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छोड़ी नौकरी दोबारा पाने के लिए मैं चुद गई - Antarvasna Sex Stories

हैल्लो दोस्तों,

मेरा नाम जयश्री है, लेकिन सब मुझे प्यार से जाया बुलाते हैं।

मैं 33 साल की शादीशुदा महिला हूँ और पेशे से अब एक डॉक्टर हूँ।


मेरी कद 5 फीट 7 इंच, और फिगर अब 38-34-40 हो चुकी है।

दरअसल शादी से पहले मेरी फिगर 36-32-38 थी, लेकिन छह महीने की “प्रशिक्षण” ने मुझे और आकर्षक बना दिया।

मेरी चूचियाँ अब 38D की भरी-भरी, कमर 34 इंच की, और गांड 40 इंच की गोल-मटोल, इतनी मोटी कि साड़ी में भी लहराती नजर आती है।

चेहरा गोरा, आँखें बड़ी, होंठ रसीले।


यह बात तबकी है जब मेरी शादी को एक साल भी नहीं हुआ था कि मैं अपनी ढोंगी सास से तंग आकर ससुराल छोड़कर मायके आ गई।

मेरी सास हर बात में टांग अड़ाती, मुझे नीचा दिखाती, मेरे पति संदीप ने बहुत समझाया, कॉल पर रोया भी, लेकिन मैं अड़ी रही।

मैंने शर्त रख दी – “जब तक तुम नया घर नहीं बना लेते, मैं वापस नहीं आऊँगी।” संदीप दो साल पहले सरकारी अध्यापक बन गया था।


लेकिन इतनी जल्दी जमीन खरीदना और घर बनाना नामुमकिन था, ये बात मुझे अच्छे से पता थी।

असल में मैं शादी से पहले एक अच्छी डॉक्टर थी, लेकिन ससुर के कहने पर मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी।

अब एक साल हो चुका था, नौकरी दोबारा पाने के लिए मुझे योग्यता और अद्यतन प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र चाहिए था।


मैंने बहुत मेहनत की और आखिरकार अपने पुराने सीनियर डॉक्टर डॉ. पटेल से संपर्क किया।

डॉ. पटेल 42 साल के थे, कद 5 फीट 10 इंच, ठीक-ठाक चेहरा, लेकिन हल्का पेट निकला हुआ, सर पर बाल कम थे।

वे ठरकी मशहूर थे, नर्सों और युवा महिला डॉक्टरों को फुसलाकर अपनी इच्छा पूरी करते थे और फिर नई जिंदगी का वादा करते थे।


डॉक्टर साब मेरी गांड की मसाज करते हुए
डॉक्टर साब मेरी गांड की मसाज करते हुए

शादी से पहले जब मैं कुंवारी थी, तो उन्होंने मेरे पीछे बहुत पड़े रहते थे, लेकिन मैंने कभी नहीं दिया, अब मजबूरी आ पड़ी थी।

मेरी स्किल्स एक साल में काफी कमजोर हो गई थीं। मुझे उनके पास जाना पड़ा।


पहले दिन जब मैं उनके चैंबर में गई, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “जाया, तुम वापस आईं? अच्छा है, लेकिन छह महीने का इंटेंसिव ट्रेनिंग होगा, उसके बाद ही प्रमाण पत्र मिलेगा।”

उनकी आँखों में वही पुरानी चमक थी, मैं समझ गई कि कीमत चुकानी पड़ेगी।


ट्रेनिंग शुरू हुई, पहले हफ्ते तो सिर्फ मेडिकल डिस्कशन और प्रैक्टिस थी।

लेकिन तीसरे हफ्ते उन्होंने मुझे अपने प्राइवेट क्लिनिक में बुलाया, शाम के 8 बजे, क्लिनिक एकदम खाली था।


“जाया, तुम्हें बहुत कुछ सीखना है,” उन्होंने कहा और दरवाजा बंद कर दिया।

फिर मेरे पास आए और मेरे कंधे पर हाथ रखा,“तुम शादीशुदा हो, मैं जानता हूँ, लेकिन ट्रेनिंग में सब कुछ शामिल है।”


मैं चुप रही, उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू सरका दिया, मेरी ब्लाउज में चूचियाँ उभरी हुई थीं।

उन्होंने ब्लाउज के हुक खोले और ब्रा उतार दी, मेरी 36 इंच की चूचियाँ उनके सामने थीं।


