ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया-२: Antarvasna3
- Nilesh Lonke
- Jun 28
- 12 min read
मेरी अपनी कहानी खिला पिला कर लंड को वश कर लिया, खिला पिला कर लंड को वश कर लिया:२ और #ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया को बोहोत सारे पाठकों पढ़ा कुछ पाठकों ने मुझे मेल भी किया । मेरी कहानी को सबने दिया प्यार हि मुझे आगे कि कहानी लिखने को प्रेरणा दे रही हैं। मेरी पिछली कहानियाँ पढ़ने के लिए कहानी के शीर्षक पर मेरे नाम पर क्लिक करे।
अपने पिछले भाग मैं पढा था...
शोभा अभी पार्लर से जाकर मेकअप कर आयी थी, तो सुंदर लग रही थी। मैं वहीं शोभा को पकड़ कर चुमने लगा। तो अनघा बोली "तुम शोभा को खावो मैं खाना बनाती हुं" । मैंने शोभा को शाम को हि खाने से पहले हि अच्छे से चोद दिया।
अब आगे...
अनघा दुर बैठी खाना बनाते देखती रही सिर्फ।
हम सब ने खाना खाने, मैं खाना खाने बाद वापस शोभा से चिपक यहां था। तो शोभा नहीं बोल रही थी। अनघा बोली "शोभा तुम भी ना बोहोत नखरे करती हैं, चल आज तुझे आदमी लन्ड चुसना सिखाती हुं"। कहकर अनघा ने मेरी निकर निकाल फेकी। मैं लुंगी, निकर और टि शर्ट पर था। अनघा ने लुंगी मेरी लुंगी निकर फेकी, सीधे लन्ड को देख कर बोली "देख शोभा जैसे भैंस दुध के थन होते है वैसा लन्ड हैं ना"। शोभा लन्ड देख बोली "हां भाभी"। अनघा शोभा से बोली " तो चल शोभा आज तुम्हें आदमी लन्ड का तैयार करने करना और आदमी लन्ड को अपनी आदत लगा के वश करने का कैसे सिखाती हुं।
मैं नंगा खाट पर बैठ गया था। अनघा ने मुझे खाट पर पैर नीचे छोड़ खाट पर सुला दिया। अनघा एक पैर कि और ज़मीन पर बैठे गयी, लन्ड को अंडकोष को सहलाने लगी। जैसे भैंस के दुध के थन को सहला रही हो ।शोभा को भी अनघा ने जमीन पर बिठाया लिया। अनघा ने शोभा को लन्ड चुसने को कहां और वो खुद अंडकोष को चुसने लगी। शोभा को लन्ड चुसने कि आदत नहीं थी।
तो अनघा बोली " आ जा तुम पहले अंडकोष चुस" अब मेरे एक अंडकोष शोभा और दुसरा अंडकोष अनघा चुस रही थी। मैं मानो जन्नत मैं था। अनघा ने शोभा को अच्छे से अंडकोष चुसते देखे, उसके लिए दोनों अंडकोष छोड़ दिये और उपर बेड पर आकर बैठे गयी, मुझे आंख मार के लन्ड चुसने लगी। अनघा बार बार शोभा से बोलती "शोभा देख ले", लन्ड को मैंने कैसा पकड़ा हैं। अनघा लन्ड का पुरा चमड़ा निचे खिचती और लन्ड का मुंह को अपने मुंह मैं ले चुसती। शोभा को अंडकोष चुसते समय दिखातीं। अनघा लन्ड चुसती चुसती और शोभा के मुंह पर तने हुं लन्ड को हाथ मैं पकड़ कर रगड़ती", फिर अनघा को कुल्फी जैसे चुसती।
अनघा लन्ड कि चमड़ी पुरी उपर खिंचकर उसमें अपनी जीभ डाल कर लन्ड को उत्तेजित करती। शोभा सब देख कर अब बेड पर आने लगी थी। तभी अनघा बोली " शोभा अपने बालों का रबर निकाल और दोनो अंडकोष को अंदर लेकर बांध दें, जैसे बाल बांधती हैं वैसे ही"। अनघा आगे बोली "याद रख लन्ड कि चमड़ी ऊपर उठाने बाद हि अंडकोष बांधने हैं। चमड़ी निचे छोड़ बांधने का नहीं"।
