद उसने मेरे कंधे थपथपाते हुए पूछा, हार्दिक, पेंटी पहन लूँ कि और एक राउंड करना है?

कशिश में सेक्स की भूख थी, एक अधूरी प्यास की तड़प थी, जो शायद आज हंमेशा के लिए पूरा करना चाहती थी। वैसे मैं भी तो इतनी खूबसूरत जल बिन मछली को प्यासी नहीं रखना चाहता था।


मैंने तो कहा था कशिश, कि आज पूरी रात तुम्हें छोड़नेवाला नहीं हु, सिर्फ़ और सिर्फ़ मैं तुम्हें चोदनेवला हूँ, उस वक़्त वो मेरे मुरझाए हुए ढीले लंड को अपने हाथ में पकड़ के बोली, देखा..!! मैंने तुम्हारे इस फनफनाते हुए साँप को चूहा बना दिया है, अब क्या ही मुझे चोदोगे? तुम्हारे बस की बात नहीं।

तुम्हारे गोरे हाथों ने इस चूहे को फ़िर से छेड़ दिया, अब फ़नफनाने को देर नहीं लगेगी, मैंने उसके चैलेंज को जवाब देते हुए कहा।

तो अब??

अब बाथरूम सेक्स करें!!!? चलो साथ में नहाते है।

वो तैयार हो गई, ठंड होने की वजह से मैंने बाथ टब में थोड़ा गरम पानी भरा।


कहानी जारी रहेगी।


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