ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया -१ : Antarvasna3
- Nilesh Lonke
- Jun 28
- 13 min read
मेरी अपनी कहानी खिला पिला कर लंड को वश कर लिया" और खिला पिला कर लंड को वश कर लिया:२ को बोहोत सारे पाठकों पढ़ा कुछ पाठकों ने मुझे मेल भी किया । मेरी कहानी को सबने दिया प्यार हि मुझे आगे कि कहानी लिखने को प्रेरणा दे रही हैं।
मेरी पिछली कहानी मैं आपने पढ़ा नीलम और पुनम ने मेरे औरतों कि सोच को बदल दिया । उन्होंने अपने बदले के लिये मुझे अनघा से संबंध बनाने के लिए प्रवृत्त कि था। मैंने भी उनके लिए उन्होंने जो कहा ओ मैंने किया, अब आगे
पुनम और नीलम का पुरा काम मैंने सेट कर दिया था। मैं आज भी नीलम और पुनम के हि साथ हि रहता हुं।
मैं तीन साल पहले अनघा से मिला था। अनघा को मैं बाहर हि मिलता था। नीलम और पुनम को मालुम था । मैंने कभी अनघा ओ अपने घर नहीं लाया। अनघा के लिये मेरे मन मैं अलग जगा थी, इसलिए मैंने अनघा को भी पापड़ बनाने मशीन दिलवा थी।
उस कि भी रोजी रोटी का इंतजाम पक्का हो चुका था। उस के बाद मैं उसके घर भी कभी कभी जाता था। अनघा मुझे हमेशा नीलम और पुनम से कुछ अलग सेक्स मैं साथ देती थी। उसके साथ सेक्स मैं अलग हि मज़ा आता था। महिने मैं दोन बार तो अनघा से मिलता हि था।
एक दिन सुबह सुबह अनघा ने फोन आया और मुझे घर पर बुलाया। मैं मिलने गया अनघा के घर तो अनघा के घर बोहोत सारे लोग थे। उस का पती दारु पी पी कर मर चुका था। मैंने नीलम को फोन किया तो बोली अच्छा हुवा मर गया।
मुझे वहा पे अनघा कि ननंद शोभा नजर आयी थी। शोभा भाई मर चुका था। बोहोत रो रही थी। फिर भी मेरे तरफ उसकी नजर अलग नजर आ रही थी। मैं उसे और वो मुझे चुपके चुपके देख रहा थे। अनघा के पंती का अंतीम संस्कार होने बाद, स्मशान भूमी से वापस अनघा के घर तक मैंने शोभा और दो मेहमान को अपने गाड़ी लाया।
शोभा दोनों महमान गाड़ी निचे उतने तक बैठी रहीं, बोली "आप नीलेश हैं ना" । मैं बोला "हा"। शोभा बोली "मुझे आपसे बात करनी हैं, आज नहीं मैं दो हफ्ते बाद फोन करती हुं" और उसने मेरा नंबर ले लिया।
मैंने यह बात अनघा से तीन दिन बाद फोन पर बोली। तब अनघा बोली जब उसका फोन आये गा, तब उसे सामने मिलने को बोलना। तीन हफ्ते बाद शाम के समय शोभा का फोन आया। उसने उसके घर का पता मुझे भेजा। मैंने अनघा से फोन कर सब बोल दिया, अनघा ने मुझे उस के घर मिलने बुलाया। मैं अनघा के घर गया। तो अनघा घर पर अकेली थी।
