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मामी ने समझाये संभोग के गुप्त रहस्य - Desi Sex Videos

  • Kamvasna
  • 7 दिन पहले
  • 9 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 3 दिन पहले

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम गीतेश पटेल है और मैं 19 साल का हूँ। आज मैं आप लोगों के साथ अपनी एक सच्ची कहानी शेयर करना चाहता हूँ जो आज से 4 साल पहले मेरे साथ घटी थी। बात उन दिनों की है जब मैं अपने मामा के घर में रहता था। मेरे मामा अहमदाबाद में रहते हैं।


उनके घर में सिर्फ मामा और मामी ही रहते हैं। उनकी शादी को 8 साल हो चुके थे, लेकिन कोई बच्चा नहीं था। मैं अपने परिवार के साथ अहमदाबाद के पास एक गाँव में रहता था। वहाँ पढ़ाई के लिए कोई अच्छा स्कूल नहीं था, इसलिए तय हुआ कि मैं अहमदाबाद में मामा के पास रहकर पढ़ाई करूँगा।


वैसे मैं बता दूँ कि मेरे मामा एक वकील हैं और उन्हें केस के सिलसिले में कभी-कभी शहर से बाहर भी जाना पड़ता है। अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ। जैसा मैंने बताया, मैं मामा के यहाँ रहता था। उस समय मामा किसी केस के सिलसिले में मुंबई गए हुए थे और घर पर सिर्फ मैं और मामी थे।


उन दिनों मुझे अपने अंदर कुछ बदलाव महसूस हो रहे थे, लेकिन समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ। उन दिनों पहली बार रात को सोते वक्त मेरे लौड़े से गाढ़ा सफेद दूध जैसा कुछ निकला। यह देखकर मैं तो परेशान हो गया। मैं जल्दी से बाथरूम गया, अपनी अंडरवियर बदल ली और लौड़ा धो डाला। लेकिन जल्दबाजी में अंडरवियर साफ करना भूल गया।


अगली रात को फिर वही हुआ। मैं तो डर गया कि मुझे कहीं कोई बीमारी तो नहीं हो गई। दूसरे दिन जब मैं सो रहा था तो मुझे लगा कि किसी ने मेरे लौड़े पर हाथ रखा है। तभी मामी ने मुझे उठाया। मैंने उन्हें गुड मॉर्निंग विश किया। उन्होंने कहा, “आज संडे है, जल्दी उठो ताकि मैं तेरे सर के बाल धो दूँ और अपना बाकी सारा काम निपटा लूँ।”


मैं जल्दी उठा और ब्रश करने लगा। इतने में मामी दो बाल्टी गर्म पानी लेकर आईं और बोलीं, “जल्दी कर।” (वैसे बता दूँ कि उस वक्त मुझे अपने सर के बाल धोने नहीं आते थे, इसलिए मामी हमेशा मेरे बाल धो देती थीं।)


फिर वो एक स्टूल पर बैठ गईं और मैं उनके सामने ज़मीन पर बैठ गया। मैंने बनियान और ट्रैक पैंट पहना हुआ था। तभी वो बोलीं, “तू यहाँ आकर बिगड़ गया है, ठीक से नहाता भी नहीं। तेरी माँ मुझे ही ताना मारेगी कि मैंने उसके बेटे का ठीक से खयाल नहीं रखा। इसलिए आज मैं तुझे अपने हाथों से घिस-घिस कर नहलाऊँगी।”


फिर उन्होंने मुझे अपने कपड़े उतारने को कहा। मैंने समझाया, “मामी, आप चिंता मत कीजिए, मैं अच्छे से नहा लूँगा।” लेकिन उन्होंने कहा, “नहीं, आज मैं तेरी कोई बात नहीं सुनने वाली।”


आखिर मैं हार गया और बनियान उतार दी। इतने में वो बोलीं, “ये ट्रैक पैंट भी उतार दो।” मैंने वो भी उतार दी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में अपनी मामी के सामने खड़ा था।


