दोस्त की विधवा बहन की चुदाई - Antarvasna Sex Stories
- Harry
- 21 minutes ago
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दोस्तों मेरा नाम हैरी है और मेरी उम्र 24 वर्ष की है। जब मेरी सेटिंग मेरे दोस्त के दोस्त की बहन से हो गयी जो विधवा थी। उसकी शादी के तीन महीने बाद ही उसका पति एक सड़क हादसे में मर गया और उसने जो मुझे जन्नत के नज़ारे दिए क्या कहना उसका। उस लड़की का नाम राधा है।
राधा के बारेमें लिखू तो उसकी उम्र २६ वर्ष राग गोरा और एक दम साफ़ चेहरा बेहद खूबसूरत बड़ी बड़ी आँखे खुले बाद खूबसूरत इतनी की पता नहीं कितने लोग चाहते थे की राधा के उनकी शादी हो जाये। फिगर की बात करू तो 34 इंच के मोटे सख्त मम्मे, 28 इंच की कमर और 35 इंच की गांड।
मेरे बारे में लिखू तो मेरा नाम हैरी उम्र 24 वर्ष। अभी मैंने एम् ऐ की पढाई पूरी की और आगे पी एच दी करने की सोच रहा हु और सेक्सुअली पूरी तरह से एक्टिव हु। अब तक कोई दो सौ से ज्यादा लड़किया चोद चूका हु जिसमे राधा भी शामिल है।
मेरा आठ इंच लम्बा लंड औरत की प्यास भुजाने के लिए हमेशा तत्पर रहता है । बिना रुके एक बार लंड से माल निकलने तक काम से काम दो घंटे मैं चुदाई करने में सक्षम हु।
खैर बात शुरू ऐसे हुई की मेरे एम् ऐ के पेपर हो गए थे और मैं पेपर के नतीजे आने का इंतज़ार कर रहा था और सोच रहा था की किस यूनिवर्सिटी से पी एच दी करू तो एक दिन ऐसे ही मेरा एक दोस्त घर पर आया और वो मुझे उसके एक दोस्त के पास गप शाप करने ले गया जिसका इंटरनेट कैफ़े है।
मैं, मेरा दोस्त और कैफ़े वाला लड़का हम तीनो कैफे मैं बातें कर रहे थे और तभी एक लड़की आई और चाय के तीन कप देकर चली गयी। मेरी नज़र उस लड़की पर पड़ी तो मुझे बहुत खूबसूरत और आकर्षक लगी। मेरी नज़र सीधे उसकी आँखों में गयी और मैं जैसे उसका कायल हो गया। उस लड़की के जाते ही कैफे वाले लड़के ने हमें बताया की ये उसकी बहिन है, अभी कुछ महीने पहले शादी हुई थी और एक दुर्घंता में उसके पति की मौत हो गयी और ससुराल वाले इसे परेशान कर रहे थे तो हम इसे यहाँ ले आये । उसने ये भी बताया की उसके माँ और पापा गांव किसी जरूरी काम से गए हैं और कुछ दी बाद आने वाले हैं ।
बातें करते करते मेरी उस कैफे वाले लड़के जिसका नाम राज था उससे अच्छी जान पहचान हो गयी और नंबर भी एक दूसरे को दे दिए। चाय पी और राज ने अपनी बहिन राधा को फोन कर बुलाया की वो कप वापिस घर को ले जाए। उनका घर कैफे से साथ पीछे की तरफ बना हुआ था। खैर राधा आई तो मेरी नज़र जैसे उसे गौर से देखने लगी और एक नज़र राधा ने मेरी और देखा और चाय के कप लेकर अंदर चली गयी। खैर कुछ देर बाद मैं अपने घर आ गया और शाम को अकेले फिर से कैफे में चला गया। राज वही पर था तो हम दोनों गप शाप करने लगे। राज ने फिर से चाय मंगवाई और राधा जब देने आई तो फिर से मेरी नज़र जैसे उस पर रुक सी गयी और राधा ने मेरी और देखा और चाय देकर अंदर चली गयी ।
