पुणे की मस्त कॉलगर्ल के साथ रंगीन राते : Antarvasna Hindi Sex Stories
- Kamvasna
- 2 days ago
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ये एक देसी हिंदी सेक्स कहानी है मेरी ज़िंदगी की, एक ऐसा किस्सा जो हकीकत में घटा लेकिन जिसे मैंने हमेशा अपने सीने में दबा कर रखा। ये मेरी अपनी सच्ची कहानी है जिसे मैं कभी बयां नहीं करना चाहता था, लेकिन अब लगता है कि इसे शब्दों में ढालना ज़रूरी है। बात करीब दो साल पुरानी है जब मैं पुणे में रहता था। उन दिनों मेरी उम्र 28 साल थी और मैं एक प्राइवेट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। नया नया शहर, नई ज़िंदगी, और ऑफिस के काम का वो कभी न खत्म होने वाला बोझ। मैं हिंजवड़ी के पास एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता था। घर से दूर, अकेलापन अक्सर हावी हो जाता था, और ऑफिस के तनाव के बीच कभी कभी दिल कुछ ऐसी हरकतें कर बैठता जिसकी उम्मीद भी नहीं होती। ऐसे ही एक दिन की शाम मेरी ज़िंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया।
उस शाम ऑफिस से लौटा तो मन बहुत बेचैन था। हफ्ते भर की थकान और एकरस ज़िंदगी से तंग आकर मैं कुछ अलग करने की सोच रहा था। मेरे एक दोस्त ने मज़ाक में कहा था, |अरे यार, पुणे में तो मज़े ही मज़े हैं, बस थोड़ी हिम्मत चाहिए| उसकी बात याद करके मैंने अपना फोन उठाया और बिना ज्यादा सोचे समझे एक वेबसाइट पर क्लिक कर दिया। वहां ढेरों प्रोफाइल थीं, लेकिन एक चेहरे ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नाम लिखा था काव्या, उम्र 25 साल, प्रोफेशन एक मॉडलिंग असाइनमेंट के तौर पर दर्ज था। तस्वीर में वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। सांवला रंग, बड़ी बड़ी आंखें जिनमें शरारत भरी थी, लंबे घने बाल, और होंठ ऐसे जैसे गुलाब की पंखुड़ियां हों। उसकी एक झलक देखकर ही दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। मैंने बिना ज्यादा देर किए उस पर मैसेज का बटन दबा दिया।
कुछ ही देर में उसका रिप्लाई आया, |हाय, आपसे बात करके अच्छा लगा| उसकी बातों में एक अपनापन था, जैसे हम सालों से एक दूसरे को जानते हों। हमने काफी देर तक चैट की। मैंने उसे अपने बारे में बताया, वो मुझे अपने बारे में बताने लगी। पता चला कि वो मूल रूप से नागपुर की रहने वाली है और पुणे में अपने करियर को आगे बढ़ाने आई है। उसकी आवाज़ में एक कशिश थी जो सुनते ही दिल में उतर जाती थी। हमने तय किया कि अगले शनिवार को मिलेंगे। उस हफ्ते का हर दिन एक युग की तरह बीता। मैं बस उसी एक पल का इंतज़ार कर रहा था जब मैं काव्या से रूबरू मिलूंगा।
आखिरकार वो शनिवार आ ही गया। शाम के 6 बजे हमने वीमेंस कॉलेज के पास एक छोटे से कैफे में मिलने का प्लान बनाया। मैं तय समय से थोड़ा पहले ही पहुंच गया। दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। थोड़ी देर में एक ऑटो रिक्शा वहां रुका और उसमें से काव्या उतरी। उसे देखते ही मेरी सांसें थम सी गईं। उसने हल्के नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके सांवले बदन पर बेहद खूबसूरत लग रही थी। बालों को उसने एक ढीले जूड़े में बांधा हुआ था और कुछ लटें उसके चेहरे पर इठला रही थीं। हल्का सा मेकअप, कानों में झुमके, और कलाइयों में चांदी की चूड़ियां। वो इतनी आकर्षक लग रही थी कि मैं पल भर के लिए तो बस उसे देखता ही रह गया।
