दोस्त की दीदी की ग्रुप में चुदाई - Group Sex Stories
- Kamvasna
- Aug 8
- 21 min read
नमस्कार मेरे सभी लंडधारी भाइयो और प्यारी प्यारी चूत की मालकिनो, मैं कामवासना का नियमित पाठक हूँ.
मेरा नाम अभिषेक है और मैं अभी 21 साल का हूँ. मैं जबलपुर से हूँ.
यह Group Sex Stories मेरी और मेरे प्रिय मित्र सचिन की दीदी के साथ की है.
हॉट दीदी की चूत मारी मैंने!
सचिन की दीदी का नाम जाह्नवी है.
वह 26 साल की है.
उसके बारे में आगे कुछ और भी लिखूँगा.
अब मैं आपको अपने घर के बारे में बता दूँ. मेरे घर में मैं, मेरी दीदी, मम्मी पापा हैं.
मेरा शरीर मस्त है और मैं काफी आकर्षक युवक हूँ. बस थोड़ा कलर सांवला है.
यह सेक्स कहानी आज से 3 साल पहले की उस वक्त की है जब मैं 19 साल का होने को था.
इससे पहले मैंने कभी किसी के साथ चुदाई नहीं की थी.
जाह्नवी दीदी के घर में वह, उनके पापा और उनका भाई ही हैं.
उनकी मम्मी अपने मायके ही रहती हैं. वे यहां नहीं आती हैं. उनका अपने पति से कुछ झगड़ा है.
जाह्नवी मेरी दीदी की भी सहेली है, तो वह हमारे घर आती रहती है.
मैं भी उसके घर जाता रहता हूँ.
हम लोग जबलपुर से कुछ पहले एक गांव में रहते हैं.
हमारे घर के पास ही उनका घर है.
जाह्नवी का साइज 32-28-34 का है और हाइट 5 फुट 1 इंच है.
वह दिखने में बहुत सुंदर है.
ऐसी माल ही कि उसे देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.
उस समय तक मैंने उसको कभी गलत नजर से नहीं देखा था.
मेरा एक और सीनियर दोस्त समीर भी है. उसकी उम्र 25 साल की है. वह साला बहुत बड़ा लौंडियाबाज़ है.
वह जाह्नवी का बॉयफ्रेंड था.
मैं जब 18 साल का हुआ तो मैंने सब दोस्तों को पार्टी दी और मस्ती की.
उस रात को मैं और समीर साथ बैठे थे. तो वह मुझसे बोला कि बता तुझे क्या गिफ्ट चाहिए?
तो मैं बोला- भाई मैं 18 साल का हो गया लेकिन आज तक कभी किसी के साथ चुदाई नहीं की.
वह बोला कि रंडी के साथ सेक्स करेगा?
मैंने उसको मना कर दिया.
वह बोला- अच्छा सचिन तो तेरा दोस्त है ना … उसकी दीदी जाह्नवी तुझे कैसी लगती है?
मैंने कहा- ठीक लगती है, पर वह क्यों?
वह बोला- उसको चोदेगा क्या?
मैंने कहा- नहीं यार. वह दोस्त की दीदी है … और सचिन को पता चल गया तो समस्या हो जाएगी.
वह बोला- वह कोई तेरी सगी दीदी थोड़ी है … और आजकल तो ये सब चलता है.
मैंने कहा- ओके यार लेकिन जाह्नवी मुझे चूत देगी कैसे?
तब उसने बताया कि वह उसकी गर्लफ्रेंड है और वह उसको उसके घर में ही चोदता भी है.
मैं यह सुनकर हैरान हो गया और उसकी तरफ देखने लगा.
उसने हंस कर कहा- ऐसे क्या देख रहा है बे … वह कोई दुनिया की पहली लड़की थोड़ी है जो अपने आशिक से चुदवाती है. हजारों लड़कियां विवाह से पहले अपने आशिकों से चुदवाती हैं.
ये सब मैंने पढ़ा तो था, पर आज सुनने में बड़ा रोचक लग रहा था.
मैंने उससे पूछा- तुम उसके साथ कैसे सेक्स करते हो?
वह हंसा और बोला- अबे सेक्स कैसे करते हैं ये भी कोई बताने वाली बात है. लंड चूत में जाता है तो सेक्स होता है.
मैंने स्पष्ट किया कि मेरा मतलब ये कि तुम जाह्नवी के साथ सेक्स किधर और कब करते हो?
उसने बताया कि जब जाह्नवी के पापा बैंक में जॉब करने चले जाते हैं, तो वह घर में अकेली हो जाती है क्योंकि सचिन भी सुबह अपने कॉलेज निकल जाता है. तब जाह्नवी घर पर अकेली होती है और मैं उसके घर चला जाता हूँ.
मैंने उसकी तरफ उत्सुकता से देखा और हाथ की उंगलियों से सेक्स करने की बात को पूछा कि सेक्स के बारे में तो कुछ बताया ही नहीं!
तब उसने बताया कि जाह्नवी का कमरा घर में सबसे आखिर में है. तू कल शाम को 4:30 बजे सचिन को खेलने के लिए बुलाने आ जाना और चुपचाप जाह्नवी के रूम में आ जाना. सचिन 4 बजे ही खेलने चला जाता है. फिर वह काफी देर से वापस आता है.
मैं समझ गया कि ये क्या कहना चहता है. मैं बोला- ओके भाई, समझ गया. मैं आ जाऊंगा … शुक्रिया.
