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दोस्त के पापा ने की दूसरी शादी और मेरी हुई मौज: Hindi Sex Stories

मेरा नाम रोहन है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, और ये कहानी मेरी ज़िंदगी के उस दौर की है जब मैं 22 साल का एक नौजवान लड़का था, पढ़ाई के साथ-साथ ज़िंदगी के मज़े लेने की उम्र, और ऐसे में मेरी मुलाकात हुई मेरे दोस्त अंशुमन के पापा से, या यूं कहें कि उनकी नई बीबी से, जो मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा ‘Antarvasna’ का किस्सा बन गया। उस वक़्त मुझे नहीं पता था कि एक शादी समारोह मेरी पूरी दुनिया बदल कर रख देगा, और मैं ऐसे अनुभव से गुज़रूंगा जिसके बारे में सोच कर ही आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।


अंशुमन मेरे बचपन का दोस्त था, लेकिन उसके पापा, मिस्टर प्रकाश वर्मा, एक सख्त मिजाज़ के इंसान थे जिनसे मैं हमेशा थोड़ी दूरी बना के रखता था। अंशुमन की माँ का देहांत कुछ साल पहले ही हुआ था, और प्रकाश अंकल अकेले रहते थे। उम्र करीब 48 साल रही होगी उनकी, लेकिन बॉडी ऐसी जैसे कोई जवान लड़का हो, रोज़ जिम जाने का शौक रखते थे। फिर एक दिन अचानक अंशुमन का फोन आया, |रोहन, सुन, पापा दूसरी शादी कर रहे हैं।| मुझे सुनकर थोड़ी हैरानी हुई, लेकिन मैंने सोचा आखिर अकेले आदमी हैं, ज़िंदगी जीने का हक तो सबको है। शादी की तारीख तय हुई जयपुर में, क्योंकि दुल्हन जयपुर की ही रहने वाली थी, नाम था शालिनी। अंशुमन ने बताया कि शालिनी आंटी उम्र में तो काफी छोटी हैं प्रकाश अंकल से, करीब 32 साल की हैं, और ये सुनते ही मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी। मैंने अपनी इस बेचैनी को दबा दिया और शादी में जाने की तैयारी करने लगा, क्योंकि अंशुमन ने मुझे बेस्ट मैन बनने के लिए रिक्वेस्ट की थी और मैं मना नहीं कर सका।


शादी से दो दिन पहले हम लोग जयपुर पहुँच गए। एक आलीशान होटल में सबका इंतज़ाम था, और वहीं पर पहली बार मैंने शालिनी आंटी को देखा। जैसे ही मेरी नज़रें उन पर पड़ीं, मेरे तो होश ही उड़ गए। शालिनी आंटी कोई 32 साल की उम्र में भी ऐसी लग रही थीं जैसे कोई फ्रेश खिला हुआ गुलाब हों। रंग गोरा, घुंघराले काले बाल, और होंठ जो बिना लिपस्टिक के भी गुलाबी लग रहे थे। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान मेरा उनके फिगर पर गया, उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी हल्के हरे रंग की, जिसमें से उनकी भरी हुई जवानी साफ झलक रही थी। सीना इतना उठा हुआ और कमर इतनी पतली कि मेरी आँखें बार-बार वहीं अटक जाती थीं। मैंने खुद को संभाला और जाकर उनके पैर छुए, |पैर लगी आंटी जी।| उन्होंने मेरे सर पर हाथ रखा और मुस्कुराईं, |खुश रहो बेटा।| लेकिन उनकी उस मुस्कान में कुछ ऐसा था जो मुझे एक अजीब से एहसास से भर गया। मैंने मन ही मन सोचा, ये प्रकाश अंकल की किस्मत है या उनकी मौत, इतनी खूबसूरत औरत से शादी करके वो तो ज़रूर दबे रह जाएँगे। लेकिन मुझे क्या पता था कि वही औरत मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी उथल-पुथल की वजह बनेगी।


