माँ का बेटे बेटी के साथ ग्रुप सेक्स - Free Sex Kahani
- Kamvasna
- May 25
- 17 min read
कैसे हो दोस्तों, मेरा नाम अशु है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में बरेली रहता हूँ, मेरी उम्र 18 साल की है और लंबाई 5 फुट 8 इंच, और मेरा लंड 6 इंच का मोटा सांप है जो किसी भी औरत की चूत को फाड़ सकता है।
मैं अपनी फैमिली के साथ रहता हूँ – मेरी मम्मी का नाम रुकमणी है, जो 38 साल की है लेकिन उनका फिगर 36-30-36 का ऐसा है कि देखकर बस लंड खड़ा हो जाए।
मेरी बड़ी बहन मीशा जो 20 साल की हॉट माल है, उसका फिगर 34-26-34 है मेरी बहन की नर्मी वाली कमर है और उसकी पैंटी कट चूत वाली स्टाइल की होती है,
और मेरा छोटा भाई रविश, जो 16 साल का कदछूड़ा सा है।मेरे पापा की मौत हो चुकी है, तो घर में बस हम चारों ही रहते है। मेरी मम्मी एक स्कूल टीचर है,
लेकिन घर में वो एक सस्ती रंडी की तरह घूमती है –वो साड़ी में गांड हिलाती, ब्लाउज में चूचियां उछालती रहती है।
मीशा कॉलेज जाती है, और मैं इंटरमीडिएट कर रहा हूँ। रविश अभी स्कूल में है, लेकिन वो साला हमेशा मम्मी के पीछे पड़ा रहता है।
ये कहानी मेरी फैमिली की गंदी सच्चाई की है, जो मैंने खुद देखी और सुनी है। भाईयो, इस कहानी में गालियां भरी हैं, तो अगर कोई नर्म दिल वाला है तो कृपया इसे न पढ़ें इसमें चुदाई की फुल डिटेल है, तो अब अगर तुम्हारी चूत या लंड गीला हो जाए तो मेरी गलती नहीं है। ये सब 2 साल पहले की बात है,
जब मीशा ने मम्मी को ब्लैकमेल करके Lesbian चुदाई की थी। हाँ, सही सुना – अपनी मां की चूत को चाटकर मीशा ने रुकमणी मां को अपनी गुलाम बना लिया।
और इसका मौका उसे कैसे मिला? जब मीशा ने मम्मी को रविश के साथ चुदाई करते हुए देख लिया और वीडियो बना ली। चलो, स्टोरी शुरू करता हूँ, तुम साले लंड हिलाते रहना।
हमारा घर दो मंजिला है, नीचे मम्मी का कमरा है, ऊपर हम भाई-बहनों के कमरे है। रविश हमेशा मम्मी के कमरे में घुसा रहता था – कभी "मम्मी, होमवर्क करा दो" कहकर, कभी "मम्मी, पेट दर्द है" बहाना बनाकर।
मैं जानता था कि साला कुछ तो गड़बड़ है दाया कुछ तो गड़बड़ है, क्योंकि रात को कभी-कभी आवाजें आतीं – "आह...हमममम ओह, धीरे रविश...अआआह!
तेरी मम्मी की चूत फट जाएगी..." वाली। लेकिन मैं चुप रहता हूं, क्योंकि मेरा भी लंड खड़ा हो जाता था ये सोचकर कि मम्मी रुकमणी अपने बेटे को चोद रही है।
मीशा को भी मेरी तरह शक था, लेकिन वो साली शरारती है – हमेशा फोन पर वीडियो बनाती रहती है, जैसे कोई पोर्न डायरेक्टर हो।
एक दिन, शाम को मैं और मीशा बाहर घूमने गए थे। रविश घर पर था, और उसके साथ मम्मी भी। हम थोड़ा लेट हो गए,
तो रात के 10 बज गए थे। मीशा ने कहा, "अशु, चल ना घर चलें, प्यास लगी है मुझे।" मैंने हाँ कहा, लेकिन जैसे ही गेट खोला,
ऊपर से आवाज आई – "उंह...अआआह ! ओह हाँ रविश...हमममम Yes ! अपनी मम्मी की चूत में जोर से ठोक! अआआह!... साले हरामी बेटे, तू तो अपनी मां को रंडी बना रहा है!"
वो मम्मी की आवाज थी, वो सिसकारियां मार रही थी। मीशा की आंखें पूरी तरह फट गईं, उसने मुझे इशारा किया चुप रहने का।
हम चुपके से ऊपर चढ़े, मम्मी के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था – हल्की लाइट अंदर जल रही थी।
फिर से मीशा ने फोन निकाला और सीक्रेट मोड में वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर दी। मैंने भी अंदर झांका मैने सोचा – भाड़ में जाए संस्कार! और वाह क्या सीन था!
