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मेरे पापा ने मुझे पेलकर मस्त कर दिया - Indian Sex Stories

ये कहानी मेरी है, निहारिका, 21 साल की, कॉलेज की स्टूडेंट, फिगर 34-28-36, गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, और टाइट कपड़े पहनने की आदत। मेरे टाइट टॉप और मिनी स्कर्ट मेरे कर्व्स को उभारते हैं, और कॉलेज में लड़के मेरे पीछे लाइन लगाए रहते हैं। मेरे पापा, रमेश, 45 साल के, गठीले बदन वाले, लेकिन शराब की लत ने उन्हें बेलगाम बना दिया। उनका चेहरा सख्त, आँखें गहरी, और आवाज में एक अजीब सी ठसक। मम्मी, सुनीता, 40 की, सादगी भरी खूबसूरती वाली, और मेरा भाई, रोहन, 23 का, जो कॉलेज में मेरे साथ ही पढ़ता है।


दो महीने पहले की बात है। नानी की तबीयत खराब थी, तो मम्मी और रोहन उनके पास गए। घर पर सिर्फ मैं और पापा रह गए। दिन बीत रहे थे, लेकिन एक अजीब सा माहौल बन रहा था। पापा की नजरें मुझ पर बदलने लगी थीं। उनकी बातों में एक अजीब सी गर्मी थी, जो मुझे पहले तो अटपटी लगी, फिर धीरे-धीरे नशे की तरह चढ़ने लगी।


एक शाम, करीब सात बजे, पापा ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैंने लाल टाइट टॉप और काली मिनी स्कर्ट पहनी थी, जो मेरी जांघों को मुश्किल से ढक रही थी। पापा कुर्सी पर बैठे थे, उनके सामने टेबल पर शराब की बोतल, गिलास, और कुछ नमकीन। उनकी आँखें लाल थीं, चेहरा नशे में डूबा हुआ। “बेटी, इधर आ, मेरे पास बैठ,” पापा ने धीमी, भारी आवाज में कहा। मैं थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन उनकी कुर्सी के बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई।


“ड्रिंक ट्राई करेगी?” पापा ने पूछा, उनके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी। मैंने झट से मना किया, “नहीं पापा, मैं नहीं पीती।” लेकिन पापा कहाँ मानने वाले थे। “अरे, एक बार ट्राई कर, मजा आएगा,” कहकर उन्होंने मेरे लिए एक पेग बनाया। उसमें पेप्सी डालकर मेरे हाथ में थमा दिया। मैंने बार-बार मना किया, लेकिन उनकी जिद के आगे हार गई। पहला घूँट लिया तो गला जला, लेकिन पापा की नजरें मुझ पर टिकी थीं। “पी, बेटी, ये जिंदगी का मजा है,” वो बोले। चार पेग के बाद मेरा सिर हल्का हो गया, शरीर में गर्मी सी दौड़ने लगी। मैं हंसते हुए बोली, “पापा, ये शराब तो कमाल की चीज है! बड़ा मस्त नशा चढ़ता है।”


पापा ने सिगरेट जलाई और मुझे थमाई। “ले, बेटी, शराब का मजा सिगरेट के साथ दोगुना हो जाता है।” मैंने नशे में सिगरेट ले ली और कश खींचने लगी। धुआँ मेरे होंठों से निकल रहा था, और पापा मुझे घूर रहे थे। तभी मैंने देखा, उनकी नजरें मेरी स्कर्ट की तरफ बार-बार जा रही थीं। मैंने मस्ती में पूछा, “पापा, आप बार-बार मेरी स्कर्ट में क्या ताक रहे हो?” उनकी आँखों में एक चमक थी। वो बेशर्मी से बोले, “बेटी, मैं तो तेरी चूचियों को देखने की कोशिश कर रहा हूँ।” उनकी इस बात से मेरे गाल लाल हो गए। मैं शरमाकर उठी और अपने कमरे में भाग गई। लेकिन उस रात मेरे दिमाग में पापा की बातें और उनकी नजरें घूमती रहीं।


