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मैंने और पापा ने मिलकर बड़े चूंचे वाली कामवाली को चोदा - Free Sex Kahani

हेलो दोस्तों आपको आज मैं जो चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं वो मेरे घर का किस्सा है।


अभी 6 महीने पहले की बात है। मेरे पापा सरकारी नौकरी में है तो पैसे की कोई परेशानी नहीं है, मैं भी पुलिस की तैयारी कर रहा हूं।


एक शाम हमारे घर की घंटी बजी माँ ने दरवाज़ा खोला था, मैं लेटा हुआ TV देख रहा था, मुझे आवाज़ आई कि माँ किसी को बोल रही थी “जाओ! जाओ! ज़रूरत नहीं है। हमारे घर आलरेडी कामवाली आती है।"


वैसे हमारे घर कामवाली का प्रॉब्लम ही है क्युकी कामवलियो का इलाका हमारा घर से दूर है तो अगर उनको नज़दीक में काम मिल जाए तो वो कम छोड़के चली जाती है।


मैने जाकर देखा तो एक औरत नीली साड़ी पहने हुए खड़ी थी, उसका मेरी माँ के मुकाबले बस आधा ब्लाउस था जिनसे मस्त गोल मोल काले चूंचे बाहर झाक रहे थे।


खुला हुआ उसका गला था और पल्लू उसने सर पर ले रखा था , ऐसा लगता था के वो बस इसी घर पर आकर खास रुकी हो।


साड़ी में उसकी गांड़ छुपी हुई थी लेकिन 38 का साइज़ तो फिर भी होगा ही।


उसने मुझे देखकर बोला, “मैडम, मैं बहुत परेशान हूं। दुखी हूँ। हमने परिवार वालो की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। बाद मेरा घरवाला मर गया तो, मुजे ससुराल से निकाल दिया, मैके का तो दरवाज़ा बंद है मेरे लिए।


मैं कोई मांगने वाली नहीं हूं मुझे अपने घर में कोई काम दे दो मैं सब कर लूंगी।


उसकी बाते सुनकर माँ ने मना कर दिया की हमें जरूरत नहीं है। वो फिर भी नहीं मानी मेरी नज़रे उसके भारी भरकम चूंचे दबा रही थी जिसका उसे एहसास हो गया था।


मैं उसका इशारा समझ गया मैने उससे नाम पूछा तो वो बड़ी प्यारी आवाज़ निकालते हुए बोली “मैं प्रीति हूं, संबल की रहने वाली हूं यहां काम की तलाश में आई थी। मुजे सोसाइटी वाली आंटी ने बोला है की आप के घर एक रूम भी है। अगर यहाँ रहने का मिल जाए तो आप के घर के साथ आस पास के घर का काम भी कर लिया करूँगी।


मैने माँ को थोड़ा मनाया, की इससे हमारे घर कामवाली की दिक्कत ख़त्म हो जाएगी, और घर पर ही रहेगी तो टिकेगी भी। तो उन्होंने प्रीति को रखने के लिए हां बोल दिया।


माँ उसको घर में आने का बोलकर अंदर चली गई, प्रीति के साथ एक बड़ा सा तांबे का बक्सा था जिसमें उसका ज़रूरत का सामान रखा था शायद, मैने वो बक्सा उठाया और आधे दरवाज़े से कमर टिका कर खड़ा हो गया।


वो अपनी हरी काली नशे से भरी नज़रे मुझसे मिलाते हुए अंदर आई, मुझसे अपने गांड़ को रगड़ते हुए वो अंदर चली गई, मैने एक सुकून भरी सईससस अपने मुंह से निकाली जो उसने भी सुनी और फिर अंदर आ गया।


प्रीति सांवले रंग की मस्त कामुक औरत थी, उसके पतले होठ सफेद मोती जैसे दांत बहुत खूबसूरत थे और आज से वो मेरे घर की नौकरानी बन गई थी साथ ही मेरे लन्ड की रानी भी बनने वाली थी।


मैने प्रीति को माँ से बात करते देखा और किचेन में दोनों के पास खड़ा हो गया, माँ उसको घर का काम समझाने लगी मैं माँ के पीछे खड़ा हुआ उसके जिस्म को अपनी नज़रों से मसल रहा था।


