बेटे ने चोदी बेवफा माँ की चुत - Antarvasna Sex Kahani
- Kamvasna
- Mar 19
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कैसे हो पाठकों मैं रूपेश हूँ, और ये कहानी मेरे बेटे विवेक और मेरी दूसरी पत्नी कंगना के बीच बने उस रिश्ते की है, जो शायद कभी नहीं बनना चाहिए था। अगर कोई और मुझसे इस चुदाई के बारे में बात करता तो मुझे यकीन नहीं आता। परन्तु इस कहानी का चश्मदीद गवाह मैं खुद हूं।
मेरा बेटा विवेक अब 19 साल का हो चुका है। उसकी माँ की मौत के बाद मैंने उसकी परवरिश के लिए दूसरी शादी करली थी। मैने जिससे शादी करी वो दिखने और चाल ढाल में कुशल मंगल थी उसका नाम कंगना है।
कंगना एक 32 साल की औरत थी, जो मेरी उम्र से काफी छोटी थी। उसका फिगर 32-30-34 का था, जो जवानी के लिहाज से एकदम मस्त और कामुक था। वो दिखने में ऐसी लगती थी जैसे कोई पोर्नस्टार अपनी गांड मटकाती हुई चल रही हो।
कंगना बिहार से थी, और मैंने उसे लखनऊ में अपने घर में ला बसाया था। हमारा घर एक दो कमरे वाला फ्लैट है, जहाँ मैं, विवेक और कंगना रहते हैं। मैं पेशे से एक बिजनेसमैन हूँ, और अक्सर ट्रिप पर जाता रहता हूँ तो एक दिन मुझे अचानक एक बिजनेस ट्रिप पर जाना पड़ा।
मैंने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे, ताकि मैं बाहर से भी घर पर नजर रख सकूँ। ट्रिप से पहले मैंने विवेक और कंगना को अकेला छोड़ दिया।
विवेक को अकेले सोने में डर लगता था, खासकर रात में जब मैं घर में नहीं होता था। वो बचपन से ही ऐसा था मगर उसकी मां के गुजरने के बाद ये परेशानी अधिक बढ़ गई।
जाते हुए मैंने कंगना से कहा था कि अगर जरूरत पड़े तो विवेक को अपने साथ सुला लेना। मुझे थोड़ी पता था कि ये फैसला मेरी जिंदगी में इतना बड़ा तूफान लाएगा। ट्रिप पर पहुँचकर मैंने होटल में अपना लैपटॉप खोला और सीसीटीवी ऐप चालू कर दिया। पहले दिन तो सब नॉर्मल था।
लेकिन शाम को मैंने देखा के कंगना घर में सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में घूम रही थी। उसका बदन इतना कामुक लग रहा था कि मेरी आँखें फटी रह गईं वो बिल्कुल एक रण्डी की तरह घर में टहल रही थी।
विवेक भी उस समय घर पर था, वो अपनी जगह पढ़ाई कर रहा था, लेकिन कंगना हर मुमकिन बहाने से उसके पास जाती दिख रही थी। वो जब भी उसके पास जाती तो उसके सामने चूंची उभारते हुए झुकती, और अपना जिस्म दिखाती।
कभी ब्रा से उसकी चूचियाँ झांकतीं, तो कभी पेटीकोट ऊपर सरक जाता और गांड़ चमकने लगती। ये सब देखकर विवेक का चेहरा लाल हो जाता, और मैं ध्यान देकर देख रहा था की उसका लंड पैंट में तन रहा था।
मुझे ये बात का अंदाज़ा नहीं था के कंगना इतनी प्यासी थी, मैं बस इतना जानता था के हमारी शादी के बाद भी मैं उसे ज्यादा समय नहीं दे पाता था, मेरी उम्र भी हो चुकी थी, और मेरा लंड जल्दी झड़ जाता था। उसकी चुदाई की प्यास थोड़ी अधूरी रह जाती थी।