अगले कुछ दिन पापा की हरकतें बढ़ती गईं। वो मुझे रोज शराब पिलाते। नशे में मैं भी खुलने लगी थी। पापा गंदी बातें करते, और मैं हँसकर जवाब देती। “बेटी, तेरी ये जांघें तो मस्त हैं, इन्हें सहलाने का मन करता है,” वो कहते। मैं भी नशे में बोल पड़ती, “पापा, आप तो कॉलेज के लड़कों से भी तेज निकले!” कभी वो मेरी चूचियों को हल्के से दबाते, कभी मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख देते। मैं नशे में हँस पड़ती, “पापा, ये क्या है? इतना जोश तो मेरे बॉयफ्रेंड में भी नहीं!” पापा हँसते और कहते, “बेटी, असली मर्द का जोश अभी देखा कहाँ?”


एक रात हम फिर शराब पी रहे थे। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। मैंने काला टाइट टॉप और लाल मिनी स्कर्ट पहनी थी। मेरी चूचियाँ टॉप में से उभर रही थीं, और स्कर्ट मेरी जांघों को मुश्किल से ढक रही थी। पापा उस रात कुछ ज्यादा ही गंदी बातें कर रहे थे। “बेटी, तेरी ये चूचियाँ तो बिल्कुल रसीली हैं, इन्हें चूसने का मन करता है,” वो बोले। मैं नशे में थी, मेरी चूत गीली हो रही थी। उनकी बातों ने मेरे अंदर आग लगा दी थी। मैंने मन ही मन ठान लिया कि आज पापा से चुदवाऊँगी।


पापा बाथरूम गए। मैंने मौका देखकर अपनी स्कर्ट और टॉप उतार दिया। अब मैं सिर्फ काली ब्रा और लाल पैंटी में थी। जब पापा लौटे, मुझे इस हाल में देखकर उनकी साँसें रुक गईं। मैं बेशर्मी से बोली, “पापा, रोज कपड़ों में शराब पीती हूँ, आज नंगी होकर पीऊँगी।” मेरी बात सुनकर पापा पागल हो गए। वो मुझसे लिपट गए, उनके गर्म हाथ मेरे अधनंगे बदन पर फिरने लगे। वो मेरे होंठों को चूसने लगे, उनकी जीभ मेरे मुँह में अंदर-बाहर हो रही थी। “उम्म… पापा…” मैं सिसकारी। मैंने भी उनके होंठों को चूसा, मेरे हाथ उनकी पीठ पर फिर रहे थे।


पापा ने मेरे टॉप के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर से दबाया। “आह्ह… पापा… धीरे…” मैं कराह उठी। वो बोले, “बेटी, अब तू जवान हो गई है। आज तुझे असली मजा दूँगा।” वो मेरे बदन को घूर रहे थे। फिर बोले, “बाकी कपड़े भी उतार दे।” मैंने मस्ती में कहा, “पापा, मैंने इतना दिखा दिया, अब आप भी तो कुछ दिखाओ।” पापा ने तुरंत अपनी शर्ट, पैंट, और अंडरवियर उतार दिया। उनका मोटा, 7 इंच का लंड मेरे सामने तनकर खड़ा था। मैं उसे देखकर दंग रह गई।


पापा मुझसे लिपट गए और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी चूचियाँ आजाद हो गईं। वो मेरे होंठों को चूसते हुए मेरी चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगे। “आह्ह… पापा… उह्ह…” मैं सिसकार रही थी। उनकी उंगलियाँ मेरी निप्पल्स को मसल रही थीं, और मैं मस्ती में पागल हो रही थी। फिर पापा ने मेरी पैंटी नीचे खींची, और मैं पूरी तरह नंगी थी। मैंने बेशर्मी से अपनी टाँगें फैलाईं और अपनी चिकनी, गीली चूत उनके सामने पेश कर दी।


