top of page

जेठ जी के मोटे लंड ने दी प्यासी चूत को ठंडक - Hindi Sex Kahani

मेरा नाम कविता है। मैं दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में रहती हूँ। उम्र 28 साल की है। मेरी शादी अजय से पाँच साल पहले हुई थी। घर में सब कुछ लग्जरी से भरा हुआ है। महँगे फर्नीचर, शानदार कारें, हर तरह की सुख-सुविधाएँ। लेकिन वो पैशन की कमी हमेशा मुझे खलती रहती है। जैसे कोई खालीपन जो मेरे दिल को चुभता रहता है।


अजय एक बड़ा बिजनेसमैन है। इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का काम करता है। हमेशा फ्लाइट्स में उड़ता रहता है। मीटिंग्स में डूबा रहता है। क्लाइंट्स को खुश करने में लगा रहता है। जब घर आता है तो थका-माँदा रहता है। फोन पर चिपका हुआ। रात को बिस्तर पर आता है तो बस एक रूटीन सा चलता है। दो मिनट का किस जो ठंडा और बेमन का लगता है। जैसे कोई भावना ही न हो। थोड़ा सा सहलाना जो बस ऊपरी तौर पर होता है। बिना किसी गहराई या जज्बे के। और पाँच मिनट में सब कुछ खत्म हो जाता है। जैसे कोई मशीन चला रहा हो। जिससे मेरी बॉडी की भूख कभी पूरी नहीं होती। मैं अकेलेपन में तड़पती रहती हूँ। रातों को करवटें बदलते हुए उस आग को दबाती हूँ जो मेरे अंदर सुलगती रहती है।


मैं उसे कहती हूँ कि अजय थोड़ा समय दो ना। थोड़ा प्यार से करो। कुछ रोमांस जोड़ो। लेकिन वो कहता है कि बेबी कल से पक्का। मगर वो कल कभी नहीं आता। मैं रातों में अकेली लेटी रहती हूँ। अपनी बॉडी की भूख को दबाती हूँ। कभी उँगलियाँ चलाती हूँ। लेकिन वो असली सुख कहाँ दे पाती हैं। बस एक खालीपन रह जाता है। जो मुझे हर रात चुभता रहता है। जैसे कोई घाव जो भरता ही नहीं।


फैमिली के प्रेशर से शादी की थी। सोचा था जिंदगी सेट हो जाएगी। लेकिन अब लगता है कि गलती हो गई। अजय अच्छे हैं। पैसे की कोई कमी नहीं है। घर में सब लग्जरी है। लेकिन प्यार का वो पैशन, वो आग, वो सब मिसिंग है जो एक औरत को चाहिए। मैं अंदर से सूखती जा रही थी। जैसे कोई रेगिस्तान में पानी की तलाश में भटक रही हो। हर साँस में वो प्यास बढ़ती जाती है जो कभी बुझती नहीं।


अब मेरे देवर राहुल की शादी थी। जगह थी राजस्थान का एक पुराना शाही महल होटल। वो जहाँ राजपूत राजा रहते थे। पूरा महल सफेद संगमरमर से बना हुआ। जो धूप में चमकता था। ऊँचे-ऊँचे मेहराब जो रात में लाइट्स से चमकते थे। जैसे कोई सपनों का महल हो। बीच में फव्वारे जो पानी की कल-कल करती आवाज के साथ रंग-बिरंगी रोशनी में नहाते थे। उस पानी की ठंडक और स्प्लैश की आवाज जो कानों को सुकून देती थी। चारों तरफ हरे-भरे गार्डन। जहाँ फूलों की महक हवा में घुली रहती थी। गुलाब की मीठी खुशबू जो नाक में घुसकर दिल को छू जाती थी। और दूर पहाड़ियाँ जो शाम को सूरज की किरणों से सुनहरी हो जाती थीं। वो सारा माहौल मुझे एक सपने जैसा लग रहा था। जहाँ हर खुशबू और रंग मुझे अपनी ओर खींच रहे थे। जैसे मेरी रूह को कोई नई जिंदगी मिल रही हो।


