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कॉलोनी में ही मिल गया मुजे अपना गे पार्टनर - Gay Sex Stories Hindi

दोस्तो.. मेरा नाम जैसन है, मैं बैंगलोर का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र अभी 24 साल है। मैं 5’9” इंच का हूँ और मेरा एक औसत जिस्म है। बचपन से ही मेरी चाल-ढाल भी लड़कियों जैसी है.. पर मैं आज भी ऊपर से लड़कों जैसा ही बर्ताव करना पसंद करता हूँ।


यह मेरे जीवन की वो सत्य-कथा है.. जिसके बारे में मैं जब आज भी सोचता हूँ तो मेरे तन-बदन में आग लग जाती है। यह मेरी पहली कहानी है और मैं खुद इस तरह की कहानियों का बहुत बड़ा फैन हूँ।


बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में था और मेरे एग्जाम खत्म ही हुए थे, इसके बाद मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो गई थीं। मेरी अभी किशोरावस्था ही थी। मेरे बड़े भैया के बहुत से दोस्तों को देखकर मैं ‘आहें..’ भरता रहता था.. पर क्या कर सकता था।


उन्हीं दिनों हमारी कॉलोनी में एक कार्तिक भैया अपने रिश्तेदार नायर अंकल के यहाँ आए। भैया का ऊँचा लम्बा कद.. गठी हुई बॉडी और उम्र कुछ 24-25 साल की थी। मैं तो बस उनको देखते ही पागल सा हो गया, मेरा मन तो कर रहा था कि उनको बांहों में भर कर खा जाऊँ।


अगले दिन मेरा बर्थडे था, मेरे घर वालों ने एक छोटी सी पार्टी रखी.. जिसमें कॉलोनी के लोग आए। मॉम-डैड ने नायर अंकल को भी बुलाया था.. तो उनकी फैमिली भी आई और मेरी किस्मत कि वो लोग कार्तिक भैया को भी लेकर आए। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.. सबका इंट्रोडक्शन हुआ और सौभाग्य से भैया बड़े फ्रेंडली थे, उन्होंने आकर हाथ मिलाया और मुझे विश किया।


उनके छूते ही जैसे मेरे बदन में करंट दौड़ गया। केक काटने के बाद मैंने सबको केक खिलाया और जानबूझ कर नायर अंकल को भी खिलाया ताकि मैं कार्तिक भैया को भी खिला सकूं। मेरा आईडिया काम कर गया और जैसे ही मैं उनके पास गया केक सीधा उनके मुँह में दिया और उनके होंठों को छू लिया। मैं तो मानो यार.. हवा में था।


और उन्होंने भी उनका जूठा केक मुझे थोड़ा सा खिला दिया.. बस फिर पूरे टाइम में सिर्फ उनके साथ ही था। हम दोनों ने बहुत बातें की, वो मुझे बात-बात पर गले लगा कर मुझे चूमते और कहते- तू सच में बहुत क्यूट है यार.. उम्माह.. बच्चा मेरा। उनके चूमने से मेरा लण्ड तन-तन कर परेशान हो रहा था। कुछ हद तक तो वो कुछ समझ ही गए थे शायद!


पार्टी खत्म हुई.. सब घर जाने लगे, मैं उनको बाहर तक छोड़ने आया और अचानक उन्होंने मुझे गाल पर किस किया और बोले- हैप्पी बर्थडे जान.. मैं शर्म से पानी-पानी और ख़ुशी से मर गया।


ऐसे ही हम दोनों बहुत क्लोज आ गए.. पर अभी कुछ हुआ नहीं था। हम जब भी मिलते.. वो मुझे प्यार करते करते.. गले से लगाते और हम बहुत घूमते थे। इसके अलावा न अभी मैंने कुछ किया और न उन्होंने।