राज ने बातो बातो में कहा की राधा नौकरी करना चाहती है कही तो अगर कोई अच्छी नौकरी मिलती हो तो बता देना। मैंने हां कर दी और कहा एक दो दिन में बताता हु। पूरा दिन मैं वही पर कैफे में ही बैठा रहा और राधा तीन चार बार आई और मेरी नज़र उस पर और उसकी नज़र जैसे मुझ पर पड़ती और वो चुप चाप आती और चली जाती । खैर शाम को राज को कंप्यूटर का सामान लेने जाना था तो उसने मुझे कहा की मैं उसके कैफे का ध्यान राखु और वो कोई एक घंटे तक आएगा।
मैंने कहा ठीक है। कुछ समय बाद राधा आई और वो शायद राज को ढूँढ रही होगी तो जैसे ही वो अंदर आई तो मेरे मुँह से एक शेयर निकला जो आज भी मुझे याद है। उसमें लड़की की खूबसूरती, उसके भोलेपन का जीकर था और इससे राधा मेरी और जैसे गौर से देखने लगी। उसकी कोई दो सेकंड तक मेरी और देखा और वापिस चली गयी।
मैं वही पर बैठा रहा। थोड़ी देर बाद फिर से वैसे ही हुआ और जैसे ही राधा आई तो मैंने उसकी खूबसूरत पर और उसकी उदासी पर एक कविता सुनाई और ये शायद कविता उसे ज्यादा पसंद आई क्योकि वो अपने पति की मौत से काफी दुखी थी पर कह किसी से नहीं रही थी। मेरी इस कविता से जैसे वो मेरी और ऐसे देखने लगी जैसे कुछ कहना चाहती हो। मैंने धीरे से अपना चेहरा सामने पड़े हुए कंप्यूटर की तरफ करके कहा की राधा दिल में जो कह दो, निकल जायेगा और दिल हल्का हो जायेगा। उससे कहो जो आपके करीब है आपको समझता है। जिसे आपकी कदर है। अन्यथा बताकरभी दिल भरा सा रहेगा। मैंने ये बात कही धीरे से थी पर राधा ने सुन ली।
राधा ने मेरी और देखा और बोली राज कहा है आपको पता है। मैंने कहा वो बाजार गया है किसी काम है। कोई काम था तो आप मुझे बोल दो। राधा ने कहा कुछ नहीं। इतना कह कर राधा दरवाजे से जाने लगी तो उसने मेरी और मूड कर देखा और फिर चली गयी। खैर राज के आने के बाद मैं अपने घर आ गया और अपने कुछ दोस्तों को कोई नौकरी के लिए फोन किया जहा पर राधा को काम दिला सकू तो मुझे एक जगह का पता चला । एक कार शोरूम में लड़की की जरुरत थी तो मुझे वह का नंबर मिलगया। अगले दिन मैंने सुबह उस नंबर पर बात की और सारी बात पक्की कर ली ।
मैंने राज के कैफे गया तो उससे ये सारी बात की और कहा की आज इंटरव्यू दे सकती है तुम्हारी बहन। राज ने अपनी बहन को बुलाया और आते ही उसकी नज़र सीधे मुझ पर पड़ी और राज ने उसे सारी बात बताई और मैंने कहा की इंटरव्यू 11 बजे का है तो समय से पहुंच जाना चाहिए। खैर राधा अपना इंटरव्यू देने चली गयी और मैं वही कैफे में बैठा राज से बातें करता रहा। राधा वापिस आई तो वो खुश थी की उसकी नौकरी लग गयी थी। राधा है ही इतनी हसीं की उसे कोई क्यों न रखेगा। अगले दिन से राधा का काम शुरू होना था तो मैं कैफे मई ही बैठा रहा और चाय की चुस्की चलती रही।