शादी तीन दिन की थी। मेहंदी, संगीत, बारात। सब कुछ ग्रैंड तरीके से आयोजित था। मैं सास-ससुर के साथ ट्रेन से आई थी। ट्रेन की खिड़की से बाहर का नजारा देखते हुए। हवा में वो राजस्थानी मिट्टी की खुशबू आती थी। जो मुझे अंदर तक छू जाती थी। जैसे कोई पुरानी याद ताजा हो रही हो। खेतों की हरियाली और दूर के गांवों की झलक। जो मुझे शहर की भागदौड़ से दूर ले जा रही थी।


अजय? वो दुबई में थे। फोन पर बोले कि कविता एक बड़ी डील है। क्लाइंट्स से मीटिंग। तुम एंजॉय करो। मैं दूसरे दिन आ जाऊँगा। लेकिन मैं जानती थी कि वो नहीं आएंगे। मैंने गुस्से में कहा कि अजय ये फैमिली फंक्शन है। तुम्हारी जिम्मेदारी है। लेकिन वो हँसकर बोले कि बेबी बिजनेस पहले। तुम जेठ जी के साथ हेल्प कर लेना। मैंने फोन काट दिया। दिल में एक टीस उठी। लेकिन फिर सोचा कि अच्छा ही है। कम से कम घर की उस बोरिंग रूटीन से तो ब्रेक मिला। यहाँ नई हवा, नई खुशबू, नई जिंदगी जैसा लग रहा था। वो ठंडी हवा मेरी स्किन पर लगकर मुझे एक अजीब सी सिहरन दे रही थी। जैसे मेरी बॉडी जाग रही हो लंबे समय बाद।


जेठ जी का नाम राजेश है। उम्र 35 साल। लंबे-चौड़े कद के। गेहुँआ रंग जो धूप में और चमकता था। जैसे कोई राजपूत योद्धा हो। मूंछें हल्की जो उनके चेहरे को एक राजपूताना ठसक देती थीं। चेहरे पर वो गंभीर मुस्कान जो आँखों की उदासी को छुपाने की कोशिश करती थी। लेकिन वो आँखें मुझे देखकर चमक उठती थीं। जैसे कोई छुपी हुई आग सुलग रही हो। उनकी नजरें मेरी आँखों में घुसकर मेरी रूह को छू जाती थीं।


उनकी पत्नी दो साल पहले एक कार एक्सीडेंट में गुजर गई थीं। कोई बच्चा नहीं था। वो फैमिली बिजनेस संभालते थे। एक्सपोर्ट का काम। अच्छा कमाते थे। लेकिन वो उदासी उनकी आँखों में हमेशा तैरती रहती थी। जैसे कोई अधूरा सपना जो उन्हें रातों में सताता हो। मैं महसूस कर रही थी कि वो उदासी मुझे भी छू रही है। जैसे हमारे दर्द एक-दूसरे से जुड़ रहे हों।


शादी की प्लानिंग वो खुद कर रहे थे। होटल बुकिंग, डेकोरेशन, मेन्यू सब कुछ। सास जी ने मुझे कहा कि बहू जेठ जी को थोड़ा हाथ बँटा दो। अकेले कितना करेंगे। मैं तैयार हो गई। क्योंकि मैं वैसे भी ऑर्गनाइज्ड हूँ। घर में पार्टियाँ प्लान करती हूँ। लिस्ट बनाती हूँ। मुझे मजा आता है ऐसे कामों में। ये मौका मुझे जेठ जी के करीब ला रहा था। बिना मुझे खुद पता चले। जैसे कोई अदृश्य धागा हमें बाँध रहा हो।


पहला दिन हम मेन हॉल में मिले। जेठ जी ने मुझे देखा। मैंने लाल साड़ी पहनी थी। जो मेरे कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी। साड़ी का पल्लू हल्का सा सरककर मेरी कमर की नरम त्वचा को छू रहा था। बाल खुले जो हवा में लहरा रहे थे। लिपस्टिक डार्क रेड जो मेरे होठों को और आकर्षक बना रही थी। जैसे वो होठ किसी को आमंत्रित कर रहे हों। वो मुस्कुराए और बोले कि कविता तुम आईं। अजय कहाँ। मैंने दुबई वाली कहानी बताई। वो बोले कि हम्म बिजनेस इंपॉर्टेंट है लेकिन फैमिली ज्यादा। चलो काम शुरू करते हैं।