प्रीति जानती थी की उसे घर के साथ साथ मेरा भी ख्याल रखना होगा और शायद वो तैयार भी थी क्योंकि वो बार बार मेरे लन्ड की तरफ आँखें डालकर अपने होठ दबा रही थी।


माँ ने मुझे कमरे में जाने को बोल दिया, मैं भी बेमन से कमरे में जाकर पढ़ाई करने लगा लेकिन दिमाग और लन्ड में तो प्रीति ही घूम रही थी।


करीब रात को 7 बजे के समय जब में किताब उठाए बैड पर बैठा पढ़ाई कर रहा था, तो प्रीति अंदर आई उसने मेरी माँ की एक पुरानी नाइटी पहन रखी थी।


उस नाइटी में से मस्त मोटे चूंचे मुझे ललचा रहे थे, वो अंदर आकर बोली “बाबू साब खाना तैयार है, आकर खा लीजिए।”


मैं उठकर बैठा और उसे निहार ने लगा, उसका गदराया सांवला बदन महक रहा था बाल गिले थे देखकर लग रहा था के वो अभी नहाकर आई है।


मेरे उठने से तकिया नीचे गिर गया, मैने उसे उठाने को बोला तो वो मेरे करीब शर्माते हुए आई फिर नीचे तकिया उठाने झुकी तो उसकी मस्त काले निप्पल वाली चूचियां मुझे दिखने लगी।


मैं उसकी चूचियां ताड़ रहा था तो उसने अपनी आँखो से मेरी नज़रों को पकड़ लिया, फिर धीरे धीरे गांड़ उठाते हुए वो खड़ी हुई उसने अपनी ज़बान से सूखे होठ गिले करे।


मैने तकिया लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो उसने आगे बढ़कर तकिया मेरे खड़े लन्ड पर रखा और हाथ से लन्ड दबा दिया।


लन्ड दबाते हुए वो बोली “बाबू साब आपको भूख लगी होगी खा लीजिए”।


उसकी बातों में ऐसी वासना थी की मेरे हाथ अपने आप उसके चूंचे की तरफ बढ़ने लगे, उसने एक कदम पीछे लेते हुए कहा “बाबू साब पहले खाना खा लीजिए”।


मैं मुस्कुराया और अपना लन्ड सहलाते हुए उसके सामने खड़ा हो गया, उसने पहले मेरे मोटे 8 इंच के लन्ड को देखा फिर मुझे देखकर मुस्कुराई।


वो पलटी और कुछ सेकंड मेरे लन्ड से लगाकर अपनी गांड़ को सहलाने के बाद बाहर चली गई, मेरे लन्ड ने थोड़ा सा अपना रस निकाल दिया और मैं बाहर सब के साथ खाने बैठा।


प्रीति मेरे इधर उधर घूमती हुए सबको खाना दे रही थी, वो मेरी माँ की उमर की होगी लेकिन उमर कुछ भी हो 40 से ज़्यादा की वो किसी हाल में नहीं लग रही थी।


सब लोगों ने एक एक कर के खाना निपटाया और अपने कमरों में जाने लगे, जब सब चले गए तो मैने उसे बैठकर खाने को बोला वो मेरे सामने बैठकर खाना खाने लगी।


मैने अपना पैर उसके पैर पर सहलाया, उसे एक हिचकी लगी और वो मेरी तरफ देखकर खाना खाने लगी।


वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी, मैं धीरे धीरे कर के अपने पैर को उसकी नाइटी में ले गया धीरे धीरे कर के मैं उसकी मोटी जांघों तक पहुंचा और चूत के पास से सहलाने लगा।


मेरे लन्ड कड़क हो चुका था, उसने भी अपना भारी पाऊं मेरे लन्ड पर रख दिया उसके पैर का वज़न लन्ड पर अच्छा दबाओ बनाए हुए था ।


वो पैंटी नहीं पहनी थी, मैं पैर के अंगूठे से उसकी चूत सहलाने लगा उसकी सांसे तेज़ होती हुई उसकी चूचियां से पता चल रही थीं।


उसने कुर्सी करीब कर के, दोनों पैर लन्ड पर दबा दिए और अपनी चूत को भी अधिक खोल लिया।


वो मेरी मुठ मार रही थी और मैं अंगूठे से उसे चोद रहा था।


जब तक वो और मैं खाना खाते रहे हमने एक दूसरे की पैरों से ही चुदाई की और खाना खत्म होते होते हम झड़ गए।


