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देसी दारू के साथ चाची को धकापेल चोदा - Antarvasna Sex Stories

  • Kamvasna
  • 17 दिस॰ 2025
  • 8 मिनट पठन

फ्रेंड्स, मेरा नाम आशीष है. मैं उत्तराखंड में रहता हूँ.


मेरी उम्र 24 साल है. लंड 4.7 इंच लंबा है मगर बहुत हार्ड और देर तक चलने वाला है.

मैंने इस घटना से पहले तक चूत नहीं मारी, न ही सामने देखी.

बस पोर्न फिल्मों में ही देखी थी.


ये Antarvasna Sex Stories मेरी दीपा चाची की चुदाई की है.


मेरी चाची की उम्र 29 साल है. उनका फिगर साइज़ 32-30-34 का है.

रंग एकदम गोरा, हाइट 5 फीट है.


दिखने में वे कैटरीना कैफ से कम नहीं लगती हैं, बस लंबाई में मार खा गई हैं, नहीं तो पक्का कैटरीना ही लगती हैं.


चाची के घर में बाथरूम नहीं था और उन्हें रोज़ सुबह नहाने की आदत थी.

इसलिए वे अपने घर के पीछे बने खुले आंगन जैसी जगह में ना थीं.


मेरी चाची वैसे तो रोज़ कुर्ती और लेगिंग्स पहनती थी लेकिन खाना बनाने या पूजा के समय वे सिर्फ़ साड़ी पहनती थीं.


उस वक्त वे बिना ब्रा-पैंटी के ही रहती थीं. यह मुझे मालूम था.


चाची के चार बच्चे हैं.

तीन लड़कियां और एक लड़का. चाचा गांव में नहीं रहते थे.

वे शहर में कुछ मेहनत मजदूरी का काम करते थे.


चाची की सबसे बड़ी लड़की तो अंग्रेज़ों से कम नहीं लगती थी.

उसके जवान होते ही मेरा मन उसको चोदने का था.


वह सेक्स कहानी बाद में जरूर लिखूँगा.


चाची मुझसे बहुत हंसी मजाक करती थीं और मैं भी चाची को अपने लौड़े के नीचे लेने की फिराक में था.


एक दिन अल सुबह मैं कहीं जा रहा था.

मेरा रास्ता चाची के घर से होकर जाता था.


चाची उस दिन अपने घर में आगे वाले खुले हिस्से में ही नहा रही थीं.

चूंकि चाची को उतनी सुबह किसी के निकलने की उम्मीद नहीं होगी इसलिए वे शायद आगे खुले हिस्से में नंगी होकर नहाने लगी थीं.


उन्होंने एक नीला दुपट्टा भर ओढ़ रखा था और उसी से अपने स्तनों को ढक रखा था.

चाची बैठकर नहा रही थीं.


पहाड़ी गांव होने की वजह से मेरा रास्ता उनके घर के नीचे के हिस्से से भी गुजरता था.


चाची का दुपट्टा छोटा होने के कारण वे नीचे से पूरी नंगी थीं.


जैसे ही मेरी नजर चाची पर पड़ी, वे अपने सिर पर पानी डाल रही थीं.


मेरी नजर सीधे उनकी चुत पर गई, जिसमें काले रंग के दो दो इंच लंबे बाल थे.

उनकी लंबी लंबी झांटों के बीच में लंबी चुत के भूरे होंठ दिख रहे थे.


चुत के ऊपर चाची की सफेद, मोटी जांघें देखने लायक थीं.


ऊपर नीले रंग के दुपट्टे में चाची के काले रंग के निप्पल ऐंठे हुए एकदम साफ दिख रहे थे.


क्या ही बताऊं दोस्तो, चाची ने तो मेरा पानी निकाल दिया था.


मेरा मन कर रहा था कि चाची की टांगों को चाटकर साफ कर दूं और उनकी चुत के नीचे मुँह लगाकर सारा पानी पी लूं.

चाची ने शायद मुझे नहीं देखा.


