मेरी कुँवारी दोस्त अजनबी से प्रेग्नेंट हो गई - Hindi Sex Stories
- Riya
- 25 नव॰ 2025
- 9 मिनट पठन
हेलो दोस्तों आपकी रिया एक बार फिर से एक सच्ची कहानी लेकर आइए जो कि मेरी खास सहेली की है आज मैं वह सच्ची कहानी आपसे शेयर कर रही हूं।
मेरी सहेली का नाम टीना है वह एक मल्टी कंपनी में पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट पर नौकरी करती है। उसकी उम्र 24 साल और बॉडी फिगर 34-30-36 है वह बहुत ही खूबसूरत गोरी चिट्टी और सेक्सी है।
वह पी जी मैं रहती है,, अब आगे की कहानी उसी की जुबानी।
मैं एक कंपनी ने अपने पर्सनल सेक्रेटरी हूं और सुबह शाम में सिटी बस से ही ऑफिस आती जाती थी सुबह-शाम सिटी बस में काफी खचाखच भीड़ होती थी जिस कारण मैं बस के गेट के साथ ही पीछे के हिस्से में सीटें नहीं थी।
बस स्टैंडिंग जगह थी गेट से चढ़ते ही राइट हैंड पर एक छोटा पार्टीशन था जिसमें चार पांच लोग खड़े हो सकते थे और बाकी ओपन स्टैंडिंग था भीड़ के कारण मैं अक्सर उस पार्टीशन वाले हिस्से में ही घुस कर खड़ी हो जाती थी।
इस दौरान खचाखच भीड़ में काफी लोग मेरी चुचियों चूतड़ों पर हाथ साफ कर दिया करते थे। लेकिन बस में खचाखच भीड़ होने के कारण मैं चुप रहती। मैं कई दिनों से नोटिस कर रही थी कि एक 55 साल के आसपास उम्र का आदमी हमेशा मेरे साथ ही टच होकर अपना लंड मेरे चूतड़ों की दरार में सटा कर खड़ा होता था।
शुरू शुरू में मैं उसको गुस्से से देखती थी लेकिन धीरे-धीरे उसकी हरकतों से मुझे अजीब सा आनंद आने लगा था। और इस दौरान हमारी आपस में बातचीत शुरू हो गई उसने बताया कि उसका नाम शिशुपाल है वह सरकारी दफ्तर में एक इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर था। इसलिए मैं बस में आते जाते उससे खुलकर बातें करने लगी थी और वह भी अक्सर मेरे पीछे खड़ा होकर अपने लंड से मेरे चूतड़ों में ठोकर मारता रहता था और मौका देखकर मेरी चुचियों को भी दबा दिया करता था। जिसमें मुझे आनंद आने लगा था।
अब वह खचाखच भीड़ में मनचलों लोगों से मेरी हिफाजत भी करने लगा था इसलिए मैं उसकी तरफ आकर्षित होती चली गई। हमने अपने फोन नंबर भी आपस में एक्सचेंज कर लिए थे और कई बार ऑफिस में काम ज्यादा होने की वजह से लेट हो जाती थी तो वह मुझे फोन पर पूछ कर मेरे साथ ही आता था इसलिए मुझे अंधेरा होने पर भी उसका साथ मिल जाता था।
इस टाइम बस में भीड़ कम होती थी और हम बस में पीछे वाले हिस्से में ही खड़े होते थे उस टाइम उस हिस्से में कोई और नहीं होता था और इसका फायदा उठाकर शिशुपाल मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरे होठों पर लंबा चुंबन ले लिया करता था और मस्ती में आकर मैं भी उसे सहयोग करने लगी थी। मैं ऑफिस में पर्सनल सेक्रेटरी होने के कारण अक्सर साड़ी और स्कर्ट पहनती थी जिस कारण मेरा रूप सौंदर्य और खिलकर लोगों की आंखों में हवस की आग भर देता था।
1 दिन लेट होने के कारण हम दोनों बस के पिछले हिस्से में थे। सर्दी का दिन थे तो काफ़ी अँधेरा हो गया था और सवारिया भी बहुत कम थी।
उस दिन मैंने स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें आगे की तरफ एक लंबा कट था उस दिन शिशुपाल ने मुझे अपनी बाहों में भींच कर मेरे रस भरे होठों को चूस रहा था मेरे टॉप में अपना हाथ डाल कर मेरे चूचियों को मसल रहा था। मेरे अंदर चिंगारी भर कर लावा फूटने लगा था तभी शिशुपाल ने अपनी पैंट की जिप खोलकर अपना लंबा मोटा लंड निकाल मेरे हाथ में दे दिया।