मम्मी रुकमणी बिलकुल नंगी लेटी थी बेड पर, उसकी सफेद चूचियां हवा में उछल रही थीं, गांड ऊपर की तरफ तनी हुई थी। रविश, मेरा छोटा भाई, नंगा होकर उसके पीछे से चोद रहा था –
वो कुत्ता स्टाइल में लंड चूत में अंदर बाहर कर रहा था। उसका छोटा सा लंड मम्मी की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, और मम्मी की चूत से पानी टपक रहा था। "ओह हाँ बेटा...
चोद अपनी मम्मी को! अआआह... तेरी अम्मा की भोसड़ी चूत! उफ्फफ हमममम! तेरे लंड की भूखी है आह... आह... फाड़ दे इसे!"
मम्मी चिल्ला रही थी, वो अपनी चूचियां खुद मला रही थी। लेकिन रविश हांफ रहा था, "मम्मी... तेरी चूत कितनी टाइट है... साली रंडी, तू तो पोर्न स्टार है... ले,
ले मेरा रस आगाह खा लंड को!" और वो मम्मी की गांड पर थप्पड़ मारते हुए जोर-जोर से धक्के मार रहा था।
मीशा का चेहरा लाल हो गया था – गुस्से से या उत्तेजना से, पता नहीं। लेकिन साली ने पूरा 5 मिनट का वीडियो बना लिया, जिसमें मम्मी चूत से रस निकालती झड़ रही थी और रविश उसके मुँह में झड़ रहा था।
"पी ले बेटा...आआह" मम्मी कह रही थी, रविश ने अपना मुंह चूत में दे रखा था। फिर हम चुपके से नीचे आ गए। मीशा ने कहा, "अशु, ये वीडियो मैं मम्मी को दिखाऊंगी। साली रुकमणी सोचती है वो संत है।
लेकिन अपने बेटे को ही चूत चाटा रही है। अब मैं भी इसे चखूंगी – उसकी चूचियां, उसकी भोसड़ी सब का स्वाद लूंगी!" मैं उसकी बातों पर हंस पड़ा, मेरा लंड खड़ा हो गया था।
"कर ले दीदी, लेकिन मुझे भी बता देना कैसा स्वाद है मां का।" मीशा मुस्कुराई, "तू अपना लंड हिला ले, ये मेरा शिकार है।" कुछ दिन बीत गए। मीशा चुप थी, लेकिन मैं देखता था कि वो मम्मी को घूरती रहती थी।
रविश को तो कुछ पता ही नहीं था। फिर एक रात वो समय जब सब सो चुके थे। घड़ी में 2 बज रहे थे। मैं तो नींद में था, लेकिन अचानक ऊपर से हल्की आवाज आई।
आवाज़ से मैं उठा, फिर चुपके से ऊपर गया। मम्मी का दरवाजा बंद था, लेकिन अंदर से सिसकारियां – "मी हमममम! उफ्फ... मीशा...अआआह मेरी जान! ये क्या कर रही है तू... ओंह्ह्ह ! रुक जा बेटी... आह!"
ये मम्मी की आवाज थी, डरी हुई लेकिन गर्म और कामुक। मैंने दरवाजे के पास कान लगाया, और फिर हल्का सा खुला छेद दिखा तो उसमें से झांका।
उफ्फ भाईयो, क्या सीन था – मेरी दीदी मीशा ने मम्मी को लेस्बियन चुदाई के लिए फंसा लिया था! दीदी मीशा नंगी थी, उसकी हॉट बॉडी चमक रही थी –
उसकी छोटी-छोटी चूचियां, टाइट गांड, और शेव्ड चूत हमममम! मेरे अरमान जगा रही थी। मम्मी भी नंगी कर दी गई थी, दोनों बेड पर लेटी हुई थी,
उनके हाथ-पैर फैले हुए थे। मीशा मम्मी की चूचियों पर झुकी हुई थी, उन्हें चूस रही थी जैसे कोई भूखा शेर शिकार को खा रहा होता है।
"आह... मम्मी रंडी है तू...अआआह तेरी ये चूचियां कितनी मस्त हैं... साली, तू तो रविश को चोदती है, अब अपनी बेटी की चूत चाट ले!" मीशा कह रही थी, वो भी गालियां बकते हुए।
मम्मी तड़प रही थी, "ओह मीशा... बेटी हमममम! आगाह... ये पाप है... छोड़ दे मुझे... तेरी अम्मा को शर्म आ रही है बेटा !"
लेकिन मीशा ने मम्मी का मुंह बंद कर दिया – उसने अपना हाथ रखकर, और दूसरे हाथ से फोन निकाला। "देख साली रुकमणी मां, ये वीडियो है तेरा – तेरी भोसड़ी चूत में रविश का लंड घुसा हुआ है।
अगर तू चिल्लाई तो सबको भेज दूंगी – पापा के भाईयों को, स्कूल को, सबको! अब चुपचाप अपनी बेटी की गुलाम बन!"