अनघा ने लन्ड छोड़ दिया, शोभा को लन्ड दिखा कर बोली "शोभा देखा लन्ड कैसे नाग के जैसे अब अपना फन मार हैं", "चल अब तुम संभाल" । अनघा बेड पर खड़ी हो कर मेरे मुंह मैं उसकी चुत दे कर बोली "तु तो अकेले अकेले मज़ा हि ले रहो हो"। मैं हंस पड़ा । और चुपचाप चुत चाटने लगा। शोभा ने लन्ड कि चमड़ी ऊपर कर अंडकोष को रबर लगा दिया था। शोभा अब बेड के उपर आकर बैठी थी। जैसे हि शोभा लन्ड चुसने वाली थी तभी अनघा बोली "शोभा मुंह मैं पानी आया हैं ना"।
शोभा बोली "हां भाभी बोहोत"। अनघा शोभा से बोल रही थी "पहले मुंह का सारा पाणी लन्ड के उपरी चमड़े को निचे कर और लन्ड के उपर मुंह मैं आया पानी पहले छोड़ दें, फिर सिर्फ लन्ड का बिना चमड़ी वाला हिस्सा मुंह मैं ले "। शोभा भी वैसे हि कर रही थी। अनघा शोभा से बोल रही थी "मैं जैसे कर रही थी, उसको याद कर, वैसे हि करती रहना बेटा" । शोभा भी वैसे हि लन्ड चुस रही थी । जैसे अनघा चुस रही थी।
अनघा शोभा को बता रहीं थीं " लन्ड के बिना चमड़ी वाले हिस्से को गन्ने जैसा चुसती रह, चुसने से मन भरा तो उसपर ये जीभ फिराती रहना और फिर चुसती रहना, शोभा मेरी बात हमेशा याद रख ना, "लन्ड को हिला हिला कर पाणी नहीं निकालने का हैं, हमे लन्ड को जादा से जादा गीले पन कि आदत लगानी होती हैं, आदमी के लन्ड को चुत बाहर गिला पन अपना मुंह हि देता हैं, लन्ड को धीरे धीरे प्यार से सहलाते सहलाते लन्ड चुसती रहना, फिर देखना वहीं लन्ड तुम्हारे लिये जलवा दिखायें गा, तेरा नसीब अच्छा हैं तुझे पुरी तरह तयार लन्ड मिला हैं, तेरे पती के लन्ड भी आगे ऐसे हि चुसना, अपनी चुत कि गर्मी निकालने के लिए लन्ड को ऐसी हि आदतें लगायी जाती हैं, याद रखना।
शोभा को अनघा बोहोत हि उत्तेजित कर रही थी। शोभा अब बोहोत अच्छे से लन्ड चुस रही थी। पंद्रह मिनिट हो चुके थे। अनघा मुझे अपने चुत का अब पानी पिला चुकी थी । अनघा मेरे मुंह के ऊपर से उठी और शोभा को बोली, जा तु भी अपने चुत का पाणी नीलेश को पिला दे। शोभा बोली "भाभी मेरा तो पानी निकल रहा हैं भाभी"। अनघा बोली "तो कुत्ता कब पीने के लिए नहीं बोला हैं", तीन चार औरतों का पानी पी पी कर ही उनके हि कमर तोड रहा हैं। मैं बात सुनकर हंस पड़ा। अनघा बोली देख कैसे कुत्ता हंस रहा हैं।
अनघा ने अंडकोष का रबर निकाल फेक दिया । में कमर उपर बैठ लन्ड को खुद के चुत पर सेट किया, मेरे उपर चढ़ गई। दस मिनट उछल उछल मुझे चोदती रहीं, अनघा थक गयी। अनघा शोभा से बोली "अब तुम चढ़ जा, शोभा लन्ड के उपर। शोभा मेरे कमर पर बैठी मगर उसे चुत में लन्ड लेना जम नहीं रहा था। अनघा ने बेड के निचे जाकर लन्ड पकड़ा, शोभा ने कमर उठा ली,अनघा ने चुत के निचे लन्ड को सेट किया, मैंने कमर उठा कर जोर का झटका दिया। आधा लन्ड शोभा के चुत चला गया। अनघा शोभा से बोली "अब तुम नीलेश को चोद"। शोभा ने लन्ड पर अपनी कमर जोर से छोड़ दि शोभा के चुत मैं लन्ड पुरा सेट हो गया।