फिर अगले दिन मैं 4:30 बजे उनके घर पहुंचा तो अन्दर से समीर और जाह्नवी की आवाजें आ रही थीं.
मैंने खिड़की से देखा तो चौंक गया.
सच में मैं जिस जाह्नवी दीदी को बहुत संस्कारी मानता था, वह तो इतनी बड़ी रंडी निकलेगी. मुझे उम्मीद ही नहीं थी.
जाह्नवी उस टाइम सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और बहुत हॉट लग रही थी.
वह कुर्सी पर बैठ कर समीर का लंड मुँह में लिए थी.
समीर उसके सामने अपना लंड निकाल कर खड़ा था और उसका लंड करीब 7 इंच का था.
वह जाह्नवी के दूध दबाता हुआ अपना लंड उसके मुँह में घपाघप पेले जा रहा था.
जाह्नवी के दूध देख कर तो मेरा मन हुआ कि अभी जा कर चोद लूँ.
लेकिन मैंने पहले देखना ठीक समझा.
जाह्नवी ने समीर का लंड करीब 10 मिनट तक चूसा.
फिर समीर ने उसकी पैंटी को हटा कर उसको पूरी नंगी कर दिया और उसकी दोनों टांगें फैला दीं.
जाह्नवी समझ गई कि अब उसकी चूत चाटने का वक्त आ गया है.
उसने अपनी एक टांग को कुर्सी के एक हत्थे पर रख दी थी और दूसरी टांग जरा फैला कर चूत खोल दी थी.
क्या मस्त फूली हुई चिकनी चूत थी जाह्नवी की.
फिर समीर नीचे बैठ गया और उसकी चूत चाटने लगा.
वह समीर के सर पर हाथ रख कर मदमस्त होकर कहने लगी- आह समीर और चाट ले … आह साली बड़ी खुजला रही है. अब जल्दी से अपना लंड पेल कर इस निगोड़ी चूत को चोद भी दे … आह मेरी जान अब और नहीं सहा जाता.
फिर समीर ने खड़े होकर चुदाई की पोजीशन बनाई और जैसे ही जाह्नवी की चूत में लंड डाला, जाह्नवी मस्त हो गई.
लंड ने आगे पीछे होना शुरू कर दिया था.
उसी समय समीर ने मुझे खिड़की की तरफ इशारा करके अन्दर आने का कह दिया.
मैं अन्दर आ गया और जाह्नवी के सामने आ गया.
तब मैं बोला- अरे जाह्नवी दीदी, आप ये क्या कर रही हो!
वह एकदम से घबरा गई और समीर को धक्का देती हुई उससे अलग हो गई.
उसने पास में रखी एक चुन्नी को उठाया कर लपेट लिया और बोली- प्लीज भाई … तुम किसी को कुछ नहीं बताना और जरा देर के लिए बाहर जाओ. मुझे कपड़े पहन लेने दो.
मैं उसके रूम से बाहर आ गया.
समीर ने जाह्नवी से कहा- साली ये तो एक दिक्कत हो गई. अब तो ये अभिषेक भोसड़ी वाला बाहर जाकर सबको बता देगा.
जाह्नवी बोली- हां कुछ तो करना ही पड़ेगा. तू उसको किसी तरह से रोक!
समीर बोला- जाह्नवी एक आईडिया है.
जाह्नवी- क्या आइडिया है?
समीर- उसको भी अपने साथ कर लेते हैं. वह तो अभी छोटा ही है, तुझको क्या फर्क पड़ेगा. उसका तो तू आसानी से ले लेगी.
थोड़ी देर कुनमुनाने के बाद जाह्नवी मान गई और समीर ने मुझको रूम में बुला लिया.
जाह्नवी ने मुझसे पूछा- बोल अभिषेक तू अपनी जाह्नवी दीदी के साथ चुदाई करेगा?
मैं बोला- हां दीदी बिल्कुल.
समीर बोला- पहले वादा कर कि तू किसी को कुछ नहीं बताएगा!
मैं बोला- हां यार … ये भी किसी को बताने की बात है.
बस अब समीर ने दरवाजा बंद किया और उसने जाह्नवी को फिर से पूरी नंगी कर दिया.
समीर बोला- यार अभिषेक पहले मैं कर लूँ, मेरा अधूरा रह गया था. मेरे बाद तुम कर लेना.
मैं बोला- ओके भाई.
मैं वहीं खड़ा होकर उन दोनों को देखने लगा.
जाह्नवी बोली- यार, तू कुछ देर के लिए बाहर चला जा, मुझे शर्म आ रही है.
समीर बोला- अबे यार जाह्नवी, तू भी ना चूतिया है. थोड़ी देर बाद तो ये तुमको पेलेगा ही और तुझे शर्म लग रही है.
वह कुछ नहीं बोली और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.
समीर उसको बहुत तेज तेज झटकों के साथ चोदने लगा.
मैंने कहा- यार, मेरा तो देखते ये सब देख कर ही निकल जाएगा. कुछ करो.
तो समीर बोला- तू अपनी दीदी के मुँह में लंड डाल ले.
मैं नंगा हुआ और मैंने जाह्नवी के मुँह में लंड डाल दिया.
वह अपने मुँह में मेरे लंड को पाकर एकदम से चौंक गई.
उसने हैरानी से कहा- ओए तेरा इतना बड़ा कैसे?
मैंने हंस कर जाह्नवी के दूध को दबाया और कहा- सब ऊपर वाले की मेहर है. ये तो आप बताओ दीदी आपको मजा आया या नहीं?
