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भाभी ने मुजे भैया से चुदवा दिया - Antarvasna Sex Stories

हाय दोस्तो, मेरा शिल्पा है. मैं अभी 19 साल की हूँ और मैं अपने भैया भाभी के साथ कुछ दिनों से कोलकाता में ही रहती हूं. मैं यहीं के एक नर्सिंग कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हूं.


मेरे भैया एक एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और भाभी घर पर ही रहती हैं.


इस Antarvasna Sex Stories में मैंने लिखा है कि कैसे मेरी भाभी ने मुझे अपने ही भैया से प्लानिंग करके चुदवा दिया.

भाभी की नजरों में भैया समझ ही नहीं पाए कि वे अपनी बीवी को नहीं, बल्कि सगी बहन को चोद रहे हैं.

मैंने भी भैया के लौड़े से अपनी चुत चुदवा कर खुल कर मजा लिया.


पिछले कुछ दिनों से मेरे कॉलेज में छुट्टी थी, तो मैं भाभी के साथ रहकर घर के कामों में उनकी हेल्प करती हूं.

हम दोनों ननद भाभी की बहुत अच्छी दोस्ती हो गई है और वे मुझसे अपनी हर बात शेयर करने लगी हैं.


यहां तक कि वे अपनी और भैया की चुदाई के बारे में भी बताती रहती हैं.

जब भी भाभी अपनी चुदाई की बात बतातीं तो बीच बीच में वे मुझसे भी पूछती थीं कि तेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड है या नहीं.


जबकि मेरा तो कोई ब्वॉयफ्रेंड है नहीं तो मैं क्या बताऊं उनको!

भाभी मुझसे बहुत मजाक करती हैं और बोलती हैं- सब कुछ यहीं सीख ले, ससुराल में अच्छा होगा … पता नहीं कैसा हसबैंड मिलेगा और पता नहीं कितनी बार तुझे चोदेगा … शिल्पा तू थोड़ी ट्रेनिंग ले ले.


उनकी बातें सुनकर मेरी चुत में चींटियां तो रेंगने लगती थीं लेकिन मैं उनसे ज्यादा खुलने में हिचकती थी.


एक दिन भाभी ने पूछा- तेरी चुत में बाल आ गए कि नहीं?

मैं शर्माती हुई बोली- हां थोड़े थोड़े आने लगे हैं.


भाभी बोलीं- तेरी उम्र तक तो मैं पता नहीं क्या क्या चीजें चुत में डाल चुकी थी … और तू है कि तुझे चुदाई के बारे में कुछ पता ही नहीं है!

मैं बोली- भाभी, मुझे सब कुछ पता है.


वे बोलीं- क्या खाक पता है … तूने कभी सामने से किसी का लंड देखा है?

अब मैं उन्हें कैसे बताती कि एक बार तो मैंने भैया का ही लंड देख लिया था.


मैं चुप रही तो भाभी बोलीं- बता न … किसी के लौड़े को सुसू करते ही देखा हो तो भी बता न!

मैंने कह ही दिया- हां भाभी, मैंने भैया का ही देखा था!


भाभी- अरे वाह … फिर क्या हुआ … तेरे भैया ने तुझे चोदा?

मैंने कहा- क्या भाभी, आप कुछ भी बोलती हो … वे मेरे भैया हैं और उस वक्त जब वे सुसू कर रहे थे, तब उन्होंने मुझे नहीं देखा था!


भाभी बोलीं- अच्छा तो ये बात है.

इस तरह से भाभी मुझे गर्म करने लगी थीं और उन्होंने मेरे दिमाग में भैया का मोटा लंड बिठा दिया था कि लंड चुत के रिश्ते में भाई बहन जैसा कुछ नहीं होता है.


एक दिन घर पर कोई काम नहीं था, तो भाभी मेरे साथ बैठी मस्ती कर रही थीं.

उन्होंने पहले कभी अपने मोबाइल पर एक ब्लू फिल्म डाउनलोड कर ली थी.


वे उसे मोबाईल पर खोल कर मुझे दिखाती हुई चलाने लगीं.

उसमें एक देसी चुदाई चल रही थी और हिन्दी में डायलॉग चल रहे थे.