शोभा जोर से चिल्लाईं "ऊं मां" , मैंने शोभा कि कमर पकड़ी, और निचे से उपर चोदने लगा। अनघा बोली "लडक़ी सिख रहीं हैं ना", चल शोभा हम कपड़े धोते वक्त जैसे बैठक कपड़े धोते हैं वैसे हि बैठ जा , तुम सिर्फ अपनी कमर उपर नीचे कर, याद रखना तुमने लन्ड माप ले लिया हैं, तु उतनी हि अपनी कमर उठाने ना, आदमी को चोदना भी औरत को आना चाहिए। शोभा फिर आराम से लन्ड पर बैठी, मेरे पेट पर हाथ रखे। धीरे धीरे कमर उठाने लगी। अनघा शोभा को बोल रही थी "बोहत अच्छे शोभा, ऐसे हि सिर्फ कमर उठाती रहना। शोभा को अब मजा आना लगा था। अनघा बोल रही थी "नीलेश जब शोभा उपर तो तुम तुम्हारी कमर उपर उठा लेना, शोभा तुम जब नीलेश कि निचे होंगी तब तुम तुम्हारी कमर पुरी नीचे लाना।
मैं अनघा कि बातें सुन और उत्तेजीत हो रहा था। शोभा कमर उठाती मैं जोर से पुरा लन्ड शोभा चुत मैं डालता। मैं निचे लन्ड लाता शोभा कमर ज़ोर से निचे लाती। अनघा शोभा को शब्बास मेरी जना कहकर, शोभा को उत्तेजित करती, लगभग दस मिनट गुज़र चुके थे। शोभा जोर जोर से आह भर भर अब चुद रहीं थीं। शोभा अपना पाणी छोड़ चुकी थी अब चप्पक चप्पक आवाज कमरें से निकल रहीं थीं। अनघा मुझे देख कर बोली "तुम भी ना नीलेश", शोभा अब मुझे छोड़ बेड पर सो चुकी थी।
अनघा ने पानी लन्ड पड़ लांबा और अच्छे से लन्ड साफ कर, चुसना शुरू कर दिया। अनघा "शोभा शोभा आवाज दे रही थी और मेरा लन्ड जोर जोर से चुस रही थी। शोभा बेड से उठी तो अनघा ने उसे भी चुसने को कहा। अनघा शोभा को बता रही थी " बेटा याद रखना, संभोग मैं दोन को आनंद आना चाहिए, तभी संभोग का मजा आता हैं" । मेरा पाणी निकलने वाला था। अनघा शोभा से बोली "लन्ड का मुंह मैं पुरा भर ली कर", " उपर का चमड़ा निचे कर" , लन्ड के सिर्फ ऊपर के हिस्से पर हि मुंह अंदर लेने के जोर जोर चुस, जैसे गन्ना चुसते हैं वैसे" , शोभा अच्छा प्रयास कर रही थी।
कभी अनघा कभी शोभा ने लन्ड को गले तक अन्दर लेती। अनघा मेरे तरफ देख हंस रही थी। शोभा लन्ड मुंह में अंदर तक लेने लगी तब, अनघा बोली "शब्बास बेटी, चुस ले पुरा" । अनघा ने शोभा सर को मेरे लन्ड पर दबा कर रक्खा और बोली "कुत्ते पिला दे मलाई"। तभी मैंने भी हाथों से शोभा सर पकड़ा दिया, कमर उठा उठा कर पुरी रबडी शोभा के मुंह मैं भर दि।
अनघा मरे अंडकोष को दबा दबा कर पुरी रबडी शोभा को पिला रही थी। मैंने शोभा का सर छोड़ते हि शोभा ने लन्ड छोड़ दिया था, तो अनघा ने झट से लन्ड को पकड़ अपने मुंह लन्ड ले लिया। शोभा का मुंह पुरा भर चुका था मेरे रबड़ी से। अनघा बचीं रबड़ी पी चुकी थी।
