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नौकरानी ने लिया मालिक में लंड का मजा: Antarvasna

Oct 14
5 min read

नमस्कार! मेरा नाम कामेंद्र है, दिल्ली से।


हमारे पीछे की गली में एक मकान था।

वो दो सौ गज का होगा, पर आधा ही बना था।

उसका मालिक मर चुका था।

अब उसका भाई ज्ञान चंद उसमें रहने के लिए आ गया था।


न्यूड मेड सेक्स कहानी तब शुरू हुई जब एक दिन ज्ञान के पास एक पति-पत्नी आए और बोले, “हमें किराए के लिए मकान चाहिए।”


ज्ञान ने आदमी की तरफ देखा।

आदमी पतला-दुबला था।

पर जब उसकी औरत की तरफ देखा, तब उसकी नज़र उसके पैर से होते हुए उसकी जांघ, उसकी नाभि, उसकी चूचियों को साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज़ के ऊपर से अंदर तक टटोल रही थी।


ज्ञान के मन में यह चल रहा था कि कब उसे निर्वस्त्र कर उसे चोदने लगे।

उसकी लंबाई आदमी से सही थी।

थोड़ी सांवली थी, पर उसका शारीरिक माप 32, 30, 34 था।

उसने घूंघट किया हुआ था, पर घूंघट से उसका चेहरा थोड़ा दिख रहा था।


ज्ञान ने शर्त रखी, “मैं तभी जगह दूंगा जब तुम मेरे घर की साफ-सफाई करोगी, घर का ध्यान रखोगी और मुझे खाना बनाकर खिलाओगी।”


उसका नाम सांवरी था, उसने हां में सिर हिलाकर जवाब दिया और घर में चली गई।

उस औरत की उम्र उस समय तीस के आसपास थी और उस मालिक के भाई की भी अड़तीस होगी।


अगले दिन सुबह चार बजकर तीस मिनट पर वो उठी।

सब कुछ करने के बाद नहाने के लिए जैसे ही उसने हैंडपंप चलाया, मालिक के भाई ज्ञान की आंख खुल गई।

उसे लगा कि इतनी रात को कौन हैंडपंप चला रहा होगा।


उसने झट उठकर कमरे से बाहर निकलकर देखा कि यह कोई और नहीं, उसके किरायेदार की बीवी है, ऊपर से पूरी नंगी होकर नहा रही थी।


उसके स्तन खुले हुए देखकर ज्ञान का लंड बाहर निकल आया।


थोड़ी देर में सांवरी ने अपने शरीर को पूरा नंगा कर दिया।

उसके भीगे सांवले बदन को सहलाने का मन कर रहा था।

उसकी चूत पर पूरी झांटों का जंगल था।

अब उसने मूतना शुरू किया।


ये देखकर ज्ञान ने अपने हाथ से लंड बाहर निकालकर मुठ मारनी शुरू की।

थोड़ी देर में उसके लंड से बहुत-सा वीर्य गिरा, जो उस सांवरी के पैरों में लगा। उसे अजीब-सा लगा, जैसे कोई उसे नहाते हुए देख रहा हो।


उस वीर्य को अपने पैरों से साफ करने से उसमें ताज़े मर्द के मल की खुशबू आई।

अब उसे शक हुआ कि ज़रूर किसी ने उसके स्तन खुले हुए देखकर मुठ मारी है।


अब उसे अपने मकान मालिक पर शक होने लगा, पर उसने उस ओर ध्यान नहीं दिया।


अगले दिन ज्ञान आंगन में चारपाई दाल कर सो गया.


सुबह अँधेरे में सांवरी नहाने आई।


ज्ञान की लुंगी लंड से ऊपर उठी हुई थी, जिससे उसका लंड बाहर निकल आया था।


सांवरी की निगाह उसके खड़े लंबे काले लंड पर पड़ी।

उसने अभी तक पराया लंड देखा ही नहीं था.


बड़ा लंड देख उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं।


इधर ज्ञान ये सब लेटे हुए आंख बंद करके देख रहा था।


अब सांवरी पीछे वाले कमरे में चली गई और पूरे कपड़े उतारकर फेंक दिए।

वो चूत में तेल लगाने लगी और अपनी उंगली से उसके लंड को याद कर मुठ मारने लगी।

ये सब करते हुए वो उसको दरवाज़े में बने हुए छेद से देख रहा था।


जैसे ही उसका पानी निकल गया, ज्ञान फिर से आकर चारपाई पर लेट गया.


