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दोस्त की बीवी का सहारा बना - Antarvasna Sex Stories

मेरा नाम रोहित है, मै अहमदाबाद का रहने वाला हुं और यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त की बीवी रुचिता की है (नाम बदले हुए है) ।

यह कहानी आज से करीब 12 साल पहले की है और बिल्कुल सच्ची घटना है । इसमें शायद आपको दूसरी कहानियों जैसा भड़काऊपन न मिले और शुरू में शायद बोरिंग भी लगे, पर धीमी आंच पर पका हुआ खाना ज़्यादा स्वादिष्ट होता है वैसे ही कहानी के अंत तक आपको एक बेहतरीन अनुभव मीलेगा।

सौरव, जो मेरी बाजू की कॉलोनी में रहता है और मुझसे 5 साल बड़ा है, हम लोग जब पहली बार मिले तब मैं अपनी 12वीं कक्षा में था और वह अपने कॉलेज के आखिरी साल में था।

हम लोग नज़दीक में एक ग्राउंड पर क्रिकेट के दौरान मिले और हमारी दोस्ती दिन-ब-दिन गहरी होती गई। मेरा दोस्त पढ़ाई में कुछ ख़ास था नहीं और मैं पढ़ाई में काफ़ी तेज़ था, जिसके चलते उसके घर में मेरी काफ़ी इज़्ज़त होती थी।

उसका घर काफ़ी बड़ा था और जॉइंट फैमिली थी, जिसमें उसके माता-पिता, उसका बड़ा भाई-भाभी और वह रहते थे। हालांकि, मेरे उससे उम्र में छोटा होने और पढ़ाई में तेज़ होने की वज़ह से उसके घर में मुझे काफ़ी लाड़-प्यार मिलता था और यह था कि मैं कभी भी उसके घर आ-जा सकता था, मानो मैं उसी घर का सदस्य हूँ।

कुछ साल बाद सौरव की शादी हो गई और भाभी घर आ गईं। रुचिता भाभी के बारे में बताऊँ तो वह बहुत ही खूबसूरत थीं और काफ़ी अच्छे स्वभाव की भी थीं, रुचिता भाभी मुझसे सिर्फ 2 साल उम्र में बडी थी।

मेरा दोस्त पढ़ाई में कमज़ोर था तो वह अपने कॉलेज के आखिरी साल में फेल हो गया था और छोटी-मोटी नौकरी कर रहा था और भाभी ने मास्टर्स किया था और वह भी पढ़ाई में तेज़ थीं, तो मेरी और भाभी की अच्छी बनती थी। हम काफ़ी हँसी-मज़ाक करते पर वह एक मर्यादा में ही होता था और मैं हमेशा भाभी की रिस्पेक्ट करता था, कभी उनको ग़लत नज़र से नहीं देखा।

देखते-देखते उनकी शादी को 5 साल बीत गए, उनके घर एक बेटा भी हुआ। उसी बीच मेरे दोस्त के पिताजी का देहांत हो गया और कुछ फाइनेंशियल दिक्कतें धीरे-धीरे शुरू हो गईं और उनके किसी रिश्तेदार के कहने पर मेरे दोस्त ने दुबई में जाकर कुछ जॉब करने का प्लान बनाया।

हालांकि, भाभी को यह बात कुछ ख़ास पसंद नहीं थी क्योंकि उनको यहाँ अकेले रहना पड़ता। मैं भी उस वक़्त तक अपनी पढ़ाई ख़त्म करके जॉब करने लगा था, तो मेरा उनके घर जाना या तो रात के समय होता था या फिर छुट्टी के दिन।

आख़िरकार वह दिन भी आ गया जब सौरव दुबई के लिए 3 साल के लिए निकल गया और रुचिता भाभी अपने बेटे के साथ यहाँ अकेली रह गईं। हालांकि, घर पर सौरव के बड़े भाई-भाभी, उनके बच्चे और माताजी थे, जो भाभी और बेटे की देखभाल करते, पर अपने हमसफ़र का पास में न होना किसी भी व्यक्ति को अच्छा नहीं लगता।

देखते-देखते 4 महीने भी बीत गए। उस वक़्त मोबाइल फ़ोन में कैमरा तो थे, पर वीडियो कॉल नहीं होती थी और जिनको दुबई के बारे में पता हो, वहाँ कॉल दरें भी काफ़ी महंगी हैं, जिसके चलते सौरव और रुचिता की रोज़ बात करना भी पॉसिबल नहीं हो पाता था।

एक इतवार के दिन भाभी का कॉल आया तो मैं उनके घर उनसे मिलने गया। भाभी ने बताया कि वह पूरे दिन घर पर बोर हो जाती हैं, लेकिन बच्चे के चलते जॉब भी नहीं कर सकतीं। वह चाहती थीं कि कुछ आमदनी हो तो वह सौरव का हाथ बँटा सकें, तो मैंने उन्हें कुछ डाटा एंट्री वाला काम लाकर दिया जो वह घर से कर सकती थीं। और उनके घर में कंप्यूटर था तो ज़्यादा दिक़्क़त नहीं थी, लेकिन कंप्यूटर नीचे के कमरे में था जिससे भाभी को थोड़ी दिक़्क़त होती थी, तो हमने कंप्यूटर उनके कमरे में शिफ़्ट कर दिया।

भाभी के काम के चलते हफ़्ते में 2-3 बार मेरा उनके घर आना-जाना हो जाता था। कभी-कभी कुछ काम में दिक़्क़त हो तो मैं भाभी को हेल्प भी करता था। कभी-कभी कुछ काम बाक़ी हो तो मैं थोड़ा इंतज़ार करता और वह काम ख़त्म करके फ़ाइल दे देती थीं। काम के सिलसिले में मेरा धीरे-धीरे ऊपर भाभी के रूम में आना-जाना भी होने लगा, क्योंकि पहले घर में सबके होने के चलते मैं ऊपर उनके कमरे में, जब वह अकेली हों, तो काफ़ी कम ही जाता था।

जब सौरव यहाँ था तब हमने काफ़ी बार उनके कमरे में बैठकर बातें की थीं। भाभी भी अब अकेले में धीरे-धीरे मुझसे खुलने लगी थीं, मतलब जब मैं उनके कमरे में जाता तो वह सामान्य रहने लगी थीं। वह घर में साड़ी पहनती थीं पर अपने कमरे में पायजामा-सूट जैसा नाइट ड्रेस पहनती थीं और अब मैं जब उनके कमरे में जाता तो वह उन्हीं कपड़ों में मेरे सामने रहने लगी थीं। इधर मेरे घर में भी मेरी शादी की बातें चलने लगी थीं।

इसी बीच गूगल ने हैंगआउट में वीडियो पे बात करने वाली फैसिलिटी शुरू की, जो मैंने भाभी को बताया जिससे वह सौरव के साथ वीडियो पे बात कर सकती हैं, तो वह काफ़ी ख़ुश हो गईं और मैंने उनके कंप्यूटर में इंटरनेट भी लगवा दिया। और सौरव के साथ वह रोज़ वीडियो पे बात करने लगीं।

मैंने भी नोटिस किया कि भाभी कभी ख़ुश लगतीं, कभी दुखी। ख़ुश इसलिए कि वीडियो पे बात होती थी और दुखी इसलिए कि और कुछ नहीं होता था।

धीरे-धीरे शायद उनकी वीडियो कॉल प्राइवेट कॉल की तरह होने लगी थी और भाभी भी अपना अकेलापन काटने के लिए पॉर्न देखने लगी थीं, क्योंकि सौरव को गए हुए 6 महीने के क़रीब हो चुका था।