मैं हैरान होकर उसके लंबे मोटे फौलादी लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी थी और हैरान थी इस उम्र में भी उसका लंड इतना फौलादी था। शिशुपाल अपने हाथ से मेरी गांड और मेरी चुत को सहला रहा था। फिर उसने मेरी स्कर्ट ऊपर को उठानी चाही, तो मैंने उसे रोककर अपनी स्कर्ट को घुमा कर आगे वाला लंबा कट पीछे कर दिया जिससे मेरे स्कर्ट बिना उठाएं आधे से ज्यादा मेरे चूतड़ नंगे हो गए और शिशुपाल ने अपना लौड़ा मेरे चूतड़ों के बीच में देकर हल्के हल्के से धक्के लगाने लगा।
मेरी चुत पानी छोड़ कर काफी गीली हो चुकी थी। मैंने मौके की नजाकत को देखकर अपनी टांगें चौड़ी कर ली और आगे को झुक गई।
अब शिशुपाल का लंड मेरी चुत के मुंह पर ठोकर मार रहा था। शिशुपाल अपने लंड को हाथ से पकड़ कर मेरी चुत के मुंह पर सेट कर मुझे इशारा किया तो मैं अपने दांत भींच कर आने वाले दर्द को सोच कर तैयार थी। तभी शिशुपाल ने अपने लंड को जोर का धक्का दिया लंड मेरी चुत के मुंह पर जोर से ठोकर मार कर फिसल गया। और मेरे मुंह से आह निकल कर मैं आगे को खिसक गई।
फिर शिशुपाल ने मेरे हाथ में अपना लंड देकर इशारा किया तो मैंने शिशुपाल का लंड पकड़ कर अपने चूतड़ों के नीचे से अपनी चुत के मुंह पर लगा कर शिशुपाल को उसका लौड़ा दबाकर इशारा किया तो शिशुपाल ने फिर से तगड़ा धक्का दिया इस बार भी शिशुपाल का लंड मेरी चुत के मुंह पर चोट मारता हुआ फिसल गया।
इस तरह से मैंने और शिशुपाल ने 6,7 बार कोशिश की लेकिन शिशुपाल का फौलादी मोटा लंबा लंड हर बार मेरी चुत के मुंह पर जोर से चोट मारकर फिसल जाता। इस तरह मेरी चुत दुखने लगी थी। मेरी चुत कुंवारी और टाइट होने के कारण शिशुपाल का लौड़ा घुस नहीं पा रहा था।
अब हमारा 1/2 धंटे बाद स्टॉप भी आने वाला था इसलिए हमने अपने कपड़े ठीक कर के अपने आप को संभाला और सारी रात में शिशुपाल के फौलादी लंड के बारे में सोचती रही और मीठे मीठे सपनों में सो गई।
मैं यह भी सोच रही थी कि अगर शिशुपाल का फौलादी लंड बस में मेरी चुत में घुस जाता तो मेरी चीखें निकलने के कारण बस वालों को पता चल जाता। यह बात मैंने अगले दिन फोन पर शिशुपाल को बताई तो शिशुपाल को पता चला कि मैं कुंवारी हूं।
शिशुपाल ने फोन करके बताया की तीन हॉलीडे एक साथ पढ़ रहे हैं और वह 3 दिन की और छुट्टी लेकर पूरा सप्ताह मुझे अपने फार्म हाउस पर प्रोग्राम बनाया। मैं शिशुपाल को मना नहीं कर पाई और मैं भी 3 दिन की और छुट्टी लेकर पूरा सप्ताह उसके फार्म हाउस पर जाने के लिए पार्लर से वैक्सिंग फेशियल वगैरह काम करा कर तैयार हो गई उस दिन शिशुपाल ने स्पेशल मुझे साड़ी पहनने के लिए बोला था।
तय समय पर मैं पहुंची तो शिशुपाल अपनी कार लेकर मेरा इंतजार कर रहा था। और मुझे इस रूप में देखकर वह खुशी से फूला नहीं समा रहा था। मैंने उस दिन ऑरेंज साड़ी ऑरेंज ब्लाउज और ऑरेंज चूड़ियों का सेट और मैचिंग हेयर स्टाइल फुल मेकअप मे थी।
मेरे कार में बैठते ही शिशुपाल ने आगे बढ़कर मेरे होठों पर एक किस किया। फिर शिशुपाल ने कार चला कर आगे मार्केट में एक किनारे रोक रोक कर वह कुछ सामान लेने चला गया वापस आया तो उसके हाथ में तीन रम दारु की बोतल और खाने-पीने का ढेर सारा सामान था।
फिर 5 घंटे की ड्राइव कर कर हम शिशुपाल के फार्म हाउस पर पहुंच गए वह एक छोटा लेकिन बहुत ही अच्छा फार्म हाउस था उसमें बीचो-बीच थ्री बैडरूम सेट बना हुआ था और फार्म हाउस के बीचों-बीच एक स्विमिंग पूल भी था।
