पति के पार्टनर ने मेरी चूत का मजा लिया-१: Hindi Sex Stories
दोस्तो, जैसे कि आप सबने पारुल गोवा की कहानी
पारुल की गोवा ट्रिप 1&2 को बहुत ही ज्यादा प्यार दिया था. उसको मेरे नाम पर क्लिक करके पढ़ सकते है।
उसी से उत्साहित होकर आज मैं आप सबके लिए पारुल का उस के भाई के साथ सेक्स का कहानी लेकर आया हु। ये स्टोरी भी मुझे कविता भाभी ( मेरी मकान मालकिन) ने बता है ।
आगे की कहानी पारुल के शब्दो मे ।
इस कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि मेरे भाई ने कैसे मुझे असली हनीमून का अहसास करवाया.
दोस्तो, मेरा एक कजिन भाई विकाश है जो की मेरे पति का मेरे शादी के बाद दोस्त भी बन गया और अब दोनों का साथ मे सारनाथ मे रेटोरेंट हैं. लंका रोड वाले रेस्टोरेंट पर मेरे पति रहते है और सारनाथ वाले रेस्टोरेंट पर विकाश रहता है।
विकास अभी कुंवारा है पर बहुत ही हरामी है, वो कई लड़कियों के साथ सुहागरात मना चुका है.
मेरे पति ने बताया था कि इससे ज्यादा बात करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसकी आदतें अच्छी नहीं हैं. जबकि मै विकाश को बचपन से जान रही थी लेकिन अपने पति को ऐहसास नही होने दिया की मुझे उस के बारे मे सब पता है ।
लेकिन पिछले साल 2025 मे मेरे पति का प्रयागराज में एक बिज़नेस ट्रिप था, तो मैंने कहा कि मैं भी घर बैठी बैठी बोर हो गयी हूँ तो मैं भी साथ चलती हूँ.
उन्होंने कहा- अच्छा ठीक है तुम पैकिंग कर लो. जब जा ही रहे हैं तो दो दिन घूम भी लेंगे, माइंड फ्रेश हो जाएगा.
तो मैं उत्साहित ही गई थी कि अन्ततः कहीं बाहर घूमने जा रहे हैं.
मैंने जल्दी से पैकिंग शुरू कर दी।
अगले दिन हम करीब एक बजे दोपहर में प्रयागराज के होटल में पहुंच गए, जहां हम लोगों का रूम बुक था.
मेरे पति रिसेप्शन पर जिस वक्त फॉर्म भर रहे थे, मैं जाकर लॉबी में एक सोफे पर बैठ गयी.
तब मैंने डीप नेक ब्लाउस पहन रखी थी.
मैंने नोटिस किया कि सामने एक मोटा आदमी बैठा था जो मेरी गोरी छाती की तरफ ही घूरे जा रहा था.
मेरे खुराफाती दिमाग में एक आईडिया आया, मैंने सोचा इतने टाइम से कोई फन भी नहीं किया है तो क्यों न थोड़ी मस्ती की जाए.वैसे भी मै यहाँ नयी थी तो किसी को क्या पता चलेगा कि कौन है.
मैं जानबूझ कर थोड़ा और टेढ़ी होकर बैठ गयी अपनी एक टांग दूसरी के ऊपर रख कर.
मेरी ऐसी स्थिति में उस आदमी को अब मेरी गोरी छाती के साथ साथ मेरी गोरी मोटी गांड के उभार भी साफ़ साफ़ दिखाई देने लगे थे. मुझे दूसरों को टीज़ करना बहुत अच्छा लगता है.
वो मोटा आदमी तो मानो ख़ुशी से पागल ही हो गया, वो अपनी पैंट के ऊपर से ही अपना रिटायर्ड लंड ठीक करने लगा मानो उसे लंड खड़ा होने का अहसास हो गया था.
इतनी देर में मेरे पति ने मुझे इशारा कर दिया कि चलो रूम की चाबी मिल गयी है और मैं वहां से उठ कर चल दी.
वो मोटा आदमी, जब तक मैं उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गयी, पीछे से मेरी मोटी मटकती हुई गांड को निहारता रहा.
हम लोग थोड़ा आराम करने के बाद 4 बजे के आस-पास बाहर घूमने आये ।
वहां जाते ही मैंने चेंज कर लिया था।
मेरे पति फ़ोन पर बात कर रहे थे और फ़ोन बंद करते ही वो कुछ परेशान से हो गए.
मैंने पूछ लिया कि किसका फ़ोन था और परेशान क्यों लग रहे हो?
वो बोले- भैन का लंड यहां भी एक मुसीबत आ ही गयी है.
मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि इतना बड़ा क्या हो गया.