तब मामी ने कहा, “ये भी।” मैंने मना कर दिया और कहा, “मुझे नहाना नहीं है।” तो मामी बोलीं, “अच्छा तो ठीक है, मैं तो तेरे ही भले के लिए कह रही थी।” फिर उन्होंने मुझे एक छोटा स्टूल बैठने को दिया और मुझे नहलाने लगीं।


सिर पर शैंपू लगाने के बाद उन्होंने मेरे शरीर पर साबुन लगाना शुरू कर दिया। आज पहली बार मामी का स्पर्श मुझे कुछ अजीब लग रहा था और मेरे लौड़े में हरकत होने लगी।


इतने में मामी बोलीं, “गीतेश, ज़रा खड़ा हो जा, तेरे स्टूल के नीचे साबुन चला गया है।” सिर पर शैंपू होने की वजह से मेरी आँखें बंद थीं, इसलिए मैं खड़ा हो गया। मुझे क्या पता था कि ये मामी की एक चाल थी।


जैसे ही मैं खड़ा हुआ, मामी ने झट से मेरी अंडरवियर नीचे खींच ली। अब मैं मामी के सामने पूरा नंगा खड़ा था। तभी मामी ने कहा, “अब बैठो, अब मैं तुझे अच्छे से नहलाऊँगी।”


फिर मामी ने अपने साबुन वाले हाथों से मेरा लौड़ा पकड़ लिया। एक अजीब सा करंट सा दौड़ गया मेरे पूरे शरीर में, मानो किसी ने बिजली की तार बाँध दी हो। मैं मामी से कहता रहा, “मामी, मत करिए ऐसा, मुझे शर्म आ रही है।” लेकिन आज उनमें कुछ अजीब सा बदलाव था, जैसे वो मेरी मामी नहीं, कोई दूसरी औरत हों।


इतने में उन्होंने मेरे लौड़े की ऊपरी चमड़ी नीचे की और खींची। मेरे मुँह से एक चीख निकल पड़ी। अब वो मेरे लौड़े को आगे-पीछे करने लगीं। पहले तो थोड़ा दर्द हुआ, पर थोड़ी देर बाद इतना मज़ा आने लगा कि मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ। मेरे मुँह से पागलों की तरह आवाज़ें निकलने लगीं।


इस पर मामी ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मुझे फिर वही रात वाली सनसनी महसूस हुई। लेकिन इससे पहले कि मैं कुछ कहता, मेरे लौड़े ने एक ज़ोरदार झटका खाया और पिस्तौल की तरह अपना सारा गाढ़ा दूध मामी के मुँह पर छोड़ दिया।


मामी खड़ी होकर चली गईं। मुझे बहुत बुरा लगा कि मैंने मामी के मुँह पर अपना सफेद पेशाब कर दिया। मैं नहाकर बाहर आया, सिर्फ तौलिया लपेटे हुए। मैंने देखा कि मामी सोफे पर बैठी हैं। मैं उनके पास गया और अंदर हुए हादसे के लिए माफी माँगी।


इस पर उन्होंने मेरी तरफ देखा और पूछा, “कब से तुझे ऐसा सफेद दूध निकलता है?” मैंने उन्हें सारी बात सच-सच बता दी। तो उन्होंने निराशा भरी नज़रों से देखा और पूछा, “क्या तूने किसी और से ये बात कही है?” मैंने कहा, “नहीं।”


तो उन्होंने कहा, “ठीक है, किसी को बताना भी मत। ये बहुत सीरियस मैटर है।” इस पर मैं घबरा गया और पूछा, “मुझे क्या हुआ है?”


तब मामी ने बताया कि मुझ पर लंडदेव का प्रकोप है और इसे टालने के लिए उपाय करना होगा। मामी की ऐसी बातें सुनकर मेरा दिल बैठा जा रहा था।


मैंने पूछा, “ये लंडदेव कौन है और इससे बचने का क्या उपाय है?”