मम्मी की आंखें फट गईं। वीडियो में वो साफ दिख रही थी के कैसे वो रविश के लंड पर सवार हुई है, "हाँ बेटा... चोद अपनी मां को... तेरी अम्मा की गांड फाड़ दे!" वाली आवाज़ साफ तौर पर सुनाई दे रही थी।
मीशा हंसी, "अब बोल, क्या करूंगी मैं तेरे साथ? तेरी चूत चाटूंगी या तू मेरी?" उसका ब्लैकमेल सुनकर मम्मी रोने लगी, "बेटी... मत कर... लेकिन... ठीक है मैं मानती हूं तेरी बात... बस वीडियो मत फैलाना।"
जैसा तय था मीशा की जीत हो गई। साली ने मम्मी के मुंह से हाथ हटाया, और सीधे मम्मी की गर्दन पर चूमने लगी।
वो घमंड से बोली "चुप रंडी... अब तू मेरी कुतिया है। अपनी बेटी के पैर चाट!" मम्मी ने हिचकते हुए मीशा के पैर चूमे, फिर मीशा ने उसे बेड पर दबोच लिया।
अब असली चुदाई शुरू हुई। मीशा मम्मी की चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगी, "आह... मम्मी तेरे ये निप्पल कितने सख्त हैं... साली, तू तो रविश को चूसती है, अब मुझे चूस!"
मम्मी ने मीशा की चूचियां मुंह में लीं, और वो उसे चूसने लगी। "उंह... हमममम हाँ बेटी... तेरी चूचियां कितनी टाइट हैं... आह... लेकिन ये गलत है...बेटी" मीशा ने फिर गाली दी, "चुप साली भोसड़ी!
गलत तो तू कर रही थी मेरी भाई रविश के लंड पर सवार होकर। अब अपनी जीभ निकाल चल!" और मीशा ने मम्मी के मुंह में अपनी जीभ डाल दी,
वो दोनों किस करने लगीं – मीशा अपनी लार उनके मुंह में डाल रही थी वो किस गंदा, लार टपकता हुआ था। फिर मीशा का हाथ मम्मी की चूत पर गया, उसने उंगलियां अंदर डाल दीं।
"ओह... मम्मी रुकमणी, तेरी चूत तो भीगी हुई है वाह... साली रंडी, तुझे अपनी बेटी की उंगली पसंद आ गई क्यों?"
मम्मी तड़प उठी, "आह… उफ्फफ! मीशा... धीरे...आगाह! तेरी अम्मा की चूत फट जाएगी। उन्ह्ह्ह!... उंह... हाँ... और गहराई में...ओहद्ह" मीशा मां के बदलते रंग देखकर हंस पड़ी,
"देखा? तू तो क्वीन रंडी है। अब लेट जा, अपनी बेटी की चूत चाट!" मीशा मम्मी के चेहरे पर सवार हो गई, वो दोनों 69 पोजीशन में आए।
उसकी टाइट चूत मम्मी के मुंह पर रगड़ने लगी। मम्मी ने हिचकिचाते हुए अपनी जीभ निकाली, वो मीशा की चूत चाटने लगी।
"हाँ मम्मी... चाट अपनी बेटी की भोसड़ी! अआआह... आह...हमममम! ओह Yes Fuck ! आआह! तेरी जीभ कितनी गर्म है... साली, रविश को भी तो तू ऐसे चूसती है ना?"
मीशा सिसकार रही थी, वो अपनी गांड हिला रही थी। मैं बाहर खड़ा अपना लंड हिला रहा था, सोच रहा था की ये मेरी फैमिली कितनी गंदी है।
मीशा ने मम्मी की चूत भी चाटना शुरू कर दिया – उसने अपनी लंबी जीभ से क्लिटोरिस को कुरेदा। मम्मी चिल्लाई, "आह... ओहद्ह! बेटी... उन्ह्ह्ह मत कर !
आआह.. ओह फक...Yes ! अआआह! तेरी जीभ... मेरी चूत में हमममम तूफान उठा रही है... उंह... हाँ... चूस ले अपनी अम्मा की रसभरी!"
वो दोनों की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। मीशा ने दो उंगलियां मम्मी की चूत में डाल दीं, फिर वो अंदर-बाहर करने लगी,
"ले साली... फील कर अपनी बेटी का प्यार... तेरी चूत से पानी निकल रहा है देख... झड़ जा रंडी!"
