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मालती मामी की चुदाई - Antarvasna Sex Stories

दोस्तों मेरा नाम हैरी है और मेरी उम्र २४ वर्ष की है। मेरी ये कहानी मेरी दूर की रिश्तेदार की है जो मेरी मामी है। मामी के बारे में लिखू तो उसकी उम्र 27 वर्ष रंग सावला पर बेहद खूबसूरत कद पांच फ़ीट आठ इंच और जिसम की बात करू तो भरा हुआ बदन जैसे किसी भी चीज़े की कमी ना हो । 34 इंच के मम्मे, 25 इंच की कमर और 35 इंच की गांड। रंग बेहद गोरा और खूबसूरत सा चेहरा। उसका नाम मालती है।


अपने बारे में लिखू तो मेरा नाम हैरी उम्र २४ वर्ष। कद पांच फ़ीट दस इंच, रंग सावला, शरीर बेहद सुडोल और तगड़ा क्योकि दस सालो से भी ज्यादा समय से में हर रोज़ जिम कर रहा हु और सेक्सुअली पूरी तरह से स्ट्रांग हु। लंड का साइज आठ इंच जो तीन घंटे बिना रुके चुदाई करने में सक्षम है ।


कहानी इस तरह से शुरू हुई की मेरे घर में कुछ समय से बात हो रही थी की मेरे मां का काम सेट नहीं है और मेरे पापा जो एककपनी में ऊँचे पद पर है, वो इस कोशिश में थे की मां को अगर उनकी कंपनी मई काम मिल जाये तो बढ़िया है।


इसलिए एक दिन इतवार का था और मैं, मेरे पापा और माँ घर पर थे तो पापा कहने लगे की मैं स्टेशन जाकर मां मामी को ले आयु उनकी ट्रैन दोपहर को दो बजे तक आएगी तो मैंने कहा ठीक है । दो बजे से थोड़ा पहल में स्टेशन पहुंच गया और ट्रैन का इंतज़ार करने लगा। ट्रैन आई और मुझे मामा का फोन आया और वो मुझे स्टेशन पर मिल गए ।


मामी को मैंने पहले कभी नहीं देखा था और पहली नज़र मई वो मुझे जवान और कमसिन सी लगी । उसकी आँखों में जैसे सेक्स के लिए प्यास दिख रही थी । खैर मैं गाडी में मां मामी को घर पर ले आया और सब बातें करने लगे ।


गर्मियों के दिन थे और लाइट अक्सर जाती रहती थी। बातों बातों में माँ ने मुझे मामी का सामान नीचे मेरे कमरे में रखने के लिए कहा। नीचे हमारे दो कमरे थे एक मेरा और एक मेरे माँ पापा का और दूसरा एक कमरा ऊपर था जिसमें घर का कुछ टूटा सामान हम रख लेते थे या वो सामान जो बाद मैं काम आ सके। मैंने मामा मामी का सामान नीचे मेर कमरे रख दिया ।


लाइट बंद थी और घर में पूरा अँधेरा था। माँ पापा मामा मामी सब छत पर बातें कर रहे थे और मेरा जिम जाने का समय हो चूका था। तो मैंने दूसरे कपडे पहनाने के चक्कर मैं अपने सारे कपडे उतारे और तभी मुझे मेरी एक प्रेमिका की कॉल आ गयी और मैं उससे बातें करने लगा और तभी एकाएक लाइट भी आ गयी।


मैंने अपनी प्रेमिका से कहा की देखो तुमसे बात शुरू हु हुई की लाइट भी आ गयी । मेरा इतना कहने दे देर थी की मामी कमरे में एक दम से आ धमकी। दरवाजा अचानक से खुला और मामी मेरे सामने थी और मैं पूरा नंगा और मेरा आठ इंच लम्बा लंड नाग की तरह लेटा हुआ और मेरे हाथ में फोन और मामी की नज़र सीधे मुझ पर पड़ी और जैसे ही मामी ने मुझे देखा उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी और वो हस्ती हुई कमरे से बहार चली गयी ।


मैं हक्का बक्का रह गया की ये क्या हो गया। मामी ने मुझे पुरे नंगा देख लिया । खैर मैं जिम चला गया। रात को घर आया तो सब खाने की टेबल पर बैठे हुए थे। माँ ने मुझे कहा की मैं ऊपर वाले कमरे में सोऊंगा और मामा मामी नीचे मेरे कमरे में । खाना खाते कहते मैंने देखा की मामी मेरी और बड़े गौर से देखती जैसे कोई दिलचस्पी ले रही हो पर मेरी उससे नज़रें मिल नहीं रही थी ।


