चूत चुदवा कर नौकरी बचाई - Antarvasna
- Sexy Shipra
- Jun 21
- 16 min read
दोस्तो, मैं शिप्रा हूं और मैं 28 साल की सेक्सी औरत हूं. मेरा फिगर 34-30-36 का है. मेरी हाइट 5 फिट 8 इंच है. मेरी सेक्सी फिगर के कारण मैं काफी कामुक लगती हूं.
मेरा रंग एकदम से गोरा है और मेरे गोरे बदन को देख कर हर कोई मेरा दीवाना सा हो जाता है.मैं एक सरकारी स्कूल में टीचर की जॉब करती हूं. यह कहानी तब की है जब मेरी नयी नयी शादी हुई थी. हां ये अलग बात है कि मैं शादी से पहले ही कई मर्दों से चुद चुकी थी. इसलिए मुझे शादी से पहले ही लंड-चूत और सेक्स के बारे में पूर्ण ज्ञान हो गया था.
मेरे पति नितिन की सेक्स में ज्यादा रूचि नहीं है और वे मुझे ज्यादा अच्छी तरह से चुदाई नहीं कर पाते हैं इसलिए मेरी चुदाई कई कई हफ्तों के बाद होती है मेरी चूत को हर रोज लंड चाहिए होता है.स्कूल कि जॉब तो मेने सिर्फ चुदने के लिए कि थी, मेरा पति नितिन अच्चा खासा कमा लेता है पर वो मुझे सही से चोदता नही है.
स्कूल के प्रिंसीपल एक 6 फीट लम्बे और तगड़े बदन वाले हट्टे कट्टे मर्द थे.उनकी उम्र लगभग 50 साल थी,और वो काफी ठरकी बंदा था,ऐसा मुझे मेरी एक साथी टीचेर ने बताया था.
धीरे धीरे मेने अपनी अदाओं से प्रिसीपल को फंसा लिया। इकदिन जब मेरा पति नितिन बाहर टूर पे ह्दिया था तो मेने उसे अपने घर बुला लिया उस दीन मैंने एक पीले रंग की कुर्ती और उजले रंग की लेगिंग पहन रखी थी. मेरे कपड़ों की फिटिंग काफी टाइट थी जिसमें से मेरे शरीर का हर एक अंग उभर कर आ रहा था.अब आप सोच ही सकते हैं कि एक गोरी चिट्टी औरत जिसका फिगर भी इतना कमाल हो और जो देखने में भी इतनी सुंदर हो, उसके लिये एक मर्द की नियत भला कैसे न फिसल जाती.
हम लोग हॉल में सोफे पर बेथ्वोकत बातें करने लगे. बोले"शिप्रा तुम बहुत सुन्दर और सैक्सी लग रही हो,मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ,"मैरे अंदर भी वासना भरी हुई थी क्योकि मेरा पति नितिन मुझे सही से चुदाई नही कर पता था ,फिर भी मैंने कहा- सर अगर किसी को पता चल गया तो?वो बोले- उसकी चिंता आप क्यों करती हैं, मैं विश्वास दिलाता हूं कि किसी को हमारे बीच की बात का पता नहीं चलेगा.मैं उठ गयी और हाथ बांध कर खड़ी हो गयी. वो मेरे पास आये और मुझे घूरने लगे.मुझे सिर से पैर तक घूरते हुए उसने कहा- वाह! क्या चीज हो यार तुम शिप्रा . जिस दिन तुमको मैंने पहली बार स्कूल में देखा था उसी दिन से तुम मेरी नजर में चढ़ गयी थी.उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और प्यार से सहलाने लगे. उस दिन मैं एक सूट सलवार पहन कर गयी हुई थी.वो बोले- चल अपना पजामा नीचे कर.उस दिन मैंने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. मैं अपनी नजरें झुकाये हुए पत्थर बन कर खड़ी हुई थी.वो बोले- अरे यार … तुम तो ऐसे नाटक कर रही हो जैसे आज तक तुमने अभी तक ऐसा कुछ किया ही नहीं, तुम्हारे पति के साथ भी तो तुम ये सब कर ही चुकी हो, तो फिर मेरे सामने एक बार कर लोगी तो क्या फर्क हो जायेगा, चलो इतना मत सोचो, जल्दी से अपनी पजामी को खोलो मेरी जान।मैंने अपनी पजामी को खोलना शुरू कर दिया.