पापा मेरी जांघों पर जीभ फिराने लगे। उनकी गर्म जीभ मेरी चूत के पास पहुँची, और मैं सिसकारियाँ भरने लगी, “उम्म… पापा… आह्ह…” पापा ने मेरी चूत को चाटना शुरू किया। उनकी जीभ मेरी चूत के दाने को चूस रही थी। “आह्ह… पापा… और चाटो… उह्ह…” मैं चिल्ला रही थी। पापा ने मेरी चूत में अपनी जीभ डाल दी, और मैं जोर-जोर से सिसकारने लगी। मेरा बदन काँप रहा था। मैंने अपनी गांड ऊपर उठाकर उनका साथ देना शुरू कर दिया।


पापा ने मेरी चूत को चूसते हुए अपनी एक उंगली अंदर डाल दी। “आह्ह… मम्मी… पापा… और…” मैं चिल्लाई। उनकी उंगली मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी, और मैं पागल हो रही थी। थोड़ी देर बाद पापा ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा। वो बोले, “चोदूँ बेटी?” मैंने बेशर्मी से कहा, “पेल दो पापा, पूरी ताकत से पेल दो!” पापा ने एक ही झटके में अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। “आह्ह… मम्मी…” मेरे मुँह से चीख निकली। मेरी चूत गीली थी, तो लंड आसानी से अंदर चला गया।


पापा मेरे ऊपर लेट गए और धीरे-धीरे धक्के मारने लगे। “उह्ह… पापा… और तेज… आह्ह…” मैं चिल्ला रही थी। पापा ने स्पीड बढ़ा दी, और कमरे में मेरी सिसकारियों के साथ “थप-थप” की आवाज गूँजने लगी। पापा ने मुझे कुतिया की तरह घुमाया और पीछे से मेरी चूत में लंड पेल दिया। मैं गांड उछाल-उछाल कर उनका साथ दे रही थी। “आह्ह… पापा… चोदो… और जोर से… उह्ह…” मैं पागल हो रही थी। पापा मेरी चूचियों को पीछे से दबाते हुए मुझे चोद रहे थे।


करीब 15 मिनट बाद पापा ने मेरी चूत में अपना माल छोड़ दिया। मैंने भी झड़ते हुए सिसकारी भरी, “आह्ह… पापा…” हम दोनों हाँफते हुए बेड पर लेट गए। थोड़ी देर बाद हम नंगे ही शराब पीने लगे। मैंने सिगरेट जलाई और पापा की गोद में बैठ गई। मैंने सिगरेट का कश लिया और धुआँ पापा के मुँह पर छोड़ा। पापा ने मेरे होंठों को जोर से चूस लिया। मैंने फिर वही हरकत की, तो पापा बोले, “बेटी, तेरी ये हरकतें बता रही हैं कि तू पहले भी चुद चुकी है।”


मैंने बेशर्मी से हँसते हुए कहा, “हाँ पापा, जब आप अपनी बेटी की चूत फाड़ सकते हो, तो आपकी बेटी क्यों नहीं चुदवा सकती?” पापा ने पूछा, “बता मेरी रंडी बेटी, तुझे किसने रंडी बनाया?” मैंने हँसते हुए कहा, “पापा, आपके बेटे रोहन ने मुझे रंडी बनाया।” ये सुनकर पापा का चेहरा लाल हो गया। वो बोले, “आज मैं तेरी गांड मारूँगा।” मैंने मस्ती में कहा, “पापा, अगर आप मेरी गांड मारोगे, तो मेरी चूत का क्या होगा?” पापा हँसे और बोले, “ठीक है, आज नहीं, बाद में इसका भी इंतजाम करूँगा।”


फिर पापा ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी गांड में अपनी उंगली डाल दी। मैंने दर्द से सिसकारी, “आह्ह… पापा… धीरे…” लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे मजा आने लगा। पापा ने अपना लंड मेरी गांड पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डाला। “आह्ह… मम्मी… पापा…” मैं चिल्लाई। पापा ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। मैं भी मजे से अपनी गांड मरवाने लगी। “आह्ह… पापा… और जोर से… उह्ह…” मैं सिसकार रही थी।


उस रात के बाद सुबह मैं उठी तो नशा उतर चुका था। मुझे ग्लानि हो रही थी। मैंने पापा से बिना बात किए कॉलेज के लिए निकल गई। शाम को लौटी, तो भी चुप रही। रात 8 बजे पापा ने मुझे फिर बुलाया। वो प्यार से बोले, “बेटी, इसमें गलत क्या है? ये मर्द और औरत की जरूरत है।” फिर उन्होंने मुझे शराब का पेग थमाया। मैंने एक ही घूँट में गटक लिया। नशा चढ़ते ही मैं फिर अपने रंग में आ गई। मैंने पापा से पूछा, “पापा, कल रात कैसा लगा?”