फार्म हाउस का मेन गेट बंद करने के बाद शिशुपाल ने मुझे मेरी साड़ी खींचकर अपनी बाहों में भर लिया इस कारण मेरी दोनों चूचियां शिशुपाल के सीने में दब गई और अपने होंठ मेरे होठों से लगाकर एक लंबा किस ले लिया मैंने भी अपने बाहों का हार बना कर उसके गले में डाल उसको सहयोग करने लगी।
काफी देर तक मेरे होंठ चूसने के बाद उसने मुझे अपनी बाहों में उठा कर बेडरूम में बेड पर लिटा कर मेरे ऊपर आ वह लगातार मेरे होंठों को चूस कर और अपने हाथों से मेरे चूचियों को दबाने लगा जिस कारण मेरे होठों से सिसकारियां निकलने लगी। फिर उसने मेरे ब्लाउज की डोरियों खींचकर ब्लाउज अलग कर दिया साथ ही साथ मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच कर उतार दिया अब मैं शिशुपाल की बाहों में ब्रा पेंटी में रह गई थी।
शिशुपाल लगातार मेरे होंठों को चूस रहा था जैसे कि वह मेरे जिस्म को देखकर अपने होशो हवास को कर पागल सा हो गया था।, उसने जल्दी ही अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया और फिर मेरी ब्रा पैंटी भी उतार दी अब हम दोनों बेड पर एक दूसरे की बाहों में नंगे थे शिशुपाल एक चूची मेरी मुंह में लेकर चूसने था दूसरी चूची को अपने हाथों से मसल रहा था। मेरे अंदर एक लावासा भर गया था जिस कारण मेरी चूत काफी गीली हो चुकी थी।
मैं मन ही मन डर रही थी के शिशुपाल का लंबा मोटा लंड मेरी चूत में कैसे घुस पाएगा। शिशुपाल ने मेरी दोनों चुचियों पर लाल लाल निशान डाल दिए थे और अपने दांतों से काटने का भी।,, लेकिन शिशुपाल बारी बारी से मेरे होठों को और मेरी दोनों चूचियों को जमकर चूस रहा था मैं शिशुपाल के नीचे दबी हुई थी शिशुपाल मेरे ऊपर होने के कारण शिशुपाल का लंबा मोटा फौलादी लंड मेरी जांघों के बीच में मेरी चूत पर ठोकर मार रहा था,, कमरे में मेरी जोर जोर से सिसकारियां गूंज रही थी।
आहहहहहह उई उई मां ममम ररर।आह ओह ईईईई ऊऊऊऊ ऊचचचचचचच।,, उममममम आहहहहहह।,, उई मां ममम ररर।,, आह ओह ईईईई।, ऊऊऊऊ ऊचचचचचचच।
अब मैं भी अपने चूतड़ को उछालने लगी थी तभी शिशुपाल ने मेरी दोनों टांगे चौड़ी करके अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा जिससे मुझे अजीब सा आनंद आ रहा था फिर शिशुपाल ने अपना मुंह मेरी चूत पर लगा कर चूसने लगा मैं अपने होशो हवास खो बैठी थी और मैंने अपने हाथों से शिशुपाल का सर अपनी चूत पर जोर से दबा लिया और चूतड़ को उछालने लगी।आह ओह ईईईई।, ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई मां।, ममम ररर।,, आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ।, ऊचचचचचचच। उममममम आहहहहहह।
तभी शिशुपाल ने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर लगाकर एक जोर का धक्का मारा मेरे मुंह से एक लंबी दर्द भरी चीख निकल गई।, आह ओह ईईईई ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। ऊं उई मां। ममम ररर गई।
आह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ। शिशुपाल का लंड मेरी चूत को फाड़ ता हुआ अंदर घुस चुका था लेकिन शिशुपाल ने मेरी चीखें पर ध्यान ना दे कर ताबड़तोड़ तगड़े धक्के लगाकर अपना लंबा मोटा फौलादी लंड मेरी चूत में जड़ तक पहुंचा दिया जिससे मेरी आंखों में आंसू आ गए दर्द के कारण।
मेरी चूत से खून के फुहारे छूट रहे थे। दर्द के मारे मैं अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी। मेरी जोर जोर से दर्द भरी चींखें निकल रही थी। आहहहहहह उई मां। ममम ररर गई।,, आह ओह ईईईई।, ऊऊऊऊ।,, ऊचचचचचचच।, उममममम। आहहहहहह।,, उई मां। ममम। ररर गई।, आह ओह ओह ईईईई,, ऊऊऊऊ ऊचचचचचचच।,, उममममम।