भाभी के पॉर्न साइट देखने के चलते उनके कंप्यूटर में कुछ ख़राबी आ गई (पॉर्न साइट वाली बात मुझे बाद में पता चली जब मैंने उनका कंप्यूटर ठीक किया तब), तो उन्होंने मुझे बताया। लेकिन दिक़्क़त यह थी कि मेरे पास उस वक़्त जॉब के चलते दिन में वक़्त निकालना काफ़ी मुश्किल हो जाता, तो मैंने उन्हें बाहर किसी इंजीनियर से बनवाने की बात की। तो उन्होंने यह बोलकर मना कर दिया कि उनके कंप्यूटर में उनकी, सौरव की और बच्चों की बहुत-सी फ़ोटो की फ़ाइलें हैं जो शायद डिलीट हो जाएँगी। और मुझे कंप्यूटर ठीक करना आता था तो उन्होंने मुझे ही ठीक करने पर ज़ोर दिया।

लेकिन टाइम के इशू को लेकर जब मैंने अपनी दिक़्क़त बताई और पूरा कंप्यूटर बैकअप लेकर फॉरमेट करने में कम-से-कम 4-6 घंटे तो लग ही जाएँगे, तो उन्होंने बड़े ही सहज भाव से कह दिया, "कोई बात नहीं, रात को इधर ही रुक जाना।"

उस रात कंप्यूटर ठीक करने में क़रीब-क़रीब रात के 3 बज गए और जब तक कंप्यूटर ठीक हुआ, भाभी भी साथ में जाग रही थीं और बातें कर रही थीं।

हालांकि हमारे बीच अभी भी मर्यादा की सीमाएँ थीं, पर भाभी उस रात काफ़ी खुलकर बात कर रही थीं। उन्होंने मुझसे शिक़ायत भी की कि सौरव के जाने के बाद मैं भी उनसे सिर्फ़ काम की बात करता हूँ।

उन्होंने मेरे घर पर शादी की बात के बारे में भी पूछा, मेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं, यह सब भी पूछती रहीं। हालांकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड उस वक़्त नहीं थी, जो मैंने उन्हें बताया।

फिर उन्होंने पूछा कि कैसी बीवी चाहिए, तो मैंने बताया कि आप की तरह सुंदर, सुशील भाभी आप सचमें बेहद खुबसुरत हो जिस बात से वह थोड़ी शर्मा गईं (और सच बताउ दोस्तो भाभी का फिगर जानवी कपूर जैसा था जीसे सारी मेंं देख कर कीसी का फी मन पिधल जाये।) भाभी ने बताया कि जब सौरव यहाँ होता था तब वे लोग हर हफ़्ते या तो किसी मॉल में घूमने जाते।

भाभी को मूवी देखना भी काफ़ी पसंद था, तो उन्होंने बताया कि सौरव के जाने के बाद वह मूवी देखने भी नहीं गईं। उस वक़्त थिएटर में 'अग्निपथ' मूवी चल रही थी, उसकी बात होने लगी। फिर उन्होंने बोला, "हाँ, मैंने भी सुना है मूवी काफ़ी अच्छी है, मुझे देखने जाना है," पर उनका अकेले मूवी जाने का मन नहीं था। तब मैंने भी मस्ती में बोल दिया, "चलो साथ में चलते हैं कुछ प्लान करके," और फिर मैं अपने काम में लग गया।

पर शायद भाभी ने इस बात को थोड़ा सीरियस ले लिया था, क्योंकि वह काफ़ी अकेला महसूस कर रही थीं। क्योंकि कंप्यूटर में वायरस आ गया था जिसके चलते मैंने उनका सारा डाटा अपनी एक हार्ड डिस्क पर बैकअप किया था। मैंने उस रात काफ़ी देर हो गई थी तो कंप्यूटर तो ठीक कर दिया पर उनका डाटा वापस रिस्टोर करना बाक़ी रह गया तो मैंने कहा कि वह अगली बार आऊँगा तब कर दूँगा और बात आई-गई हो गई।

दूसरे दिन मैं अपने घर पर अपने कंप्यूटर में काम के चलते वही हार्ड डिस्क कनेक्ट की तो उस हार्ड डिस्क से शायद वायरस मेरे कंप्यूटर के स्क्रीन पर भी आ गया, जो ब्राउज़र को सीधा किसी पॉर्न साइट पर कनेक्ट कर रहा था जिसमें बहुत सारी सेक्स वाली वीडियोज़ थीं। तो मैं उस वक़्त काफ़ी एक्साइटेड हो गया।

फिर मैंने सोचा भाभी ने ऐसा क्या किया जिससे यह सब हुआ। फिर उनके सारे बैकअप के फ़ोल्डर चेक किए तो उसमें उन्होंने बहुत सारी पॉर्न मूवीज़ डाउनलोड की हुई थीं, वह फ़ोल्डर मिला तो मैं वह देखने लगा और मैंने मूवीज़ देखते-देखते ही हाथ से अपना लंड हिलाया।

उस दिन मुझे बहुत मज़ा आया। फिर भाभी के बारे में सोचने लगा और बाक़ी के फ़ोल्डर भी खोले तो एक फ़ोल्डर में मुझे भाभी की कुछ बिना कपड़ों की पॉर्न एक्ट्रेस जैसी फ़ोटोज़ दिखीं जो उन्होंने शायद सौरव के लिए खींची थीं। भाभी का यह रूप देखकर मैं दंग रह गया।

भाभी बहुत ही हॉट थीं और उनके जिस्म को देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और पहली बार मैंने भाभी की फैंटेसी करके अपने लंड को हिलाया और अपने आप को शांत करने की कोशिश की।

उस रात मैंने 5 बार मुठ मारी, फिर भी मेरा लंड शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। जैसे-तैसे मैंने उस दिन काटा और शाम को भाभी को फ़ोन करके बताया कि मैं उनका डाटा कॉपी करने आ रहा हूँ, तो वह काफ़ी ख़ुश हो गईं। उस रात मैं जान-बूझकर घर से खाना खाके थोड़ा लेट गया जिससे घर के बाक़ी सदस्य अपने-अपने रूम में सोने के लिए चले जाएँ, और हुआ भी ऐसा ही।

जब मैं गया तो घर में सब अपने-अपने कमरे में चले गए थे और भाभी मेरा इंतज़ार कर रही थीं। उन्होंने मुझे बिना आवाज़ के उनके कमरे में आने का इशारा किया। जब कमरे में गया तो भाभी ने बताया कि वह मेरा ही इंतज़ार कर रही थीं।

उस वक़्त उन्होंने साड़ी पहन रखी थी तो मुझे थोड़ा अजीब लगा कि रात को भी साड़ी पहन रखी है। पर मुझे उन्होंने रूम में ले जाने के बाद कुछ चाय-ठंडे के लिए पूछा और वह उस वक़्त बेड पर अपने बेटे, जो बेड पर सोया था, उसको ठीक करने के लिए झुकीं तो मुझे उनके बूब्स के थोड़े से दिखाई दिए, तो मैं उनको देखते हुए बोल गया, "आज तो दूध पीने का मन है।"

तो वह मेरे सामने देखने लगीं और उन्होंने मुझे अपने बूब्स देखते हुए देख लिया तो मैं थोड़ा-सा झेंप गया कि मैंने क्या बोल दिया।

तो भाभी मेरी तरफ़ मुस्कुराकर बोलीं, "आजकल दूध पीने का बड़ा मन होने लगा है," और बोलीं, "ठीक है, थोड़ा सब्र रखो, मैं कुछ करती हूँ," और वह बाथरूम में चली गईं।

