किराएदार फौजी ने मेरी चुत फाड़ी:१ - Antarvasna Sex Stories
- Riya
- 4 days ago
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यह अभी सिर्फ एक साल पहले की बात है। जब मेरी शादी एक देहात में हुई थी। मेरे पति तो वे ज्यादातर दूसरे शहरों में दौरे पर ही रहते हैं।
घर में हम तीन लोग रहते हैं, मेरी सास, और मैं। मेरी शादी काफी धूमधाम से हुई थी। मेरा फिगर साइज़ 36D ,30,38 गोरा रंग हाईट 5।6 इंच ओर चूंचियां सुडौल टाईट है मेरी शादी जब हुई मैं 21 साल की थी, मेरे पति 28 साल के थे।
हमारा घर गांव के बाहर बना हुआ है और घर का सिर्फ एक मुख्य दरवाजा है।और हमारी करीब 30 बीघा खेती की जमीन हैं। सब मेरी बहुत इज्जत करते हैं … क्योंकि मेरे संस्कार आजकल की लड़कियों की तरह नहीं हैं। सास ने घर में एक कमरा किराए पर एक फौजी अंकल को दे रखा है जो घर के छोटे छोटे काम भी कर देते थे। उनकी उम्र 52 साल होगी और शरीर से काफी मजबूत बलवान है। चौड़ा सीना काले सफेद बालों से भरी हुई मैं उन्हें अंकल बुलाया करतीं और वे भी मुझे बहु की तरह ही मानते हैं।
जब भी अंकल अपने शरीर की तेल मालिश करते तो मैं उन्हें चोरी से देखती रहती क्योंकि मजबूत बलवान शरीर चौड़े सीने पर घुंघराले काले सफेद बालों के गुच्छे मुझे देखने को मजबूर किया करते थे और उनके कच्छे में उभरा हुआ लन्ड काफी मजबूत लम्बा और मोटा दिखाई देता है।
अंकल को देखते हुए मेरे शरीर में सनसनाहट सी होने लगती हैं वो रोज़ मालिश करते ओर मैं उन्हें देख निहारते हुए देखतीं मेरे कमरे के बगल में एक स्टोर है। फिर सास का कमरा और फिर ड्राइंग रूम है, उसके बाद किरायेदार अंकल उसके साथ ही लगता हुआ एक बाथरूम और टॉयलेट है।
करीब 5 महिने पहले की बात है। जुलाई का महीना था और दूसरा सप्ताह लग गया था। मेरे पति 3 दिन पहले ही अपनी ड्यूटी पर गए थे और वो इस बार करीब 12 दिन के लिए इंदौर गए थे। चूंकि जाती हुई गर्मी और आती हुई बारिश का महीना था। बाहर काफी बारिश हो रही थी। कमरों के बाहर बरामदे के ऊपर टीन की चादरें थीं, जिस पर बारिश की बूंदें गिर रही थीं और टीन के बजने की आवाजें आ रही थी। मैं गर्मी के कारण सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी।

मैंने पहले सीरियल देखा और रात 10:30 बजे टीवी ऑफ कर दिया। बाहर घना अंधेरा था, बस टॉयलेट में एक नाईट बल्ब रहा था। सास करीब साढ़े दस बजे सो जाया करती थी। टीवी देखने के बाद मैं पेशाब करने के लिए पहले सास के कमरे और फिर किरायेदार अंकल के कमरे के आगे से होती हुई टॉयलेट में चली गयी।
बाहर गहन अंधकार था इसलिए मैंने टॉयलेट का दरवाजा सिर्फ आधा बंद किया और पेटीकोट उठा कर खड़े खड़े दोनों पैर चौड़े करके मूतने लगी। पेशाब की कुछ बूंदें मेरी झांटों के बालों को गीला कर चुकी थीं। मैं अब झांटें कम ही साफ करती थी … मूतने के बाद जैसे ही मैं बाहर निकली, मेरे सामने किरायेदार अंकल सामने सिर्फ लठ्ठे के कच्छे में खड़े थे। उन्हें सामने देखकर मैं एकदम सकपका गयी। मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि बाहर वो खड़े होंगे।