फिर उस दिन की रात हुई। विवेक ने कंगना से कहा, "माँ, मुझे अकेले सोने में डर लगता है। परेशानी नहीं तो मैं आपके साथ सो सकता हूँ?" कंगना भी मुस्कुराई और बोली, "हाँ बेटा, आ जाओ।"
वे दोनों हमारे बेडरूम में चले गए। एक कैमरा वहाँ भी था, लेकिन वो हिडन था। ज़िंदगी ने मुझे सिखाया है के पैसे और अपनो के मामले के किसी पर अंधा भरोसा नहीं करना चाहिए।
मैं दोनों की करतानी दबी आंखों से देख रहा था। विवेक बिस्तर पर लेटा, और कंगना उसके बगल में लेट गई। वो ब्रा और पेटीकोट में ही थी। विवेक की आँखें उसकी चूचियों पर टिकीं जा रही थी।
कंगना ने फिर लाइट बंद कर दी, लेकिन रात की लाइट में मुझे सब साफ दिख रहा था।
विवेक सोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कंगना की गर्मी उसे शायद अजीब लग रही थी। वो भी जानकर उसके करीब सरक गई। अचानक कंगना ने अपना हाथ विवेक की जाँघ पर रखा और अपने होठों से उसकी गर्दन पर गरम सांसे छोड़ने लगी।
मेरा बेटा मर्दानगी के मामले में सीधा है आज तक तो मेरा याही मानना था उसी के अनुसार विवेक चौंका, लेकिन चुप वह फिर भी चुप रहा। कंगना ने धीरे-धीरे अपना हाथ थोड़ा ऊपर सरकाया, और विवेक के लंड पर रख दिया। विवेक का लंड पहले से ही तना हुआ था।
कंगना ने उसे सहलाना शुरू किया। विवेक की साँसें तेज हो गईं। कंगना खुद भी गर्म होती जा रही थी। उसने अपना दूसरा हाथ अपनी चूत पर रखा और कपड़ो के ऊपर से ही रगड़ने लगी। मैं स्क्रीन पर ये सब देख रहा था, मेरा लंड भी खड़ा हो इस सब से खड़ा हो रहा था।
देखकर लग रहा था के कंगना विवेक के सोने का इंतजार कर रही थी, लेकिन विवेक जागा हुआ था। उसने कुछ नहीं कहा, वो बस लेटा रहा। कंगना ने अपना पेटीकोट ऊपर करा और अपनी चूत में उंगली डाली।
वो हमममम! अआआह की हल्की आवाज़ में कराह रही थी हमममम! उन्ह्ह्ह। विवेक का लंड उसके हाथ में था, और वो उसे मसल रही थी। थोड़ी देर बाद विवेक ने करवट ली, और कंगना ने हाथ हटा लिया। वो रात ऐसे ही गुजर गई।
मैंने देखा की विवेक रात में उठा और बाथरूम में जाकर उसने पहली बार मुठ मारी। अगले दिन सुबह विवेक आदत अनुसार जिम गया। कंगना जब नहाकर निकली,तो वह सिर्फ तौलिया लपेटे घर के काम कर रही थी।
विवेक फिर कुछ समय बाद लौटा तो दरवाजा आधा खुला था। उसने झांका, और कंगना को देखा। उसकी चूचियाँ तौलिए से चिपकी हुईं, साफ दिख रही थीं। विवेक ने फोन निकाला और छुपकर रिकॉर्डिंग शुरू की।
कंगना ने अचानक अपना तौलिया उतारा, वो खुले अकेले घर में नंगी हो गई, उसके बाद खुले में ही उसने फिर पेटीकोट और ब्रा पहनी। विवेक ने सब ये रिकॉर्ड कर लिया था। बाद में वो बाथरूम में गया और अबकी बार अपनी मां को देखकर ही मुठ मारी।
शाम को वे दोनों साथ में बाजार गए। कंगना विवेक से जाने से लेकर आने तक कैमरा की हद तक चिपक कर चल रही थी। दुबारा से वापस आकर रात हुई।
अब वो रात आई जिसने मेरा सब बदल दिया। वे दोनों बिस्तर पर दुबारा लेटे। कंगना फिर से ब्रा और पेटीकोट में आ चुकी थीं।