राधा आते जाते मेरी और मूड कर देखकर जाती। राज वही बैठ हुआ था तो मैं कुछ कहे नहीं सकता था। खैर अगला दिन आया और मैं कैफे गया तो उसी समय राधा घर से आफिस के लिए निकल रही थी। उसने मेरी और देखा तो मैंनेउसकी और देख सर को हिलाया तो वो जैसे देखने लगी तो आस पास कोई नहीं था तो मैंने कहा राधा अपने चेहरे की मुस्कराहट को खोने मत दीजियेगा, कोई इसी दिन के लिए जी रहा है। राधा मेरी और मूड मूड कर देखती हुई रोड की और गयी और ऑटो मैं बैठ अपने काम पर चली गयी । मैंने घर आ गया और शाम को मैं फिर से कैफे गया और उस समय सात बजने को थे। राज घर में कुछ खाने के लिए गया हुआ था और राधा काम से वापिस आई और हम दोनों की नज़र जैसे एक दूसरे पर पड़ी।
राधा बोली राज कहा है। मैंने कहा वो अंदर गया है शायद। उस समय कैफे में कोई भी बच्चा नहीं था तो मैंने कहा आप बेहद खूबसूरत हो। किसी अपने से हाल इ दिल बयान करोगे तो मुस्कराहट हमेशा आपके इस हसीं चेहरे पर रहेगी ।
राधा ने मेरी और देखा और उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट थी तो मैंने कहा बहुत खूबसूरत मुस्कराहट है आपकी। राधा फिर अंदर चली गयी और मैं वही बैठ गया । खैर अगला दिन आया और राधा के घर से निकलने के समय के अनुसार मैं कैफे के बाहर खड़ा हो गया। राधा घर से निकली और निकलते ही उसने मुझे देख लिया और मैं वही एक साइड में खड़ा हो गया और वो मूड मूड कर मेरी और देखती आगे जा रही थी। मैं भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा और जिस ऑटो में वो बैठी उसी में मैं भी बैठ गया।
ऑटो में कुछ लोग थे तो मैंने कोई बात नहीं की। मैंने धीरे से कहा खली ऑटो में बैठना चाहिए था मुझे काफी लोग है इसमें। राधा ने सुन लिया और वो मेरी तरफ देखने लगी। खैर आफिस जाते समय भी वो मेरी और देखती रही और मैं अपने घर आ गया । अगले दिन फिर से वही हुआ और मैं राधा के पीछे पीछे ऑटो स्टैंड तक गया और किस्मत से एक खली ऑटो मिल गया और राधा उसमें बैठ गयी और पीछे पीछे में भी चढ़ गया ।
मैंने धीरे से कहा आप ऐसा मत सोचना की मैं आपका पीछा कर रहा हु बस इस कोमल, हसीं, खूबसूरत फूल की जिंदगी भर हिफाज़त का ज़िम्मा लिया है। राधा मेरी और देखने लगी और मेरे हाथ में एक कागज़ था जिसका एक प्यारी से कविता और मेरा नंबर लिखा था । मैंने वो कागज़ राधा की गोद में रख कहा अगर आपको बुरा लग रहा मेरी बातो से या मैं आपको परेशान कर रहा हु तो आप इस कागज़ को फेंक देना। इसमें मेरा नंबर है मुझे आपके फोन का इंतज़ार रहेगा। मैं आपके इस हसीं चेहरे को मुस्कुराता हुआ देखना चाहता हु। राधा ने उस कागज़ को अपने हाथो में पकड़ देखा और कविता पढ़ने लगी और बोली बहुत अच्छी कविता लिखी आपने । खैर मैंने उससे बात शुरू की और बातें करते करते राधा आफिस में पहुंच गयी और ऑटो से उतारकर मैंने कहा आपकी छूट कब होती है। राधा ने कहा शाम छह बजे। मैंने कहा मैं आपका यही इंतज़ार करूँगा ।