रात को सब नीचे सोने चले गए और मैं ऊपर स्टोर रूम में गद्दा लगाकर सोने लगा। अगले दिन की बात है। माँ स्कूल में पद्धति है तो माँ सुबह सुबह स्कूल चली गयी और पापा मामा को अपने साथ काम पर ले गए । पापा ने मामा को अपने साथ काम पर लगवा लिया था। मुझे उस समय मेरी प्रेमिका का फोन आया और उसने मिलने के लिए मुझे बुला लिया।


असल में मेरी प्रोग्राम मेरी प्रेमिका की चुदाई करने का था तो मैंने पहले अपने दोस्त को फोन करके जगह बुक कर ली। मेरे दोस्त के पास पुराना घर है जिसमे अक्सर मैं अपनी प्रेमिकाओं को लेकर जाता और चुदाई करता हु । इसलिए मैंने जगह बुक करके अपनी प्रेमिका को बोलै और मिलने का समय पक्का कर लिया । मैं नीचे आया और देखा तो मामी मुझे दिखाई नहीं दी।


मैंने सोचा अभी सो रही होगी। मैंने जल्दी से नहाने के लिए बाथरूम मैं गया और नहाने के बाद देखा की तौलिया भूल आया हु। सोचा जल्दी जल्दी में रह गया होगा और अब क्या करता। मामी का कमरा बंद था तो मुझे लगा की वो सो रही होगी अभी भी तो मैं इसी तरह से बिन कपड़ो के नंगा ही ऊपर जाने लगा तो सीढ़ियों पर से मामी उतरती हुई मेरे सामने आ गयी। मैं बिलकुल नंगा और मेरे हाथ में कोई कपडा नहीं था की खुद को छिपा सकू तो मामी की नज़र सीधे मेरे लंड पर पड़ी।


मैंने मामी की और देखा तो वो जैसे मेरे लंड को देख रही थी। लंड खड़ा होने लगा था और आठ इंच लम्बा नाग अब जाग रहा था तो मैं जल्दी से ऊपर की और दौड़ा। सीढ़ियों के साथ ही कमरा था तो मैं कमरे में कपडे पहनने लगा । मैंने देखा की चाय का कप पड़ा हुआ है और साथ में खाने एक लिए बिस्कुट है । मैं समझ गया की मामी रख कर गयी होगी पर वो मेरे लिए चाय लेकर क्यों आई। मामा मामी को मैंने पहले कभी नहीं देखा था वो हमारे दूर के रिश्तेदार थे। मैं तो असल में मामा मामी की शादी में भी नहींगया था जो कोई साल भर पहले हुई थी। खैर कपडे पहन कर मैं नीचे आया तो मामी वह कड़ी मुझे देख है रही थी और बोली चाय पीली आपने हैरी।


मैंने कहा हाजी पी ली।


इतना कह कर मैंने बाइक निकाली और अपनी प्रेमिका को अपने दोस्त के घर लेकर गया और वह खूब अच्छे से तीन घंटे चुदाई की और फिर उसे उसके घर छोड़ मैं अपने घर आ गया। दोपहर हो चुकी थी और मामी कमरे में थी और मैं छत पर अपने कमरे में चला गया । मामी हाथ में खाने की प्लेट लेकर आई और मैं खाना खाने लगा और मामी वही स्टोर मैं बैठ गयी और मेरे से गैप शाप करने लगी। मामी बातो से मुझे काफी खुश दिल वाली पर आँखों से जैसे वो कामवासना से भरी हुई लगती । उसकी आँखों से साफ़ लगता जैसे वो किसी चीज़ के लिए तड़प रही हो। खैर मैंने मामी से माफ़ी मांगी की कल कमरे में और आज जो सीढ़ियों पर हुआ वो अनजाने में हुआ तो मामी हसने लगी और कुछ नहीं बोली।



इसी तरह मामी बीच बीच में मेरे कमरे में आ जाती और बातें करने लगाती। जैसे वो मेरे से ज्यादा नज़दीकिया बढ़ाने को थी। पर मैं तो हु ही बेशरम टाइप का तो मुझे एक और तरकीब सूझी। खैर रात का खाना खाकर सब सो गए और मैं ऊपर कमरे में सो गया और सुबह को मामी ने मुझे जगाया और वो चाय की प्लेट लेकर खड़ी थी ।