सचमुच उस दिन से मुझे चाची को अपना लॉलीपॉप चुसवा कर उनके चेहरे पर अपना माल डालने का मन होने लगा था.

चाची की चुत के नाम पर अब मैं रोज मुठ मारने लगा.


एक दिन मैं उनके घर के सामने से गुजर रहा था.


उनके घर पर कोई नहीं था; बच्चे बाहर खेल रहे थे.


दोपहर के बारह बजे का समय था.

चाची ने खाना बना रही थीं.


उन्होंने किचन के सामने की खिड़की से मुझे जाते हुए देख लिया.

वे आवाज लगा कर मुझसे बोलीं- देख तो मेरा फोन चार्ज नहीं हो रहा है.


मैं अन्दर गया और देखा कि डेटा केबल खराब थी.


चाची ने ऊपर टी-शर्ट और नीचे साड़ी पहनी थी.

वे खाना बनाते समय ब्रा और पैंटी नहीं पहनती थीं.


मैंने उन्हें बताया कि डेटा केबल खराब है और कोई और केबल है तो दो!

वे केबल ढूंढने लगीं.


फिर उन्होंने कहा- शायद ऊपर वाली रैक में है.

वे स्टूल पर चढ़कर देखने लगीं.


उसी वक्त मेरी नजर चाची की गांड पर गई.

चाची स्टूल पर खड़ी थीं, इसलिए उनकी गांड मेरे मुँह के पास थी.


मैं उनकी गांड को सूंघने लगा और मैंने उनकी जांघों को पकड़ लिया.


मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैंने चाची की साड़ी थोड़ी सी नीचे को खींची तो वह पूरी निकल गई.


आह क्या नजारा था … चाची की नंगी, गोरी गांड मेरी नजरों के सामने थी.


जैसे ही उनकी साड़ी नीचे खिसकी तो उन्हें अहसास हो गया कि उनकी नंगी गांड बेपरदा हो जाएगी, वे झट से अपनी साड़ी को संभालने लगीं.

लेकिन तब तक तो खेल हो गया था.


यह देख कर चाची ने शर्म से नजरें झुका लीं क्योंकि मेरे मुँह के सामने उनकी गांड खुल गई थी और सब कुछ साफ दिख गया था.


चाची भले ही गोरी थीं मगर उनकी गांड का छेद काला और बालों से भरा था.


मैंने चाची को पकड़ने की कोशिश की तो वे मेरे ऊपर गिर गईं.


चाची की गोरी गांड मेरे लंड पर थी और मेरे हाथ उनकी जांघों के जोड़ पर आ गया था, जहां उनकी झांटें थीं.


मैंने चाची की गर्दन पर चूमना शुरू किया और उनकी चूत के बालों को सहलाने लगा.


चाची बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगीं.

कभी वे मेरा मुँह अपनी गर्दन से हटातीं, तो कभी मेरा हाथ अपनी चूत से.


ऐसा करते-करते पांच मिनट हो गए.

चाची का विरोध खुद ब खुद धीमा पड़ गया.


फिर चाची पलटीं, उन्होंने अपनी गांड ऊपर की और मुझे लिप किस करने लगीं.


हम दोनों की मूक भाषा में सहमति बन गई थी कि अब सेक्स करना ही है.


चाची ने मेरी शर्ट उतारी, फिर मेरा लोअर उतार कर मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया.


मेरा लंड बैठा था मगर पानी छोड़ रहा था.


चाची ने मुझसे कहा- ये अभी भी खड़ा नहीं हुआ … तेरा पहली बार है क्या?

मैंने हां कहा.


फिर चाची ने मेरी दोनों टांगें उठाईं और मेरी पूरी गांड चाटने लगीं.

धीरे-धीरे वे मेरे गांड के छेद तक पहुंची और अपनी जीभ अन्दर डालने लगीं.

फिर ऊपर आते हुए मेरे अंडों को चूसने लगीं.


इसके बाद उन्होंने 69 की पोजीशन ली, अपनी गांड फैलाकर मेरे मुँह पर रख दी और मेरा लंड चूसने लगीं.


चाची की चूत से चिपचिपा पानी आ रहा था.

