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बेटे से ही हलाला करवाया - Hindi Sex Stories

हैलो दोस्तो आपकी रिया नई कहानी लेकर हाजिर है सच्ची कहानी बताने जा रही है उन्हीं की जुबानी सुनो,,,,


जावेद की माँ, जरीना, एक 38 वर्षीय औरत थी। उनका पति, आतिफ के साथ उसका झगड़ा चलता था। अक्सर एक दूसरे की कुटाई भी कर देते थे।


एक दिन गुस्से से आतिफ़ ने उसको तीन बार तलाक बोल दिया।


बाद में उसको बहुत पछतावा हुआ। लेकिन मुस्लिम कानून के तहत, तलाक के बाद अगर पत्नी फिर से पहले पति से शादी करना चाहे, तो उसे ‘हलाला’ का रिवाज निभाना पड़ता है।


हलाला का मतलब है कि तलाकशुदा औरत को किसी दूसरे मर्द से शादी करनी पड़ती है, और उस शादी को पूरा करना पड़ता है – यानी संभोग करना पड़ता है –


तभी वो अपने पहले पति के पास लौट सकती है। लेकिन आतिफ की मौत ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया।


जरीना अब तलाकशुदा थी, लेकिन उनका दिल आतिफ के लिए धड़कता रहा।


परिवार के बुजुर्गों ने कहा कि हलाला ही एकमात्र रास्ता है अगर वो फिर से ‘पत्नी’ का दर्जा पाना चाहती हैं – एक अजीब सी परंपरा जो परिवार की आस्था से जुड़ी थी।


जावेद, जरीना का २० वर्षीय बेटा, कॉलेज में पढ़ता था। वो अपनी माँ से बेहद प्यार करता था। जरीना की खूबसूरती देखते ही बनती थी – गोरा रंग, लंबे काले बाल, भरी हुई 38D की छातियाँ , 40+ इंच के सुडौल बड़े बड़े चूतड़ों की गांड़ जो साड़ी में लहरातीं, और कमर का घुमाव जो किसी को भी मदहोश कर दे।


जावेद अक्सर अपनी माँ को देखकर अनजाने में उत्तेजित हो जाता, लेकिन कभी हिम्मत नहीं करता था। घर में तनाव बढ़ रहा था।


परिवार के मौलवी ने कहा, ‘हलाला के लिए कोई भी मर्द हो सकता है, लेकिन वो रिश्तेदार न हो।’ लेकिन विकल्प कहाँ? परिवार गरीब था, बाहर कोई भरोसेमंद आदमी नहीं।


एक रात, जरीना ने जावेद को अपने कमरे में बुलाया। वो साड़ी में बैठी थी, आँखें नम। ‘बेटा, माँ को तेरी मदद चाहिए।’ जावेद चौंक गया। जरीना ने सब कुछ बता दिया – हलाला की मजबूरी, आतिफ से फिर जुड़ने की चाह। जावेद का दिल बैठ गया। ‘माँ, ये कैसे संभव? मैं… मैं तो तेरा बेटा हूँ।’


जरीना रो पड़ी। ‘बेटा, ये परंपरा है। अगर तू न माने, तो माँ का जीवन बर्बाद हो जाएगा। बस एक रात… पूरा रिवाज निभा दे।


फिर सब सामान्य हो जाएगा।’ जावेद की साँसें तेज हो गईं। उसकी नजर माँ की बड़ी बड़ी सुडौल हिचकोले खाती हुई चूचियां छाती पर चली गई, जो साड़ी के ब्लाउज में तनी हुई थी।



अंदर ही अंदर, एक गंदी सी चाहत जागी। ‘ठीक है माँ, मैं कर लूँगा। लेकिन ये हमारा राज रहेगा।’ अगली शाम, घर को सजाया गया।


एक छोटा सा निकाह हुआ – परिवार के बुजुर्गों की मौजूदगी में। मौलवी ने कबूल करवा दिया। अब ‘पत्नी’ और ‘पति’ बन चुके थे – माँ-बेटा।


रसोई में खाना बनाते हुए जरीना की साड़ी का पल्लू सरक गया, जावेद ने देखा माँ की नाभि। उसका लंड खड़ा होने लगा। रात को, बेडरूम में।


जरीना शरमाई हुई लेटी थी, लाल साड़ी में। जावेद अंदर आया, उसकी आँखें लाल। ‘माँ… जरीना… अब तू मेरी बीवी है।’


जरीना ने सिर झुका लिया। ‘हाँ जावेद, लेकिन याद रख, ये रिवाज है।’ जावेद बिस्तर पर चढ़ा। उसने माँ की साड़ी का पल्लू हटाया।