शादी की रस्में शुरू हुईं और मैंने देखा कि शालिनी आंटी बेहद मिलनसार और बातूनी थीं। वो बार-बार मेरे पास आतीं, मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछतीं, मेरी जॉब के बारे में पूछतीं, और हर बार उनकी आँखों में एक गहरी चमक होती जो मुझे बेचैन कर देती। एक दिन मैं होटल के गार्डन में अकेला बैठा चाय पी रहा था, तभी वो आ गईं। अब तक हम दोस्तों की तरह बातें करने लगे थे, हालांकि उम्र में 10 साल का फ़ासला था, लेकिन वो अपनेआप को उतना ही जवां रखती थीं। |रोहन, तुम तो बहुत खामोश से लगते हो, कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?| उनका ये सवाल सुनकर मैं थोड़ा शरमा गया। मैंने कहा, |नहीं आंटी, अभी तो पढ़ाई और करियर पर ध्यान दे रहा हूँ।| वो ज़ोर से हँसी, |अरे, पढ़ाई तो चलती रहेगी, ज़िंदगी के मज़े भी लो।| फिर उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा ठीक किया, और उस हरकत से उनकी कमर का एक हिस्सा नंगा हो गया। मैंने नज़रें फेर लीं, लेकिन दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। मैं समझ गया कि ये औरत मेरे लिए कोई आम औरत नहीं है, ये कोई ऐसी आग है जो मुझे धीरे-धीरे जला कर राख कर देगी, लेकिन मैं उस आग से दूर भागना भी नहीं चाहता था। यही मेरी अन्तर्वासना थी, जो मुझे खींच रही थी एक ऐसे अंधेरे कुएं की तरफ जहाँ से निकलना नामुमकिन था।


शादी की रस्म पूरी हुई और प्रकाश अंकल और शालिनी आंटी अब पति-पत्नी बन चुके थे। शादी के बाद सब लोग दिल्ली वापस आ गए, और प्रकाश अंकल ने मुझे अपने घर आने का खास न्यौता दिया ताकि शालिनी आंटी को दिल्ली में अच्छे से सेटल होने में मदद कर सकूं, क्योंकि अंशुमन तो पहले ही पुणे में जॉब करता था और शादी के बाद वापस चला गया था। मैं हफ्ते में दो-तीन बार उनके घर जाने लगा, बाज़ार से सामान दिलवाने, घर की छोटी-मोटी चीज़ें सेट करवाने, और देखते-देखते मैं उनके परिवार का ही एक हिस्सा बन गया। प्रकाश अंकल अकसर ऑफिस में व्यस्त रहते और मैं और शालिनी आंटी घंटों अकेले रहते। शुरू-शुरू में तो सब नॉर्मल लगा, लेकिन धीरे-धीरे शालिनी आंटी के बर्ताव में एक बदलाव आने लगा। वो मेरे सामने अकसर छोटे-छोटे कपड़े पहनने लगीं, जैसे शॉर्ट टॉप और टाइट लैगिंग्स, और बहाने से मुझे छूने की कोशिश करतीं।


एक रोज़ शाम का वक्त था, मैं उनके घर पर बैठा था और प्रकाश अंकल को ऑफिस से आने में देर हो रही थी। शालिनी आंटी ने मेरे लिए कॉफी बनाई और मेरे पास ही सोफे पर आकर बैठ गईं। उन्होंने व्हाइट कलर की टी-शर्ट और ब्लू जींस पहनी हुई थी, और टी-शर्ट इतनी टाइट थी कि उनके उभार साफ दिख रहे थे। उन्होंने बातों-बातों में कहा, |रोहन, तुम तो मेरे इतने अच्छे दोस्त बन गए हो, मैं तो समझती हूँ तुम मेरे अपने हो।| फिर उन्होंने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया, और वो हल्का सा स्पर्श बिजली के करंट जैसा था। मेरा पूरा शरीर कांप गया और मैंने शरमाते हुए अपनी टांग थोड़ी पीछे कर ली। वो मुस्कुराई और कहने लगी, |ओहो, तुम तो इतने शर्मीले हो!| उस रात मैं जब घर लौटा तो मेरे दिमाग में सिर्फ और सिर्फ शालिनी आंटी का ख्याल घूम रहा था। मैं सोच रहा था कि ये सब क्या हो रहा है, क्या सच में वो मुझमें इंटरेस्टेड हैं, या मेरा वहम है? लेकिन मेरे शरीर का हर रोम-रोम गवाही दे रहा था कि ये सच है, और मैं भी अब इस खेल में पूरी तरह शामिल हो चुका था।