मुझे वह सब देख कर बहुत शर्म आ रही थी.

मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया.


भाभी ने मेरा मुँह पकड़ कर वापस अपनी तरफ घुमाया.

वे बोलीं- अपने भैया का लंड देखने में शर्म नहीं आती तुझे … और मेरे साथ ब्लू फिल्म देखने में शर्म आ रही है!


इस तरह से उन्होंने मुझे ब्लू-फिल्म देखने के लिए राजी कर लिया.


अब हम दोनों उस चुदाई की फिल्म को देखने लगे.

उस फिल्म में एक आदमी एक लड़की को बड़ी ही तेज रफ्तार से चोद रहा था.


भाभी का तो पता नहीं, पर मैं बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी.

भाभी मुझे नोटिस कर रही थीं और मुस्कुरा रही थीं.


उन्होंने साइड से हाथ रखकर मेरे एक दूध को दबाया, तो मैं मुस्कुरा दी और कामुक होने लगी.


भाभी ने मेरी चूची को मसलते हुए कहा- तू कुछ ज्यादा ही गर्म हो गई है. चल एक काम कर, किचन में लंबा वाला बैंगन रखा है. उसे ले आ और अपनी चुत में डाल कर उससे अपने आपको शांत कर ले!

मैंने भाभी से कहा- आप पहले तो मुझे गर्म करती हो, बाद में खुद तो भैया से चुदवा कर शांत हो जाओगी … पर मैं क्या करूं?


भाभी बोलीं- तो तू क्या चाहती है, तू भी चुदावाएगी अपने भैया से?

मैंने कहा- कैसी गंदी बात कर रही हो आप … वे मेरे सगे भाई हैं.


भाभी बोलीं- तो क्या हुआ, सगे भाई का लंड देखने में तो तुझे बहुत मजा आता है!

‘भाभी आप भी ना, एक ही बात को बार बार दोहराती रहती हो!’


तो भाभी हंस कर बोलीं- अगर तुझे चुदने का मन कर रहा है तो बोल … मैं तेरी चुत के चुदने का भी जुगाड़ कर सकती हूं … कसम से तेरे भैया तेरी सारी गर्मी निकाल देंगे!

‘भाभी आप पागल हो गई हो, मेरे भैया क्यों चोदेंगे मुझे … और मैं उनसे कभी नजर भी नहीं मिला पाऊंगी फिर!’


भाभी बोलीं- तू उस सबकी फिक्र मत कर. मैं सब कुछ संभाल लूंगी, तू बस बोल कि तू चुदेगी!

‘भाभी ऐसा कैसे हो सकता है?’


‘शिल्पा मेरी जान, तू क्यों चिंता करती है … मैं हूँ न … तू सब कुछ मुझ पर छोड़ दे!’

ऐसा कहकर भाभी ने एक गहरी स्माइल दी और मेरे दूध को मसलने लगीं.


मैं कुछ कहती कि उन्होंने वापस कहा- जब मैं बोलूं, तब तू रेडी रहना. ऐसे ही खुद को गर्म करके और अपने चुत को रेडी करके … और हां चुदते समय मुँह से आवाज मत निकालना, नहीं तो गड़बड़ हो जाएगी!

‘भाभी प्लीज … मुझसे नहीं होगा ये!’


भाभी ने मेरी एक न सुनी और शाम होते ही भैया को फोन किया कि आज खाने में क्या बनाऊं?

भैया ने कहा- आज मैं बाहर खा कर आऊंगा!


भाभी ने ओके कह कर फोन काट दिया और उन्होंने मुझसे कहा- तैयार हो जा मेरी जान, आज अपनी चुत को अपने भैया से चुदवाने के लिए!


मैंने पूछा- आखिर ऐसा क्या हुआ भाभी कि अचानक से भैया चुदाई के लिए राजी हो गए!

भाभी ने कहा- तू बस तैयार रह, जब भी तेरे भैया बाहर से खाकर आते हैं तो वे साथ में दारू भी पी कर आते हैं और आते ही मेरी चुत पर कुत्ते की तरह झपट पड़ते हैं.


भाभी की बात सुनकर मुझे डर लगने लगा कि दारू पीकर मुझे चोदा, तो मेरी चुत का कबाड़ा न हो जाए.