हमने खाना खत्म किया, फिर वो मेरे करीब आकर बर्तन उठाने लगी। मैं खड़ा हुआ और पीछे से आकर उसके चूंचे दबाए फिर अपने कमरे की तरफ चल दिया।


जब पीछे मुड़ कर देखा तो वो मुस्कुरा रहा थी मैं भी जवाब में मुस्कुरा दिया।


अपने कमरे में आकर मुझे चुदाई के बाद थकान महसूस हुई तो मैं सो गया फिर करीब रात के 2 बजे मेरी आँख खुली तो उठा।


मैं पानी पीने के लिए किचेन में गया तो प्रीति नीचे बिस्तर बिछाए सो रही थी, उसकी नाइटी जांघों से ऊपर हो गई थी किनारे पर से उसकी एक चूंची बाहर निकल रही थी।


देखकर लग रहा था के जैसे ये अभी अभी चुद कर लेटी हो।


उसकी हालत देखकर मुझसे रहा नहीं गया मेरा लन्ड का तनाव बढ़ने लगा।


मैं भी उसके बराबर में लेट गया, उसके अंदर से वहीं खुशबू आ रही थी जो मेरी बहन के परफ्यूम से आती है।


इसमें कोई बड़ी बात नहीं थी के किसी काम वाली ने मेरे घर के लोगों का सामान इस्तमाल किया हो।


मैं अपनी एक टांग उसके ऊपर रखकर लेट गया, और उसकी खुली चूंची चूसने लगा।


उसकी मस्त काली चूंची चॉकलेट जैसी लग रही थी, हल्का हल्का दूध भी उसमें से आ रहा था, मुझे तो मिल्क शेक का मज़ा मिल रहा था।


उसके दूसरे चूंचे को मैने मुठ्ठी में भींचा और दबाने लगा, वो आगाह! अआआह! हमममम!


की आवाज़ों से कर्रा ने लगी।


उसने अपनी आँखें खोली और मुझे देखकर बोली “आह! बाबू साब , आप! मैं आपका ही इंतज़ार कर रही थी!


मैं उसके चूंचे चूसते हुए फिर गले को चूमने लगा, उसने अपनी एक टांग उठाई और मेरे कमर पर बांध ली।


मैं अपना लन्ड उसकी चूत पर घिसने लगा, वो मस्त मादक सिसकारिया ले रही थी।


उसके गले को चूमते चूमते उसके गालों पर आ गया वो अपने हाथ के नाखून मेरी पीठ में गड़ा रही थी। उसने वासना भरी आवाज़ में बोला “बाबू साब, आपका बहुत शुक्रिया जो अपने मुझे यहां रहने दिया।”


मैने उसको चूंची पर प्यार से काटा और अपना कच्छा निकाल दिया मैने अपने 8 इंच के लोड़े को आज़ाद किया।


जवाब में कह दिया “कोई बात नहीं री, तू इतनी प्यारी माल है कि कोई भी तुझे रख लेता।”


कहते कहते हमारे होठ आपस में मिल गए, मस्ती से हम दोनों एक दूसरे के होठ चूस रहे थे उसके होठ बहुत मीठे थे उसकी लाली बहुत अलग थी।


उसके काले होठ एक दम चॉकलेट जैसे थे, मेरा तो छोड़ने का मन नहीं था।


फिर उसने अपनी ज़बान मेरे मुंह में डाली मैं अपने हाथ से उसके निप्पल नोचने लगा उनसे निकलता हल्का हल्का दूध मेरी उंगलियों पर जम रहा था।


मैं मज़ा लेकर उसकी ज़बान चूस रहा था, इतने में मैने अपने हाथ को लन्ड पर पहुंचाया और उसकी चूत को खोला फिर लन्ड को उसकी चूत पर रखकर एक मस्त धक्का लगाया और आधा लन्ड चूत को चीरता हुआ अंदर उतर गया।


उसने चीखना चाहा मगर मैने मुंह पर हाथ रख लिया उसकी चीख अपने हाथ से दबाकर मैने गले को चूमना शुरू किया।


थोड़े से धक्के लगाकर मैने जब देखा के अब प्रीति को आराम हो गया है तो हाथ हटाकर होठ चूसना शुरू कर दिए।


ऊपर से मैं मस्ती से धक्के की रफ्तार बढ़ाने लगा उधर नीचे से वो गांड़ उठा उठा कर अपना जोश दिखाने लगी।


दबी दबी आवाज़ में हमारी आह! हमममम! आह


ओह ! बाबू साब आगाह! आराम से ओह! अच्छा लगा रहा है।


मैं भी जोश में अपनी राफ्तार को और ज़्यादा बढ़ा रहा था हमारी आगाह! हम ओऊहह्ह्ह! की आवाज़ एक साथ निकल रही थी।


अआआह! हमममम! प्रीति ओहद्ह!