मम्मी झड़ गई वो जोर से चीखी, "आह... उन्ह्ह्ह! मीशा... आ रही हूँ... तेरी अम्मा झड़ रही है आगाह!.. ओह शिट!" उसका रस मीशा के मुंह पर ही छूट गया।
मीशा ने सारा रस चाट लिया, "मम्मी का रस कितना स्वादिष्ट... साली, अब तू मेरी गुलाम है। रोज रात को आना पड़ेगा मुझे खुश करने।"
अभी भी लेकिन मीशा रुकी नहीं। उसने बेड के नीचे से एक स्ट्रैप-ऑन निकाला यानी निकाली लंड वो काला रबर का लंड, 8 इंच का था।
मीशा भयावह हसी हसी "अब असली चुदाई होगी प्यारी मम्मी रंडी। तू तो रविश को चोदती है, अब आज अपनी बेटी का लंड ले!" मम्मी डर गई,
"नहीं बेटी... वो तो नकली है कितना बड़ा है... मेरी फट जाएगी..." लेकिन मीशा ने ब्लैकमेल का हथियार फिर उठाया, "वीडियो भेज दूंगी, साली! फैला दूंगी के रुकमणी अपने बेटे से चूत बजवाती है!" मम्मी फिर चुप हो गई।
मीशा ने स्ट्रैप-ऑन बांधा, और मम्मी को कुत्ता बना दिया। "अपनी गांड ऊपर कर, रंडी अम्मा!" वो बोली और जोर का धक्का मारा –
लंड का सुपारा मम्मी की चूत में घुस गया। मम्मी चीखी, "आआह...अआआह! फाड़ दिया रे साली... मीशा हरामी... तेरी अम्मा मर जाएगी निकाल इसे!"
मीशा हंसते हुए धक्के मारने लगी, "ले मम्मी... चोद रही हूँ तुझे... तेरी चूत कितनी गीली है, बहुत आग होना तेरी चूत में... साली, तू तो एंजॉय कर अब!"
मम्मी की चूचियां लटक रही थीं, वो खुद गांड हिलाने लगी, "उंह... अआआह! हाँ बेटी...ओहद्ह चोद...अआआह!
अपनी अम्मा को चोद... आह Yes Fuck... रविश से भी ज्यादा मजा आ रहा इससे तो... फक मी हार्डर! अआआह।”
फिर मीशा ने स्पीड बढ़ा दी, एक हाथ से मम्मी की चूचियां मलीं, दूसरे से गांड में थप्पड़ मारे। पूरा कमरा गंधा हो गया था – चूत का रस, पसीना, गालियां सब ने कमरे की सभ्यता के औरा का लौड़ा कर दिया था।
"झड़ जा साली... अपनी बेटी के लंड पर झड़!" मीशा चिल्लाई। मम्मी फिर झड़ी, "आह यूऊउह... कमिंग अआआह...
तेरी अम्मा की भोसड़ी फूट गई अआआह!" मीशा भी अपनी चूत रगड़ते हुए झड़ी, वो स्ट्रैप-ऑन हिला रही थी।
ये Maa Ki Chudai पूरे 30 मिनट चली। फिर मीशा ने मम्मी को गले लगा लिया, "अब तू मेरी है, मम्मी। तू रविश को भूल जा, अब तू रोज मेरी चूत चाटेगी तू।"
मम्मी रोते हुए बोली, "हाँ बेटी... तेरी गुलाम हूँ मैं.. बस वीडियो मत फैलाना।" मीशा ने वीडियो डिलीट करने का वादा किया, लेकिन मैं जानता हूँ साली ने बैकअप रखा है।
उसके बाद से घर में चेंज आ गया – मीशा और मम्मी रातों को चुपके से चुदाई करतीं, रविश को मीशा ने धमकाया के चुप रहो वरना वीडियो मैं Viral Video बना दूंगी?
आज भी मैं चुपके से सब देखता रहता हूं और लंड हिलाता हूं।
कैसे हो मेरे प्यारे लंड हिलाने वालों और चूत रगड़ने वाली रंडियों, मैं हूं रुकमणी, वही वाली मां जो अपने बेटे रविश के लौड़े से चुदाई कराती है और अब मैं अपनी बेटी मीशा की गुलाम बन चुकी हूं।
हां भाई, वही 38 साल की रंडी मां, जिसकी चूचियां 36-30-36 के फिगर में उछलती रहती हैं, और चूत हमेशा गीली रहती है किसी न किसी लंड या जीभ की भूख से।
आज मैं अपनी फैमिली की वो सच्चाई सुनाऊंगी, जो 2 साल पहले की है, जब मीशा ने न सिर्फ मुझे ब्लैकमेल किया बल्कि अपने भाई अशु की गांड भी फाड़ दी।
अब आगे की कहानी आशु और मीशा की मां ही सुना रही है। चलो, फिर शुरू से बताती हूं।
वो एक अजीब ही रात थी जब मीशा ने मुझे पहली बार स्ट्रैप-ऑन यानी रबर के लंड से चोदा था,
वो भी कुत्ता स्टाइल में मेरी चूत फाड़ते हुए। उसके बाद घर का माहौल ही बदल गया था। आप सोचते होगे आखिर मेरा बस मेरे बच्चों पर क्यों नहीं चलता तो है।
इसकी वजह है के मेरे पति मरने से पहले सारी प्रॉपर्टी बच्चों को दे गए थे उनको न जाने क्यों मुझपर कभी भरोसा नहीं हुआ।
उन्हें डर था की में जायदाद लेकर अपने हो बच्चों को मरने सड़क पर छोड़ सकती हूं मगर सच कहूं तो मैं अपने बच्चों से बहुत प्यार करती हूं ।
बात रही मेरे रविश की तो वो कहानी मैं फिर कभी सुनाऊंगी आज इसे पूरा करते है।मेरे पति की नफरत ने ही मीशा का व्यवहार मेरे लिए इतना क्रूर बना दिया मगर अब इस सब में मुझे मज़ा आता है।
उस दिन चुदाई के बाद कुछ दिन तो दिन में सब नॉर्मल हो गया – मैं स्कूल जाती थी मीशा कॉलेज।।अशु इंटरमीडिएट की पढ़ाई में लगा रहता था और रविश स्कूल जाता था। लेकिन रातें?