राधा के चेहरे पर मुस्कराहट आई और वो आफिस में चली गयी । मैं भी अपने घर आगया। शाम को राधा को लेने उसके आफिस की तरफ में गया और उससे बातें करते करते वो कैफे चली गयी और मैं घर आ गया। उस रात मुझे एक नंबर से फोन आया। मैंने उठाया तो मैंने आवाज़ को पहचान लिया । वो राधा ही थी। मैं छत पर जाकर राधा से बात करने लगा । कोई एक घंटे बाद राधा ने कहा की वो चैट करेगी तो मैंने कहा ठीक है। मैंने मेसेज पर राधा से बात करने लगा । उसने मुझे सब बताया की उसके माँ पापा और भाई उसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। वो उन्हें मनहूस कहते हैं। उसके ससुराल वाले भी उसे मनहूस कहते हैं। मैंने उससे प्यार से समझने लगा और बीच बीच में चुटकुले, कविताये लिखकर भेजता तो वो हसने लगती।
हम देर रात तक चैट करते रहे और फिर सो गए । अगले दिन फिर से मैं राधा के साथ उसे छोड़ने उसकी आफिस गया और शाम को घर वापिस और रात भर चैट। दो दिन मैं हम एक दूसरे को काफी जान समझ चुके थे। खैर मुझे तो उसकी ठुकाई करने से मतलब था। एक रात चैट करते करते मैंने राधा से कहा की एक अच्छी फिल्म लगी हुईहै तो क्या राधा मेरे साथ फिल्म देखने चलेगी तो राधा ने हां कर दी। हमने इतवार का दिन रख लिया और सुबह राधा ऑटो स्टैंड तक आ गयी और मैंने अपनी स्पोर्ट्स बाइक लेकर आ गया।
राधा को बैठने के लिए कहा तो वो पहले थोड़ा झिझकी और फिर बाइक पर बैठ गयी और बैठते ही जैसे उसके मोटे मोटे आम जैसे मम्मे मेरी पीठ पर चिपक गयी। बाइक पीछे से ऊँची और आगे से नीची थी तो राधा पीछे होने की कोशिश कर रही थी पर कहा होना था। खैर वो इसी तरह से बैठी रही और मैंने बाइक दौड़ा ली। मैंने राधा को एक माल में ले गया। छुट्टी का दिन था गर्मियों का मौसम तो बहुत लोग थे।
मैंने पूछा आप कभी माल आये हो पहले
राधा ने कहा नहीं हैरी।
वहा पर बहुत सारे लड़के लड़किया थी और काफी लड़किया तो शॉर्ट्स में और राधा जैसे उन्हें गौर से देख रही थी। शार्ट फ्रॉक को आम बात है पर राधा ने कभी देखा नहीं था लड़कियों को फ्रॉक मिनी जीन्स या शार्ट स्कर्ट में। खैर टिकट लेकर हाल में बैठ गए और अपनी बातें करने लगे। राधा मेरे से ऐसे घुल मिल चुकी थी जैसे कुंवारी लड़की हो। देखकर लगता नहीं था की वो शादी शुदा है। फिल्म शुरू हुई और कब खत्म पता नहीं चला। मैंने राधा से कहा की आप पहली बार आये हो साथ तो कुछ ड्रेस लेकर देना चाहता हु आपको तो वो हसने लगी। मैंने उसे एक दूकान में ले गया और वो सूट देखने लगी । राधा सूट ही ज्यादा तर पहनती है। पर मैंने उसे फ्रॉक देखने को कहा तो वो मेरी और हसने लगी । फ्रॉक पाँव से तीन फ़ीट ऊँची थी। खैर उसने पहनकर देखि और उसे पसंद आ गयी और कुछ जीन्स टॉप ले कर खाना खाने रेस्टोरेंट चले गए और उसके बाद पार्क । छह बजने को थे तो मैंने कहा घर चले राज आपका इंतज़ार कर रहा होगा।
राधा बोली नहीं बाद में अभी नहीं थोड़ा रुक जाओ।
मैंने कहा ठीक है । वह पर झूले थे तो राधा हो झूले झुलाये। खूब मस्ती की और सात बजने पर थी राधा ने कहा अभी नहीं रुक कर जाएंगे ।