जरीना की सुडौल छातियाँ ब्लाउज में उभरी हुईं। जावेद ने ब्लाउज के हुक खोले। दो बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए – गुलाबी चूचियाँ तनी हुईं।


जावेद ने एक चूची मुँह में ले ली और चूसने लगा। जरीना सिसकारी भर आई, आआहह‘आह… बेटा… धीरे।’


जावेद का हाथ साड़ी के नीचे सरका। पेटीकोट के ऊपर से माँ की उभरीं हुई चूत दबाई। जरीना की साँसें तेज। ‘जावेद… ये गलत है… लेकिन… मजबूरी है।’ जावेद ने साड़ी उतार दी।


जरीना नंगी लेटी थी – चिकनी चूत, भूरी भुजाएँ,, सुडौल हिचकोले खाती हुई चूचियां। जावेद ने अपना कुर्ता उतारा, 11 इंच लम्बा और 5 इंच मोटा लंड बाहर निकाला – मोटा, लंबा, सुपाड़ा सिरा चमकता हुआ। जरीना ने देखा और चौंक गई। ‘इतना बड़ा… तेरे पापा से भी।’


जावेद मुस्कुराया, ‘अब ये तेरी चूत में जाएगा माँ।’ वो माँ के ऊपर चढ़ा। लंड का सिरा चूत पर रगड़ा।


जरीना गीली हो चुकी थी। ‘डाल दे बेटा… पूरा रिवाज निभा।’ जावेद ने धक्का दिया। लंड चूत में घुस गया – आधी लंबाई तक घुसा,,, जरीना चीखी, ‘आह्ह्ह… ऊऊऊईईईईईईईई अमी,, आआआहहहहह अम्मी ऊऊईघ,,, दर्द हो रहा है।’


जावेद ने और जोर से पकड़ कर धक्का लगाया। इस बार पूरा लंड चुत को चीरते फाड़ते हुए अंदर बच्चेदानी में अन्दर तक घुस गया। चूत की दीवारें लंड को रगड़ते हुए फैल गई आआआहहहहह ऊऊऊईईईईईईईई आआआहहहहह ऊऊऊईईईईईईईई आआआहहहहह,,, जावेद ने चोदना शुरू किया – धीरे-धीरे।


‘माँ… तेरी चूत कितनी टाइट है।’ जरीना की कमर हिलने लगी। ‘चोद बेटा… जोर से। हलाला पूरा हो जाए।’


कमरा चुदाई की आवाजों से गूंजा – प्लक प्लक, आह आह। जावेद ने स्पीड बढ़ाई। माँ की सुडौल चूचियाँ जोरों से उछल रही थीं। वो एक चूची चूसते हुए दूसरी को मसल रहा था,, पलंग जोरों से हिल रहा था,, आआआहहहहह ऊऊऊईईईईईईईई आआआहहहहह मममममम,


जरीना के नाखून बेटे की पीठ पर लग गए। ‘हाँ जावेद… और तेज… माँ की चूत फाड़ दे।’


जावेद का लम्बा मोटा लंड चूत के गर्भ बच्चेदानी तक जा रहा था। पसीना दोनों पर था। आधे घंटे बाद, ज़ोरदार चुदाई मस्ती से जावेद का गर्म गर्म गाढा़ा वीर्य फूटा – गर्म गर्म स्पर्म चूत में अन्दर बच्चेदानी तक भर दिया। जरीना भी 2 बार झड़ गई – चूत ने सिकुड़कर लंड को अपने में दबाई।


दोनों जोरों से हाँफ रहे थे। ‘हलाला पूरा हो गया माँ।’


लेकिन जरीना की आँखों में एक चमक थी। ‘बेटा… ये मजबूरी थी, लेकिन… अच्छा लगा।’ अगले दिन, सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन रात को जावेद का मन फिर भटका। वो माँ के कमरे में गया। जरीना सो रही थी, नाइटि में।


जावेद ने कंबल हटाया। माँ की गांड नंगी हो गई वो पीछे से चिपक गया।


अपने लंड को माँ की गांड पर रगड़ने लगा। जरीना जागी, ‘क्या कर रहा है बेटा?’ जावेद ने कहा, ‘माँ, हलाला तो एक बार का था, लेकिन अब तू मेरी है।’ जरीना विरोध करने लगी, लेकिन जावेद ने नाइटि उतार कर जरीना को नंगी कर दी।