अनघा कि पहले एक रुम किचन बाथरूम था आज एक पिछला घर उसके घर को मिला सुनवा था। अनघा बोली "शोभा कि पिछली खोली अब एक कर लिया हैं, तुम गाड़ी लेकर नहीं आये आज"। मैं कहा "दुरुस्ती के लिये शो रुम मैं लगा कर आया हुं"। अनघा बोली "मैं अभी आती हुं"। अनघा ने मेरी चप्पल घर के अन्दर रक्खी । घर बाहर चली गयी, घर को बहार से ताला लगाया। गेट को ताला लगाया, मुझे कुछ समझ मैं नहीं आया। दस मिनट बाद पिछले दरवाजे से आवाज आयी नीलेश दरवाजा खोलो।
मैंने दरवाजा खोला अनघा घर के अन्दर आते हि मुझे लिपट गयी। रोने लगी थी और अपना दर्द बयां रही थी। मैं उसकी बातें सुन उसे सहला रहा था। उसने कबुल किया "मैंने हि नीलम कि जिंदगी बरबाद कि थी" "अब आज नीलम हि सहारा दे रहीं हैं"। मैंने अनघा से कहा "जो हमें होगा ओ सब हम तुम्हारे लिये भी करेंगे, तुम चिंता मत करों"। मैं अनघा से अलग हो गया, मैंने दीवार पर लगी उसके पती कि तस्बीर को निकाल कर पलंग के निचे रख दिया। अनघा कुछ भी बोली। अनघा साड़ी मैं थी। मैंने शोभा के बारे में बताया। अनघा हल्की हल्की हंस रही थी। अनघा बोली तुम अब कहां हो शोभा के घर मैं हि हो।
रात हो रही थी। अनघा ने साड़ी उतार फेका और गाऊन पहन लिया। तीन हफ्ते से नीलम अगर अलग थी तो पुनम बीमार थी इसलिए लन्ड को बोहोत आराम मिल चुका था। अनघा पहले लिपट चुकी थी और अब साड़ी निकालते हि मेरा लन्ड का आकार रहा चुका था। अनघा ने नीलम को फोन लगाया और बोली नीलेश आज रात मेरे साथ हैं। नीलम बोली जब मन भर जाये तब भेज दें, मुझे चिंता नहीं। अनघा खाना बनाने लगी थी। उसने तीन चार भाकरी बनाने बाद मुझे पुछा "तुम भाकरी और दुध खाना " मैं "हां" बोला। अनघा ने और मैंने साथ मैं हि दुध मलाई भाकरी गुड़ खाया।
अनघा जब पहिली बार मिली थी तब उसे पैसे कि जरुरत थी और आज अनघा मुझे अपना सहारा समझतीं थी। अनघा बाथरुम मैं चली गई थी। मुझे कपड़े निकालने को बोली, मैंने अपने सारे कपड़े निकाल कर सिर्फ निकर पर बेड पर सो था। मुझे भी बाथरूम जाना था। मैंने देखा बाथरुम का दरवाजा खुला हैं, मैं भी बाथरूम के अंदर गया। अनघा एक लाल रंग कि नाइटी पहन रही थी। मैंने उसके सामने हि मेरी निकर निकाल फेकी, लन्ड को सहलाते सहलाते पीशाब कि पिछे मुड़ते हि मैने अनघा को उठा, लाकर बेड पर पटक दिया। अनघा कि नाइटी खिंच कर निकाल फेकी। निकर ब्रा भी निकाल फेंके। अनघा बोली "तुम बेड पर पुरे कुत्ते बन जाते हो। मैं बोला "पसंद नहीं क्या" ? अनघा बोली "पसंद नही होता कुत्ता तो घर मैं बंद करती क्या"?