वे बोलीं- डर मत पगली. आज तो तेरी चुत के मजे का दिन है, तू भी क्या याद रखेगी कि आज तुझे चुदाई का मजा दे दिया … आज तू अपने भैया का लंड अपनी चुत में लेगी, चुदवा ले आज जी भर के मेरी बन्नो!


मैंने कहा- भाभी मुझे डर लग रहा है, कहीं कोई गड़बड़ न हो जाए! अगर भैया को पता चल गया तो वे मुझे मार ही डालेंगे!

‘मारेंगे नहीं, चोद डालेंगे तुझे … तेरी चुत फाड़ डालेंगे. तू बस आवाज मत करना!’


ऐसा बोलकर भाभी ने जबरदस्ती मुझे अपनी साड़ी पहना दी.


मेरा शरीर लगभग भाभी के जैसा ही था बस भाभी मुझे थोड़ा ज्यादा गोरी चिट्ठी थीं.

भैया नशे में धुत होकर आए थे तो लड़खड़ा रहे थे.


उनके आते ही भाभी ने घर की लाइट बुझा दी और भैया से बोलीं- अभी लाइट चली गई है, आप अपना हाथ मुझ दो … तब तक मैं खाना लगाती हूं.

भैया ने कहा- मैंने क्या बोला था कि मैं खाना खाकर ही आऊंगा!


ऐसा बोलकर भैया बाथरूम में चले गए और वे फ्रेश होने लगे.

भाभी ने मुझसे कहा- तू भी जा कर फ्रेश हो जा, पेशाब वगैरह करके आ जा. फिर तेरे भैया तुझे पलंग पर पटकने के बाद उठने नहीं देंगे.


भाभी मुझे डरा रही थीं.

भाभी ने एक बार फिर से समझाया मुँह से आवाज नहीं, चुत से आवाज आई तो चलेगा!


भैया जैसे ही बाहर आए, उन्हें भाभी बेडरूम में ले गईं और बेड पर बिठा दिया.

मैं कमरे में ही थी, बस जरा दूर खड़ी थी.


भाभी ने इशारे से मुझे बुलाया, मुझे बहुत डर लग रहा था.

उनके कमरे में पूरा अंधेरा था.


भाभी ने भैया को बेड पर धक्का दे दिया तो भैया ने गाली देते हुए कहा- साली रंडी, धक्का क्यों दे रही है?


भाभी ने कहा- खुद तो दारू पी के आ गया … अब मुझे चोदेगा कौन?

‘साली बहुत गर्मी चढ़ी है तुझे … आज तेरी बहन चोद दूंगा.’


यह बोलकर भैया फिर से तमतमाते हुए उठे.

भाभी बोली- अपनी ही बहन को चोद ले जाकर!


वे बड़बड़ाने लगे.


भाभी ने तुरंत मुझे भैया के आगे खड़ा कर दिया और फुसफुसा कर बोलीं- जा मेरी जान … अब तू मजे कर, मैं चलती हूं.

मैं कांपने लगी और बोली- प्लीज … आप यहीं रहो न!


भाभी मुझे छोड़ कर चली गईं और मैं डर से कांप रही थी.

लेकिन मन में चुत फड़वाने की लालसा थी तो भैया के सामने आ गई.


इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती, भैया ने मेरे बालों को कसके पकड़ा और गाली दी- साली बहन की लौड़ी!


उनके बाल खींचने से मुझे बहुत दर्द हुआ और मैं चिल्लाने को हुई.

अभी मेरे मुँह से हल्की सी आह्ह्ह की आवाज निकली ही थी कि भैया ने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और बेरहमी से किस करने लगे.


कुछ देर किस करने के बाद भैया ने साड़ी को झटके से खींच कर मेरे बदन से अलग कर दिया और मेरे ब्लाउज को भी खींचते हुए निकाल दिया.

मैंने तुरंत अपने हाथ अपने बूब्स पर रखे क्योंकि मैं अपने सगे भैया के सामने अधनंगी खड़ी थी.


वे तो शराब के नशे में टुन्न थे … उनको क्या पता था कि सामने कौन है… उनकी बीबी या उनकी सगी बहन … वे तो बस काम वासना में डूबे हुए थे.