वो ललचाई जुबान से बोले- हां शाबाश खोलो खोलो. घबराओ नहीं. मैं तुम्हें कुछ नहीं करूंगा. बस एक बार तुम्हें बिना कपड़ों के देख लूं बस. तुम बिल्कुल चिंता न करो.मैंने पजामा खोल दिया और मेरी चूत नीचे से नंगी हो गयी. सर ने मुझे पीछे सोफे पर धक्का दे दिया और मेरी टांगें फैल कर मेरी चूत सर को सामने साफ दिखाई देने लगी.मेरी बिना बालों वाली चिकनी चूत और मेरी गोरी जांघें देख कर सर ने सिसकारते हुए कहा- आह्ह … क्या चूत है यार।मेरे पास कोई चारा नहीं था. मेरी इज्जत जो मेरी चूत के साथ ही नंगी हो गयी थी अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी क्योंकि मेरी चूत को तो उस ठरकी प्रिंसीपल ने देख ही लिया था और अब मैं चुदने वाली थी. .इतने में ही प्रिंसिपल नीचे मेरी टांगों के पास आकर बैठ गया. घुटनों पर बैठ कर वो मेरी दोनों टांगों को चौड़ी करके मेरी चूत को ध्यान से देखने लगा. उसने मेरी चूत पर उंगली से सहला कर देखा. मुझे भी मजा सा आया.उसके बाद उन्होंने मेरी चूत के दाने पर उंगली से घिसना शुरू किया. . सर की उंगली से चूत को घिसवाने में मुझे मजा सा आने लगा. उन्होंने मेरी चूत के छेद में उंगली फंसाने की कोशिश की तो मैंने उनके हाथ को पकड़ लिया.सर ने मेरी ओर गुस्से देखा और मुझे आंखें दिखाने लगे. मैंने उनके हाथ को छोड़ दिया. उन्होंने मेरे दोनों हाथों को पीछे ले जाकर अपने हाथ से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से फिर मेरी चूत को छेड़ना शुरू कर दिया.कुछ देर तक वो मेरी चूत की फांकों को छेड़ते रहे. उसके बाद उन्होंने मेरी चूत में उंगली दे दी और उसे अंदर बाहर करने लगे. मेरी चूत को मजा आने लगा. मैं अब चूत में उंगली का मजा ले रही थी.उसके बाद सर ने मेरी चूत पर मुंह रख दिया और मेरी चूत को चूसने लगे. कभी मेरी चूत को होंठों से चूमने लगे और कभी जीभ अंदर देकर उसको चूसने चाटने लगते. मेरे मुंह से भी अब सिसकारियां निकल रही थीं. आह्ह … उफ्फ करते हुए मैं प्रिंसीपल से अपनी चूत चटवाने लगी.मेरी सिसकारियां सुन कर प्रिंसीपल सर को और ज्यादा जोश आ गया और वो मेरी चूत के बालों को नोचते हुए मेरी चूत के छेद में अपनी जीभ से लपलपाने लगे. मैं एकदम से चिहुंक उठी. सर की इस हरकत ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया.वो जोर जोर से मेरी चूत को चूसने लगे. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने कहा- आह्ह सर .. ये आप क्या कर रहे हैं.मगर वो मेरी बात को नहीं सुन रहे थे. बस लगातार वो मेरी चूत को चूसते ही जा रहे थे. मेरी हालत खराब हो रही थी.उत्तेजना में आकर मैंने उनके सिर को अपनी चूत पर दबाना शुरू कर दिया. मैं अपनी चूत को उनके मुंह की ओर धकेलने लगी और वो अभी भी उतनी ही तेजी से मेरी चूत में जीभ से चूसते रहे.उनको पता लग गया था कि मैं बहुत ज्यादा गर्म हो गयी हूं और जल्दी ही झड़ने वाली हूं. मैं सच में काफी गर्म हो गयी थी और ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायेगी.मैं सिसकारियां लेते हुए सर के बालों को सहलाते हुए उनका मुंह अपनी चूत में दबाती रही. मेरे मुंह से जोर जोर की कामुक आवाजें निकलने लगीं- आह्ह … मर गयी … ओह्ह सर … आह्ह … मैं तो गयी.