उसी वक्त समीर ने कहा- अबे साले तेरा लंड है या मूसल! ये तो मेरे लौड़े से भी ज्यादा बड़ा लंड है.
कुछ देर बाद समीर ने मुझे इशारा किया और कहा- चल अब तू मजा ले ले अपनी दीदी का!
जाह्नवी ने कहा- अब काहे की दीदी साले … दोनों मिल कर मुझे चोद रहे हो … अब अभिषेक तू मुझे दीदी नहीं कहना. बस अब तू प्यार से मेरी चूत चोद और मजा दे.
मैंने कहा- ओके दीदी … ओह सॉरी जाह्नवी. बस मैं ये कह रहा था कि मेरा फर्स्ट टाइम सेक्स है तो मुझे सभाल लेना. कहीं मैं जल्दी निकल गया तो मेरा हौसला बढ़ाना.
जाह्नवी ने ओके कहा और बोली- चलो बिस्तर पर चलते हैं.
इस पर समीर बोला- हां बेबी, बिस्तर पर सही रहेगा. उधर तेरी सैंडविच चुदाई का मजा भी ले लेंगे.
जाह्नवी बोली- साले, पिछवाड़े की तरफ देखना भी नहीं. फट गई तो कौन सिलेगा?
मैंने कहा- अरे वह सब अपने आप ही हो जाएगा. बस आप अपना मन बना लेना कि दोनों तरफ से करना है.
जाह्नवी बोली- हां, जब तक मैं नहीं कहती … मेरी गांड में हाथ भी नहीं लगाना!
उसके बाद मैंने जाह्नवी को मिशनरी पोज में लिटाया और उसकी चूत में अपना लौड़ा पेल दिया.
मेरा लंड समीर के लंड से मजबूत और सख्त था.
उससे जाह्नवी की चूत को मजा आ गया और उसकी कामुक आवाजों ने मुझे और ज्यादा कामातुर कर दिया.
कोई दस मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ तो समीर ने मुझे हटने का कहा और मैंने वापस अपना लंड जाह्नवी के मुँह में दे दिया.
उधर मैं झड़ गया और जाह्नवी ने मेरे कोरे लौड़े का माल खा लिया.
कुछ देर बाद समीर ने भी अपने लंड को झाड़ कर जाह्नवी के पेट पर माल निकाल दिया.
इस तरह से हम दोनों ने जाह्नवी को एक एक बार और चोदा और कपड़े पहन कर बैठ गए.
फिर समीर बोला- अब मैं चलता हूँ.
ये कह कर समीर चला गया.
दीदी मुझसे बोली- चल अपन नहाने चलते हैं.
मैं जाह्नवी दीदी के साथ नहाने लगा और उधर मैंने फिर से जाह्नवी को चोदा.
जब भी मैं उनके घर जाता तो उनसे हंसी मजाक कर लेता.
जब वे अपने घर में किचन में खाना बना रही होतीं तो मैं उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी गांड पर हाथ फेरने लगता.
वे कुछ नहीं कहती थीं और जब उनके घर में कोई नहीं होता, तो मैं दीदी की मस्त जवानी का मजा चख लेता.
चूंकि दीदी की चुदाई तो रोज ही हो रही थी.
कभी समीर उनके मजे लेता तो कभी मैं उनकी चुदाई कर लेता.
कभी कभी हम दोनों को जाह्नवी दीदी एक साथ अपनी चुत का पूरा मजा दे देतीं.
वे मुझसे मुँह चुदवा लेती थीं और समीर से चुत रगड़वा लेती थीं.
फिर कुछ यूं हुआ कि समीर अपनी जॉब के सिलसिले में गांव से 6 महीने के लिए चला गया.
उस वक्त दीदी मुझे पूरा टाइम देने लगी थीं.
बिना समीर के लौड़े के दीदी बोर भी बहुत हो जाती थीं क्योंकि दिन में वह घर पर अकेली रहती थीं.
मैं सिर्फ उनके पास शाम को जाता था, वह भी तब जब सचिन खेलने चला जाता था.
इसलिए मैं हफ्ते में 3 या 4 दिन ही दीदी के साथ एंजॉय कर पाता था.
हालांकि अब मैं बहुत खुश रहने लगा था कि दीदी अब सिर्फ मेरी हैं.
एक दिन मैं उनके घर गया तो घर पर सचिन और जाह्नवी दीदी ही थीं.
सचिन अपने रूम में पढ़ाई कर रहा था और दीदी अपने पापा के रूम में टीवी देख रही थीं.
जैसा कि मैंने पहले ही बताया था कि उनकी मां अपने मायके ही रहती हैं, तो दीदी रूम में अकेली थीं.
मैं दीदी के पास बैठा तो दीदी बोलीं- मेरे पास आ जा!
मैंने दीदी को तुरंत किस कर दिया तो दीदी बोलीं- अभी ऊपर सचिन है रूम में … अभी ज्यादा नहीं.
परंतु मैं कहां रुकने वाला था.
मैं बोला- दीदी मेरे घर चलते हैं. मेरे घर पर कोई नहीं है.
दीदी ने हामी भर दी.
मैं ऊपर जाकर सचिन से बोला- भाई मेरे घर पर जाह्नवी दीदी को मेरी दीदी बुला रही हैं, तो तुम भी चलो … यहां अकेले क्या करोगे?
वह बोला- नहीं भाई, मुझे पढ़ना है. तुम चले जाओ.
मैं और जाह्नवी दीदी घर आ गए.