उफ्फ, रातों में तो चुदाई का मेला लग जाता था। मीशा अब घर की मालकिन बन गई थी मेरे पति ने उसे जायदाद से 60 फीसद का हिस्सा दिया था।
वो मुझे रात को प्यार से आवाज़ देकर बुलाती, "मम्मी रंडी, आ जा अपनी बेटी की चूत चाटने।" और मैं, ब्लैकमेल व बदनामी के डर से, चली भी जाती थी।
कभी 69 में हम दोनों एक-दूसरे की भोसड़ी चाटतीं, कभी वो स्ट्रैप-ऑन बांधकर मेरी गांड में घुसेड़ती और खूब हस्ती।
हां, सही सुना गांड भी! मीशा को तो जैसे गांड चुदाई का शौक चढ़ गया था। वो कहती, "मम्मी, तेरी गांड कितनी टाइट है, रविश तो सिर्फ चूत मारता है, लेकिन मैं तेरी गांड फाड़ूंगी।"
मेरे रहते तुमको मर्द की कमी नहीं महसूस होगी और मैं दर्द से तड़पती, "आह बेटी...अआआह! धीरे...यूऊउह तेरी अम्मा की गांड पहली बार फट रही है...आआह उंह्ह्ह!"
लेकिन मजा भी बहुत ज़्यादा आता था उस साली को। कभी कभी रविश मेरे करीब आने की कोशिश करता था लेकिन रविश को मीशा ने धमकाया था –
"चुप रह वरना तेरा वीडियो फैला दूंगी।" तो वो चुपचाप अपनी मां की चूत चाटता और मुरझाए लंड के साथ चेहरा वापस ले जाता था।
और अशु? अशु तो चुपके से सब देखता, वो बस लंड हिलाता। लेकिन मीशा की नजर उस पर भी पड़ गई थी।
एक शाम की बात है। मैं किचन में खाना बना रही थी – दाल, रोटी, सब्जी मर्ज़ी मीशा की ही चलती थी अब।
तभी मीशा अंदर घुसी, उसकी आंखों में वो शैतानी चमक थी जो चुदाई के पहले दिन से मैने आती देखी है। "मम्मी, आज रात अशु को बुला लेना कमरे में, मैं उसकी गांड मारूंगी अब।"
मैं चौंक गई और बोली, "क्या बक रही है बेटी, तू? अशु तेरा भाई है, वो बस 18 साल का लड़का है... वो मानेगा भी नहीं।" मगर मीशा हंसी, " अगर माने ना तो मैं, जबरदस्ती भी कर लूंगी।”
मीशा मेरी चूंची और गांड़ भींचते हुए बोली “तू मदद कर मेरी खाने में नींद की गोली डाल दे। मैंने स्कूल से चुराई है। फिर मैं बांध लूंगी उसके हाथ।"
मैं अपनी बेटी की बातों से डर गई, लेकिन मुझे मीशा का ब्लैकमेल याद आया – रविश के साथ मेरी चुदाई का वीडियो आज तक उसने डिलीट नहीं करा है।
मैं हारते हुए बोली "ठीक है बेटी... लेकिन धीरे से करना, अशु को दर्द न हो, वो 18 साल का बच्चा है।" मीशा ने मेरी चूचियां मसल लीं, "चुप रंडी मां, तू तो एंजॉय करेगी। कल सुबह तक अशु भी मेरा गुलाम बनेगा।"
फिर उस दिन की रात हुई। डिनर टाइम पर सब नॉर्मल तरह से बैठे खाना खा रहे थे। मैंने शांति से अशु के गिलास में नींद की गोली पीसकर डाल दी, फिर सबने खाना खाया।
अशु ने कहा, "मम्मी, आज थकान ज्यादा लग रही है।" और वो कमरे में जाकर सो गया । मीशा ने मुझे इशारा किया, "चल मम्मी, अब शिकार पकड़ने का टाइम है।"
पाऊं दबाए हम चुपके से ऊपर गए। अशु गहरी नींद में था, और कमरा अंधेरा था। मीशा ने लाइट जलाई, और मैंने अशु के हाथ उसके बेड के हेडबोर्ड से रस्सी से बांध दिए – जो मीशा ने पहले से तैयार रखी थी।
