पापा के साथ बगल के फ्लैट वाली आंटी की चुदाई देख मेरी चुत हुई गर्म: Hindi Sex Stories
मेरा नाम Hindi Sex Stories रिया है और मेरी उम्र उस वक़्त 21 साल थी। मैं अपने पापा के साथ शहर के एक अपार्टमेंट में रहती थी, क्योंकि मेरी माँ का देहांत पाँच साल पहले हो गया था और अब घर में सिर्फ मैं और पापा थे। पापा का नाम मैं इस कहानी में राजीव बता रही हूँ और उनकी उम्र उस वक़्त करीब 48 साल रही होगी। पापा एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर मैनेजर थे और उनका शरीर आज भी किसी जवान आदमी जैसा गठीला था।
हमारे बगल वाले फ्लैट में एक आंटी रहती थीं, जिनका नाम मैं इस कहानी में मीना आंटी बता रही हूँ और उनकी उम्र उस वक़्त करीब 38 साल रही होगी। मीना आंटी का तलाक हो चुका था और वह अकेली रहती थीं। वह बहुत खूबसूरत थीं, लंबी, गोरी और उनका शरीर ऐसा तराशा हुआ था जैसे किसी कारीगर ने बड़े प्यार से बनाया हो। वह हमेशा घर में हल्के कपड़े पहनती थीं, शॉर्ट्स और टॉप या फिर पतली नाइटी, और उनके लंबे काले बाल हमेशा खुले रहते थे।
मैंने कई बार देखा था कि पापा और मीना आंटी एक-दूसरे से बहुत दोस्ताना तरीके से बात करते थे और कभी-कभी शाम को एक साथ बैठकर चाय भी पीते थे। मुझे पहले तो यह सब सामान्य लगता था, लेकिन धीरे-धीरे मुझे शक होने लगा कि उन दोनों के बीच कुछ और भी है। मेरी अन्तर्वासना मुझे बार-बार उसी दिशा में धकेल देती थी और मैं उन दोनों को छिपकर देखने लगी थी।
उस दिन की बात है जब पापा ने मुझसे कहा कि वह मीना आंटी के घर कुछ काम से जा रहे हैं और देर से आएँगे। मैंने हामी भर दी और पापा चले गए। लेकिन मेरे अंदर की जिज्ञासा मुझे चैन नहीं लेने दे रही थी। मैं धीरे से अपने फ्लैट से निकली और मीना आंटी के फ्लैट के दरवाज़े के पास गई। दरवाज़ा पूरी तरह से बंद नहीं था और उसमें से थोड़ी सी झिरी दिखाई दे रही थी। मैंने उस झिरी से अंदर झाँका और जो दृश्य मेरी आँखों के सामने था, उसने मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खींच ली।
पापा और मीना आंटी दोनों उनके बेडरूम में थे और वे एक-दूसरे को चूम रहे थे। मीना आंटी ने अपनी नाइटी पहन रखी थी और पापा ने अपनी शर्ट उतार दी थी। मीना आंटी पापा की छाती पर अपने होंठ फेर रही थीं और पापा उनकी कमर पर अपने हाथ रखकर उन्हें अपनी तरफ खींच रहे थे। मैंने अपनी साँस रोक ली और उसी झिरी से देखती रही, क्योंकि मेरे अंदर का कुछ हिस्सा मुझे वहाँ से हटने नहीं दे रहा था।
पापा ने धीरे से मीना आंटी की नाइटी की स्ट्रैप को उनके कंधे से सरकाया और उनकी नाइटी उनके शरीर से नीचे खिसकने लगी। मीना आंटी के बड़े-बड़े स्तन उनके सामने नंगे हो गए और पापा ने उन्हें अपने दोनों हाथों में भरकर मसलना शुरू किया। मीना आंटी ने अपना सिर पीछे कर लिया और उनके मुँह से एक धीमी आह निकली। पापा ने मीना आंटी के एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया और दूसरे को अपने हाथ से दबाने लगे।
मैं दरवाज़े की झिरी से यह सब देख रही थी और मेरी चूत में एक अजीब सी गर्मी महसूस होने लगी। मैंने अपनी जाँघों को आपस में रगड़ना शुरू किया और मेरी चूत से रस निकलने लगा। पापा ने मीना आंटी की नाइटी को पूरी तरह से उतार दिया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उन्होंने अपनी पैंट और कच्छा भी उतार दिया और उनका लंड पूरी तरह से तना हुआ बाहर आ गया। वह लंबा, मोटा और उसका सिरा लाल था, जिससे रस टपक रहा था।
