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ज्योति की तड़पती जवानी - Antarvasna Sex Stories

दोस्तों मेरा नाम हैरी है और मेरी उम्र 24 वर्ष की है। मेरी ये कहानी अक्टूबर 2025 की है, जब हमारे घर के सामने एक नयी फॅमिली आई थी और उन में से एक लड़की थी जिसका नाम ज्योति था।


ज्योति के बारे में लिखू तो उसकी उम्र 27 वर्ष कद पांच फ़ीट दस इंच राग सावला खुले घुंघराले बाल, बड़ी बड़ी आँखें, मोटे मोटे होठ, भरा हुआ शरीर और फिगर इतना मस्त की क्या कहना। 34 इंच के मम्मे जो पर्वत की तरह बिलकुल सीधे, 25 इंच की कमर जो किसी मछली जैसी और 35 इंच की गांड। ज्योति दिखने में इतनी खूबसूरत की क्या कहना उसकी जवानी का।


मेरे बारे में लिखू तो नाम हैरी उम्र 24 वर्ष, रंग गोरा, शरीर से चुस्त दरुस्त और पिछले दस वर्ष से ज्यादा समय से में हर रोज़ जिम कर रहा हु तो इससे शरीर बहुत मज़बूत और तगड़ा बना हुआ है और सेक्सुअली पूरी तरह से एक्टिव हु और मेरी आठ इंच लम्बा लंड बिना रुके तीन घंटे तक हर लड़की की ठुकाई करने में सक्षम है। ज्योति को मिलकर 290 से ज्यादा लड़किया और भाभियाँ चोद चूका हु इसलिए लड़किया पटना और फिर चोदना ज्यादा बड़ा काम नहीं है।


खैर मेरी कहानी इस तरह से शुरू हुई थी की एक दिन मैं छत पर टहल रहा था और सामने वाले घर में कुछ लोग घर देखने के लिए आये हुए थे। वो घर बिकाऊ था तो वह लोग अक्सर घर देखने आते रहते थे। इसी तरह से थोड़े दिन बीत गए और एक परिवार आया और वो उस घर में शिफ्ट करने वाले थे । सामान घर के अंदर जा रहा था और में छत पर खड़ा देखता रहा और मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी और मेरी नज़र वही पर रुक गयी। में जैसे उसे देखता ही रह गया। खैर वो परिवार शिफ्ट कर चूका था।


मेरी नज़र छत पर अक्सर उस लड़की पर पड जाती तो वो जैसे मेरी और देखती और अपने काम में लग जाती और मई भी कुछ नहीं कहता। एक दिन की बात है रात को मैं खाना खाकर अपने कमरे में लेटा ही था की बहार गेट पर दस्तक हुई। उस दिन पापा घर पर नहीं थे और घर पर मैं और माँ ही थे। मैंने दरवाजा खोला और देखा तो सामने नए घर में से अंकल खड़े थे। उनको जोगिन्दर अंकल कहते थे सब। उन्होंने कहा की उनकी बेटी ज्योति को उल्टिया लगातार आ रही है और अगर उसे हॉस्पिटल ले जाओ तो बढ़िया रहेगा। मैंने हां कर दी । मेरे पास गाडी है तो मैंने गाडी में ज्योति और उसके माँ पापा को बिठाया और हॉस्पिटल ले गया।


