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दोस्त की गांड मारने की तमन्ना - Gay Sex Stories

हाय दोस्तो, कैसे हैं आप सब के लंड और चूत… सबको चूत मिल रही है ना दबा के। मेरा नाम प्रेमपूजारी है, आज मैं तुम्हें अपने दोस्त की एक कहानी सुनाऊंगा। मेरी उम्र 22 है, रंग सांवला है, हाइट 5.6” है। देखने में ठीक लगता हूं। दोस्तो, मेरा एक दोस्त है, उसका नाम मनीष है, वो मुझसे एक साल छोटा है और उसका रंग भी बहुत गोरा है। मैं आज तुम्हें उसी की कहानी सुनाता हूं।


तो दोस्तो, मेरा दोस्त मेरे घर अक्सर आता-जाता रहता था। मेरा एक भाई भी है जो मुझसे तीन साल बड़ा है। मैं अपने भाई से ज्यादा बात नहीं करता था, मैं उनसे शर्माता था, मगर मेरे दोस्त मनीष की उनसे खूब पटती थी। मैंने कई लड़कियों की चूत फाड़ी है अब तक। मगर अगर आज की बात करूं तो आज मैं छोटी सी जॉब करता हूं और मेरे टच में कोई लड़की नहीं है। सबकी शादी हो चुकी है। मुझे सेक्स करने में बहुत मजा आता था। तो अब मैं बताता हूं कि ये स्टोरी मैं क्यों लिख रहा हूं।


एक दिन मैं कहीं बाहर गया हुआ था, किसी काम से, मगर काम जल्दी हो जाने के कारण मैं घर जल्दी आ गया। घर का दरवाजा बंद था। मैं अपने भाई को घर पे छोड़ कर गया था। पता नहीं वो कहां चले गए थे। मैंने दरवाजा खोलना चाहा मगर नहीं खुला। मुझे थोड़ा अजीब लगा कि आज दरवाजा क्यों बंद है। मैं छत के ऊपर से खिड़की के रास्ते घर में आ गया। जैसे ही मैं घर में आया तो मुझे बेडरूम से भाई की आवाज आई और टीवी भी चल रहा था। मैं दबे पांव आगे गया तो देखा कि टीवी पर एक फिल्म चल रही है, उसमें 4 लड़के हैं जो बिल्कुल नंगे हैं और वो एक साथ वॉशरूम नहा रहे थे।


जब मैंने नजर घुमा कर कमरे में देखा तो दंग रह गया। मेरा भाई भी बिल्कुल नंगा था और उसका 8” का लंड झटके मार रहा था। मैं तो दंग रह गया कि भाई ये क्या कर रहे हैं। तभी मुझे अहसास हुआ कि कमरे में कोई और भी है। मैंने गौर किया तो देखा कि वो मेरा दोस्त मनीष है और वो एक तरफ चुपचाप बैठा हुआ है और फिल्म देख रहा है। तभी भाई ने उससे कहा, “देखो मनीष, ये चारों भी तो मजा ले रहे हैं तो तुम क्यों डर रहे हो, चिंता मत करो, मैं तुम्हें तकलीफ नहीं दूंगा, आराम से दोनों मजा करेंगे।” मगर मनीष बोला, “नहीं, ये सब गलत है, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।” मेरा भाई बोला, “अरे क्यों शर्मा रहे हो, उतारो ना कपड़े।”


इतना कहकर मेरा भाई मेरे दोस्त मनीष के कपड़े उतारने लगा। मैं टीवी पर नजर डाली तो मैं हैरान रह गया, वो चारों लोग एक-दूसरे की गांड में अपना-अपना लंड घुसा कर झटके लगा रहे थे। मैं तो सोच में पड़ गया कि क्या ऐसा भी होता है कि लड़के आपस में सेक्स करें और अगर करते भी हैं तो क्या मजा आता होगा। मेरा लंड भी खड़ा हो गया था। वो चारों बहुत तेजी से झटके मार रहे थे, जैसे ट्रेन की तरह ही। राम क्या नजारा था, मगर एक बात और कि वो सब खुश नजर आ रहे थे।