अनघा ने मुझे बेड पर सुलाया, अनघा बेड पर खड़ी हो गयी, मेरे सिर के कानों पास अनघा ने उसके दोनों पैर लाकार खड़ी हो गयी। मुझे सिर्फ अपनी चुत दिखा रहीं थीं। मैंने आज तक अनघा कि चुत चाटी नहीं थी। आज इच्छा हो रही थी। अनघा नीचे मेरे छाती पर बैठ गयी। मुझे अब सिर्फ अनघा के चुत का सुगंध आने लगा था। अनघा बोली पिछले दो साल से मैं सिर्फ तुम्हारी हुं। मैंने अनघा से पुछा "शोभा अब कहां गयी हैं" तब अनघा ने उसका खिड़की मैं पड़ा फोन लिया और शायद शोभा को फोन लगाया था बोली " कहा हैं"। मैंने अनघा को देखा तो अनघा ने अपनी चुत मरे मुंह पर आगे कर दी थी। मैं चुत चाटने लगा था।
अनघा मेरा सर पकड़ मुझे से चुत चटवा रही थी। अनघा ने उस का पानी मुझे पिला कर अपनी चुत मुझसे चटवा चटवा कर साफ़ करवा चुकी थीं। अनघा बार बार घड़ी देख रही थी, रात के साडे दस बज चुके थे। घर का गेट खुलने कि आवाज आयी थी, अनघा बोली शोभा आ गई हैं। मैं उठने लगा था।
अनघा बेड पर हि थी। अनघा ने मुझे उठने को मना किया । तुम ऐसे हि सोते रहो बोली। अनघा ने मेरे लन्ड को हाथ मैं लेकर मुझे देख कर बोली "इसे आज नया खड्डा खोलना हैं, रोज रोज बेचारा कब तक पुराने हि खड्डे खोदे गा।" मैं सब समझ चुका था। शोभा के पास घर गेट कि चाबी थी, इस लिए वो सीधे घर मैं आ चुकी थी। मुझे और अनघा को नंगा देख, शोभ बोली "भाभी तुमने तो पुरा हि खाना खा लिया, लग रहा हैं, मरे लिये कुछ बाकी हैं या नहीं।" अनघा बोली "अभी शुरवात भी नहीं कि हैं शोभा", तुम पेट कि पुजा कर लें फिर तुम्हें सब खाना खिलाती हुं"।
हम तीनों हि हंस रहे थे। शोभा लाईट लगा रही थी तो अनघा ने मेरे लन्ड पर बेडशीट डाला दिया। अनघा नंगी हि थी। लाईट लगते हि मैने शोभा देख रहा था और शोभा मुझे देख रही थी। शोभा थोड़ी शरमा रही थी। अनघा बेड से उठने लगी तो मैंने अनघा को पकड़ लिया। शोभा बाथरुम मैं गयी तो अनघा बोली "पहले शोधा के साथ करो, मन नहीं भरा तो मैं कहा भागी जा रहीं हुंं, अगले महीने उस कि शादी हैं। मैं बोला जैसा तुम कहो।
अनघा बेड से उठी और गाऊन पहन लिया। शोभा को खाना खिलाने लिए निकल गयी। शोभा नहा थो कर गाऊन पर बहार निकली। शोभा ने मुझे अकेले बेड पर देख, अनघा से बोली "भाभी आपने लगी आग बुझाई दी" अनघा बोली "खाना खा ले पता चल जायेगा" शोभा बोली "चलो आज देखना तो हैं ही"। मैं बेड पर हि सोते हि रहा। शोभा ने खाना खाया। अनघा और शोभा आपस मैं कुछ खुसर-पुसर हो रही थी मुझे सुनाई नहीं दे रही थी। लगभग साडे ग्यारह बज गये थे।
अनघा ने शोभा खाना दे कर मेरे पास बेड पर आकर बैठ गयी, मेरे कान मैं आकार बोलने लगी "नीलू शोभा को आराम से करना" "पहली बार हैं" मैं जोर से बोला "क्या" मेरे मानों होश हि उड़ गये थे। मैंने बोला "तुमने तो देखा हैं ना" अनघा बोली मालुम हैं मगर आराम से याद रखना।