वो बोले- अभी नहीं साली रंडी, अभी तो मुझे तेरी चूत में लंड भी डालना है.इतना कह कर वो उठ गये. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैं सर के सामने ही अपनी चूत में उंगली करने लगी. मैंने तेजी से उंगली चलाते हुए अपनी चूत को रगड़ डाला और मेरी चूत से पानी निकल गया.मैं थोड़ी शांत हुई और हांफने लगी.सर मेरे पास आकर मेरे होंठों पर अंगूठे से फिराते हुए बोले- वाह रे रांड, तू तो बहुत ही चुदक्कड़ चीज है. इतना गजब माल मेरे स्कूल में इतने दिनों से घूम रहा था. हम दोनों के होठों का मिलन हो गया और हम बेतहाशा चुम्बन करने लगे।
मैंने उसे देखते हुए कहा- अपनी पैंट उतारो अब! मैं तुम्हारा लंड देखना चाहती हूँ।उसने कहा- मेरा लंड भी अब बाहर आने के लिए तड़प रहा है।फिर उन्होंने अपना पैंट उतार दिया और उसका लंड एक झटके के साथ उछल पड़ा।उसका लंड करीब साढ़े 9 इंच का था।उसका लंड मेरे सामने आते ही मैंने अपने हाथ में पकड़ लिया।मैंने कहा-सर आपका लंड तो काफी बड़ा है।फिर मैंने अपना मुँह उसके लंड के पास ले गई और मैंने कहा-सर मैं आपका लंड चूसना चाहतीं हूँ ।ये कहते हुए मैंने अपने होठों को उसके लंड के टोपे पर रख दिया। पहले मैंने टोपे को चूमा और फिर धीरे-धीरे चूसते हुए लंड को मुँह में अंदर लेती गई।मुँह में लंड जाते ही मैंने चूसना शुरु कर दिया।सर ने मेरा सिर पकड़ लिया और लंड पर दबाने लगा।
उसने कहा- आहह … शिप्रा … तुम्हारे नर्म होंठ मेरे लंड को खूब मज़ा दे रहे हैं।मुझे भी उनका लंड चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था। उनके लंड की खुशबू और उसका स्वाद बहुत बढ़िया था। मुँह मे लेते-लेते उनका पूरा लंड ही मेरे मुँह में चला गया और मैं मज़े से उनके लंड को अपने मुँह के लार से नहलाने लगी।लंड चुसवाते हुए वो तो मानो पागल ही हो गये,उनके मुँह से आहह … शिप्रा … ओहह … चूसो … और ज़ोर से बेबी … आहह … जैसे शब्द निकल रहे थे।इन शब्दों से मैं और भी उत्तेजित हुई जा रही थी।10-15 मिनट तक उसका लंड चूसने के बाद उन्होंने कहा- अहह शिप्रा … शायद मैं अब छूटने वाला हूँ।मैंने लंड मुँह से निकालकर कहा- मेरे मुँह में पिचकारी मारना। मैं आपके वीर्य का एक-एक कतरा पीना चाहती हूँ।
ये कहकर मैंने लंड को हाथ में पकड़कर बाहर से उस पर जीभ फिराने लगी।इससे वो और ज्यादा मदहोश हो गये।एकाएक उनका लंड झटके मारने लगा। मैंने दोबारा उनका लंड मुँह में भर लिया।“ओहह … शिप्रा … मैं छूट रहा हूँ … आहह … ये लो!” ये कहते हुए वो अपने वीर्य की धार छोड़ने लगे।
उनके वीर्य की हर एक बूँद मेरे जीभ पर गिर रही थी।कुछ ही देर में उनके लंड ने अपना सारा माल मेरे मुँह में डाल दिया।
मैंने उनके वीर्य को पीकर कहा- मम्मं … इतना स्वादिष्ट मैंने आज तक नहीं चाटा.नितिन तो ये सब नही करता है, मज़ा आ गया।उन्होंने कहा-शिप्रा … अभी तो खेल शुरु हुआ है,अब तुझे चोदने की तमन्ना है
मैंने कहा- हम्म … अच्छा विचार है।मै सोफे पर लेट गई और मैंने अपनी टाँगें थोड़ी ज्यादा फैला दी जिससे मेरी पूरी चूत उसे दिख गई।मेरी चूत दिखते ही उसके नज़रें उस पर टिक गई।मैंने पूछा- मैं कैसी लग रही हूँ?