फिर टीवी से नजर हटा कर जब मैंने भाई की तरफ देखा तो वहां का नजारा भी बदल चुका था। भाई बोला, “देख मनीष, उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो रही तो तुझे कहां से होगी, तुझे भी इनकी तरह मजा आएगा।” मेरा भाई उसे पूरी तरह नंगा कर चुका था और उसके लंड को सहला रहा था। वो टीवी पर देखे जा रहा था जहां पर चार लोग एक-दूसरे की जमकर गांड मार रहे थे। मेरा भी हाल बुरा हो रहा था। भाई ने उसके लंड को सहला-सहला कर खड़ा कर दिया। उसका लंड भाई से तो बड़ा नहीं था मगर फिर भी 6” का तो होगा ही। मेरे भाई ने कहा, “यदि तुम मेरे लंड को सहलाओगे तो तुम्हारा डर दूर हो जाएगा।” मेरे दोस्त मनीष ने झिझकते हुए मेरे भाई का लंड अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगा।


मेरे भाई ने उससे बैठ जाने के लिए कहा, वो बैठ गया। मेरे भाई का लंड अब उसके आंखों के सामने था। मेरा दोस्त भी अब भाई की बातें मानने लगा था और उसके बाद मेरे भाई थोड़ा आगे हुआ तो मेरे दोस्त मनीष के होंठों से मेरे भाई का लंड भिड़ गया। मेरे भाई ने कहा, “किस कर मेरे लंड पर।” मनीष ने मना किया मगर भाई की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा। उसने भाई के लंड पर किस किया और हटा लिया। भाई बोला, “ऐसे नहीं, थोड़ा सा मुंह में लेकर चूस।” उसने भाई का लंड को किस करना शुरू कर दिया। तभी भाई ने उसकी कमर पर एक जोर का मुक्का मारा। मेरा दोस्त मनीष एक दम मुंह खोल कर चिल्लाया, “आह्ह्ह…” और जैसे ही मेरे दोस्त ने मुंह खोला, मेरे भाई ने अपनी कमर हिला दी। मेरे दोस्त के मुंह में मेरे भाई का लंड पूरा घुस गया।


मेरे भाई ने मेरे दोस्त का सिर पकड़ लिया और मनीष मेरे भाई के लंड को चूसने लगा। मेरे भाई धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था। मेरी हालत खराब हो रही थी। मन कर रहा था कि मैं भी मैदान में कूद पड़ूं मगर अपने भाई की शर्म की वजह से नहीं जा पाया। मैं अपने एक हाथ से अपने लंड को सहलाए जा रहा था। मेरे लिए ये सब एक नया अनुभव था। अब मेरे भाई ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। मेरे भाई की हालत भी अजीब सी हो रही थी। मेरे भाई ने कहा, “अब तुझे ज्यादा तकलीफ नहीं दूंगा, अब देख तुझे कितना मजा आता है।” मैं सोच रहा था कि इस काम में क्या मजा आ रहा होगा। तभी मेरे भाई ने मनीष को झुकने के लिए कहा तो वो भाई की तरफ कमर करके खड़ा हो गया।


भाई थोड़ा आगे बढ़ा और अपना लंड मनीष की गांड पर लगा दिया और एक हाथ से मनीष के कंधे पर हाथ रखकर उसे झुका दिया। अब मेरे दोस्त के कुल्हे पीछे को निकल आए और मेरे भाई का लंड बिल्कुल मेरे दोस्त की गांड के निशाने पर था। बस एक झटके की देर थी। मैं भी उस झटके का इंतजार कर रहा था। मैं देखना चाहता था कि मेरे दोस्त मनीष का क्या हाल होता है। तभी मेरे भाई ने एक झटका मारा मगर अंदर नहीं गया, फिसल कर राइट साइड चला गया। मनीष की सिसकी निकल गई, “आह्ह…” और साथ में मेरी भी। मेरे भाई ने थोड़ा सा तेल अपने लंड पर लगाया और कुछ बूंदें मनीष की गांड पर लगा दी।