उन्होंने मुझे उठा कर बेड पर पटका और मेरी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगे.


मुझे मीठा दर्द होने लगा और मैं सिहर उठी ‘ओह … मां …!’


मेरी आंख से आंसू टपक गए और सोचने लगी कि मैं क्यों आ गई भाभी के बहकावे में!

मेरे भैया बहुत ही जोर जोर से मेरे दूध दबा रहे थे … और मेरे कंठ से दबी हुई आवाज में ओह … अ … हा ..’ की आवाज निकल रही थी.


तभी भैया मेरे ऊपर चढ़ गए और मुझे फिर से किस करने लगे.

अब मुझे अच्छा महसूस हुआ और ऐसा लगा जैसे भैया ने मुझे पहले सजा दी, बाद में मुझे प्यार से चुप करा रहे हैं.


उनके इस व्यवहार से मुझे अब बहुत मजा आने लगा था.

ऐसा लग रहा था कि वे मुझे आज किस करके ही चोद देंगे.


मैंने उनका सर अपने हाथों में पकड़ लिया और उनके बालों में हाथ फिराती हुई उन्हें चूमने लगी.

कुछ देर तक यह सिलसिला यूं ही चलता रहा.


फिर वे नीचे आ गए और मेरी गर्दन पर किस करने लगे.

कुछ देर बाद वे नीचे को सर करके मेरी एक चूची को चूसने लगे.


मुझे तो मानो जन्नत का सुख मिलने लगा था और मुझसे अब रहा ही नहीं जा रहा था.


चुदाई में इतना मजा आता है, यह मुझे पहली बार समझ आ रहा था.

मैं मादक सिसकारियां निकालने लगी ‘उफ्फ … ओह …’


मैं उस वक्त कैसा महसूस कर रही थी कैसे लिखूँ … बस अपना मीठा अहसास महसूस ही कर रही थी. उसे बाहर निकालने की इजाजत ही नहीं थी.


मैं कुछ बोल भी नहीं सकती थी वर्ना भैया भी समझ जाते.


कुछ पल बाद भैया ने अपने सारे कपड़े उतार दिए.

मुझे अंधेरे में दिख तो नहीं रहा था, पर भैया का नंगा बदन महसूस कर रही थी.


उन्हें क्या पता था कि वे अपनी सगी बहन को नीचे दबोच कर नंगे हो चुके थे.


फिर भैया थोड़ा और नीचे आए.


उन्होंने मेरे इलास्टिक वाले पेटीकोट को नीचे खींचा और उसे मेरी टांगों से निकाल कर मेरी दोनों टांगों को फैला दिया.

जैसे ही मेरी टांगें खुलीं, उन्होंने मेरी चुत पर मुँह रख दिया.


मैंने तो इसकी कल्पना भी नहीं की थी कि भैया अपनी बहन की चुत भी चाटेंगे.

अपनी चुत पर मुँह लगने से मेरी तो जैसे हालत खराब हो गई.


मैं बता ही नहीं सकती कि कितना मस्त लग रहा था. मैं खुद को रोक नहीं पाई और जोर से सिहर उठी ‘आआह …’


भैया मेरी चुत पर अपना पूरा मुँह रगड़ने लगे और उन्होंने अपनी एक उंगली भी मेरी चुत में घुसेड़ दी.

मैं भूल गई कि भाभी ने क्या समझाया था और मेरे मुँह से जोर से ‘मम्मम … उफ … प्लीज …!’


एक बार तो मेरे मुँह से भैया शब्द भी निकल गया.

मैं वासना की आग में बह गई थी और मदमस्त होकर जन्नत में पहुंच चुकी थी.


ओह … माई गॉड सी … सी … सी!’


भैया नशे में थे तो वे कुछ नहीं सुन रहे थे.

मेरे देखते ही देखते भैया ने कब मेरी चुत का पानी निकाल दिया, पता ही नहीं चला.


भैया पूरा पानी पी गए.


अब भैया बोले- जान आज तो तेरे मुँह में भी लंड पेलना था लेकिन लगता है तू आज ज्यादा ही गर्म हो गई है. जल्दी ही तेरी चुत ने अपना पानी छोड़ दिया है.