सर- तुम तो लाज़वाब दिख रही हो।उन्होंने एक हाथ मेरी कमर पर रखा, दूसरा हाथ मेरी चूची पर और मुझे किस करने लगे।मैं भी उनका पूरा साथ देने लगी।वो मेरी चूची सहलाने लगा और उसका दूसरा हाथ अब मेरी गांड पर चलने लगा था।
बहुत देर तक हमारी चूम्मा-चाटी चली और उसके बाद हम दोनों एक-दूसरे के जिस्म के साथ खेलने लगे। वो मुझसे चिपक गये और अपने उत्तेजित लंड को मेरी चूत पर रगड़ने लगे।उन्होंने कहा- मैं कई सालों से यहां हूँ लेकिन तुमसे ज्यादा सेक्सी औरत नहीं देखी।वो अपना लंड मेरी चूत में रगड़े जा रहा था। इससे मैं बहुत तड़प रही थी।मैंने उनसे कहा- बातें करना बंद करो और चूत में लंड डालकर चोदो मुझे। तड़पा क्यों रहे हो?फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के छेद पर टिकाया और पहले ही झटके में लंड का टोपा अंदर घुसा दिया।
मेरे मुँह से एक लंबी ‘आहहह्’ निकल गई। धीरे-धीरे उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया और पीछे से मेरी चूत बजाने लगे।उन्होंने मेरे चूतड़ों को पकड़कर पागलों की तरह मुझे चोदना शुरु कर दिया।मेरी चूत चोदते हुए बोले-शिप्रा अब तक मैंने इससे बढ़िया चूत नहीं चोदी।फिर उन्होंने मुझे सीधा खड़ा किया, मेरी चूचियाँ पकड़ी और फिर मैंने अपन मुँह घुमाया तो वो मुझे किस करने लगे।किस करने के बाद उन्होंने मुझे वापस झुका दिया और फिर से मेरी चूत को पीछे से चोदने लगे।मुझे उनसे अपनी चूत चुदवाते हुए मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।मैं कहने लगी- हां … आहहह … ऐसे ही … ओहह … चोदो … ज़ोर से … चोदो मुझे!वो बोले आहह … शिप्रा पीछे से चूत चोदने में अलग ही मज़ा आता है। मैं टेबल झुक कर खड़ी थी और सर पूरे ज़ोर से मेरी चूत चोद रहा थे।मैं सिसकारियाँ लेते हुए बोली- ओहहह सर … चोदो मुझे … और ज़ोर से … आहह … फाड़ दो आज मेरी चूत!उन्होंने मेरे चूतड़ पर एक चपाट लगाया और कहा- अगली बार मैं तुम्हारी गांड मारुंगा।कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने कहा- मैं आज तुम्हें हर तरीके से चोदना चाहता हूँ। घूम जाओ शिप्रा !