चाय का कप देकर मामी नीचे चली गयी और मैंने सोचा की जो रात को आईडिया आया था वैसे ही करता हु । मामी तो कुछ देर मैं आ ही जायेगी। मैंने अपने कपडे उतरे और पूरा नंगा हो गया और दरवाजा थोड़ा सा खुला छोड़ दिया था। मैंने वैसे ही कान पर फोन लगा लिया और बात करने की एक्टिंग करने लगा । तभी मामी दरवाजा खोल कर अंदर आई और उसने मुझे फिर से नंगा देख लिया। मेरी नज़र मामी पर पड़ी तो वो जैसे मेरी छाती और मेरे आठ इंच लम्बे लंड को देख रही थी । मैंने फोन को नीचे रखा और पास पड़ी निक्कर उठा ली और मामी हस्ते हुए कमरे से बहार जाकर खड़ी हो गयी । मैंने कपडे पहने और मामी बोली हैरी मैं अंदर आ जाऊ तो मैंने कहा हां मामी आ जाओ।



मामी हस्ते हुए अंदर आई और वो खाने की प्लेट लेकर आई थी। मैं वही बैठ सुबह का नाश्ता करने लगा ।मैंने स्टोर रूम में ही एक मंज्जा लगा लिया था और उसी पर सोना बैठना हो रहा था तो मैं वही पर बैठ गया और मामी वही बैठ बातें करने लगी । बातें करते करते वो मेरा हाथ पकड़ लेती तो कभी मेरी गाल। हम खूब मस्ती मज़ाक कर रहे थे और सच कहु तो मामी से मेरी सबसे ज्यादा बन गयी थी। मैं अपनी प्रेमिकाओं से भी बात नहीं कर रहा था और मामी हमेशा मेरे आस पास ही रहती थी। रात हुई तो सब खाना एक साथ कहते थे तो खाना खाते मुझे जाइए मेरी टांग पर किसी ने धीरे से मारा। मुझे लगा की ये क्या है और फिर से किसी ने मुझे मेरी टांग पर धीरे से मारा।


मुझे लगा ये मामी है । इस बार मामी मरने लगी तो मैंने अपनी दूसरी टांग से उसकी टांग को छू दिया और बहुत मुलायम त्वचा लगी मुझे । ऐसा काफी बार हुआ और फिर मैंने क्या किया की जब मामी का पाँव मेरी टांग से टकराया तो मैंने दूसरे पाव से उसकी टांग को रोक अपने पाव की उंगली से उसके पाव की उंगली पकड़ ली । मामी मेरी और देख कर मुस्कुरा रही थी और मैंने अपने दूसरे पाँव को मामी के पाँव के ऊपर फेरना शुरू कर दिया तो मामी ने मेरी और देखा और मुस्कुराते हुए अपना खाना खाये जा रही थी। खैर मैं ऊपर अपने कमरे में आ गया और सुबह फिर से मेरी आँख खुली तो मामी मेरे पास खड़ी थी चाय की प्लेट लेकर । चाय देकर मामी बोली यार घर पर ही बैठे रहते हो कहीं घूम आया करो तो मैंने कहा नहीं मामी मन नहीं करता कही जाने का।


मामी बोली पहले तो मुझे मामी नहीं मालती कहा करो।


मैंने कहा अगर मामा के सामने भी?


मामी बोली उनके सामने नहीं कहना पर अकेले होते हो सिर्फ मालती कहा करो।


मैंने कहा ठीक है मालती।


मालती ने कहा मुझे ही कही घुमा लाओ फिर तुम।


मैंने कहा कहाँ जाना चाहते हो आप?


मालती ने कहा जो अच्छी जगह हो कही भी मैं तो बोर हो रही हु बैठे बैठे।


मैंने कहा ठीक है चलते हैं फिर घूमने किसी माल में या फिल्म देख लेंगे तो मामी मान गयी।


त्यार होकर जब निकलने लगे तो मैंने बाइक निकाल ली और मामी मेरे साथ एक दम चिपक कर बैठ गयी और उसने अपना हाथ मेरे पेट पर रख कस लिया । खैर हम एक माल में पहुंचे और फिल्म की टिकट ली और फिल्म हाल के अंदर पहुँच गए। फिल्म देखते हुए भी हम दोनों बातें किये जा रहे थे और मालती ने देखते मुझे मेरे गाल पर किस कर दी।


मैंने कहा की ये आप क्या कर रहे हो?