मैं अपने आप पर कंट्रोल किया और उनका डाटा वापस कॉपी पर रखने लगा तो पता नहीं क्यों मैंने वही भाभी के फ़ोटो वाला और पॉर्न मूवीज़ वाला फ़ोल्डर ओपन किया। मेरा लंड अंदर से फटने लगा, इतना टाइट हो गया था। तभी बाथरूम के दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई तो मैंने फटाफट सारे ओपन फ़ाइल जल्दी-जल्दी बंद करने लगा पर शायद भाभी ने मुझे पॉर्न मूवी वाली फ़ाइल बंद करते देख लिया था।

वो तभी मेरे बाज़ू में आकर खड़ी हो गईं और मुझे देखकर बोलीं, "इतना पसीना क्यों आ रहा है? क्या कर रहे थे?" तो मैं कुछ नहीं बोल पाया। तो वह बड़ी क़ातिल स्माइल देकर बोलीं, "कोई नहीं, फ्रेश हो जाओ, मैं तुम्हारे लिए दूध का बंदोबस्त करती हूँ," और वह किचन में जाने लगीं।

तब मैंने देखा कि भाभी ने आज मैक्सी पहनी थी जिसमें वह काफ़ी सेक्सी लग रही थीं। जैसे ही वह बाहर गईं, मैं फटाक से बाथरूम में घुस गया और अपने लंड की आग को शांत करने लगा। तभी मेरी नज़र भाभी के कपड़ों पर गई तो मैं उन्हें सूंघने लगा जिससे उनके बदन की मादक गंध आ रही थी।

तभी मेरी नज़र उनकी पैंटी पर गई, मैं उसे उठाकर देखने लगा तो दिखा कि वह बीच में से थोड़ी गीली थी और उस पर भाभी की चूत का पानी भी लगा था। मैं उसे चाट रहा था और अपना लंड हिला रहा था। मुझे वक़्त का पता ही नहीं चला, 10-15 मिनट बाद जब मेरा पानी निकला तब मैं अपने होश में आया और भाभी के कपड़े जैसे-तैसे रखकर बाहर आया।

देखा तो भाभी दरवाज़े के सामने बेड पर बैठी थीं। मुझे देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं, "क्या कर रहे थे? मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी," और भाभी ने डबल मीनिंग में बोला कि, "दूध का इंतज़ाम करके आई और तुम ग़ायब हो," और हँसते हुए उन्होंने मेरे लंड की तरफ़ देखा जो अभी भी पैंट के बाहर अपना पूरा उभार बनाए हुए था।

फिर भाभी ने मुझे दूध का बड़ा-सा ग्लास मेरे हाथ में देकर कहा, "पियो, जितना मन करे," और फिर वह अपना बेड बनाने लगीं और मैंने नोटिस किया कि भाभी ने नहाने के बाद मैक्सी में अंदर कुछ नहीं पहना था और मुझे इस बार उनके पूरे बूब्स पेट तक का हिस्सा दिख रहा था या भाभी जान-बूझकर मुझे दिखा रही थीं। मुझसे अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था।

मुझे लगा कि कहीं कुछ ग़लत न हो जाए, इसलिए मैंने भाभी से कहा कि मैंने डाटा कॉपी करने रखा है, रात में देर तक चलेगा तो मैं जाता हूँ, हार्ड डिस्क बाद में ले जाऊँगा।

तो उन्होंने मुझे रोकने के लिए कहा, "तो क्या हुआ? रात में इधर ही रुक जाओ।" तो मैं मना करने लगा तो वह थोड़ी-सी नाराज़गी जताते हुए कहा, "हाँ, मेरी तो किसी को पड़ी ही नहीं है। एक तुम्हारा दोस्त है जो 6 महीने से मुझे अकेला छोड़कर चला गया, तुम्हारे साथ वक़्त बिताकर अच्छा लग रहा था तो तुम भी मुझे छोड़कर जा रहे हो? क्या मैं इतनी बुरी हूँ?" तब मैंने जैसे-तैसे करके उन्हें मनाने की कोशिश की, "नहीं, आप बहुत अच्छी हो," तो वह पता नहीं क्यों मेरे गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगीं।

उनके गले लगने से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और भाभी को चुभने लगा और उन्होंने भी यह बात नोटिस कर ली। अब हालात यह थे कि आग दोनों तरफ़ लगी थी। भाभी को भी जब यह एहसास हुआ कि वह मुझसे लिपट गई थीं तो वह थोड़ी दूर हुईं क्योंकि हमारे बीच की मर्यादा अभी भी थी, पर मैंने भाभी का हाथ थामे हुए रखा और उन्हें शांत कराया। फिर वादा किया कि हम मूवी देखने चलेंगे संडे को, जिससे भाभी काफ़ी ख़ुश हो गईं। फिर मैं अपने घर आकर फिर से अपने लंड को हिलाकर शांत किया। और संडे का वेट करते-करते हफ़्ते के बचे हुए दिन जैसे-तैसे करके बिताए।

संडे के दिन सौरव के बड़े भाई-भाभी और उनके बच्चे कोई मंदिर जाने का प्लान बनाए थे, पर भाभी के पीरियड का चौथा दिन था तो उन्होंने मंदिर जाने से मना कर दिया, पर उनके बेटे ने ज़िद की तो वह उनके साथ चला गया था।

जब मैं उनके घर पर गया तो भाभी अकेली थीं। मुझे देखकर वह काफ़ी ख़ुश हुईं। उन्होंने मुझे बोला कि उनके रूम में जाकर मैं चेक कर लूँ कि सारा डाटा कॉपी हो गया है कि नहीं, तब तक वह तैयार हो जाएँगी, फिर मूवी चलेंगे। भाभी ने उस वक़्त एक बात पर दो बार ज़ोर देकर कहा कि मैं ख़ास चेक कर लूँ कि उनके सारे फ़ोटोज़ उनके बैकअप में आ गए हों, कुछ छूट नहीं जाए।

शायद वह चाह रही थीं कि मैं उनके प्राइवेट फ़ोटोज़ को देखूँ जो मैंने ऑलरेडी देखकर अपने कंप्यूटर में कॉपी कर लिए थे और उन्हें देखकर मैं अपने लंड को कई बार हिला चुका था पिछले एक सप्ताह में। जब मैं वह फ़ोल्डर चेक कर रहा था तब भाभी नहाने और तैयार होने के लिए बाथरूम में गईं तो मैं फिर से उनके न्यूड फ़ोटोज़ देखने लगा। फिर सोचा कि कहीं कुछ छेद मिल जाए तो भाभी को लाइव देखा जाए, इसीलिए उनके बाथरूम के पास जाकर छेद खोजने लगा पर कुछ मिला नहीं, पर अंदर शायद भाभी अपनी चूत में उँगली कर रही थीं।

उन्होंने अपनी आवाज़ को बहुत दबाकर रखा था पर शायद जब उनका पानी निकला तब उनके मुँह से आवाज़ आने लगी जो मुझे सुनाई दे गई। फिर मैं वहीं खड़ा उन्हें सुनने की कोशिश करने लगा और अपने लंड को भाभी के बारे में सोचकर वहीं हिलाने लगा। फिर जब शावर के पानी की आवाज़ बंद हो गई तो मैं अपने आप को रोकना चाहा, पर आप लोग जानते हो कि ऐसे हालात में अपने आपको रोकना कितना मुश्किल होता है।

तभी भाभी अपने कपड़े पहनकर दरवाज़ा खोला तो मैंने जैसे-तैसे करके अपने लंड को अंदर किया लेकिन पैंट की ज़िप बंद नहीं कर पाया था और लंड पैंट के ऊपर से पूरा उभार बना रहा था और साइड से थोड़ा दिख भी रहा था। भाभी मुझे दरवाज़े पर देखकर शॉक्ड हो गईं, तभी उनकी नज़र मेरे लंड पर गई।