रात को उसकी माँ को मैं घर छोड़ कर फिर से हॉस्पिटल चला गया। अगले दिन शाम को ज्योति और उसके पापा को हॉस्पिटल से छुट्टी मिली तो उन्हें घर लेकर आ गया। उसके बाद मैं और मेरी माँ उनके घर ज्योति का हाल चाल पूछने गए तो ज्योति जैसे मेरी और देख मुस्कुरा रही थी। उसके चेहरे पर मेरे लिए थोड़ी मुस्कराहट थी तो मुझे भी अच्छा लगा। मुझे शाम को जब ज्योति छत पर दिखती तो मैंने हाथ जोड़ कर उसे नमस्ते जैसे कर देता तो वो हसने लगती और में इशारे में उससे पूछता की उसकी कैसी तबियत है तो ज्योति मुस्कुरा देती। मेरा कमरा ऊपर छत पर था तो ज्योति के ऊपर आते जाते अक्सर उसके दर्शन होते रहते । अगर में शाम को चाय पी रहा होता और ज्योति ऊपर छत पर आती तो उसे चाय के लिए पूछ लेटा तो वो हसने लगती और अगर कुछ खा रहा होता तो उसे खाने के लिए पूछ लेता तो वो हस्ते हुए मेरी और मुड़ मुड़ कर देखती और नीचे चली जाती।


एक दिन आया और गली में किसी के यह पर शादी की पार्टी रखी थी और पार्टी एक पैलेस में होनी थी तो उसका कार्ड हमें और ज्योति दोनों को दिया गया था । शादी के दिन पहले में अपने पापा और माँ और पैलेस छोड़ने गया और उसके बाद जोगिन्दर उनकले के कहने पर वो उसकी पत्नी और ज्योति को पैलेस में छोड़ा और में वह इधर उधर टहल कर खाने की आइटम्स देख रहा था और मेरे माँ पापा ज्योति के माँ पापा से बात कर रहे थे। मैं इधर कुछ न कुछ खा रहा था और एक डैम से ज्योति जैसे मेरे सामने आ गयी। मैंने कहा हाय। ज्योति हसने लगी।

मैंने कहा आप कुछ कहोगे तो मैं लेकर आयू आपके लिए।


ज्योति ने ना में सर को हिलाया और वो वही खड़ी रही।


मैंने आसपास देखा और आइस क्रीम मिल रही थी तो मैंने दो आइस क्रीम के कप लिए और एक ज्योति को लेकर दे दिया और ज्योति ने उसे लिए और खाने लगी।


मैंने इधर एक प्लेट भर कर खाना लिया और ज्योति एक टेबल पर बैठी हुई थी तो मैंने दूसरे टेबल पर बैठ गया। तभी एकाएक ज्योति प्लेट में कुछ खाना लेकर आ गयी और मेरे टेबल पर पास पड़ी कुर्सी पर बैठ कर खाने लगी। उसके माँ पापा और मेरे माँ पापा अंदर हाल में थे और हम दोनों बहार इसलिए वो हमें देख नहीं सकते थे। खैर हम दोनों ने बात चीत शुरू की और खाना खाकर बीतें करते करते कार पार्किंग की तरफ चल दिए। इसी बीचे ज्योति ने मेरा फोन नम्बर मांग लिया और उसका फोन नम्बरलेने के बाद हम अपना बातों में लगे रहे और रात को सब अपने अपने घर आ गए। रात को मुझे ज्योति का फोन पर मेसेज आया और हम दोनों चैतकरने लगे।


वो मेरे से मेरी पसंद ना पसंद पढाई लिखे आना जाना पूछने लगी और वही सब में उससे।


रात के लगभग चार बज चुके थे पर हमारी चैट चलती रही।

अगला दिन आया और सुबह सुबह हम फिर से चैट में लग गए। सर्दी लगभग आ चुकी थी और वो ज्योति और उसकी माँ छत पर धुप सेकने आते तो वो मुझे मेसेज करती और में उसे। तीन चार दिन इसी तरह से बीत चुके थे और एक दिन इसी तरह से ज्योति ने मुझे मेसेज में पूछा की यहाँ कोई बड़ी मार्किट है जहा पर सामान मिल जाता हु लड़कियों के कपडे वगैरा।


तो मैंने उसे कहा - हां पर थोड़ी दूर है लगभग दस किलोमेटेर के आस पास जाना पड़ेगा उसे।