मैंने कहा क्या हुआ घर नहीं जाना।
राधा ने कहा यहाँ अच्छा लग रहा है मुझे।
मैंने पूछा क्या ऐसा क्या है यहाँ।
राधा हसने लगी।
मैंने कहा बोलो न ऐसा क्या है यहाँ।
राधा मेरी और देखने लगी और कुछ नहीं बोली तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और वो मुस्कुराने लगी। मैंने कहा हमेशा मेरे साथ रहना है
राधा हसने लगी और उसने हां में सर हिलाया।
मैंने अपना सर उसके सर की और लेकर गया और उसके होठो को अपने होठो में भरने लगा और राधा मेरी और देखे जा रही थी तो मैंने सर को एक तरफ कर लिया । मैंने कहा कोई देख न ले तो राधा हसने लगी। खैर मैं उसे उसके घर के पास छोड़ अपने घर आ गया और फिर से रात भर चैट करता रहा । मैंने उसे फिर से पार्क चलने को कहा तो वो मान गयी। मैंने कहा ऑफिस का क्या तो वो बोली छूती ले लुंगी ।
खैर अगले दिन राधा फ्रॉक पहन कर घर से निकली और रस्ते में माइए उसे बाइक पर बिठाया और पार्क में ले गया । वह एक एकांत में हम बैठे हुए थे जहा पर आस पास कोई नहीं दिख रहा था। मेरा ध्यान राधा के संतरे कैसे आकार के मम्मे और उसकी गोरी नंगी टांगो पर था और मेरी बाजु राधा के गले में थी। उस पार्क में मैंने पहले अपनी काफी प्रेमिकाओं को लेकर जाता रहा हु और मुझे पता है की वह पर झोपड़ी जैसे बने हुए हैं जहा पर बारिश के समय आप बैठ सकते हो । वो थोड़ी ऊंचाई पर है और वह पर सामने से कोई देख सकता है पर साइड से नहीं तो मैं राधा को वह पर ले गया। राधा मेरे साथ चिपक कर बैठी हुई मेरी और देख रही थी।
मैंने कहा कयामत लग रही हो तुम
मैंने फिर राधा का सर पकड़ अपने सर की और किया और उसके होठो को अपने होठो में भर चूसने लगा। दो मिंट भी नहीं हुए की राधा गर्म हो गयी और मेरे से लिपटने लगी। मैंने अपना एक हाथ उसकी फ्रॉक के ऊपर से मम्मे पर रख दबाना शुरू किया । मम्मा मेरे हाथ से भी बड़ा निकला। मम्मे काफी सख्त और मोटे मोटे हैं राधा के।
मैं राधा के होठो को चूसते चूसते उसके मम्मे सहलाने लगा। पंद्रह मिंट तक ऐसे ही चलता रहा । मेरा आठ इंच लम्बा लंड खड़ा हो चूका था। मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल अपना लंड बहार निकला और राधा के हाथ को लंड पर रख दिया । राधा सेक्स में पागल हो चुकी थी और उसे कुछ नहीं पता था की क्या हो रहा है । मैंने उसके होठ चूसता रहा और उसके मम्मे मसलता रहा और कभी कभी उसकी नंगी टांगो पर हाथ फेरता तो कभी हाथ को अंदर तक पेंटी तक ले जाता और जैसे ही चूत पर मैं हाथ फिरता तो राधा को करंट सा लगता। मैंने राधा के होठो को छोड़ा तो उसकी आँखे बंद थी और चेहरा एक दम लाल सुर्ख। राधा ने देखा की उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ रखा तो बोली हैरी ये क्या है इतना लम्बा।
मैंने कहा तुमने मेरे होठो को चूसते चूसते मेरी ज़िप खोल मेरा लंड बहार निकला और ये इतना लम्बा हो गया।
राधा बोली लंड मतलब?