तब मामी ने मुझे लंडदेव की कहानी सुनाई। वो बोलीं, “हज़ारों साल पहले की बात है, इस धरती पर लंडदेव और उनकी पत्नी देवीयोनी रहा करती थीं। उनके पास एक अमृत कुंज था, जिसमें से जहाँ वो अमृत की बूँदें उड़ाते, वहाँ एक बालक जन्म लेता। लेकिन एक दिन लंडदेव जंगल में टहल रहे थे कि उन्हें ज़ोर से पेशाब लगी।


उन्होंने एक पहाड़ी पर खड़े होकर पेशाब कर दिया। उन्हें क्या मालूम था कि नीचे एक महर्षि तप में लीन थे। जैसे ही लंडदेव का पेशाब महर्षि पर पड़ा, उनका तप भंग हो गया। क्रोधित होकर महर्षि ने बिना देखे लंडदेव को श्राप दे दिया कि जिस अंग से तूने मेरी तपस्या भंग की है, आज से तू उसी अंग में वास करेगा। तब से लंडदेव लड़कों की पेशाब वाली जगह में वास करने लगे।


जब ये बात देवीयोनी को पता चली तो वो दौड़ी-दौड़ी महर्षि के पास गईं और लंडदेव को श्राप से मुक्त करने की प्रार्थना करने लगीं। महर्षि ने कहा, “मेरा श्राप अटल है, अब वापस नहीं लिया जा सकता।” तब देवीयोनी ने मिलन का उपाय पूछा।


महर्षि ने कहा, “जैसे लंडदेव मर्दों की पेशाब वाली जगह में वास करते हैं, वैसे तुम औरतों की पेशाब वाली जगह में वास करो।” तब से देवीयोनी हम औरतों की पेशाब वाली जगह में वास करती हैं। और जब किसी लड़के पर लंडदेव का प्रकोप आता है तो सिर्फ देवीयोनी ही उसे शांत कर सकती है और इसके लिए पूजा करनी पड़ती है।”


फिर मामी ने कहा, “क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?” मैंने कहा, “नहीं।” तब मामी की आँखों में आँसू आ गए। ये देखकर मैं घबरा गया और पूछ बैठा, “मामी, क्या हुआ?”


मामी बोलीं, “अब तुझे सिर्फ देवीयोनी ही बचा सकती है। अगर तुझे कल सुबह से पहले कोई योनी नहीं मिली तो तू छक्का यानी हिजड़ा बन जाएगा।”


ये सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैंने कहा, “मुझे छक्का नहीं बनना, आप कुछ कीजिए।”


तब मामी ने कहा, “एक रास्ता है, पर तुझे वचन देना होगा कि ये बात किसी को नहीं बताएगा।” मैंने वचन दे दिया। तब मामी बोलीं, “मैं दूँगी अपनी योनी तुझे। मैं तुझे चक्का बनता नहीं देख सकती। मैं अपनी योनी देकर तेरे लंडदेव का प्रकोप दूर करूँगी। पर अपना वादा याद रखना।”


फिर बोलीं, “तैयार में पूजा की सारी सामग्री तैयार करती हूँ। पूजा के बाद तुझे तुरंत देवीयोनी को रिझाना होगा। अगर वो मान गईं तो लंडदेव भी खुश हो जाएँगे।”


मामी खड़ी हुईं और कुछ देर बाद एक थाली में अगरबत्ती, दिया और एक पेन ड्राइव लेकर ड्रॉइंग रूम में आईं। मुझे नीचे ज़मीन पर बैठने को कहा। मैंने वैसा ही किया क्योंकि मैं इतना प्रभावित हो चुका था कि सोचने लगा कि सच में मैं चक्का बन जाऊँगा।


मामी ने पूजा की थाली रखी और कहा, “गीतेश, देख इस सीडी में योनी को कैसे रिझाते हैं, ये दिखाया है। तू देखकर सीख ले क्योंकि पूजा खत्म होते ही तुझे भी यही करना होगा।”