वो मुस्कुराकर मेरे पास आई और बोली, |अरे, मैंने सोचा आप पहचानेंगे नहीं| मैंने झट से कहा, |आपको भूल पाना तो शायद किसी के बस में नहीं है| वो शरमा कर थोड़ा मुस्कुराई और हम कैफे के अंदर चले गए। कॉफी पीते हुए हमारी बातें इतनी सहज थीं जैसे हम बरसों के दोस्त हों। उसने अपनी ज़िंदगी के किस्से सुनाए, मैंने अपने। कभी वो खिलखिला कर हंसती तो कभी उसकी आंखें किसी गहरे अहसास में डूब जातीं। उसकी हर अदा मुझे अपनी ओर खींच रही थी। उस शाम कब ढली पता ही नहीं चला। अलग होते वक्त उसने कहा, |अगर बुरा न मानें तो कभी हमारे घर पर भी आइए| ये सुनकर मेरे दिल ने एक उछाल मारी।
अगले हफ्ते मैं उसके घर गया। वो पाषाण इलाके में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहती थी। दरवाज़ा खोला तो सामने काव्या खड़ी थी, इस बार उसने गहरे हरे रंग का सूट पहना हुआ था जो उसके कर्व्स को बखूबी उभार रहा था। उसने मुझे अंदर बुलाया। घर बहुत सादा लेकिन सुंदरता से सजाया हुआ था। खुशबू फैली हुई थी। उसने मेरे लिए चाय बनाई और हम बालकनी में बैठकर बातें करने लगे। बाहर पुणे की शाम का नज़ारा था और पास में बैठी काव्या का रूप। मैं बार बार उसकी तरफ देख रहा था। उसकी त्वचा की चमक, होंठों की लाली, और आंखों की गहराई मुझे पागल किए दे रही थी। उसने भी शायद मेरी नज़रें पढ़ लीं, क्योंकि थोड़ी देर में वो थोड़ा और पास खिसक आई।
बातों बातों में हमारे हाथ एक दूसरे को छूने लगे। पहले तो ये बस एक इत्तेफाक था, लेकिन धीरे धीरे वो छुअन जानबूझकर की जाने लगी। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मैंने हिम्मत करके उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया। उसने कोई एतराज़ नहीं किया। मैंने धीरे से उसकी उंगलियों को सहलाया। उसकी सांसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं। मैंने उसकी तरफ देखा और उसकी आंखों में वही चाहत दिखी जो मेरे दिल में उबल रही थी। मैंने धीरे से उसके चेहरे के पास अपना चेहरा ले जाकर उसके होंठों को चूम लिया। वो पल इतना मधुर था कि जैसे वक्त थम गया हो। उसके होंठ नर्म और गर्म थे, और उनका स्वाद मुझे दीवाना बना रहा था।
ये पहला कदम था जिसने हमारे रिश्ते की सारी सीमाओं को तोड़ दिया। अब शर्म और हिचक का कोई सवाल नहीं था। अब तो बस जिस्मों की भूख और दिल की आग थी जो एक दूसरे से मिलकर ही बुझ सकती थी। उसके घर के उस शांत माहौल में हमारे जिस्म एक दूसरे को पहचानने लगे। काव्या का बदन मेरे स्पर्श के नीचे कांप रहा था, और मेरा हर रोम रोम उसे पाने के लिए बेचैन था। अब जो होने वाला था, वो सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं था, वो दो रूहों का मिलन था, एक ऐसी आग जो हफ्तों तक जलती रही और हर बार पहले से भी ज्यादा शिद्दत से भड़की।
मैंने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर उसे गौर से देखा, उसकी आंखें बंद थीं और होंठ थोड़े से खुले हुए थे। मैंने दोबारा उसके होंठों को चूमा, इस बार थोड़ी और गहराई से। हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गए जैसे सदियों से एक दूसरे के इंतज़ार में हों। मेरी ज़ुबान ने उसके होंठों की दरार को चीरते हुए अंदर का रास्ता ढूंढ लिया। हमारी ज़ुबानें आपस में उलझने लगीं। काव्या के मुंह से एक धीमी सी आह निकली, |उम्म्म्म्म| उसके हाथ मेरी कमर के चारों ओर लिपट गए। ये चुंबन इतना जोशीला था कि हमारी सांसें एक हो गईं।
