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भैया से कार में चूत फड़वाई - Antarvasna Sex Stories

हेलो दोस्तों, आप लोग कैसे हैं। मेरा नाम सुनैना कुमारी है और मैं दिल्ली से हूँ।


यह कहानी जो मैं आप लोगों को बताने जा रही हूँ वो मेरी लाइफ की कुछ उन पलों की है जिन्हें याद करके आज भी मेरी चूत गीली हो जाती है उम्मीद करती हूँ इसे पद करके मर्दों के लंड खड़े हो जाएंगे और मेरी बहनों की चूत पानी छोड़ देगी।


तो जैसे कि मैंने बताया मेरा नाम सुनैना है। यह बात 2019 की है लॉकडाउन शुरू होने से पहले तब मैं 19 साल की थी। मेरी हाइट 5'5 है और भगवान की कृपा या मेरे घर के ख़ून में ही है जिसकी वजह से मुझे एक ज़बरदस्त बॉडी मिली थी।


मेरे चूहे 34D के हैं वहीं मेरी कमर 28 की और मेरी गांड 36 की है। मेरा रंग थोड़ा गोरा है। दिल्ली के बुराड़ी एरिया में हमारी एक जॉइंट फ़ैमिली है । तब मेरी दादी, मेरे बड़े पापा, मेरी बड़ी मम्मी, मेरे पापा शुभम, मेरी मम्मी कांता, मेरे चाचा, मेरी चाची और मेरी बुआ पूजा।


बुआ तलाक शुदा नहीं है बस मेरी फुआ जी कई सालों से गायब है। बच्चों में सबसे बड़ी मेरी बुआ की बेटी है रेनू 23 साल, फिर मेरे बड़े पापा के बेटे प्रिंस 22 साल, फिर मेरे बड़े पापा की बेटी लवली 21 साल, फिर मेरे भैया रोहन 20 साल, फिर मेरी बुआ के बेटे विक्रम 19 साल यह मुझसे 4 महीने बड़ा है फिर मैं निशा 19 साल फिर मेरे चाचा के बच्चे रोनित 15 और आकांक्षा 14 साल।


हमारे परिवार का एक 4 स्टार होटल है जो पापा संभालते हैं, मेरे चाचा का एक गैराज है और मेरे बड़े पापा एक सीए हैं। मेरी बड़ी मम्मी पहले एक कंपनी में काम करती थी लेकिन अब मेरी मम्मी और बच्चे के साथ हाउस वाइफ है। मेरी बुआ एक सरकार। टीचर हाय।


प्रिंस भैया CSE कर रहे थे, रेणु दीदी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी, लवली दीदी ने इसी साल नीट क्लियर किया था, रोहन भैया BCA कर रहे थे, मैं BA कर रही थी और विक्रम भी BA कर रहा था। मैं विक्रम और रोहन भैया एक ही कॉलेज में थे।


हमारा दिल्ली के बुराड़ी इलाके की तरफ है। जो लगभग 300 गज के एरिया में बना था। हमारे घर के चारों और ऊंची दीवारें हैं। हमारा घर पूरे तरीके से बना है जिसमें सामने एक बहुत बड़ा खाली बारामदा है। फिर घर के अंदर के बड़ा सा हॉल है साथ में किचन है, एक पूजा घर और साथ में 5 कमरे हैं एक पापा मम्मी का, एक दादी का, एक चाचा चीची का और एक बड़े पापा और बड़ी मम्मी का और आखिरी वाला बुआ क।


वही फर्स्ट फ्लोर पर 7 कमरे हैं जहाँ एक में रेनू दीदी, एक में प्रिंस भैया और एक कमरे में लवली दीदी, एक में रोहन भैया और एक में विक्रम और एक मैं उसे करती हूँ और आखिरी कमरे को रोनित और आकांक्षा शेयर करते हैं। और एक हॉल जैसा खाली जगह है बिल्कुल ग्राउंड फ्लोर जैसा। और एक स्टोर रूम छत पर है।


ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर दोनों पे ही कॉमन बाथरूम है किसी भी रूम में अटैच्ड बाथरूम नहीं है। हमारे घर में 3 कार और 2 बाइक हैं। 1 बाइक विक्रम की है और एक रोहन भैया की वही एक कार पापा इस्तेमाल करते हैं और बांकी के 2 घर में ही रहते हैं जिसका इस्तेमाल करके रोहन भैया हम सबको कॉलेज छोड़ते हैं क्योंकि मेरे घर में चाचा, पापा और रोहन भैया के अलावा किसी ने कार चलाना नहीं सिखाया है। तो हमारा डेली का ऐसा रूटीन है कि सुबह पापा बड़े पापा को ऑफिस छोड़ देते हैं। फिर एक कार लेके चाचा, रोनित, आकांक्षा को स्कूल और प्रिंस भैया को कॉलेज छोड़ते हुए जाते हैं। फिर एक कार में रोहन भैया मुझे, लवली दीदी और विक्रम को लेके कॉलेज जाते हैं। रेणु दीदी घर में ही रहती है।


मेरे घर में मेरे सारे भाई बहनों को एक्सरसाइज का बहुत शौक है जिसकी वजह से सबकी बॉडी अच्छी है। मेरे घर में किसी पर भी किसी तरह की कोई पबबंदी नहीं थी जिसकी वजह से जिसका जैसा रहने का मन करता था वो वैसे ही रहता था। बचपन से ही मेरे पापा, चाचा और बड़े पापा घर में अंडरवियर में ही रहते आए हैं। वही मेरी मम्मी, बड़ी मम्मी, बुआ और चाची भी ज़्यादातर मॉडर्न नाइटी में ही घर में घूमती थी। मेरी दादी भी कम मॉडर्न नहीं है उनका भी ऐसा ही हाल है। कितनी ही बार मेरे घर की लेडीज़ रूम का गेट बंद किए बिना ही कपड़े बदलते थे जिसकी वजह से हमने एक खुलापन रखा था जो नॉर्मल से बाद के थे।


हम सब दोस्तों की तरह थे। जब मैं बड़ी हो रही थी और मुझे पहली बार सेक्स के बारे में अपने दोस्तों से पता चला था तब मम्मी ने ही मुझे बैठकर सब बताया था।


जिसकी वजह से मैं दूसरी दुनिया की लड़कियों से कहीं ज्यादा बोल्ड थी। जब मैं 16 साल की थी तभी मुझे सेक्स के बारे में पता चला फिर जब मैंने मम्मी से पूछा तो उन्होंने मुझे सेक्स क्या होता है और कैसे होता, इसमें क्या सही है क्या गलत और कब करना चाहिए ये सब बताया जैसे एक दोस्त दूसरे को बताता है।


लेकिन मम्मी की बात ने मुझे सेक्स को जानने की जिज्ञासा को और बड़ा दिया। मैं रात में फोन पर सेक्स कहानियाँ पढ़ती थी। पहले तो मैं कोई भी कहानी पढ़ती थी। फिर मुझे ग्रुप सेक्स कहानियाँ पसंद आने लगीं फिर फैमिली और पब्लिक सेक्स पसंद आने लगा। जिसकी वजह से रात में अपने भाइयों को इमेज बनाकर चूत में उंगली करने लगी थी। ऐसे ही धीरे-धीरे मैं 19 की हो गई थी। मैं ज़्यादातर घर में टी-शर्ट और शॉर्ट्स में ही रहती थी। और मौका दिखने पर अपने परिवार के मर्दों को अपनी बड़ी की झलक दिखाते रहती थी लेकिन सब मुझे छोटी बच्ची की तरह ही ट्रीट करते थे।


यह बात जुलाई 2019 की है। असल में रोहन भैया को संडे को देर से सोने की आदत थी। सुबह के 11 बज रहे थे मुझे कुछ सामान लेने जाना था तो मैंने सोचा रोहन भैया के साथ बाइक पे चली जाऊंगी क्योंकि बाहर धूप थी। तो मैं मटकते हुए भैया के कमरे में घुस गई लेकिन अंदर का नजारा देख के तो मेरी सांसे ही अटक गई। अदर बेड पे भैया बेखबर सोए हुए थे लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि उन्होंने कुछ नहीं पहना था और उनका लंड जो करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा होगा वो पूरी तरह से पंखा फैलाने के उनके पेट पे लेटा हुआ था।