हम साथ-साथ घूमे। फूलों की मालाएँ चेक कीं। गुलाब की पंखुड़ियों की महक जो नाक में घुस रही थी। और मेरे सिर को हल्का कर रही थी। जूही और चमेली की खुशबू जो हवा को मीठा बना रही थी। जैसे वो खुशबू मेरे अंदर तक घुसकर मेरी इंद्रियों को जगाती हो। स्टेज का सेटअप गोल्डन लाइट्स के साथ राजस्थानी थीम वाला। जेठ जी मेरी कमर पर हाथ रखकर डायरेक्शन देते कि यहाँ थोड़ा शिफ्ट करो कविता। उनका हाथ गर्म था। मजबूत उँगलियाँ जो मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी स्किन को छू रही थीं। जैसे वो स्पर्श मेरे पूरे शरीर में बिजली की तरंगें दौड़ा रहा हो। मेरे बदन में हल्की सी सिहरन दौड़ जाती थी। लेकिन मैंने सोचा कि फैमिली है।


शाम को डिनर राजस्थानी थाली। दाल-बाटी-चूरमा की खुशबू जो मुंह में पानी ला रही थी। घी की महक जो नाक में घुसकर भूख को और बढ़ा रही थी। जेठ जी मेरे बगल में बैठे। प्लेट में अतिरिक्त घी डालते हुए बोले कि कविता तुम्हारी हेल्प से सब परफेक्ट हो रहा। थैंक यू। मैं शर्मा गई और बोली कि जेठ जी क्या बात करते हो। मैं तो बस। लेकिन रात को रूम में लेटी सोचती रही कि उनकी आवाज कितनी गहरी है। जैसे कमांड करती हो। और उनका स्पर्श कितना अलग था। मेरी चूत में हल्की सी गीली खुजली होने लगी थी। जैसे कोई चिंगारी सुलग रही हो। मैं अपनी जांघें आपस में रगड़कर उस खुजली को बढ़ा रही थी बिना रुके। मेरी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने उँगलियाँ अपनी पैंटी के अंदर डालकर हल्के से क्लिट को सहलाया। लेकिन वो बस एक शुरुआत थी जो मुझे और तड़पाती थी।


दूसरा दिन मेहंदी की तैयारी से शुरू हुआ। दिन में आर्टिस्ट्स को इंस्ट्रक्शन दिए। रंगोली बनवाई। जिसके रंगों की चमक आँखों को भा रही थी। लाल, पीले, हरे रंग जो धूप में चमकते थे। जैसे कोई जीवंत चित्र हो। शाम को संगीत रिहर्सल गार्डन में। जहां फेयरी लाइट्स जल रही थीं। जैसे तारे जमीन पर उतर आए हों। उनकी रोशनी में सब कुछ जादुई लग रहा था। हल्की ठंडी हवा जो मेरी स्किन को छूकर सिहरन पैदा कर रही थी।


जेठ जी मुझे डांस स्टेप्स सिखाते राजस्थानी फोक, घूमर। उनका हाथ मेरी कमर पर। जो अब और ज्यादा देर तक रहता था। जैसे वो हाथ मेरी कमर की गर्मी को सोख रहे हों। पीठ पर उनकी उँगलियाँ जो हल्के से दबाती थीं। गर्मी थी। पसीना आ रहा था। जो मेरी साड़ी को गीला कर रहा था। क्लिवेज दिखने लगा। जहां से मेरी साँसों की उठान साफ नजर आ रही थी। मेरी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। पसीने की बूँदें मेरी गर्दन से सरककर क्लिवेज में गायब हो रही थीं।


एक बार मैं फिसली। वो मुझे पकड़कर सीधा किया। उनकी छाती से सटी मैं। उनकी साँस मेरे चेहरे पर लगी। गर्म और मर्दाना खुशबू वाली। जैसे वो खुशबू मुझे मदहोश कर रही हो। बोले कि आराम से कविता गिर जाओगी। मैंने कहा कि जेठ जी आपका सपोर्ट है ना। हमारी आँखें मिलीं। एक पल के लिए जो ज्यादा लंबा लग रहा था। मेरे निप्पल्स सख्त हो गए थे उनकी छाती से रगड़ खाकर। अंदर से सोच रही थी कि काश ये हाथ और नीचे फिसल जाएं। उनकी उँगलियाँ मेरी कमर से सरककर मेरी गांड की तरफ जातीं। और हल्के से दबातीं।