अगर मीटिंग कैंसिल भी हुई होती तो कभी उन्हें ऐसे नहीं देखा था.
मैंने कहा- चलो आप रिलैक्स हो जाओ … आराम से बताओ, क्या हुआ है?
वो बोले- जिस क्लाइंट से मीटिंग है वो मादरचोद विकास का क्लाइंट है.
मैंने कहा- तो इसमें इतनी परेशानी की क्या बात हो गयी?
मेरे पति ने बताया- वो बड़ा हरामी लड़का है. बहुत उल्टा सीधा बोलता है, लड़कियों की इज़्ज़त नहीं करता और तो और … तुम्हारे बारे में भी कह रहा था!
ये कहते ही वो अचानक से चुप हो गए.
मैं हैरान थी कि मेरे बारे में कैसे … मै तो उस की बहन हु?
मैंने फिर से पूछा कि क्या … मेरे बारे में क्या?
वो बोले- कुछ नहीं, छोड़ो ऐसे ही.
मैंने कहा- नहीं मुझे बताओ, क्या बात है?
उन्होंने बताया कि उन्हें कई दूसरे लोगों ने बताया है कि ये विकास बाकी सब लड़कियों की तरह तुम्हारे बारे में भी अनाप-शनाप बोलता रहता है.
मैंने आश्चर्य से पूछा- मेरे बारे में कैसे?
फिर एक पल रुक कर मैंने दोबारा से कहा- अच्छा क्या बोलता है मेरे बारे में?
“जाने दो, तुम्हें क्या करना है?” मेरे पति धीमी आवाज़ में बोले.
मैंने कहा- मुझे क्यों नहीं करना … मेरे बारे में कोई कुछ बोले, मुझे पता तो होना चाहिए?
“रमेश बता रहा था कि किसी पार्टी में सब लोगों के सामने बोल रहा था कि गांड तो पंकज की वाइफ की है बस … खूब मज़े देती होगी पंकज को …”
एकदम से उत्तेजित होकर मेरे पति बोले और चुप हो गए.
मैं भी एक पल के लिए सुन्न हो गयी.
मैंने पानी का गिलास पंकज को दिया और उनकी पीठ को सहलाया और उन्हें शांत होने को कहा- आप पानी पियो … ऐसे तो बहुत लोग कुछ भी बोलते हैं. सबकी बातों को इतना सीरियसली लोगे, तो कैसे चलेगा?
वो अभी भी खराब मूड में थे.
मैंने उनका मूड चेंज करते हुए कहा- उल्टा तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारी बीवी की गांड इतनी मस्त है कि मेरा का भाई भी मेरी गांड का इतना दीवाना है.
मेरी इस बात पर मेरे पति की हंसी निकल गई और हम दोनों इस बात पर हंसने लगे.
वो हंसते हुए बोले- यार, तुम भी कभी कभी बड़ी हरामीपने की बातें करती हो.
मैं मन ही मन सोच रही थी कि डार्लिंग मैं तो शुरू से ही हरामन हूँ. वो बोले- चलो, फिर भी तुम ख्याल रखना … उससे थोड़ी दूरी बनाकर ही रखना.
मैं हम्म कह कर चुप हो गई.
मेरे पति भी इतना कह कर खड़े हो गए और मुझसे बोले- अच्छा तुम यहीं रहना … मैं मिल कर आता हूँ.
मैंने देखा कि दूसरी तरफ जो रेस्टोरेंट बना हुआ था, मेरा भाई विकाश बैठा था और उसके साथ वही मोटा आदमी था, जो कि होटल की लॉबी में मेरी गोरी टांगें और मेरी मोटी गांड को ताड़ रहा था.
मेरे पति भी उसी टेबल पर जाकर बैठ गए.
थोड़ी देर बात करने के बाद मेरे पति और वो मोटा आदमी वहां से उठ कर कहीं जाने लगे.
मेरे पति ने दूर से मुझे इशारे से समझाया कि मैं यहीं पर प्रतीक्षा करूं, वो अभी थोड़ी देर में आ जाएंगे. इतने में मैंने देखा विकाश बड़ी हरामी नज़रों से मेरे गोरे व मोटे मम्मे उनको ताड़ रहा था.
मैंने एक पल के लिए नज़र नीचे कर लीं और दुबारा तिरछी नज़र से देखने की कोशिश की, तो वो चलते हुए मेरी तरफ ही आ रहा था. उसके चेहरे पर बहुत हरामी स्माइल थी.
उसे अपनी ओर आता देख कर मेरी तो गांड ही फट गयी.
मैं एकदम से घूम गयी और मेरे न चाहते हुए अब उसका ध्यान मेरे मोटे मम्मों से हट कर मेरी मोटी गांड पर चला गया.