मैंने कहा- हां सर … अब मैं आपके ऊपर आ जाती हूँ, तब मुझे चोदना।मैं घुम गई तो उनहोंने मुझे चूतड़ों पर से पकड़कर मुझे गोद में उठा लिया और फिर लंड डालकर चोदने लगे।
आहहह … क्या मज़ा आ रहा था!वो मुझे अपनी गोद में ऊपर-नीचे कर मेरी चूत में लंड डाल रहा थे। मेरी चूचियाँ उनके सीने से रगड़ खा रही थी।कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद उन्होंने मुझे नीचे उतारा और खड़े-खड़े ही मेरी चूत में लंड डाल दिया।
उत्साह एक हाथ से मेरी एक टांग उठा लिया जिससे उनका पूरा लंड मेरी चूत में जाने लगा।ऐसे चूत चुदाई करवाते हुए मज़ा भी बहुत आ रहा था।मैंने तब उससे कहा- ओहह सर आहह ऐसे ही चोदते रहो। आहहह … मुझे आराम के लिए ऐसी ही चुदाई की जरूरत थी।तब उसने 15-20 मिनट से भी ज्यादा खड़े रहकर चुदाई की।मैंने कहा"सर मेरे पाँव दुखने लगे हैं"।तो उउन्होंने मुझे कालीन पर लेटा दिया और फिर खुद मेरे ऊपर आ गये।उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और फिर उनका लंड मेरी चूत के होठों को चीरता हुआ अंदर घुस गया।वो मेरे ऊपर थे उसने मेरी दोनो चूची पकड़ ली और दबाने लगे।नीचे मेरी चूत और उनके लंड के बीच घमासान जारी था।
वो कहने लगे- काश, मैं तुम्हारी कसी हुई चूत को रोज़ चोद पाता!मैंने कहा-सर आहह आऊ मै आपकी रखैल हूँ आप चाहो तो मुझे अपने घर भी बुला सकते हो।काफी देर चोदने के बाद उन्होंने कहा- ओहह … लगता है मैं फिर छूटने वाला हूँ।
मैंने फौरन कहा- अपने वीर्य से मुझे भर दो। मेरी चूत की गहराई में पिचकारी मारो।कुछ ही देर में उनका वीर्य निकलने लगा।उन्होंने लंड पूरा अंदर तक घुसा दिया और पिचकारी मारने लगे।उनके वीर्य को अपनी चूत में लेकर मुझे बहुत राहत मिली और मेरी थकावट तो पूरी दूर हो गई।वे मेरे ऊपर गिर गये और कुछ देर तक लंड मेरी चूत में ही रखा।मैंने उनसे कहा- यह अद्भुत रहा सर मुझे खूब मज़ा आ गया ।फिर उसने मुझे किस किया और हम दोनों अलग हुए।वो बोले-शिप्रा मज़ा आ गया,आज से तू मेरी माल है.दिन भर हम लोग चुदाई का मजा लेते रहे.हमें फिर मौका मिला.निति८न घर पार्ट ही थे सो प्रिंसिपल मुझे उनके दोस्त के फ्लैट में ले गए .हम लोग एक फ्लैट पर पहुंचे. सर ने दरवाजा खोला. हम लोग अंदर चले गये. मुझे लगा कि सर के किसी दोस्त का फ्लैट था. वैसे भी मुझे चूत चुदवा कर यहां से जाना ही था इसलिए मैं ज्यादा नहीं सोच रही थी.हम लोग अंदर बेडरूम में गये और जाते ही सर मुझे पर टूट पड़े. हमदोनो जल्दी जल्दी नंगे होकर लिपट गए .सर ने मेरे बूब्स चूसने के बाद सर ने अपने कपड़े भी उतारे और पूरे नंगे होकर मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को पीने लगे.नीचे से सर ने मेरी चूत में उंगली दे दी और अंदर बाहर करते हुए मेरे होंठों को चूसते रहे. मैं एकदम से सिहर गयी और सर के नंगे बदन से लिपटने लगी.तभी वो अपने घुटने पर बैठ कर मेरे सामने लंड को हिलाने लगे. मैंने उनका लंड मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मैं मस्ती में सर का लंड चूस रही थी.फिर वो पीछे हुए और अपनी पैंट को टटोलने लगे. उन्होंने अपनी पैंट की जेब से रुमाल निकाला और बोले- इसको अपनी आंखों पर बांध लो मेरी जान, मैं तुम्हें पट्टी बांध कर चोदना चाहता हूं.मैंने रूमाल को आंखों पर बांध लिया. उसके बाद सर ने मेरे मुंह में फिर से लंड घुसा दिया. मैं एक बार फिर से उनके लंड को मस्त होकर चूसने लगी.दो मिनट तक चुसवाने के बाद उन्होंने लंड को निकाल दिया. इससे पहले कि मैं कुछ कहती मेरे मुंह में फिर से लंड आ घुसा. मगर अबकी बार लंड का स्वाद कुछ और था.मैंने कहा- ये किसका लंड है सर?वो बोले- मेरा ही है यार, बस कपड़े पोंछ कर फिर से डाल दिया है.मैं फिर से लंड को चूसने लगी. थोड़ी देर लंड चुसाई के बाद उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया. बेड पर लिटा कर उन्होंने मेरी चूत में थूक दिया. मेरी चूत पर मुझे थूक की ठंडक महसूस हो रही थी.उसके बाद उन्होंने मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया. फिर एकदम से अचानक ही उन्होंने मेरी चूत में लंड को घुसा दिया.मेरी जान निकल गयी. सर का लंड था भी बहुत बड़ा इसलिए लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयीआआऊऊईई आहह आऊ धीरे-धीरे आआऊऊईई डालो आआऊऊईई धीरे-धीरे आआऊऊईई डालो आआऊऊईई। मैंने सर को धकेलना चाहा लेकिन उनका शरीर बहुत भारी था.