उसका टोपा चमड़ी से ढका हुआ था। यह देख के तो मेरी हालत ही खराब हो गई। और मेरा गला सूखने लगा। तभी मुझे सीढियों की तरफ से पायल की आवाज़ आई तो मैं जल्दी से कमरे का दरवाज़ा लगाकर अपने कमरे में भाग गई। वहाँ जाने के मुझे एहसास हुआ कि मेरी चूत गीली हो गई थी। मुझसे रुका नहीं गया तो मैंने जल्दी से अपना शॉर्ट्स उतारा और भैया का लंड याद करते हुए अपनी चूत में उंगली करने लगी और जल्दी ही झड़ भी गई।


थोड़ी देर बाद जब मैं नॉर्मल हुई तो कपड़े पहन के बाहर आई तो भैया एक शॉर्ट्स पहन के कमरे से बाहर निकले। उन्हें देखते ही पता नहीं क्यों मैं शर्मा गई और मेरी नज़र उनके शॉर्ट्स में कैद लंड पे चली गई।


रोहन भैया:- क्या हुआ सुनैना?


मैंने अपने आपको संभाला और कहा:- वो भैया मुझे कुछ सामान लेना है तो आप मुझे लेके मार्केट चल सकते हो गया।


रोहन भैया:- ठीक है मैं नाश्ता करके आता हूँ तू तब तक तैयार हो जा।


थोड़ी देर बाद भैया एक टी-शर्ट और वही शॉर्ट्स और एक क्रॉक स्लीपर में कार में बैठ गए और हॉर्न बजाने लगे। तब तक मैंने भी कपड़े बदलकर एक जींस डाल ली थी तो जल्दी से कार में जाकर बैठ गई। और मुझे लेके मार्केट की तरफ चल दिए।


रोहन भैया:- क्या यार तुम लोगों को संडे को भी चेन नहीं मिलता क्या? बिना मतलब में नींद खराब कर दिया।


मैं:- मैंने कब आपकी नींद खराब की। मैंने तो कितनी बार कहा है कि मुझे कार चलाना शिखा दो लेकिन आप कहाँ सुनते हो।


रोहन भैया:- हाँ हाँ पता है। फिर थोड़ी देर में ही हम लोग संत नगर के मार्केट में थे मुझे फेस पैक लेना था तो मैंने जल्दी से लिया और हम वापस आ गए।


घर पहुंचते ही भैया से कहा:- भैया प्लीज मुझे भी कार चलाना सिखा दो ना मुझे भी कार चलाना है। प्लीज प्लीज प्लीज।


रोहन भैया चिढ़ते हुए:- अच्छा अच्छा सिखा दूंगा लेकिन अभी नहीं शाम में वैसे भी आज संडे है और अभी मेरे आराम करने का टाइम है तो शाम को मुझे बोलिए।


ये कह के भैया फिर से अपने कमरे की तरफ चले गए। और चंकी में भी सच में कार चलाना सीखना चाहती थी जिसकी वजह से मैं भी खुश होते हुए अपने कमरे चली गई और शाम का इंतजार करने लगी। शाम को लगभग 7 बजे भैया मुझे आवाज़ लगाई तब तक मैं भी एक टाइट टी-शर्ट और एक टाइट ग्रे लेगिंग पहन के नीचे आ गई।


मेरी टी-शर्ट तो ढीली थी लेकिन मेरी लेगिंग बहुत टाइट थी जिसकी वजह से मैंने पैंटी नहीं पहनी थी और अगर मैं अपना पैर क्रॉस करती तो कैमलटो नज़र आ जाता। चुकी शाम का टाइम था तो भैया बुराड़ी के पीछे वाले रोड पे गाड़ी ले गए जो ज्यादा देर उस टाइम खाली ही रहता है। फिर मुझे एक्सेलरेटर, ब्रेक और गियर बताने लगे।