अभी दोपहर में 12 बजे थे तो मेरे पास जाह्नवी दीदी के साथ एंजॉय करने का बहुत टाइम था.
क्योंकि दीदी की चुदाई दिन में ही कर पाता था. रात को कुछ कर नहीं सकता था क्योंकि रात को उनके घर जाना मुश्किल था … और दीदी भी सचिन के साथ ही सोती थीं.
फिर मैं जाह्नवी दीदी को लेकर अपने घर आ गया.
मैं उन्हें अपने कमरे में जाने की कह कर अपने घर का गेट लॉक करने लगा.
दीदी मेरे कमरे में नहीं गई थीं. वे मेरे साथ ही जाने की बोली थीं.
मैं दरवाजा बंद करके दीदी के पास आया और उनके ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा.
दीदी बोलीं- पहले रूम में तो चल पागल … मैं कहीं भागी जा रही हूं क्या?
दीदी ने उस टाइम येलो सूट और ब्लैक सलवार पहनी थी, जिसमें वे कतई जहर लग रही थीं.
मैं बोला- दीदी, आज तो हमारे पास बहुत टाइम है.
वे बोलीं- अब तो मुझे दीदी मत बोल कुत्ते!
मैं हंस कर बोला- जी जाह्नवी जी!
वे बोलीं- हां … आज हम दोनों अच्छे से मजा लेकर सेक्स करते हैं.
मैं जाह्नवी दीदी को लिप किस करने लगा.
तो वे भी मेरा भरपूर साथ दे रही थीं.
किस के साथ मैं कपड़ों के ऊपर से ही उनके बूब्स दबा रहा था.
पांच मिनट तक उनके लिप लॉक करके मैंने मजा लिया.
फिर मैंने जाह्नवी दीदी से कपड़े उतारने को बोला, तो वे कामुक आवाज में बोलीं- यार, तुम ही उतार दो न!
मैंने बड़ी नजाकत से उनका कुर्ता उतार कर एक बाजू रख दिया.
वे अन्दर ब्लैक ब्रा पहनी थीं जो उनके दूध जैसे गोरे मम्मों पर मस्त लग रही थी.
मैं ब्रा के ऊपर से उनके बूब्स को मसल रहा था, तो वे आ आ आह आह की आवाज निकाल कर मजा दे रही थीं.
वे बोलीं- यार ब्रा उतार ले ना फिर मजा ले!
मैंने उनकी ब्रा उतार कर उनके 32 के बूब्स को आजाद कर दिया.
उनके बूब्स बहुत मुलायम और तने हुए हैं.
एक दूध को में तेज तेज दबा रहा था और अपने मुँह से उनके दूसरे दूध को पी रहा था.
वे बोलीं- यार अभिषेक धीरे धीरे कर न … दर्द होता है.
मैं हौले हौले से दीदी के मम्मों का मजा लेने लगा.
वे सिसकारी लेने लगीं- आह पी जा कुत्ते!
मेरे घर में उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था तो हम दोनों को कोई परवाह नहीं थी.
क्योंकि गांव में सभी के घर बड़े और दूर ही होते हैं.
फिर मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी सलवार का नाड़ा खोला, तो वे खड़ी हो गईं और सलवार उनके पैरों में जा गिरी.
मैंने फिर से उनको बेड पर बिठाया और उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत चाटने लगा.
वे बोलीं- कुत्ते चड्डी तो उतार ले!
मैं बोला- चड्डी के ऊपर से भी मजा आ रहा है क्योंकि आपकी चूत पानी छोड़ चुकी है.
वे हंसने लगीं और मेरे बालों में हाथ फेरती हुई अपनी चुत पर मुझे दबाने लगीं.
आज मैं दीदी को पूरी तरह से तड़पा कर मजा लेना चाहता था.
वे बोलीं- अब क्या चाटता ही रहेगा साले … प्लीज अब तो चोद दे मेरी जान अभिषेक!
मैं बोला- अभी कहां मेरी जान.
दीदी गुस्सा होने लगीं लेकिन मैं उनको लगातार तड़फा रहा था.
आखिरकार मैंने उनकी चड्डी भी उतार दी.
आह … क्या मस्त पकौड़ी सी फूली हुई चूत मेरे सामने रो रही थी.
एकदम पिंक … उस पर छोटी छोटी सी झांटें … और झांटों में से किसी पतले झरने की तरह उनकी चुत का पानी धीरे धीरे बाहर आ रहा था.
मैं उनकी चुत को चाट कर पूरा पानी पी गया.
वैसे भी अपने से बड़ी उम्र की लड़की के साथ मजा बहुत आता है.
फिर दीदी तो मुझसे 7 साल बड़ी थीं
उनका पूरा पानी पीने के बाद मैं बोला- चल उठ जा रण्डी … अब मेरे लंड को मुँह में लेकर इसे शांत कर.
उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मेरे सीने पर अपनी जीभ से चाट कर मुझे मजा देने लगीं.
मैं बोला- क्या बात है जाह्नवी डार्लिंग, आज तो फुल मजा दे रही हो!
वे बोलीं- आज पूरा मजा ले लेने दे न … क्या पता कभी इतना टाइम मिले न मिले!
यह कह कर दीदी ने मेरा लोअर और अंडरवियर भी निकाल दिया.
वे मेरे सात इंच के मोटे लंड हाथ में लेकर हिलाने लगीं.
मैं बोला- साली कुतिया मुँह में ले न!
वे बोलीं- बहनचोद … सब्र तो कर भोसड़ी के.