ज्योति इस तरह से चैट करने लगी की दूर बहुत है कैसी जाउंगी में तो मैंने उसे पूछा की अगर वो कहे तो में साथ में चल सकता हु।


ज्योति मान गयी और अगला दिन पक्का कर लिया।


ज्योति अगले दिन घर से थोड़ी दूर बने ऑटो स्टॉप पर पहुँच गयी और इधर में गाडी लेकर आ गया और गाडी में बैठ कर हम लोग मार्किट में पहुंच गए। काफी समय वह पर घूमने के बाद ज्योति को एक माल में मैं ले गया। मैंने ज्योति से पूछा की कब तक वापिस जाना है घर पर उसने तो ज्योति ने कहा की शाम तक चलेगा।


मैंने कहा सही है तो मैंने फिल्म की दो टिकट खरीदी और ज्योति को फिल्म दिखने अंदर थिएटर में ले गया। फिल्म शुरू हुई तो मैंने थोड़ा सहरात करने की सोची और अपने जूते में से पाँव निकला और धीरे से ज्योति के पाँव पर छुआ तो वो दर गयी। उसने सोचा की शायद चूहा है जो उसके पाँव को छू कर निकला। मैं बीच बीच में इसी तरह से करने लगा और अपने पाँव से धीरे से ज्योति के पाँव को छू देता तो ज्योति मेरी बाजु कास कर पकड़ लेती। पूरी फिल्म में इसी तरह से चलता रहा और उसके बाद खाना खाकर हम माल में घुमते रहे और शाम को पार्क और रात ७ बजे तक ज्योति को उसके घर के थोड़ा पास उतर में अपने घर आ गया और वो अपने घर चल दी । हर रोज़ रात की तरह उस दिन भी हम रात को चैट करते रहे। अगले दिन की बात है ज्योति से चैट करते करते उसने पूछा की कल आप क्या कर रहे हो तो मैंने कहा फ्री हो आपसे चैट करता रहूँगा पूरा दिन।


ज्योति ने लिखा - हां वो तो है पर कही घूमने चले?


मैंने कहा - ठीक है कहा चलोगे आप।


ज्योति ने लिखा - जहा पिछली बार गए थे फिल्म देखने वहा और कोई नयी जगह हो तो चलते हैं।


मैंने कहा - ठीक है शाम ७ बजे तक घर आ जाएंगे हम।


ज्योति ने कहा - उसकी कोई दिक्कत नहीं है।


खैर अगले दिन ज्योति घर से थोड़ा आगे मेरा इंतज़ार कर रही थी तो मैंने बाइक पर गया और ज्योति देखकर हसने लगी।


मैंने कहा - क्या हुआ?

ज्योति ने कहा मुझे लगा था की आप गाडी लाओगे।


मैंने कहा हां पर गाडी ठीक करवाने वाली है इसलिए नहीं लाया पर अगली बार सही।


ज्योति ने कहा - उसकी कोई दिक्कत नहीं हैरी बाइक भी सही है।

मैंने कहा - अच्छा तो फिर अगली बार भी बाइक पर चलोगे आप।


ज्योति हसने लगी और बोली - हां बाइक पर चलूंगी।


ज्योति बाइक पैर बैठी तो उसके दोनों मम्मे जैसे मेरी पीठ पर चिपक गए। ज्योति पीछे होने की कोशिशकर रही थी पर बाइक पीछे से ऊँची थी तो ये होना मुश्किल था। खैर ज्योति इसी तरह से बैठ गयी और उसका आगे का पूरा बदन मेरी पीठ पर चिपका हुआ था और उसके मोटे मोटे मम्मे और वो कितने ज्यादा सख्त है ये मुझे मेहसूस हो रहा था।


हम एक माल में गए और फिल्म की टिकट ली और फिल्म देखने लगे और वह पर मैं वही सब करने लगा धीरे से अपने पाँव से ज्योति के पाँव को छूता तो ज्योति डर से मेरी बाजु कस कर पकड़ लेती।