रिहर्सल के दौरान हमने और फोरप्ले जैसी हरकतें कीं। वो मेरी पीठ पर उँगलियाँ फिराते हुए धीरे-धीरे नीचे सरकाते। मेरी जांघों को हल्के से छूते। मैं उनकी आँखों में देखकर मुस्कुराती। वो स्पर्श जो मेरी बॉडी में आग लगा रहा था।


रात को रिहर्सल के बाद कॉफी पीते हुए बातें शुरू हुईं। वो बोले कि कविता मेरी जिंदगी खाली है। पत्नी चली गई। अब बस काम। अकेलापन मारता है रातों में। मैंने उनका हाथ अपने हाथ में लिया। जो गर्म और रफ था। जैसे वो रफनेस मेरी स्किन को गुदगुदाती हो। बोली कि जेठ जी आप मजबूत हैं। आप डिजर्व करते हो खुशी। नई शुरुआत करो।


वो मेरी आँखों में देखते बोले कि तुम्हारे जैसी कोई मिले तो शायद। क्योंकि तुम इतनी केयरिंग हो। इतनी खूबसूरत। मैंने नजरें झुका लीं। लेकिन अंदर से एक गुदगुदी सी हुई। क्योंकि अजय कभी ऐसे रोमांटिक नहीं बोलते। बस काम की बातें। मैं सोचती रही कि जेठ जी की उदासी मुझे क्यों इतना छू रही है। उनकी आँखों में वो भूख मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। जैसे मेरी प्यास को पहचान लिया हो उन्होंने।


वो हाथ पकड़ते हुए मेरी उँगलियों पर हल्के से सहलाने लगे। जो मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ा रहा था। हमारी उँगलियाँ आपस में फँस गईं। वो धीरे-धीरे मेरे हाथ की पीठ पर किस करते। उनकी गर्म साँस मेरी स्किन पर लगती। जो मुझे सिहरा देती। फिर वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर सहलाने लगे। मेरी गर्दन पर उँगलियाँ फिराईं। जो मुझे और गर्म कर रही थीं।


तीसरा दिन संगीत का मेन इवेंट था। मैंने पीला लेहंगा-चोली पहना। जो मेरी बॉडी को पूरी तरह फिट था। चोली टाइट और बैकलेस। जो मेरी पीठ की नरम स्किन को दिखा रही थी। लेहंगा फ्लेयर्ड जो घूमने पर फैलता था। चूड़ियाँ जो खनखनाती थीं। बिंदी जो मेरे माथे पर चमक रही थी। सब कुछ परफेक्ट।


रिहर्सल में मैं एक कजिन भाई के साथ डांस कर रही थी। हँसी-मजाक में। कमर हिलाते। उसके हाथ मेरी कमर पर। लेकिन जेठ जी दूर खड़े देखते रहे। उनका चेहरा सख्त हो गया। जैसे जलन की आग जल रही हो। प्रैक्टिस खत्म होने के बाद वो मुझे एक कोने में ले गए। जहां अंधेरा था। सिर्फ फेयरी लाइट्स की हल्की रोशनी पड़ रही थी। जो हमारे चेहरों को रहस्यमयी बना रही थी।


बोले कि कविता तुम किसी और के साथ इतना क्लोज क्यों। उसकी कमर पकड़कर। उनकी आवाज में गुस्सा था। लेकिन जलन साफ झलक रही थी। मैंने हँसकर कहा कि जेठ जी बस प्रैक्टिस थी। लेकिन वो नहीं माने। गुस्से में मेरी कमर पकड़कर दीवार से सटा दिया। उनका बदन मेरे बदन से सटा। उनकी गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। जैसे वो गर्मी मेरी बॉडी में घुस रही हो।


बोले कि तुम मेरी हो समझी। और झुककर मेरे होठों पर अपना होंठ रख दिया। पहला चुंबन गहरा और भूखा था। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुसकर मेरी जीभ से खेल रही थी। मैंने विरोध नहीं किया। बल्कि मैंने भी जवाब दिया। अपनी जीभ घुमाई। हाथ उनके बालों में फँसाए। जो घने और सॉफ्ट थे।


वो चूमते रहे गर्दन पर। जहां से मेरी खुशबू आ रही थी। कान पर हल्के से काटा। जो मुझे सिहरा गया। मैं फुसफुसाई कि जेठ जी आह कोई देख लेगा। लेकिन वो बोले कि चुप अब से तुम सिर्फ मेरी। हम अलग हुए। लेकिन मेरी बॉडी जल रही थी आग की तरह। होठ सूजे हुए। साँसें तेज। और अंदर एक तूफान सा उठा हुआ। मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। पैंटी में चिपचिपाहट महसूस हो रही थी। सोच रही थी कि ये जलन कितनी हॉट है। जैसे वो मुझे अपना बनाने को तड़प रहे हों। मैंने उनके होठों पर फिर से किस किया हल्के से। ताकि वो भूख और बढ़े।