फिर हम दोनों 69 में आ गए.
मैं दीदी का मुँह चोद रहा था और वे मेरे मुँह अपनी चूत रखे हुई थीं.
मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने उनके मुँह में ही पूरा निकाल दिया.
वे चाह कर भी लंड बाहर नहीं निकाल सकती थीं क्योंकि वे मेरे नीचे थीं.
जाह्नवी दीदी मेरा पूरा पानी पी गईं.
फिर मैं सीधा लेट गया, तो वे मेरे मुँह पर चूत रख कर बैठ गईं.
मैं सांस भी नहीं ले पा रहा था.
वे बोलीं- ले कुत्ते अब खा ना मेरी चूत!
दीदी बार बार उठ कर जोर से मुँह पर बैठ रही थीं, इससे मुझे तकलीफ भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था.
फिर जब दीदी का दूसरी बार पानी निकलने को हुआ तो वे एकदम से मेरे मुँह पर चुत दबा कर माल छोड़ने लगीं.
मैं फिर से उनकी चुत का पूरा पानी पी गया.
अब जाह्नवी दीदी उठ कर खड़ी हो गईं और बाथरूम में जाने लगीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वे बोलीं- टॉयलेट आई है.
मैं बोला- आज तो अपनी टॉयलेट भी पिला दे रानी!
वे हंस कर बोलीं- आ जा पी ले मेरे लवड़े!
मैं दीदी के साथ टॉयलेट में जाकर लेट गया और वे मेरे पेट के दोनों तरफ अपने पैर रख कर बैठ गईं.
वे अपनी पेशाब की तेज धार मेरे मुँह पर देने लगीं और उनकी पेशाब मेरे मुँह में आने लगी.
आह मजा आ गया था.
अब हम दोनों खुद को साफ करके वापिस रूम में आ गए.
दीदी बोलीं- अब तो चोद दे कुत्ते!
मैं उनके दोनों पैर उठा कर उनकी चूत पर लंड सैट करने लगा.
इसके बाद जोर से झटके के साथ मैंने एक बार में ही पूरा लंड अन्दर डाल दिया.
जाह्नवी दीदी गाली देने लगीं- आह कुत्ते मर गई मैं … बाहर निकाल मादरचोद … आह आई ऊउह ऊह बहन के लंड आराम से नहीं चोद सकता था क्या!
मैं उनके बूब्स पीने लगा.
जब दीदी को आराम हुआ तो उनकी धीरे धीरे चुदाई करने में मजा आने लगा.
वे भी तेज तेज सिसकारी ले रही थीं- आह आह उह उह … और तेज कुत्ते … फाड़ दे दे अपनी दीदी की चूत … आआह और तेज तेज चोद!
उसी वक्त मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैंने लंड बाहर निकाल दिया.
वे कसमसा कर बोलीं- अब क्या हुआ भड़वे!
मैं बोला- मुझे आपकी गांड मारनी है!
वे मना करने लगीं और बोलीं- नहीं बहुत दर्द होगा!
मैं बोला- दर्द होगा तो निकाल लूंगा.
बहुत देर ना नुकुर करने के बाद दीदी बोलीं- अच्छा ठीक है तेल लेकर आ.
फिर मैं सरसों का तेल ले आया और उनको कुतिया बना दिया.
उनकी मस्त चिकनी गांड का छेद मेरे सामने था … छोटा सा छेद था.
मैं तुरंत गांड चाटने लगा तो वे बोलीं- छी: गंदा है.
मैं- आप तो मजा लो बस!
फिर कुछ मिनट तक गांड को अच्छे से चाट कर साफ किया.
उसके बाद बहुत सारा तेल लेकर उनकी गांड में भर दिया.
पहले धीरे धीरे लंड अन्दर पेला और फिर उनको कस कर पकड़ कर एक झटके में पूरा लंड अन्दर डाल दिया.
उनकी आंखों में आंसू आ गए.
वे रोने लगीं और बहुत तेज तेज गाली देने लगीं.
कुछ देर बाद जब उन्हें आराम हुआ तो मैं धीरे धीरे झटके देने लगा.
अब Xxx दीदी भी मेरा साथ देने लगीं.
मस्त गांड चुदाई चलने लगी.
मैं उनके दोनों दूध दबा दबा कर उनकी गांड मार रहा था.
फिर जब मेरा निकलने को हुआ तो दीदी बोलीं- गांड में ही छोड़ दो पानी!
मैंने माल झड़ा दिया और अलग लेट कर हम दोनों बातें करने लगे.
घड़ी में टाइम देखा तो तीन बजे थे.
मैं बोला- जाह्नवी डार्लिंग, अभी तो काफी टाइम है!
दीदी बोलीं- ठीक है, 30 मिनट आराम कर लो, फिर वापस एक राउंड और करते हैं.
हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपटे हुए थे.
मैं उनके बूब्स पी रहा था और वे मेरे लौड़े से खेल रही थीं.
कुछ देर में ही उनकी तो थकान की वजह से नींद लग गई मगर मेरा लंड कड़क हो गया था.
मैंने उनको नींद में ही सीधा किया और उनकी चूत को चाटने लगा.
चुत में जीभ के गीले अहसास से वे जाग गई तो दीदी ने अपनी दोनों टांगों को फैला दिया और मस्ती से चुत चटवाने लगीं.
फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया.
तो उनकी नींद पूरी तरह से खुल गई.
