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मेरी पहली गांड चुदायी हुई स्कूल में - Gay Sex Stories

  • Kamvasna
  • 16 दिस॰ 2025
  • 7 मिनट पठन

मेरा नाम राहुल (बदला हुआ) है, उत्तर प्रदेश से हूँ. रंग गोरा, कद औसत से थोड़ा बड़ा और चिकना सा हूँ.

मैं बीस साल का हूँ, पर अभी तक दाढ़ी नहीं आई है.

मेरे शरीर पर भी ज़्यादा बाल नहीं हैं और मेरी कमर लड़की जैसी पतली है.


मैं इस साइट का बहुत दिनों से पाठक हूँ पर जल्दी कोई ऐसी सेक्स कहानी पढ़ने को नहीं मिलती जिसमें वास्तविकता का आभास हो.

इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न अपनी सच्ची सेक्स कहानी आप सभी के सामने रखूँ.


ये चिकना लड़का Gay Sex Storiesआज से सात साल पहले की है, जब मैं युवावस्था में प्रवेश कर रहा था.

उस वक्त मैं स्कूल में पढ़ता था और कुछ दिनों से एक नए हॉस्टल में रह रहा था.


वह ठंड का मौसम था.


एक दिन कमरे में सब लड़के मूवी देख रहे थे।


वे लोग एक छात्र के बेड पर बैठकर मजा ले रहे थे.

उसका नाम था आशीष (बदला हुआ), रंग सांवला, कद छोटा, गांड औरतों जैसी बड़ी.


वह बोला- मुझे नींद आ रही है, कहां सोऊं?

एक लड़का बोला- आ जा मेरे बेड पर, यहीं सो जा आज रात!


पर उस छात्र का कम्बल पतला था तो आशीष ने कहा- नहीं, मुझे बहुत ठंड लगती है. मैं तेरे साथ नहीं सोऊंगा!


उसी वक्त मैंने कहा- तुम मेरे बेड पर सो सकते हो.

उसने मुझे देखा और मुस्कुरा दिया.


फिर थोड़ी देर बाद वह मेरे बिस्तर में आ गया.

यह एक सिंगल बेड था इसलिए हम दोनों कम्बल के अन्दर चिपक कर सो गए.


ठंड के मौसम में दोनों के शरीर गर्म हो रहे थे।

किसे पता था कि मूड भी गर्म होने वाला है.


धीरे-धीरे रात ज़्यादा हो गई.

रूम के सारे बल्ब बंद हो चुके थे, सब सोने जा चुके थे.


हम दोनों भी गहरी नींद में सो रहे थे.

उसी वक्त मेरी नींद टूटी क्योंकि वह अपने हाथ से मुझे ऊपर से नीचे सहला रहे थे.


कभी जांघ, कभी कमर, तो कभी गर्दन, छाती, नाभि सब बड़े प्यार से!


वैसे तो मैं स्ट्रेट हूँ, पर उस वक्त ये इतना अच्छा लग रहा था कि सोचकर ही खड़ा हो जाता है.


मैं उसे रोक नहीं पाया, आंखें बंद करके सोने का नाटक करता रहा.

पूरे शरीर में अजीब-सी गुदगुदी हो रही थी.


पहली बार जीवन में ऐसा अनुभव हो रहा था.

मन कर रहा था कि ये चलता रहे, ये रुकना नहीं चाहिए.


पर कभी-कभी उम्मीद से ज़्यादा मिलता है, वह भी अचानक … मेरे साथ उस रात वही हो रहा था.


वह अब मेरे पैंट के ऊपर से मेरा लंड रगड़ रहा था.

अब तक जो आनन्द मिल रहा था, वह हजार गुना बढ़ गया था.


चाहकर भी मैं उसे रोक नहीं पा रहा था.

मैंने अपना शरीर एक सीनियर के हाथों सौंप दिया था और वह मेरे इस शरीर का बहुत अच्छे से ख्याल रख रहा था.


पर इतनी देर तक कोई प्रतिक्रिया न देने पर … शायद वह मेरा मूक इशारा समझ चुका था.


अब उसका हाथ धीरे-धीरे पैंट के अन्दर जाने लगा.

वह मुझे तड़पा रहा था क्योंकि उसका हाथ थोड़ा अन्दर जाता, फिर बाहर … थोड़ा अन्दर जाता, फिर बाहर …

इस सबसे मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो रही थी.

मेरा लंड उसके हाथ के स्पर्श के लिए तड़प रहा था.


फिर उसका हाथ आखिरकार मेरे लंड पर आ गया.

हाय … जैसे कम्बल में जन्नत आ गई हो!


वह मेरे लंड को जैसे मसल रहा था मानो मथानी चला रहा हो.


कभी-कभी चमड़ी पीछे खींच देता, तो कभी उसे मक्खन के जैसा मसलने लगता.


सच में यार ये पहला अनुभव मेरे पूरे शरीर में रोमांच भर रहा था.

ऐसा लग रहा था मानो पूरे शरीर का खून लंड में पहुंच गया हो.


धीरे-धीरे चीज़ें बर्दाश्त के बाहर हो रही थीं.