फिर उन्होंने एक ऐसी बात कही कि मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.


भैया ने कहा- भोसड़ी वाली, तुझसे शिल्पा की चुत के लिए कहा था … किधर तक पहुंची बात?

मैं यह सुनकर हक्की-बक्की रह गई कि मेरा भाई तो पहले से ही मुझे चोदना चाहता है.


अब मुझे मामला समझ में आ गया था कि मेरी भाभी ने यह सब ड्रामा रचा था.

मैं भी अब इसी ड्रामे का हिस्सा बन कर चुदाई का मजा लेने का सोचने लगी.


भैया ने मुझे बिठाया और अपना लंड मेरे सामने रखकर कहा- ले चूस इसे!

मैं क्या करती, मैंने अपने सगे भाई के लंड को अब तक सिर्फ दूर से देखा था, उसे अभी आंखों के सामने देख रही थी.


मैं सोच ही रही थी कि भैया अपना लंड मेरे होंठों पर रगड़ने लगे.


मैंने भी मुँह खोला और लौड़े को अन्दर ले लिया.

भैया बोले- आह चूस ले रंडी … बहुत दिनों से सोच रहा था कि तुझसे लंड चुसवाऊं … बहन की लवड़ी आज जाकर खुद मान गई!


मुझे तुरंत अहसास हो गया कि भैया का लंड मुँह में लेने वाली मैं पहली लड़की हूँ क्योंकि भैया खुद कह रहे हैं कि भाभी ने आज तक उनका लंड मुँह में नहीं लिया था.

खैर … मैं भैया का लंड चूसने लगी ‘उम्म्म मम्म्म … उम्म …’


भैया मेरे सर को पकड़ कर लौड़े पर आगे पीछे करते हुए कह रहे थे- आह … चूस ले रांड … सच में आज तेरी गर्मी बुझना बहुत जरूरी था … नहीं तो पता नहीं तू आज बिना चुदे कैसे रह पाती!


कुछ देर तक लंड चुसवाने के बाद भैया ने मुँह से लंड बाहर निकाला और मेरे दोनों पैरों को फैला दिया.

मैं डर गई और मुझे भाभी की बात भी याद आ गई कि चिल्लाना बिल्कुल भी नहीं है.


बस एक ही बात से चिंता मुक्त हो गई थी कि यदि बात खुल गई तो भी कुछ नहीं होगा, क्योंकि भैया खुद भी मुझे चोदना चाह रहे थे.

भैया ने अपना लंड चुत पर सैट किया.

उन्हें शराब के नशे में जरा सा भी भी अंदाजा नहीं था कि वे आज जिस चुत में लंड पेलने वाले हैं, वह एक कुंवारी बुर है उसे आराम से चोदना चाहिए.


उन्होंने चुत की फांकों में सुपारा फंसाया और एक हचक कर धक्का दे डाला.

मैं तो समझो तिलमिला उठी … मेरी आंखों के आगे तो जैसे अंधेरा छा गया था.


मेरी जोर से चीख निकल गई. मैं खुद को रोक ही नहीं पाई इतना दर्द हुआ.

‘आह … छोड़ दो …!’

पर शायद भैया ने नशे में नोटिस ना किया हो.


अभी मेरी आंख से आंसू सूखे ही नहीं थे कि भैया ने लंड को झट से बाहर निकाला और घपाक से फिर से चुत को फाड़ने के अंदाज में लौड़ा पेल दिया.

भैया का लंड मेरी चुत को तहस-नहस करता हुआ अन्दर घुसता चला गया.


मैं पुनः चीख पड़ी- आआआह … भाभी माफ करना खुद को कैसे रोकूं ही नहीं पा रही हूँ … आह भैया प्लीज रुक जाओ.

मगर नक्कार खाने में तूती की आवाज को कौन सुनने वाला था!


भैया का लंड मेरी चुत के दर्द को समझने वाला ही नहीं था.

खून से लथपथ चुत में ही भैया का लंड फचाफच अन्दर बाहर हो रहा था.


मैं दर्द से कराहने लगी थी कि भैया ने अपने लौड़े को अन्दर बाहर करने की स्पीड और बढ़ा दी.