वे बोलीं- यार अभिषेक, तुम तो मुझे आज ऐसे चोद रहे हो, जैसे मैं तुम्हें आज पहली बार मिली हूँ … और आज के बाद मिलूँगी ही नहीं! थोड़ा सो तो लेने देते यार … बहुत थक गई हूँ.
मैं फिर भी उनकी चूत चोदता रहा.
वे आंखों को बंद करके लेटी रहीं.
करीब दस मिनट बाद जब मेरा निकलने को हुआ तो मैंने उनके बूब्स और चेहरे पर पिचकारी छोड़ दी.
दीदी कुछ भी नहीं बोलीं.
झड़ने के बाद मैंने बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया और बाहर आ गया.
वे अब भी वैसे ही लेटी थीं.
मैंने उनको बोला- दीदी, 4 बज गए हैं अब दीदी और मम्मी कभी भी आने वाली होंगी!
यह सुनकर दीदी ने उठ कर मेरी तरफ गुस्से से देखा.
मैं बोला- क्या हुआ?
वे बोलीं- साले मैं घर से नहा कर ही आई थी और तुमने फिर गंदा कर दिया … बूब्स और फेस पर गिराना जरूरी था क्या?
मैं हंस कर बोला- सॉरी!
वे बोलीं- कोई बात नहीं!
फिर दीदी नहा कर बाहर आईं तो मैं बोला- चलो अब आपको घर छोड़ने चलता हूँ.
वे बोलीं- सच्ची अभिषेक डार्लिंग … आज जितना मजा पहले कभी नहीं आया. आज तुमने रियली मुझे चूत गांड और मुँह … मेरे तीनों छेदों को मजा दिया. आई रियली लव यू.
मैं भी बोला- मुझे भी आज आपकी गांड मार कर मजा आ गया.
वे बोलीं- सही है बेटा … और तुमने मेरी गांड फाड़ दी. दर्द के कारण मेरी हालत खराब कर दी!
हम दोनों हँसते हुए उनके घर आ गए.
एक दिन मैं सचिन के घर गया था तो उसके घर पर कोई नहीं था.
मैं सीधे सचिन के रूम में चला गया, वहां मैंने देखा कि सचिन मोबाइल में पोर्न वीडियो देख रहा है और अपने लंड को पैंट से बाहर निकाल कर हिला रहा है.
मैंने सोचा पहले इसका हो जाने देता हूँ. परंतु तभी सचिन ने मुझे देख लिया और वह एकदम से सहम गया.
वैसे तो हम दोनों अच्छे दोस्त हैं परंतु कभी सेक्स की बात नहीं करते थे.
मैंने सचिन से पूछा- क्या भाई … आज घर पर कोई नहीं है क्या?
उसने झेंपते हुए बताया- पापा और दीदी बुआ के घर गए हैं.
सचिन की उम्र 21 साल थी और वह मेरे जैसे ही शरीर वाला युवा था परंतु उसका लंड मुझसे छोटा था.
मैं हंस कर बोला- भाई हिला कर निकाल तो ले … अन्दर क्यों रोक रखा है?
तो उसको शर्म आने लगी.
मैं बोला- अच्छा मैं चला जाता हूँ, फिर हिला लेना.
वह बोला- नहीं भाई … सॉरी वह बस ऐसे ही!
फिर मैंने उससे पूछा- सिर्फ हिलाते ही हो या कोई चूत भी चोदते हो?
वह खुल गया और बोला- यार कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है.
मैं बोला- तो भाई चल साथ में देखते हैं न … क्या देख रहा था!
पहले तो वह शर्माता रहा, फिर हम दोनों साथ में देसी चुदाई की वीडियो देखने लगे.
मैंने लोअर में से अपना लंड बाहर निकाल लिया.
वह मेरे लंड को देख कर बोला- ऊ भाई … तेरा तो बहुत बड़ा है!
अब मैंने जोश में अपने पूरे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया.
वह अभी भी शर्मा रहा था.
तो मैं बोला- भाई जो मेरे पास है, वह ही तो तेरे पास है … तो शर्माना क्या है?
यह कहते हुए मैंने उसका लंड पकड़ लिया और उसको जबरन नंगा कर दिया.
मैं उसके लंड हाथ में लेकर हिलाने लगा तो 3/4 मिनट में ही उसने पानी छोड़ दिया.
अब उसने मेरा हिलाया तो बोला- भाई, आज पहली बार इतना मजा आया है!
मैं बोला- सोच बेटा … जब लड़की हाथ में लेकर हिलाएगी तो कितना मजा आएगा?
वह बोला- हां भाई बात तो सही है.
फिर हम दोनों साथ में लेटे रहे.
तभी एक भाई बहन की सेक्स वीडियो आ गई.
मैं उससे बोला- यार, भाई बहन का सेक्स सही रहता है!
वह बोला- क्यों?
मैंने उससे कहा- घर में ही शादी के पहले फुल मजा मिल जाता है. बहन को भी घर में लंड मिल जाता है और भाई को भी बाहर मुँह नहीं मारना पड़ता है. किसी तरह की बदनामी का भी रिस्क नहीं होता है. दिन में सबके सामने भाई बहन की तरह रहो और रात को पति पत्नी वाले मजे लो.
वह बोला- तेरी भी तो दीदी है, कभी ट्राई किया है?
तो मैं बोला- यार, कभी हिम्मत नहीं हुई.
वह हम्म कह कर रह गया.
मैंने उससे कहा- तेरी भी तो जाह्नवी दीदी हैं … तूने किया कभी ट्राई?
वह बोला- यार उनको नंगी तो बहुत बार देखा है.
