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होली पर सामूहिक चुदाई - Desi Sex Stories

  • Kamvasna
  • 26 सित॰ 2025
  • 7 मिनट पठन

नमस्कार मेरा नाम रीना माली है। मैं राजस्थान के उदयपुर शहर में रहती हूं।


मेरे पति नगर निगम में कार्यरत हैं और मेरे दो बच्चे हैं। मेरी उमर 32 साल है, लंबाई 5.6 ft. ये मेरी होली के दिन की सच्ची घटना है जिसे में पेश कर रही हु।


मेरे पति पिछले दो सालों से मुझे टाइम नही देते थे जिसके कारण मेरे पड़ोस में एक बीकॉम थर्ड ईयर के स्टूडेंट अमित जो कि भरतपुर से है उससे मेरी गहरी दोस्ती हो गई थी।


अमित के साथ मेरा अफेयर दो सालों से चल रहा है। अमित का एक दोस्त है निलेश जिसे हमारे बारे में पता है. और वह अमित से काफी बार मुझसे रिलेशन बनाने की बात कर चुका है परन्तु मेरी और से साफ मना है। होली के दिन मेरे पति बाहर गए हुए थे।


घर में होली 11 बजे तक खत्म हो गई थी, तभी अमित का कॉल आया। बोला ” रीना भाभी मुझे भी आपके साथ होली खेलनी है।”


मेने उसे एक बार मना कर दिया की घर पे सब हैं और यहां होली खेलना संभव नहीं है। परंतु बार बार बोलने पे मेने बोला की में कोशिश करती हूं। मेने सासूजी से कहा की मेरी सहेलियां मुझे होली खेलने उनके फार्म हाउस पे बुला रही हैं।


पहले तो सासु जी ने आनाकानी की फिर बोली ” ठीक ही जाओ और 3 बजे तक आजाना”।


बच्चे की जिम्मेदारी भी लेली। मेने अमित को फोन करके बताया तो उसने मुझे ऐश्वर्या रिसोर्ट में आने को बोला। मैं स्कूटी लेके व्हाइट कलर की फाग साड़ी और रेड कलर के ब्लाउज पेटीकोट में निकल गई। वहा पहुंची तो अमित और निलेश दोनो थे। निलेश को देख के मेने अमित से पूछा ” इसे क्यों लेके आए, तुमको पता है ना ये मेरे बारे में क्या सोचता है”।


अमित ने मुझे समझाया कि वो उसके साथ सुबह से था होली खेलने। और उसकी और से कोई परेशानी नहीं होगी। रिसोर्ट में अमित ने पूल में होली खेलने की व्यवस्था रखी थी। अमित ने पहले गुलाल से मुझे गालों पे रंगा फिर मेने भी उसे रंग लगाया। निलेश भी पास आया और मुझे गालों पे रंग लगाया और मेने भी उसे गालों पे रंग लगा कर होली की शुभकामनाएं दी।


फिर अमित ने निलेश को कही भेज दिया और अमित ने मेरे पास आकर मुझे कस के गले लगा लिया। जवाब में मेने भी उसे कस के गले लगाया। फिर वो मेरे गले , हाथ, और पेट पर रंग लगाने लगा।


मैं भी आंखे बंद करके उससे रंग लगवा रही थी। फिर उसने मुझे बाहों में उठा लिया और पूल में गिरा दिया। और खुद भी कूद गया। होली की पूरी मस्ती में मुझे होली खेल रहा था और मेरे हर अंग को छू रहा था और कलर से रगड़ रहा था। पूल में ही उसके होठ मेरे होठों का चुम्बन ले रहे थे। होली का कार्यक्रम करीब 30 मिनट तक चला। फिर हम दोनो पूल से बाहर आए। मेरी साड़ी शरीर से पूरी चिपकी हुई थी। अमित बोला ” भाभी आग लगा रहे हो आप”।


मैं शर्मा गई ये सुनकर। फिर अमित बोला की उसने चेंज करने के लिए एक रूम बुक किया है। हम दोनों रूम में चले गए। वहा जाते ही अमित ने मुझे फिर बाहों में भर लिया और मुझे चूमने लगा।


गालों पे, होठों पे, गले में, पर पे सब जगह पागलों की तरह चूमने लगा। में बोली ” अमित आज नहीं प्लीज”। पर वो रुका नहीं। उसने मेरी साड़ी मुझे गोल गोल गुमाकर निकल ली। मैं अब लाल रंग के गीले चिपके हुए गहरे गले के ब्लाउज और पेटीकोट में थी और गले में लंबा मंगलसूत्र था। मुझे शर्म आ रही थी।