मेरा बेटा अशु हल्का सा हिला, लेकिन गोली की वजह से जागा नहीं। मीशा ने उसकी पैंट उतारी – उफ्फफ! वाह, क्या लंड था! 6 इंच का मोटा सांप,वो आधा खड़ा था।
"देख मम्मी, भाई का लंड कितना हसीन है। लेकिन आज मैं इसकी गांड फाड़ूंगी।" मीशा मुझे आशु का लंड दिखाते हुए बोली।
मैंने उसे नारियल तेल की बोतल दी, जो किचन से लाई थी। मीशा ने अपना स्ट्रैप-ऑन बांधा – वही 8 इंच का काला रबर का लंड, जो मेरी चूत-गांड फाड़ चुका था।
पहले मीशा ने अशु को पलट दिया, और उसे पेट के बल लिटाया। आशु की गांड सफेद, टाइट थी – साफ पता लग रहा था कभी चुदाई न हुई थी उसकी।
मीशा ने उसकी गांड़ पर नारियल तेल उंडेला, और अपनी उंगलियां पहले अंदर डालीं। "उफ्फ मम्मी, भाई की गांड कितनी नरम है... देख, उंगली घुस गई मेरी पूरी।"
अशु हल्का सा अआआह! में सिसका, लेकिन वो नींद में था। ये नज़ारा मैं देख रही थी, मेरी भी चूत गीली हो गई। मैने फिक्र से कहा "बेटी, धीरे... वो जाग जाएगा।"
मीशा ने हंसी उड़ाई, "जागे तो और मजा आएगा।" फिर उसने स्ट्रैप-ऑन पर भी तेल लगाया, फिर उसका सुपाड़ा अशु की गांड पर रगड़ा।
उसने गांड़ पर धीरे-धीरे दबाया – "उंह्ह... घुस रहा है मम्मी... भाई की गांड फट रही है देखो!" अशु की गांड में वो लंड बस 2 इंच घुसा, इतने में ही वो दर्द से सिकुड़ गया।
"अआआहआह... क्या हो रहा..." आशु की नींद टूटने लगी। मीशा ने फिर जोर लगाया, आधा लंड अंदर चला गया! अशु चीखा, "आआहआआह!
मम्मी... दर्द हो रहा... कौन है... अआआह! मां निकालो इसे!" लेकिन बेचारे के हाथ बंधे थे, वो बस तड़प रहा था। मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा, "चुप बेटा...डर मत पीछे मीशा है तेरी दीदी।
आज तू भी हमारा हो जाएगा।" अशु की तो जैसे आंखें फटीं, "दीदी? क्या बक रही हो मम्मी... ये पागलपन है... आह्ह्ह! फाड़ दिया अआआह खोलो मुझे... मेरी गांड...अआआह! निकालो सालो!"
मीशा हंस पड़ी, "चुप हरामी भाई, तू तो मम्मी को चुपके से देखता था ना चुदते हुए। अब तेरी बारी। ले, अब पूरा लंड!" मीशा ने और जोर का धक्का मारा – पूरा 8 इंच अशु की गांड में घुस गया!
मेरे बच्चे का खून निकल आया, नारियल तेल की चिकनाहट घुप घुप्प घुप्प की आवाज़ आ रही थी । अशु चिल्लाया, "आआआह! मार डाला रे अआआह! छोड़ो मुझे.. दीदी हरामी...
तेरी अम्मा की तरह रंडी बना दिया मुझे... उंह्ह्ह! दर्द अआआह... दर्द हो रहा है!" मीशा धक्के मारने लगी, धीरे-धीरे वो लंड आशु की गांड़ में अंदर बाहर हो रहा था। "हां भाई...
तेरी गांड कितनी टाइट है... साली, तू तो कुंवारी गांड है... ले, चोद रही हूं तुझे अपनी चूत के लंड से!"मैं अशु के लंड को पकड़ लिया, और हिलाने लगी –
"बेटा, सह ले... तुझे भी मजा आएगा। मम्मी को तो आया था देखा तो है ही तूने ।" मगर अशु रो रहा था, "नहीं मम्मी... याद है ना, जब तुम्हें रविश ने गांड मारी थी?