मैं बोला- कैसे?
तो उसने बताया कि उसके घर के बाथरूम में एक छोटा सा छेद है. जब दीदी नहाती हैं और पापा ऑफिस चले जाते हैं तो देख लेता था.
मैं बोला- यह सही है.
वह बोला- रुक मैं अभी आता हूँ.
मैं उसके रूम में बैठा रहा.
वह अपनी दीदी के कमरे में जाकर उनकी ब्रा पैंटी ले आया और बोला- ये देख भाई मेरी बहन के ढक्कन!
अब उसको क्या पता कि मैं उसकी दीदी की ब्रा पैंटी नहीं, बल्कि उसकी दीदी को ही बहुत बार चोद चुका हूँ.
परंतु फिर भी मैं जाह्नवी दीदी की पैंटी हाथ में लेकर चूमने लगा और बोला- बहुत अच्छी खुशबू आ रही है.
फिर मैं जाह्नवी दीदी की पैंटी पर मुट्ठी मारने लगा.
वह बोला- नहीं भाई, गंदी मत करना वर्ना दिक्कत हो जाएगी!
मैं बोला- कुछ नहीं होगा, साफ हो जाएगी.
वह बोला- पक्का साफ हो जाएगी?
मैं बोला- हां यार हो जाएगी!
अब वह भी अपनी दीदी की ब्रा पर मुट्ठी मारने लगा.
कुछ ही देर में मैंने और सचिन ने दीदी की ब्रा पैंटी पर अपना अधिकार जता दिया.
मैं उससे बोला कि ले इसको वापिस दीदी के रूम में ही टांग देना सूख जाएगी तो दीदी को पता भी नहीं चलेगा.
फिर हम दोनों थोड़ी देर दीदी के बारे में बात करते रहे कि दीदी का जिस्म कितना प्यारा है.
मैं बोला- यार, कोई तो होगा जो तेरी दीदी को चोदता होगा!
वह बोला- भाई कैसे होगा?
मैंने बोला- भाई, तेरी दीदी इतनी सुंदर हैं वे गजब की माल हैं … पक्का चुदाती होंगी!
वह बोला- हां यार हो तो सकता है … क्योंकि जब मैंने अपनी दीदी की ब्रा पर मुठ मार ली है तो कोई और तो उन्हें चोद ही सकता है.
फिर मैं अपने घर आ गया और मैंने जाह्नवी दीदी को व्हाट्सप्प पर बता दिया कि उनकी ब्रा पैंटी को मैंने ही गंदा किया है.
वे बोलीं- साले तुझसे एक दिन की सब्र नहीं हो रही थी … कल तो मैं आ ही जाती न … तब आराम से मुझे ही चोद लेता!
परंतु उनको कौन बताता कि यह काम मेरा अकेले का नहीं, उनके सगे भाई सचिन का भी था.
फिर अगले दिन जब दीदी घर में अकेली थीं, तो मैं उनके पास गया.
मैंने बताया कि एक बात बोलूं अगर आप गुस्सा ना हो तो!
वे बोलीं- हां बताओ!
मैं उनसे झूठ बोला कि ये काम कल आपके भाई सचिन ने किया है. उसने आपकी ब्रा पैंटी पर लंड रगड़ा है और माल से कपड़े खराब किए हैं.
मैंने उनको कल का सब कुछ सच सच बता दिया.
दीदी बोलीं- तुमने उसे ये तो नहीं बताया कि तुम मेरे साथ सेक्स करते हो?
मैं बोला- नहीं दीदी.
वे बोलीं- ये अच्छा किया.
मैंने उनको बताया कि आपका भाई आपको नहाते वक्त बहुत बार देख चुका है और वह आपके खूबसूरत जिस्म के दर्शन कर चुका है.
दीदी बोलीं- मुझे पता है यार. मैंने उसको ये सब करते हुए बहुत बार नोटिस भी किया है.
यह सुनकर मैं बोला- दीदी, फिर आपने कुछ कहा क्यों नहीं उसको?
दीदी बोलीं- मुझे शर्म लगती थी उससे ये बात करने में … तो सोचा जब तक चलता है, चलने दूं. मैंने सोचा था कि वह खुद ही थोड़े टाइम बाद सही हो जाएगा.
मैं बोला- दीदी, अब तो लगता है कि वह भी आपके खूबसूरत जिस्म पर पागल हो गया है.
दीदी बोलीं- अब क्या कर सकती हूँ यार?
मैं दीदी से बोला- दीदी आप भी सचिन के साथ मज़े क्यों नहीं ले लेती हैं.
दीदी बोलीं- पागल है क्या? वह मेरा सगा भाई है.
तो मैं बोला- तो आपको अच्छा लगेगा कि आपका भाई अब भी हाथ से हिलाता है! उसकी हेल्प नहीं कर सकती हो क्या?
दीदी बोलीं- नहीं, मतलब नहीं.
फिर मैंने भी ज्यादा फोर्स नहीं किया और हम दोनों अपनी मस्ती करने लगे
मैंने पहले दीदी को लिपकिस किया और फिर उनका सूट उतार दिया.
दीदी ने अन्दर उसी ब्रा पैंटी को पहनी थीं, कल जिस ब्रा पर उनके भाई ने अपने लौड़े का रस निकाला था.
मैं बोला- ये तो वही है … आपने ब्रा को धोया भी नहीं?
वे कुछ नहीं बोलीं … जबकि उनकी ब्रा पर निप्पल की जगह सचिन के स्पर्म के दाग साफ लगे दिख रहे थे.