मैंने कहा जो तुम्हारे हाथ में है।
राधा उसे देखने लगी और बोली यार ये है क्या कितना ज्यादा लम्बा है ये।
मैंने कहा आठ इंच लम्बा है।
मैंने कहा इसे चूसने में बहुत मज़ा आएगा तुम्हे।
राधा बोली नहीं हैरी।
मैनेकहा कोशिश तो करो बहोत स्वाद आएगा तो राधा ने देखते देखते मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और इसी तरह से बैठी रही ।
मैंने धीरे धीरे से राधा का सर ऊपर नीचे करना शुरू किया और इससे लंड मुँह के अंदर बहार होने लगा ।
राधा फिर अपने आप ऐसे ही करने लगी। मैंने राधा के गले के अंदर हाथ दाल उसकी ब्रा के अंदर हाथ डाला और उसके एक मम्मे को पकड़ कर दबाना शुरू किया और इससे राधा को बहुत मज़ा आने लगा ।
मैंने फिर अपने दोनों हाथ राधा के गले से अंदर दाल ब्रा के अंदर से उसके दोनों मम्मे पकड़ लिया और दबाने लगा। राधा सेक्स से पागल हो चुकी थी और मेरे लैंड को पागलो की तरह चूस रही थी।
मैंने कहा मुँह से निकलना है तो निकाल दो पर राधा लगी रही।
एक घंटा बीत गया पर राधा ने लंड को मुँह से बहार नहीं निकला ।
मैंने दोनों मम्मे पकड़ कर फ्रॉक के गले से बाहर निकल दिए और आराम से बैठ इधर देखने लगा पर राधा अपना लंड चूसने में लगी रही । दो घंटे बीत गए। राधा थक चुकी थी और लंड को मुँह में लिए मेरी गोद में सर रख कर उसी झोपड़ी में टेबल पर लेट गयी। सोमवार का दिन था आस पास कोई था नहीं तो हम लगे रहे। तीन घंटे से ज्यादा हो चूका था। मैंने कहा मुँह से निकाल दो अगर निकलना है तो।
राधा ने ना में सर को हिलाया और लंड को मुँह में लिए मेरी गोद में सर रख कर टेबल पर लेती रही। थोड़ी देर बाद लंड में से पानी निकला और राधा के मुँह में गिरने लगा। राधा को मैंने कहा इसे मुँह में ले जाओ तो उसने पानी मुँह में गिरने दिया और जब लंड में से सारा पानी निकल गया तो राधा ने पास में थूक दिया।
राधा उठी तो उसके दोनों मम्मे उसकी फ्रॉक के गले में से बहार निकल रहे थे। उसके दूध जैसे गोरे मोटे मोटे मम्मे पर छोटे छोटे भूरे रंग के निप्पल बहुत मस्त लग रहे थे। मैंने कहा मम्मे बहुत खुबसुरत है तुम्हारे।
राधा हसने लगी। मैंने उसके मम्मे फ्रॉक के अंदर वापिस डाले और लंड भी भी बाहर था मेरा ।
राधा बोली आपने क्या कर दिया है मझे?
मैंने कहा क्या हुआ?
मेरा मन अजीब सा कर रहा है।
मैंने पूछा अजीब सा मतलब?