मैं अपनी गांड ऊपर करके उसके हाथ से लंड रगड़वा रहा था.


मेरी सांसें तेज़ हो रही थीं जिससे माहौल और वासनामयी हो रहा था.

उसे भी समझ आ गया था कि मैं मजा ले रहा हूँ.


मैंने अब उसकी तरफ मुँह और लंड करके करवट ले ली और उसके शरीर पर धक्का देने लगा था ताकि वह मेरी तरफ अपनी गांड करके करवट ले ले.

पर वह नहीं घूम रहा था.


बिना मुँह से एक शब्द निकाले, उस रात हम दोनों सच्चे आशिकों की तरह एक-दूसरे को समझ रहे थे.

मैंने अब अपना हाथ उसकी चड्डी के अन्दर डाल दिया. उसका लंड पूरा खड़ा और कड़क था.


मैं उसका लंड मसल रहा था. मेरा हाथ बड़े धीरे-धीरे, लयात्मक तरीके से चड्डी के अन्दर-बाहर कर रहा था.

जब मेरी उंगली उसके लंड पर चलती, तो वह तड़पने लगता, चड्डी में इधर-उधर भागने लगता.


सर्द रात में किसे पता था कि मेरे बेड पर कम्बल के अन्दर इतना गर्म माहौल है … अगर पता होता तो पूरा छात्रावास आ जाता अपनी वासना पूरी करने!

खैर … मेरा हाथ उसके लंड से धीरे-धीरे उसके कूल्हों की तरफ जाने लगा.


जब मैं उसके कूल्हों को सहलाता, तो उसकी तेज़ सांसों की आवाज़ मेरे कानों में पहुंच कर मेरी वासना की आग को और भड़का रही थी.

मैं कभी उसका लंड मसलता, तो कभी उसके कूल्हे सहला रहा था.


वह मेरी पीठ पर अपने नाखून चुभा रहा था और कभी-कभी मेरी गांड सहला रहा था, दबा रहा था.


फिर मैंने उसे करवट लेने के लिए धक्का दिया.

तो इस बार वह खुद को रोक नहीं पाया.

उसने अपनी गांड मेरे लंड के सामने कर दी.

बिना मुँह से एक शब्द निकाले, वह गान्ड चुदाई का खुला न्योता दे रहा था.


मेरा लंड गांड के स्पर्श के लिए न जाने कब से तड़प रहा था.

कम्बल के अन्दर अंधेरे में ही लंड ने बगावत कर दी थी, तो अब तो चोदना ही था.


हम दोनों एक-दूसरे के लंड को रगड़ते हुए कसकर गले लग गए.

रात की मस्त चुदाई के बाद सुबह जुदाई हो गई.


पर हमारे मूक प्यार ने, या कहें एक-दूसरे के लंड और गांड ने इज़हार कर दिया था और उसकी स्वीकृति भी मिल गई थी.


इसलिए उस दिन के बाद चुदाई का ये सिलसिला रुका नहीं.

हम दोनों छिप-छिपकर एक-दूसरे की गांड मारने लगे.


अब मैं भी उसे अपने छेद में लंड डालने देता था और मैं भी डालता था.

अब तो लंड से मलाई जब भी चूने को होती थी, तो हम दोनों एक-दूसरे की गांड में ही डाल देते थे.


अब ओरल सेक्स भी होने लगा.

चुम्मा से तो हमारा मन ही नहीं भरता था.


स्कूल जीवन में हमने एक-दूसरे की सेक्स की ज़रूरत सैकड़ों बार पूरी की.


स्कूल जीवन के बाद हम वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को नंगा देखकर अपना लंड हिला लेते हैं और हमेशा मिलने की प्लानिंग करते रहते हैं.


डेढ़ महीने पहले हम मिले भी थे, मेरे किराए के कमरे में … जो मैंने पढ़ाई के लिए लिया है.

वह शाम को आया, पूरी रात रुका और अगले दिन सुबह 10 बजे तक चल गया.


उस रात वह दो कंडोम भी लाया था चॉकलेट फ्लेवर वाले एक्स्ट्रा डॉटेड ड्यूरेक्स!


जैसे ही वह मेरे रूम में आया था, गेट बंद करके मेरे होंठों पर टूट पड़ा था.

मैं भी उनके होंठों पर टूट पड़ा था.


हम एक-दूसरे की जीभ चूसने लगे, एक-दूसरे की गांड दबा रहे थे.

फिर वह बोला- टी-शर्ट खोलो न!


मैंने कहा- अभी पूरी रात बाकी है, पहले चलकर खाना खा लेते हैं!

पर वह नहीं मान रहा था.


वह बोला- पहले एक राउंड कर लेने दे न बेबी!

मेरे मना करने पर वह बोला- बस ऊपर-ऊपर से!

तो मैंने हां कर दी.


फिर तुरंत हम दोनों नंगे हो गए.

एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूसते हुए ऊपर-ऊपर से एक-दूसरे की गांड में लंड रगड़ कर मज़ा ले रहे थे.


फिर हमने एक-दूसरे के लौड़े की मुठ मारी और कपड़े पहन कर खाना खाने चले गए.