मैं सर झुकाए उनकी बगल से जाने के लिए निकली, पर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने हाथ छुड़ाने की भरपूर कोशिश की, पर नाकाम रही। उन्होंने कहा- बहू, आज तेरा गोरा सुन्दर जवान बदन देख कर मन काबू नहीं हो पा रहा है। चल कमरे में चल। मेरे पति घर में नहीं थे और मेरे जिस्म में काम की अगन जल रही थी फिर भी मैंने लोक लाज और संस्कारों से प्रेरित होकर मद्धम आवाज में उन्हें समझाने की कोशिश की- अंकल जी, ये पाप है और मेरे पति घर पर नहीं हैं। प्लीज मुझे छोड़ दो।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर हुए कहा- तू ऐसे मत शर्मा … मुझे पता है कि तू मेरी बात मानेगी। ये कह कर वो नीचे झुके और अपने दाएं हाथ से मेरी पिंडलियों का घेरा बना कर मुझे इस तरह से ऊपर उठा लिया। मेरा पेटीकोट इस तरह ऊपर उठ गया कि मेरी जांघों के पीछे वाला हिस्सा उनकी भुजाओं की गर्मी को महसूस करने लगा।
मैं उनके कंधे पर थी और मेरे पैरों की पाजेबें आवाज करने लगी थीं। उन्होंने मुझे कमरे में ले जाकर फर्श पर खड़ा कर दिया। मैं अंधेरे में ही उनके सामने चुप खड़ी थी। उन्होंने सबसे पहले कमरे की कुण्डी लगायी और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया।वो मेरे गाल चूमने लगे।
मैं पीछे की तरफ झुकी, तो अंकल जी भी मेरे ऊपर झुक गए। उनका लंड मेरे नंगे पेट पर मचल रहा था। मैं उनकी बांहों के घेरे में थी। मैंने फिर से उन्हें कहा- अंकल जी, सास जी जग रही होंगी तो बहुत अनर्थ हो जाएगा। उन्होंने कहा- तुम्हारी सास गहरी नींद में हैं, मैंने चैक कर लिया था।
बस ये कह कर वो मेरे चूचे दबाने लगे। अंकल ने मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चूची को दबाने लगे,,, आआआहहहह, मममममम, मम्मी।, आउच।,, मुझे अजीब नशा सा होने लगा। उनके मजबूत हाथ मेरी पीठ पर मचलने लगे … और फिर धीरे धीरे मेरे नितम्बों पर उनके हाथ मेरे दिल में खलबली मचाने लगे। उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा- बहू, तू डेढ़ साल में अब तक मां नहीं बन सकी, पर आज जरूर तेरी कोख में मेरा बीज पड़ जाएगा। उनकी बात का मैं मतलब समझ गयी। वो मेरे साथ हमबिस्तर होना चाह रहे थे।
उन्होंने मेरा चेहरा घुमाया और मुझे पीछे से अपनी बांहों में फिर से कस लिया। वो मेरे होंठों का रसपान करने लगे और फिर अपने हाथों से मेरे ब्लाउज़ के तीनों बटन खोल दिए। मैं चिल्ला भी नहीं सकती थी … क्योंकि सास यही समझती कि चुदने के बाद बहू नाटक कर रही है।