तो मालती ने कहा की तुम बड़े प्यारे हो मन कर रहा था तो करदी।


ऐसा काफी बार हुआ की मालती ने मेरी गाल पर किस की और फिर वो हसने लगती। मैंने कहा एक बार अच्छे से कर ही दो।


मालती हसने हुए बोली अच्छा?


और फिर से मालती मेरी गाल को कास कर अपने होठो से चूसने लगती। मेरा आठ इंच लम्बा लंड पूरा तना हुआ था और वो जीन्स की एक साइड से ऊपर को उठा हुआ था। मालती कितनी कितनी देर तक इसी तरह से मेरी गाल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती और चूसती रहती।


मैंने कहा निशान पद जायेगा गाल पर मालती।


मालती बोली फिर क्या हुआ।


मालती इसी तरह से लगी रही। कभी वो मेरी छाती पर हाथ फेर देती और कभी मेरे गले पर और कभी मेरे गाल को चूमने लगती।

खैर फिल्म खत्म हुई और हम बहार आये तो मालती बोली यार गाल पर लाल निशान पड़ गया है। मैंने कहा आपने ही किया है ये

मैंने कहा कही ऐसा तो नहीं आप अँधेरे में मेरा फायदा उठा रहे थे।


मालती ने कहा नहीं यार।


मैंने कहा हिम्मत है तो यहाँ पर करके दिखाओ खुले मैं।


तो मालती ने फिर से मेरी गाल पर एक किस कर दी और कहा और कुछ।


मैंने कहा अच्छा अगर ऐसा है तो जैसे मेरी गाल चूस रहे थे आप वैसे ही मेरे होठ चूस कर दिखाओ।


मालती हसने लगी और बोली अच्छा।


खैर हम दोनों खाना खाने के लिए एक रेस्टोरेंट में गए और फिर वह से घर आ गए । हमें था की माँ के स्कूल से आने से पहले हम घर आ जाएं। माँ स्कूल से आकर खाना खाने लगी और मैं ऊपर कमरे में था तो मालती भी आ गयी और बेड पर मेरे साथ बैठ गयी।


मालती ने कहा आँखें बंद करो अपनी।


मैंने कहा क्या हुआ मालती।


मालती ने कहा करो तो सही और जब तक मैं न कहु खोलना मत।


मैंने कहा क्या हुआ बात तो बताओ।


मालती बोली बस चुप करके अपनी आँखें बंद रखना और तब खोलना जब मैं कहु।


मैंने कहा ठीक है।


मैं बेड पर लेटा हुआ था तो मैंने अपनी आँखे बंद करदी।


मालती ने कमरे का दरवाजा बंद किया और बेड पर आकर मेरे होठो को अपने होठो में लेकर चूसने लगी।


मेरे होठ पुरे के पुरे मालती ने अपने होठो में खींच रखे थे और वो जोर जोर से मेरे होठो को चूसे जा रही थी । पहले तो मालती के होठ मेरे होठो से छू रहे थे पर फिर मालती जैसे मेरे एक तरफ लेट गयी और मेरे होठो को चूसने लगी। अभी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लंड मालती के हाथ में हो। मालती ने मेरी निक्कर में हाथ दाल मेरे लंड को पकड़ा और जोर जोर से हिलना शुरू कर दिया । लंड किसी खम्बे की तरह सीधा खड़ा हुआ पड़ा था । मालती इसी तरह से लगी रही और फिर अचानक लंड पर बहुत ज्यादा गर्मी महसूस हुई ।


मैंने धीरे से आँखे खोली और देखा तो मालती मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी । उसने मेरी निक्कर उतर कर एक तरफ फेंक दी और लंड को मुँह में लेकर जोर जोर से आगे पीछे हो रही थी। कोई एक घंटा इसी तरन से मालती लगी रही और फिर उसने लंड के नीचे के अंडकोष अपने मुँह में लिए और चूसने शुरू कर दिए । मालती कभी लंड को अपने मुँह में लेती तो कभी अंडकोष को और चूसने लगती । दो घंटे हो गए थे पर मालती रुकी नहीं और वो लगातार मेरे लंड को अपने मुँह में लिए चूसे जा रही थी और फिर उसने मेरे होठ चूसने शुरू कर दिए ।