मुझे पूछा, "यहाँ क्या कर रहे हो?" तो मैंने झूठ बोल दिया कि मुझे बाथरूम जाना है और मैं फटाक से बाथरूम में घुस गया पर दरवाज़ा बंद करते वक़्त मैंने देखा कि भाभी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं। तो मैंने दरवाज़ा तो बंद किया पर चिटकनी नहीं लगाई और टॉयलेट के सामने खड़े होकर अपने आप को शांत करने लगा।

पता नहीं कब हवा से दरवाज़ा खुल गया होगा और भाभी ने मुझे देख लिया पर कुछ बोला नहीं और वह कंप्यूटर की तरफ़ गईं। तभी मैं बाहर आते हुए याद आया कि मैं भाभी के न्यूड फ़ोटो देख रहा था, वह तो खुला ही छूट गया है, पर लकीली कंप्यूटर का स्क्रीन सेवर ऑन हो गया था, तो मैं फटाफट भाभी से कहा, "आप तैयार हो जाओ, मैं कंप्यूटर बंद कर देता हूँ," और मैंने फटाफट कंप्यूटर की मेन स्विच ऑफ़ करके नीचे हॉल में चला गया।

उस दिन भाभी ने जीन्स और आगे बटन वाला टॉप पहना था। भाभी गज़ब की माल लग रही थीं। जब वह तैयार होकर नीचे हॉल में आईं तो उन्हें देखकर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। मैंने भाभी की तारीफ़ की और कहा, "भाभी, आज तो थिएटर हॉल में आपकी क़ातिल अदाओं से पता नहीं कितनी लाशें गिरने वाली हैं," जो सुनकर भाभी ब्लश करते हुए मुझे चपत लगाई और कहा, "अच्छा! पहले तो देखते भी नहीं थे मेरी तरफ़, आज मक्खन लगा रहे हो, क्या बात है!" और ऐसे ही हँसी-मज़ाक करते हुए हम निकल गए।

भाभी भी बाइक पर मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड की तरह नज़दीक होकर बैठी थीं और मस्ती कर रही थीं। लोग भी हमें देख रहे थे कि जैसे हम गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड हों, तो मैंने मस्ती में भाभी को कहा कि, "आप मस्ती कर रही हैं, लोग शायद आपको मेरी गर्लफ्रेंड समझके हमें देख रहे हैं," तो उन्होंने भी मस्ती में कह दिया कि, "हाँ तो क्या फ़र्क़ पड़ता है? तुम भी मज़े करो, वैसे भी तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं है," और भाभी मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मेरे और क़रीब आ गईं जिससे उनके बूब्स मेरी पीठ पर महसूस होने लगे।

फिर हम थिएटर पहुँचे, मूवी शुरू हुई। भाभी मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर बैठी थीं। भाभी काफ़ी दिनों बाद मूवी देखने आईं थीं, इसीलिए वह काफ़ी ख़ुश भी थीं। तभी फ़िल्म में कैटरीना कैफ़ का गाना 'चिकनी चमेली' आता है तो मैं थोड़ा-सा सीधा होकर बैठ जाता हूँ और बड़ी चाह से गाना एन्जॉय करने लगता हूँ और साथ में थोड़ा-सा गुनगुनाता भी हूँ।

तब भाभी मुझे पूछती हैं, "ऐसी क्या बात है? गाना आते ही बड़े ख़ुश हो गए।" तो मैंने बताया कि मुझे यह गाना अच्छा लगता है। तब भाभी पहले मेरे पैंट में तने हुए लोड़े की तरफ़ देखती हैं, फिर मेरी ओर क़ातिल निगाहों से देखती हैं और बोलती हैं, "हाँ, वह तो दिख रहा है।"

तो मैंने बात टालने के लिए बोला, "नहीं, सच में गाना अच्छा है।" तब भाभी ने जो बोला वह मेरी उम्मीद से बाहर था। भाभी ने बोला, “हाँ, जब हीरोइन इतना डीप कट ब्लाउज़ पहनकर झुककर अपने बूब्स की नुमाइश करेगी तो मर्दों को तो पसंद आएगा ही।

जब लड़की अपने बूब्स दिखाती है तब सबके मुँह में पानी आ जाता है।” भाभी के मुँह से बूब्स और इतनी बोल्ड बात की उम्मीद मुझे नहीं थी, तो मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया, जिसके बाद भाभी मेरे गालों पर हल्की-सी चपत लगाते हुए बोलती हैं, "अपना मुँह बंद करो, नहीं तो सारा पानी यहीं गिर जाएगा, फिर क्या करोगे।" यहाँ भाभी डबल मीनिंग बात बोलके मुझे एक और झटका दे दिया।

जैसे ही मूवी ख़त्म हुई, भाभी ने कहा, "अब चलो सीधे घर चलते हैं," तो मैंने बाइक सीधे घर की तरफ़ ले ली। इस बार भाभी बाइक पर मुझसे और भी ज़्यादा चिपककर बैठी थीं जिससे मेरे लंड की हालत टाइट हो रही थी, मानो लंड फट जाएगा। घर जाते ही भाभी ने मुझसे कहा, "तुम बैठो, मैं चेंज करके आती हूँ, फिर कुछ करते हैं।"

यहाँ पर भी भाभी 'खाने' शब्द का इस्तेमाल जान-बूझकर नहीं किया। तो मैंने पूछा, "क्या करते हैं?" तो उन्होंने मेरी तरफ़ बड़ी आस भरी निगाहों से देखा, फिर क़ातिल स्माइल देकर बात को बदलते हुए कहा कि, "खाने का बोल रही हूँ, और क्या करना है तुम्हें…" और मेरी तरफ़ मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चली गईं।

इस बार भाभी ने अपने कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला छोड़ा था। मैं कशमकश में था कि क्या करूँ। भाभी शायद चाहती हैं कि मैं ऊपर उनके कमरे में जाऊँ या यह मेरे मन का वहम है। और अगर बात आगे बढ़ गई तो क्या होगा या शायद भाभी नाराज़ हो जाएँगी। मैं इसी उधेड़बुन में वहीं जम-सा गया। फिर थोड़ी देर बाद जब हिम्मत करके मैंने सोचा एक बार दरवाज़े तक जाकर देख लूँ, अगर उन्होंने देख लिया तो बोल दूँगा कि बाथरूम के लिए आया था।

तभी भाभी दरवाज़े से बाहर आईं। भाभी ने मैक्सी पहन रखी थी और मुझे देखकर बोलीं, "जाओ, फटाफट फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं कुछ खाने-पीने का तैयार करती हूँ।" तो मैं भाभी के बाथरूम में चला गया। वहाँ जाकर मैंने देखा कि भाभी की ब्रा और पैंटी वहाँ लटक रही थी जिसमें से भाभी के जिस्म की बेहद मादक गंध मुझे मदहोश कर रही थी। मैं

अपना सब्र खो चुका था तो मैंने उसे लेकर मुठ मारना शुरू कर दिया और भाभी की पैंटी के बीच में उनकी चूत का कामरस लगा हुआ था, जिसे मैं भाभी की चूत की फैंटेसी कर, उनका नाम ले-ले के चाट रहा था। जब 10-15 मिनट के बाद मैं हल्का हुआ तो मुझे ख़याल आया कि बाथरूम का दरवाज़ा तो मैंने पूरा बंद किया ही नहीं था, पर देखा कि रूम में कोई नहीं है तो मुझे लगा अच्छा हुआ, नहीं तो मैं पकड़ा जाता।