ज्योति बोली - यार चूहा कही पाव पर काट ना ले।


मैंने कहा - ऐसा है तो आप अपना पाँव मेरे पाँव पर रख दो कुछ नहीं होगा

ज्योति हसने लगी और बोली कहा है आपके पाँव

मैंने कहा नीचे।

ज्योति ने लिखा - हां पर वो ले लेगी जीन्स अगली बार।

मैंने कहा - मैं आपको शॉपिंग करवाऊंगा तो ज्योति मान गयी ।

मैंने ज्योति से पूछा - वो घर पर क्या कह कर जाती है?


तो ज्योति ने लिखा - उसने ये कहा है की उसे नौकरी मिल गयी है। इसी बहाने से वो दो दिन से घर से बहार मेरे साथ जा रही है।

मैंने लिखा - अच्छा तो फिर तो आपको हर रोज़ घूमना होगा

ज्योति ने लिखा - हां जी वैसे एक बात कहु तो आप मुझे अच्छे लगने लगे हो।

मैंने लिखा - अच्छे लगने लगे हो मतलब।

ज्योति ने लिखा - मतलब जैसे कोई दिल को अच्छा लगने लगा वो वाला।

मैंने लिखा - सही है जी। शुक्रिया आपका।


खैर बातें चलती रही और अगले दिन ज्योति मेरे साथ एक बड़ी दूकान में गयी जहा पर लड़कियों की बहुत सारे कपडे थे तो वह पर उसने कुछ फ्रॉक स्कर्ट जीन्स टॉप नाईट सूट वगैरा पसंद किये और शॉपिंग करके फिल्म देखे चले गए। फिल्म देखते समय मैंने फिर से उसके पाव को टच किया तो ज्योति बस बैठी फिल्म देखती रही और उसे कुछ फर्क यही पड़ा। मैंने फिर से इसी तरह से उसके पाँव पर अपने पाँव का अंगूठा फिराया तो ज्योति जैसे बैठी रही और उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था । मैंने इसी तरह से लगा रहा और फिल्म खत्म हुई और फिर माल में घुमते रहे और शाम को घर आ गए। रात को चैट करते समय ज्योति ने कहा की फिर से उसके पाँव पर चूहा टच कर रहा था पर वो बैठी रही और उसे डर नहीं लग रहा था । मैंने कहा अगर उसने काट दिया होता तो।


ज्योति ने लिखा नहीं होता कुछ भी

खैर चैट करते करते ज्योति ने मुझे प्रोपोस कर दिया

ज्योति ने लिखा आई लव यू हैरी।


मैं इसी तरह से लगा रहा। ज्योति गर्म होने लगी थी इसका पता मुझे लग गया था क्योकि उसके हाथ में मेरी जीन्स को ऊपर उठाये हुए लंड था तो ज्योति ने मेरी जीन्स के ऊपर से लंड को कस कर हाथ में पकड़ लिया और मसलने लगी।


इधर मैं जोर जोर से उसके मम्मे दबाने लगा । आधी फिल्म खत्म हुई तो लाइट जल उठी और उससे पहले ज्योति अपनी सीट पर बैठ गयी । ज्योति ने देखा की जीन्स को नीचे से जैसे कोई ऊपर को उठा रहा हो।


ज्योति मेरे लंड को देख हसने लगी और मैंने कहा तुमने देखो ये क्या कर दिया। मेरे लंड को मसल मसल कर खड़ा कर दिया।