इसी तरह से वो लगी रही और मैं बेड पर लेटा रहा और मालती लंड को मुँह में लीये चूसे जा रही थी की लंड में से माल निकला और सारा माल मालती के मुँह में गिरने लगा और कुछ देर बाद मालती ने मुझे आँखे खोलने के लिए कहा। मेरी निक्कर एक तरफ पड़ी थी और नीचे से में पूरा नंगा था और मेरी छाती पर हाथ फेर फेर कर मेरी टीशर्ट ऊपर को चढ़ी हुई थी और मालती एक तरफ बैठी है रही थी।

मैंने कहा ये क्या कर रहे थे आप।


मालती ने कहा इसे प्यार कहते हैं।


मैं हु तो बेशरम सा क्योकि सैकड़ो लड़किया चोदी है अब तक तो मैं इसी तरह नंगा बैठा रहा और मालती मेरे पास बैठी रही । मालती बोली अच्छा लगा।


मैंने कहा हां बहुत आनंद आ रहा था जब मेरा लंड किसी गर्म जगह पर था उस समय बहुत मज़ा आ रहा था।


मालती बोली लंड मतलब?


मैंने लंड को दिखा कर कहा ये।


मालती बोली अच्छा और?


मैंने कहा जब आप मेरे होठ चूस रहे थे जब भी बहुत मज़ा आ रहा था। मालती बोली अच्छा मैं चलती हु अब नीचे तुम भी आ जाना।


मैंने कहा ठीक है। खैर रात के खाने का खाना हुआ और मैं सोने चला गया। अगले दिन सुबह फिर से सब अपने अपने काम पर चले गए और मालती गर्म दूध लेकर आई और मुझे उठाकर दूध पिलाया और बोली दूध पीलो जल्दी से।


मैंने कहा क्या हुआ?


मालती ने कहा पीओ तो सही।


मैंने कहा कुछ मिलाया तो नहीं इसमें।


मालती हस्ते हुए बोली कुछ नहीं मिलाया पीलो तो में दूध पी लिया और मालती ने कहा अपनी आँखे बंद करो जैसे कल की थी और तब ही खोलना जब मैं कहु।


मैंने कहा ठीक है तो मैंने आँखे बंद कर ली।


मालती ने मुझे बेड पर लिटाया और पहल मेरी टीशर्ट उतरी और फिर निक्कर और मुझे पूरा नंगा कर दिया । कुछ समय मैं मालती पूरी मेरे ऊपर चढ़ गयी और वो पूरी नंगी थी । मालती मेरे होठो को चूसने लगी और मेरा आठ इंच लम्बा लंड खड़ा हो गया। मालती ने मेरे होठ चूसे और फिर मेरे ऊपर से उठी और मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और चूसने लगी ।


मालती के बदन की गर्मी मुझे मेरे लंड पर महसूस हो रही थी । मैं बीच बीच में उठकर देखता तो मालती मेरा लैंड चूस रही होगी और अपने हाथ मेरी छाती पर फेरने लगती। फिर मालती ने मुझे सर से पाव तक चूमना शुरू किया। मालती मेरे रोम रोम को चूमे जा रही थी और लंड तक पहुंचते ही उसे मुँह में लेकर चूसने लगती ।


आधा घंटा बीत चूका था और फिर मालती मेरे ऊपर से उठी और मुझे ऐसा लगा जैसे लंड किसी टाइट जगह पर जा रहा हो। मालती मेरे लैंड के ऊपर बैठी हुई थी और लंड को अपने हाथ में पकड़ कर छूट में डालने की कोशिश कर रही थी पर लंड था बहुत ज्यादा मोटा और छूट टाइट तो मालती धीरे से कोशिश कर रही थी तो मालती ने अपनी दोनों टाँगे फैलाई और धीरे धीरे करके लंड को चूत में डाला और धीरे से ऊपर नीचे होने लगी । मालती धीरे धीरे से ऊपर नीचे हो रही थी और लैंड चूत के अंदर बहार आ जा रहा था। मैंने आँख खोल कर देखा तो मालती आँखे बंद कर सेक्स से तिलमिला रही थी।