थोड़ी देर बाद हम सांस लेने के लिए अलग हुए। उसकी आंखों में एक चमक थी, और गालों पर लाली छा गई थी। मैंने उसके कान के पास अपना मुंह ले जाकर फुसफुसाया, |पता है, जब से तुम्हें पहली बार देखा है, बस तुम्हारा ही ख्याल आता है| उसने शरमाकर अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया। मैंने उसके बालों में अपनी उंगलियां फिराईं और उसके माथे को चूमा। फिर मेरे होंठ उसकी आंखों पर, नाक पर, और गालों पर घूमने लगे। हर चुंबन के साथ उसका बदन ढीला पड़ता जा रहा था, जैसे वो पूरी तरह से मेरे हवाले हो रही हो।
मेरे हाथ धीरे धीरे उसकी पीठ पर घूमने लगे। सूट के पतले कपड़े के ऊपर से ही मुझे उसके जिस्म की गर्माहट महसूस हो रही थी। मेरी उंगलियां उसकी रीढ़ की हड्डी के निशान को ट्रेस करती हुई नीचे की ओर जा रही थीं। जब मैंने हल्का सा दबाव उसकी कमर पर डाला तो वो सिहर उठी। मैंने धीरे से उसके सूट के दुपट्टे को हटाना शुरू किया। पहले वो उसके बालों में उलझा, फिर मैंने उसे सुलझाकर एक तरफ रख दिया। अब उसके कंधे और बाज़ू मेरी नज़रों के सामने थे। गोरे और चिकने बाज़ू, जिन पर हल्की हल्की रोयें थीं, मानो मुझे बुला रहे थे।
मैंने अपना मुंह झुकाकर उसके कंधे को चूमा। मेरे होंठों का स्पर्श पाकर काव्या ने एक लंबी सांस छोड़ी। मैं उसके कंधे से शुरू करके उसके गले तक अपने होंठों की बारिश करता गया। जब मैं उसकी गर्दन के उस हिस्से पर पहुंचा जहां नब्ज़ धड़कती है, तो मैंने वहां अपने होंठ जमा दिए। हल्का सा चूसा, और काव्या की उंगलियां मेरी बाजुओं में गड़ गईं। उसके मुंह से एक और आह निकली, |आआह्ह्ह्ह| ये आवाज़ सुनकर मेरे अंदर की आग और भड़क गई।
अब मेरे हाथ उसके सूट के कुर्ते के बटन ढूंढने लगे। वो बटन उसकी छाती के ठीक बीच में थे। मैंने एक एक करके बटन खोलने शुरू किए। हर बटन के साथ उसकी त्वचा का एक नया हिस्सा खुलता जा रहा था। सबसे पहले उसकी हंसली की हड्डी दिखी, फिर उसके सीने का ऊपरी उभार। उसने एक गहरे गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उसके सांवले रंग के साथ बहुत खूबसूरत कंट्रास्ट बना रही थी। जब सारे बटन खुल गए तो मैंने कुर्ते को उसके कंधों से सरकाकर नीचे गिरा दिया। अब काव्या सिर्फ अपनी ब्रा और लहरियादार लहंगे में थी। उसकी नाभि, जिसमें एक छोटा सा मोती का छल्ला था, हवा में चमक रही थी।
मैंने उसकी कमर पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया और अपने होंठ उसकी छाती के ऊपरी उभार पर रख दिए। ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही मैं उसके स्तनों को चूमने लगा। मेरी ज़ुबान उस कपड़े को गीला कर रही थी, और काव्या की सांसें उखड़ने लगी थीं। मेरे हाथ उसकी पीठ के पीछे गए और ब्रा की हुक ढूंढने लगे। थोड़ी सी कोशिश के बाद हुक खुल गई और ब्रा का बंधन ढीला पड़ गया। मैंने उसे पूरी तरह से उतारकर दूर फेंक दिया। अब मेरी नज़रों के सामने काव्या के स्तन थे। वो बिल्कुल उभरे हुए, गोल गोल, और सख्त जान पड़ते थे। उनका रंग उसके बदन से थोड़ा हल्का था, और स्तन के सिरे पर गहरे भूरे रंग की निपल्स तनी हुई खड़ी थीं, मानो मुझे छूने का न्योता दे रही हों।
मैंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उसके एक स्तन को थाम लिया। वो मेरी हथेली में बिल्कुल सटीक आया, मुलायम और गर्म। मैंने हल्के से उसे दबाया तो काव्या ने एक कराह भरी सांस छोड़ी। मेरी उंगलियां उसकी निपल के चारों ओर घूमने लगीं, फिर मैंने उसे हल्के से चिकोटी काटी। |आआअह्ह्ह्हह| काव्या का बदन एक झटके के साथ तन गया। मैंने झुककर उसकी दूसरी निपल को अपने मुंह में ले लिया। मेरी ज़ुबान ने उस तनी हुई निपल को धीरे धीरे चाटना शुरू किया, फिर मैंने अपने होंठों से उसे चूसना शुरू कर दिया। काव्या ने अपनी उंगलियां मेरे बालों में फंसा दीं और मेरा सिर अपने सीने से भींच लिया। |और… और करो| उसने हांफते हुए कहा।
मैं एक एक करके दोनों स्तनों को चूमता और चूसता रहा। मेरी ज़ुबान उनके बीच की घाटी में सरक रही थी, उस गर्म और नर्म हिस्से को भिगो रही थी। काव्या का बदन अब पूरी तरह से मेरे वश में था। मेरे हाथ उसकी पीठ से फिसलते हुए उसके नितंबों पर आ गए। लहंगे के ऊपर से ही मैंने उसके चूतड़ों को दबाना शुरू कर दिया। वो मांसल और भरे हुए थे। मैंने उसके लहंगे की डोरी पकड़ी और एक झटके से खोल दी। लहंगा ढीला पड़ते ही नीचे सरक गया और उसके पैरों के पास ढेर हो गया।
अब काव्या सिर्फ अपनी गुलाबी पैंटी में मेरे सामने थी। उसका पूरा जिस्म पसीने की हल्की परत से चमक रहा था। मैंने उसे नीचे फर्श पर बिछी दरी पर लिटा दिया। वो एकदम हवा में तैरती हुई सी महसूस हो रही थी। मैंने उसकी पैंटी के किनारे पर अपनी उंगलियां फेरीं। वोां पहले से ही गीली थी। कपड़े के आर पार उसकी चुत की नमी झलक रही थी। मैंने पैंटी को धीरे से नीचे खींचा। उसके घुटनों से होते हुए वो पैरों से बाहर आ गई। अब काव्या मेरे सामने पूरी तरह से नग्न थी। उसकी जांघें आपस में चिपकी हुई थीं, मानो अपनी शर्म ढंक रही हों।
मैंने उसके घुटनों पर हाथ रखकर धीरे से उसकी टांगें अलग कीं। बीच में उसकी चुत का वो प्यारा सा हिस्सा दिखाई देने लगा। हल्के हल्के बालों के बीच वो गीली और गुलाबी दिख रही थी। होंठ बाहर निकले हुए थे, और ऊपर की तरफ उसकी भगशेफ की छोटी सी उभार दिख रही थी। मैंने अपना मुंह नीचे झुकाया और अपनी ज़ुबान उसकी भीतरी जांघों पर फेरनी शुरू की। काव्या का बदन कांप उठा। मेरी ज़ुबान धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ी, उसकी चुत के बिल्कुल करीब, लेकिन अभी वहां नहीं पहुंची।
|प्लीज़… अब और मत तड़पाओ| काव्या ने कराहते हुए कहा। मैंने उसकी बात सुनकर अपनी ज़ुबान सीधे उसकी उस गीली दरार पर रख दी। जैसे ही मेरी ज़ुबान ने उसके भगशेफ को छुआ, काव्या ने एक ज़ोरदार चीख मारी, |आआआह्ह्ह्ह्ह| मैंने अपनी ज़ुबान को गोल गोल घुमाते हुए उसकी चुत को साफ करना शुरू किया। उसका स्वाद नमकीन और थोड़ा मीठा था। मेरी ज़ुबान उसके अंदर तक जाने की कोशिश करने लगी, बाहरी होंठों को चाटती, भीतरी गहराई को सहलाती। मैंने अपना एक हाथ उसके स्तन पर रखा हुआ था और दूसरे हाथ की उंगली से धीरे धीरे उसकी चुत के छेद पर हल्की गोलाई में मसाज कर रहा था।