उसी वजह से वो हरामी विकाश मेरे पीछे से गुज़रते हुए कमेंट पास करके गया- बहना की गांड तो और भी मस्त लग रही है.
ये सुन कर मेरे पूरे बदन में जैसे करंट दौड़ गया.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं गुस्सा करूं या खुश हो जाऊं. मेरा कजिन भाई मेरे बारे मे ऐसा बोल रहा है ।
मैंने सिर्फ अपना सर झुका लिया और अपने फ़ोन में ऐसे देखने लगी, जैसे मैंने वो सब सुना ही न हो, जो उसने बोला था.
इतने में मेरे कानों में मेरे पति की आवाज़ आयी- पारुल, चलो चलते हैं.
मैंने जैसे ही पलट कर देखा तो वो विकाश और वो मोटा आदमी मेरे पति से हाथ मिला कर जा रहे थे.
हम लोग अपने रूम की तरफ बढ़ते हुए जा रहे थे.
मेरे पति ने मुझसे धीमी आवाज़ में पूछा- ये विकास तुम्हें क्या कह रहा था?
चूंकि हम लोग होटल के कॉरिडोर से गुज़र रहे थे, तो उनका धीमी आवाज में पूछना लाजिमी था.
मेरी आंखों में जैसे अजीब सी चमक आ गई थी और मैंने अपनी वो चमक को दबाने का भरसक प्रयास करते हुए कहा- मुझे तो मालूम ही नहीं, मैं तो अपनी सहेली कविता से फ़ोन पर बात कर रही थी.
लेकिन मन ही मन मैं सोचने लगी कि यार ये तो बिल्कुल मेरा आइडियल मैन है जैसा बन गया है … बिल्कुल वैसा, जैसे लड़के मुझे अच्छे लगते हैं. बॉडी बिल्डर और हरामीपन … वाह क्या कॉम्बिनेशन है.
मैंने अपने शादी के बाद से ही विकाश को बहुत कम बार देखा था तो अब वो बिल्कुल बदल गया है । बॉडी बिल्डर बन गया है।अब शाम हो चुकी थी.
हम लोग अभी सोच ही रहे थे कि डिनर के लिए बाहर कहां जाना है. इतने में हमारे रूम की डोरबेल बजी.
पंकज ने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो सामने विकास वाइन की बोतल हाथ में लेकर खड़ा था. मेरे पति उससे कुछ कह पाते, इससे पहले वो सीधा रूम में दाखिल हो गया.
वाइन की बोतल को मेरे हाथ में देते हुए बोला- ये तुम्हारे लिए मेरी प्यारी बहना ।
ये कहते ही उसने मुझे एक फ्रेंडली हग देते हुए गले से लगा लिया और मेरी मोटी गांड का हल्का सा स्पर्श ले लिया.
इतने में मेरे पति बोले- अरे विकास, तुम यहां कैसे आ गए … और वर्मा साब कहां हैं?
मुझे एक पल के लिए लगा कि पंकज ने विकास को मेरी मोटी गांड सहलाते हुए देख लिया है लेकिन उन्होंने कुछ नहीं देखा था.
वो विकास के पीछे थे तो विकास मेरे पीछे क्या कर रहा है, वो उन्हें पक्का नहीं दिखा था.
मैं वाइन की बोतल को टेबल पर रख कर जल्दी से वाशरूम की ओर भागी क्योंकि विकास के अचानक ऐसे मेरी गांड को सहलाने से मेरी चूत ने एकदम काफी पानी छोड़ दिया था.
मेरी पैंटी मेरी ब्लैक मिनी ड्रेस के अन्दर पूरी गीली हो रही थी.
मैं जब पैंटी चेंज करने के बाद रूम में वापिस आयी तो विकास के चेहरे पर एक हरामी स्माइल थी और वो हवस वाली नज़रों से मेरी चूत की तरफ ऐसे देख रहा था मानो उसे पता चल गया हो कि मैं क्या करके आयी हूँ.
जैसे ही मैं जाकर पंकज के साथ बैठी.
हम लोग ड्रिंक करते हुए बात कर रहे थे और अब काफी फ्रैंक भी हो गए थे.
इतने में विकास के फ़ोन पर एक कॉल आया जो उसी वर्मा का था, जो इनका क्लाइंट था और ये लोग उसके साथ मीटिंग करने आये थे.
विकास ने कुछ बात करके फ़ोन रख दिया और मेरे पति से कुछ कहने लगा. मैं तो दो ड्रिंक के बाद वैसे ही थोड़ा टिप्सी हो रही थी, आधी बातें मुझे समझ ही नहीं आ रही थीं.