मैं मजाक में बोला कि भाई के स्पर्म की खुशबू इतनी अच्छी लगी है क्या?
दीदी मुझे गाली देती हुई बोलीं- भोसड़ी के … लगता है तू मेरी चुत को सचिन से चुदवा ही देगा!
मैंने उनकी ब्रा उतार कर फेंक दी और बूब्स पीने लगा.
दीदी बोलीं- जरा ब्रा उठा कर देना.
मैं दे दी तो दीदी ब्रा को सूंघने लगीं.
वे बोलीं- यार रियली अच्छी खुशबू है. उसका लंड कितना बड़ा है?
तो मैंने कहा- दीदी नौ इंच का है, आपकी फट जाएगी!
दीदी बोलीं- इतना बड़ा … ना बाबा रहने दे … उसको हाथ से ही हिलाने दे.
मैं दीदी के एक दूध को काटते हुए बोला- दीदी, अगर छोटा होता तो?
वे बोलीं- तो फिर तो कुछ सोच सकती हूँ. जब तुझे और समीर को खुश कर दिया तो अपने भाई को भी कर दूँगी!
मैं बोला- दीदी चलो अब प्लान बना ही लेते हैं कि कैसे अपने गेम में सचिन को शामिल करें!
दीदी बोलीं- मैं उसके साथ अकेले में करूंगी … मुझे उसके साथ थ्रीसम नहीं करना है.
मैं उनकी सलवार पैंटी उतार कर चूत चाटते हुए बोला- दीदी ये मत भूलो कि मैंने ही आपको सचिन से … और सचिन को आप मिलवाने में मदद की है!
आपको याद है कि बचपन में आप जब हम दोनों को साथ में प्यार करती थीं, तो अब हमारा भी फर्ज बनता है कि हम दोनों साथ में आपको प्यार करें!
दीदी हंस कर बोलीं- साले तू बहुत बड़ा बहनचोद है हरामी … आह सही से चाट न!
मैं दीदी की चुत के दाने को होंठ से खींचता हुआ बोला- जब साथ में मैं और समीर करते थे, तब आपको दिक्कत नहीं हुई … तो अब सचिन का तो सिर्फ छह इंच का है!
‘अच्छा ठीक है बाबा … साथ में ही कर लेंगे! तुम दोनों मिल कर प्यार कर लेना पर पहले अभी अच्छे से चोद दो!’
मैंने दीदी की चूत चाटने के बाद लंड उनके मुँह में दे दिया.
उन्होंने मेरा पूरा पानी निकाल दिया और पी लिया.
उसके बाद वापस चाट कर लंड को चुत के लिए कड़क भी कर दिया.
फिर मैंने लौड़े पर कंडोम लगाया और दीदी की दोनों टांगों को कंधे पर रख कर एक तेज धक्के के साथ पूरा अन्दर डाल दिया.
दीदी कराहती हुई बोलीं- आह मादरचोद, बहन के लौड़े आराम से नहीं डाल सकता क्या?
मैं हंस दिया और धीरे धीरे उनको चोदता रहा.
फिर मैंने कहा- दीदी डॉगी स्टाइल में आओ ना!
वे कुतिया बन गईं.
फिर मैंने उनको कुतिया बना कर चोदना चालू किया और दस मिनट तक हचक कर चोदा.
उनका पानी निकल गया.
वे बोलीं- अब बस कर … मैं तेरा हाथ से या मुँह में लेकर निकाल देती हूँ.
मैं बोला- दीदी मैं तो यह चाह रहा था कि आपकी चूत जल्दी शांत हो, फिर आपकी गांड मारूं!
दीदी बोलीं- बड़े हरामी हो!
मैं बोला- प्लीज़ दीदी!
वे बोलीं- ओके.
वे फिर से कुतिया बन गई थीं.
उनकी गांड मेरे सामने बहुत प्यारी लग रही थी.
वैसे उनकी गांड पहले भी बहुत मार चुका था लेकिन फिर भी दीदी की गांड हर बार अलग मजा देती थी.
मैं उनकी गांड को सूंघ कर चाटने लगा.
वे बोलीं- छी: … तुझे हर बार गांड चाटने में क्या मजा आता है?
मैं बोला- दीदी आप नहीं समझोगी!
कुछ देर गांड चाटने के बाद उसमें थूक लगा कर मैंने धीरे धीरे लंड अन्दर डाल दिया और उनकी कमर पकड़ कर चोदने लगा.
उनको भी मजा आने लगा तो वे बोलीं- और तेज रफ्तार से अन्दर बाहर कर न आह … और तेज आह मजा आ गया.
फिर कुछ देर में मैंने उनको लेटने का बोल दिया.
कुछ ही झटकों में गांड में ही पानी छोड़ दिया और उनसे लिपट कर लेट गया.
तो दीदी बोलीं- सच्ची में यार, तुमसे चुद कर मजा आ जाता है.
फिर वे उठ कर कपड़े पहनने लगीं.
मैं बोला- दीदी, बताओ फिर सचिन से कब चुदवाना हैं आपको?
वे बोलीं- सोच कर बताती हूँ.
फिर वे बोलीं- यार मैं चाहती हूं कि पहले सचिन से मैं अकेले में करना चाहती हूँ, जिससे वह भी नर्वस फील ना करे.
मैं मुस्कुरा दिया.
मेरे दोस्तो, आप अपने कमेंट से या मेल से जरूर बताएं कि आपको Group Sex Stories कैसी लगी.
थैंक्यू.
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