बाबू साअब आआह! और तेज़ आआह ज़ोर से आह!


हमममम प्रीति मेरी जान आगाह!


एक दूसरे को कामसुख के चरम तक पहुंचाते हुए हम तेज़ी से धक्का पेल चुदाई कर रहे थे। करीब बीस मिनट उसे चोदने के बाद मैं झड़ने को हुआ ।


वो भी समझ गई और आगाह! ओह ! बाबू साब बस 2 मिनट ओर आआह! ओह ।


हमममम! आह ! उफ्फफ हम्मम!


बोलती हुई चुदाई करते करते झड़ गई।


कुछ देर मैं ऐसे ही लेटा रहा फिर उसके चूंचे पर प्यार से काटकर अपने कमरे आ गया। वो मुझे जाने नहीं दे रही थी लेकिन थोड़ा समझाने के बाद वो मान गई।


फिर तो मेरे दोस्त और उस नौकरानी की चुदाई मौका देख कर हर रोज होने लग गई।


अगले दिन सुबह की धूप खिड़की से झांक रही थी, मैं बिस्तर पर लेटा हुआ प्रीति की रात भर की चुदाई को याद कर रहा था।


मेरा लंड सुबह-सुबह ही खड़ा हो गया था, लेकिन माँ और बहन रिश्तेदारों के यहाँ गई हुई थीं, तो घर में बस पापा, मैं और प्रीति ही थे।


इसलिए मुझे सुबह जल्दी उतना पड़ा। मेरे पापा सरकारी नौकरी में थे, वो सुबह-सुबह ही ऑफिस चले जाते थे, लेकिन आज छुट्टी थी उनकी।


मैंने सोचा, प्रीति को आज फिर से चोदूँगा और खूब मज़ा लूंगा, लेकिन मुझे किचन से आअआआअह! साब जी, हमममम धीरे करिए! अआआह ! की आवाज़ें आ रही थीं।


मैं चुपके से कमरे से बाहर निकला और मैने किचन की तरफ झाँका। वहाँ प्रीति झुकी हुई बर्तन धो रही थी, उसकी नाइटी फिर से ऊपर सरक गई थी, उसकी मोटी सांवली गांड बाहर झलक रही थी।


लेकिन चौंकाने वाली बात ये थी कि पापा उसके पीछे खड़े थे, उनका हाथ प्रीति की कमर पर था और धीरे-धीरे नीचे सरका रहे थे।


मेरे पापा 50 के आसपास के थे, लेकिन वो हट्टे कट्टे सेहतमंद इंसान थे उनका गठीला बदन, और उनका लंड भी मेरे लंड जैसा ही मोटा-लंबा था। वो कामवाली प्रीति मुस्कुरा रही थी, जैसे कोई राज़ साझा कर रही हो।


“अरे प्रीति रानी, तू तो कमाल की माल है यार,” पापा ने फुसफुसाते हुए कहा, उनका हाथ प्रीति की गांड पर पहुँच गया। प्रीति ने पीछे मुड़कर पापा की तरफ देखा, उसकी काली आँखों में वासना चमक रही थी।


“बाबूजी, आप भी ना... छोटे बाबू तो रात भर मुझे चोदते रहे है, अब आपकी बारी।” ये कहते हुए वो हँसी, लेकिन उसकी आवाज़ दबी हुई थी।


फिर पापा ने उसे जोर से खींच लिया, प्रीति का बदन पापा के सीने से सट गया। पापा का हाथ नाइटी के अंदर घुस गया और प्रीति की चूचियों को पूरी ताकत से मसलने लगा।


“हाय रे बाबूजी, आह...अआआह! धीरे, कोई देख लेगा, उफ्फफ!” प्रीति सिसकी मेरे लंड को ठनका रही थी, लेकिन उसकी गांड पापा के लंड पर रगड़ रही थी।