तुम्हारी चीखें... आह्ह्ह... वही दर्द... छोड़ दो प्लीज़!"लेकिन मीशा रुकी नहीं। वो अधिक स्पीड बढ़ा दी, वो एक हाथ से अशु की गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोली,
"ले साले...याद कर उस पल को जब रास्ते में एक लड़की पर गंदी नज़र डालकर तूने और तेरे दोस्तो ने कहा था।
अगर इसकी गांड़ मारने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए, याद कर वो बात जब तू बोल रहा था के मर्ज़ी से मिले तो अच्छा है नहीं तो जबरदस्ती चोद देगा किसी भी चूत को।
मीशा दीदी तो वकील बनने वाली है बचा लेंगी मुझे कानून से बहुत प्यार करती है मुझसे अब फील कर अपनी दीदी का प्यार।
तेरी गांड में मेरा लंड घुसा हुआ है, अब तू और दोस्त सब मेरी कुतिया बनेंगे, यही सज़ा मिलेगी हर उस इंसान को जो किसी के साथ बिना मर्ज़ी के जबरदस्ती करेगा!"
मैं उसकी बाते सुनकर हैरान थी हमारा पूरा कमरा गूंज रहा था , अशु की चीखें गहरी होती जा रही थी, मीशा की सिसकारियां बढ़ती जा रही थी, नारियल तेल की चपचाप आवाज मुझे गरमा रही थी।
ये चुदाई पूरे 10 मिनट चली , अशु की गांड बुरी तरह लाल हो गई, वो तेल और रस से गीली होकर चमक रही थी। उसके चेहरे को देखकर लग रहा था के उसका दर्द असहनीय है फिर आशु रोते हुए बोला
“माफ कर दे बहन , मुझे सबक मिल गया है, मैं कभी किसी लड़की से जबदस्ती करने की कोशिश नहीं करूंगा।” मीशा उसकी बात सुनकर खुश हुई लेकिन वो गुस्से भरी आवाज़ में बोली
“चल तुझे माफ करा, लेकिन आज से तू मेरा एजेंट है बाप की छोड़ी हुई जायदाद में सब में हम बाट लूंगी लेकिन मेरी शर्त है, मुझे तेरे उन दोस्तों की भी गांड़ मारनी है जो उस दिन तेरे साथ थे।”
मैं पता नहीं क्यों काफी खुश थी लेकिन आशु के पास उसकी बात मानने के अलावा कोई चारा न था, फिर मीशा ने दुबारा लंड से गांड़ चुदाई शुरू कर दी वो बोली “जो काम शुरू करा है उसे खत्म तो करना पड़ेगा ना।”
मगर अशु की चीखें अब बदल गईं। "आह... हमममम! उंह्ह... दीदी... अआआह ! धीरे... अब... मम्मम् ! अब दर्द कम हो रहा... ओह्ह्ह!"
मीशा ने महसूस करा के उसे भी मज़ा आ रहा है तो वो बोली, "हां भाई... अब मजा आ रहा ना? तेरी गांड खुल गई है अब.. हिला अपनी गांड!"
अशु ने हिचकिचाते हुए गांड हिलाई, "हां दीदी... आह... तेरी लंड अआआह... मेरी गांड में... उफ्फ...अआआह! गहराई में जा रहा है... हां... ओंह्ह्ह चोद!"
मैं हंस पड़ी, "देखा बेटा, मम्मी की तरह तू भी रंड बन गया।" मगर मेरे मन में सवाल था अगर मीशा आशु को सबक सिखाना चाहती थी तो उसने मेरी क्यों मारली?
इसका जवाब भी मुझे मिला लेकिन उसके लिए आप लोगो को इंतज़ार करना होगा।खेर अशु अब खुलकर तड़प रहा था, "आआह दीदी... फक मी हार्डर... तेरी भाई की गांड फाड़ दे... ओह यस अआअब... हमममम!" मीशा बहुत खुश हो गई,
वो बोली "अब बोल, कौन है तेरी मालकिन है?" अशु चिल्लाया, "तू दीदी... मीशा रानी... तेरा गुलाम हूं मैं... गांड चोद अआआह... आह!"
फिर चुदाई 20 मिनट और चली। मीशा ने अपनी स्पीड तेज की, अशु का लंड मेरे हाथ में ही फूट पड़ा – उसका गर्म रस मेरी हथेली पर गिरा।
"आह मैं... झड़ रहा हूं दीदी...अआआह तेरी चुदाई से!" मीशा भी अपनी चूत रगड़ते हुए झड़ी, "हां भाई... तेरी गांड ने मुझे झड़ा दिया...ओंह्ह्ह उंह्ह्ह!"