लेकिन आज वो पिछली रात से भी एक कदम आगे बढ़ गई। उसने अपनी ब्रा का हुक खोला और ब्रा हटा दी। उसकी नंगी चूचियाँ विवेक के सामने आ गई थीं। वो बहाने भरे अंदाज में बोली, "बेटा, गर्मी लग रही है मुझे तुझे कोई प्रॉब्लम तो नहीं।"
विवेक की आँखें उन मोटे चूचों को देखकर फटी रह गईं थी।वो नही कोई परेशानी नहीं वाली भाषा में सर हिला दिया, जब इस तरह कोई नंगी चुदासी औरत आपके पास लेटना चाहती हो तो कौन कह सकता है की उसे परेशानी होगी।
कंगना मुस्कुराते उसके थोड़ा करीब आई, और अपना हाथ उसकी जाँघ पर रखा। विवेक का लंड तन गया था। कंगना ने उसे नाज़ुक दबाव से सहलाया। विवेक भी अब रुक नहीं सका।
उसने अपना हाथ कंगना की चूचियों पर रखा और सहलाने लगा। कंगना इस एहसास से कराह उठी, "आह... उफ्फफ ! बेटा..." वो उसका साथ देने लगी। विवेक ने फिर चूचियों को दबाना शुरू करा और निप्पल को मसलना चालू करा।
कंगना की साँसें तेज हो गईं थी। उसने विवेक की पैंट उतारी और लंड को बाहर निकाला। "वाह बेटा, तेरा लंड तो काफी बड़ा है," वो खुशी से बोली। धीरे-धीरे उनकी गर्मी बढ़ने लगी थी। विवेक कंगना के ऊपर आ गया।
उसने उसकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। कंगना की कराहें अधिक बढ़ गईं थी, "आह...ओंह्ह्ह! मेरे बच्चे विवेक... हमममम! चूसो... जोर से...ओंह्ह्ह मेरे बेटे" विवेक का हाथ नीचे सरका जा रहा था, उसने हाथ बढ़ाकर अपनी मां का पेटीकोट उतार दिया।
कंगना की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। विवेक ने अपनी मां की चूत में उंगली डाली, जिससे कंगना चिल्लाई, "ओह... बेटा... अआआह! अंदर डालो...मेरी जान अआआह" विवेक ने फिर दो उंगलियाँ डालीं और अंदर-बाहर करने लगा।
कंगना की चूत से पानी टपक रहा था। वो विवेक के लंड को सहला रही थी। फिर विवेक ने उसे घुमाकर 69 पोज बनाया मैं कैमरा के पीछे हाथ में लंड पकड़े सोच रहा था के बेटा बाप पर ही गया है।
वो कंगना की चूत चाटने लगा और जीभ से दाने को चूसने लगा। कंगना विवेक का लंड मुँह में ले चुकी थी। वो असली रण्डी की तरह लॉलीपॉप की तरह लंड को चूस रही थी, वो साथ में टट्टों को भी चाट रही थी।
दोनों की कराहें कमरे में गूँज रही थीं। विवेक ने कहा, "माँ, अब चोद दूँ?" कंगना बोली, "हाँ बेटा, मेरी चूत की प्यास बुझा दो आज।" विवेक ने कंगना की टांगें फैलाईं। उसने अपने लंड पर थूक लगाया जैसे मैं लगाता हूं और फिर चूत पर रगड़ा।
कंगना भी चुदाई होकर अपनी गांड उठा रही थी। फिर विवेक ने एक धक्का मारा, और उसका आधा लंड अंदर तक गया। कंगना चिल्लाई, "आह... अआआह! मर गई...बेटा धीरे...हमममम अआआह।" लेकिन विवेक नहीं रुका।
उसने पूरा एक ज़ोरदार धक्का लगाकर लंड पूरा अंदर तक डाल दिया। अब वो लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। कंगना की चूत गीली होती जा रही थी, फच-फच की आवाज मुझे कैमरा के पीछे तक आ रही थी।
विवेक जोर-जोर से धक्के मार रहा था, "माँ...ओहद्ह तेरी चूत कितनी टाइट है...।"