शिशुपाल ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर मेरी चूत के चीथड़े उड़ा रहा था।, शिशुपाल का लौड़ा हर धक्के पर मेरी बच्चेदानी में जा रहा था। मैंने अपना एक हाथ अपनी चूत पर लगा कर देखा तो शिशुपाल का पूरा लंड मेरी चुत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था मैंने शिशुपाल का लंड पर उंगलियां लगाई चुत पर तो मेरे हाथ पर काफी सारा खून लग गया था।
मैं समझ गई शिशुपाल ने अपने लंबे मोटे फौलादी लंड से मेरी सील तोड़ दी इस कारण मेरी चूत से काफी खून निकल रहा था तभी मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया और मुझे अब दर्द के बजाए आनंद आने लगा था।
अब मेरी दर्द भरी के साथ-साथ मस्ती की भरी सिसकारियां भी गूंजने लगी और मैंने अपनी बाहों में शिशुपाल को जकड़ कर अपने चूतड़ ऊपर उछालने लगी इस कारण शिशुपाल की जांघ मेरी जांघों से जोरों से टकराकर पट्ट पट।फच फच फच फच,, फच फच फच फच। फच फच फच फच। की आवाजें हो रही थी शिशुपाल काफी ताकत से मुझे ताबड़तोड़ चोद रहा था।
मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी।, लेकिन शिशुपाल रुकने का नाम नहीं ले रहा था। 45 मिनट चोदने के बाद शिशुपाल ने मेरी दोनों टांगे उठा कर अपने कंधों पर रख ली और ताबड़तोड़ अपना लंड मेरी चुत में पेलने लगा।
शिशुपाल का लौड़ा मेरी बच्चेदानी को हर बार ठोकर मार रहा था जिस कारण मैं बार-बार उछल रही थी। हर 15 सोलह धक्कों पर मेरी चुत पानी छोड़ कर झड़ रही थी और मेरे चार बार झड़ने पर शिशुपाल ने ताबड़तोड़ धक्के लगाकर अपना लौड़ा मेरी चुत में जड़ तक पहुंचा कर अपना वीर्य मेरी चुत में उड़ेल कर मेरी पूरी चुत अपने वीर्य से भर दी मुझे शिशुपाल का गरम गरम वीर्य अपनी चुत में महसूस हो रहा था और वीर्य की गर्माहट चुत के अंदर काफी अच्छा सुकून दे रहा था इस कारण मेरी दोनों आंखें बंद होकर मैंने अपने होठों को शिशुपाल के होठों से बढ़ा दिया था।
शिशुपाल मेरे ऊपर ही इसी हालत में लेट गया अभी भी शिशुपाल का लौड़ा मेरी चुत के अंदर था और मेरी चुत का पानी और शिशुपाल का वीर्य दोनों मिलकर मेरी चुत से बह रहे थे और कुछ देर लेटने के बाद शिशु को कॉल अलग हुआ तो उसका लंड भी उछलकर मेरी चूत से बाहर हो गया इस कारण ढेर सारा वीर्य और मेरी चूत का पानी बेड की चादर पर गिरने लगा।
शिशुपाल ने पूरे सप्ताह दारू पीकर रात दिन मुझे चोद चोद कर लड़की से औरत बना दिया अब मुझे भी अपने अंदर एक भरपूर औरत होने का एहसास होने लगा था और मेरी दोनों चूचियां और दोनों चूतड़ साइज बढ़ गया था। इस पूरे सप्ताह में शिशुपाल ने मुझे तकरीबन 45 बार जमकर चोदा।
फिर 1 दिन ऑफिस में मुझे उल्टियां हुई और महीने पर पीरियड ना आने के कारण मुझे प्रेग्नेंट होने का पता चला तो घबराकर मेरी जान निकल गई। यह बात मैंने शिशुपाल को फोन पर बताई तो शिशुपाल ने अपने एक विश्वास के डॉक्टर से संपर्क कर मेरी प्रेगनेंसी गिराकर रुकवा दी। इस दौरान मुझे 3 दिन ऑफिस से छुट्टी लेकर कंप्लीट आराम करना पड़ा।
यह थी मेरी सच्ची घटना जो मैंने आप लोगों के साथ शेयर कर अपना दिल हल्का किया। आप को ये Hindi Sex Stories अच्छी लगी हो तो मुजे rs9533749@gmail.com मेल करे और कमेंट करे।

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