तभी भाभी दरवाज़े पर आईं और मुझे बोला, "चलो नीचे।" मैं उनके पीछे-पीछे चल रहा था। मुझे लगा कि शायद भाभी ने मैक्सी के नीचे ब्रा-पैंटी नहीं पहनी पर पक्का नहीं हो रहा था। नीचे आके भाभी ने मुझे सोफ़े पर बैठने को बोला और वह किचन में चली गईं और वहाँ से मेरे लिए ग्लास भरकर फ्लेवर्ड वाला दूध लेकर आईं। और जब वह देने के लिए मेरे सामने झुकीं तब मेरी नज़र उनके बूब्स पर गई।

तब मैंने देखा कि उनके मैक्सी के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे और भाभी ने अंदर कुछ नहीं पहना था। मुझे उनके पूरे बूब्स दिखाई दे रहे थे जिससे मेरा मुँह फिर से खुला रह गया। भाभी भी वहीं उसी पोज़ में थोड़ी देर खड़ी रहीं जैसे मुझे जान-बूझकर अपने बूब्स दिखा रही हों। फिर मेरी नज़र भाभी के चेहरे पर गई तो भाभी मेरी ही तरफ़ देख रही थीं तो मैं झेंप गया।

तभी भाभी ने फिर से डबल मीनिंग में कहा, "क्या हुआ? दूध पियो, तुम्हारे लिए ही है।" तो मैं उनकी तरफ़ देखने लगा तो बोलीं, "काफ़ी थक गए होगे, इसीलिए दूध पिला रही हूँ।" फिर भाभी मेरे सामने की चेयर पर बैठ गईं और मैं दूध पीने लगा, जो ग्लास में था। दूध ख़त्म करके मुझे लगा अब मुझे जाना चाहिए, तभी भाभी ने मुझे याद दिलाया कि मेरी हार्ड डिस्क ऊपर उनके कमरे में रखी है।

तब हम दोनों बातें करते हुए ऊपर गए। भाभी बार-बार मुझे धन्यवाद कर रही थीं कि मेरी वज़ह से आज इतने दिनों बाद वह आज का दिन एन्जॉय कर पाईं, नहीं तो सौरव तो उन्हें अकेला छोड़कर चला गया और वह शिक़ायत करने लगीं कि सौरव को उनकी पड़ी ही नहीं है वगैरह।

और उस वक़्त भाभी की आँख से आँसू आ गए। मुझसे भाभी की यह हालत देखी नहीं जा रही थी तो मैं उनके क़रीब गया और उनके गाल पर हाथ लगाकर उनके आँसू पोंछने लगा और उन्हें शांत करने लगा कि कोई नहीं, सब ठीक हो जाएगा।

तब भाभी मेरे गले से लगकर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगीं। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ तो मैं भाभी की पीठ और उनके सिर पर हाथ फेरके उन्हें चुप करा रहा था। भाभी काफ़ी देर मुझसे चिपककर रोती रहीं और मैं उन्हें दिलासा देकर शांत कराता रहा। धीरे-धीरे भाभी शांत होने लगीं और वह मेरी पीठ पर अपने हाथ फिराने लगीं तो मैंने भी उनका साथ देते हुए उनकी पीठ पर हाथ फिराने लगा तो भाभी मुझसे और ज़ोर से चिपक गईं, मानो मुझे अपने अंदर भर लेना चाहती हों। मुझे उनके जिस्म की गरमी महसूस हो रही थी।

उनकी साँसें भी अब भारी होने लगी थीं, उसकी गर्माहट मैं महसूस कर रहा था। तभी मैंने भाभी का चेहरा अपने दोनों हाथ में लिया। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। उनकी आँखों में मैंने बहुत सारे भाव देखे जिसे शब्दों में बयां करना शायद मुश्किल हो।

हम लोग एक ऐसे लम्हे पर खड़े थे जहाँ से आगे कुछ भी हो सकता था। उनकी आँख में मैंने तड़प देखी, अकेलेपन का दर्द देखा, मेरे उनको सहारा देने के लिए समर्पण का भाव भी देखा। मन कर रहा था उनके तड़पते, थरथराते हुए होंठ चूम लूँ, शायद भाभी भी यही चाह रही थीं, पर मुझे उससे भी ज़्यादा कुछ और ज़रूरी लगा।

मैंने उनके माथे को चूम लिया तो भाभी ने अपनी दोनों आँखें बंद कर लीं। जब मैंने उनके चेहरे पर देखा, उनकी दोनों आँख से आँसू टपक रहे थे तो मैंने उनकी आँखों पर चूमा और उनके आँसू अपने हाथ से पोंछकर उनके गाल से अपना गाल लगाया।

हम दोनों की साँसें काफ़ी गर्म हो रही थीं जो हम दोनों महसूस करने लगे थे। मैंने भाभी के गालों पर हल्के-से अपने होंठ लगाए तो फिर से भाभी की आँख से आँसू आने लगे और अब भाभी ने पहल करके अपने थरथराते हुए होंठ मेरे होंठ के क़रीब लाईं और फिर हम उस लम्हे में खो गए। हमें नहीं पता हम कितनी देर तक एक-दूसरे के होठों का रस पी रहे थे।

हमें कमरे में आए हुए क़रीब-क़रीब 1 घंटे से ज़्यादा हो गया था। हम दोनों कब एक-दूसरे को चूमते-चूमते बिस्तर पर आ गए, हमें पता ही नहीं चला। अब आलम यह था कि बस एक-दूसरे में ही खो जाना था। मैं धीरे-धीरे उनके होठों से चूमते-चूमते उनके गालों पर, उनके कपाल पर, उनकी आँखों पर, उनके नाक पर, उनके कानों पर चूम रहा था और हमारे हाथ एक-दूसरे के जिस्म को टटोल रहे थे।

धीरे-धीरे जब मैं उनकी गर्दन पर किस करने लगा तो भाभी ने मुझे एकदम से अपने सीने से चिपका लिया और वह मेरे कानों पर किस कर रही थीं। मैं उनकी गर्दन पर था। भाभी ने मेरा सिर पकड़कर अपने सीने से चिपका लिया। मैं उनके दिल की धड़कन को महसूस कर रहा था।

हम दोनों के दिल राजधानी की रफ़्तार से धड़क रहे थे। मैंने महसूस किया कि भाभी के दोनों निप्पल काफ़ी कड़क हो चुके थे। तब मैंने उन्हें मैक्सी के ऊपर से ही थोड़ा-सा अपने दोनों होठों के बीच दबाया। हमने अभी तक कपड़े नहीं उतारे थे, पर भाभी के मैक्सी के ऊपर के दो बटन, जैसा कि मैंने पहले बताया कि खुले थे, तो मैं फिर से उनकी गर्दन पर किस करते-करते उनकी दोनों घाटियों के बीच चूमने लगा और भाभी का एक हाथ मेरे बालों में था, एक हाथ मेरी पीठ पर और भाभी मुझे बेतहाशा चूम रही थीं।

अब हम एक-दूसरे के जिस्म टटोलने लगे थे। मैंने उनके मैक्सी को नीचे खींचके उनके निप्पल तक जाने की कोशिश कर रहा था। मैंने उनकी आँखों में देखा तो भाभी ने ही अपने बचे हुए बटन खोल दिए। अब मैं बेतहाशा उनके दोनों बूब्स बारी-बारी चूस रहा था और मेरा हाथ उनके पूरे जिस्म पर फेर रहा था। भाभी बिस्तर पर मेरे नीचे थीं और मैं उनके ऊपर था और मैं उनके दोनों पैरों के बीच में था।