मैंने इसी तरह से ज्योति से सेक्सी बातें करता रहा और जैसे ही लाइट बंद हुई तो फिर से ज्योति की छाती दबाने लगा। उस दिन ज्योति के मम्मे इतने दबाये की उसके गले पर मेरे हाथ की उंगलियों के निशाँ पड़ गए थे। मैंने ज्योति के मम्मे कभी जोर जोर से मसलता तो कभी उसके मम्मे जोर से आगे को खींचता तो कभी जोर से ऊपर को उठता तो ज्योति मज़े लेती रही और उसका सर मेरे काढ़े पर लगा रहा। उसका हाथ मेरी जीन्स पर खड़े लंड के ऊपर था और वो मेरे लंड को मसले जा रही थी। फिल्म खत्म होने तक इसी तरह से चलता रहा और इसके बाद खाना वगैरा खाकर हम दोनों पार्क में चले गए। वह पर मैं ज्योति से सेक्सी बातें करता तो वो हसने लगती।


जैसे मैंने ज्योति से कहा अक्सर लड़किया लड़के का लंड तभी दबती है जब वो उसे चूसना चाहती हो तुम भी मेरा लंड चूसना चाहती हो क्या

ज्योति बोली छी


मैंने कहा छी मतलब लड़किया इसे चूसती है इसी लिए इसे दबती है मैंने सोचा की तुम्हारा भी यही मन होगा इसलिए मैंने पूछ लिया।


मैंने कहा एक बार मुँह में लेकर चूस कर देखो न पसंद आये तो कहना।


ज्योति हसने लगी।


इसी तरह से हम लगे रहे और रात के आठ बजे ज्योति अपने घर और मैंने अपने घर पहुंच गया। देर रात तक हम फिर से चैट करते रहे और चैट में भी मैं उससे सेक्सी बातें करता रहा और वो मेरा लंड चूसने को त्यार थी।


मैंने कहा - जब में पूछ रहा था पार्क में तब तो तुम कह रही थी छी। अब कह रही हो की लंड चूसूंगी में ऐसा क्यों?


ज्योति ने कहा - मुझे शर्म आ रही थी।


मैंने कहा- एक बार ये वाला काम कर लो फिर शर्म नहीं आयेगी।


खैर हम दोनों बातें करतेरहे और मैंने ज्योति से सेक्सी बातें करता रहा। उसके जिस्म उसके मम्मे उसकी गांड उसकी चूत यही सब बातें। खैर अगला दिन आया और मैं ज्योति को फिर से एक माल में ले गया। उस दिन ज्योति ने फ्रॉक पहनी थी और इसमें वो बहुत मस्त लग रही थी। फिल्म की टिकट ली और अंदर हाल में गए और जैसे ही लाइट बंद हुई तो ज्योति मेरे होठो को अपने होठो में भर चूसने लगी।


वो जैसे कुछ ज्यादा ही तड़प रही थी। पांच मिनट तक वो ईसिस तरह से लगी रही और पुरे अच्छे से उसने मेरे होठ चूसे और फिर एक तरफ होकर बैठ गयी।


उसने फिर से अपना सर मेरे कंधे पर रखा और मैंने अपना हाथ उसके एक मम्मे पर रख दबाना शुरू कर दिया ।


ज्योति बोली बहुत अच्छा लग रहा है।


मैनी कहा अगर हाथ और छाती के बीच कुछ न हो तो ज्यादा मज़ा आएगा।


ज्योति बोली कुछ नहीं है बीच में।


मैंने कहा है न तुम्हारी स्कर्ट और स्कर्ट के नीचे की ब्रा।


मैं चाहता हु की मेरा हाथ और हाथ में सिर्फ मम्मे हो और कुछ नहीं।


ज्योति मुस्कुराने लगी और बोली मैं पूरी की पूरी आपकी हु और आप मेरे।


मैंने लगा रहा और पूरी तरह से ज्योति के मम्मे दबाता रहा और उसके गलो पर चेहरे पर उसके गले पर उसकी ब्रैस्ट पर और पेट पर हाथ फेरता रहा। वो दिन भी इसी तरह से निकल गया। रात को ज्योति को उसके घर पर छोड़ मैंने अपने दोस्त को फोन किया जिसके पास एक कमरा था और वहाँ पर मैंने अपनी लगभग हर प्रेमिका को लेकर गया हु। मैंने उसे बात करी, की मुझे कल एक पुरे दिन के लिए कमरा चाहिए। तो वो मान गया। मैंने उसे 500 रूपये उसी समय भेज दिए और ज्योति से चैट करते समय उसे कमरे में जाने का पूछा तो वो मान गयी।