उन्होंने पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मेरी चूत जैसे फैल कर फटने को हो गयी.इतने में ही उन्होंने मेरी चूत में धक्के लगाना शुरू कर दिया. मैंने उनको कस कर पकड़ लिया और लंड का दर्द चूत में बर्दाश्त करने लगी.वो तेजी से मेरी चूत को चोद रहे थे. फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बना लिया. पीछे से मेरी चूत में लंड को घुसा दिया और चोदने लगे.अब मुझे भी मजा आने लगा और मैं मस्ती में आकर अपनी कमर हिलाकर उनका साथ देने लगी और बोली वाह मज़ा आ गया क्या मस्त लंड है,और तेज रगङो फाङ दो मेरी चूद को आहहह औहहह इससस मज़ाहह आहह रहाहहह है सर जी। सर पीछे से मेरी चूत में लंड घुसा रहे थे और साथ में मेरी चूचियों को भी जोर जोर से दबा रहे थे.करीब चालीस मिनट तक ऐसी ही जोरदार चुदाई चली.मैं दस मिनट में ही झड़ गयी थी.अब सर का भी होने वाला था. वो पूरी स्पीड में धक्के लगा रहे थे.कुछ देर बाद सर की स्पीड कम हो गयी और मेरी चूत में गर्म गर्म सा महसूस हुआ. सर ने अपना माल मेरी चूत में गिरा दिया था.मैं भी थक कर चूर हो गयी थी और ऐसे औंधे मुंह पड़ी रही. सर भी मेरे ऊपर ही ढेर हो गये थे. कुछ देर हम दोनों हाँफते रहे. मैंने हिल डुल कर अपनी आंखों पर से पट्टी हटाना शुरू किया तो सर ने मुझे रोक लिया.वो बोले- रुक जा शिप्रा रानी, अभी तो तेरी गांड की चुदाई भी करनी है.मैंने कहा- सर लेकिन मैंने पीछे कभी नहीं करवाया है.वो बोले- तब तो और अच्छी बात है. तेरी गांड की सील भी मैं ही तोड़ूंगा.इतना कह कर उन्होंने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर लंड लगा कर फिराने लगे.मुझे भी ये अच्छा लग रहा था. सर के लंड का सुपारा मेरे होंठों को सहला रहा था.सर बोले- चूस ले इसको मेरी जान.मैंने सर का लंड अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.कुछ ही देर में सर का लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया.पूरा लंड टाइट होने के बाद एक बार फिर से उन्होंने मुझे कुतिया बना दिया. कुतिया बना कर उन्होंने मेरी गांड को अपनी उंगली सहलाना शुरू कर दिया.कुछ देर उंगली से सहलाने के बाद वो बोले- रुक, मैं जरा तेल की शीशी लेकर आता हूं. तेरी सील पैक गांड वैसे नहीं खुलेगी.वो नीचे उतर गये. मैं इंतजार कर रही थी. मुझे कुछ सुनाई भी नहीं दे रहा था.मैंने सर को आवाज दी- सर? कहां हो आप?पीछे से आवाज आई- यहीं हूं, रुक आ रहा हूं तेल लेकर।फिर वो बेड पर आ गये. तभी मेरी गांड पर तेल गिरने लगा. इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती मेरी गांड पर लंड का सुपारा सेट हो चुका था. मगर इस बार ये सुपारा कुछ मोटा सा लग रहा था. ऐसा लग रहा था कि सर के लंड का सुपारा फूल गया है.तभी मेरी गांड में एक जोर का धक्का लगा और मेरी चीख निकल गयी आआऊऊईई मर गई आइइइ आआऊऊईई आहहह औहहह मर मममीइइइईई आआऊऊईई. ये लंड सर का नहीं था. इतना मोटा लंड सर का नहीं हो सकता है. मगर मुझे अभी बेहोशी होने लगी थी. मैं खुद को संभाल नहीं पा रही थी.