मैंने उनकी गांड और चूत पूरी तरह साफ कर दी, फिर चाची की टांगों को भी खूब चाटा.


फिर चाची मुड़ीं और मुझे लिप किस करने लगीं.

उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया.


मेरे हाथ चाची की गांड पर थे और मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था.


फिर मैंने चाची की टी-शर्ट खोली, उनके चूचों को आज़ाद किया और उन्हें चूसने लगा.

चाची की आंखें बंद थीं, बस उनके मुँह से ‘मम्म … मम्म … मम्म्म …’ की आवाज़ निकल रही थी.


चाची का गोरा बदन था और उसमें काली झांटें कमाल लग रही थीं.


फिर मैंने चाची को घोड़ी बनाया और पीछे से खूब चोदा.


चाची झुक गईं और अपनी गांड फैला दी.

मैंने लंड उनकी चूत से निकाला और गांड में डाल दिया.


लेकिन छेद टाइट होने की वजह से लंड बाहर आ गया.


चाची चिल्ला उठीं- आआह!

फिर चाची अपनी गांड पर हाथ लगाकर बैठ गईं.


चाची गुस्से में थीं, लेकिन जैसे ही मैंने मनाया कि अब नहीं करूँगा, वे मान गईं.


अब मैंने चाची को कुतिया बनाया और इस बार उनकी गांड में ज़ोर का झटका देकर एक बार में पूरा लंड डाल दिया.


चाची पुनः ज़ोर से चिल्लाईं- आआआ … साले ने फाड़ दी.


मैंने उनका मुँह बंद कर दिया.

चाची के आंसू निकल आए लेकिन मैं तेज़ी से चोदता रहा.


चाची पूरी तरह लेट गईं और बेजान हो गईं.

पर मैं चोदता रहा.


पांच मिनट बाद मैं झड़ गया.


तब मैंने चाची की गांड देखी, वह सूज गई थी और खून भी आ रहा था.

मेरा लंड लाल हो गया था.


चाची उस वक्त मासूम सी लग रही थीं.

चाची ने अपने कपड़े पहने और लंगड़ाती हुई खाना बनाने चली गईं.


मैंने भी कपड़े पहने और चाची के पास किचन में चला गया.


उस समय एक बज चुका था.

चाची की गांड देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.


मैंने चाची की साड़ी उठाई और उनकी चूत में लंड डाल दिया.

कुछ झटकों के बाद मैंने चाची को चूल्हे के पास बिठाया, उनकी टांगें ऊपर कीं और जमकर चोदा.


चाची ने अपनी टांगों को मेरी कमर से लपेट लिया और मुझे चूमने लगीं.

चाची पूरे जोश में आ गई थीं.


दस मिनट तक चोदने के बाद मैंने चाची की चुत से लंड निकाला और नाभि में सारा माल डाल दिया.


वे इस बार खुश थीं क्योंकि सही जगह लंड गया था और मस्ती से चुदाई हुई थी.


उस दिन मैं उन्हें चोद कर घर चला गया.


दूसरे दिन चाची का फोन आया- आज रात तुम मेरे घर सो जाना.


मैं समझ गया कि आज की रात भी सुहानी गुजरने वाली है.


मैं अपने घर पर कह कर चला गया कि चाची के घर सोने जा रहा हूँ.


रात को चाची मुझे पैसे देती हुई बोलीं- दारू ले आ!

मैंने कहा- और बीड़ी!

मुझे मालूम था कि चाची को बीड़ी पीना पसंद है.


वे हंस कर बोलीं- हां वह भी ले आना.


रात को बच्चे सो गए तब हम दोनों ने घर के पिछवाड़े खुले आंगन में अपनी महफिल जमाई देसी दारू और बीड़ी पीते हुए चाची की सेक्सी जवानी को मैं और सेक्सी बनाने वाला था.


मैं घर से बापू का रेजर ले आया था.

मैंने चाची से कहा- आज मुझे आपकी चुत की झांटों का जंगल साफ करना है!