मेरी स्थिति बहुत अजीब हो गयी थी। उनकी हथेलियां मेरे चुच्चों पर फिसलने लगी थीं।मेरे स्तन टाइट होने लगे थे। फिर अपने बाएं हाथ से अंकल जी मेरे चुच्चे मसलने लगे और उनका दायां हाथ मेरे पेटीकोट के अन्दर घुस गया था। अंकल ने मेरे दोनों चुचियों पर चूसने दांतों से काटने के निशान डाल दिए थे। मेरी चूचियों के निप्पल चूसने से मोटे खड़े हो गए। अंकल मेरे रसीले गुलाबी होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगें काफी देर तक चूसा मेरे नीचे का होंठ चूसने से मोटा हो गया।

मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। लेकिन इससे पहले कि मैं उन्हें फिर से मना करती, मेरी भरपूर जवानी की उठान उनकी हथेली में कैद होकर रह गयी थी। और वो उसे स्पंज की तरह धीरे धीरे दबाने लगे। मेरी हालत उस मेंढकी की तरह हो गयी थी जो हथेली से छूटने के बार बार फुदकती है। मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
अंकल जी की मोटी उंगली के चलने से मेरी चूत में मचलने लगी थी। मेरी चूचियां बार बार उठने और गिरने लगी थीं। सांसें धौंकनी सी चलने लगी थीं। मुझ पर वासना सवार होने लगी थी। अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा था। मेरे शरीर में आग भर जा रही थी मैं अपने चूतड़ों को उछाल रही थी।,, ये देखकर अंकल जी ने मुझे गोद में उठाकर बिस्तर पर धकेल दिया और अगले ही उन्होंने एक हाथ से अपना कच्छा उतार दिया।
वो नंगे होकर मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने घुटनों से उन्होंने मेरी जांघें चौड़ी कर दीं। फिर अंकल ने मेरी छोटी सी प्यासी चूत पर जैसे ही अंकल जी ने अपना मोटा गुल्ला रखा, मेरी चूत का मांस फैलता चला गया। उन्होंने दाब दे दी और तभी मेरी हिचकी चीख निकल गयी। ऊई मां।, मम्मी।,मररंर,,, गई।,,आहहहह,,,उईईईईईईईईईईघ।।
असल में उनका बड़ा सुपारा मेरी चूत में धंस चुका था। उनका लन्ड काफी मजबूत लम्बा और मोटा 9 इंच लम्बा और मोटा 4 इंच होगा मेरी चुत काफी दिन बाद चुद रही थी और इतना मोटा सुपारा मेरे पति का नहीं था तो मेरी सीत्कार निकल गई और मुझे हल्के से दर्द होने लगा।
मगर अंकल जी ने मेरी चुत का दर्द नजरअंदाज किया और वे अन्दर धंसाते चले गए। उनका पूरा लौड़ा मेरी चुत को चीरता हुआ जड़ में समा गया था। मेरी दर्द भरी चींखें, सिसकारियां निकलने लगी ऊऊऊऊऊऊऊ,,,मममममम।, मम्मी मररंर गई। आहहहह उईईईईईईईईईईघ। हहहहहहह। मममममयय। आखाआआआआ।, उईईईईईईईईईईघ हहहहहहह मममममयय।। आखाआआआआ उईईईईईईईईईईघ। अंकल ने मेरी चुत में अपना लन्ड जड़ तक फंसा दिया।
अंकल अपने लन्ड को तेज गति से मेरी चूचियां को पकड़ कर लन्ड मेरी चुत में पेल रहा था।
मेरी आंखें बंद हो गई थीं। मगर कुछ पल के बाद ही मेरी चुत ने लंड को सहन कर लिया था। अंकल ने मेरी दोनों टांगों को उठा कर अपने कंधों पर रख दिए और अपना फौलादी लन्ड जड़ तक घुसा कर मेरी चुत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।
अंकल का लन्ड मेरी बच्चेदानी में जा रहा था,,, जिससे मैं हर धक्के पर उछल रहीं थीं। उईईईईईईईईईईघ। हहहहहहह।। मममममयय।,,, ऊऊऊईईई।। मां।