काव्या की कमर अब लय में उठ रही थी और गिर रही थी। उसके मुंह से लगातार आहें और कराहें निकल रही थीं। वो बार बार मेरा नाम ले रही थी, |हां… हां… बिल्कुल वहीं…| मैंने उसकी चुत को पूरी तरह से अपने मुंह से ढक लिया और ज़ोर से चूसने लगा। मेरी ज़ुबान उसकी योनि के अंदर तक गई और बाहर आई। मैंने अपनी एक उंगली धीरे से उसके अंदर डाली और बाहर निकाली। वो इतनी गीली थी कि मेरी पूरी उंगली आसानी से अंदर चली गई। फिर दूसरी उंगली भी डाल दी। मैंने अपनी उंगलियों को मोड़कर उसकी चुत की भीतरी दीवार को सहलाना शुरू किया। काव्या अब पूरी तरह से बहक चुकी थी।
|मैं अब तुम्हें अंदर चाहती हूं… प्लीज़| उसने बड़ी बेचैनी से कहा। मैंने अपनी पैंट की चेन खोली और उसे उतारकर फेंक दिया। मेरा लंड अब पूरी तरह से तनकर खड़ा हो गया था। उसे देखकर काव्या की आंखें चमक उठीं। मैंने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और काव्या की चुत के बिल्कुल पास ले गया। उसके सिर को उसके भीगे हुए होंठों पर रगड़ने लगा। वो नमी मेरे लंड पर लगकर उसे और भी फिसलनदार बना रही थी। काव्या ने अपनी टांगें और चौड़ी कर दीं।
मैंने धीरे से अपने लंड का सिरा उसकी चुत के छेद पर लगाया और बिना जल्दी किए, बेहद धीमी गति से अंदर की ओर धकेला। जैसे जैसे मेरा लंड अंदर जा रहा था, काव्या की चुत की दीवारें मुझे एक कसी हुई गर्म गिलासी की तरह जकड़ रही थीं। |उह्ह्ह्ह्ह… तुम्हारा लंड… इतना बड़ा है| वो हांफते हुए बोली। मैंने पूरा का पूरा लंड एक झटके में अंदर तक पहुंचा दिया। हमारी पेल्विक हड्डियां आपस में टकराईं। काव्या ने एक गहरी आह भरी, |आआआअह्ह्ह्ह्हह|
मैंने पहले तो धीरे धीरे झटके देना शुरू किया। अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकालता और फिर धीरे से पूरा अंदर तक डाल देता। हर बार अंदर जाने पर काव्या की चुत से एक चिपचिपी सी आवाज़ आती। ये आवाज़ मेरे कानों में रस घोल रही थी। मेरे हाथ उसके स्तनों को मसल रहे थे। काव्या की टांगें मेरी कमर के चारों ओर लिपट गई थीं। उसके नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे। मैंने धीरे धीरे अपनी गति तेज़ करनी शुरू कर दी। अब मेरे झटके एक लय में हो गए थे।
|चोदो मुझे… ज़ोर से चोदो| काव्या ने चिल्लाते हुए कहा। ये शब्द सुनकर मेरे अंदर का जुनून सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैंने अपनी पकड़ मज़बूत की और पूरी ताकत से उसकी चुत में अपना लंड घुसाने लगा। हर झटके के साथ बिस्तर चरमरा रहा था और काव्या का जिस्म उछल रहा था। मेरे अंडकोष उसके नितंबों से टकरा रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज़, जिस्मों की टकराहट, और काव्या की बेकाबू चीखें गूंज रही थीं। |हां… हां… वहीं… उह्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह|
थोड़ी देर इसी पोज़ीशन में चोदने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला। काव्या ने हैरानी से आंखें खोलीं। मैंने उसे पलटकर कुत्ते की तरह हाथों और घुटनों के बल कर दिया। उसके नितंब हवा में उठे हुए थे और उसकी चुत मेरी नज़रों के ठीक सामने थी, पूरी तरह से खुली हुई और लाल सुर्ख। मैंने पीछे से झुककर एक बार फिर अपनी ज़ुबान उसकी चुत पर फेरी, इस बार उल्टी दिशा में, उसकी भगशेफ से लेकर गुदा द्वार तक। काव्या के पैर कांपने लगे।