फिर एक रात, पूरी ज़िंदगी बदल देने वाली वो रात, जिसका इंतज़ार मैं बेसब्री से कर रहा था और जिससे डर भी रहा था। मौसम ने अचानक करवट बदली और तेज़ बारिश शुरू हो गई। प्रकाश अंकल किसी ज़रूरी मीटिंग के लिए चंडीगढ़ गए हुए थे और अगले दिन तक लौटने वाले नहीं थे। शालिनी आंटी का फोन आया, |रोहन, बेटा, बिजली चली गई है और मुझे अकेले में बहुत डर लग रहा है, तुम आ सकते हो क्या?| मैंने बिना देर किए हाँ कह दी और भागकर उनके घर पहुँच गया। अंदर जाकर देखा तो पूरे घर में अंधेरा था, सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी जिसकी रोशनी में शालिनी आंटी सोफे पर सिमटी बैठी थीं। उन्होंने लाल सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी, जो बारिश की वजह से हल्की सी भीगी हुई थी और उनके बदन से चिपक रही थी, और उनकी बिंदिया, चूड़ियाँ, सब कुछ उन्हें एक अप्सरा का रूप दिए हुए थे।


मैं पास बैठ गया और कहा, |घबराओ मत आंटी, मैं हूँ ना।| उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया और धीमी आवाज़ में बोलीं, |पता है रोहन, मेरी शादी तो प्रकाश जी से हुई है, लेकिन जो बात एक औरत के मन में होती है, वो वो नहीं समझते। मैं बहुत अकेली महसूस करती हूँ।| उनकी ये बात सुनकर मेरा दिल पसीज गया। मैंने उनके बालों पर हाथ फेरा और धीरे से कहा, |आपके लिए मैं तो हूँ ही, आपको अकेला कैसे छोड़ सकता हूँ।| फिर अचानक उन्होंने अपना चेहरा मेरी तरफ उठाया, उनकी आँखों में आँसू थे, लेकिन उन आँसुओं में भी एक अजीब सी खुमारी थी। और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।


वो चुम्बन बिजली का एक तेज़ झटका था जो मेरे पूरे शरीर में दौड़ गया। मैं कुछ सेकेंड के लिए तो सन्न रह गया, लेकिन फिर मेरे अंदर की अन्तर्वासना ने ज़ोर पकड़ लिया और मैंने भी उन्हें पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया। हमारी ज़बानें एक-दूसरे से उलझने लगीं, और मैं उनके होंठों का रस पीने लगा। शालिनी आंटी की साँसें तेज़ हो गई थीं और वो हल्की-हल्की आवाज़ें निकालने लगी थीं, |उह्ह्ह्ह… रोहन…| मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और उनकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया। उनका शरीर कांप रहा था और वो मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ चला रही थीं। मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेरा और ब्लाउज़ के हुक खोलने की कोशिश करने लगा। मोमबत्ती की हल्की रोशनी में उनका चेहरा और भी ज्यादा कामुक लग रहा था। उन्होंने खुद अपने हाथों से ब्लाउज़ के हुक खोल दिए और मेरे हाथों को अपने सीने की तरफ खींच लिया।


जैसे ही मेरे हाथ उनके मुलायम और भरे हुए स्तनों पर पड़े, मुझे लगा जैसे मैंने स्वर्ग को छू लिया है। उनके स्तन इतने कोमल और गरम थे कि मैं अपना हाथ हटा ही नहीं पाया। मैंने उनकी टी-शर्ट (जो उन्होंने साड़ी के नीचे पहन रखी थी) को पूरी तरह से ऊपर कर दिया और अपना मुँह उनके निप्पल्स पर लगा दिया। जैसे ही मेरी ज़बान उनके गुलाबी निप्पल्स पर लगी, उन्होंने एक लंबी सिसकारी भरी, |आआह्ह्ह्ह… रोहन, धीरे-धीरे…| मैं उनके दोनों स्तनों को बारी-बारी से सहलाने और चूसने लगा। मेरे हर स्पर्श पर वो तड़प रही थीं और उनकी योनि गीली होती जा रही थी, मुझे उनकी जाँघों के बीच से गर्मी का एहसास हो रहा था। उन्होंने अपने हाथ मेरी पैंट पर रखे और धीरे-धीरे मेरी ज़िप खोलने लगीं। मैंने खुद को थोड़ा पीछे किया ताकि उन्हें आसानी हो, और उन्होंने मेरी पैंट और अंडरवियर दोनों नीचे सरका दिए। मेरा लंड अब पूरी तरह से खड़ा और सख्त हो चुका था, और उसे देखकर शालिनी आंटी की आँखें चमक उठीं।


उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और बड़े प्यार से सहलाने लगीं। |कितना बड़ा और मज़बूत है तुम्हारा ये…| उन्होंने कहा और फिर बिना कोई देर किए अपने होंठ मेरे लंड के टिप पर रख दिए। उनके गर्म और नम होंठों का स्पर्श पाकर मैं कराह उठा, |आआह्ह्ह्ह… आंटी…| फिर उन्होंने अपना मुँह खोला और मेरे पूरे लंड को अंदर ले लिया। वो बड़े आराम से और एक्सपर्ट की तरह मेरा लंड चूसने लगीं, उनकी ज़बान मेरे लंड के सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी, और उनका एक हाथ मेरे टाइट बॉल्स पर भी था, उन्हें धीरे-धीरे मसल रहा था। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और अपने कूल्हों को उनके मुँह के साथ ताल-मेल में चलाने लगा। वो मेरा लंड इतनी गहराई से चूस रही थीं कि कभी-कभी मेरा लंड उनके गले तक जा रहा था और वो फिर भी नहीं रुक रही थीं। मैंने सोचा था कि मैं ज़्यादा देर तक रुक पाऊंगा, लेकिन उनके मुँह की गर्मी और उनकी ज़बान की फुर्ती ने मुझे जल्द ही किनारे पर ला खड़ा किया।


मैंने चिल्लाकर कहा, |आंटी, मैं अब रिलीज़ करने वाला हूँ…| लेकिन उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला नहीं, बल्कि और ज़ोर से चूसने लगीं। और फिर मैं अपने ऊपर काबू नहीं रख सका और मेरा पूरा माल उनके मुँह के अंदर ही निकल गया। मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया और मैं ज़ोर-ज़ोर से कराह उठा। शालिनी आंटी ने मेरे माल की एक-एक बूंद को अपने मुँह में लेकर निगल लिया और फिर आखिरी बार मेरे लंड को चूसकर साफ कर दिया। उसके बाद उन्होंने अपना चेहरा ऊपर किया और मुस्कुराते हुए बोलीं, |तुम तो बहुत स्वादिष्ट हो रोहन।| मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस औरत को मैं अपनी आंटी और दोस्त के पापा की नई बीबी की तरह देखता था, उसने मेरे शरीर का रस अपने मुँह में लेकर पी लिया था। लेकिन ये तो बस शुरुआत थी।


अब बारी थी शालिनी आंटी को संतुष्टि देने की, क्योंकि वो अभी भी पूरी तरह से गर्म थीं और उनका शरीर मेरे लिए तड़प रहा था। मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया। रास्ते में वो मेरे गालों पर और गर्दन पर किस करती जा रही थीं और उनकी उंगलियाँ मेरे सीने पर मौजूद बालों से खेल रही थीं। बेड पर उन्हें लिटाकर मैंने उनकी साड़ी को पूरी तरह से अलग कर दिया और अब वो सिर्फ अपनी पैंटी में मेरे सामने लेटी हुई थीं। उनकी मुलायम जाँघें, सपाट पेट, और पूरी तरह से गीली हो चुकी चुत ने मुझे फिर से उत्तेजित कर दिया। मैंने झुककर उनके पेट पर हल्की-हल्की किसेस कीं और फिर उनकी जाँघों के बीच अपना चेहरा छुपा दिया। उनकी पैंटी के ऊपर से ही मैंने उनकी चुत को सूंघा और चाटना शुरू कर दिया। शालिनी आंटी ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगीं, |आआह्ह्ह्ह… रोहन… सीधा वहाँ मत करो… पहले ये उतार दो…| उनकी बात मानते हुए मैंने उनकी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींचा और फिर से उनकी टाँगों के बीच अपना सर रख दिया।


उनकी चुत से एक मीठी और तेज़ खुशबू आ रही थी, और वो पूरी तरह से भीग चुकी थी। मैंने अपनी ज़बान निकाली और सबसे पहले उनकी बाहरी लिप्स को चाटा। शालिनी आंटी का शरीर तड़प उठा और उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। फिर मैंने अपनी ज़बान को अंदर की तरफ घुसाया और उनके क्लिटोरिस को ढूँढ निकाला। जैसे ही मेरी ज़बान का नोक उनके क्लिट पर लगा, वो चीख पड़ीं, |हाआआअह्ह्ह्हह… हाँ… बिल्कुल वहीं… उह्ह्ह्ह…| मैं लगातार उनके क्लिट को चाटता और चूसता रहा, और बीच-बीच में अपनी ज़बान को उनकी चुत के छेद में डालकर अंदर-बाहर कर रहा था। उनका रस लगातार निकल रहा था और मैं उसे पी रहा था। वो मेरे बालों को इतनी ज़ोर से पकड़ रही थीं कि मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन उस दर्द में भी एक अलग ही मज़ा आ रहा था। मैंने अपनी एक उंगली उनकी चुत के अंदर डाली और धीरे-धीरे घुमाने लगा, और साथ ही साथ अपनी ज़बान से उनके क्लिट पर तेज़ी से वार करने लगा। और फिर वो पल आया जब शालिनी आंटी का पूरा शरीर अकड़ गया और वो एक लंबी सिसकारी के साथ झड़ गईं, |आआआअह्ह्ह्ह… रोक मत… मैं आ रही हूँ…| उनके शरीर से एक तेज़ झटका लगा और उनकी चुत ने मेरी ज़बान पर एक मीठा सा पानी छोड़ दिया जिसे मैंने लपक कर पी लिया।