बस इसके बाद तो अंकल जी अपनी गांड आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगे। मैं भी उनके हर धक्के में असीम आनन्द प्राप्त करने लगी। मेरी चूत का फैलना और सिकुड़ना मेरे शरीर को अत्यधिक आनन्द दे रहा था। मेरी चुत बुरी तरह से फ़ैल गई थी। मेरी चुत की सलवटें खुल गई थी।। जब जब वो अपने मजबूत चूतड़ों के दबाव से मेरी चूत में धक्के मार रहे थे, तो मेरी बच्चेदानी सहम कर रह जाती थी।
मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि अंकल का लंड इतना मोटा और कड़क होगा। कुछ ही पलों बाद मेरी टांगें हवा में उठ गईं और उन्हें अपने अन्दर आने के लिए खुद से कोशिश करने लगी। अब मेरी चूत और उनके लंड के मिलन की फक फक फक, फच फच फच की आवाजें आ रही थीं।
मेरी चूत ने झाग उगलना शुरू कर दिया था। मेरी जांघें ऊपर उठ गयी थीं। मैं झड़ गई मेरी चुत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया। अंकल जी मस्ती में आकर मेरी हवा में उठी हुई मेरी टांगों के तलुवे चाटने लगे।
मेरे पति ने आज तक कभी भी मेरे तलुवे कभी नहीं चाटे थे क्योंकि वो दस बारह धक्के पेल कर झड़ जाते थे। पर इधर तो अंकल जी ने मेरी हवा निकाल कर रख दी थी।
अंकल मुझे चोदे जा रहे थे। मैंने अपनी जांघ के नीचे से दायां हाथ निकाल कर उनका लंड पकड़ने की कोशिश की, पर वो मेरी मुट्ठी में नहीं आ सका। तब उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा- बहू, इसकी मोटाई नाप कर क्या करेगी, बस मजे लेती रह! मैं शर्म के मारे पानी पानी हो गयी। पर कमरे में घोर अंधेरा था तो मेरी हिम्मत बनी रही।
मेरी नन्ही सी चूत में अंकल जी का मोटा गुल्ला लगातार मार कर रहा था। 20 मिनट से मेरी जम कर चुदाई हो रही थी। ऐसा मजा शादी के बाद मैंने पहली बार लिया था। मैं फिर से झड़ गई और चुत से पानी निकलने लगा।
कमरे में मेरे पैरों की पायल की झनझनाहट गूंज रही थी, बस शुक्र यही था कि मेरी सास सो रही थीं। मेरा नीचे का सारा हिस्सा अंकल जी ने हिला कर रख दिया था। अंकल मुझे चोदे जा रहे थे लन्ड तेजी से मेरी चुत को तहस-नहस कर रहा था।
अंकल 40 मिनट से मेरी चुदाई से मेरी हालत खस्ता कर रहे थे। तभी उनके चूतड़ों की रफ़्तार अचानक काफी बढ़ गयी। मेरे हलक से मजे और मीठे दर्द के कारण हिचकियां निकलने लगीं और कुछ ही सेकंड बाद अंकल जी के गले से सांड की तरह आवाज निकलने लगी। मेरी चूत में उनके लंड की गर्म गर्म धारें पड़ने लगीं।
मैं 3 बार अंकल के साथ ही फिर से झड़ गई। आनन्द के मारे मेरा बुरा हाल था। मेरी बच्चेदानी में मुँह पर अंकल जी के लंड ने करीब 15-25 बार रह रह कर धारें मारीं और वो मेरी छाती के ऊपर फैलते चले गए।
मेरे 36 की सुडौल स्तन दब गए दो तीन मिनट तक हम दोनों अंकल बहू ऐसे ही पड़े रहे। मेरी चुत फूल कर कुप्पा हो गई सूज गई आहहहह उईईईईईईईईईईघ अब मेरे कानों में टीन पर बारिश के गिरते पानी की आवाजें आने लगी थीं।