बस उसके बाद फिर वही सीन था। मेरे भाई ने मनीष को बिल्कुल झुका लिया और उसके कुल्हे पकड़ कर एक झटका मारा। तभी मेरा दोस्त चिल्लाया, “मार गया… दर्द हो रहा है… निकालो बाहर निकालो…” मेरा दोस्त छटपटा रहा था, मगर मेरे भाई उसे छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे। वहां मनीष तड़प रहा था और यहां मेरी गांड में भी कुलबुलाहट शुरू हो गई थी। तभी मेरे भाई ने एक और झटका मारा और फिर मेरा दोस्त चीखा, “तुम तो कह रहे थे कि मजा आएगा मगर मेरी तो जान निकली जा रही है… प्लीज निकाल लो अपना लंड, बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने देखा कि अब भी भाई का आधा लंड बाहर निकला हुआ था। मैं सोचने लगा कि मेरा दोस्त मेरे भाई के लंड को पूरा अंदर नहीं करा पाएगा।


मेरे भाई ने कहा, “बस जितनी तकलीफ होनी थी हो गई, अब देख मैं तुझे जन्नत की सैर कराता हूं।” इतना कह कर भाई ने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू कर दी। मेरे दोस्त के मुंह से अब भी आहें निकल रही थीं, “आह… आराम से करना…” कुछ इस तरह से मनीष के मुंह से आवाज निकल रही थी। मैंने भी उन्हें देखते-देखते अपना लंड अपने हाथ में ले लिया था। वो सीन देख कर मेरी हवस खराब हो रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने गौर किया कि मेरे भाई का बचा हुआ आधा लंड भी मेरे दोस्त की गांड में जा चुका है। मैं सोच रहा था कि वो नहीं झेल पाएगा मगर वो पूरा ले जा चुका था।


मेरे भाई ने अब अपनी रफ्तार बढ़ा दी और मेरे दोस्त की गांड में अपना लंड को आगे-पीछे करने लगा। मुझे ये जान कर हैरानी हुई कि अब मेरा दोस्त दर्द से चिल्लाने के बजाए चुपचाप झुका खड़ा अपनी गांड मरवा रहा था और उसके चेहरे पर एक संतुष्टि थी। अब मेरे भाई ने तेज-तेज झटके मारने शुरू कर दिए। अब मेरा दोस्त भी उनका साथ दे रहा था और अपनी गांड को पीछे की तरफ धक्का मारते हुए कह रहा था, “आह्ह्ह… और तेज… और तेज… आह्ह्ह… पूरा जड़ तक घुसा दो… फाड़ दो… मजा आ रहा है… सच कहा था तुमने, जन्नत की सैर से भी ज्यादा मजा आ रहा है।” मैं सोचने लगा कि काश मैं अपने भाई की जगह होता तो मैं भी जन्नत की सैर कर रहा होता।


मनीष तो जैसे खुशी से पागल हो गया था। अब तो वो खुद ही उछल-कूद मचाने लगा था। उसकी हालत देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता था कि उसे कितना मजा आ रहा होगा। मुझे अपने भाई से जलन हो रही थी, काश मैं उसकी जगह होता तो कैसा होता। थोड़ी देर बाद मेरा भाई शांत पड़ गया, शायद उनका रस निकल गया था। मेरा दोस्त बहुत खुश था। मेरे भाई ने कहा, “क्यों आया ना मजा।” मेरा दोस्त बोला, “हां भैया, खूब मजा आया, अब मैं रोज तुमसे ये काम करवाया करूंगा।” मनीष का चेहरा इतना खुश था कि वो फिर से गांड मरवाना चाह रहा था। पर मेरे भाई ने कहा कि अब बस मनीष, बाद में मारूंगा। तो इस तरह मेरे भाई ने मनीष की गांड मार दी।


क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है, कमेंट में बताओ ना।


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