मीना आंटी ने पापा के लंड को देखकर अपनी आँखें बड़ी कर लीं और अपनी जीभ से अपने होंठों को गीला किया। उन्होंने पापा को अपने पास बुलाया और उन्हें अपने ऊपर चढ़ने का इशारा किया। पापा ने अपने लंड के सिरे को मीना आंटी की चूत के द्वार पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। मीना आंटी ने ज़ोर से साँस ली, |आआह्ह्ह| और अपने पैरों को पापा की कमर के चारों ओर लपेट लिया। पापा ने अपने लंड को धीरे-धीरे और अंदर धकेला और मीना आंटी की चूत की दीवारें उसे कसकर पकड़ने लगीं।
जब पापा का पूरा लंड मीना आंटी की चूत के अंदर समा गया तो उन्होंने अपने कूल्हों को आगे-पीछे करना शुरू किया। मीना आंटी ने अपनी उंगलियों से पापा की पीठ को खरोंचना शुरू किया और अपने कूल्हों को उनके धक्कों के साथ मिलाने लगीं। बिस्तर चरमरा रहा था और उनकी चुदाई की आवाज़ें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। पापा मीना आंटी के कान के पास आकर कहने लगे, |मीना, तुम्हारी चूत बहुत कसी हुई है, मेरा लंड तुम्हारे अंदर फँसा हुआ है, तुम सच में चुदक्कड़ निकलीं|
मीना आंटी उनकी इन बातों से और भी उत्तेजित हो गईं और उन्होंने पापा को और ज़ोर से चोदने के लिए कहा। पापा ने अपनी गति तेज कर दी, अब उनके धक्के इतने ज़ोरदार थे कि मीना आंटी का पूरा शरीर बिस्तर पर ऊपर-नीचे हो रहा था। मीना आंटी के स्तन उनके धक्कों के साथ हिल रहे थे और पापा बारी-बारी से उन्हें अपने मुँह में भरकर चूस रहे थे। मीना आंटी की चूत से लगातार रस निकल रहा था जो पापा के लंड और उनकी जाँघों को पूरी तरह से भिगो रहा था।
मैं दरवाज़े की झिरी से यह सब देख रही थी और मेरी चूत पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। मैंने अपनी सलवार के ऊपर से अपनी चूत को सहलाया और मेरे मुँह से एक धीमी आह निकली। मैंने अपनी उंगलियाँ अपनी कच्छी के अंदर डालीं और अपनी चूत को रगड़ने लगी। पापा ने कुछ देर तक इसी पोजीशन में मीना आंटी को चोदने के बाद उन्हें बिस्तर से उठाया और घुटनों के बल झुका दिया। अब मीना आंटी कुत्ते की तरह झुकी हुई थीं और उनकी चूत पीछे से पापा के सामने पूरी तरह से खुली हुई थी।
मीना आंटी ने अपने हाथों को बिस्तर के किनारे पर टिका दिया और अपने कूल्हों को पापा के धक्कों के साथ पीछे धकेलने लगीं। पापा ने मीना आंटी के बालों को पकड़कर उनकी गर्दन को हल्के से पीछे खींचा और उनकी पीठ पर अपने होंठ फेरने लगे।
मीना आंटी बार-बार कराह रही थीं, |आआह्ह्ह, राजीव, और तेज करो, मेरी चूत को पूरी तरह से चोद दो| और पापा उनकी बात सुनकर और भी उत्तेजित होकर उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। उनके लंड का हर धक्का मीना आंटी की चूत के अंदर एक अलग ही तरह का आनंद पैदा कर रहा था। मीना आंटी की चूत की माँसपेशियाँ सिकुड़ने लगी थीं और वह अपने चरम के करीब पहुँच रही थीं। पापा ने भी महसूस किया कि मीना आंटी झड़ने वाली हैं और उन्होंने अपनी गति और तेज कर दी।