पहले तो धीरे धीरे पर बाद में तेज़ी से मालती लंड के ऊपर जोर जोर से उछलने लगी। लैंड कोई दोइंच तक चूत के अंदर घुस चूका था । काफी देर इसी तरह करने के बाद मालती उठी और मेरे ऊपर लेट गयी और नीचे से लंड को अपने हाथ में पकड़ चूत में डालने की कोशिश कर रही थी पर इस तरह से कैसे होना था तो मैंने कहा जिस तरह से आप लंड को चूत में डालने की कोशिश कर रहे हो इस तरह से नहीं होगा। आपको ऊपर बैठकर उछालना होगा मालती तभी लंड चूत के अंदर बहार जा सकेगा ।


मालती हसने लगी और बोली अच्छा तुम्हे पता है ये सब । मैंने कहा आठ इंच लम्बा लंड है इतना तो पता ही होगा। मालती को मैंने फिर से लंड के ऊपर बिठाया और उसकी दोनों टांगको को फैलाया और उसे धीरे धीरे से नीचे करते करते लंड उसकी चूत में घुसता चला गया और फिर मालती जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी। कभी कभी मैं कमर को ऊपर जोर से करता तो लंड और अंदर तक घुस जाता । काफी देर बाद जब मालती थकने लगी तो मैंने मालती को लैंड के ऊपर ही रुकने के लिए कहा और कहा की अपना वजन जितना हो सके लंड के ऊपर दाल दे तो मालती ने ऐसा ही किया और इससे लंड चूत में और अंदर तक घुसने लगा और मालती को दर्द होने लगा ।


कोई पंद्रह मिंट तक मालती लंड के ऊपर बैठी रही और फिर मैंने मालती को घोड़ी बनने को कहा और लंड को मालती की गांड में दाल कर जोरजोर से धक्के देने शुरू किये। मालती आह आह कर रही थी पर मैं अब कहा रुकने वाला था। मैंने कहा कैसा लग रहा था मालती।


मालती बोली आह आह यार कितना लम्बा मोटा लंड है तुम्हारा बहुत मज़ा करवा रहा है मुझे।


मैंने और जोर जोर से धक्के देने शुरू किये और कोई आधा घंटा मई इसी तरह से लगा रहा और फिर मैंने मालती को मेरे ऊपर आने को कहा तो मालती मेरे ऊपर आ गयी। मैंने मालती को पीठ करने को कहा और लंड को मालती की गांड में रखा और मालती को धीरे धीरे करके नीचे करते हुए लंड मालती की गांड में डाला और मालती ऊपर नीचे होने लगी ।


मैं मालती की पीठ पर हाथ फेरने लगा और मालती लडन के ऊपर उछल रही थी । काफी देर बाद जब मालती थकने लगी तो मैंने मालती को लंड के ऊपर ही बैठने को कहा और वो उसी तरह से रुक गयी और मालती का पूरा भार मेरे लंड पर आ गया और लंड गांड में और अंदर तक घुसने लगा जिससे मालती आह आह करने लगी । दस मिंट बाद फिर से मालती ने लंड के ऊपर उछलना शुरू कर दिया। काफी देर बाद मल्टी को मैंने बेड पर लिटाया और मैं खुद उसके ऊपर चढ़ गया। दोनों हाथो से मैंने मालती की टाँगे पकड़ कर फैलाई और लंड को चूत में दाल जोर जोर से धक्के देने शुरू कर दिए।


मैंने कहा मालती बातकारो मेरे से कैसा लग रहा है।


मालती ने कहा जन्नत के मज़े करवा रहे हो तुम हैरी


मैंने लगा रहा और जोर जोर से चूत चुदाई करता रहा और फिर से मालती को घोड़ी बनाकर उसकी गांड में लंड डाल कर गांड चुदाई करने लगा। तीन घंटे बीत चुके थे पर लंड में से माल अभी नहीं निकला था तो मैं लगा रहा और जैसे ही लंड में से माल निकलने लगा तो सारा माल मैंने मालती की गांड में गिरा दिया।


मालती ने मुझे कास करअपने गले से लगा लिया और काफी देर तक हम नंगे एक दूसरे से लिपटे रहे। उस दिन के बाद से हर रोज़ मैं मालती की चुदाई करने लगा और आज मालती और मामा ने एक किराये का घर ले लिया है जो हमारे घर से थोड़ी ही दूरी पर है और जब मामा काम पर चले जाते हैं तो मालती हमारे घर आ जाती है और फिर हम सेक्स करते हैं।


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