पापा ने हँसते हुए कहा, “बेटी, तेरी चुदाई से ज्यादा मजा तेरी बेशर्मी में आया।” ये कहकर उन्होंने मेरी कमीज में हाथ डालकर मेरी चूचियाँ जोर से दबाईं। फिर बोले, “आज तुझे तेरी बेशर्मी का असली इनाम मिलेगा।” पापा ने मुझे बाथरूम में जाकर नंगी होने को कहा। मैंने एक और पेग मारा, सिगरेट ली और बाथरूम में चली गई। वहाँ मैंने सारे कपड़े उतार दिए और नंगी होकर सिगरेट पीने लगी।


पाँच मिनट बाद पापा ने मुझे बुलाया। कमरे में घुसते ही मैं दंग रह गई। पापा और हमारे दो नौकर, रामू और श्याम, बिल्कुल नंगे खड़े थे। मैं डर के मारे भागने लगी, लेकिन पापा ने मुझे खींच लिया। वो बोले, “कल तू कह रही थी कि तेरी चूत का क्या होगा? आज तेरी चूत, गांड और चूचियाँ सबकी खैर नहीं।” पापा ने नौकरों से कहा, “कैसी लगी ये नंगी रंडी?” रामू बोला, “साहब, ऐसा माल तो पहली बार देखा।”


पापा ने मुझे कुर्सी पर बिठाया और मेरी टाँगें फैला दीं। मैंने आँखें खोलीं तो देखा, तीनों एक-दूसरे का लंड पकड़े मुझे घूर रहे थे। मैं उठी और रामू का 6 इंच का लंड मुँह में ले लिया। “उम्म… आह्ह…” मैं चूसने लगी। श्याम पीछे आया और मेरी गांड में उंगली डालने लगा। मैं मस्ती में पागल हो रही थी। पापा ने मेरी गांड फैलाई, और श्याम ने मेरी गांड चाटनी शुरू कर दी। मैंने बाथरूम से लिपस्टिक लाकर श्याम को दी और कहा, “ये ले, मेरी गांड में मल दे, और लाल करके चाट।”


तीनों पागल हो गए। वो मेरे बदन को चूमने-चाटने लगे। मैं कुतिया बनकर बेड पर खड़ी हो गई। तीनों मेरी गांड पर टूट पड़े। पहले लिपस्टिक मली, फिर बारी-बारी से मेरी गांड चाटने लगे। पापा ने रामू से कहा, “इसकी गांड में अपना बांस पेल दे।” रामू ने अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया। “आह्ह… मम्मी… धीरे…” मैं चिल्लाई। श्याम ने मेरा मुँह अपने लंड से भर दिया और मेरी चूचियाँ मसलने लगा।


पापा बोले, “कैसा लग रहा है मेरी रंडी बेटी?” मैंने कहा, “पापा, साले, मेरी चूत में अपना बांस पेल दो।” पापा ने मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। अब मैं एक साथ चूत और गांड मरवा रही थी। “आह्ह… उह्ह… और जोर से… पेलो साले…” मैं चिल्ला रही थी। कमरे में “थप-थप” की आवाज और मेरी सिसकारियाँ गूँज रही थीं।


करीब 20 मिनट बाद हम चारों झड़ गए। पापा ने नौकरों को उनके कमरे में भेज दिया, और हम दोनों नंगे ही सो गए। जब तक मम्मी नहीं आईं, हम चारों ऐसे ही मजे लेते रहे।


दोस्तों, इस Indian Sex Stories के बारे में अपनी राय जरूर देना। और कमेंट करना।

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