अगले दिन सुबह मैंने ज्योति को लेकर अपने दोस्त के कमरे में ले गया और ज्योति को मैंने ये कहा की ये असल में हमारा पुराना घर है।


घर में घुसते ही जैसे ही कमरे में गए तो ज्योति ने कस कर मुझे गले से लगा लिया और मेरे से लिपट गयी।


मैंने उसकी पीठ उसकी गांड पर हाथ फिराने लगा और पहले पूरी तरह से ज्योति के होठो को चूसा। आधा घंटा उसके होठ चूसे और ज्योति के ऊपर के कपडे उतरे और उसकी ब्रा खोल ज्योति को ऊपर से पूरा नंगा कर दिया । ज्योति मुझे देख कर हस रही थी।


मैंने पहले तो ज्योति के मम्मे अपने मुँह में भर चूसने शुरू किया तो ज्योति उसी समय सेक्स से भर मज़े लेने लगी। मैं बारी बारी से ज्योति के मम्मे चूसता रहा और अपने हाथो से जोर जोर से दबाता और ज्योति आह करती।


मैंने अपनी टीशर्ट उतर दी थी और फिर मैंने अपने नीचे के सारे कपडे उतरे और फिर ज्योति के नीचे से सारे कपडे उतर उसे पूरा नंगा कर दिया और ज्योति के होठो को चूसते चूसते उसके दोनों मम्मे अपने हाथ में लेकर दबाने लगा। ज्योति ने अपने हाथ से मेरा लडन पकड़ रखा था और पागलो को तरह वो मेरे लंड को दबा रही थी । मैंने ज्योति को नीचे बैठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने को कहा तो ज्योति इसी तरह से करने लगी। वो नीचे बैठ गयी और मेरे आठ इंच लम्बे लंड को अपने मुँह में भर लिया और इसी तरह से बैठी रही। मैंने उसके सर को पकड़ आगे पीछे करना शुरूकिया और उसके बाद ज्योति खुद इसी तरह से होने लगी । मैंने काफी देर तक इसी तरह से खड़ा रहा और फिर बेड पर लेट गया और ज्योति मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को चूसने लगी। मेरे पास पूरा दिन था सुबह से लगभग 11 ही बजे थे। काफी देर हो गयी और ज्योति इसी तरह सेलगी रही। मैंने कहा अगर थक गयी हो तो रहने दो पर ज्योति लगी रही।


मैंने फिर ज्योति को बेड पर बिठाया और उसकी गोद में अपना सर रख उसके एक मम्मे के निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा । ज्योति को इससे बहुत मज़ा आ रहा था ।


मैंने आधा आधा घंटा दोनों मम्मे चूसता रहा और उसके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसता रहा और ज्योति सेक्स से पागल हो चुकी थी। निप्पल के इलावा ज्योति की ब्रैस्ट को मुँह में लेकर चूसने से उस पर लाल निशान बन गए थे ।

मैंने ज्योति को मेरे ऊपर इस तरह से लेटने को कहा की उसकी चूत मेरे मुँह में आ जाये और वो लेट गयी और ज्योति मेरे लंड को चूसने लगी और जैसे ही मैंने अपनी जीन्स ज्योति की चूत में डाल चाटना शुरू किया ज्योति मेरे लंड को काटने पर आ गयी।


मैंने इसी तरह से लगा रहा। पता नहीं कितना समय बीत गया पर उस दिन ज्योति की चूत को पुरे मज़े से चाटा था मैंने। उसकी चूत में से पानी निकला पर मैंने लगा रहा।


