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मामी के भोसड़े के मोटे होठ - Hindi Sex Stories

यह बात कोई छह महीने पहले की है, बिल्कुल सच्ची।


मैं किसी काम से मामा के घर गया, जो शहर में रहते हैं। घंटी बजाते ही दरवाजा मामी ने खोला।


वाह… क्या नजारा था। मामी इतनी हसीन लग रही थीं कि मैं बस देखता ही रह गया। गोरा रंग, कसी हुई बॉडी, टॉप में उभरी हुई चूचियां और टाइट जींस में लहराते चूतड़। मेरी नजरें उनके कर्व्स पर अटक गईं। मुँह खुला का खुला रह गया।


मामी ने मुस्कुराते हुए पूछा, “कहाँ खो गए हो?”


मेरे मुँह से निकला, “आपमें ही खो गया हूँ मामी… आप इतनी खूबसूरत हो कि होश उड़ गए।”


मामी शर्मा गईं, होंठ दबाकर बोलीं, “चुप करो… चलो अंदर आओ।”


मैं अंदर आया तो पूछा, “मामा कहाँ हैं?”


मामी ने बताया, “काम से बाहर गए हैं, शाम तक आएंगे।”


उस वक्त सुबह के दस बज रहे थे। मामी बोलीं, “तुम बैठो, मैं चाय लेकर आती हूँ।”


मैं सोफे पर बैठ गया। मामी की कमर मटकती हुई रसोई में गई। मैं सोचने लगा, उनकी उम्र करीब 28-30 की होगी, फिगर कमाल का 34-26-36। इतनी टाइट बॉडी, जैसे अभी-अभी शादी हुई हो। मन में ख्याल आने लगा कि काश इनकी चुदाई कर पाऊँ।


थोड़ी देर बाद मामी चाय लेकर आईं। चाय पीते हुए मैं उन्हें छुप-छुपकर देख रहा था। टॉप से झांकती गहरी क्लीवेज, चूचियां हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। जींस में कसी हुई जांघें और चूतड़। मेरी नजरें बार-बार उनकी कमर पर रुक रही थीं।


मेरा लंड धीरे-धीरे तनने लगा। मामी यह सब देख रही थीं, पर अंजान बनकर मुस्कुरा रही थीं। उनकी साँसें भी थोड़ी तेज लग रही थीं।


अचानक मामी ने पूछा, “क्या देख रहे हो इतना ध्यान से?”


मैं हड़बड़ा गया। हड़बड़ाहट में चाय की चुस्की जांघों पर गिर गई। चाय गर्म थी, मैं चीख पड़ा, “आह्ह!”


मामी फौरन उठीं और मेरी तरफ लपकीं। जल्दबाजी में उनकी चाय भी मेज पर रखना भूल गईं और बची हुई चाय उनकी जींस पर जांघों के पास गिर गई।


मैंने झट से कप मेज पर रखा और मामी की जींस पर हाथ फेरकर चाय पोंछने लगा। कई बार मेरा हाथ उनकी बुर के ऊपर से गुजरा। मुलायम, गर्म एहसास हुआ। मामी की साँसें तेज हो गईं।


मामी हँस पड़ीं, “उफ्फ… तुम्हारी पैंट पर गिरी और मेरी भी यहीं पर!”


मैं भी हँस दिया, पर जलन से आँखों में आँसू आ गए।


मामी बोलीं, “मेरी पैंट तो पूरी भीग गई… उतारनी पड़ेगी।”


मैं कुछ समझ पाता, उससे पहले उन्होंने जींस की बटन खोलकर नीचे सरका दी। गोरी, चिकनी जांघें चमक उठीं। सिर्फ पतली लाल पैंटी बची थी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया।


मामी ने जांघ सोफे पर रखकर दिखाई, “देखो, यहाँ सबसे ज्यादा गिरी है।”