आखिरकार मीना आंटी अपने चरम पर पहुँच गईं और उनकी चूत से रस की धारा बह निकली। वह ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह| और उनका पूरा शरीर काँपने लगा। पापा ने उन्हें झड़ते हुए देखकर अपने लंड को और ज़ोर से मीना आंटी की चूत के अंदर धकेला और कुछ ही पलों में उन्होंने भी अपना वीर्य मीना आंटी की चूत की गहराई में छोड़ दिया। उनका गर्म वीर्य मीना आंटी की चूत के अंदर फैल गया और मीना आंटी ने एक लंबी आह भरी। पापा मीना आंटी की पीठ पर झुक गए और वे दोनों कुछ देर तक उसी पोजीशन में पसीने से लथपथ पड़े रहे।
मैं दरवाज़े की झिरी से यह सब देख रही थी और मेरी चूत से रस बह निकला था। मैं धीरे-धीरे पीछे हटी और अपने फ्लैट में वापस आ गई। मैं अपने बिस्तर पर लेट गई और मेरे मन में वही दृश्य बार-बार आ रहा था। मेरी चूत अब भी गर्म थी और मैंने अपनी उंगलियों से अपनी चूत को सहलाया। मैंने कल्पना की कि मैं मीना आंटी की जगह हूँ और पापा मुझे चोद रहे हैं। मैं इन कल्पनाओं में इतनी खो गई कि मेरी चूत से फिर से रस बह निकला और मैं तृप्त होकर सो गई।
उस दिन के बाद मैं कई बार छिपकर पापा और मीना आंटी को देखती रही। हर बार मेरी चूत गर्म हो जाती और मैं अपनी चूत को सहलाकर खुद को तृप्त करती। मैंने देखा कि पापा और मीना आंटी का रोमांस अब पहले से ज्यादा गहरा हो गया था और वे हर बार नए-नए तरीकों से एक-दूसरे को संतुष्ट करते थे। कभी मीना आंटी पापा के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसतीं, कभी पापा उन्हें दीवार के सहारे खड़े-खड़े चोदते, और कभी वे फर्श पर ही एक-दूसरे में समा जाते।
एक रात की बात है, मैंने देखा कि मीना आंटी ने पापा को अपनी चूत पर बैठाकर ऊपर-नीचे किया, जिसमें उनके स्तन उछल-उछल कर पापा के चेहरे पर पड़ रहे थे और पापा उन्हें चूसते हुए मीना आंटी के कूल्हों को पकड़कर उन्हें और ज़ोर से नीचे पटक रहे थे। मीना आंटी की चूत पापा के लंड को पूरी तरह से निगल रही थी और हर बार जब वह नीचे बैठतीं तो दोनों एक साथ कराह उठते।
मैंने यह भी देखा कि पापा मीना आंटी की चूत में अपनी उंगलियाँ डालकर उन्हें चुदवाती हुई मीना आंटी को उत्तेजित करते और फिर अपना लंड डालकर उन्हें पूरी तरह से चोदते। मीना आंटी की चूत से लगातार रस निकल रहा था और वह बार-बार पापा को और ज़ोर से चोदने के लिए कह रही थीं।
एक और रात की बात है, पापा और मीना आंटी बाथरूम में गए और मैंने झिरी से देखा कि मीना आंटी ने पापा के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। फिर पापा ने मीना आंटी को दीवार के सहारे खड़ा किया और उनकी चूत में अपना लंड डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। मीना आंटी के स्तन दीवार से टकरा रहे थे और वह बार-बार आआह्ह्ह, उह्ह्ह्ह जैसी आवाजें निकाल रही थीं।
मैंने यह सब देखा और मेरी चूत फिर से गर्म हो गई। मैंने अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डालीं और उन्हें अंदर-बाहर करने लगी। मैंने कल्पना की कि मैं मीना आंटी की जगह हूँ और पापा मुझे दीवार के सहारे चोद रहे हैं। मेरी चूत से रस बह निकला और मैं अपने चरम पर पहुँच गई।
आज भी जब मैं उन दिनों को याद करती हूँ, तो मेरी चूत में वही गर्मी महसूस होती है और मेरे अंदर की अन्तर्वासना जाग उठती है, जो उस पहली रात पापा और मीना आंटी को देखते हुए जागी थी।
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