दो घंटे हो चुके थे हमें लगे हुए। ज्योति थक गयी थी पर वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर साइड में लेती रही। वो बीच बीच में उसे चूसने लगाती और फिर से मुँह में लेकर लेट जाती ।


तीन घंटे होने को थे और फिर मेरे लंड में से माल निकला और ज्योति के मुँह में गिरने लगा । मैंने ज्योति के मुँह को पकड़ लिया और सारा माल ज्योति के मुँह में गिर गया ।


मैंने नंगा बेड पर लेटा रहा और ज्योति पूरी नंगी मेरे ऊपर लेटी रही ।


मैंने ज्योति से उसका अनुभव पूछा तो ज्योति ने कहा की उसे बहुत मज़ा आया था। ज्योति ने कहा की जिस दिन वो मेरा लंड नहीं चूसेगी उसे नींद नहीं आएगी अब।


मैंने कहा ठीक है।


अगले दिन फिर से मैं उसे अपने दोस्त के कमरे पर ले गया। मैंने अपने दोस्त को पैसे बाद में देने का बोला तो वो मान गया।


कमरे में फिर से मैं ज्योति के होठो और उसके मम्मे दबाता और ज्योति के पुरे कपडे उतार उसे पूरा नंगा कर पहले तो उसके मम्मे चूसे और इसके लिए मैं कभी बेड पर बैठ ज्योति को खड़ा कर उसके मम्मे चूसता तो कभी उसे बेड पर बिठा उसकी गोद में सर रख उसके एक मम्मे को अपने मुँह में भर चूसने लगता। मेरे ख्याल से किसी लड़की को गर्म करने का ये सबसे अच्छा तरीका है। इसके बाद 69 की पोजीशन में ज्योति मेरा लंड चूसती और मैं उसकी चूत और फिर ज्योति को अपनी गोद में बिठाकर एक हाथ से मम्मे मसलता और दूसरे हाथ की उंगली से उसकी चूत को सहलाता। इससे ज्योति इतनी गर्म हो जाती की पागल होने लगाती।


फिर मैंने ज्योति को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ उसकी दोनों टांगें हाथो से फैलाई और अपना आठ इंच लम्बा लंड जो किसी नाग की तरह खड़ा था, ज्योति की चूत के मुँह पर रख जोर से अंदर ढकने लगा। चूत टाइट थी और लंड अंदर नहीं जा रहा था। थोड़ी कोशिश के बाद लंड थोड़ा सा चूत के अंदर गया और मैं धीरे धीरे लंड को धक्के देने लगा। ज्योति को दर्द होने लगा था। इसी लिए मैं धीरे धीरे करके लंड को चूत जे अंदर धक्के देता रहा। पांच मिंट हो गए थे और फिर मैंने लंड को चूत के और अंदर धकेलने के लिए लंड को और जोर से धकेलना शुरू कर दिया । लंड कोई दो इंच तक चूत के अंदर पहुंच चूका था तो मैंने पहले धीरे धीरे और फिर बिजली की तेज़ी से लंड को चूत के अंदर बहार करने लगा ।


ज्योति आह आह आह आह किये जा रही थी और मेरे हर हर धक्के पर ज्योति आह करती।


मैंने लगा रहा और फिर लंड को चूत के अंदर छोड़ मैं ज्योति के ऊपर लेट गया और उसके होठ चूसने लगा । कुछ मिंट बाद फिर से में शुरू हुआ और काफी ठुकाई करने के बाद मैं उठा और ज्योति को अपने लंड के ऊपर बैठने को कहा तो वो लंड के ऊपर आ गयी ।


मैंने लंड को चूत के मुँह पर रखा और ज्योति को धीरे धीरे नीचे होने को कहा। ज्योति जैसे जैसे नीचे होती गयी लंड चूत में घुसता चला गया और ज्योति आह आह करने लगी।