मैं भी गौर से सुन रही थी फिर वो कार से निकले और मुझे ड्राइवर सीट पर बैठ ने बोला। मैं भी ड्राइवर सीट पर आ गई और वो पैसेंजर सीट पर आ गए। क्योंकि वो रोड ज्यादा सुनसान रहता है तो मुझे दिक्कत नहीं होनी थी लेकिन मैं बार-बार एक्सेलरेटर और ब्रेक में गड़बड़ कर रही थी। तब भैया बहुत नाराज़ हुए लेकिन फिर रात होने लगी तो हम वापस आ गए। उस रात फिर से चूत में एक डिल्डो डालते हुए झड़ी जो मैंने ऑनलाइन मंगवाया था लेकिन ज्यादा इस्तेमाल नहीं करती थी। अगले दिन हम लोग कॉलेज से जब वापस आए तो लंच करने के बाद ही भैया बोले कि शाम में ज़्यादा अंधेरा हो जाता है और अभी उस रास्ते पे गाड़ी भी नहीं होगी तो तू तैयार होजा अभी ही जाते हैं कार सीखने। मैं ये सुन के बहुत खुश हुई और जाकर जल्दी से एक प्यारा का फ्रॉक पहन लिया जो मेरे घुटनों से ऊपर तक था। और जल्दी से आके गाड़ी में बैठ के वापस उसी रास्ते पे आ गए।


आज फिर से भैया ने मुझे ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया लेकिन मैं अभी भी गड़बड़ कर रही थी। मुझसे या तो एक्सेलरेटर ज्यादा दब ज्यादा नहीं तो ब्रेक अचानक ही लग जाता।


तो परेशान हो के भैया बोले:- सोनू एक काम करके मैं ड्राइविंग सीट पर बैठता हूँ तू मेरी गोद में बैठ। पैडल में दबाऊंगा बस तू मेरे पैर पर रख तो तुझे भी पता चल जाएगा कि कितना प्रेशर देना है।


मैं मान गई। भैया भी ड्राइवर सीट पर आके बैठ गए। फिर मैं उनके गोद में बैठ गई। मैं जैसे ही बैठी मेरा फ्रॉक मेरी गांड से बाहर आ गई जिसकी वजह से अब मेरी गांड और भैया के लंड के बीच में मेरी पैंटी और भैया का शॉर्ट्स था। और मैं अपनी गांड पे भैया के लंड को महसूस कर रही थी। जिसका एहसास मुझे अच्छा लग रहा था। अभी मुझे यह उतना टाइट नहीं लगा। लेकिन मैं श्योर थी कि भैया ने अंडरवियर नहीं पहना था।


स्याह उन्होंने भी मेरी गांड का एहसास हो गया था इसलिए अब उनका लंड भी उठने लगा था। वो आगे झुके और मेरे हाथ को पकड़ के मुझे ड्राइविंग सिखाने लगे। लेकिन अब मेरा ध्यान ड्राइविंग पे काम और भैया के लंड के एहसास पे ज़्यादा था जिस वजह से मैं अपनी गांड हल्का हल्का हिलाने लगी थी ताकि भैया को पता भी ना चले और मुझे मज़ा भी मिले।


भैया का लंड भी पूरी तरह से खड़ा ही गया था और वो भी मेरे हाथों को ज़ोर से पकड़ के सिखा रहे थे। थोड़ी ही देर में मेरी हालत खराब होने लगी तो मैंने अगले दिन सीखने की बात की और वापस पैसेंजर सीट पे आ गई। जब मैं पैसेंजर सीट पर आई तो मेरा ध्यान भैया के शॉर्ट्स पे गया जहाँ तम्बू बना हुआ था जो उन्होंने एक हाथ से ढका और घर वापस आ गए। घर आते ही मैं जल्दी से अपने कमरे में गई और पैंटी उतार के अपनी चूत में उंगली करने लगी। मुझे 1 मिनट भी नहीं लगा और मैं झड़ गई।


अब मैंने सोच लिया था कि जॉब ही हो अब तो मैं भैया का लंड लेके ही रखूंगी। और अगले दिन का इंतजार करने लगी। अगले दिन जब मैं कॉलेज से घर आई तो मैंने फैसला कर लिया कि आज जॉब ही हो भैया के लंड से अपनी चूत फड़वा के ही रहूंगी। चुकी मम्मी ने मुझे सेक्स के बारे में बताया था तो मुझे पता था कि पहली बार सेक्स में दर्द होगा इसलिए मैंने पहले ही एक एक्स्ट्रा तौलिया कार की पिछली सीट पर रख दिया था और एक पानी की बोतल गियर के बगल वाले स्टैंड पर साथ में पेनकिलर की गोली भी।