उन्होंने पीडी प्लेयर में लगाई और टीवी ऑन किया। मैंने जो देखा, आज भी नहीं भूला। मेरी पहली ब्लूफिल्म। उसमें एक लड़की सिर्फ पैंटी में बेड पर सो रही थी। एक आदमी ने आकर उसकी पैंटी निकाल दी और उसके पैर फैलाकर अपनी जीभ से उसकी योनी चाटने लगा। ये देखकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।


मामी ने देख लिया और बोलीं, “देख, तेरे पेशाब में लंडदेव प्रवेश कर रहे हैं।” फिर उन्होंने मेरा तौलिया हटा दिया और झुककर प्रणाम किया।


फिर टीवी में देखा कि आदमी योनी चाट-चाटकर उसका रस पीता है। बाद में लड़की भी लड़के का लौड़ा मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसती है। आखिर में आदमी अपना लौड़ा लड़की की योनी में घुसेड़ देता है और आगे-पीछे झटके मारने लगता है।


फिल्म खत्म हुई तो मामी ने पूछा, “सब समझ गया ना कि योनीदेवी को कैसे रिझाना है?” मैंने हाँ कहा।


तब मामी बोलीं, “चलो अब पूजा शुरू करते हैं।” मैंने पूछा, “पूजा में मुझे क्या करना होगा?” मामी बोलीं, “जैसा मैं कहूँ वैसा करते जाना।”


फिर मामी खड़ी हुईं और अपने सारे कपड़े उतार दिए। वाहह्ह्ह्ह… क्या सीन था! मेरी मामी मेरे सामने पूरी नंगी थीं। आज भी वो दृश्य नहीं भूलता। उनके बड़े-बड़े स्तन, बिना बालों वाली चिकनी योनी… आज भी याद आती है तो लौड़ा खड़ा हो जाता है।


फिर मामी मेरे सामने बैठ गईं और बोलीं, “गीतेश, अब देख, जैसा मैं कहती हूँ वैसा करते जाना।” और खुद ज़मीन पर पैर फैलाकर लेट गईं। आज पहली बार मैं किसी की योनी इतनी करीब से देख रहा था।


मामी बोलीं, “जल्दी कर वरना मुहूर्त निकल जाएगा। पहले मेरी योनी पर कुमकुम का टीका कर दे।” मैंने कर दिया। जैसे ही योनी को छुआ, फिर से बिजली दौड़ गई।


फिर बोलीं, “अब दिया जला और अगरबत्ती कर।” मैंने किया। फिर कहा, “अब जो शहद कटोरी में है वो मेरी योनी के अंदर डाल दे।” उन्होंने खुद अपने हाथों से योनी के होंठ खोल दिए। मैंने पूरी कटोरी शहद उनकी योनी में डाल दिया, पर पूरा नहीं समाया और बाहर निकल आया।


तब मामी बोलीं, “पूजा समाप्त हो गई। अब जल्दी कर, मेरे अंदर देवीयोनी आ रही हैं। जल्दी से उन्हें रिझाना शुरू कर वरना चली जाएँगी।”


मैंने जैसा फिल्म में देखा था, ठीक वैसा किया। मैंने अपनी मामी की योनी पर मुँह लगा दिया और चाटने लगा। वाह, क्या स्वाद था! उनका रस शहद के साथ मिलकर कमाल का टेस्ट कर रहा था। मेरे अंदर भी कँपकँपी हो रही थी, पर मज़ा भी बहुत आ रहा था।


मामी के मुँह से भी अजीब-अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं – “और चाटो… और चाटो… वरना मैं देवीयोनी तुम्हारे लंडदेव को नहीं रिझाऊँगी।” वो मेरे सिर को अपनी योनी पर ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगीं। मैंने लगभग 30-35 मिनट मामी की योनी चाटी।


