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फूफा जी ने मेरी मम्मी को चोदा - Antarvasna Sex Stories

मेरा नाम मोनू है। मैं सीकर का रहने वाला एक जवान लड़का हूँ। मेरी मम्मी, जिनका नाम रेखा है, बड़ी ही खूबसूरत और गोरी हैं। उनकी उम्र होगी कोई 40 के आसपास, लेकिन उनकी जवानी देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि वो दो बच्चों की माँ हैं। उनका फिगर इतना मस्त है कि गाँव के मर्दों की नजरें उन पर टिक ही जाती हैं। उनके भरे-पूरे स्तन, पतली कमर और गोल-मटोल नितंब हर किसी को ललचा देते हैं। मम्मी का चेहरा भी बड़ा आकर्षक है, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ और लंबे काले बाल, जो वो अक्सर खुला छोड़ती थीं। लेकिन मम्मी का स्वभाव बड़ा तीखा है, वो बात-बात पर पापा और दादा-दादी से झगड़ पड़ती थीं।


मेरे फूफा जी, जिनका नाम विनोद है, जयपुर में रहते हैं। वो 6 फुट लंबे, गोरे और हट्टे-कट्टे हैं, और उनकी स्मार्ट पर्सनैलिटी किसी को भी प्रभावित कर देती है। उनकी उम्र होगी कोई 30 के आसपास, और वो हमेशा मेरे और मेरी छोटी बहन पूजा के लिए ढेर सारा सामान लाते थे, जिससे हम दोनों उन्हें बहुत पसंद करते थे। पूजा, जो मुझसे 2 साल छोटी है, गोरी और पतली-दुबली है, और उसका स्वभाव बड़ा शांत है। मैं उस वक्त जवान हो रहा था, और सेक्स के बारे में कुछ-कुछ समझने लगा था, लेकिन अभी पूरी तरह अनजान था।


बात कई साल पुरानी है। एक बार मम्मी का पापा और दादा-दादी से बड़ा झगड़ा हो गया। गुस्से में मम्मी हमें लेकर नाना-नानी के घर चली आईं। हम लोग वहाँ एक महीने से ज्यादा समय से रह रहे थे। नाना-नानी का घर गाँव में था, बड़ा सा मकान, सामने एक छोटा सा पार्क और आसपास खेत। माहौल शांत था, लेकिन मम्मी का गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ था। एक दिन फूफा जी जयपुर से आए। वो किसी काम से गाँव आए थे और 3-4 दिन रुकने वाले थे। उन्होंने पास के एक छोटे से होटल में कमरा ले रखा था, लेकिन दिन में हमारे घर आते-जाते रहते थे।


जब फूफा जी आए, तो वो अपने साथ ढेर सारा सामान लाए थे—मिठाइयाँ, खिलौने, और मेरे लिए एक नया क्रिकेट बैट। हम बच्चे तो खुश हो गए। उस दिन नाना-नानी को किसी जरूरी काम से बाहर जाना था। सुबह-सुबह फूफा जी घर आए, और हॉल में बैठकर नाना-नानी और मम्मी से बातें करने लगे। बातों का केंद्र पापा और दादा-दादी ही थे। फूफा जी मम्मी को समझा रहे थे कि घर में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं, उन्हें वापस सीकर चलना चाहिए। मम्मी गुस्से में थीं, और उनकी आँखें छलक आई थीं।


शाम को नाना-नानी ने फूफा जी को घर पर ही रुकने को कहा और वो काम से चले गए। घर में अब सिर्फ मैं, पूजा, मम्मी और फूफा जी थे। हम हॉल में बैठे बातें कर रहे थे। मम्मी अभी भी उदास थीं, और बातों-बातों में उनकी आँखें फिर से भर आईं। फूफा जी ने हमें बाहर खेलने भेज दिया, बोले, “बच्चों को ऐसी बातें नहीं सुननी चाहिए, इससे तुम्हारे मन पर बुरा असर पड़ेगा।” मम्मी ने भी हामी भरी और हमें पार्क में भेज दिया। पूजा तो खुशी-खुशी चली गई, लेकिन मेरा मन मम्मी के पास ही था। मैं उनकी बातें सुनना चाहता था, इसलिए थोड़ी देर बाद चुपके से वापस घर आ गया और गेट के पास खड़ा होकर उनकी बातें सुनने लगा।


मम्मी रोते हुए बोलीं, “वो लोग मुझे बिल्कुल पसंद नहीं करते, हर बात में ताने मारते हैं।”

फूफा जी ने नरम स्वर में कहा, “रेखा, भैया तो तुम्हें बहुत प्यार करते हैं। तुम्हें तो उनके साथ रहना है।”

मम्मी ने गुस्से में जवाब दिया, “अगर प्यार करते होते, तो मुझे लेने खुद नहीं आते क्या?”