हमें एकान्त मिला तभी एक दिन मेरी मॉम-डैड को एक अर्जेंट काम से दो दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। मेरे भैया गोवा ट्रिप के लिए गए हुए थे। डैड ने जाते वक़्त ने नायर अंकल को मेरा खयाल रखने के लिए बोला और अंकल ने कहा- हाँ कार्तिक है ना.. वो देख लेगा। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।


जैसे ही मॉम-डैड निकले.. मैंने देखा तो कार्तिक भैया अंकल के घर से मुझे देख रहे थे। मैंने ऐसे बिहेव किया जैसे मैंने देखा ही नहीं.. अन्दर चला गया.. पर दरवाज बंद नहीं किया। अब मैं चुपके से देखने लगा कि वो आते हैं या नहीं।


मेरा अनुमान सही था.. वो मेरे घर आने लगे और मैं जल्दी से नहाने के लिए बाथरूम में चला गया। तभी वो अन्दर आ गए और शायद दरवाजा भी लॉक कर दिया। मुझे इस बात का अंदाज हुआ कि शायद डराने के लिए वो दरवाजे के पीछे छुप गए। मैंने कमरे के बाथरूम के एक होल से उनको देख लिया था।


मैंने जल्दी से साबुन लगाया पानी डाला… और बिना ठीक से जिस्म को पोंछे तौलिया पहन कर बाहर आ गया और शीशे के सामने खड़ा होकर अपने आपको देखने का नाटक करने लगा। अभी तक भैया ने कुछ नहीं किया था।


तभी मैंने जानबूझ कर तौलिया गिरा दिया जैसे गलती से हुआ हो। फिर क्या था मैं पूरा नंगा खड़ा था.. मेरी गांड बहुत सेक्सी है। फिर शीशे में से देखा तो कार्तिक भैया ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया और मैंने डरने का नाटक किया।


मैंने पूछा- आप यहाँ कर रहे हो.. छोड़ो मुझे। पर वो कुछ नहीं बोले.. बस मेरे गले से कान तक मुझे किस करते रहे, मैं पागल हो रहा था। तभी उन्होंने अचानक से मेरे कान में कहा- आई लव यू बच्चा।


बस फिर क्या था.. मैं भी घूम कर उनके गले से लग गया। उन्होंने मुझे चूमना करना शुरू किया.. उफ्फ.. मैं तो इतना खुश था कि उनके मुँह का स्पर्श मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। काफी देर तक हम दोनों सिर्फ चुम्बन ही करते रहे और मेरा लण्ड तन कर अकड़ गया था।


तभी अचानक से मुझे ध्यान आया कि मैं नंगा हूँ.. तो मैं शर्माने लगा और वो बस मुझे देखे जा रहे थे। तभी उन्होंने धीरे से खुद के कपड़े भी उतारे मैं उनका नंगा जिस्म देख कर एकदम से उत्तेजित हो गया।


जब उन्होंने अपना अंडरवियर उतारा तो उनका लम्बा लण्ड एकदम तना हुआ था.. मैं डर गया। उन्होंने मुझे बांहों में भर लिया और बहुत किस किए। हम दोनों बिस्तर पर गिर गए और पागलों की तरह एक-दूसरे को चूमने लगे।


वो उठे और मुझे गोद में उठा लिया और बाथरूम में ले गए और फव्वारा ऑन कर दिया। हम दोनों वहीं चुम्बन करने लगे.. वो मेरे निप्पल चूसने लगे.. फिर जोर से काट भी लिया.. गले पर चूमा और काटा। हमारी सेक्स की आवाजें पूरे बाथरूम में गूँज रही थीं।


तभी उन्होंने मुझे नीचे की तरफ किया और मैं समझ गया कि ये लण्ड चूसने का इशारा था। मेरा तो ये पहला अनुभव था.. बस वो जैसा-जैसा बोल रहे थे.. मैं वैसा-वैसा है करता गया। उनका लण्ड इतना खूबसूरत था.. मैंने उसे चूमा और उसे धीरे से मुँह में ले लिया।