मैं बाहर छिपा हुआ ये नज़ारा देख रहा था, मेरा लंड कड़क हो गया था। मुझे समझ नहीं आया ये क्यों हो रहा था? कल तक प्रीति मेरी थी,


लेकिन लग रहा था वो पापा को भी ललचा रही थी। पापा ने प्रीति का पल्लू सरका दिया, उसकी नाइटी ऊपर चढ़ा दी, और प्रीति की मस्त काली चूचियाँ बाहर उछल कर आ गईं।


पापा ने एक चूची मुँह में भर ली और मज़े से चूसने लगे। प्रीति की साँसें तेज़ हो गईं थी, “आह बाबूजी, आपका मुँह कितना गर्म है... ओह हमममम!, चूसो और जोर से अआआह!”


पापा का हाथ अब नीचे गया, उन्होंने प्रीति की चूत में उंगली डाल दी। प्रीति की गांड उत्तेजना से हिलने लगी, वो पापा के कुरते को पकड़कर सिसकारियाँ ले रही थी।


अचानक पापा ने प्रीति को घुमाया और किचन के टेबल पर झुका दिया। प्रीति की गांड उचक्के ऊपर हो गई, फिर पापा ने अपना पैंट नीचे सरका दिया।


उनका मोटा भयानक लंड बाहर आया, कम से कम वो 7 इंच का तो होगा ही , उस सांप की नसें फूली हुईं थी। प्रीति ने पीछे मुड़कर देखा तो हैरानी से वो बोली,


“बाबूजी, आपका लंड तो छोटे बाबू से भी ज़्यादा मस्त लग रहा है... आओ ना, चोदो अपनी रंडी को!”


फिर पापा ने थूक लगाया उसकी चूत पर, और एक धक्के में अपना लंड अंदर घुसेड़ दिया। इस हमले से प्रीति चीखी, “आआह! ओऊहह्ह्ह ! बाबूजी, कितना मोटा है... आह ओह, फाड़ दिया चूत को मेरी!”


पापा अपनी मर्दानगी पर गर्व से धक्के मारने लगे, पूरे किचन में ठप-ठप की आवाज़ गूँजने लगी। प्रीति की चूचियाँ हवा में झूल रही थीं,


वो भी असली रण्ड की तरह टेबल पकड़कर गांड पीछे धकेल रही थी। “हाँ बाबूजी, चोदो जोर से आआह, उफ्फफ ! आह, हम्म... ओहद्ह! तेरी रंडी की चूत तेरे लिए ही बनी है आअआआअह!!”


मैं ये नज़ारा सहन नहीं कर पाया। मेरा खून खौल रहा था, लेकिन लंड भी दर्द कर रहा था। मैं बेकाबू होकर अंदर घुस गया, “ये क्या कर रहे हो पापा?


प्रीति मेरी है!” पापा चौंके, उनका लंड प्रीति की चूत से बाहर निकल आया। प्रीति ने घूमकर मुझे देखा, उसकी आँखों में डर नहीं था,


बल्कि उसकी नज़र शरारत दिखा रही थी।मेरे पापा शरम से लाल हो गए थे वो हिचकते हुए बोले, “ तू... ये...” लेकिन प्रीति ने जल्दी से कुछ करा।


वो मेरे पास आई, और अपना हाथ मेरे लंड पर रखा, और इशारे से बोली,“बाबू साब, गुस्सा मत हो... आओ ना हमारे साथ में मजा लो।


तेरे पापा भी तो मर्द हैं, हम तीनों मिलकर देखना कमाल करेंगे!” उसने अपनी चूची मेरी तरफ उठाई, फिर निप्पल मेरी तरफ किया, जैसे वो अपने बच्चे को दूध पीने बुला रही हो।


मैं भी ठिठक गया। प्रीति की वासना भरी नजरें, उसका सांवला बदन देख मैं बहक गया उसकी चूचियाँ लटक रही थीं। पापा भी ये सब देख रहे थे, उनका लंड अभी भी खड़ा था।


प्रीति ने इशारा किया, “बाबूजी, देखो रविश बाबू को भी बुलाओ...तीनों मिलकर थ्रीसम करेंगे, मैं दोनों के लंड संभाल लूँगी आप लोग संकोच न करे ।”