हमने वहाँ और फोरप्ले किया। वो मेरे कंधों पर किस करते। मेरी पीठ पर उँगलियाँ फिराते। मेरी कमर को दबाते। मैं उनकी छाती पर हाथ रखकर उनकी दिल की धड़कन महसूस करती। जो तेज हो रही थी।


रात की पार्टी नीचे गार्डन में चल रही थी। संगीत की धुनें गूंज रही थीं। डांस का शोर। हँसी-ठिठोली की आवाजें। आतिशबाजी की चमक जो आकाश को रोशन कर रही थी। हमारा सूट लग्जरी था। दो बेडरूम वाला। बालकनी से गार्डन का नजारा दिखता था। सास-ससुर सो गए थे थककर। मैं और जेठ जी बालकनी में आ गए। जहां हवा ठंडी थी। लेकिन हमारे बीच की गर्मी उसे पिघला रही थी।


वो मेरे पीछे आए और पीठ से पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ मेरी कमर पर फिसल रही थीं। गर्दन पर किस करना शुरू किया। जो गीला और गर्म था। उनकी दाढ़ी मेरी स्किन को गुदगुदा रही थी। मैं मुड़ी और उन्हें गले लगा लिया। बोली कि जेठ जी ये गलत है लेकिन रोक नहीं पा रही। अजय दुबई में क्या कर रहे होंगे। शायद किसी होटल में क्लाइंट के साथ डिनर। लेकिन अब फर्क नहीं पड़ता।


मैंने उनकी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। उनकी छाती चौड़ी और मसल्ड थी। हल्के बाल जो मेरी उँगलियों से छूने पर सख्त लग रहे थे। वो मेरी चोली के हुक खोलने लगे धीरे-धीरे। ब्रा नीचे सरकाई। मेरी चूचियाँ बाहर आ गईं। 34सी साइज की। निप्पल सख्त और गुलाबी। वो उन्हें हाथों में लिया और दबाया हल्के से। बोले कि कितनी नरम हैं ये। जैसे रसभरी।


फिर मुंह लगाकर चूसने लगे। जीभ से निप्पल पर घुमाया। काटा हल्के से। जो दर्द और मजा दोनों दे रहा था। मैं कराह रही थी। आह जेठ जी दर्द हो रहा लेकिन अच्छा लग रहा। उनकी जीभ का स्वाद नमकीन और गर्म। मेरी चूचियाँ गीली हो गईं उनकी लार से। मैं उनके बाल पकड़कर और करीब खींच रही थी। आह्ह्ह… ह्ह्ह… जेठ जी चूसो मेरी चूचियों को जोर से। निप्पल्स को खींचो दांतों से। उनकी चूसने की आवाज गों… गों… गोग… जैसे मेरे कानों में संगीत बज रहा था।


मेरी चूत से रस टपकने लगा था। मैं अपनी जांघें आपस में रगड़ रही थी। ताकि वो खुजली मिटे। लेकिन वो और बढ़ रही थी। सोच रही थी कि ये आदमी कितना स्किल्ड है। हर चूसन में मेरी रूह कांप रही है। मैंने उनके कंधों पर हाथ रखकर उन्हें और नीचे धकेला। ताकि वो मेरी बॉडी को और एक्सप्लोर करें। लेकिन इससे पहले हमने और फोरप्ले किया। वो मेरी चूचियों को सहलाते। निप्पल्स को पिंच करते। मेरी गर्दन पर चूमते। कान में फुसफुसाते कि कितनी हॉट हो तुम। मैं उनकी पीठ पर नाखून चलाती। जो उन्हें सिहरा देता।