शोभा ने लाईट बंद कि बोली "क्या खुसर-पुसर हो रही हैं"। अनघा बेड से उठी और शोभा को बेड पर बिठा कर खुद सामने खुर्ची पर बैठ शोभा से बोली "तुम्हारी पहली रात हैं", "याद रखना", "बातें करना और अनुभव लेना अलग होता हैं"। मैंने शोभा को पकड़ लिया और अनघा से बोला "तुम चुप हो बैठ कर सिर्फ देखने का काम करो"।
मैंने शोभा के कपड़े निकाले, शोभा को चाटने लगा। मैंने जीभ से शोभा का पुरा शरीर चाटने लगा, शोभा आहे भर रही थी। मैं जानबूझ कर शोभा के शरीर को मैं लन्ड लगने नहीं दे रहा था। मेरे लन्ड के साथ मेरे अंडकोष लटके हुए अनघा देखा रही थी। अनघा बोली "नीलेश रबर लगा रहीं हुं"। शोभा बोली "क्या कर रही हो भाभी"। अनघा बोली " कुछ नहीं आग लगा रही हुं", मैंने अनघा के मन कि बात समझ चुका था। मैंने शोभा कि बची निकर उतार फेंक दि, चुत पर जीभ फिराने लगा।
अनघा को रबर लगाने लिये दोनों पैर फैला कर घुटनों पर छुक कर चुत चाटने लगा तभी अनघा खुर्ची से उठी दोन रबर बैंड मैं अंडकोष को अच्छे से बांधने लगी, लन्ड के चमड़े को अच्छे उपर नीचे हिला कर देखने लगी। तने हुं लन्ड कि हालत देख अनघा ने मेरे रबर अंडकोष र सेट करने बाद लन्ड को जोर से दबाया और अनघा जोर से बोली "शोभा तुमने तो नीलेश का खून खोल दिया हैं बेटा"। शोभा आहे भरते भरते बोली "क्या हुआ भाभी"। मैंने अनघा कि और देखा तो अनघा बोली "कुछ नहीं शोभा, बातें करना और अनुभव लेना अलग होता हैं ना"। शोभा बोली " हां भाभी"। मैंने शोभा के चुत का पानी चाट चाट कर निकाल दिया था अब शोभा मुझे अपने उपर खिंच रहीं थीं।
शोभा बेड पर उठ कर बैठी थी और मुझे जोर से चुमने लगी थी। मुझे शोभा अब अच्छे से चिपक चुकी थी। शोभा ने मुझे चिपके चिपके अपने उपर खींच लगी था। अब मैं शोभा के उपर सो चुका था। शोभा के चुत पर पैरों पर अब मेरा मुसल टच हो चुका था। अनघा बोली "शोभा तेरा भी खून अच्छा खोल यहां हैं बेटा", बड़ी हि प्यास दबा के रक्खी हैं तुने" कहते कहते खुर्ची से उठकर गाऊन निकाल कर बेड पर आकर शोभा साथ आकर सो चुकी थी। शोभा भाभी भाभी कहते आहे भर रहीं थीं। अनघा मेरा सर और पीठ उसके हाथों से सहलाने लगी। मैंने शोभा के स्तनों को स्तनों को बोहत हि ज़ोर से मसल रहा था। अनघा कि आंखे मुझे सब बता रही थी। शोभा ने उसके एक हाथ मेरे पिठ को सहलाते सहलाते मेरे जांघों में ले जाकर निचे से मेरे लन्ड उसके हाथ मैं ले लिया। उसकी मानों हवस हि जैसे निकल गयी।
शोभा बोल पड़ी "भाभी बोहोत बड़ा लन्ड हैं"। अनघा और मैं दोनों हंस पड़े। अनघा बोली "कैसा हैं"? शोभा बोली "गधे जैसा हैं भाभी" । अनघा और मैं वापस हंस पड़े। अनघा ने मुझे पीठ पर एक उंगली से जोर से दबा कर चुदाई का इशारा दिया। मैंने अनघा कि और देखा तो उसने खिड़की मैं पड़े कोकोनट तेल को दिखाया। मैंने कोकोनट तेल लिया। मुझे कोकोनट तेल उठाते देख शोभा बोली "भाभी, आप सच बोलती थी, सच मैं बोहोत हि बड़ा हैं। अनघा शोभा से बोल रही थी "चलो मेरी बातें तो सच लगने लगी शोभा तुझे। शोभा मुझे देख अनघा से पुछ रही थी "नीलेश मुसल को तेल क्यू लगा रहे हैं" । तबतक मैंने तेल थोड़ा हि लन्ड के मुंह पर लगाया लिया था। अनघा ने मेरी तरफ गुस्से से देखा। मैंने फिर बोहोत सारा तेल लगाया।