कुछ ही पलों में मैं उनके लौड़े को एक लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा। देर तक चूसने के बाद भैया ने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाला और फिर मुझे किस करने लगे। हम दोनों बाथरूम के फर्श पर लेट गए।


वो एकदम से मेरे नीचे की तरफ जाने लगे और मेरी टाँगें उठा कर मेरी गांड को देखने लगे। पहले तो उन्होंने उसे सूंघा और फिर मदहोश होकर मेरी गांड को चूसने लगे। मैं पागल हुआ जा रहा था.. मेरी मादक आवाजें बाथरूम के बाहर भी जा रही थीं।


गांड चूसने के बाद उन्होंने लोशन और जैल लिया और दोनों को मिला कर मेरी गांड में उंगली करने लगे। मुझे थोड़ा दर्द हुआ.. पर फिर मज़ा आने लगा। कुछ देर ऐसा करने के बाद वो उठे और मेरे ऊपर आ गए और बहुत चूमने लगे।


मेरी आँखों में देख कर बोले- अच्छा लगा? मैंने सर ‘हाँ’ में हिला दिया.. तो वो बोले- कुछ बोलो। मैंने भी कहा- आई लव यू। मेरी गांड फिर उन्होंने मेरी टाँगें उठाईं और अपने लम्बे लण्ड को मेरी गांड के छेद पर रखा.. और घुसेड़ कर अन्दर करने लगे।


मुझे बहुत दर्द होने लगा.. उन्होंने मुझे चुम्बन किया और कहा- मेरी आँखों में देखो.. बस मैं उनकी आँखों में खो गया और वो धीरे-धीरे मेरे अन्दर जाते रहे.. दर्द था पर न जाने किस बात का नशा सा था.. जो मैं उस दर्द को सह गया।


अब उन्होंने मुझे फिर से चुम्बन करना शुरू कर दिया। मैंने दर्द को भूलने की कोशिश की.. तो वे एकदम से धक्के देने लगे। मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे और उन्होंने जैसे ही देखा तो वे मेरे आंसू चाट गए और मुझे और जोर से चोदने लगे।


मेरा सारा दर्द खत्म हो गया। मैं अपनी पहली चुदाई को बहुत जम कर एन्जॉय करता रहा। ये सब बाथरूम के फर्श पर हो रहा था। भैया रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे और मैं चाहता भी था कि वो न रुकें।


वो मुझे देर तक वैसे ही चोदते रहे.. और हमारी आवाजें गूंजती रही। अचानक उनकी स्पीड और तेज़ हो गई और कुछ ही देर मुझे मेरे अन्दर कुछ गिरता हुआ महसूस हुआ। वो मेरे अन्दर ही झड़ गए थे और झड़ने के बाद वो मेरे ऊपर ही लेटे रहे।


हमको सेक्स करते-करते कितनी देर हो गई थी, समय का कुछ पता ही नहीं चला। हम लोग इतना थक चुके थे कि हम दोनों बाथरूम में लेट गए। कुछ देर बाद हम दोनों उठे।


उन्होंने मुझे छोटे बच्चे की तरह नहलाया.. खुद भी नहाए, मुझे बांहों में उठा कर बाहर ले आए, भैया ने किस किया और बोले- आई लव यू। फिर वो चले गए और मेरे मॉम-डैड दो दिन यहाँ नहीं थे तो वो रात को भी मेरे पास रुके और रात भर मुझे सोने नहीं दिया।


शायद ही किसी ने मुझे इतना प्यार दिया और मेरा इतना खयाल रखा होगा। वो मुझे रात भर अलग-अलग पोजीशन में चोदते रहे.. और हर बार मेरी गांड को अपने रस से भर दिया।


सो दोस्तों कैसी लगी मेरी Gay Sex Stories Hindi? ज़रूर बताइएगा।

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