भाभी ने अपनी दोनों टाँगें उठाकर मुझे कमर के ऊपर से पकड़ लिया जिससे मेरे पैंट में बना उभार उनकी चूत के ऊपर आ गया। भाभी मेरे उभार पर दबाव बना रही थीं, जैसे मुझे अपने अंदर समा लेना चाहती हों और मेरा लंड पैंट में फट रहा था। एक वक़्त पर जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने अपना हाथ अपने लंड पर ले जाने के लिए नीचे ले गया तब मुझे एहसास हुआ कि भाभी की मैक्सी उनकी कमर तक आ चुकी थी और मैं अपना लंड सेट करूँ उससे पहले मेरे हाथ उनकी चूत पर चले गए। मुझे उनकी गरम-गरम और गीली चूत महसूस हुई। मैंने धीरे से अपनी ज़िप और जीन्स के बटन खोल दिए। भाभी मेरी कमर पर अपने पैर रगड़ रही थीं जिससे मेरा लंड बाहर आ गया और एक वक़्त ऐसा आया जब मेरा लंड भाभी की गर्म चूत को छू गया। हम दोनों को मानो उस वक़्त 440 वोल्ट का झटका लगा। भाभी ने जैसे ही लंड को अपनी चूत पर महसूस किया, उन्होंने अपने पैर फैलाकर फिर से दबाए और मैंने भी हल्का झटका दिया तो मेरा लंड थोड़ा-सा भाभी की चूत में समा गया और उसी वक़्त भाभी जो इतने दिनों से तड़प रही थीं, उनकी चूत ने मेरे लंड पर अपना पानी उड़ेल दिया। पर मैं अपने धक्के लगा रहा था। अब मेरा 7 इंच का लंड भाभी की गर्म चूत में पूरा समा चुका था और भाभी के चेहरे पर जो ख़ुशी और सुकून मैंने देखा, वह देखते ही बनता था। भाभी के मुँह से चीख़ें निकल रही थीं और आँख से पानी जो उनके ख़ुशी और संतुष्टि से बह रहे थे। मेरा भी किसी औरत के साथ यह पहला अनुभव था और थोड़ी देर में मैं भी झड़ने को हुआ तो मैंने अपना लंड बाहर निकालने के लिए कोशिश की तो भाभी ने अपने दोनों पैरों से मुझे दबाकर मेरा लंड वापस अपनी चूत में समा लिया। मैंने उनके चेहरे की तरफ़ देखा तो उन्होंने अपनी आँख और चेहरे के भाव से जताया कि मैं अपना लंड बाहर न निकालूँ और भाभी भी मेरा लंड अपनी चूत में खींचने लगीं। आप लोगों को शायद पता हो कि जब औरत अपनी कमर हिलाते हुए जब अपनी चूत के मसल्स से लंड को अंदर खींचती है तो उस वक़्त लंड पर दबाव से कैसा महसूस होता है और मैं अपने पहले ही संभोग में वह महसूस कर रहा था और मेरे लंड ने अपना लावा उगल दिया। जैसे ही मेरा गर्म वीर्य भाभी की चूत में गया, भाभी एक और बार तेज़ से झड़ गईं। हम दोनों ने साथ ही अपनी चरम सीमा को महसूस किया। मैं थककर भाभी के ऊपर सो गया तो भाभी ने मुझे अपने सीने से चिपका लिया और मुझे बेतहाशा चूमने लगीं, मानो मेरा शुक्रिया कर रही हों। हम दोनों ऐसे ही आधे घंटे तक एक-दूसरे से चिपककर पड़े रहे। हम दोनों अब तक पूर्ण रूप से न तो नग्न हुए थे, न ही हम दोनों के मुँह से एक भी शब्द निकला था, बस हम एक-दूसरे को महसूस कर रहे थे। उसके बाद हम दोनों अलग हुए। मैं बेड पर बैठा तो भाभी मुझे पीछे से चिपक गईं और मेरी गर्दन पर किस करने लगीं।

आगे की कहानी अगले भाग में…


तो दोस्तो, जैसे आपने कहानीके पहले पार्ट में कहानी में पढ़ा कि मेरे और रुचिता भाभी के बीच में बिना एक शब्द बोले सब कुछ हो चुका था। अब मैं बिस्तर पर बैठा था और भाभी मुझसे पीछे से चिपक गईं और मेरी गर्दन पे किस करते वक्त धीरे से उन्होंने अपने होंठ मेरे कान के पास ले जाकर जो पहला शब्द उनके मुँह से निकला, मैं कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा, “रोहित, मैं बाहर से कितनी ही खुश रहने की कोशिश करूँ, दिन निकल जाता है पर रात नहीं कटती थी। आज अगर तुम नहीं होते तो मैं तड़प कर मर जाती। मैं तुम्हारी शुक्रगुज़ार हूँ। तुम्हें पता नहीं, आज तुमने मेरे लिए जो किया है, मैं उसे कभी नहीं भूल सकती।” जब मैंने उनकी तरफ देखा तो सच में उनकी आँख में आँसू थे। उनके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था। फिर हम दोनों ने बढ़िया सा हग किया। फिर मैंने माहौल को हल्का बनाने के लिए कहा, “भाभी, अब कुछ खाना खाया जाए?” तो भाभी ने बोला, “तुम रुको, मैं तैयार हो जाती हूँ।”

भाभी ने उस वक्त अपनी मैक्सी मेरे सामने ही उतार कर फेंकी और पहली बार मैंने भाभी को पूर्ण रूप से नग्न देखा। मैं शब्दों में बता नहीं सकता, वह उस वक्त इतनी खूबसूरत लग रही थीं, मानो संगमरमर की मूरत हों जिसे बहुत खूबसूरती से तराशा गया हो; दूध सा सफेद बदन, मक्खन सा मुलायम बदन, सुडौल उरोज, बेहद कमनीय कमर। भाभी की खूबसूरती ने मुझे मदहोश बना दिया था।

मैं बिस्तर पर अपने पैर ज़मीन पर लटकाए हुए बैठा था। मैंने उनका हाथ धीरे से पकड़ कर अपने आगोश में भर लिया, तो भाभी ने भी मुझे अपने सीने से चिपका लिया। मेरा सर उनके दो उरोजों से चिपका हुआ था। भाभी एक हाथ से अपना हाथ मेरे बालों में फिरा रही थीं और एक हाथ मेरी पीठ पर था। उस बेहद प्यार भरे लम्हे के एहसास को याद करते हुए आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

फिर मुझे मस्ती सूझी तो मैं भाभी के बेहद रसीले निप्पल को चूसने लगा और हल्का सा काट लिया, तो भाभी मुझे हल्का सा धक्का देकर बोलीं, “शैतान!” और वह नहाने चली गईं। मैं पीछे भाग कर गया लेकिन भाभी ने मुझसे बचने के लिए दरवाज़ा बंद कर लिया।

जब भाभी नहाकर बाहर आईं तो उनके बदन पर सिर्फ टॉवल था। मैंने उनके करीब जाने की कोशिश की तो भाभी ने मुझे धक्का देकर कहा, “नहीं करो रोहित,” और मुझे बाहर जाने को बोल दिया। मैं उनके इस व्यवहार से थोड़ा अजीब तो लगा, लेकिन जब मैं दरवाज़े के पास पहुँचा तो भाभी ने दरवाज़ा बंद करने से पहले मेरे सामने अपना टॉवल खोलकर अपने हुस्न का दीदार कराया, फिर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। हकीकत में भाभी मुझे जान-बूझकर तड़पा रही थीं ताकि हमारा अगला मिलन और शानदार हो।

करीब आधे घंटे बाद भाभी तैयार होकर आईं। उन्होंने जीन्स और टाइट टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से उनके उभार उफान मार कर बाहर आने को तड़प रहे थे। और मैं भी फ्रेश हो गया।

फिर हम लोग मेरी बाइक पे एक रेस्टोरेंट के लिए निकल गए। रास्ते में भाभी बाइक पर मुझे बिल्कुल टाइट पकड़कर बैठी थीं कि हमारे बीच से हवा भी न निकल पाए। हमने खाना खाया और जब वापस आ रहे थे तब भी भाभी ऐसे ही बैठी थीं, लेकिन अब भाभी पूरी मस्ती के मूड में आ चुकी थीं।