राधा ने कहा पहले जैसे मज़ा आ रहा था वैसे नहीं आ रहा अब।
मैंने कहा अच्छा फिर मेरे घर चलोगी तुम और मैं होंगे और जी भर कर प्यार करेंगे।
राधा ने हां कर दी।
खैर हम दोनों वह पर लगे रहे और घर आकर मैंने अपने दोस्त को फोन किया जिसके पास पुराना घर है और मैं वह पर अपनी लगभग हर प्रेमिका को लेकर जाता हु चुदाई करने। मैंने उससे बात की और अगले दिन का पक्का रख लिया ।
रात को राधा से चैट करते करते मैंने उसे कल का बताया तो वो झट से मान गयी। उसका मन सेक्स करने की तरफ था । मैंने उसे आफिस का पूछा तो उसने साफ़ कह दिया की आफिस की अब जरूरत थी है मुझे आप जो मिल गए हो।
खैर अगले दिन फिर से मैंने राधा को उसके घर के पास से बाइक पर उठाया और अपने दोस्त के पुराने घर ले गया।
राधा ने कहा यार ये तो कोई पुराना घर लगता है।
मैंने कहा हां पहले हम यहाँ रहते थे और अब दूसरी जगह रहते हैं। ये खली पड़ा रहता है।
राधा को मैं एक बैडरूम में लेकर गया और उसे कस कर अपने से जकड लिया और उसके होठ चूसने लगा । राधा भी बिलकुल वइसे ही मेरे होठ चूस रही थी। एक मिंट में ही राधा गर्म हो गयी और मैंने उसके गले से दुपट्टा निकाल एक तरफ फेंक दिया और फिर सूट के ऊपर से ही उसके दोनों मम्मे अपने हाथो में पकड़ दबने शुरू किये। मैंने जोर जोर से मम्मे मसलता तो कभी दबाता तो इससे राधा को बहुत मज़ा आता। ऐसे ही करते करते मैंने राधा की सलवार खोल दी और फिर अपनी जीन्स उतर कर एक तरफ फंक दी। मैं कच्छा कभी नहीं पहनता हु गर्मियों में तो मैंने फिर राधा की कमीज के पीछे से हुक खोल उसकी कमीज उतारी और फिर ब्रा खोल पेंटी को उतर कर राधा को पूरा नंगा कर दिया। मैंने अपनी टीशर्ट उतरी और पूरा नंगा हो गया। राधा बस मेरे से लिपटती जा रही थी। मैंने राधा को बेड पर लिटाया और उसे पुरे बदन को चूमने लगा और फिर उसके दोनों मम्मे के निप्पल्स अपने मुँह में लेकर एक एक करके चूसने लगा । इससे राधा को और आनंद आने लगा। मैंने कहा कैसा लग रहा है।
राधा ने कहा जब आप दूध को मुँह में लेते हो बहुत मज़ा आता है।
खैर मैंने फिर ऐसे ही किया और जी भर कर राधा के मम्मे चूसे और उसके निप्पल्स को खूब चूसा और फिर राधा को नीचे कर मैंने अपना लंड उसे चूसने को कहा और राधा तभी शुरू हो गयी। राधा किसी प्यासी की तरफ जोर जोर से लंड को मुँह के अंदर बहार क्र रही थी और में बेड पर लेटा हुआ था। थोड़ी देर बाद मैंने राधा को लंड के नीचे के अंडकोष चूसने के लिए कहा और राधा उसे भी चूसने लगी । मैं जैसे जैसे कहते गया राधा वैसे वैसे करती गयी। मैंने राधा को बेड पर बिठा उसकी गोद में अपना सर रखा और उसके एक मम्मे के निप्पल को अपने मुँह में भरा और चूसने लगा और राधा बोली आह और राधा ने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी। आधा आधा घंटा मैंने दोनों मम्मे चूसने में लगाया और फिर राधा को बेड पर लिटाया और उसकी दोनों टांगो को अपने कंधो पर रख लंड को चूत के मुँह पर रख जोर से धक्का देने लगा पर चूत बिलकुल टाइट थी। मेरी लाख कोशिश के बाद भी लंड अंदर नहीं घुसा तो मैंने उसकी दोनों टांगो को फैलाया और फिर लंड को धीरे धीरे कर अंदर डालने लगा और फिर जोर से धक्के देने लगा । लंड जैसे जैसे चूत में घुसने लगा राधा आह आह करने लगी। इसके बाद मैंने धीरे धीरे कर धक्के देने शुरू किये। मैंने धीरे धीरे करके लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगा।