वे तो किसी पागल सांड की तरह मुझे रौंदने में लगे हुए थे … रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.


अब तक चालीस पचास धक्के लग चुके थे तो मेरी चुत भोसड़ा बन गई थी और लौड़े के आने जाने के लिए रास्ता बन गया था.

मुझसे कुछ कुछ दर्द सहन होने लगा था इसलिए मेरी सिसकारियां धीरे धीरे निकलने लगी थीं.


शायद लंड चुत के मिलन से जो मजा मिलता है, वह बढ़ना चालू हो गया था और मेरी गांड ऑटोमेटिक उछलने लगी थी.

भैया ने बोला- ज्यादा न तड़प रंडी ले अभी और ले कुतिया!


यह कह कर भैया ने चुदाई की स्पीड और तेज कर दी.

पूरे कमरे में फचाफच की आवाजें आने लगी थीं.


मेरी चुत की आवाजों से में खुद शर्माने लगी थी.

मेरे मुँह से आह … ओह … उफ … प्लीज … आज चोदो … चोदो … आवाजें आने लगीं और खुद का भैया के सामने खुलासा कर दिया.


‘आह भैया और पेलो आह!’ मैं सिसकारियां निकालने लगी.


‘ओह … आह … भैया … उफ … चोद दो मुझे आह …’ यह कहती हुई मैं अपने भैया की पीठ पर नाखून गड़ाने लगी.

भैया चुपचाप दनादन मेरी चुत तहस नहस करने में लगे हुए थे.


फिर वह क्षण भी आ ही गया, जब भैया ने अपना पूरा वीर्य अपनी बहन की चुत के अन्दर डाल दिया.


मुझे मेरी चुत के अन्दर गर्म गर्म सा कुछ जाता हुआ महसूस हुआ, जिससे मुझे अन्दर से एक अलग से सुकून का अहसास मिल गया.

भैया झड़ कर मुझसे नंगे ही लिपट गए और बोले कि तू रुक, आज तुझे और पेलूंगा क्योंकि आज कुछ अलग ही मजा आ रहा है!


उस वक्त भैया ने मुझे एक बार और चोदा.

इस बार की चुदाई में तो मुझे और भी ज्यादा मजा आया क्योंकि अब दर्द नहीं हो रहा था, सिर्फ चुदाई के सुख का अनुभव हो रहा था.


भैया ने दो बार चोदने के बाद मुझे अपने सीने से चिपका लिया और मैं उनके साथ नंगी ही चिपक गई.


आधी रात को भैया ने उठ कर मुझे फिर से चोदा.

एक ही दिन में एक कुंवारी लड़की की कुछ ज्यादा ही चुदाई हो गई थी.


तीसरी बार चोदने के बाद भैया फिर से मुझसे लिपट कर सो गए.

कुछ देर बाद सुबह हो गई.


मेरी नींद खुली ही नहीं थी कि भाभी आ गईं. उन्होंने मुझे उठाया और मुझे मेरे भैया से अलग किया.

मैं नंगी ही थी.


भाभी ने मुझे देखकर आंख दबा दी और मुस्कुरा कर बोलीं- हाय क्या हाल कर दिया तेरे भाई ने तेरा … चूचियां तो लाल कर दीं!

मैं चुपचाप खड़ी थी.


भाभी बोलीं- बाबू, अब खड़ी क्यों हो … क्या और चुदाना है? अपने कपड़े उठा और निकल … या फिर तेरे भैया को पता चल गया क्या?

मैंने कहा- मुझे पता नहीं है.


‘चल, अब बाहर चल!’

मैं तो चल भी नहीं पा रही थी.


‘भाभी … ओह … प्लीज पकड़ो न मुझसे चला भी नहीं जा रहा है!’

भाभी मुझे पकड़ कर बाहर ले गईं.


भैया के उठने से पहले ही भाभी ने खून के धब्बे और सबकुछ साफ कर दिया.

हालांकि यह बात अभी मैं जान गई थी कि भैया मुझे चोदना चाहते थे और शायद उन्होंने बाद में मुझे पहचान लिया था, तब भी उन्होंने अपनी कुंवारी बहन को ही चोदा था.


दोस्तो, आपको मेरी भाई बहन सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.

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