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गाँव वाले बाऊजी से प्यास बुझवाती मम्मी - Antarvasna Sex Stories

  • Kamvasna
  • 12 जन॰
  • 6 मिनट पठन

आज मैं अपनी माँ की चुदाई की एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार देखी है। मेरी माँ एक गोरी, सुंदर, लंबी और हेल्दी महिला हैं। मेरी माँ मेरे डैडी से सेक्सुअली संतुष्ट नहीं होती थीं। उनकी नज़र एक ऐसे मर्द पर रहती थी जो उनको पूरी तरह से संतुष्ट कर सके।


ऐसा एक आदमी था और वो थे मेरे दूर के बाउजी, जिनकी उम्र तो लगभग 70 साल की होगी। वो लंबे, गोरे और बिल्कुल हेल्दी हैं। अब मैं आपको उस दिन की ओर ले चलता हूँ। उस दिन घर पर सिर्फ़ दो लोग थे – मैं और माँ। बाउजी शाम को रूम पर आए। माँ उनको देखकर बहुत खुश थीं।


माँ ने रात में खाना बनाया। मैंने बाउजी को खिलाया। इसके बाद मैं माँ के साथ खाने के लिए बैठा। कुछ देर के बाद मैंने माँ का बूर देखा। मुझे लगा कि माँ जानबूझकर दिखा रही हैं क्योंकि मुझे ऐसा लगा कि ये जानने के बाद कि उनका बूर दिखाई दे रहा है, उन्होंने कोई भी एक्शन नहीं लिया।


खाना खाने के बाद माँ ने घर का काम खत्म करने के बाद नहाने गईं। उसी समय लाइट चली गई। माँ नहाने के बाद सिर्फ़ साया और ब्रा पहनकर बाथरूम से बाहर निकलीं। इसके बाद माँ एक छोटी-सी डिबिया में सरसों का तेल लेकर बरामदे में लगी हुई बेड पर लेट गईं और अपने ऊपर एक चादर डाल ली। मैंने देखा कि माँ डिबिया से तेल लगा रही थीं।


माँ ने मुझसे बाहर सीढ़ी का ग्रिल बंद करने को कहा। जब ग्रिल बंद करके मैं चाबी रखने के लिए उस रूम में गया जहाँ बाउजी सोए हुए थे, तो मैंने देखा कि बाउजी भी अपना लंड निकालकर दोनों हाथ से सहला रहे थे। मुझे देखते ही ढक लिया। मुझसे पूछा, “क्या कर रहे हो?”


मैंने बोला, “मैं बाथरूम जा रहा हूँ” और मैं बाथरूम में जाकर दरवाज़े को थोड़ा सा ज़ोर से बंद किया। अब बाउजी उठकर माँ के पास आए। उन्होंने माँ की चादर को हटाया। एक हाथ में माँ का हाथ पकड़कर उठाया और दूसरे हाथ में तेल का डिब्बा लेकर अपने रूम में लेकर चले गए।


रूम में जाने के बाद उन्होंने डिब्बा रखने के बाद माँ की ब्रा और साया खोलकर हटा दिया। अब उन्होंने जाकर दरवाज़ा बंद किया। इसके बाद उन्होंने अपना तौलिया उतार दिया। अब माँ की नज़र उनके लंड पर चली गई। माँ उनके लंड को और बाउजी माँ के बूर को देख रहे थे।


बाउजी अब माँ के पास आ गए। पास आकर बाउजी ने माँ के दोनों जाँघों के बीच में अपना लंड घुसा दिया। अब माँ ने अपनी आँखें बंद कर लीं। बाउजी ने माँ को अपनी बाहों में जकड़कर उठा लिया और उनको लेकर बेड पर चढ़ गए। बेड पर चढ़कर उन्होंने माँ को बेड पर लिटा दिया और माँ की जाँघों पर बैठ गए।


अब माँ के बूर को दोनों हाथ से फैलाया। माँ थोड़ा सा विरोध कर रही थीं लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ़ दिख रही थी। बाउजी ने अपने लंड में तेल लगाया। अब माँ के बूर में तेल लगाया। इसके बाद बाउजी ने माँ के बूर पर लंड सटाकर हल्का सा कमर को धक्का लगाया।


माँ के मुँह से आह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल गई। मैं समझ गया कि माँ के बूर में बाउजी का लंड चला गया है। बाउजी ने कमर को झटका देना शुरू किया। बाउजी जब-जब ज़ोर से झटका लगाते थे, माँ के मुँह से आआआह्ह्ह्ह की आवाज़ सुनाई पड़ती थी।


कुछ देर के बाद जब बाउजी ने माँ के चूचियों को मसलना शुरू किया तो उनका जोश और बढ़ गया। एक तरफ़ बाउजी बूर में ज़ोर से झटके लगाने लगे तो दूसरी तरफ़ माँ के चूचियों को मसलने लगे। अब माँ के बूर में लंड जब आधे से ज़्यादा चला गया तो माँ आह्ह्ह्हह्ह ओओओह्ह्ह्हह नहीं ऐसे सिसिसिसिस नहीं आह्ह्हह्ह्ह्हह्ह की आवाज आने लगी.