“वाह… शादी के बाद और सुंदर हो गई हो।” उन्होंने दोनों चूचियों को मसलना शुरू किया। निप्पल को उँगलियों से दबाया।

फिर एक चूची मुँह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगे, मैं सिहर उठी। “आह्ह्ह… डॉ.पटेल…”


उन्होंने मुझे टेबल पर लिटा दिया और मेरी साड़ी ऊपर सरकाई।

फिर मेरी पैंटी उतार फेंके, मेरी चूत तब थोड़ी घुँघराले झांट वाली थी।

उन्होंने घुटनों के बल बैठकर चूत चाटना शुरू किया, "इस्स्स… उम्म्म्म… आहह" जीभ से मेरी क्लिटोरिस को चूसते, अंदर उँगलियाँ डालते।


और मैं कराह रही थी, "अह्ह्ह्ह… इस्स्स… उह्ह्ह…" फिर उन्होंने अपना लंड निकाला।

7 इंच लंबा, बहुत मोटा, काला और नसों वाला, सिरा मोटा और चमकदार।

यहां तक की मेरे पति संदीप का लंड इससे काफी छोटा और पतला था।


“चूसो जाया,” उन्होंने आदेश दिया, मैंने पहली बार किसी और मर्द का लंड मुँह में लिया था।

जो एकदम गर्म, भारी था, मैंने सिरे को चाटा, फिर आधा मुँह में लिया और चूसने लगी धीरे-धीरे, "उम्म्म्म… उम्मह्ह…"


डॉ. पटेल ने मेरे बाल पकड़े और गले तक ठेल दिया, मैं एकदम चौंक सी गई थी।

लेकिन कोई कष्ट नहीं हुई और डॉ. पटेल कहने लगे “हाँ… अच्छे से चूसो… तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू है।”


और दस मिनट तक मैं डॉ. पटेल के लंड को चूसती रही फिर वे मेरी खुली हुई टांगों के बीच आए मिशनरी पोजीशन में चोदने।

उन्होंने अपने लंड में निरोध कंडोम पहना और मेरी चूत में अपना लंड रागढ़ते हुए घुसाते ही मैं चीख उठी…


“आआह्ह्ह… बहुत मोटा है…” वो धीरे-धीरे पूरा घुसा कर पहले आहिस्ता-आहिस्ता ठोकने लगे मगर फिर वे जोर-जोर से ठोकने लगे।

मैं दर्द से कराह रही थी सिसक रही थी, "अह्ह्ह्ह… आह!… इस्स्स…"


मेरी चूचियाँ हिल रही थीं, जिसे देख डॉ. पटेल मेरी चूचियाँ दबाते, चूसते और चोदते रहे पूरा जूठा कर लतपत कर दिए थे अपने लार से।

लगभग 25 मिनट तक चुदवाने के बाद मेरी चूत में झड़ गए, तब मुझे राहत मिली।


फिर ट्रेनिंग के अगले दिनों में वो और खुल गए, कभी क्लिनिक में तो कभी उनके फ्लैट पर।

उन्होंने मुझे हर पोजीशन में चोदा, एक दिन उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया।

मेरी 38 इंच की गांड हवा में थी उन्होंने अपने दोनों हाँथ से मेरी गांड फैलाई और कहने लगे, "अरे वह!… कहना पड़ेगा जाया इतनी मस्त गांड के दर्सन आ हुए।"


और ऐसा कहते हुए वे पहले तो मेरी चूत चाटने लगे,"उह्ह्ह… इस्स्स… " फिर वे मेरी गांड की छेद को चाटने लगे, "उफ्फ्फ… इस्स्स…"

मुझे पता नहीं था कि गांड चटवाने में इतना मज़ा आता है कभी मेरे पति ने चाटा जो नहीं था।

वहीं डॉ. पटेल अपने जीभ को मेरी गांड की छेद के अंदर डालने में लगे हुए थे।


मैं सिसक रही थी, "इस्स्स… आह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ" करते हुए फिर उन्होंने मेरी गांड की छेद पर जेल लगाए और धीरे से ऊँगली डाल दिए।

जिससे मैं चौंक गई और उनसे कहने लगी की, "डॉ. पटेल वहां नहीं… प्लीज!"


तब डॉ. पटेल मेरी चूतड पर एक थप्पड़ मारे और एक सवाल पूछे।

और सवाल यह था कि, "उस समय का वर्णन करो जब तुम अपने रोगी के देखभाल में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित अभ्यास का उपयोग किया था?"