आज जब कार में आई तो आज भी मैंने एक ढीली टी-शर्ट और एक शॉर्ट स्कर्ट पहनी थी। और मैंने ना तो ब्रा पहनी थी ना ही पैंटी। मैं भैया से बोलने से पहले ही आज गाड़ी में आके बैठ गई थी। पहले तो भैया बाल हुए लेकिन फिर खुश होते हुए फिर से उसी रोड पर ले आए। भैया :- चल सोनू आ जा चला आज फिर से। मैं तो जैसे इसी का इंतज़ार कर रही थी। मैंने भी मौका नहीं गंवाया और इस बार बाहर न निकल के गियर के ऊपर से पैर पार करने लगी।


भैया :- अरे ये क्या कर रही है बाहर से आजा।


मैं :- बाहर धूप है भैया मैं नहीं जा रही बाहर ये बोल के अपनी गांड उठाने लगी तो भैया ने जल्दी से अपनी सीट को पीछे की तरह लेटाया। जब मैं अपनी गांड उठाते हुए ड्राइविंग सीट पर आ रही थी तो जान भुजा के अपनी नंगी गांड कुछ देर के लिए भैया के चेहरे के सामने ही रहने दिया। और फिर वापसी उनकी गोद में बैठ गई। मेरा इतना करना ही काफी था क्योंकि जैसे ही मैं भैया की गोद में बैठी मुझे उनका मोटा लंड अपनी गांड के दरार पे एहसास हुआ। मैं समझ गई थी कि भैया ने मेरी नंगी चूत देख ली है। मैं भी मजे से अंदाज़ में अपनी गांड हिलाने लगी। जिसकी वजह से उनका लंड टाइट होने लगा। क्योंकि भैया भी शॉर्ट्स में ज्यादा अंडरवियर नहीं पहनते तो मुझे उनके लंड का एहसास अच्छे से हो रहा था।


मैं मुस्कुराई और गाड़ी स्टार्ट कर दी। मैंने जान भुज के पहले तो एक्सेलरेटर जोर से दबाया फिर अचानक से ब्रेक लगाया जिसकी वजह से भैया आगे मुझसे टकराए और उन्होंने मुझे बचाने के लिए मुझे पकड़ लिया। लेकिन उन्होंने गलती से कहा या सायद जान भुज के मेरे चुचियों को पकड़ लिया था। अचानक लगे झटके से मैं भी थोड़े आगे हो गई और जब अपनी जगह पे आई तो भैया का मोटा लंड सीधे मेरी चूत पे आके लगा। मेरे मुँह से मजे से एक आह निकल गई लेकिन भैया ने मेरे चुचियों पर से हाथ नहीं हटाया। और वो धीरे धीरे मेरे चूचों को मसलने लगे।


अब मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं, और आँखें मजे से बंद हो रही थीं। मैं हल्का हल्का अपनी गांड हिलाने गई जिसकी वजह से उनका लंड मेरी चूत पे रगड़ रहा था। भैया भी धीरे से कार को घुमाते हुए रोड से नीचे पेड़ों के थोड़े पीछे ले गए, अब हम लोग रोड से थोड़ी दूर आ चुके थे और इधर चारो पेड़ ही पेड़ ही थे और कोई आता जाता भी नहीं था। अब उनसे भी रुका नहीं गया और उन्होंने पीछे से मेरे गालों पे एक किस किया जिसकी वजह से मैं भी शर्मा गई। ये तो जैसे उनके लिए ना रुकने का ग्रीन सिग्नल था। वो मेरी चूचियों को दबाते हुए एक हाथ से मेरे चेहरे को पीछे किया और मुझे किस करने लगे। मैं तो जैसे अलग ही स्वर्ग में जा चुकी थी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। जिसकी वजह से मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी।


उन्होंने एक हाथ बड़ा करके मेरी चूत सहलानी शुरू कर दी। अब मुझसे कंट्रोल नहीं रहा था या यही हाल उनका भी था। जिस वजह से ही मैंने अपनी गांड उठाई उन्होंने अपना शॉर्ट्स नीचे सरका दिया। फिर सीट को पीछे पूरी तरह से लिटाया और फिर मेरी गांड को अपने चेहरे की तरफ खींचने लगे। मैं भी समझ गई कि वो क्या चाहते हैं तो मैं भी उठ के पीछे हुई और बहाल वाली सीट पर एक टांग रखकर अपनी चूत उनके मुंह पर रख दिया। भैया मजे से मेरी चूत चाटने लगे।