मैंने जब से विकाश को आज देखा है तब से ही पागल हो गयी हु की मेरा आईडीयल मैन मेरा भाई ही है मै इस से चुदना चाहती हु पर विकाश मेरा भाई है तो मै रिश्तों की लाज के वजह से खुद से पहल नही करना चाहती थी पर अगर मेरे भाई ने पहल किया तो बिल्कुल पीछे नही हटूंगी ।
हम तीनों लोग अब बेड पर बैठे थे. एक तरफ मैं और मेरे पति थे, दूसरी ओर सामने विकास बैठा था. इतने में मुझे महसूस हुआ कि विकास ब्लैंकेट के अन्दर मेरी चिकनी टांगों को सहला रहा है और मेरा पैर अपनी पैंट के ऊपर से ही अपने आधे खड़े लंड पर रगड़ रहा था.
मैंने महसूस किया कि उसका लंड किसी मोटे खीरे से कम नहीं महसूस हो रहा था. लंड की मोटाई महसूस करते ही मेरी चूत में तो जैसे आग लग गयी हो . मेरा मन हो रहा था कि कैसे मैं एक बार विकास का लंड हाथ में पकड़ूं, कैसे एक बार मुँह में लेकर चूस लूँ, चाट लूँ.
मेरे पैर से उसके मोटे लंड को मसलते हुए मुझे इतना तो पता चल ही गया था कि उसने पैंट के नीचे कुछ नहीं पहना है.
इतने में पंकज उठ कर वाशरूम की ओर चले गए. वो जैसे ही वाशरूम में गए विकास ने मुझे टांगों से पकड़ कर इतनी ज़ोर से अपनी तरफ खींचा और जब तक मैं कुछ समझ पाती, वो मेरे होंठ मुँह में लेकर चूसने लगा.
मुझे भी जैसे मौका ही चाहिए था, मैंने झट से अपना दायां हाथ उसके मोटे लंड पर रखते हुए उसके कान में कहा- बहुत मोटा और आग की तरह गर्म है भाई तुम्हारा लंड.
वो बोला- अभी तो ये आधा खड़ा है और पैंट में कैद है. एक बार आज़ाद हो गया तो बहन तेरी चूत से होकर तेरे हलक तक चोट मारेगा.
वो इतनी बुरी तरह से मेरे मोटे मम्मे मसल रहा था, जैसे आज उखाड़ ही डालेगा. मैंने भी उससे कहा कि मुझे तुम्हारा लंड चाहिए … जैसे भी दो, बस दे दो, मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है. उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी थोंग पैंटी को फाड़ते हुए मुझे नीचे से पूरी नंगी कर लिया. फिर मेरी चिकनी गोरी चूत पर तीन चार थप्पड़ लगाते हुए कहा- ये लंड इतनी आसानी से नहीं मिलता, इसके लिए तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा.
मैंने उत्सुकता से कहा- हां हां कुछ भी करवा लो … बस मुझे चाहिए.
ये सुनते ही उसने मुझे पीछे की ओर धक्का देते हुए कहा- तो बस … फिर अगर मेरा लंड लेना है तो मेरी हां में हां मिलाती रहना.
ये बोल कर वो ठीक होकर बैठ गया और मुझे भी पीछे कर दिया क्योंकि मेरे पति की वाशरूम से बाहर आने की आवाज़ आ रही थी.
हम लोग वापिस अपनी अपनी जगह पर ऐसे बैठ गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो.
जैसे ही पंकज बाहर आये, विकास उठ कर खड़ा हो गया और मेरे पति से बोला- चलो अब पारुल को सोने देते हैं, आप चलो मेरे साथ मेरे रूम में, वर्मा साब भी वेट कर रहे होंगे. उनसे भी कुछ काम की बात कर लेते हैं. मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं इस उल्लू के पट्ठे को चूत चोदने को कह रही हूँ और ये मेरे पति को भी दूसरे रूम में लेकर जा रहा है.
कम से कम मैं अपने पति के साढ़े पांच इंच के लंड से ही चूत चुदवा लेती, क्योंकि उस वक्त मेरी चूत में चुदने की ऐसी आग लगी हुई थी कि मुझे बस लंड चाहिए था.
मैं गुस्से से मुँह पलट कर लेट गयी बिना कोई जवाब दिए … और वो लोग दरवाज़ा बंद करके बाहर चले गए. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अब अपनी वेट पुसी की आग कैसे बुझाऊं.
दोस्तो, चूत में लंड तो गया और विकास का लंड ही गया.
मगर वो सब कैसे हुआ और उस मोटे क्लाइंट के साथ क्या सीन हुआ.
वो सब मैं आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में बताता हु ।.
आपको अभी तक की Hindi Sex Stories कैसी लगी? मुझे मेल और कमेंट्स में बताएं.

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