अनघा शोभा कि स्तन सहलाते शोभा को बता रहीं थीं "अभी तुझे आदत नहीं हैं इस लिए तेल लगा रहा हैं नीलेश", "जब आदत लग जायेगी तब नहीं लगाएं गा तेल", तेल लगाने से तुम्हें दर्द नहीं होगा बेटा", मैंने तुम्हें ज़बान दि मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दुंगी" चल अब चिंता छोड़ और नयी जिंदगी का मजा लें" यह बोल कर अनघा मेरी तरफ देखकर बोली नीलेश "जरा आराम से पहली बार हैं" और आंख मार कर रहीं थीं। तब तब मैंने शोभा के कमर के निचे दो तकिया डाल दिये।
मैंने शोभा कि कमर दोनों हाथों से पक्की पकड़ी ली, लन्ड को एक हाथ से चुत पर अच्छे से रगड़ते रहा। अनघा ध्यान से शोभा के पेट पर सर रखकर देख रहीं थीं। मैं पांच मिनट तक लन्ड को चुत पर इसी तरह से बाहर हि रगड़ता और सहला रहा था। अनघा समझ गयी और हंसने लगी थी। उसने अपना सर शोभा के स्तनों को चुसने में लगा दिया। शोभा ने जब अपनी कमर उठाईं, मैंने जोर लगा के लन्ड को चुत मैं डाल दिया। लन्ड का एक इंच हि हिस्सा अन्दर गया होंगा। शोभा चिल्लाई उठी थी मगर अनघा ने उस के मुंह पर हाथ से दबा दिया था।
शोभा अपनी कमर मेरे हाथ से छोड़ ने के लिये प्रयास कर रही थी और रो रही थी। अब शोभा अनघा को गली देने लगी। शोभा बोल रही थी "भाभी तुमने मेरी चुत फाड़ दि हैं, भोंसड़ी कि तुमने मुझे भी छिनाल बना दिया, अनघा मेरे तरफ देख हंसतीं, चोदने का इशारा किया। मैंने तभी लन्ड बहार निकलता वापस चोद देता। थोड़ा थोड़ दो तीन इंच लन्ड चुत मैं डाल चुका था। शोभा जोर जोर से छुटने कि कोशिश कर रही थी। मैं थोड़ा रुकता और शोभा को सहलाता पर अनघा ने मुझे वापस ठोक देने इशारा किया, जोर से अनघा बोली "निलेश पहली बार हैं समझ नहीं आ रहा हैं क्या ?
शोभा बोली "हां ना भाभी" तुम हि समझा वो" अनघा ने स्माइल दिया मैंने पुरा लन्ड बाहर निकाल तो खून बह रहा था। मैंने वापस लन्ड चुत पर सेट कर दोन तिन बार जोर जोर धक्के लगा कर पुरा लन्ड शोभा के चुत मैं डाल दिया। यह देख अनघा ने रुकने को बोला। शोभा को जैसे अब चक्कर आ चुकी थी। अनघा उठी कर, पाणी ले आयी, शोभा के मुंह पर मारा और थोड़ा पानी पिलाया। शोभा बोल रही थी "भाभी सच मुझे माफ़ कर दो, मुझे छोड़ देने को बोलो ना"। तब अनघा बोली रहीं थीं "बेटा हो चुका हैं, तुम भी पुरा लन्ड खा चुकी हैं"। मैंने थोड़ा लन्ड बाहर निकाल और वापस अन्दर डाल दिया। अब मैं धीरे धीरे शोभा को चोदना शुरु कर चुका था।