पुरा पानी पीने बाद अनघा बोली "शोभा तु मटन कि हड्डी से गोटी खिंचती हैं ना जैसे, वैसे तुमने आज नीलेश हड्डी से गोटी खिंच के निकाली ली हैं। शोभा हंस पड़ी औ मुंह में भरी रबड़ी निगल गयी। मेरी पुरी जान निकली थी, मैं बेड पर हि सो गया अनघा और शोभा निचे जाकर सो गयी।
मेरी गाडी दुरुस्त होने कारण मैं तिसरे दिन अपने घर निकल गया। अनघा ने मुझे वापस आठ दिन के बाद वापस बुला लिया। मैं गया नहीं तो अनघा ने पुनम को फोन किया और मुझे अनघा घर आने को बोला। मैं अनघा के घर गया तो अनघा नाराज थी। शोभा घर पर नहीं थी।
अनघा बोली "निलेश शोभा कि अगले महीने शादी हैं, तुम्हें बताया था। शोभा तुम्हें रोज आद करती हैं। अनघा बोली आप दिन हो चुके हैं तुम आये क्यू नहीं, तो शोभा बोली "मैं जब पहली बार मिली थी तो नीलेश ने मेरा अगवडा और पिछवाड़ा दोनों भी बजा दिया था। शायद नीलेश मेरे बजे से तुम्हारा पिछवाड़ा नहीं बजा सखा इसलिए निकल गया होगा"। मैं बातें सुन उसे गालियां दे रहा था।
अनघा बोली "शोभा तैयार हैं, पिछवाड़ा देने को"। मैं बोला "मगर तुम्हे मालुम हैं मुझे किस का पिछवाड़ा पसंद हैं"। अनघा बोली"पहले शोभा मैं भी अब जिंदगी भर तुम्हारी हि रहुंगी, मुझे पुनम बोहोत पहले बता चुकी हैं कि नीलेश हम तीनों मैं सिर्फ मेरा हि पिछवाड़ा पसंद करता हैं"। अनघा बोली "पहले शोभा की गांड़ मारे बाद, मेरी समझ गये।
शोभा आ गयी उसके हाथ मैं मटन था। अनघा बोली "शोभा नीलम और पुनम नीलेश को सिर्फ मटन हि खिलाती हैं, मैंने हि गलती कि थी दोन दिन खाना बदल दिया था"। शोभा बोली"भाभी तुम भी ना" और कुछ सोचने बाद वापस शोभा बोली "तभी तो इतना जोर हैं"। शोभा कि बाते सुन मैं और अनघा हंस पड़े। रात का खाना खाया। मैं अनघा कि बातें सुनकर जिंदगी मैं पहली बार गांड़ मारने कि मन मैं तयारी कर रहा था।
खाने एक बाद शोभा खुद आकार चिपक गयी। मैं जमीन पर हि सोया था। आज अनघा भी साथ हि सोयी थी। मैंने पहले शोभा की चुत हि मारी। मैंने अनघा को शोभा कि चुत मारने के बाद अंडकोष को रबर लगाने के बोला। अनघा समझ गयी। अनघा ने अंडकोष आज बोहोत मुलायम रबर से बांध दिया। मैंने शोभा को बेड पर उलटा सुलाया, उसके पैर को बेड नीचे हि रख्खा। शोभा के चुत को हाथ से बार बार सहलाता रहा।
चुत पर हाथ फिराते फिराते मैंने शोभा कि गांड़ मैं एक उंगली डाली थी निकाल ली। अनघा सब देखते मेरे हाथ मैं कोकोनट तेल लिया। मैंने कोकोनट तेल की बोतल का मुंह हि शोभा कि गांड़ पर लगा और बोहोत सारा तेल गांड़ में डाल दिया। मैंने तने हुए लन्ड को पहले पुरा के पुरा एक हि झटके मैं पिछे से चुत मैं हि डाल दिया। शोभा गांड़ के लिए तयार थी, मगर मैंने चुत मैं लन्ड डाल दिया तो शोभा हंस पड़ी। अनघा बोली "पुरा कुत्ता हैं तु", मैंने पांच मिनट चुत चोदने बाद आहे भर शोभा देखकर।