फूफा जी बोले, “उन्होंने ही तो मुझे भेजा है तुम्हें मनाने के लिए।”

मम्मी ने सिर हिलाया, “नहीं, मैं वहाँ वापस नहीं जाऊँगी। मैं वहाँ नहीं रह सकती।”


और ये कहते-कहते मम्मी फूट-फूटकर रोने लगीं। फूफा जी उठे और उनके पास बैठ गए। वो मम्मी के आँसू पोंछने लगे, उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें चुप कराने लगे। मम्मी अचानक फूफा जी के गले लग गईं और उनके सीने में मुँह छिपाकर रोने लगीं। फूफा जी उनके सिर पर हाथ फेर रहे थे, और धीरे-धीरे मम्मी का रोना कम हुआ। लेकिन वो अभी भी फूफा जी से चिपकी हुई थीं। मैं बाहर खड़ा सब देख रहा था, और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है।


थोड़ी देर बाद फूफा जी ने मम्मी की पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया। मम्मी ने भी उनकी कमर पर हाथ रख लिया। दोनों एक-दूसरे से और करीब आ गए। अचानक फूफा जी ने मम्मी के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मम्मी ने पहले तो हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर वो भी फूफा जी को चूमने लगीं। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैं समझ नहीं पा रहा था कि ये सब क्या है। उस वक्त मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था, लेकिन जो हो रहा था, वो मुझे अजीब और रोमांचक दोनों लग रहा था।


फूफा जी ने मम्मी को हॉल के सोफे पर धकेल दिया। मम्मी उस वक्त एक हल्की गुलाबी साड़ी पहने थीं, जिसका पल्लू नीचे गिर गया था। फूफा जी ने झट से मम्मी का ब्लाउज खोलना शुरू किया। मम्मी ने हल्का सा विरोध किया, “विनोद, ये क्या कर रहे हो? बच्चे बाहर हैं…”

लेकिन फूफा जी ने उनकी बात अनसुनी कर दी और उनका ब्लाउज खोलकर उनकी ब्रा नीचे सरका दी। मम्मी के भरे-पूरे स्तन बाहर आ गए, जो गोल और गोरे थे, उनके निप्पल गुलाबी और सख्त हो चुके थे। फूफा जी ने एक स्तन को अपने मुँह में लिया और चूसने लगे। मम्मी की साँसें तेज हो गईं, और वो हल्के-हल्के सिसकारियाँ लेने लगीं, “आह्ह… विनोद… धीरे…”


फूफा जी ने मम्मी की साड़ी को कमर तक ऊपर उठा दिया। उनकी काली पैंटी साफ दिख रही थी। फूफा जी ने एक ही झटके में उनकी पैंटी नीचे खींच दी। मम्मी की चूत गीली और चिकनी थी, जैसे वो पहले से ही उत्तेजित थीं। फूफा जी ने अपनी पैंट और अंडरवियर नीचे सरकाया, और उनका लंड बाहर आ गया। वो मोटा और लंबा था, शायद 7 इंच का, और उसकी नसें फूली हुई थीं। मम्मी ने उसे देखा और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।


फूफा जी ने मम्मी की टाँगें फैलाईं और उनके ऊपर चढ़ गए। उन्होंने अपना लंड मम्मी की चूत पर रगड़ा, जिससे मम्मी की सिसकारियाँ और तेज हो गईं, “उम्म… विनोद… अह्ह…” फूफा जी ने धीरे से अपना लंड मम्मी की चूत में घुसाया। मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके मुँह से एक लंबी “आह्ह्ह” निकली। फूफा जी ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और हर धक्के के साथ मम्मी की चूत से ‘फच-फच’ की आवाजें आने लगीं। मम्मी ने अपनी टाँगें फूफा जी की कमर पर लपेट दीं और उनकी पीठ को नाखूनों से खुरचने लगीं।