बाउजी ने माँ के होंठों को चूसना शुरू कर दिया। लगभग आधे घंटे चोदने के बाद बाउजी का बीज माँ के चूत में गिर गया। माँ भी बहुत ही खुश थीं। कुछ देर के बाद बाउजी ने लंड निकाल लिया। माँ पाँच मिनट तक लेटी रहीं। तब उठकर जाना चाहती थीं।


बाउजी ने उनको रोक लिया। उन्होंने माँ से कहा कि कहाँ जा रही हो, यहीं सो जाओ। माँ को अपने पास लिटा दिया। माँ उनके साथ ही सो गईं। मैं भी सोने चला गया। भोर में मेरी नींद खुली तो मैं फिर से उसी जगह पर गया जहाँ से मैंने रात में माँ की चुदाई देखी थी।


मैं जब वहाँ गया तो देखा कि माँ और बाउजी एक-दूसरे से चिपक कर सोए हुए थे। अचानक ही बाउजी की नींद खुली, उन्होंने माँ की कमर पर से हाथ हटाया। माँ भी जाग गईं। बाउजी ने माँ के गाल पर एक चुम्मा लिया और माँ को दूसरी तरफ़ घूमने के लिए बोला।


माँ ने उनके तरफ़ अपना पीठ कर दिया। अब बाउजी उठकर बैठ गए। उन्होंने डिब्बे में से तेल निकाल कर माँ की गांड में लगा दिया। माँ अपना गर्दन पीछे करके देख रही थीं। अब बाउजी ने तेल निकाल कर अपने लंड में लगाया। बाउजी तेल लगाने के बाद लेट गए और माँ की गांड पर लंड रखा और कमर को पकड़ कर एक ज़ोरदार झटका मारा।


माँ के मुँह से आआआह्ह्ह्ह की आवाज़ निकलते ही मैं समझ गया कि माँ की गांड में लंड चला गया। अब बाउजी अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में पूरा लंड माँ की गांड में घुसा दिया। बाउजी माँ की गांड को लगभग दस मिनट तक मारने के बाद जब धीरे-धीरे शांत पड़ गए तो मैं समझ गया कि माँ की गांड में बीज गिर गया है।


बाउजी ने लंड निकाल लिया। और सिगरेट पीने के बाद उठकर तौलिया पहनकर बाहर पेशाब करने चले गए। पेशाब करके जब वो वापस रूम में गए तो माँ उसी तरह लेटी हुई थीं। बाउजी ने दरवाज़ा बंद करने के बाद तौलिया खोलकर अलग कर दिया और बेड पर जाने के बाद माँ को सीधा करने के बाद माँ की जाँघों पर बैठ गए।


अब माँ के पैरों को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि माँ दोनों पैरों को पूरा सटा रखा था। बाउजी ने माँ के बूर को देखा। अब उन्होंने डिब्बे में से तेल लेकर माँ के बूर में लगाया। इसके बाद अपने लंड में लगाया। तेल लगाते समय माँ से पूछा कि पेशाब नहीं करोगी?


माँ ने गर्दन हिलाकर कहा, नहीं। अब बाउजी ने जैसे ही लंड को माँ के बूर के ऊपर सटाया, माँ ने अपने दोनों हाथों से अपना बूर फैला दिया। बाउजी ने लंड के अगले भाग को माँ के बूर में डाल दिया और माँ की चूचियों को पकड़ कर एक ज़ोरदार झटके के साथ अपना लंड अंदर घुसा दिया।


माँ के मुँह से आह्ह्ह्ह, ओफ्फ्फ आरे बाप रे… थोड़ा धीरे… धीीीरे… आह्ह्ह्ह इस्स्स इस्स्स आह्ह्ह्ह कर रही थीं। बाउजी पर उनकी इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था। वो हर चार-पाँच छोटे झटके के बाद एक ज़ोर का झटका दे रहे थे। उनका लंड जब आधे से ज़्यादा अंदर चला गया तो.


माँ ने बाउजी से कहा, अब और अंदर नहीं डालिएगा वरना मेरी बूर फट जाएगी। बाउजी ने कहा कि अभी तो आधा बाहर ही है। माँ ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। माँ की हर कोशिश को नाकाम करते हुए बाउजी माँ के चूत में अपना लंड अंदर ले जा रहे थे। माँ ने जब देखा कि अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने बाउजी से कहा कि मैं आपसे बहुत छोटी हूँ आह्ह्ह्ह प्लीज़… आह्ह्ह नहीं उइयाआह्ह्ह। बाउजी ने लगातार कई ज़ोरदार झटके मारकर पूरा लंड माँ के बूर में घुसा दिया तथा माँ की चूचियों को मसलने लगे।


अब माँ को भी मज़ा आने लगा था। शायद माँ को इसी का इंतज़ार था। बाउजी ने अपना झटका माँ के झटके में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह उन्होंने पूरे पैंतीस मिनट तक माँ की चुदाई की। इसके बाद माँ और बाउजी शांत पड़ गए, तब मैं समझ गया कि माँ के बूर में बाउजी का बीज गिर गया है। वो दोनों पूरी तरह से थक चुके थे। अब बाउजी ने लंड निकाल दिया और माँ के बगल में लेट गए। माँ भी थोड़े देर के बाद उठकर अपना साया और ब्रा पहना और दरवाज़ा खोलकर बाथरूम में चली गईं।


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Kapil Sharma
Kapil Sharma
12 जन॰

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