वह बगैर स्पीड ब्रेकर के भी मुझे बार-बार मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबा रही थीं और जब थोड़ी सुनसान सड़क आई तो उन्होंने पैंट के ऊपर से तंबू बने हुए मेरे लंड को पकड़ कर बार-बार दबाने लगीं और मेरे कान पे हल्का सा काट लिया, मानो आज तो वह मुझे खा ही जाने वाली थीं।

हम जैसे ही घर पहुँचे, भाभी फटाफट अपने कमरे में जाने के लिए सीढ़ियाँ चढ़ने लगीं। मैं दरवाज़ा बंद कर रहा था तो भाभी ने अपने होंठ काटते हुए मुझे ऊपर आने का इशारा किया। जब मैं ऊपर गया तो भाभी बाथरूम में चली गई थीं और 5 मिनट में चेंज करके बाहर आईं। तब उनको देख कर मानो मुझ पर बिजली गिर गई।

भाभी एक रेड और ब्लैक कलर की आगे से खुलने वाली लॉन्जरी पहन कर आई थीं। उनके ब्रा और पैंटी का हिस्सा जालीदार था जिसमें से रुचिता भाभी का कातिलाना जिस्म बाहर आने को तड़प रहा था। भाभी मानो मुझ पर कहर बरसा रही थीं। यह उनका प्लान था, इसीलिए भाभी ने जाने से पहले मुझे बाहर भेजा था और तैयार होकर अपनी वह लॉन्जरी बाथरूम में रख कर आई थीं और पूरे रास्ते मुझे तड़पा रही थीं।

भाभी मेरे सामने आईं। जैसे ही मैं उन्हें पकड़ने के लिए आगे बढ़ा, वह मछली की तरह मेरे हाथ से फिसल कर थोड़ी दूर चली गईं और मुझे देख कर हँसते हुए म्यूजिक सिस्टम पर हल्का सा लाउंज म्यूजिक लगा दिया जो वह पहले से ही सेट करके गई थीं।

अब मेरे सामने शर्मीली रुचिता भाभी की जगह एक बेहद खूबसूरत, चंचल, अल्हड़, इरॉटिक लड़की ने ले ली थी, मानो आज रुचिता अपने सारे अरमान पूरे करना चाहती थी। वह ऐसे बर्ताव कर रही थी मानो हमारी नई-नई शादी हुई हो और हम हनीमून पर आए हों।

वह म्यूजिक के साथ हल्का सा डांस मूव करते हुए मुझे सिड्यूस कर रही थी। अब मैं खड़ा होकर उसके करीब गया और कहा, “भाभी,” तो उसने मेरे होंठ पर उंगली रख कर आँखों से ना का इशारा किया और अपनी कमर मटकाते हुए कहा, “सिर्फ रुचिता।” तब मैंने उसकी उंगली पर किस करके कहा, “जो हुक्म मेरी जान... रुचिता,” जिससे वह खुश होकर उसने मेरे गले में अपने हाथों का हार बना दिया, जिस पर मैंने भी उसका साथ देते हुए उसकी कमर पकड़ ली और हम दोनों म्यूजिक पर अपना बदन थिरकाने लगे।

धीरे-धीरे हम डांस कम कर रहे थे और एक-दूसरे के जिस्म से ज़्यादा खेल रहे थे। डांस करते-करते मैंने उसकी लॉन्जरी को उसके बदन से अलग कर दिया। वह अब ब्रा और पैंटी में थी। रुचिता ने भी मेरी टी-शर्ट को मेरे बदन से अलग कर दिया था।

एक वक्त पर हम दोनों के होंठ एक-दूसरे से चिपक गए और किस करते-करते भाभी ने मुझे बिस्तर पर धक्का दिया। अब मैं नीचे था और रुचिता मेरे ऊपर थी। मैं उसकी पीठ और उसके नितंब को सहला रहा था। हमारे होंठ एक-दूसरे के होठों से चिपके हुए थे। हम पागलों की तरह किस कर रहे थे।

रुचिता किस करते-करते मेरी छाती को सहला रही थी। धीरे-धीरे हमारा जोश बढ़ने लगा। भाभी अब मेरी छाती पर किस करने लगीं और किस करते-करते वह मेरी छाती पर हल्का-हल्का काटने लगीं जिससे मेरा जोश भी बढ़ रहा था। अब मैंने झटका देकर रुचिता को अपने नीचे ले आया।

अब वह मेरे नीचे और मैं उसके ऊपर था। मैंने उसके होंठ, उसकी गर्दन से होते हुए उसके उरोज की घाटियों को चूस रहा था। अब रुचिता मेरे सर को अपनी छाती पर दबा रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। अब रुचिता थोड़ा सा ऊपर होकर खुद ही अपनी ब्रा को उतार दिया।

अब हम दोनों ऊपर से नग्न थे। ब्रा से आज़ाद होते ही उसके बूब्स देख कर मानो मैं पागल हो गया, तो रुचिता ने भी मेरा जोश बढ़ाते हुए अपना निप्पल मेरे मुँह में देते हुए कहा, “चूस लो जितनी मर्ज़ी हो।” और वाकई में उसके पसीने और इत्र की मिली हुई खुशबू जो उसके जिस्म से आ रही थी, मानो पूरे जीवन बस उसको ही चूमते रहने का मन कर रहा था। मैंने उसके ऊपरी हिस्से पर पता नहीं, मैंने न जाने कितने अनगिनत किस किए होंगे।

अब मैंने रुचिता को उलटा लेटा कर उसकी नग्न पीठ पर किस कर रहा था, जो उसके नितंब के ऊपरी हिस्से से लेकर उसकी गर्दन तक और पीछे से उसके कान के आस-पास अपने होंठ रगड़ते हुए उसे उत्तेजित कर रहा था और अपने दोनों हाथों से उसके मखमली बूब्स को दबा रहा था।

जब आप किसी औरत की नग्न पीठ पर इस तरह से प्यार बरसाते हो तो वह पागल हो जाती है। इस बीच मैं अपने लंड से उसके शरीर के निचले हिस्से की भी मसाज कर रहा था। जब रुचिता मेरे उसके कान, गाल और गर्दन पर किए जा रहे मदहोशी भरे किस से बेकाबू हो गई तो मौका देखकर सीधी हो गई। इस बार मैं उसके होंठ, उसके क्लीवेज से होते हुए उसकी नाभि पर किस करने लगा और धीरे से उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया। मैंने देखा, उसकी पूरी पैंटी गीली हो चुकी है।

मैंने उसकी जालीदार पैंटी के ऊपर से ही चूत को अपने दोनों होठों के बीच दबाने लगा। जब मैंने उसकी पैंटी की साइड में अपनी उंगली डाली तो रुचिता ने अपनी कमर उचकाते हुए उसे निकालने में मेरी मदद की। अब मैं रुचिता की क्लीन शेव्ड चूत देख कर पागल होने लगा।

जब मैंने उसकी चूत की महक को सूंघने के लिए अपने नाक को चूत में घुसाया, फिर धीरे-धीरे उसकी चूत पर अपनी ज़ुबान से जादू दिखाने लगा। रुचिता अब मछली की तरह तड़प रही थी और मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी और आहें भरते-भरते बोल रही थी, “खा जाओ मेरी चूत को रोहित, I Love you.” रुचिता की चूत ने 2 ही मिनट में अपना पानी छोड़ दिया। और उसका इतना ज़्यादा पानी निकला था कि मानो 4 महीने का बचाया हुआ पानी एक साथ बाढ़ की तरह बह कर बाहर आया हो।