फिर वो घुटनों पर बैठ गए। मेरा लेहंगा ऊपर उठाया धीरे-धीरे। जो रेशमी था और मेरी जांघों पर फिसल रहा था। मेरी जांघों की नरम त्वचा पर उनकी उँगलियाँ सरकतीं। जो मुझे काँपने पर मजबूर कर रही थीं। मेरी पैंटी दिखी सफेद लेस वाली। जो पहले से गीली हो चुकी थी। वो उंगली से पैंटी पर रगड़ने लगे। क्लिट को दबाया। जो मुझे झनझना गया। बोले कि देखो कितनी तर हो गई तेरी चूत। मेरे नाम से बह रही है। मैं सिसकारी कि हाँ जेठ जी। आपकी भूख ने मुझे पागल कर दिया।


फिर उन्होंने मेरी जांघों को चूमा। अंदर की तरफ जीभ फिराई। जो गर्म और गीली थी। मेरी स्किन पर सिहरन दौड़ रही थी। मैं काँप रही थी। बोली कि जेठ जी मत तड़पाओ। पैंटी उतारो ना। वो हँसे और धीरे से पैंटी उतारी। मेरी चूत नंगी हो गई। जो शेव्ड थी और गीली चमक रही थी। वो पहले उंगली से क्लिट पर घुमाया। हल्के से अंदर डाला फिर बाहर निकाला। मुझे तड़पाते हुए। बोले कि बता कितनी गर्म है तेरी बुर। मैं बोली आह जेठ जी मत तड़पाओ। जीभ लगाओ ना।


तब वो जीभ अंदर डाली और चाटने लगे। क्लिट पर जीभ घुमाई। चूसी जो मुझे पागल कर रही थी। मैं काँप रही थी। आह्ह्ह जेठ जी ऐसे चाटो मेरी बुर का रस पी लो हाँ। उनकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। मेरी खुशबू और स्वाद उन्हें मदहोश कर रहा था। मैं पैर फैलाकर और जगह दे रही थी। गी… गी… गों… जैसे चाटने की आवाजें आ रही थीं। मेरी साँसें तेज। बॉडी में बिजली दौड़ रही थी।


पहला ऑर्गेज्म आया जोरदार स्क्वर्ट। जो उनके मुँह पर गिरा। गर्म रस जो मीठा और नमकीन था। उनका मुँह गीला हो गया। लेकिन वो रुके नहीं और चाटते रहे। आह इह्ह ओह्ह ओह ! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. जेठ जी मत रुको। मेरी बुर चाटते रहो। पूरा रस चूस लो। मैं उनके सिर को दबा रही थी अपनी चूत पर। गिल्ट था। लेकिन वो मजा उससे कहीं ज्यादा था। उन्होंने मेरी क्लिट को उंगली से दबाते हुए चाटना जारी रखा। ताकि मेरी सिहरन और बढ़े। इससे पहले वो मेरी जांघों पर और किस करते। अंदर की तरफ चाटते। मेरी गांड के गालों को सहलाते। जो मुझे और गर्म कर रहा था।


फिर वो खड़े हुए। अपना पैंट उतारा। लंड बाहर आया 8 इंच का मोटा। नसें फूली हुईं जो धड़क रहा था। मैंने हाथ में लिया और सहलाया। ऊपर-नीचे किया। सुपारे पर उंगली फिराई। जहां प्री-कम चिपचिपा बह रहा था। बोली कि जेठ जी इतना बड़ा लौड़ा। अजय का छोटा सा है। ये तो मेरी बुर को फाड़ देगा। वो बोले कि अब चखो मेरी जान। इसे चूसकर तैयार करो।


मैं घुटनों पर बैठी और मुँह में लिया। चूसने लगी। जीभ से सुपारा चाटा। जो नमकीन प्री-कम से भरा था। मैं गहरा ले रही थी गले तक। जो मुझे गैग कर रहा था। लेकिन मजा आ रहा था। बोले कि कविता गहरा लो गले तक। पूरा लंड गटक ले। मैं चूसती रही उनकी गेंदें सहलाती हुई। उनका स्वाद मर्दाना और मजबूत। ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग… जैसे आवाजें निकल रही थीं मेरे मुँह से। उनका लंड मेरे गले को छू रहा था। लार टपक रही थी मेरे होठों से। वो मेरे बाल पकड़कर और गहरा धकेल रहे थे। बोले कि चूस मेरी रानी। पूरा लंड गले में उतार ले। तेरी लार से चमका दे इसे।