फिर मैंने अपने घुटनों के बल उसके पीछे आकर अपने लंड को साधा और एक ही ज़ोरदार झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया। ये पोज़ीशन और भी गहरी थी। मेरा लंड उसके गर्भाशय के मुंह तक जा पहुंचा। काव्या ज़ोर से चीखी, |आआआअह्ह्ह्ह्हह… बहुत अंदर तक जा रहा है| मैंने उसके नितंबों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया। मेरे झटके इतने ज़ोरदार थे कि उसके स्तन आगे पीछे हिल रहे थे। मैं एक हाथ से उसके बाल पकड़कर पीछे की ओर खींच रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर को नियंत्रित कर रहा था।
|मैं तुम्हें चोद रहा हूं… पूरी तरह से चोद रहा हूं| मैं अपने दांत पीसते हुए बुदबुदाया। काव्या अब शब्दों को खो चुकी थी। वो सिर्फ आवाज़ें निकाल रही थी। उसके चूतड़ मेरे हर झटके पर लहरा रहे थे। मेरा पसीना टपक टपक कर उसकी पीठ पर गिर रहा था। मैंने अपनी एक उंगली उसके मुंह में डाल दी जिसे उसने पागलपन से चूसना शुरू कर दिया। हमारे जिस्म एक लय में ऐसे झूम रहे थे मानो कोई आदिम नृत्य हो।
अगले कई मिनटों तक हम ऐसे ही एक तूफान की तरह आपस में टकराते रहे। कभी मैं गति तेज़ करता, कभी धीरे धीरे गहरे झटके देता। मैंने अपना लंड बाहर निकाला, उसे काव्या की चुत पर रगड़ा, और फिर से अंदर डाल दिया। वो हर बार ज़ोर से कराह उठती। उसकी चुत अब पूरी तरह से लाल हो चुकी थी और उसमें से रिसने वाला पानी मेरी जांघों पर बह रहा था।
इसके बाद मैंने काव्या को अपनी ओर खींच लिया और उसे अपनी गोद में बिठा लिया। मैं पीठ के बल लेटा हुआ था और वो मेरे ऊपर बैठी हुई थी। ये पोज़ीशन उसके नियंत्रण में थी। उसने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चुत के मुंह पर लगाया और धीरे से बैठना शुरू किया। मेरी आंखों के सामने उसकी चुत मेरे लंड को निगल रही थी। एक एक इंच करके मेरा लंड उसके अंदर समाता जा रहा था। जब पूरा अंदर चला गया तो उसने एक संतोष भरी सांस छोड़ी।
अब वो मेरे ऊपर कूदने लगी। मेरा लौड़ा उसकी चुत में बार बार अंदर बाहर हो रहा था। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर उसे और तेज़ी से उछलने में मदद की। उसके स्तन मेरे चेहरे के ऊपर हिल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर मुंह में भर लिया और चूसने लगा। काव्या ने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुकाई और ज़ोर से चीख पड़ी, |आआआआह्ह्ह्ह्ह… मैं… मैं जा रही हूं| वो एक ही बार में मेरे ऊपर पूरी तरह से झड़ गई। उसके झटके इतने तेज़ थे कि मेरा लंड भी लगभग फिसलने को आया। मैंने उसकी कमर को ज़ोर से पकड़कर थाम लिया।
मैंने उसके थके हुए जिस्म को पलटा और एक बार फिर से मर्दाना पोज़ीशन में आ गया। इस बार मुझे देर नहीं करनी थी। मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं। इससे उसकी चुत बिल्कुल ऊपर की ओर खुल आई। मैंने अपने लंड को पूरी ताकत से उसके अंदर घुसाया। ये वार इतने गहरे और सख्त थे कि पूरा बदन कांप रहा था। |अंदर डाल दे… मेरे अंदर निकाल दे…| काव्या ने बेहद भद्दी आवाज़ में कहा। ये सुनते ही मेरा सब्र का बांध टूट गया।
मैंने उसकी जांघों को ज़ोर से भींच लिया और अपने लंड को उसकी चुत में जितना गहरे जा सकता था, घुसा दिया। फिर एक ज़ोरदार कंपकंपी के साथ मैंने उसके अंदर अपना पूरा माल उड़ेल दिया। धड़ धड़ धड़, मेरे अंडकोष सिकुड़ते गए और मेरा वीर्य उसकी चुत की गहराइयों में भरता गया। काव्या ने उसी पल एक और गहरी चीख मारी और हम दोनों एक साथ ही मूर्छित से हो गए। मेरा लंड कुछ देर तक उसके अंदर ही फड़फड़ाता रहा।