अनघा बेड पर बैठी मेरे और आई बोली नीलेश सिर्फ संतुष्ट करो फिर छोड़ दो। तभी मैंने पुरा मेरा शरीर शोभा पर डाल दिया, अनघा ने शोभा के एक पैर को उठाया और मेरे कमर पर डाल दिया । शोभा को हल्का लगते हि उसने दुसरा पैर भी मेरी कमर मैं डाल मिशनरी पोजीशन लिया। अनघा शोभा से बोली "शब्बास बेटा",। मैं अब मेरी लय मैं चोदना शुरु कर चुका था। शोभा भी अब मुझे साथ देने लगी, कमर उठा उठा कर चोदने लगी पर टिकी नहीं और आहे भर पानी छोड़ गयी।
मैंने अनघा को देखा तो अनघा बोली "नीलेश छोड़ दो"। शोभा के चुत से मैंने लन्ड निकाल तो शोभा के चुत से खून और पानी कि सैलाब निकला था। शोभा बोली "भाभी ठिक हि कहती थी मेरा नीलेश बेड पर कुत्ते हो जाता हैं। अनघा बोली "अरे कुत्ती या सिर्फ तेरा हुवा हैं, अभी उसका बाकी हैं, चुप रख अपना मुंह, नहीं तो वापस कुत्ते को चोदने को बोलूगी तुझे"।
मैं बेड नीचे उतरा चुका था। तो अनघा मुझे चिपक गयी। शोभा कुछ समझ पा रहीं थीं और हमें देख रहीं थी। अनघा ने मेरे लन्ड पर बोहोत सारा पानी डाला अच्छे से साफ किया और तने हुए लन्ड को चुसने लगी। पांच मिनट लन्ड चूसने के बाद अनघा घोड़ी बन गयी, उसने अपना मुंह शोभा तरफ किया, मैं पहले निचे बैठ अनघा कि पिछे से चुत चाटने लगा, चुत चाटते चाटते, गांड़ को उंगली से सहलाने लगा।
तभी अनघा बोली " समझ गयी मगर मेरी नहीं शोभा कि जरुरत दुंगी पहली, । मैं और अनघा हि इशारा समझे चुके थे। शोभा बोली "क्या हुआ भाभी" ? अनघा बोली "कुछ नहीं", "कल से तेरी चुत पुरी मिलेगी", जब तक मुसल शांत नहीं होता तबतक"। शोभा बोली "अच्छा" । मैं खड़ा रहा बोला "अनघा तुम सच मैं पुरी छिनाल हो"। शोभा बोली "देखा भाभी नीलेश भी बोल रहा हैं"। अनघा और मैं दोनो हंसने लगे।
मैंने अनघा के चुत मैं लन्ड सेट कि चोदने लगा था। दस मिनट बाद अनघा ने भी वापस पानी छोड़ा चुकी थी। पर मेरा पानी नहीं निकला था। अनघा सीधे हो कर मेरे तरफ देखा रही थी। और लन्ड को देख अनघा बोली "कुत्ते रबर निकाला ना"। मैं बोला "लगाया किसने था"। अनघा ने बोहोत हि क़ातिल स्माइल दिया और गुस्से से अंडकोष को रबर निकल फेंक चुकी थी। शोभा बेड से उठ रही थी। मैंने अनघा को इशारा किया तो वो नहीं बोली। बेड पर अनघा दोनों पैर फैलाकर बैठ गयी, अपने हाथ से लन्ड चुत पर सेट कर बोली "मैं बोली थी मैं हुं" मैं अनघा को जोर जोर से चोदने लगा था। शोभा देख रही थी, भाभी आज भी चुदाई वक्त आहे भर दर्द बर्दाश्त कर चुदाई का आनंद लें रहीं थीं।
आज मेरे लन्ड ने शोभा से जादा अनघा का पानी निकाला था। मेरा और अनघा ने पानी साथ मैं निकला। कमरे मैं चंपक चंपक कि बोहोत देर गुंज रही थी। मैंने जब अनघा से चुत से लन्ड निकाला, शोभ ने गधे जैसा लन्ड देखा, हाथ मैं लिया। अनघा का तीन बार पानी निकल चुका था, तो वैसे हि बेड सो पड़ी थी। मैंने शोभा के निकर से अनघा की चुत साफ करली, अनघा के पैर बेड पर डाल दिये। और शोभा बेड से उतर बाथरुम चली गयी।