मैंने लन्ड बाहर निकाला और शोभा संभल पाती इससे पहले उसके गांड पर रक्खा सिधे एक इंच लन्ड, शोभा के गांड़ मैं डाल दिया। शोभा कि जोर चीख पड़ी, अनघा जमीन पर बैठे मेरे अंडकोष सहला रही थी । मैंने वापस लन्ड बाहर निकाल धक्का दे कर आधा गांड़ में डाल दिया था। शोभा नहीं नहीं बोल रही थी। मैं रुका नहीं पुरा लन्ड गांड़ मैं डाल हि दिया।
अनघा ने मुझे आंख मारी और कातिल स्माइल दी, अनघा बोली "शोभा पुरा गया हैं" नीलेश पांच मिनट रुक जाओ फिर आगे बढ़ना। अनघा किचन और चली गयी बर्फी ले कर आ गयी। मैं कुछ समझा नहीं, शोभा का दर्द कम हो रहा था। अनघा ने मुझे बर्फी खिलाई, मरे कान बोली "छिनाल कि तुने गांड़ भी मारी अब पुरी बाजा बजा दे"।
अनघा ने कोकोनट तेल कि बोतल लन्ड पर रखी और लन्ड बाहर निकालने को बोला। मैंने लन्ड बाहर निकाल अनघा ने बोहोत सारा तेल लन्ड पर लगाया। मैंने वापस धक्का देकर पुरा लन्ड अन्दर आला। अनघा ने ऐसा दो तीन बार किया। जब लन्ड खुला अन्दर बाहर आने लगा तो अनघा शोभा से बोली "दर्द कम हुआ हैं क्या" शोभा रोती सुरत कर बोली "हां भाभी"।
अनघा मुझे आंख मारती, बोली "नीलेश अब आराम से करते रहो"। मैंने पांच मिनट आराम से शोभा कि गांड़ मारी, जब शोभा आहे भरने लगी थी। तब अनघा शोभा से बोली "तेरी तो चुत भी पाणी छोड़ रही हैं " "मज़ा ले रही हैं ना"। शोभा हंस पड़ी। अनघा मुझे बोली " अरे कुत्ती या मजा ले रही हैं समझ नहीं रहा क्या " ? शोभा बोली " भाभी तुम भी ना" ! मैंने फिर शोभा कि जम कर गांड़ मारने लगा।
दस मिनट बाद अनघा ने मुझे शोभा छोड़ने को बोला, मैंने शोभा को छोड़ दिया। अनघा भी गर्म हो चुकी थी, अनघा ने गाऊन उपर किया निकर निकाल फेकी, लन्ड पर पानी डाल कर अच्छे से किया, कपड़े से पोंछ और शोभा के साथ सो गयी। शोभा उल्टी सोयी थी बेड पर निचे पैर छोड़ी और अनघा सुलटी। मैंने अनघा का गाऊन ऊपर किया खुली चुत को चाटने लगा।
शोभा बोली नीलेश भाभी कि गांड़ मारो। मैं बोला "भाभी कि गांड़ मैं मार चुका हुं"। अनघा ने अपना सर उठा कर मुझे देखा बोली "पुरा कुत्ता हैं शोभा नीलेश" मैंने चुत को चाटना छोड़ लन्ड को चुत पर लगाने लगा हि था। अनघा बेड से उठी, लन्ड को हाथ मैं लेकर निचे से अंडकोष के रबर को निकल कर फेका। मुझे देख कर हंसी और बेड पर सो गयी।
मैंने जमकर अनघा कि चुत चोदी दोनों ने साथ पानी छोड़ा। शोभा बेड उपर जाकर सोते सोते बोली "भाभी तुम्हें नीलेश बोहोत हि अच्छा चोदता हैं । अनघा बोली "औरत को संतुष्ट कर छोड़ हैं नीलेश इसलिए पसंद हैं। मैं भी पुरा साथ देती हुं शायद इसीलिए वो भी पसंद करता हैं। अनघा को बेड से निचे जमीन पर लेकर उसे चिपकर हम दोनों निचे सो गया। अनघा हल्के आवाज मैं बोल रहीं थीं "मुझे छिनाल बोलती थी, अब पती लन्ड भी छोटा लगेगा, और पतीव्रता के पती के लिए ना मुंह ना चुत ना गांड़ रही। सब मेरे कुत्तेने मेरे सामने चोदे, छिनाल साली, मैंने अनघा को शांत किया और सो जाने को बोला।