खाना खाकर लौटे तो दोनों ने अपने कपड़े खोलकर फेंक दिए और एक-दूसरे को कंडोम पहनाने लगे.


वह मेरा लंड चूसने लगा.

चॉकलेट का स्वाद लेते हुए बड़ा मजा राय था उसे.


थोड़ी देर तक जब वह मेरा लंड चूस रहा था, मैं उसके बाल पकड़ कर गांड आगे-पीछे करके उसका मुँह चोद रहा था.

फिर मेरी बारी थी.


पहली बार मैंने कंडोम में उसका लंड चूसा.


बिना कंडोम के हम दोनों को ही मुँह में लेने का मन नहीं करता था इसलिए वह कंडोम लाया था.


इस बार कोई तकलीफ़ नहीं थी, तो मैं पॉर्न मूवी की तरह उसका लंड चूस रहा था … जैसे चॉकलेट फ्लेवर का लॉलीपॉप हो!

इसके बाद हमने कंडोम फेंक कर एक-दूसरे को चोदने की तैयारी की.


बॉटल से एक कटोरे में सरसों का तेल निकाला और मैं पेट के बल लेट गया, अपनी गांड उसे दिखाते हुए.

वह तेल से मेरा मसाज करने लगा.


पहले पीठ, फिर पैर और अब बारी थी मेरी गांड की.

मसाज करते-करते वह अपनी उंगली मेरे गांड के छेद पर रगड़ रहा था.


जैसे ही उसकी उंगली छेद में जाती, मेरे मुँह से धीमी-सी ‘आह … आह!’ निकल जाती.


माहौल पूरा गर्म हो रहा था.

फिर वह बोला- अब मेरी भी मसाज कर दो!


मैं उसके पैरों के बीच बैठकर उसकी पीठ की मसाज करने लगा.

मेरा लंड उसकी गांड से रगड़ रहा था.


फिर मैंने उसके पूरे शरीर की मसाज खत्म की और उसकी गांड पर आ पहुंचा.

मसाज करते-करते चोदने की असीम इच्छा होने लगी.


मैंने कुछ तेल अपने लंड पर और कुछ उसके छेद पर लगा दिया.

उसके पेट के नीचे दो तकिए रखे, जिससे उसकी गांड मेरे लंड के लिए ऊपर उठ गई.


उस दिन बहुत दिनों बाद पेल रहा था और वह भी किसी से नहीं चुदा था तो बहुत मुश्किल से छेद में लंड घुसा.

पर जब घुसा तो जन्नत भी इस अनुभव के सामने कुछ नहीं थी.


मेरे लौड़े से मलाई पहले ही चू चुकी थी तो जल्दी होने वाला नहीं था.


इस पोजीशन में उसे भी लंड लेने में दिक्कत हो रही थी, तो वह पलट गया और मेरे कंधों पर पैर रखकर मुझसे चुदवाने लगा.


अब इस बदली हुई पोजीशन में लंड पूरा अन्दर तक जा रहा था.

हद से ज़्यादा मज़ा आ रहा था.


पर थोड़ी देर में वह चिल्लाने लगा- निकालो … निकाल लो आह … दर्द बढ़ रहा है!

मैंने कहा- थोड़ा और रुको.


बस मैं धीरे-धीरे उसे चोदने लगा.

बीच-बीच में मैं उसे किस भी कर रहा था।


वह भी ज़ोर से मेरी पीठ पकड़ लेता और लौड़े से मजा लेने लगता.

फिर उसकी ज़िद पर मैंने लंड बाहर निकाल लिया.


अब उसकी बारी थी मेरी गांड मारने की.

पर उस रात मेरा छेद ज़्यादा तंग था.


वह बहुत कोशिश कर रहा था, पर लंड घुस ही नहीं रहा था.

ज़्यादा ज़ोर लगाता, तो मैं दर्द की वजह से उसे रोक देता.


फिर मैंने उसके लंड को हाथ से मुठियाया और अपनी गांड से रगड़ कर उस रात उसे आनन्द दिया.

पूरी रात चोदने की कोशिश करने में ही निकल गई.


मैंने उसे कई राउंड चोदा, पर वह मेरे छेद में लंड नहीं डाल पाया.

फिर भी पूरी रात में बहुत मज़ा लिया.


साढ़े नौ बजे सुबह तक चोदा-चोदी चलती रही.

फिर दस बजे वह मेरे होंठ चूसकर चल गया.


अब उससे फिर कब मिल पाऊंगा या नहीं मिल पाऊंगा, कुछ पता नहीं.

हालांकि हम लोग योजना बना रहे हैं.


इस बार मैंने वादा किया है कि कितना भी दर्द हो, उसका लंड पूरा अन्दर डलवा ही लूँगा.


हम दोनों स्ट्रेट हैं और दोनों की गर्लफ्रेंड भी हैं, पर एक-दूसरे की लेने की आदत नहीं छूट रही है.

अब आगे जब भी कभी कुछ होगा, तो लिखूँगा.


आपको मेरी चिकना लड़का Gay Sex Stories कैसी लगी, प्लीज कमेंट्स में जरूर बताएं.

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