मैंने ज़मीन पर हि सो गया था। शोभा भी मेरे साथ जमीन पर हि सो गयी। सुबह मेरी नींद दस बजे खुली। मैं अकेला जमीन पर सोया था। शोभा फोन पर बोल रही थी "मैं काम पर नहीं आने वाली मेरी तबियत खराब हैं"। अनघा बाथरुम से बहार निकल रही थी। मेरी नींद खुली देख अनघा बोली "नीलेश गाड़ी ले आवो, शोभा को अपने ले जानो घुमाने के लिए" ।
शोभा ख़ुश दिख रही थी। अनघा बोली "नीलम, पुनम और मैं तुमसे पुरी संतुष्ट हुं, हमें अब इच्छा भी तुमने रखीं नहीं हैं", "अभी शोभा को दस दिन पुरी संतुष्ट करो। मैं बाथरूम गया, नहा थो कर, गाड़ी लेने गया, मगर मुझे गाड़ी मिली नहीं। वापस आया तो शोभा नहीं थी। अनघा अकेली घर मैं थी। अनघा ने बताया शोभा को फोन किया। शोभा बोली "मैं शाम को आ जाती हुं"।
अनघा ने मुझे बताया कि "शोभा हमेशा मुझे छिनाल बोलती थी, मुझे बोहोत ग़लत लगता था, मेरे पती कि सौतेली बहन हैं, घर कि हालत खराब थी, तो पढ़ाई छोड़ दस साल से काम रहीं थीं। मगर ज़बान बोहोत चलती थी। खुद को बोहोत सभ्य समझतीं थी। तुमने बताया उसने तुमसे खुद नंबर लिया तो मैं उसे एक हफ्ते से रोज रात तुम्हारे लन्ड हि से किस्से सुनाती थी, एक हफ्ते से उसे रात को त सुनकर भी मुझे ग़लत ठहराया करती थी, मैंने तु भी लेले नीलेश लन्ड मैं दिलवाती हुं तो मान गयी, कल "मुझे उसे भी अच्छे मर्द का लन्ड क्या होता हैं, दिखाने का था, कल उसने देख लिया"।
मैं अनघा से बोला "नीलम, पुनम और तुम्हे भी बच्चा नहीं हुवा हैं मगर सेक्स का अनुभव तो था, मगर मेरी बीबी अब शोभा मेरे जिंदगी मैं ऐसी हैं जिन से मैंने पहली बार सेक्स किया हैं। बीबी साथ मुझे का सेक्स और कल तुम्हारे साथ शोभा से सेक्स बोहोत अलग था। अनघा तुमने भी नीलम जैसे हि शोभा कि चुदवा कर बदला लिया हैं ना ? अनघा बोली "नहीं", मैं अब मेरी पुरी जिंदगी सेट कर चुकी हुं तुम्हें बाद मैं पता चलेगा, कल तुम्हारी शोभा के साथ मैने सुहागरात करवाईं यह सच है" । अनघा हंसने लगी।
शोभा आ गयी। मैंने शोभा से बोला "हम बहार नहीं जा रहें हम यहां हि रहेंगे। वैसे हि तुम अनघा के साथ रहेंगी, अनघा तुम्हें संभालती रहेगी"। अनघा बोली "मगर मुझे दुकान पर भी जाना होता हैं , याद रखना"। हम तीनों हसने लगे। अनघा बोली "नीलेश तुमने सारी औरतों को पेट पुजा काम भी दिया हैं हां ह बात सही हैं कि सारी औरतों वो भी काम किया हैं मगर शोभा को भी कोई शादी के बाद कोई पेट पुजा का अच्छा-सा काम दे दो, उसे नोकरी कि जरुरत नहीं रहेगी।
मैं बोला "ठिक हैं"। शोभा अभी पार्लर से जाकर मेकअप कर आयी थी, तो सुंदर लग रही थी। मैं वहीं शोभा को पकड़ कर चुमने लगा। तो अनघा बोली "तुम शोभा को खावो मैं खाना बनाती हुं" । मैंने शोभा को शाम को हि खाने से पहले हि अच्छे से चोद दिया।
बाकी कहानी अगले भाग मैं...
तो कैसी लगी पाठको मेरी ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया-१ कहानी मुझे प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.
Antarvasna3

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