“विनोद… आह्ह… और जोर से… चोदो मुझे…” मम्मी की आवाज में एक अजीब सी बेताबी थी। फूफा जी ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी, और अब वो मम्मी को हचक-हचक कर चोद रहे थे। सोफा हिल रहा था, और कमरे में “फचाक-फचाक” की आवाजें गूँज रही थीं। मम्मी की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गई थीं, “आह्ह… उह्ह… हाय… विनोद… मत रुको…” फूफा जी ने मम्मी के एक स्तन को अपने हाथ में लिया और उसे जोर-जोर से दबाने लगे। मम्मी की चूत पूरी तरह गीली थी, और हर धक्के के साथ उनका शरीर काँप रहा था।


करीब 15 मिनट तक फूफा जी मम्मी को उसी तरह चोदते रहे। फिर उन्होंने मम्मी को पलटा और उन्हें सोफे पर कुतिया की तरह झुका दिया। मम्मी के भारी स्तन सोफे की तरफ लटक रहे थे, और उनकी चूत पीछे से पूरी तरह खुली थी। फूफा जी ने पीछे से अपना लंड उनकी चूत में घुसाया और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। मम्मी की चूत से “पच-पच” की आवाजें आ रही थीं, और वो हर धक्के के साथ चीख रही थीं, “आह्ह… हाय… विनोद… मेरी चूत फाड़ दो…” फूफा जी ने उनके नितंबों पर हल्का सा थप्पड़ मारा और बोले, “रेखा, तेरी चूत तो कितनी टाइट है… मजा आ रहा है…”


कुछ देर बाद फूफा जी ने मम्मी को फिर से सीधा किया और उनके ऊपर चढ़ गए। अब वो इतनी तेजी से धक्के मार रहे थे कि मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था। मम्मी की चीखें अब और तेज हो गई थीं, “आह्ह… उह्ह… विनोद… मैं झड़ने वाली हूँ…” फूफा जी ने भी अपनी रफ्तार और तेज कर दी, और अचानक वो अकड़ गए। उन्होंने अपना लंड मम्मी की चूत में गहरे तक घुसेड़ दिया और “उह्ह…” की आवाज के साथ झड़ गए। मम्मी भी उसी वक्त झड़ गईं, और उनकी साँसें तेज-तेज चल रही थीं।


दोनों कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे। फिर मम्मी उठीं, अपनी पैंटी और साड़ी ठीक की और बोलीं, “विनोद, कितने सालों बाद आज इतना मजा आया। मैं तो खुद को रोक ही नहीं पाई।”

फूफा जी ने हँसते हुए कहा, “रेखा, मैं तो कब से तेरे इस मस्त जिस्म को चोदना चाहता था। आज मौका मिला, तो कैसे छोड़ता? रात को और मजा करेंगे।”


रात को खाना खाने के बाद हम सब हॉल में टीवी देख रहे थे। मम्मी और फूफा जी पास-पास बैठे थे। मम्मी ने हल्का सा गाउन पहना था, जो उनके जिस्म को और उभार रहा था। फूफा जी का हाथ बार-बार मम्मी की कमर पर जा रहा था, और मम्मी उसे हल्के से हटा रही थीं। वो धीरे से कह रही थीं, “विनोद, बच्चे देख लेंगे… थोड़ा सब्र करो।” लेकिन उनकी आँखों में वही शरारत थी, जो दिन में थी।


मम्मी ने हमें जल्दी सोने को कहा, लेकिन हम टीवी देखना चाहते थे। शायद मम्मी और फूफा जी से अब इंतजार नहीं हो रहा था। मम्मी ने फूफा जी की तरफ देखकर हँसते हुए कहा, “मैं रसोई में बर्तन साफ कर लेती हूँ। तुम लोग टीवी देखकर सो जाना।” और वो रसोई में चली गईं।


थोड़ी देर बाद फूफा जी भी उठे और बोले, “मोनू, मैं तो सोने जा रहा हूँ।” उनका कमरा रसोई के पास ही था। मुझे शक हुआ, तो मैं चुपके से रसोई की खिड़की के पास गया। वहाँ मम्मी किचन स्लैब पर हाथ टिकाए खड़ी थीं, और उनका गाउन कमर तक उठा हुआ था। फूफा जी पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डालने की कोशिश कर रहे थे। मम्मी ने धीरे से कहा, “विनोद, यहाँ नहीं… बच्चे हैं। कमरे में चलो।”

फूफा जी बोले, “अगर वो आ गए तो?”