दोनों की साँसें थोड़ी शांत हुईं और मैं उनके बगल में लेट गया। वो मेरी तरफ मुड़ी और मेरे सीने पर सर रखकर लेट गईं। मेरा लंड फिर से अकड़ चुका था और उनकी जाँघों से सटा हुआ था। उन्होंने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ा और बोलीं, |अभी भी इतना सख्त है? अब तो इसे पूरी तरह से अंदर लूंगी, अपनी चुत के अंदर।| ये शब्द सुनकर मेरे दिमाग की नसें फड़क गईं। मैं उनके ऊपर आ गया और उन्होंने अपनी टाँगें फैला कर मेरा स्वागत किया। मैंने अपने लंड के सिरे को उनकी चुत के भीगे हुए छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरकाने लगा। उनकी चुत इतनी गर्म और टाइट थी कि मेरा लंड अंदर जाते हुए एक अलग ही एहसास दे रहा था। जैसे-जैसे मैं अंदर जा रहा था, शालिनी आंटी की साँसें तेज़ हो रही थीं और वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।


जब मेरा पूरा लंड उनकी चुत के अंदर समा गया, तो हम दोनों ने एक साथ राहत की साँस ली। मैंने थोड़ी देर तक ऐसे ही रहने दिया ताकि वो मेरे लंड के साइज़ को फील कर सकें। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को हिलाना शुरू किया। पहले तो मेरी थ्रस्टिंग बहुत धीमी थी, लेकिन उनकी कराहट सुनकर मेरी गति बढ़ती गई। मैं उनकी आँखों में देख रहा था और वो मेरी आँखों में। उनके मुँह से निकल रही थीं, |हाँ… ऐसे ही… उह्ह्ह्ह… अंदर तक डालो… चोदो मुझे रोहन…| जब उन्होंने ‘चोदो’ शब्द कहा, तो मेरे अंदर का जानवर जाग गया और मैंने ज़ोर-ज़ोर से उन्हें चोदना शुरू कर दिया। हर एक थ्रस्ट के साथ बेड की चरमराहट और उनकी चूड़ियों की खनक कमरे में गूंज रही थी। मेरा लंड बार-बार उनकी चुत की गहराइयों में जा रहा था और उनका रस मेरे लंड और बॉल्स पर लगकर फिसलन भरी आवाज़ें पैदा कर रहा था। ये एक ऐसा संगीत था जो सिर्फ हम दोनों के लिए बज रहा था।


ये मिशनरी पोज़ीशन में हमने काफी देर तक चुदाई की, और फिर शालिनी आंटी ने कहा, |रुको, अब मैं तुम्हारे ऊपर आऊंगी।| ये सुनते ही मेरा दिल खुशी से नाच उठा। मैंने अपना लंड उनकी चुत से बाहर निकाला और पीठ के बल लेट गया। शालिनी आंटी मेरे ऊपर सवार हुईं और उन्होंने खुद अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चुत के छेद पर सेट किया। फिर धीरे-धीरे वो नीचे बैठ गईं, और मेरा पूरा लंड एक साथ उनके अंदर घुस गया। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने सर को पीछे की तरफ झुका लिया। अब वो खुद ही ऊपर-नीचे हो रही थीं, और मैं आराम से उनकी हरकतों का मज़ा ले रहा था। मैंने अपने हाथ उनके स्तनों पर रख दिए और उन्हें मसलने लगा। वो मेरे ऊपर ऐसे कूद रही थीं जैसे कोई घुड़सवार घोड़े पर सवारी कर रहा हो। उनके बाल खुले हुए थे और हवा में लहरा रहे थे, और उनकी चुत मेरे लंड को अपनी पकड़ में जकड़े हुए थी। वो बार-बार कह रही थीं, |लो… अब मैं तुम्हारा लौड़ा अपनी चुत में ले रही हूँ… उह्ह्ह्ह… कितना बड़ा है…| उनके ये शब्द सुनकर मेरी उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई थी।