तो मैं डॉ. पटेल से बोली कि, "लेकिन डॉ. पटेल आप मेरी गुदा में ऊँगली करते रहेंगे तो मैं कैसे सोच पाऊँगी."

जिसपर डॉ. पटेल कहने लगे कि, "यही तो तुम्हें समझना होगा कोई भी सिचुएशन में तुम्हें आराम से जवाब देना होगा."


और ऐसा कहते ही डॉ. पटेल मेरी गांड की छेद में एक ओर ऊँगली घुसा दिए जिससे मैं, "अहाह्ह्ह्ह… नहीं", करते हुए सिसक पड़ी।

लेकिन फिर मैं खुदको नियंत्रण में की और सवाल का जवाब सोचने लगी।


फिर मैं डॉ. पटेल को जवाब दी कि, "मैंने दैनिक नर्स-संचालित "कैथेटर रिमूवल प्रॉम्प्ट" शुरू करके कैथेटर से जुड़े मूत्र पथ संक्रमण (सीएयूटीआई) को कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित अभ्यास परिवर्तन लागू किया था."


और मेरा जवाब सुनकर डॉ. पटेल बोले, "बहुत सटीक जवाब दी तुमनें, अब आगे ओर सवाल पूछूंगा।"

और ऐसा कहते हुए उन्होंने अपना लंड मेरी गांड की छेद पर रखा और धीरे से घुसाया।


“आआह्ह्ह… फाड़ रहा है डॉ. पटेल…” दर्द के साथ अजीब सा मजा भी आ रहा था।

वो मेरी गांड में पूरा लंड घुसाकर धीरे-धीरे चोदने लगे फिर थोड़ा ज़ोर से धक्के देते हुए चोदने लगे, हर ठोके में मेरी गांड हिल रही थी।

और मैं दर्द से कराह रही थी, "अहाह्ह्ह्ह… इस्स्स्स… अईई… आहह…"


ओरल सेक्स तो रोज का हो गया, मैं उनके लंड को चूसती, उनके टट्टे चूसती।

कभी वो मेरे मुँह में झड़ देते, मैं न चाहते हुए भी निगल लेती।


छह महीने बीत गए, इस दौरान उनकी जोरदार चुदाई ने मेरा शरीर का आकार बदल दिया।

मेरी चूचियाँ और भारी हो गईं, कमर थोड़ी भर गई, लेकिन गांड और ज्यादा गोल-मोटी हो गई थी।

मेरी फिगर 38-34-40 की हो गई थी। मैं और आकर्षक लगने लगी थी।


आखिरी महीने में उन्होंने मुझे कई बार थ्रीसम जैसी स्थिति में भी ट्रेनिंग दी।

कभी उनके दोस्त डॉक्टर को भी बुलाते और दोनों मुझे चोदते, मुझे पढ़ाते, ट्रेनिंग की भूली बातें याद दिलाते।


एक बार तो डॉ. पटेल ने मुझे अपने फ्लैट पर बुलाया और पूरे रात चोदा।

मैं ऊपर-नीचे, साइड से, डॉगी स्टाइल, काउगर्ल – हर पोजीशन में चुदवाई थी।

कहना पड़ेगा डॉ. पटेल एक विशेषज्ञ चोदू थे, देर तक चोदते, पोजीशन बदलते और मुझे कई बार झड़वाते।


आखिर में छह महीने पूरे होने पर उन्होंने मुझे योग्यता और अद्यतन प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र दे दिया।

और यह भी बोले कि, “जाया, अब तुम फिर से डॉक्टर बन सकती हो, लेकिन याद रखना – जब भी जरूरत पड़े, मेरे पास आना।”


मैंने प्रमाण पत्र लेकर नौकरी के लिए अप्लाई किया और दोबारा डॉक्टर बन गई।

लेकिन अब मैं बदल चुकी थी, संदीप अभी भी नया घर बनाने की कोशिश कर रहा था।

मैं मायके में रहकर काम कर रही थी, डॉ. पटेल से मेरी मुलाकातें कभी-कभी जारी रहीं।


क्योंकि अब उनकी चुदाई की आदत मुझे भी लग गई थी, मैं जानती हूँ कि मैंने गलत किया, लेकिन मजबूरी थी।

अब मैं फिर से डॉक्टर हूँ, लेकिन मेरी चूत और गांड डॉ. पटेल की यादों से भरी हुई थी।

कैसी लगी मेरी Antarvasna Sex Stories

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