वे हंस दीं और बोलीं- जब तू दारू लेने जा रहा था, तब मुझे तुझसे कहने का मन कर रहा था कि रेजर ले आना.


अब मैंने चाची की साड़ी उतारी और उन्हें नंगी करके टांगें फैला कर लेटा दिया.

उनकी टांगें फैला कर मैंने उनकी चुत पर घड़ी साबुन मला और झाग बना कर रेजर से झांटों की सफाई करना शुरू कर दी.


मुझे बहुत सावधानी बरतनी पड़ रही थी क्योंकि यह रेजर साधारण वाला ही था.

फिर भी आराम आराम से रेजर से मैंने चाची की चुत की झांटों को साफ कर दिया.


फिर पानी से चुत धोई तो एकदम गोरी चमचमाती चुत मेरे सामने थी.


वे मुझे देख कर हंस रही थीं.


मैंने कहा- क्या हुआ?

वे बोलीं- बड़ी गुदगुदी हो रही है.


मैंने कहा- अभी दारू का मजा लेने का सही समय आ गया है.


यह कह कर मैंने दारू की बोतल का ढक्कन खोला और उनकी चुत पर टपका दी.

चाची समझ गईं कि लौंडा एक साथ दो नशा करने के मूड में है. एक चुत का नशा और दूसरा दारू का.


यह देख कर चाची ने बीड़ी का बंडल उठाया और एक बीड़ी अपने होंठों में दबा कर माचिस से सुलगा ली.


उधर मैं उनकी चुत से दारू को चाट कर मजा ले रहा था.

नीट दारू थी तो मुँह में बड़ा तीखा सा लग रहा था.


मैंने चाची के मुँह से बीड़ी ले ली और खुद फूँकने लगा.


तभी चाची ने कहा- मेरे लिए एक गिलास में भर दे.

मैंने हंस कर कहा- आप तो मेरे लौड़े से पी कर मजा लो.


वे हंस दीं.

मैंने अपने लंड से दारू की धार लगा कर चाची के मुँह में टपका दी.

चाची को भी दारू तीखी लगी तो उन्होंने मेरे लौड़े को ही मुँह में भर लिया और चूसने लगीं.


इस तरह से हम दोनों ने दारू खत्म कर दी.


अब नशा चढ़ गया था और देसी दारू का नशा जब अपने शवाब पर आता है तो मुँह से गाली निकलने लगती हैं.


वही हुआ.


चाची मुझे गाली देने लगीं- चल बे लौड़े, अब चढ़ जा मेरे ऊपर … और पेल दे अपना लंड मेरी भोसड़ी में!

मैंने भी गाली दे दी- साली रंडी … बड़ी बड़ी झांटों वाली कुतिया … आज तेरी मां चोद दूंगा.


वे हंस कर बोलीं- साले मादरचोद … तू मेरी मां क्या चोदेगा … वह तो कब की मर गई!


इस तरह की मस्ती भरी बातों में मैं चाची के ऊपर चढ़ गया और उनकी चुत में अपना औजार पेल दिया.


धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों थक गए और सो गए.


एक घंटा बाद वापस चुदाई शुरू हो गई.

इस तरह से उस दिन के बाद से मैं चाची को जब मर्जी चोद देता था.


अब किसी दिन चाची से उनकी बड़ी लड़की की सील तोड़ने की बात करनी है.

क्योंकि हमारी बिरादरी में जवान लड़की ज्यादा देर तक बिना चुदी नहीं रह पाती है.

कोई न कोई सांड उसकी चुत फाड़ ही देगा.

इससे अच्छा है कि मैं ही अपनी बहन की चुत चोद लूँ.


उसकी कुंवारी मलाई सी चूत चुदाई की कहानी मैं आपको जल्द ही लिखूँगा.


पर आज भी इस सेक्स कहानी को लिखते वक्त मुझे अपनी चाची की बालों वाली चूत का स्पर्श सोचकर मेरा लंड खड़ा हो गया है.


दोस्तो, यह Antarvasna Sex Stories आपको कैसी लगी, प्लीज कमेंट्स में जरूर बताएं.

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