पकड़ से छूटने के लिए मैं आगे की ओर खिसकी ही थी कि मुझे किसी ने आगे से रोक लिया.ये क्या? दो-दो आदमी?मैंने बोला ही था कि इतने में ही मेरी गांड में एक दूसरा प्रहार हुआ.मैं चीखी आआऊऊईई आहहह औहहह मर गई आइइइ आआऊऊईई आहहह औहहह मर गई आइइइ आआऊऊईई ऐसा लगा कि मैं आज नहीं बचूंगी.मैं बेसुध सी होने लगी कि तभी मेरे कानों में आवाज आई- अरे प्रिंसीपल साहब, ये तो बहुत ही मस्त माल है. इसकी गांड तो एकदम से कसी हुई है. मैं तो सोच रहा हूं कि इसका प्रोमोशन करवा कर इसको अपने ही ऑफिस में रख लूं.ऐसा कहते हुए वो आदमी मेरी गांड में धक्के लगाने लगा था. इतने में ही मेरी आँख की पट्टी खोल दी गयी. सामने प्रिंसीपल ही था लेकिन पीछे से गांड में किसी और का लंड घुसा हुआ था.सर उठ कर सामने सोफे पर जा बैठे और मेरी ओर देख कर अपना लंड हिलाने लगे. मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक 60 साल के करीब का आदमी अपने 9 इंच लम्बे और 6 इंच मोटे लंड को मेरी गांड में ठोक रहा था.वो बोला- ऐसे क्या देख रही है साली रंडी? अगर तू मुझे खुश नहीं करेगी तो तेरी नौकरी गई.".इतना कह कर उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया. मैं दर्द से बिलबिला उठी आआऊऊईई आहहह औहहह मर गई आइइइ आआऊऊईई आहहह सर जी आहहह दर्द हो रहा है आहह आहहह निकाल लो न मर जाऊँगी आहहह. हां अगर सच कहूं तो उस वक्त मजा भी बहुत आया. गांड में लंड पूरा घुसा तो उसका मजा भी अलग ही था.सामने बैठे प्रिंसीपल से मैंने कहा- सर ये गलत बात है.वो बोले- कुछ गलत नहीं है रानी. तू एकदम से मस्त होकर चुदवा ले. यदि सही जगह काम करना है तो सर की सेवा भी करनी पड़ेगी.इतने में ही उस दूसरे आदमी ने मेरी गांड को बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया. मुझे कुतिया बना कर उन्होंने मुझे पूरे 45 मिनट तक चोदा. मैं अपनी चूत से दो बार पानी निकाल चुकी थी.बड़े अधिकारी ने भी अपना माल मेरी गांड में ही गिरा दिया और हम दोनों बेड पर ढेर हो गये.थोड़ी देर बाद वो अधिकारी उठे और सर के साथ सोफे पर बैठ गये।मैं पलंग पर नंगी पङी हुई थी।थोड़ी देर बाद वो दोनों उठे और मेरे बदन को सहलाने लगे और बोले वाह शिप्रा क्या बात है क्या चिकना बदन है क्या मम्मे है मज़ा आ गया"।वो मेरी चूचियों के साथ खेल रहे थे.उन दोनों का मन अभी भी नहीं भरा था. उसके बाद उन्होंने फिर से मुझे लंड चूसने के लिए कहा. मैं उठ कर बारी बारी से उन दोनों के लंड को चूसने लगी.अब बडा़ अधिकारी उठा और बगल में लेट गया. उसने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और नीचे से मेरी चूत में लंड को पेल दिया. वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरी चूत में नीचे से लंड के धक्के देने लगा. मेरी चूत में बहुत आनंद आने लगा. मैं अपनी चूचियों को मसलने लगी और उछल उछल कर चुदने लगी।