पापा ने मुझे देखा, फिर वो मुस्कुराए। “चल बेटा, तेरी माँ-बहन तो गई हुई हैं, आज मजा लें ही लेते है। प्रीति जैसी रंडी मिलेगी नहीं, फिर कभी।”


पापा की बात के आगे मैं हार गया। प्रीति ने हमें किचन से लिविंग रूम में ले जाकर बिस्तर बिछा दिया। वो हमारे बीच में लेट गई, वो बिल्कुल नंगी हुई,


उसकी चूचियाँ फैलीं हुई थी, चूत रस से गीली होकर चमक रही थी। “आओ बाबूजी, बेटा जी... एक साथ चोदो अपनी प्रीति को।” उसने हम दोनों के लंड पकड़ लिए।


पापा प्रीति के ऊपर चढ़ गए, उन्होंने उनका लंड सीधा चूत में घुसा दिया। प्रीति सिसकी लेते हुए चीखी, “आह बाबूजी, हाँ...ओहद्ह! अब रविश बाबू, तू मेरी गांड मार लो... दोनों छेद भर दो मेरे!”


मैंने भी अपना लंड बाहर निकाला, वही 8 इंच का मोटा सांप, जिसने रात प्रीति की अपना दीवाना बनाया था और फिर मैने प्रीति की गांड पर थूक लगाया।


प्रीति ने थोड़ी गांड ऊपर की, “हाँ बेटा, घुसेड़ दे... तेरी प्रीति की गांड तेरे लिए खुली है!” मैंने उसे धीरे से दबाया, और एक ज़ोर का धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।


प्रीति चीखी, “ओह माय गॉड! आअआआ ! दोनों लंड बहुत मोटे है... आआह, फाड़ दोगे मुझे तुम दोनों!” लेकिन वो उत्तेजना से हिल रही थी उसकी जवानी जोश में थी।


पापा नीचे से धक्के मार रहे थे, मैं ऊपर से गांड में लंड अंदर बाहर कर रहा था। हमारे लंड एक-दूसरे से रगड़ रहे थे, प्रीति के पतले जिस्म के बीच में हमें उसके अंदर की गर्मी लंड पर महसूस हो रही थी।


“आह प्रीति, तेरी चूत कितनी टाइट है!” पापा गरजे, उनके धक्के तेज़ हो गए। मैं भी जोर लगाने लगा, “हाँ रानी, तेरी गांड भी कमाल है... आज तो दिन भर चोदूँगा बुरी तरह!”


प्रीति हमारे बीच में फँसी थी, वो बस चीख रही थी, “आआह! ओंह्ह्ह! बाबूजी...हमममम आआह! बेटा ओहद्ह!... हाँ, दोनों चोदो हमममम अआआह!...


ओह, हिम्मममम! हम्म... उफ्फ ओह आअआआअह! दोनों लंड मिलकर मार रहे हैं मुझे अआआह!” हमारी रफ्तार और बढ़ी, ठप-ठप, चप-चप की आवाज़ें कमरे को गरमा ने लगी ।


प्रीति की चूचियाँ गेंद जैसे उछल रही थीं, पापा ने एक चूची मुँह में भर ली और चूसने लगे। मैंने फिर दूसरी को मसला। प्रीति हांफते हुए सिसकार रही थी,


“चूसो निप्पल... आह, दूध निकल रहा है मेरा.. ओह हमममम, पिलो दूध मेरा!” उसके निप्पल से हल्का दूध सा निकला, लेकिन हमें क्या पता था कि उसमें नींद की दवाई मिली हुई थी।


हम दोनों थ्रीसम में डूबे थे। पापा चूत में धक्का मारते थे, मैं गांड में लंड डालता निकलता रहा । प्रीति के दोनों छेद लंड से भरे हुए, वो बुरी तरह काँप रही थी।


“हाँ बाबूजी, अआआह और तेज़... उन्ह्ह्ह! बेटा आगाह तेरी गांड मारने का तरीका अमेजिंग है। अआआह... आआह, मैं झड़ने वाली हूँ!”


पापा ने कहा, “प्रीति रानी, तेरी चूत ने मेरा लंड पकड़ लिया है.. उफ्फ!” मैं भी बोला, “ प्रीति तेरी गांड भी सिकुड़ रही है...मगर आज नहीं निकलेगा ये लंड मैं तो चोदूँगा तुझे भरपूर!”