मैं सोच रही थी कि ये कितना पॉजेसिव है। जैसे मुझे अपना गुलाम बना लिया हो। और मुझे वो फीलिंग पसंद आ रही थी। फिर मैंने उनकी गेंदों को मुँह में लिया और चाटा। उनके लंड को हाथ से सहलाते हुए। ताकि उनकी भूख और बढ़े। हमने और फोरप्ले किया। जहां मैं उनके लंड को चूमती। सुपारे पर जीभ घुमाती। उनकी गेंदों पर उँगलियाँ फिराती। जो उन्हें कराहने पर मजबूर कर देती।


फिर मैं रेलिंग पकड़ी और थोड़ा झुक गई। वो पीछे से आए। सुपारा मेरी चूत पर रगड़ा। जो गीला और फिसलन भरा था। पहले हल्के से रगड़ा। क्लिट पर मारा। जो मुझे सिहरा गया। बोले कि कविता तैयार हो। तेरी बुर कितनी टाइट है देखते हैं। मैं बोली कि हाँ जेठ जी घुसेड़ो अपना मोटा लंड मेरी चूत में। लेकिन धीरे से। मुझे तड़पाओ मत।


एक धक्का। आधा अंदर घुसा। दर्द हुआ लेकिन मीठा। जो पूरे बदन में फैल गया। बोली कि आह धीरे जेठ जी। तुम्हारा लंड इतना मोटा है। मेरी बुर तंग है। वो रुके और बाहर निकाला। फिर रगड़ा। मुझे और तड़पाया। फिर दूसरे धक्के में पूरा अंदर समा गया। भरा हुआ लगा। जैसे कभी खाली न हो।


वो पीछे से पकड़कर ठोकने लगे। धीमे पहले फिर तेज। चपचप की आवाजें जो संगीत में मिल रही थीं। मेरी चूत की दीवारें उनके लंड को जकड़ रही थीं। बोली कि जेठ जी पेलो मेरी चूत फाड़ दो हाँ गहरा आह्ह्ह। नीचे आतिशबाजी की चमक। ऊपर हमारी आग। आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह। जेठ जी जोर से चोदो। मेरी बुर में अपना लंड रगड़ो। हर धक्के में गर्भाशय छू रहा था। दर्द और मजा का कॉकटेल मुझे पागल कर रहा था। वो मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे। लाल कर रहे थे। बोले कि ले मेरी रंडी। तेरी गांड कितनी जूसी है। मैं उस दर्द में भी मजा ले रही थी। जैसे वो थप्पड़ मेरी आग को और भड़का रहे हों।


फिर रिवर्स काउगर्ल सोफे पर। मैं ऊपर बैठी। लेहंगा कमर पर समेटा। मैं ऊपर-नीचे होने लगी। उनका लंड मेरी गहराई छू रहा था। जी-स्पॉट पर लगता। जो बिजली सी दौड़ा रहा था। मैं अपनी स्पीड बढ़ाई। चूत से लंड को निचोड़ रही थी। बोले कि कविता उछलो। अपनी बुर से निचोड़ो मेरे लंड को। कितनी गर्म है तेरी चूत।


मैं चिल्लाई कि जेठ जी शादी की रात वाला सुख। आपका लौड़ा मेरी चूत का राजा आह्ह्ह झड़ रही हूँ। जोरदार स्क्वर्ट। उनका लंड जांघें गीली हो गईं। आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई.. जेठ जी मेरा रस निकल रहा है। तुम्हारा लंड भीग गया। लेकिन मैं रुकी नहीं और उछलती रही। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं। वो नीचे से धक्के मार रहे थे। मेरे निप्पल्स पिंच कर रहे थे। मैं सोच रही थी कि ये इंटेंसिटी कभी नहीं मिली। जैसे मेरी बॉडी उनकी हो गई हो। मैंने अपनी उंगली से क्लिट रगड़ी। ताकि ऑर्गेज्म और लंबा चले।


फिर डॉगी रेलिंग पर। रिस्क नीचे लोग। लेकिन जोश दोगुना। वो गांड थपथपाए। बोले कि कितनी juicy गांड। मारूँ क्या। मैं बोली कि हाँ जेठ जी स्पैंक करो। मेरी बुर को ठोको। पहले गांड पर थप्पड़ मारे जोर के। जलन हुई लेकिन मजा आया। फिर लंड घुसेड़ा जोर के धक्के। चूचियाँ उछलतीं। वो पीछे से दबाते निप्पल पिंच। बोली कि जेठ जी और जोर फाड़ दो हाँ फिर झड़ूँगी आह्ह्ह। दूसरा स्क्वर्ट फर्श गीला। आह इह्ह ओह्ह ओह ! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. जेठ जी मेरी गांड मारो अब।