मेरे मुंह से भी मजे की आवाज आने लगी। मैंने भी आगे बढ़ कर भैया का लंड अपने मुंह में ले के चूसने लगी। मैं पूरे मजे से उनका लंड चूस रही थी। वो मेरी चूत में जीभ डाल डाल के चूस रहे थे। अब मैं झड़ने ही वाली थी कि भैया ने अपना छाहरा हटा दिया। तो मैं अपनी आँखों में हवास लेके उन्हें देखने लगी उन्होंने मेरी और देखा और फिर मुझे पीछे वाली सीट पे आने को कहा। जब भैया ने पीछे देखा तो पीछे एक तौलिया रखा था। उन्हें समझने में देर नहीं लगी। भैया- लगता है तू पूरी तैयारी के साथ आई थी आज। मैं हल्का मुस्कुराई और जल्दी से पीछे वाली सीट पे तौलिया बिछाकर अपनी टी-शर्ट उतारी और अपनी स्कर्ट ऊपर करके ले गई। मैं- भैया आ जाओ और आज अपनी इस बहन को आज दुनिया का सुख दे दो। मेरी आँखों में खुमारी छाई हुई थी। मेरी बात सुनते ही भैया का तो जैसे जोश सातवें आसमान पे पहुंच गया और वो जल्दी से अपनी शॉर्ट्स उतारे हुए मेरे ऊपर कूद के मुझे किस करने लगे। उनका लंड मेरी चूत पे धक्के लगा रहा था। मैं भी मज़े में अपनी चूत उठा उठा के उनके लंड पे रगड़ रही थी। फिर उन्होंने तोड़ा किस और फिर उठे और प्यार से देखते हुए मेरी चूत पे लंड लगाया। उस एहसास से ही मेरी आंखें बंद हो गईं।


भैया:- सोनू आंखें खोल बेटा देख ना अपने भैया की तरफ वो तुझे एक लड़की से एक औरत बना जा रही है। भैया की बात सुन के मैंने उनकी तरफ आँखें खोल के देखा, तो भैया मुझे देखते हुए मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने मेरी चूत पे लंड लगा के रगड़ रहे थे लेकिन अंदर नहीं डाल रहे थे।

जिसकी वजह से मदहोश होते हुए मैं बोली:- भैया प्लीज़ डाल दो ना। अब सहा नहीं जाता।


भैया मुझे छेड़ते हुए बोले:- क्या डाल दूँ।

मैं उनकी तरफ देखने लगी तो वो बोले:- बोल ना क्या डाल दूँ?

मैं सरमते हुए बोली :- प्लीज़ मेरी चूत में अपना पेनिस डाल दो।


वो मुस्कुराए हुए मेरे तरफ झुके और बोले:- नहीं सोनू बोल भैया प्लीज़ मेरी चूत में अपना लंड डाल दो।


ये सुनके मैं पूरा सरम गई लेकिन मुझपे हवस इतनी हावी थी कि मैं हल्के से उनके कान के पास आके बोली:- प्लीज़ भैया अपनी इस प्यारी बहन की चूत में अपना मोटा लंड डाल दो।


मेरा इतना कहना ही था कि भैया ने मुझे किस करते हुए कमर से एक झटका लगाया जिसकी वजह से उनके लंड का टोपा मेरी चूत में घुस गया। जैसे ही उनका लंड मेरी चूत पे घुसा वो मेरी क्लिट पे रगड़ा और मैं झड़ने लगी।


भैया ने आव देखा न ताव और एक जोरदार झटके के साथ अपना आधा से ज्यादा लंड एक बार में ही मेरी चूत में घुसा दिया।


अभी तक जान्हा में झड़ने की वजह से स्वर्ग में थी वही अचानक से मुझे बेहिसाब दर्द होने लगा था। और मेरी चूत से खून आने लगा था। भैया ने मुझे किस करना बंद नहीं किया जिसकी वजह से मेरी चीख उनके मुँह में ही रह गई। उन्होंने एक हाथ से मुझे पकड़ा हुआ था और दूसरे से मेरे बूब्स सहलाने लगे।