प्रीति पहले झड़ी वो झटके मारते हुए बढ़ बढ़ाई, “आआह! ओह गॉड अआआह ... हाँ, झड़ गई मैं अआआह संभालो मुझे हिम्मममम... हम्म!”


उसकी चूत-गांड सिकुड़ गईं और हमारे लंड दब गए।फिर पापा बोले, “बेटा, साथ में झड़ते हैं इसके अंदर... आज भर देंगे इसके दोनों छेद!”


मैंने भी जोश मैं हाँ कहा। हमने तेज़ी से चरमसुख के आखिरी धक्के मारे, पापा का लंड चूत में फूला जा रहा थे, मेरा गांड में पिस रहा था।


“आह प्रीति... ले मेरा रस!” पापा गरजे, उनका पानी चूत में छूटा। मैं भी, “हाँ रानी, तेरी गांड भर... ले मेरे रस से!” मेरा गर्म रस गांड में भर गया।


प्रीति चीखी, “ओह, दोनों का पानी! अआआह... भर गया मुझे... आआह!” हम तीनों थक चुके थे हम नंगे ही लेटे रहे, हाँफते हुए पता ही नहीं हमारे होश को कुछ तो हुआ।


प्रीति ने कब अपनी चूचियाँ ऊपर की पता नहीं था बस उसकी मुझे आवाज़ आई, “बाबूजी, बेटा... चूसो न मेरे निप्पल , थकान उतरेगी।”


पापा ने एक निप्पल मुंह में लिया, वो उसकी चूंची आधी नींद में चूसने लगे। मैंने भी वासना और नींद के नशे में दूसरा निप्पल मुंह में लिया।


उसके दूध का स्वाद मीठा था, बिल्कुल दूध जैसा। लेकिन अचानक आँखें ज़्यादा भारी हो गईं। “ये... क्या...” पापा बोले, लेकिन आखिर नींद आ ही गई। मैं भी सो गया, गहरी नींद में।


प्रीति मुस्कुराई होगी। उसके निप्पल पर उसने नींद की दवाई लगाई थी। मेरी माँ-बहन रिश्तेदारों के यहाँ गईं थीं, हमारा घर खाली था।


तो प्रीति उठी, नंगी ही वो कमरे से बाहर गई। वो लड़खड़ाती हुई पहले किचन में गई, और पानी पीया। फिर मास्टर बेडरूम में जाकर अलमारी खोली। उसमे से पैसे और माँ के कुछ जेवर थे जो रूटीन में पहनती थी।


उसने गहने सब बैग में ठूँसे। ज्यादातर गहने हम बैंक लॉकर में रखते थे तो बच गए। फिर ड्रॉयर से और पैसे लिए – जो पापा की ऊपर की कमाई का पैसा था। उसने सब बैग में लिया। कुल मिलाके २-३ लाख रुपये का चुना लगा गई।


फिर लिविंग में आकर हमें देखा, हम नंगे सोए थे, लंड खुले लटक रहे थे। “शुक्रिया बाबूजी, बेटा जी...!


मजा आया आप लोगो के साथ बहुत, लेकिन अब अलविदा कहने का समय है।” वो हमारे ही बाथरूम जाकर नहाई फिर आकर।


उसने अपना वो तांबे का बक्सा उठाया और उसमें से खूबसूरत से कपड़े पहनकर तैयार हुई फिर दरवाज़ा खोला। और बाहर निकली। उसने टैक्सी रोकी और बैठकर निकल गई।


दोपहर को मेरी माँ-बहन लौटीं, तो घर में हंगामा हो गया। पापा और मैं जागे, हमारा सिर दर्द कर रहा था ।“


कहाँ है प्रीति?” माँ चीखी। हम चुप थे। फिर वो अलमारी खुली, जिसमें से सब गायब।


हमने सी सी टीवी कैमरा को खंगाला, तो उसमे प्रीति की सारी हरकते दिखी। मैंने और पापा ने पुलिस कंप्लेन करने से मना कर दिया। क्युकी इससे हमारी पोल खुल जाती, और पापा की काली कमाई का हिसाब भी देना पड़ता।


तो ये थी मेरी और पापा की कामवाली के साथ चुदाई की Free Sex Kahani

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