उफ्फ… कितनी मुलायम, चिकनी जांघें। मैंने कहा, “मामी, तुम्हारी जांघें तो दूध जैसी चिकनी हैं।”


मामी ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी जांघ पर रख दिया, साँसें तेज करते हुए बोलीं, “पहले इस जलन को दूर करो, फिर तारीफ करना।”


मैंने कहा, “मामी, चाटनी पड़ेगी तब आराम मिलेगा।”


मामी की आँखें चमक उठीं, बोलीं, “जो करना है जल्दी करो… दर्द हो रहा है।”


वे सोफे पर लेट गईं। मैं झुककर उनकी जांघों को चूमने-चाटने लगा। गर्म, नरम त्वचा का स्वाद… मीठा पसीना। मामी आँखें बंद करके आह्ह… उह्ह… की हल्की आवाजें निकाल रही थीं।


मैंने दूसरी जांघ भी चाटनी शुरू की और धीरे से हाथ पैंटी पर फेरने लगा। पैंटी पूरी गीली थी, बुर का रस महसूस हो रहा था। मामी ने पैर और फैला दिए।


जब कुछ नहीं बोलीं तो मैं समझ गया, रास्ता साफ है। मैंने हाथ पैंटी के अंदर डाल दिया। गर्म, फिसलन भरी बुर। मामी जोर से सिसकारीं, “आह्ह्ह… ह्ह्ह…”


मैं बुर के दाने को सहलाने लगा। मामी की साँसें तेज, “सीईईई… आह्ह… और करो…”


मैंने जांघ चाटना छोड़ा तो मामी बोलीं, “क्यों छोड़ा… और जोर से चाटो ना!”


मैंने कहा, “मामी, अब तुम्हारी बुर चाटना चाहता हूँ।”


मामी ने आँखें खोलकर देखा, फिर कामुक आवाज में बोलीं, “जो चाटना है चाटो… मुझसे पूछने की जरूरत नहीं।”


मैंने मुँह पैंटी के पास ले जाकर ऊपर से चूसना शुरू किया। फिर पैंटी पकड़कर कहा, “चूतड़ थोड़ा ऊपर करो।”


मामी ने बिना बोले चूतड़ उठाए। मैंने झटके से पैंटी उतार दी।


वाह… एकदम चिकनी, सफाचट बुर। मोटे-मोटे गुलाबी होंठ, बीच में लाल दाना चमक रहा था। बुर का छेद छोटा सा, रस से भीगा हुआ। हल्की सी मदहोश गंध ने मुझे पागल कर दिया।


मैंने बुर को फैलाकर दाना चूसना शुरू किया। मामी की कमर उछल गई, “आआह्ह्ह… सीईईई… उइइइ… खा जा मेरी बुर को… जीभ अंदर डालो!”


मैं जीभ से चाटते हुए उंगली डालने लगा। बुर इतनी टाइट कि उंगली मुश्किल से जा रही थी। मामी तड़प रही थीं, “ओह्ह्ह… और अंदर… फाड़ दो मेरी बुर!”


पूरी बुर चाटने के बाद मैंने टॉप ऊपर किया। ब्रा नहीं थी, भारी-भारी चूचियां उछलकर बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल तने हुए। मैंने दोनों को सहलाया तो मामी ने मेरे हाथ दबाए, “जोर से दबाओ… मसलो इन्हें!”


मैंने चूचियां मसलनी शुरू कीं, निप्पल मुंह में लेकर चूसने लगा। मामी सिसकारियां ले रही थीं, “ह्ह्ह… आह्ह… काट डालो…”


फिर मैंने उनके होंठ चूमे, जीभ अंदर डाली। मामी ने मेरी जीभ चूसी। कुछ देर बाद मामी ने मुझे अलग किया, साँसें फूलते हुए बोलीं, “तुम तो पूरे कपड़ों में हो… मुझे नंगा कर दिया?”