लेकिन वो बोले कि अभी नहीं। पहले तेरी बुर का पूरा रस निचोड़ लूँ। धक्के और तेज। चपचप की आवाज आतिशबाजी से मिल रही थी। नीचे लोग डांस कर रहे। लेकिन ऊपर हमारा अपना डांस। वो बोले कि कविता मेरा आने वाला। बाहर निकालूँ। मैं बोली कि नहीं जेठ जी बाहर मेरी गांड पर माल गिराओ। लंड बाहर। गरम धारें गांड जांघों पर चिपचिपा बहता। हम हाँफते हँसे कि जेठ जी अगर कोई ऊपर देख लेता। लेकिन वो रिस्क ही तो मजा बढ़ा रहा था। मैंने उनके लंड को फिर से हाथ में लेकर सहलाया। ताकि अगला राउंड जल्दी शुरू हो।


अंदर सूट में बिस्तर पर। मैंने लेहंगा उतारा नंगी हो गई। वो भी। फिर किस बॉडी पर। वो चूत फिर चाटे। बोले कि तेरी चूत का स्वाद अमृत। अभी भी गर्म है। मैं उनका लंड चूसी। बोली कि जेठ जी आपका लौड़ा मेरी जान। अभी भी सख्त है। तीसरा राउंड मिशनरी। पैर उनके कंधों पर गहरे धक्के। वो मेरी गर्दन पर हाथ रखा हल्का दबाया। बोले कि कविता ले पूरा लंड। तेरी चूत अब मेरी। सिर्फ मेरी।


मैं चिल्लाती कि हाँ जेठ जी चोदो। अजय कभी नहीं चोद सका। तीन बार झड़ी आह्ह्ह। आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह। जेठ जी गहरा घुसो। मेरी रूह तक पहुँचो। अंदर झड़ गए गरम माल भरा। मेरी चूत ओवरफ्लो हो गई। थककर सोए। लेकिन मैं सोच रही थी कि ये इंटिमेसी, ये पॉजेशन, ये सब मेरी जिंदगी बदल देगा। सुबह उठकर भी मैं उनकी गर्मी महसूस कर रही थी।


सुबह अजय का फोन। आ रहा हूँ। लेकिन अब मैं बदली हुई। जेठ जी के साथ वो रातें असली सुख। अब चुपके मिलते वो सुख जारी। जेठ जी ने दिया वो जो कोई नहीं दे सका।


Hindi Sex Kahani

Recent Posts

See All
मौसी की गीली चूत पुलिसवालों ने चोदी - Antarvasna Sex Stories

मैं और मौसी हाईवे पे जा रहे थे। गाड़ी के पेपर्स नहीं थे तो पुलिस वालो ने हमे रोक लिया। हमको छोड़ने के बदले मौसी की चुत चोदी और फिर मौसी ने मुजे भी मौक़ा दिया।

 
 
 
सगी छोटी बहन को चुदते हुए देखा - Antarvasna Sex Stories

ये कहानी मेरी सगी छोटी बहन के ऊपर है , पहले मेरा ख्याल उसको लेकर ऐसा था नहीं, लेकिन जैसे जैसे वो बड़ी होती जा रही थी मेरे विचार उसके लिए बदलने से लग गए थे । इस कहानी में मैं बताऊंगा कि कैसे मेरी सगी छ

 
 
 
मम्मी और सेक्सी बहन की जोरदार चुदाई : Hindi Sex Stories

एक रात हमारे घर लुटेरे घुस आए। में मेरी माँ और मेरी बहन अकेले ही थे। उन्होंने हमारे ऊपर बंदूक तानी और मेरी माँ को रूम में ले गए। फिर क्या हुआ ये पढ़े।

 
 
 

Comments


Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Desi Stories, Antarvasna, Free Sex Kahani, Kamvasna Stories 

कामवासना एक नोट फॉर प्रॉफिट, सम्पूर्ण मुफ्त और ऐड फ्री वेबसाइट है।​हमारा उद्देश्य सिर्फ़ फ्री में मनोरंजन देना और बेहतर कम्युनिटी बनाना है।  

Kamvasna is the best and only ad free website for Desi Entertainment. Our aim is to provide free entertainment and make better Kamvasna Community

bottom of page