मैंने ज्योति से धीरे धीरे ऊपर नीचे होने को कहा तो वो शुरू हो गयी।


ज्योति टांगें फैलाकर लंड के ऊपर बैठी हुई थी और लंड उसकी चूत के अंदर बहार होता साफ़ दिख रहा था। काफी देर तक इसी तरह से ज्योति की चुदाई करने के बाद ज्योति को मैंने लंड के ऊपर ही रुकने के लिए कहा। इससे चूत जल्दी ढीली हो जानी थी जो मैं चाहता भी था। चूत इतनी टाइट थी की लंड पर जलन होने लगी थी और लंड की त्वचा खींच रही थी।


थोड़ी देर बाद मैंने ज्योति को फिर से ऊपर नीचे होने को कहा और वो शुरू हो गयी। ज्योति की चूत में से खून निकलना शुरू हो गया था और मेरे लंड पर लाल खून दिखने लगा था पर मैं रुका नहीं।


फिर ज्योति को घोड़ी बनाया और उसके पीछे से उसकी चूत में लंड डाल ठुकाई शुरू कर दी। ज्योति की चूत में से पहले खून और फिर माल निकला पर मैं लगा रहा। दो घंटे बीत गए थे। एक मिनट के लिए ज्योति रुकी नहीं और उसके मुँह से आह आह लगातार निकलता ही रहा।


दूसरी बार ज्योति की चूत में से माल निकला तो मैंने ज्योति की चूत में से लंड निकाला और गांड में लंड डालने के लिए लंड को गांड के मुँह पर रख जोर से धकेलने लगा।


धीरे धीरे करके लंड गांड के अंदर पहुंचा तो मैंने धक्के देने शुरू कर दिया। मैंने जोर जोर से गांड की ठुकाई किये जा रहा था।


इतनी जोर से जैसे बिजली की तेज़ी से लंड को मैं जोर से चूत के अंदर धकेलता और फिर बाहर निकलता। काफी समय बाद मैं बेड पर लेट गया और ज्योति को अपने लंड के ऊपर बैठने को कहा और ज्योति बैठ गयी। लंड को में गांड के मुँह पर रखा और ज्योति को नीचे करते करते लंड थोड़ा अंदर गया और ज्योति ऊपर नीचे होने लगी। उसके बाद मैंने ज्योति को नीचे नहीं उतरा। मैंने सोचा जब तक लंड में से माल नहीं निकलता ज्योति को लंड के ऊपर ही रखना है। ज्योति कभी तेज़ तो कभी धीरे करके लगी रही।


मैं बीच बीच में ज्योति को रोक देता और ज्योति लंड के ऊपर ही बैठ जाती और लंड गांड में और अंदर तक जब घुसने लगता तो ज्योति आह करने लगती।


तीन घंटे से ऊपर हो चूका था और ज्योति अलग अलग पोजीशन बनाकर लंड के ऊपर बैठ जाती और ऊपर नीचे होने लगती। चार घंटे होने को थे और फिर जाकर लंड में से माल निकलने लगा और सारा माल गांड में ही गिरने लगा। जब माल निकल गया तो मैंने ज्योति को लंड के ऊपर से हटने को कहा और वो मेरे ऊपर लेट गयी । ज्योति के पेट में काफी दर्द हो रहा था तो मैंने जाकर दर्द की दवाई ले और ज्योति को दे दी और उसके बाद ज्योति और में इसी तरह से एक दूसरे के ऊपर लेते रहे।


रात आठ बजे ज्योति को उसके घर के पास छोड़ मैंने अपने घर आ गया और रात भर चैट करता रहा और उसके बाद से फिर से ज्योति को कभी फिल्म थिएटर में जाकर प्यार करता तो कभी कमरे में ले जाकर उसकी चुदाई करता। ज्योति की चुदाई आज तक चालू है और ज्योति को खूब मज़े आ रहे हैं।


दोस्तों आपको मेरी ये Antarvasna Sex Stories कैसी लगी मुझे मेरी इस ईमेल पर कमेंट जरूर करना।

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