मैंने कहा, “तुम ही उतार दो।”


मामी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मेरा 6 इंच लंबा, 3 इंच मोटा लंड देखकर आँखें चमक उठीं। वे खड़ी हुईं, होंठ चूमते हुए बोलीं, “अब मेरी बारी… तुमने मेरी बुर चाटी, अब मैं तुम्हारा लंड चूसूंगी।”


मामी घुटनों पर बैठ गईं। लंड को लॉलीपॉप की तरह चाटने लगीं। फिर मुंह में लेकर चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… की आवाजें। गोलियां मुंह में भर लीं। मुझे स्वर्ग सा लग रहा था।


मैंने कहा, “मामी… अब छोड़ो, रस निकल जाएगा।”


पर मामी नहीं मानीं। जब रस निकलने लगा तो मैंने चेहरा ऊपर किया, पर मामी मुंह में ही लेती रहीं। रस मुंह में भर गया, कुछ बाहर बहा। मामी ने चाटकर साफ किया, सेक्सी निगाहों से देखते हुए होंठ चाटे।


मैंने उन्हें बाहों में लिया, चूमते हुए कहा, “आपने तो स्वर्ग दिखा दिया।”


मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मामी मेरे घुटनों पर बैठीं, लंड को हाथ में लेकर अपनी बुर के दाने पर रगड़ने लगीं। उनका रस मेरे लंड को भिगो रहा था। फिर निशाना बनाकर धीरे-धीरे बैठने लगीं।


उफ्फ… कितनी टाइट बुर। लंड मुश्किल से घुस रहा था। मामी जबड़े भींचे हुए थीं, “आह्ह्ह… ह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा… फाड़ देगा मेरी बुर!”


जड़ तक बैठ गईं तो होंठ चूसने लगीं। मैंने चूचियां मसलते हुए नीचे से धक्के मारने शुरू किए। कमरे में फच-फच… सीईईई… आह ह ह ह्हीईई की आवाजें गूंजने लगीं।


पांच मिनट बाद मामी झड़ गईं, “आआह्ह… मैं गई… उइइइइ…”


पर मैं नहीं रुका। मामी बोलीं, “बस… अब मत करो।”


मैंने कहा, “मेरा तो अभी नहीं निकला… घोड़ी बन जाओ।”


मामी घोड़ी बन गईं। मैंने पीछे से लंड पेला और चोदने लगा। मामी फिर गरम हो गईं, कमर हिलाने लगीं। मैंने बुर का रस उंगली पर लेकर गांड में डाला। मामी उछल पड़ीं, “ओह्ह्ह्ह… वहाँ… आह्ह्ह… और करो…”


मामी फिर झड़ गईं। मुझे भी आने वाला था। पूछा, “कहाँ डालूं?”


मामी बोलीं, “अंदर ही… मेरी बुर में… तुम्हारा बच्चा पैदा करूंगी… मामा तो बूढ़े हैं, तुम्हारा ही चाहिये… खूबसूरत और ताकतवर।”


मैंने उन्हें लिटाया, पैर कंधों पर रखकर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मामी चिल्ला रही थीं, “जोर से… और जोर से… फाड़ डाल… आह ह ह ह्हीईई… मैं फिर गई!”


मैंने चूचियां मसलते हुए पूरा रस बुर में उड़ेल दिया। लंड अंदर ही डालकर उन पर लेट गया।


दस मिनट बाद मामी ने चूमा, बोलीं, “तुम्हारे साथ जितना मजा आया, मामा के साथ कभी नहीं। आज सच में औरत बनी हूँ।”


मैंने कहा, “एक दिन के लिए आया था, अब कुछ दिन और रुकूंगा।”


मामी मुस्कुराईं, “यही तो मैं भी चाहती थी… जितने दिन चाहो रुको।”


और मैं चार दिन तक मामी के साथ मजे करता रहा।


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Mujhe bhi chudwani hai meri wife ko


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