अब सांवरी ने कपड़े पहने, शृंगार किया और चाय बनाकर मालिक ज्ञान को देने के लिए ले गई।


उसकी निगाह अभी भी उसके खड़े लंड पर पड़ी।

अब वो अपनी जीभ निकालकर अपने होठों पर फिरा रही थी।


उसने आवाज़ दी, “चाय पी लीजिए!”


मालिक ने उसके हाथ से चाय लेने के बहाने उसके हाथों को पकड़ लिया।

तब वो बोली, “यह क्या कर रहे हैं आप?”


वो बोला, “दूध पीना है।”

वो बोली, “कोई नहीं, मैं दूध ले आती हूं।”


ज्ञान बोला, “कहीं से लाने की ज़रूरत नहीं। मैं तुम्हारा दूध पीना चाहता हूं।”


“यह कैसी बात कर रहे हैं आप? किसी पराई औरत को नंगी नहाते हुए देखकर मुठ मारते हो!”


तब उसने कहा, “हां, मैं तुम्हें पहले दिन से ही चोदना चाहता हूं, जब से तुम्हें नंगी नहाते हुए देखा था!”


यह कहते ही उसने उसके चेहरे से घूंघट हटाकर उसका पल्लू से उसकी साड़ी उतारकर फेंक दी।


वो बोली, “यह क्या कर रहे हैं आप? किसी पराई औरत को चोदना चाहते हैं? यह गलत है!”


उसने अब उसके पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया, जिससे पेटीकोट नीचे गिर गया।

अब वो सिर्फ पैंटी में रह गई नीचे से। अब उसने उसके ब्लाउज़ को उतारकर फेंक दिया।

अब वो सिर्फ ब्रा-पैंटी में रह गई।


जैसे ही ब्रा खींची, हुक खुल गए और उसके स्तन बेपर्दा हो गए।

उसके स्तन के ऊपर काले रंग के चुचुक मस्त लग रहे थे।


उसने अपने हाथों से अपने स्तन को ढकने की कोशिश की, पर तभी उसने उसकी पैंटी को उतारकर फेंक दिया और उसकी झांटों के जंगल से ढकी चूत साफ दिख रही थी।


अब एक हाथ से स्तन और दूसरे हाथ से चूत को ढकने की कोशिश कर रही थी, पर उसमें वो नाकाम थी।

कभी उसकी चूत खुली रह जाती, कभी उसके उरोज।


वो वहां से उसके सामने नंगी ही भागी।

भागते हुए उसके पैर में कुछ चुभ गया, उसके मुंह से चीख निकल गई।


उसने दर्द के कारण एक टांग उठा ली, जिससे उसकी चूत का मुंह खुल गया।


इसी का फायदा उठाकर ज्ञान ने उसको नंगे बदन में ही गोद में उठा लिया और उसके गालों को चूमने लगा।

फिर उसके होठों को चूसने लगा।

थोड़ी ही देर में उसके स्तन दबाने, चूसने और पीने लगा।


नीचे आते ही उसकी नाभि को चाटना शुरू किया।

फिर उसकी जांघों को फैलाकर उसकी चूत में उंगली डालकर गरम कर रहा था और उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।


चाटते हुए उसने उसको स्खलित कर दिया और सारा योनि रस पी गया।


फिर उसके मुंह में अपना लंड खड़ा कर दिया और उसके बाल पकड़कर आगे-पीछे करने लगा।

बहुत-सा वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया।

वो भी पूरा वीर्य पी गई और सारा वीर्य चाटकर लंड को साफ कर दिया।


उसके बाद उसने उसकी जांघों पर हाथ रखकर दोनों टांगें फैला दीं और रस से चिकनी चूत में अपना काला, लंबा, मोटा, खड़ा हुआ लंड एक ही बार में घुसा दिया।

उसकी चीख निकल गई क्योंकि आज तक उसकी सील भी ढंग से तोड़ नहीं पाया था उसका आदमी।

और वो प्यासी थी।

कई सालों से मां भी नहीं बन पाई थी अपने आदमी की वजह से।


उसको वो चोदता रहा।

चोदते हुए पायल की छन-छन और चूड़ियों की खन-खन की आवाज़ आ रही थी।


काफी देर बाद बहुत-सा वीर्य उसकी चूत में भर गया।

और उसके बाद भी कई बार उसने उस औरत सांवरी के साथ सम्भोग किया।

नौ महीने बाद उसके बच्चे की मां बन गई।


Antarvasna कैसी लगी आपको?

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