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भाभी ने मुजे लौड़ी घोड़ी का खेल सिखाया - Antarvasna Sex Stories

  • Kamvasna
  • 25 सित॰ 2025
  • 9 मिनट पठन

मेरी भाभी, राधा, 21 साल की थी, जवान, गोरी, और एकदम मस्त फिगर वाली। उसकी आँखों में शरारत और होंठों पर हल्की मुस्कान हमेशा रहती थी। उसका कद 5 फीट 4 इंच, भरे हुए उरोज, पतली कमर और गोल चूतड़ उसे और भी आकर्षक बनाते थे। मैं, विजय, 18 साल का था, दुबला-पतला, 5 फीट 8 इंच का, और जवान खून की गर्मी मुझमें भी थी। भाभी ने बी.ए. फाइनल की परीक्षा दी थी, और मुझे उनके साथ उज्जैन रिजल्ट लेने जाना था। उज्जैन में जो हुआ, उसने हम दोनों को इतना करीब ला दिया कि हमारी सारी हिचक और शर्म गायब हो गई।


हम सुबह-सुबह रतलाम से ट्रेन पकड़कर उज्जैन पहुँच गए। स्टेशन से बाहर निकलते ही सामने एक साफ-सुथरा होटल दिखा। हमने तुरंत एक कमरा बुक कर लिया। कमरा डबल बेड वाला था, टेबल, कुर्सी, और बाथरूम सब कुछ व्यवस्थित और चमकदार। मैंने और भाभी ने थकान उतारने के लिए नहाया। मैंने नीली टी-शर्ट और जींस पहनी, और भाभी ने हल्का गुलाबी सलवार सूट, जिसमें उनकी जवानी और भी निखर रही थी। नहाने के बाद हम यूनिवर्सिटी के लिए निकल पड़े। वहाँ से भाभी का रिजल्ट कार्ड लिया, जिसमें वो पास हो चुकी थी। फिर हमने दिन भर उज्जैन के मंदिरों और पवित्र स्थलों के दर्शन किए। मंदिरों की सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते भाभी की चाल में एक अलग सी मस्ती थी, और उनकी मुस्कान मुझे बार-बार अपनी ओर खींच रही थी। शाम को थककर हम होटल वापस आ गए।


होटल के कमरे में वापस आने के बाद हमारे पास करने को कुछ खास नहीं था। मैं बेड पर लेटकर मोबाइल देख रहा था, और भाभी सोफे पर बैठकर अपने नाखूनों को देख रही थी। अचानक भाभी बोली, “विजय, बोर हो रहे हो ना? चलो, पास में एक पिक्चर हॉल है, कोई मूवी देख आते हैं। टाइम पास हो जाएगा।” उनकी आवाज में शरारत थी, और मैंने बिना सोचे हामी भर दी। मैंने शर्ट और जींस पहनी, और भाभी ने भी जल्दी से एक टाइट कुर्ती और जींस डाल ली, जिसमें उनकी फिगर और भी उभर रही थी।


हम पिक्चर हॉल पहुँच गए। टिकट लिया तो पता चला कि कोई अंग्रेजी मूवी चल रही थी। हम अंदर गए और अपनी सीटों पर बैठ गए। हॉल में अंधेरा था, और कुछ ही लोग थे। मूवी शुरू हुई, और जल्दी ही हमें अहसास हो गया कि ये कोई आम फिल्म नहीं थी। स्क्रीन पर एक के बाद एक सेक्सी सीन आने लगे। नंगे बदन, चुदाई के सीन, जो इतने बोल्ड थे कि लंड और चूत तो नहीं दिख रहे थे, पर बाकी सब कुछ साफ था। अंधेरे में फिल्माए गए इन सीनों में जिस तरह से बदन एक-दूसरे से लिपट रहे थे, वो किसी को भी गर्म कर दे।


पहला सेक्सी सीन आते ही मैंने भाभी की तरफ देखा। उनकी आँखें स्क्रीन पर थीं, लेकिन वो मुझे तिरछी नजरों से देख रही थी। उनकी साँसें तेज हो रही थीं, और चेहरा हल्का लाल। मैं भी कम उम्र का था, और जवान खून में उबाल आना लाजमी था। भाभी की जवानी भी बेकाबू हो रही थी। हर सेक्सी सीन के साथ वो थोड़ा और बेचैन हो रही थी। अचानक उनका हाथ मेरी बांह को छूने लगा। पहले हल्के से, फिर थोड़ा और जोर से। मैंने कोई विरोध नहीं किया, और ये देखकर भाभी का हौसला बढ़ गया।


उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा। उनकी उंगलियाँ मेरी हथेली को सहलाने लगी। मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी बड़ी-बड़ी आँखें मुझे घूर रही थी। हमारी नजरें मिली, और उस पल में जैसे समय रुक गया। उनकी उंगलियों ने मेरे हाथ को दबाया, और मैंने भी जवाब में उनका हाथ जोर से पकड़ लिया। मेरे बदन में सिहरन दौड़ गई। मेरा लंड पैंट में तनने लगा था, और भाभी की हरकतों से लग रहा था कि वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।


अचानक भाभी का हाथ मेरी जांघ पर सरक गया। उनकी उंगलियाँ धीरे-धीरे मेरे लंड की तरफ बढ़ रही थी। उनकी आँखों में शरारत थी, और उन्होंने इशारे से पूछा, “क्या हुआ?” मैं साँस रोककर बस उनकी हरकत देख रहा था। फिर अचानक उनकी उंगलियों ने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और जोर से दबा दिया। “हाय रे!” मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई।


“क्या हुआ, विजय?” भाभी ने फुसफुसाते हुए पूछा, और उनके होंठों पर शरारती मुस्कान थी। उन्होंने मेरे लंड को और जोर से दबाया। स्क्रीन पर एक और चुदाई का सीन चल रहा था, जिसमें लड़की की सिसकारियाँ पूरे हॉल में गूँज रही थी। “मजा आया ना?” भाभी ने फिर फुसफुसाया।


मैंने भी अब हिम्मत जुटाई और अपना हाथ उनकी पीठ पर रखा। धीरे-धीरे मेरा हाथ नीचे सरकता गया, और मैंने उनके एक उरोज को हल्के से दबा दिया। उनके ब्लाउज के नीचे निप्पल सख्त हो चुके थे, और मेरी उंगलियों को उनका उभार साफ महसूस हो रहा था। “तुम्हें भी मजा आया, भाभी?” मैंने धीरे से पूछा।


“हाँ रे… बहुत मजा आ रहा है,” भाभी ने सिसकारी भरी। फिर मेरी तरफ देखकर बोली, “अभी और मजा आएगा, देख!” और उन्होंने मेरे लंड को फिर से जोर से दबाया। मेरे मुँह से फिर “हाय रे!” निकल गया।


“खूब मजा आ रहा है ना? तेरा लंड तो एकदम मस्त है रे!” भाभी ने देसी अंदाज में कहा, और उनकी आवाज में सेक्सीपन झलक रहा था। मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। “भाभी, चलो होटल चलते हैं, यहाँ कुछ ठीक नहीं लग रहा,” मैंने कहा, मेरी आवाज में बेचैनी साफ थी।


“नहीं विजय, अभी मेरे बोबे और मसलो ना…” भाभी ने फुसफुसाते हुए कहा। उनकी आवाज में वासना थी, और वो मुझसे और रुकने की गुजारिश कर रही थी। लेकिन मैं अब और नहीं रुक सकता था। मैं खड़ा हो गया, और भाभी भी मेरे साथ उठ खड़ी हुई। हम हॉल से बाहर निकल आए और तेजी से होटल की ओर चल पड़े। रास्ते में भाभी चुप रही, लेकिन उनकी आँखों में वही शरारत थी।


होटल के कमरे में पहुँचते ही हमने कपड़े बदले। मैंने पजामा और बनियान पहन ली, और भाभी ने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज। उनका ब्लाउज इतना टाइट था कि उनके उरोज बाहर उभर रहे थे, और पेटीकोट में उनकी गोल चूतड़ों की शेप साफ दिख रही थी। मैं बेड पर बैठा था, लेकिन भाभी की हरकतें देखकर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कुछ करूँ। लेकिन भाभी तो वासना की आग में जल रही थी। अचानक वो मेरे पास आई और बोली, “विजय, तुझे लौड़ी घोड़ी खेलना आता है?”


“नहीं भाभी, ये क्या होता है?” मैंने हैरानी से पूछा।


“अरे, बड़ा मजेदार खेल है! खेलना चाहेगा?” उनकी आँखों में चमक थी।


“हाँ, पर कैसे खेलते हैं? बताओ ना!” मैं उत्सुक हो गया।


भाभी ने हँसते हुए कहा, “देख, मैं तेरी आँखों पर रूमाल बाँध दूँगी। फिर मैं जो अंग बोलूँ, तुझे वही छूना है। अगर गलत अंग छू लिया, तो तुझे घोड़ी बनना पड़ेगा, और मैं तेरी गाँड में उंगली डालूँगी। अगर सही छुआ, तो तेरा लंड मेरी चूत में जाएगा। और तुझे भी मेरे साथ यही करना है।” उनकी बात सुनकर मेरे बदन में सनसनी दौड़ गई। ये तो कमाल का खेल था! हारो या जीतो, मजा तो दोनों हाल में था।