मैं जैसे ही सचेत हुई, मैंने उन्हें कहा- अंकल जी जल्दी उठो न … मां जी कभी भी आ सकती हैं। उन्होंने तभी बेडस्विच दबा दिया और नाईट बल्ब जल उठा। फिर जैसे ही उन्होंने अपना मोटा, पर मुरझाया लंड मेरी चूत से बाहर निकाला, उनकी मर्दानगी देख कर मैं मस्त हो गयी। क्योंकि लंड भी उन्होंने लगभग खींच कर ही निकाला था। वाह क्या गजब की मोटाई थी, करीब 4 इंच मोटा 9 इंच लम्बा लंड मेरी चूत की सैर करके बाहर आ गया था।
अभी मुरझाई हालत में भी उनका लंड लगभग साढ़े सात इंच का था। इसका मतलब अंकल जी का लंड करीब साढ़े 9 इंच लम्बा था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- बहू, तू तो बहुत मस्त है री … तेरी चूत ने तो मेरे जैसे पहलवान का भी पानी सोख लिया।
अंकल जी ने कहा- बहू, आज पूर्णिमा की रात है … और तू जवान है। मैंने इससे पहले कभी किसी परायी स्त्री की तरफ नजर उठा कर नहीं देखा। अब तू समझ कि नौ महीने बाद सवा शर्तिया मां बन जाएगी। आगे मिलने की तेरी इच्छा पर है। तेरा पति शायद लायक नहीं है। मैं चुप रही, वो शायद मेरे मन की बात समझ चुके थे।
मुझे दुबारा चुदने के लिए भी उन्होंने मेरे ऊपर ही छोड़ दिया था। मैंने शर्म के मारे अपनी कुहनी से आंखें ढक ली। पर उन्होंने कहा- तू शरमा क्यों रही है, हम दोनों तो इस बिस्तर पर आज की रात के साथी हैं। मैंने उनकी ये बात सुनकर आंखें खोल दीं।
उन्होंने कहा- बहू तू रुक, मुझे पेशाब लग रही है। मैं अभी आता हूँ। ये कह कर वो बिस्तर से उठे। उन्होंने एक चादर अपने सिर पर डाल ली और कुण्डी खोल कर बाहर निकल गए। वाह क्या चौड़ी छाती, चौड़े कंधे, छाती पर घने काले घुंघराले बाल … और मस्त साढ़े 9 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा कड़क लंड। उनकी मजबूत गांड देख कर मुझे उनसे प्यार होने लगा था।
मैं अपने अंकल जी से चुद कर मस्ता गयी थी। मेरे दिल में अंकल के लिए प्यार उमड़ पड़ा।,ऐसी चुदाई मेरी कभी नहीं हुई।, ऐसी चुदाई को मैं तड़प रही थी। मेरे पति की तो छोटी सी 4 इंच की कमजोर सी लुल्ली थी, उसने बड़ी मुश्किल से सुहागरात को मेरी सील तोड़ सकी थी।
पर मुझे वो न तो वो मजा दे पाया, जो मैंने उम्मीद की थी … और न ही मैं पिछले डेढ़ सालों में मां नहीं बन सकी थी। अब अंकल जी के वापस आने का मुझे बेसब्री से इन्तजार था। मैं उनके लंड से दुबारा चुदने के लिए एकदम से मन बना चुकी थी।
अगली बार अपनी चुत में अंकल जी का साढ़े 9 इंच का लंड कैसे लिया और मेरी चुदाई के बाद मेरी क्या हालत हुई। इस सबको मैं पूरे विस्तार से कहानी के अगले भाग में लिखूंगी। मेरी इस अंकल बहू Antarvasna Sex Stories को लेकर आप मुझे मेल कर सकते हैं।
बस शब्दों की मर्यादा का ख्याल कीजिएगा। rs9533749@gmail.com
आपकी रिया।
पढ़े दूसरा भाग: किराएदार फौजी ने मेरी चुत फाड़ी:२