राधा को खूब मज़ा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था। मैं इसी तरह से लगा रहा और फिर मैंने राधा की दोनों टाँगे अपने कंधी पर रख ठुकाई शुरू करदी। पहले तो धीरे धीरे और फिर जोर जोर से मैं ठुकाई करने लगा । इसके बाद मैं बेड पर लेट गया और राधा को अपने लंड के ऊपर अपनी टांगें फैलाकर बैठने को कहा तो वो लंड के ऊपर आ गयी और जैसे जैसे राधा नीचे होती गयी लंड चूत में थोड़ा अंदर गया और मैंने राधा को लंड के ऊपर नीचे होने को कहा और राधा वैसे ही करने लगी।
राधा ऊपर नीचे हो रही थी और मुझे लंड राधा की चूत के अंदर बाहर होता नज़र आ रहा था।
मैंने कहा राधा अभी रुक जाओ और लंड को चूत में लिए ऐसे ही और नीचे होवो
राधा और नीचे होने की कोशिश कर रही थी पर उसे दर्द हो रहा था और फिर मुझे लंड पर खून दिखने लगा तो राधा की सील टूटने की वजह से था।
मैंने राधा को घोड़ी बनने के कहा और उसे बताया की कैसे बने तो राधा घोड़ी बन गयी। मैंने उसकी गांड को पकड़ कर अलग दिशाओ में खींचा और लंड को गांड के मुँह पर रख जोर से धक्का दिया तो लंड गांड में घुसने लगा और राधा बोली आह हैरी।
मैंने धक्के देने शुरू किया। पहले तो धीरे धीरे और बाद में तेज़ी से और राधा आह आह करे जा रही थी । मेरे धक्के से बेड भी दीवार से टकरा रहा था और जैसे जैसे मैं लंड को गांड में धकेलता बेड दीवार पर टकरा कर आवाज़ होती पर मैं इसी तरह से लगा रहा।
मैंने दोनों हाथो में राधा के मम्मे पकड़ लिए और उन्हें पीछे खींचने लगा और लंड को गांड के और अंदर तक धकेलने के लिए जोर लगाने लगा । मेरा अपना तरीका है। मैंने लंड को गांड के काफी अंदर तक धकेल मैं वही रुक गया। मेरी कमर दुखने लगी थी। दस मिंट तक मैं इसे ही रुकने के बाद फिर से मैंने धक्के देने शुरू किये । दो घंटे बीत चुके थे पर लंड अभी भी तना हुआ था। काफी देर बाद मैंने राधा को फिर से बेड पर लिटाया ुर उसके ऊपर लेट गया और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया और नीचे लंड चूत में डाल फिर से ठुकाई करने लगा । इस बार बिजली की तेज़ी से मैंने ठुकाई और साथ में राधा के होठो को चूसा। मैंने इसी तरह से लगा रहा। इसके बाद मैंने राधा को बेड पर लिटाया और उसके सर की तरफ से जाकर उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया और राधा लंड को चूसने लगी। वो कभी अंडकोष को मुँह में भर्ती तो कभी लंड को और मैंने दोनों हाथो में उसके 34 इंच के मम्मे पकड़ कर ऊपर को खींचने शुरू कर दिए । मैंने सोचा अब तो जब तक लंड में से माल निकलता नहीं इससे लंड चुसवाना है और इसके मम्मे दबाने हैं । तीन घंटे से ज्यादा हो चूका था तो लंड में से माल निकला तो माल राधा के मुँह में जाने लगा और वो राधा ने सारा माल अपने मुँह में भर लिया और बाद में साइड में थूक दिया।
राधा के पेट में काफी दर्द हो रहा था। मैं एक दूकान में गया और उसे दवाई लेकर दी और काफी देर तक हम दोनों वही बेड पर एक दूसरे से लिपटे रहे और सात बजे के आस पास मैंने राधा को उसके घर के सामने छोड़ दिया क्योकि उसे चला नहीं जा रहा था। चार दिन आराम करने के बाद फिर से मैं राधा को अपने उसी दोस्त के पुराने घर ले गया और इस बार 5 घंटे तक चुदाई करी और ये हमारा हर रोज़ का काम बन गया था ।
इस बात को कोई आठ महीने हो चुके हैं और अब मैं राधा को कभी होटल तो कभी मेरे घर पर जब मेरे घर पर कोई न हो और कभी अपने दोस्त के पुराने घर पर लेजाकर चुदाई करता हु।
दोस्तों मेरी इस Antarvasna Sex Stories को जरूर पसंद कीजियेगा क्योकि ये मेरे जीवन की सत्य घटना है ।

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