फिर वो लंड बाहर निकाला गया, अशु की गांड से तेल और रस टपक रहा था। मीशा ने आशु को बंधन से खोला, अशु को गले लगा लिया। "अब तू सच में हमारा है भाई।
कल से रोज चुदाई होगी।" अशु शरमाया, लेकिन मुस्कुराया, "हां दीदी... मजा आया... लेकिन अगली बार जबरदस्ती मत करना।" अगली रात कुछ चेंज आ गया।
अशु खुद मीशा के कमरे में गया। लेकिन मीशा ने कहा, "नहीं भाई, आज चूत और गांड दोनों में करते है। लेकिन पहले मम्मी को बुला।" मैं आई, एकदम नंगी। हम तीनों बेड पर कूदे।
मीशा ने मुझे और अशु को निर्देश दिया, "मम्मी, अशु का लंड चूस। भाई, मम्मी की चूत चाट।" अशु ने मेरी चूत पर जीभ लगाई, "मम्मी... तेरी भोसड़ी कितनी स्वादिष्ट है...
हममम... रस भरा हुआ है इसमें।" मैं सिसकी ले रही थी, "आह बेटा... चाट अपनी अम्मा को... ओह...उन्ह्ह्ह हमममम! तेरी जीभ...
उंह्ह!" मीशा देख रही थी, फिर स्ट्रैप-ऑन बांधते हुए। फिर वो अशु के पीछे आ गई, "अब गांड मारूंगी तेरी, लेकिन तू मम्मी को चोदते रहना ।"
अशु का 6 इंच का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा – "आह मम्मी... तेरी चूत कितनी टाइट है...उफ्फफ! चोद रहा हूं तुझे!" मैं चिल्लाई, "हां बेटा...
अआआह फाड़ अपनी मां की चूत... आआह ओहद्ह!" मीशा ने फिर से नारियल तेल लगाया, और अशु की गांड में अपना रब्बर का लंड घुसेड़ा।
अशु दर्द से फिर सिकुड़ा, लेकिन चुदाई जारी रखी। "उंह्ह दीदी...आअआआ गांड में... लेकिन मम्मी की चूत ओंह्ह्ह... ओह फक!"
हम तीनों की चुदाई की ट्रेन सी बन गई थी– अशु मुझे चोद रहा था, मीशा अशु को। कमरा गालियों से भरा था: "ले रंडी मां... तेरी चूत में मेरा लंड!"
"आह भाई... दीदी का लंड तेरी गांड फाड़ रहा!" "ओह बेटे... झड़ जा अपनी अम्मा में!"हम सब को एक साथ चरम सुख आया – अशु ने मेरी चूत में अपना रस भरा मैं झड़ी,
मीशा अपनी चूत से रस निकाल दी। उसके बाद, मीशा ने अशु को अपनी चूत चुदाई की इजाज़त दी। "भाई, अब तू मुझे चोद सकता है।"
अशु मीशा के ऊपर चढ़ा, उसने अंदर लंड घुसाया –"दीदी... तेरी चूत कितनी गर्म है... आह!" मीशा सिसकी, "चोद भाई...अआआह ये इनाम है तेरे लिए ओहद्ह!
फाड़ अपनी बहन को... हममम!" मैं सब देख रही थी, अपनी चूचियां मलते हुए। फिर गांड का टर्न आया। मीशा अब घोड़ी बनी और बोली, "अशु, मेरी गांड मार।" अशु ने खूब सारा तेल लगाया, और धक्का मारा।"
आह दीदी... तेरी गांड टाइट है... ले!" मीशा चिल्लाई, "हां भाई... अआआह जोर से कर.. फाड़ दे ओहद्ह... ओह यस फक!" चुदाई तेज हो गई, थप्पड़, गालियां सब अपनी रफ्तार से चले।
"साली रंडी बहन... तेरी गांड फाड़नी है आज!" "ले हरामी भाई... तेरी दीदी की गांड तेरे लंड की भूखी है!" मैं भी बीच में कूद पड़ी,
मैने अशु के लंड को चाटा जब वो गांड़ से बाहर निकाल आया। ऐसे करते हुए काफी बार हम चरमसुख पर झड़े – तीनों का रस इधर-उधर बिखरा था।
उसके बाद, रविश को भी हमने शामिल किया, और मीशा ने एक एक कर के आशु के दोस्तो को बहुत बुरी तरह गांड़ मारी। लेकिन वो अलग अलग चैप्टर है।
दोस्तों, ये चुदाई से भरी पारिवारिक कहानी कैसी लगी? मीशा अब सबकी मालकिन, मैं गुलाम, अशु रंडी भाई। कहने को तो मेरी बेटी ने एक लड़की के संस्कार अपने रबर के लंड पर रखकर बर्बाद कर दिए है।
लेकिन उसकी जो वजह है और उसका जो तरीका है मुझे उससे अब कोई शिकायत नहीं है कमेंट में बताओ।
Free Sex Kahani कैसी लगी कॉमेंट कर के ज़रूर बताए और इंतज़ार करे अगले भाग का तब के लिए। अलविदा!

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