भाभी ने मेरे सामने ही अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। पहले ब्लाउज, फिर पेटीकोट। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उनकी गोरी चिकनी त्वचा, भरे हुए उरोज, और गोल चूतड़ देखकर मेरा लंड पजामे में तन गया। “विजय, तू भी तो कपड़े उतार! तेरा लंड तो देख, कैसे जोर मार रहा है!” भाभी ने हँसते हुए कहा। मैं थोड़ा शरमाया, लेकिन उनकी बेशर्मी देखकर मैंने भी पजामा और बनियान उतार दी। मेरा 6 इंच का लंड अब खुलकर फनफना रहा था।


भाभी ने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा, “अब बस नीचे वालों का काम है। चल, खेल शुरू करते हैं। कंट्रोल रखना, भटक मत जाना!” फिर उन्होंने मेरी आँखों पर रूमाल बाँध दिया और बोली, “मेरे हाथ पकड़!” मैंने हाथ बढ़ाया, लेकिन भाभी तेज थी। वो मेरी तरफ गाँड करके बैठ गई। मैंने अंदाजा लगाकर उनकी गाँड को छू लिया।


“हाय, ये तो गाँड है!” भाभी हँसी। “तू हार गया, अब घोड़ी बन!” मैंने रूमाल हटाया और देखा कि भाभी पूरी नंगी थी। उनकी चिकनी गाँड मेरे सामने थी, और मेरे लंड में आग लग रही थी। मैं घोड़ी बन गया। भाभी ने अपनी उंगली पर थूक लगाया और मेरी गाँड में धीरे से घुसा दी। “उह्ह!” मैं सिसक उठा।


“मजा आया ना, देवर जी?” भाभी ने हँसते हुए कहा और उंगली अंदर-बाहर करने लगी। उनकी उंगली मेरी टाइट गाँड में अंदर-बाहर हो रही थी, और मुझे अजीब सा मजा आ रहा था। “तेरी गाँड तो बड़ी मस्त है, विजय!” भाभी ने मेरी गाँड को थपथपाया और उंगली बाहर निकाल ली।


अब मेरा नंबर था। मैंने भाभी की आँखों पर रूमाल बाँधा और कहा, “मेरी छाती पकड़!” भाभी ने जल्दबाजी में मेरा पेट पकड़ लिया। “अरे भाभी, ये तो पेट है! अब तुम घोड़ी बनो!” मैंने हँसते हुए कहा। भाभी तुरंत घोड़ी बन गई। उनकी गोल चूतड़ हवा में उठे हुए थे, और उनकी चूत गीली होकर चमक रही थी। मैंने उनकी गाँड को सहलाया और अपना तना हुआ लंड उनके गाँड के छेद पर लगा दिया।


“हाय रे, विजय! ये क्या? उंगली डालनी थी, लंड नहीं!” भाभी चिल्लाई, लेकिन तब तक मेरा लंड उनकी टाइट गाँड में आधा घुस चुका था। “उह्ह… हाय!” भाभी सिसक रही थी। मैंने लंड निकाला और उनकी गाँड में उंगली डाल दी। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। भाभी की सिसकारियाँ बढ़ती गई, “आह… विजय… धीरे कर ना!”


“भाभी, अब ये लौड़ी घोड़ी छोड़ो! मेरे लंड का तो कुछ ख्याल करो!” मैंने विनती की।


“नहीं, नियम तो नियम है!” भाभी ने हँसते हुए कहा। “चल, मेरी बारी। आँखें बंद कर!” मैंने आँखें बंद की। भाभी बोली, “मेरी चूंचियाँ पकड़!” मैंने रूमाल के नीचे से थोड़ा सा देख लिया और उनकी चूंचियों को जोर से दबा दिया। उनकी चूंचियाँ छोटी लेकिन सख्त थी, और निप्पल उत्तेजना से तन गए थे।


“हाय, ये तो बेईमानी है!” भाभी चिल्लाई, लेकिन मैंने उन्हें धक्का देकर बेड पर लिटा दिया। मैं उनके ऊपर चढ़ गया और अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया। उनकी चूत गीली और गर्म थी। मैंने धीरे से लंड अंदर पेल दिया। “आह्ह… विजय…!” भाभी की सिसकारी निकल गई। उनकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड पूरा अंदर जाने में थोड़ा रुक रहा था। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। “उह्ह… आह्ह…!” भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थी।


मैंने उनकी चूंचियों को मसलना शुरू किया। उनकी चूत से पानी बह रहा था, और हर धक्के के साथ “चप… चप…” की आवाज आ रही थी। भाभी ने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट ली और नीचे से अपनी चूत उछालने लगी। “विजय… और जोर से… आह्ह… चोद ना…!” भाभी की आवाज में वासना थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। मेरे धक्कों से बेड हिल रहा था, और भाभी की सिसकारियाँ अब गालियों में बदल गई, “हाय… भोसड़ी… चोद ना… मेरी चूत फाड़ दे…!”


करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। भाभी भी चरम पर थी। उनकी चूत अंदर से लहरा रही थी, और अचानक वो जोर से चिल्लाई, “आह्ह… विजय… मैं झड़ रही हूँ…!” उसी वक्त मेरा माल भी उनकी चूत में निकल गया। हम दोनों एक-दूसरे से चिपककर हाँफ रहे थे। उनकी चूत से हमारा माल बहकर बेड पर गिर रहा था।


कुछ देर बाद भाभी बोली, “देवर जी, अब दूसरा दौर शुरू!” मैंने हँसते हुए कहा, “चलो, खेलते हैं!” भाभी ने फिर मेरी आँखें रूमाल से बाँध दी और घोड़ी बन गई। मैंने अपना मुँह उनकी गाँड की तरफ बढ़ाया। मेरी जीभ उनके चूतड़ों पर फिरी, फिर उनके गाँड के छेद को चाटने लगा। भाभी सिसक रही थी, “आह… विजय… ये क्या कर रहा है…!” मैंने जीभ उनके छेद में डाल दी, और वो मस्ती में कराहने लगी।


फिर मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया। उनकी चूत के बालों में मेरी जीभ फँस रही थी, और उनका रस मेरे होंठों पर लग रहा था। मेरा लंड फिर से तन गया। मैंने रूमाल हटाया और भाभी को निहारा। उनकी गोल चूतड़ और गीली चूत देखकर मैं बेकाबू हो गया। मैंने अपना लंड उनकी गाँड में घुसा दिया। “हाय रे… विजय… लौड़ी घोड़ी… गाँड चोद दे…!” भाभी चिल्लाई। उनकी गाँड इतनी टाइट थी कि मेरा लंड पूरा अंदर जाने में दर्द हो रहा था।


“भाभी… ये तो बहुत टाइट है…!” मैंने कहा। भाभी ने गाँड ढीली छोड़ी, और मेरा लंड गहराई तक उतर गया। “आह्ह… हाय…!” भाभी की सिसकारियाँ तेज हो गई। कुछ देर गाँड चोदने के बाद भाभी बोली, “विजय… अब चूत में डाल… मेरी चूत को भी मजा दे…!” मैंने लंड निकाला और उनकी चूत में पेल दिया। इस बार पोजीशन ऐसी थी कि मेरा लंड पूरा अंदर जा रहा था। “चप… चप…!” की आवाज के साथ भाभी की चूत मेरे धक्कों से थरथरा रही थी।


“आह्ह… विजय… चोद… मेरी चूत फाड़ दे…!” भाभी गालियाँ दे रही थी। मैंने उनकी चूंचियों को जोर-जोर से मसला, और मेरे धक्के और तेज हो गए। करीब 15 मिनट बाद हम फिर से एक साथ झड़ गए। हमारा माल उनकी चूत से बहकर बेड पर गिर रहा था। भाभी ने मेरे माल को उंगली से चाटा और बोली, “खबरदार, जो मेरे माल को हाथ लगाया! लौड़ी घोड़ी में सारा माल मेरा होता है!”


“अब तीसरा दौर!” भाभी ने कहा। “इस बार तू घोड़ी बन, और मैं तेरी लौड़ी चूसूँगी। तू चाहे मेरी चूत चाट या कुछ और कर!” लेकिन दो बार चुदाई के बाद मैं थक चुका था। मैं बेड पर लेट गया, और भाभी मुझे झकझोरती रही। लेकिन मेरी आँखें नींद में डूब गई। सुबह जब उठा, तो भाभी मेरे से चिपकी हुई, पूरी नंगी सो रही थी।


भाभी ने मुझे लौड़ी घोड़ी का खेल सिखा दिया। ये ऐसा खेल है, जो कोई भी खेल सकता है, और मजे की गारंटी है। क्या आपको भी ऐसा कोई मजेदार खेल खेलने का मन है? अपनी राय बताइए! Antarvasna Sex Stories

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