फिर अचानक वो रुकीं और बोलीं, |चलो, अब पीछे से करने का मन कर रहा है।| ये सुनकर मेरी तो साँस ही रुक गई। मैंने कभी किसी के साथ डॉगी स्टाइल में सेक्स नहीं किया था, और शालिनी आंटी जैसी हसीना के साथ ये करने का ख्याल ही मुझे पागल कर रहा था। वो मेरे ऊपर से उठीं और बिस्तर पर चारों तरफ हो गईं, अपने नितंबों को मेरी तरफ ऊपर उठाया। उनकी गोल-मटोल गांड और उसके नीचे खुली हुई रसीली चुत का नज़ारा अद्भुत था। मैं उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया और एक बार फिर से अपने लंड को उनकी चुत के मुहाने पर ले गया। एक ही ज़ोरदार धक्के में मैंने अपना पूरा लंड उनकी चुत में डाल दिया। इस पोज़ीशन में मेरा लंड उनकी चुत में और भी गहराई तक जा रहा था, और हर थ्रस्ट के साथ वो ज़ोर से चीख मार रही थीं। मैंने उनकी कमर पकड़ ली और पागलों की तरह उन्हें चोदने लगा। मेरे बॉल्स उनकी जाँघों पर तेज़ी से टकरा रहे थे और आवाज़ हो रही थी चप-चप। मैंने अपना एक अंगूठा उनकी गांड के छेद पर भी रख दिया और हल्का-हल्का दबाव डालने लगा, जिसे महसूस करके वो और भी ज़ोर से चिल्ला रही थीं, |हाँ… रोहन… मुझे चोदते रहो… मुझे और चुदाई चाहिए…|


इसी पोज़ीशन में चुदाई करते हुए मुझे लगा कि अब मैं रिलीज़ करने वाला हूँ। मैंने और ज़ोर लगाकर अपनी गति बढ़ा दी और शालिनी आंटी भी अपने नितंबों को मेरी तरफ ज़ोर से धकेल रही थीं। और फिर आखिरकार वो पल आ गया जब मैं अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया। मैंने अपने लंड को उनकी चुत में जितना जा सकता था, उतना अंदर तक घुसेड़ दिया और अपना पूरा माल उनकी चुत के अंदर ही छोड़ दिया। मेरे माल की गर्म धाराओं ने शालिनी आंटी को भी एक और ऑर्गैज़म के लिए मजबूर कर दिया, और हम दोनों एक साथ ही काँपने लगे। मेरे शरीर की हर एक नस सुस्त पड़ गई और मैं उनकी पीठ पर गिर गया। हम दोनों हाँफ रहे थे और पसीने से लथपथ थे। मैं उनके ऊपर से हटा और उनकी तरफ मुड़कर लेट गया। उन्होंने आँखें बंद की हुई थीं और चेहरे पर एक अलग ही संतुष्टि की चमक थी।


कुछ देर बाद जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, तो शालिनी आंटी ने अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुरा कर मुझे देखा। |पता है रोहन, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, और आज मुझे सच्ची औरत होने का एहसास हुआ।| उनकी बात सुनकर मेरा मन थोड़ा उदास भी हुआ, क्योंकि मैं जानता था कि ये रिश्ता समाज के हिसाब से गलत था, लेकिन दिल से हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने थे। मैंने उन्हें गले लगा लिया और कहा, |आंटी, आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है।| रात बहुत गहरा चुकी थी और बारिश अब भी जारी थी। हमने बाकी रात एक-दूसरे के बाहों में बिताई, और सुबह होने से पहले मैं उनके घर से निकल आया ताकि किसी को शक न हो। उस रात के बाद भी मैं और शालिनी आंटी का ये सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा, और हर बार हमारी अन्तर्वासना हमें एक नए शिखर पर ले जाती थी। लेकिन जो हुआ वो सबसे पहली और सबसे यादगार रात थी, जिसने मुझे सिखाया कि प्यार और हवस में कोई उम्र नहीं होती, और किस्मत जब दरवाज़ा खटखटाए तो उसे खोल देना चाहिए।


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