कंगना बोली, "चोदो बेटा... अआआह! चोद ओहद्ह! फाड़ दो...आगाह आह ओंह्ह्ह आह आह आह अआआह ओह आह आह ओहद्ह! हमममम हुह्ह आगाह ओंह्ह्ह! उन्ह्ह्ह।"
विवेक ने फिर स्पीड बढ़ाई। कंगना की चूचियाँ उछल रही थीं वो पागलों की तरह चिल्ला रहा थी ”ओंह्ह्ह आह आह आह अआआह ओह आह आह ओहद्ह! हमममम हुह्ह आगाह ओंह्ह्ह! उन्ह्ह्ह ”। वो उसे लंड तले मसल रहा था।
फिर विवेक ने पोज बदला और कंगना को घोड़ी बनाया। उसे अपनी मां को घुमाकर पीछे से लंड डाला। फिर कंगना की गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोद रहा था।
कंगना कराह रही थी, "ओह... विवेक... गांड में मत डालना...आआह अआआह" लेकिन विवेक ने गांड में उंगली डाली। कंगना की चूत से पानी निकलने लगा।
वो झड़ रही थी, "आह... हमममम! विवेक मेरे बच्चे आआह मैं गई... पानी निकल रहा है...विवेक आह सम्भल मुझे" अब उसकी चूत सिकुड़ रही थी, पानी तेज़ी से बह रहा था। विवेक लेकिन फिर भी नहीं रुका। उसने कंगना को और जोर से चोदा।
जिससे कंगना फिर से गर्म हो गई। विवेक ने उसे चित लिटाया और बूब्स के बीच लंड को सख्ती से रगड़ा। फिर दुबारा चूत में डाला। अब विवेक भी झड़ने वाला था।
"माँ... ओंह्ह्ह! माल आने वाला है मेरा..." कंगना बोली, "अंदर डाल दो..." विवेक ने चूत में माल गिरा दिया फिर दोनों थक कर लेट गए।
लेकिन वो रात खत्म नहीं हुई नहीं कंगना की प्यास पूरी हुई। थोड़ी देर बाद कंगना फिर से विवेक के लंड को सहलाने लगी। विवेक का लंड फिर से खड़ा हो गया। उन्होंने फिर चुदाई शुरू की। इस बार कंगना ऊपर चढ़कर लंड पर बैठ गई।
वो अब घोड़े की सवारी की तरह उछल रही थी, "आह... बेटा...आगाह! ओंह्ह्ह आगाह! आह ओह आआह आह आह कितना मजा आ रहा है..."
विवेक फुर्ती से नीचे से धक्के मार रहा था। कंगना की चूत फिर से गीली होने को आ गई थी वो तेज-तेज उछल रही थी। विवेक ने उसकी गांड पकड़ी और जोर से पेला।
कंगना चिल्लाई, "ओह...अआआह बेटा अआआह पानी फिर निकलने आ रहा है अआआह!” उसकी चूत से दुबारा पानी छूटा, और एक बार और वो झड़ गई। विवेक ने भी माल उसकी चूत में ही गिरा दिया।
मैं ये सब सीसीटीवी पर देख रहा था। मेरा लंड इतना तना हुआ था कि दर्द हो रहा था। मैं होटल के कमरे में अकेला था। मैंने पैंट उतारी और मुठ मारनी शुरू की। विवेक और कंगना की चुदाई देखते हुए मैंने भी अपना माल गिरा दिया।
मैं इतना उत्तेजित था कि दो बार मुठ मारी। अगले दिन मैं घर लौटा, लेकिन कुछ नहीं कहा। उनका राज़ उनका था और ये राज सिर्फ मेरा है। इस समय कंगना प्रेगनेंट है अब देखते है जो आने वाला है वो मेरा बेटा होगा या पोता!
तो दोस्तों आप सभी को यह Antarvasna Sex Kahani कैसी लगी कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताए! और आगे कई बार इस Baap Bete ने maa की चुदाई करी उसकी कहानी जाननी हो तो आप सभी जरूर बताएं!

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