चूत पर उंगली डाली – गीली। ‘देख, तू भी चाहती है।’ जरीना हार गई। ‘ठीक है, लेकिन चुपके से।’ जावेद ने माँ को उल्टा कर दिया। गांड ऊपर। वो लंड को तगड़ा धक्का लगा कर चूत में घुसेड़ दिया। पिछवाड़े से चोदाई शुरू। जरीना की गांड हिल रही थी। ‘आह… बेटा… तेरी चुदाई पागल कर देगी।’


जावेद ने बाल खींचे। ‘कह माँ, कौन तेरी चूत चोद रहा है?’ जरीना चीखी, ‘मेरा बेटा… मेरा पति।’ लंड तेजी से अंदर बाहर। चूत का रस टपक रहा था।


जावेद ने एक उंगली गांड में डाल दी। जरीना तड़पी, ‘नहीं… वहाँ नहीं।’ लेकिन जावेद नहीं रुका। आखिर में, 25 मिनट तक चोदने के बाद फिर गर्म गर्म वीर्य छोड़ा,,,, जरीना की चूत में अन्दर बच्चेदानी तक भर दिया लबालब भरी हुई।


दिन बीतते गए। हलाला का बहाना बन गया। जरीना अब खुलकर बेटे से चुदवाने लगी। सुबह उठते ही, जावेद माँ को रसोई में पकड़ लेता। साड़ी ऊपर करके चूत में लंड ठोकता। ‘माँ, चाय बनाते हुए चुदाई कैसी लग रही?’ जरीना हँसती, ‘बहुत मजा आ रहा बेटा। तेरी चोदाई से माँ जवान हो गई।’


एक बार, बाथरूम में। जरीना नहा रही थी। जावेद अंदर घुसा, नंगा। ‘माँ, मुझे भी नहला।’ जरीना ने साबुन लगाया बेटे के लंड पर। फिर मुंह में ले लिया। ब्लोजॉब देना शुरू। लंड चूसती हुई, जीभ से सिरा चाटती। जावेद के हाथ माँ के बालों में। ‘चूस माँ… पूरा लंड गले तक।’


जरीना ने गहरी चूसाई की। फिर दीवार से सटाकर जोरों से चुदाई। पानी के छींटों के बीच, लंड जड़ तक चूत में।


परिवार को शक होने लगा। लेकिन जरीना ने कहा, ‘हलाला के बाद बेटा मेरा रक्षक है।’ जावेद अब माँ को हर तरह से संतुष्ट करता। एक रात, वो माँ को बांध दिया। हाथ-पैर बिस्तर से। ‘आज जबरदस्ती जैसी चुदाई करूँगा माँ।’


जरीना डरी, लेकिन उत्साहित थी। जावेद ने उसकी दूध से बड़ी हुई सुडौल चूचियों पर थप्पड़ मारे। फिर जरीना के मुह में लंड ठोका। फिर चूत में घुसेड़ा। जोर-जोर से धक्के। जरीना चिल्लाई, ‘बचाओ… लेकिन न रुको।’


जावेद ने गांड भी मारी पहली बार। तेल लगाकर लंड डाला। जरीना की जो़ोरदार चीख कमरे में गूंजी। ‘फट गई गांड… आआहह उउहहह,,, आह्ह्ह।’ लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा। लंड गांड में फिसलने लगा। वीर्य गांड में भरा दिया,,


कुछ दिनों बाद, जरीना प्रेग्नेंट हो गई। टेस्ट पॉजिटिव। जावेद खुश। ‘माँ, ये हमारा बच्चा। हलाला से शुरू हुई ये कहानी अब परिवार बनेगी।’


जरीना मुस्कुराई, ‘हाँ बेटा, तू मेरा सबकुछ।’ लेकिन चुदाई रुकी नहीं। पेट बढ़ने पर भी, जावेद सावधानी से चोदता। साइड से लंड डालता, चूचियाँ चूसता।


जरीना की चाहत बढ़ गई। ‘बेटा, तेरी चोदाई से माँ का जीवन बदल गया।’


एक दिन, परिवार के बुजुर्ग आए। उन्होंने जरीना से पूछा, ‘हलाला पूरा हुआ?’ जरीना शरमाई, ‘हाँ, बेटे ने मदद की।’ बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिया, बिना शक के।


जावेद और जरीना की जिंदगी अब खुशहाल। रातें चुदाई की, दिन प्यार के। माँ-बेटे का रिश्ता अब पति-पत्नी का। हलाला ने उन्हें करीब ला दिया – हमेशा के लिए।

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आपकी रिया,,

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