मैं बोली"वाह मज़ा आ गया क्या लंड है".उसके दो मिनट के बाद ही प्रिंसीपल सर भी पीछे से आ गये,मै समझ गई की अब मेरी डबल चुदाई होने वाली है।मैने ब्लू फिल्म मे कई बार डबल चुदाई देखी थी और मुझे डबल चुदाई की काफी इच्छा भी होती थी पर कभी मौका नही मिला पर आज भगवान ने मेरी सुन ली।सर ने मुझे बड़े साहब की छाती पर झुका कर मेरी गांड में लंड को सटा दिया. बड़े साहब मेरे होंठों को चूसने लगे और दूसरे सर ने मेरी गांड में लंड को पेल दिया.अब मेरी चूत में नीचे से बड़े साहब का लंड जा रहा था और पीछे से मेरी गांड में प्रिंसीपल का लंड चोद रहा था.मेरे मुंह से निकल गया- हाय मर गयी रे आहह आऊ धीरे-धीरे आआऊऊईई डालो आआऊऊईई इससस अहहह औहहह आहहह औहहह इससस अहहह औहहह आहहह औहहह इससस अहहह औहहह आहहह .वो दोनों बड़ी ताल मेल के साथ मेरी चूत और गांड को एक साथ बजाने लगे. पहली बार मेरी ऐसी चुदाई हो रही थी जिसमें मैं एक साथ दो लंड का मजा ले रही थी. चुदाई में दर्द तो बहुत हो रहा था लेकिन मजा उससे भी ज्यादा आ रहा था.प्रिंसीपल जब गांड में लंड को अंदर करते तो अधिकारी साहब चूत से लंड को बाहर निकाल लेते. जब अधिकारी साहब चूत में लंड को अंदर करते तो प्रिंसीपल सर अपने लंड को बाहर कर लेते. इस तरह दोनों ही तालमेल से चोदने लगे.मैं तो आनंद की लहरों में गोता लगाने लगी थी. ऐसे ही चुदते हुए 40 मिनट से ज्यादा हो गये थे. जब दोनों छेद एक साथ दो-दो लंड से चुदते हैं तो चूत बहुत जल्दी पानी छोड़ देती है. उन 40 मिनट में मैं 5 बार झड़ गयी थी. मैं बिल्कुल शिथिल होती जा रही थी.ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ अपने आप ही हो रहा है. ऐसा मजा मुझे पहले कभी नहीं मिला था. अब उन दोनों ने मुझे घुटने के बल बैठने के लिए कहा. मेरे सामने आकर दोनों अपने लंड को हिलाने लगे. मैं जान गयी कि दोनों का पानी निकलने वाला है.थोड़ी ही देर के बाद प्रिंसीपल सर ने अपना पानी निकाल दिया जो मेरी चूचियों और मेरे मुंह पर आकर लगा. उसके कुछ पल बाद ही अधिकारी साहब ने मेरे मुंह में लंड दे दिया. वो मेरे मुंह को चूत समझ कर झड़ने लगे.अपना माल छोड़ते हुए वो सिसकारते हुए बोले- आह्ह… पी जा इसे मेरी रानी.मैं उनके लंड का माल अंदर ही अंदर साथ साथ पी गयी. तीनों के तीनों बेड पर पसर कर लेट गये. आधे घंटे के बाद मैं उठी और बाथरूम में गयी. मैंने खुद को साफ किया.मेरे पूरे बदन निशान पड़ गये थे. उन दोनों ने मुझे जानवरों की तरह चोद डाला था. रात को मेरी चुदाई 8-10 बार हुई.सुबह के समय अधिकारी ने एक बार अकेले में ही मेरी चुदाई की.फिर मुझे मेरे घर पर छोड़ दिया .मै उन दोनों की रखैल बन गई और जब नितिन बाहर जाता है मैं उन दोनों से मजे ले लेकर चुदती रहती हूं.

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