मैं अनघा और शोभा साथ उसके बाद लगभग दोन हफ्ते रहा। वापस घर जाने से पहले मैंने शोभा के शादी के लिए पैसे दिये। तीन हफ्ते बाद शोभा कि शादी थी। शादी से पहले भी शोभा मुझसे दो बार चुदाई कर के गयी। शोभा कि शादी के दो महीने बाद अनघा ने मुझे एक दिन शाम को फोन किया। मिलने को बुलाया।
मुझे शोभा आयी होंगी रहा था, मगर शोभा नहीं थी। अनघा ने खाना मटन बनाया था। आते हि आज नहीं जाने का आदेश भी दे दिया। अनघा बोहोत खुश हि थी। अनघा बोली "शोभा तुम्हारे बच्चे कि मां बनने वाली हैं, यह बात हम तीनों को हि मालुम हैं, उस का पती मिठाई बांट रहा हैं। मैं कुछ नहीं बोला। अनघा बोली "अब मैं जिंदगी भर निश्चित हुं, नीलेश अब मैं तुम्हारी जिंदगी भर अहसानमंद रहुंगी, यह घर अब हमेशा मेरा रहेगा, छिनाल ( शोभा ) शादी के बाद बेचने कि सोच रहीं थीं, अब जिंदगी भर राज छुपाने के लिए चुपचाप पड़ी रहेगी। मैं शांत बैठा था।
तभी शोभा का अनघा को फोन आया। अनघा बोली "नीलेश मेरे साथ हि हैं "। शोभा बोली "नीलेश तुम्हें भाभी ने सब बोली दिया हि होगी"। मैं बोला "हा" । शोभा बोली "नीलेश तुम मुझे वचन दो, तुम कभी भी किसी से यह राज कि बात नहीं करोगे" । मैंने कहा "कभी भी नहीं करुंगा, तुम चिंता मत करो"। शोभा आज तुम्हें तुम्हारी भाभी हि अकेली रिश्तेदार हैं, तुम्हारा यह घर तुम्हारा मायका हैं"। शोभा "हां" "हां" बोल रही थी।
मैं बोला रहा था "तुम दोनों हि एक दुसरे का सहारा हैं। शोभा बोली "सच हैं ", "मैं भाभी बोहोत ग़लत समझतीं थी मगर भाभी ने मेरे लिए शादी मैं सब किया"। मैं बोला "और कभी भी किसी चीज कि जरुरत पड़ी तो याद करना, कभी संकोच मत करना" ।
अनघा बीच मैं बोली "कभी निचे से भी जरुरत पड़ी तो भी याद करना"।
शोभा बोली "भाभी तुम भी ना"। अनघा बोली "खा मेरी कसम तेरा पती अच्छा कि, मेरा कुत्ता अच्छा" । शोभा बोली "नीलेश के आगे दस टका भी नहीं" । अनघा बोली "समझ मैं आया ?" । शोभा बोली "हां"।
अनघा बोली "सिर्फ एक नहीं तुम्हारे पती जितने बच्चे चाहिए उतने बच्चे नीलेश हि निकाल देगा तुम सिर्फ नाम उस का लगा देना" । शोभा बोली "मेरे मन कि बात भाभी आपने तीन ली", सभी बच्चे एक जैसे तो होंगे। अनघा मुझे आंख मार रही थी। मैं अनघा को देख रहा था।
अभी शोभा को लड़का हैं, दो साल का हैं। उसका नाम अनघा ने "शोनिल" रख्खा हैं । शोभा आज भी आकार मुझसे चुदतीं हैं। मैंने अनघा और शोभा दोनों के नाम उनका घर कर दिया हैं। अब अनघा भी निश्चित रहती हैं।
तो कैसी लगी Antarvasna3 के पाठको मेरी ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया: २ कहानी मुझे प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा।
( आगे बाकी कहानी आप लोगों के लिए मैं लिख रहा हूं । )

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