अब रुचिता मेरी तरफ आस भरी निगाहों से देख रही थी तो मैंने उसे स्माइल दी, तो वह मेरे ऊपर आ गई। इस बार वह मानो जल्दी में हो, उसने फटाफट मेरे जीन्स और अंडरवियर को एक साथ ही निकाल दिया और मानो मेरे लंड पर टूट पड़ी।

उसके मुँह में मेरा लंड था जो वह लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। साथ ही उसकी उंगलियाँ मेरे बॉल्स पर जिस तरह से घुमा रही थी, मुझे लगा मैं ज़्यादा देर टिक नहीं पाऊँगा। वह और थोड़ी ही देर में मेरा होने वाला था। मैंने उनकी तरफ देख कर कहा कि मेरा होने वाला है, तो वह और ज़्यादा ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और मेरे वीर्य से उनका पूरा मुँह भर गया जो वह गटक गईं और मेरी तरफ देख कर आँख मारकर बोलीं, “क्या रोहित, इतनी अच्छी मलाई रबड़ी थी तो अब तक अपनी भाभी को टेस्ट तक नहीं करवाई। मैं इधर तड़प रही थी और तुम इसे मेरी पैंटी से खेलके वेस्ट कर रहे थे।” जिसे सुनकर मैं थोड़ा शॉक्ड हुआ। तब उन्होंने बताया कि वह मुझे उनकी पैंटी सूंघकर मुठ मारते हुए देख लिया था।

लेकिन अब भी रुचिता ने मेरा लंड चूसना नहीं छोड़ा था और फिर से लंड अपनी पूरी औकात पर था। इस बार रुचिता ने मेरे ऊपर आकर पोजीशन ली और मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर सेट किया और धक्के लगाने लगी। मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे।

एक वक्त पर मैंने उसे खींच कर अपने सीने से चिपका लिया। ऊपर हम किस कर रहे थे और नीचे चूत और लंड के बीच घमासान युद्ध छिड़ा हुआ था। और सच बताता हूँ दोस्तों, जब औरत अपनी मर्ज़ी से आपके ऊपर बैठकर राइड करती है, उसका अनुभव सबसे अच्छा होता है। करीब-करीब 45 मिनट तक चली इस चुदाई में रुचिता दो बार झड़ चुकी थी और एक और, अब जब मेरा होने वाला था, तो मेरे वीर्य का फव्वारा जैसे ही उसकी चूत में गया, वह एक और बार झड़ गई और हम दोनों इसी अवस्था में निढाल होकर सो गए।

करीब 2 घंटे बाद आँख खुली तो हम दोनों ने साथ में शावर लिया और एक और राउंड शावर में हुआ। अब रात के 9 बज चुके थे तो हमने बाहर से खाना मंगाया।

खाना खाने के बाद मैंने अपने घर फोन करके दोस्त के घर रुकने का बोल दिया, चूँकि रुचिता के घर वाले कल दोपहर को आने वाले थे, तब तक हमने एक-दूसरे के साथ ही रहने का तय किया। रात को हम दोनों खाने के बाद नज़दीक के एक गार्डन में घूमने गए।

वहाँ हमने बहुत सारी बातें कीं। बातों में मैंने जब हार्ड डिस्क में उनके फोटो और पोर्न की बात बताई तो रुचिता ने बताया कि जब मैंने बैकअप लिया उसके बाद उसको यह ख्याल आया। और जब मैं उसके साथ उस रात जब बगैर कुछ किए कंप्यूटर ठीक करते हुए बात की, उस रात रुचिता के क्लीवेज देखने के बाद जब मैंने अपने आप पर काबू रखा, तब उसे एहसास हुआ कि मैं उसकी इज़्ज़त करता हूँ, उसकी केयर भी करता हूँ। तब वह अपने आप ही मेरी तरफ आकर्षित हो गई।

फिर हम लोग घर गए। उस रात हमने एक और राउंड सेक्स करके ब्लैंकेट में एक-दूसरे की बाहों में नग्न ही सो गए और एसी की ठंडी हवा में ब्लैंकेट में एक-दूसरे के जिस्म की गर्मी और भाभी के मुलायम बदन का एहसास... उफ़! मैं बता नहीं सकता, वह मेरी ज़िंदगी की सबसे हसीन रात थी।

जब आँख खुली तो रुचिता ने मुझे अपनी बाहों में भर रखा था और मेरा सर उसके बूब्स के ऊपर था। तब मैंने धीरे-धीरे उसके निप्पल चूसने लगा। थोड़ी देर में उसके निप्पल हार्ड होने लगे। तब रुचिता ने अपनी टाँगें फैलाकर एक टाँग मेरे ऊपर रखी। हम दोनों नाग-नागिन की तरह एक-दूसरे के जिस्म से लिपटे हुए थे और मेरा लंड भी फुल टाइट था जो रुचिता की चूत के मुँह पर अपनी दस्तक दे रहा था।

मुझे अपने लंड पर रुचिता की चूत की गर्मी महसूस होने लगी थी। जब मैंने उसके फेस की तरफ देखकर उसके कपाल को चूमा तो उसकी आँखें खुल गईं और उसने मुझे अपनी बाहों में इतना कस के पकड़ लिया मानो वह चाहती हो कि समय वहीं रुक जाए। उसके बाद रुचिता ने मुझे न जाने कितने ही अनगिनत किस किए और धीरे-धीरे हमारी वासना और प्यार दोनों उफान पर थे। इस बार हमारी चुदाई 1 घंटे से ज़्यादा चली और उसके बाद रुचिता ने मुझे कहा कि सौरव के भाई-भाभी के बाथरूम में जकूज़ी किस्म का बड़ा सा बाथ टब है, तो हम वहाँ पर एक-दूसरे के साथ नहाए। अब 11 बज चुके थे तो न चाहते हुए भी हमें अलग होना पड़ा।

जब मैं जा रहा था तब रुचिता मेरे साथ दरवाज़े तक आई और जैसे ही मैं दरवाज़ा खोलने को हुआ, उसने मुझे खींच कर अपने गले लगा लिया और एक लंबा सा गुडबाय किस हमारे बीच हुआ। रुचिता की आँख में आँसू थे और चेहरे पर संतुष्टि एवं अलग होने के दुख के साथ मिला-जुला एहसास।

उसके बाद हम जब भी मौका मिलता था, चुदाई करते थे। करीब एक साल बाद सौरव को उसकी कंपनी ने फाइनेंशियल लॉस के चलते जॉब से निकाल दिया और वह वापस आ गया। उसके बाद मैंने और रुचिता ने अपना सेक्स करना बंद कर दिया। हाँ, कभी-कभार अकेले में मौका मिलता है तो हम गले लगकर या किस करके एक-दूसरे का हाल पूछ लेते हैं।

हमारी मर्यादा हमें पता है, लेकिन जब-जब हम अकेले में मिले हैं, उतनी बार रुचिता ने मुझे उस अकेलेपन के समय उसका साथ और सहारा देने के लिए शुक्रिया करती रहती है। और एक बार बातों-बातों में सौरव ने मुझे बताया कि जब वह दुबई चला गया तो 2-3 महीने बाद रुचिता काफ़ी डिप्रेशन में चली गई थी और उसको अकेलेपन कि वजह से मरने के ख़याल तक आ रहे थे, फिर वह धीरे-धीरे नॉर्मल हो गई थी। और जब मुझे यह बात पता चली तब मेरे मन में जो ग्लानि थी वह भी दूर हो गई और मुझे खुशी है कि मैं रुचिता का सहारा बन पाया। हम आज भी अच्छे दोस्त हैं और हमेशा रहेंगे।


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1 Comment


T . Patil
T . Patil
Feb 20

Nice storry

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