काफी देर बाद हमारी सांसें सामान्य हुईं। मैं अपना लंड बाहर निकालकर उससे लिपट कर लेट गया। मेरे हाथ अब भी उसके जिस्म को सहला रहे थे। उस रात हमने एक दूसरे के जिस्म को जैसे जी भर के जान लिया था। लेकिन ये तो बस शुरुआत थी। अगले कई हफ्तों तक हर शनिवार और रविवार हमारी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गए।
दूसरी मुलाकात में काव्या खुद मेरे घर आई। उसने लाल रंग का बैकलेस ब्लाउज़ और सफेद लहंगा पहना हुआ था। मैंने दरवाज़ा खोला तो वो झट से अंदर आई और दरवाज़ा बंद करते ही मेरे गले लग गई। हमने एक दूसरे को बिना रुके चूमना शुरू कर दिया। इस बार उसकी बेचैनी साफ झलक रही थी। उसने खुद ही अपना ब्लाउज़ उतारकर फेंक दिया और मेरी पैंट की बेल्ट खोलने लगी। हम बिना बेडरूम तक गए, हॉल में ही फर्श पर लोटने लगे।
|तुम्हारी याद में पूरा हफ्ता कैसे बीता, पता है?| उसने मेरे होंठ काटते हुए कहा। मैंने उसे नंगा करके उसकी चुत पर अपना मुंह लगा दिया। इस बार मुझे पता था कि उसे कहां और कैसे छूना है। मैंने उसकी भगशेफ को अपनी ज़ुबान से तड़पाना शुरू किया। उसे चूसा, हल्के से काटा, और उंगली से रगड़ा। काव्या मेरे मुंह पर ही झड़ गई। उसकी चुत का पानी मैंने पूरा पी लिया। फिर मैंने अपना लंड निकाला और उसे खड़े खड़े ही दीवार से लगाकर चोदना शुरू कर दिया। उसके पैर मेरी कमर से लिपट गए और उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरी लकीरें खींचने लगे।
हर मुलाकात में हमने एक दूसरे की नई सीमाओं को छुआ। कभी किचन के स्लैब पर तो कभी बाथरूम में शॉवर के नीचे हमारी चुदाई होती। काव्या की चुदक्कड़ आदतें धीरे धीरे खुलकर सामने आने लगीं। वो जितनी खूबसूरत दिखती थी, बिस्तर में उतनी ही बेलगाम थी। वो खुद मेरे लंड को मुंह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसती और कहती, |तुम्हें पता है, तुम्हारे लंड का स्वाद मुझे कितना पसंद है?| मैं उसका चेहरा पकड़कर अपना लंड उसके गले तक उतार देता और वो बिना किसी शिकायत के सब सह लेती। उसकी आंखों से पानी बहता, लेकिन वो रुकने का नाम नहीं लेती थी।
एक बार तो हमने पूरी रात एक दूसरे को चोदने में गुज़ार दी। उस रात काव्या ने मुझे बताया कि उसे अपने ऊपर वाली पोज़ीशन सबसे ज्यादा पसंद है क्योंकि उसमें मेरा लंड उसकी चुत के एक खास कोने को छूता है। वो मेरे ऊपर सवार होकर घंटों तक उछलती रही। जब उसकी थकान चरम पर होती तो मैं उसे उठाकर टेबल पर लिटा देता और उसकी टांगें मोड़कर एक अलग ही एंगल से चुदाई शुरू कर देता। हर बार जब मेरा माल उसकी चुत में भरता, वो एक अजीब सी संतुष्टि से भर जाती और मेरे सीने से लिपट कर कहती, |तुम्हारे साथ होना किसी जन्नत से कम नहीं|
उन हफ्तों की मस्ती और ऐश ने मेरी ज़िंदगी का रंग ही बदल दिया था। पुणे की शामें, काव्या का साथ, और बिना किसी रोकटोक के जिस्मानी संबंध। ये सिलसिला कई महीनों तक चला, जब तक कि काव्या को अपने करियर के सिलसिले में दूसरे शहर नहीं जाना पड़ा। लेकिन उसके साथ बिताए वो लम्हे, वो रातें, और वो बेलगाम चुदाई की यादें आज भी मेरे जिस्म और दिमाग पर राज करती हैं।
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