मम्मी ने शरारती अंदाज में कहा, “वो टीवी में बिजी हैं। अब छोड़ो यार, एक राउंड तो कर लेते हैं। छुप-छुपकर चुदाई का मजा ही अलग है।”


दोनों हँसते हुए फूफा जी के कमरे में चले गए। उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। मैं चुपके से की-होल से देखने लगा। मम्मी घुटनों पर बैठी थीं, और फूफा जी का मोटा लंड उनके मुँह में था। मम्मी उसे चूस रही थीं, जैसे कोई लॉलीपॉप हो। वो अपने होंठों से लंड को चाट रही थीं, और फूफा जी सिसकारियाँ ले रहे थे, “आह्ह… रेखा… तू तो कमाल चूसती है…” मम्मी ने लंड को मुँह से निकाला और बोलीं, “विनोद, तेरा लंड तो इतना टेस्टी है… और देर तक चूसूँ?”


फूफा जी ने मम्मी को पलंग पर लिटाया और उनका गाउन पूरी तरह उतार दिया। मम्मी अब सिर्फ पैंटी में थीं। फूफा जी ने उनकी पैंटी भी उतार दी और उनकी चूत पर मुँह रख दिया। मम्मी की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं, “आह्ह… उह्ह… विनोद… चाटो मेरी चूत को…” फूफा जी उनकी चूत को चाट रहे थे, और मम्मी की टाँगें काँप रही थीं। थोड़ी देर बाद मम्मी ने फूफा जी को खींचा और बोलीं, “अब चोदो मुझे… और इंतजार नहीं होता।”


फूफा जी ने अपना लंड मम्मी की चूत में डाला और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। कमरे में “फच-फच” और “पच-पच” की आवाजें गूँज रही थीं। मम्मी की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गई थीं, “आह्ह… विनोद… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” फूफा जी ने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और गहरे धक्के मारने लगे। मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था, और उनके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे।


मम्मी बार-बार कह रही थीं, “धीरे करो… बच्चे सुन लेंगे…” लेकिन फूफा जी पर कोई असर नहीं था। वो बस मम्मी को चोदने में मस्त थे। करीब आधे घंटे तक धकापेल चुदाई चली। मम्मी दो बार झड़ चुकी थीं, और उनकी चूत पूरी तरह गीली थी। आखिर में फूफा जी ने जोर-जोर से धक्के मारे और “आह्ह…” की आवाज के साथ मम्मी की चूत में झड़ गए। मम्मी भी उसी वक्त तीसरी बार झड़ीं और पलंग पर निढाल हो गईं।


मम्मी ने गाउन ठीक किया और बोलीं, “विनोद, बच्चों को सुलाकर रात को फिर आऊँगी।” वो बाहर आईं, और मैं जल्दी से टीवी के पास जाकर बैठ गया। किस्मत से पूजा टीवी देखते-देखते सो गई थी। मम्मी ने हमें कमरे में सुलाया और फिर फूफा जी के कमरे में चली गईं।


उसके बाद तो फूफा जी और मम्मी ने हर मौके पर चुदाई की। बाथरूम में, किचन में, हॉल में, स्टोर रूम में, छत पर—हर जगह उन्होंने धकापेल चुदाई की। यहाँ तक कि जब फूफा जी हमें सीकर वापस छोड़ने आए, तो कार में भी मम्मी ने उनका लंड चूसा और चुदवाया। हमारे घर पर भी जब वो आते, तो मम्मी की जमकर चुदाई करते।


क्या आपको लगता है कि मम्मी और फूफा जी का ये रिश्ता सही था? अपनी राय Antarvasna Sex Stories कमेंट में जरूर बताएँ।

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