थोड़ी देर बाद मुझे मजा आने लगा तो मैं फिर से अपनी कमर हिलाने लगी। भैया भी समझ गए कि अब मुझे भी मज़ा आया है तो वो भी धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने लगे। अब मुझे फिर से मज़ा आने लगा और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। थोड़ी देर बाद जब मैं फिर से पूरे मज़े में आने लगी तो भैया ने पूरा ज़ोर लगाकर पूरा लंड अंदर डाल दिया। मुझे इस बार दर्द तो हुआ लेकिन साथ ही भैया का लंड सीधा अपनी बची हुई दीवार महसूस हुई जिसकी वजह से मैं झड़ने लगी। अब तो भैया भी पूरे जोश के साथ मेरी चूत मारने लगे।


मैं भी मज़े में आह आह आह छोड़ो भैया और ज़ोर से छोड़ो चिल्ला रही थी। भैया भी मेरी चूची चूसते हुए मेरी चूत मार रहे थे।


मै :- आह भैया फाड़ दो ….अपनी बहन की चूत …. खा जाओ मेरे बूब्स को..

भैया :- आह साली सोनू क्या चूत है तेरी…. मेरी बहना ..आह मज़ा आ रहा है ना..आअह

मै :- बहुत मज़ा आ रहा है भैया। ऐसे ही करते रहो आह..

मै पूरे मज़े में थी फिर थोड़ी देर बाद भैया ने मुझे कुतिया बनाई और पीछे से एक ही बार में पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया।


मेरा पूरा शरीर एक ही बार में झन्ना गया था। भैया बिना रुके मेरी चूत मारने लगे साथ ही मेरी गांड पे थप्पड़ भी मारने लगे।

भैया:- साली क्या मस्त गांड है तेरी। आह मज़ा आ गया। रंडी साली ले अपने भाई का लंड ले।

मै:- आह भैया आआआह्ह म्म्म बना दो अपनी बहन को अपनी रंडी.. आह फाड़ दो मेरी चूत।


भैया भी गाली देते हुए मेरी चूत मरते रहे और फिर लगभग मिनट की चुदाई के बाद वो मेरी चूत के अंदर ही झड़ गए। उनके गरम रस जैसा ही मुझे चूत के अंदर एहसास हुआ मैं भी झड़ने गाली और वही सीट पे गांड उठा के ले गई। भैया का वीर्य और मेरा रस एक साथ मेरी चूत से तपाक के तौलिए पे गिरने लगा। थोड़ी देर बाद जब मैं नॉर्मल हुई तो मेरी चूत में दर्द होने लगा। मैंने वो पेनकिलर लिया और फिर उसी तौलिए से अपनी चूत पोछी जिससे मेरा खून लगा हुआ था और उसे उसी के साथ गाड़ी के सीट के नीचे रख दिया।


मैं :- भैया आपको सेक्स करना कैसे आता है??

भैया:- छोटी तुझे तो सिर्फ मम्मी ने बताया है ना लेकिन मैं कर चुका हूं।

माई :- है ? आपकी गर्लफ्रेंड क्या है?

भैया:- गर्लफ्रेंड नहीं है वो बस हम सेक्स करते हैं जब आदमी होता है।

माई:- वाह भैया. कौन है वो?

भैया :- है कोई, तू बहुत अच्छे से जानती है उनको?

माई :- उनको ?? कौन है वो?

भैया:- फिर कभी बताऊंगा तुझे अभी बहुत देर हो गई है घर चलते हैं और तुझे आराम भी करना चाहिए।

ये कह के भाया वापीस ड्राइवर सीट पे आये और घर की तरफ चल पड़े।

उसके बाद हम वापस घर आ गए, फिर तो मुझे जब भी मौका मिला मैं भैया के कमरे में चुदने के लिए चली गई थी और भैया भी मेरी जाम के चूत मारते थे।


उसके बाद मेरी जिंदगी में क्या हुआ और मैं किससे चुदी, मैं आपको आगे बताऊंगी।


दोस्तो उम्मीद करती हूँ कि आपको मेरी ये पहली चुदाई का अनुभव अच्छा लगेगा। मुझे मेल दीजिए मैं आपके जवाब का इंतजार करूंगी।


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1 Comment


Lakshay
Lakshay
Jun 17

This story reminds me my early days😅

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