तब मामी बोलीं, “बस!” और खुद खड़ी होकर मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और मुँह से आगे-पीछे झटके मारने लगीं। मानो मैं सातवें आसमान पर पहुँच गया। मेरा खुद पर कंट्रोल नहीं रहा। पर मामी ने सिर्फ थोड़ी देर ही चूसा। फिर बोलीं, “आओ मेरे लंडदेव, आओ… अपनी योनी तुम्हें बुला रही है।” उनकी आवाज़ सुनकर लगा जैसे मेरी मामी नहीं, खुद देवीयोनी उनके शरीर में हों।


उन्होंने पैर फैलाए और मुझे अपने पैरों के बीच ले लिया। मेरा लौड़ा पकड़कर अपनी योनी के मुँह पर रख दिया और कहा, “झटका लगाओ।” मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा। मेरा पूरा लौड़ा उनकी योनी में घुस गया। उन्होंने अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए और मुझे आगे-पीछे धक्के लगाने को कहा।


मैं धक्के लगाता गया। मुझे ऐसा आनंद पहले कभी किसी चीज़ में नहीं मिला था। मामी कहने लगीं, “ज़ोर से… और ज़ोर से… मेरे देवता… मेरे स्वामी… और ज़ोर से!”


मैंने भी स्पीड बढ़ा दी। फिर वही सनसनी हुई और मेरे लौड़े ने अपने पूरे ज़ोर से सारा दूध मामी की योनी में छोड़ दिया। मैं थककर मामी के ऊपर सो गया।


मामी बोलीं, “ये ले मेरा निप्पल, इसे चूस।” मैंने मामी के निप्पल चूसने लगा। वो मुझे अपनी छाती से दबाने लगीं। बारी-बारी दोनों निप्पल चूसे। फिर मामी खड़ी हुईं और फिर से मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगीं। थोड़ी ही देर में मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया। इस बार उन्होंने मुँह से बाहर नहीं निकाला और बस चूसती रहीं।


मैंने तीन बार दूध निकल जाने की वजह से इस बार थोड़ी देर और मज़ा लिया। आहिस्ता-आहिस्ता मैं कंट्रोल खोने लगा। मैंने कहा, “मामी, मेरा दूध निकलने वाला है।” ये सुनकर उन्होंने स्पीड दोगुनी कर दी और मैंने सारा दूध उनके मुँह में ही निकाल दिया, जो वो सारा पी गईं। उस दिन हमने लगभग 7 बार सेक्स किया।


बाद में मामी ने मुझे सब सच-सच कह दिया और कहा, “गीतेश, तू बुरा मत मानना, पर तुझे कोई बीमारी नहीं है। परसों रात जब तू बाथरूम गया था तो मैं भी उठी थी। मैंने तेरी अंडरवियर पर वो अनमोल सफेद दूध देखा, जिसकी मुझे पिछले 8 सालों से तमन्ना थी। तब मेरे मन में विचार आया और मैंने तेरे साथ सेक्स करने के लिए ये सारा ड्रामा किया।” उन्होंने मुझे ये भी बताया कि योनी को चूत और सेक्स को चोदना भी कहते हैं। और जब मैं उनका भांजा सिर्फ बाहर वालों के लिए हूँ, अकेले में मैं ही उनका शौहर हूँ। जब भी हम अकेले होंगे, सेक्स करेंगे।


इतना कहकर वो मुझसे लिपट गईं और हम लिप-टू-लिप किस करने लगे। फिर एक और चोदने का ज़बरदस्त राउंड लिया। उसके बाद जब भी मामा बाहर जाते हैं, मामी और मैं लंड और चूत का खेल खेलते हैं। और हमारे इस खेल की एक ट्रॉफी भी मामी को मिली – 9 साल बाद उनके यहाँ एक हट्टे-कट्टे लड़के ने जन्म लिया। मामा तो यही समझते हैं कि उनकी निशानी है, पर मामी को पता है कि ये किसके बीज का फल है। आज मेरा और मामी का बेटा पूरे 4 साल का हो गया है।


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