फिर वो मुझे बाहों में उठाकर बाथरूम में ले गया और वहा हम दोनो ने एक दूसरे से चिपक कर स्नान किया। जितने में डोर बेल बाजी। अमित मुझे बाथरूम में छोड़ कर डोर खोलने गया फिर डोर बंद भी कर दिया। मेने अंदर से आवाज लगाई “अमित कोन है”। अमित बोला ” रूम सर्विस वाला था”।


में पेटीकोट ब्लाउज में ही बाहर आ गई और अमित के साथ निलेश को खड़े देखकर चौंक गई। “तुम यहां क्या कर रहे हो”। ऐसा बोलकर में बाथरूम की और भागी. परंतु निलेश ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला ” भाभी आज तो आपके साथ होली खेलने आया हु ऐसे केसे माना कर सकती हो।”


ऐसा कहकर उसने मुझे बाहों में जकड़ लिया और मुझे चूमने लगा। मैं उसे हटाने लगी लेकिन उसकी झकड के आगे खुद को छुड़ा न पाई। मेने अमित से कहा “अमित बोलो इसे यहां से जाने को.”


अमित बोला “अरे भाभी मेरा अच्छा दोस्त है, इसकी भी इच्छा है खेलने की पूरी करने दो।” मैं समझ गई आज मेरे साथ कुछ अनर्थ होने जा रहा है।


मेने निलेश को धक्का दिया और अपनी साड़ी उठाकर भागने लगी। दरवाजे पर अमित ने मुझे पकड़ लिया और बोला ” भाभी आज तो आपको हम देवर बिना खेले जाने नही देंगे” और ऐसा कहकर अमित ने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पर गिरा दिया।


मैं उनसे हाथ जोड़कर विनती करने लगी लेकिन उन दोनो पे भांग और हवस का नशा चढ़ चुका था। निलेश बोला “उफ्फ भाभी, लाल गीले पेटीकोट ब्लाउज में आपने मेरे अंदर तक आग लगा दी हे। आप साक्षात काम देवी रति लग रही हो।”


ऐसा बोलकर उसने मेरे पैर पकड़ लिए। और अमित ने मेरे दोनो हाथ पकड़कर उपर कर दिए। निलेश मेरे ऊपर आगया और मेरे गले में चूमने और काटने लगा। मेने अमित से कहा ” अमित निलेश को बोलो मेरे गले में बाइट्स के निशान हो जाएंगे और घर में पता चल जाएगा.”


अमित का इशारा पाके निलेश ने काटना बंद किया और गले में चूमने और चाटने लगा। मैं परेशान थी। निलेश मेरे कानो में जीभ से चाटने लगा। मुझे करंट सा आने लगा। उधर अमित मेरा पेटीकोट घुटनों तक ले आया और पैरों पे चूमने और चाटने लगा।


धीरे धीरे में उनके काबू में आ रही थी। मुझे लग गया था विरोध से ये दोनो मेरा बलात्कार कर सकते है। सही यही होगा अपने आप को इन्हे सौंप दिया जाए। मेने अपना शरीर ढीला कर दिया। निलेश अब मेरे पेट को चाटने लगा और नाभि में जीभ से हरकत कर रहा था। मुझे भी मजा आने लगा। अमित मेरी पैरो की उंगलियां चूस रहा था।


मैं मदहोश हुए जा रही थी। निलेश मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा और खीच कर ब्लाउज उतार दिया। अंदर मेने काली ब्रा पहनी थी। निलेश बोला ” उफ्फ भाभी आप कमाल हो” ऐसा कहकर उसने मेरी ब्रा का हुक पीछे हाथ डालकर खोल दिया और एक झटके में मेरे उरोज आजाद कर दिया। 34 के स्तन देखकर वो काबू न कर सका और मेरे निपल्स चूसने लगा।


ऐसा लग रहा था उसने पहले बार किसी का स्तनपान किया हो।


इधर अमित ने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और और खीच कर पेटीकोट निकला दिया। अब मैं केवल ब्लैक कच्छी में थी।


अमित मेरी जांघो को चूम रहा था और अंदर जांघो को चूस रहा था। मैं मादक सिसकारियां ले रही थी। निलेश ने मुझे उल्टा लिटाया और मेरी पीठ को जीभ से चाटने लगा। मै पागल हो रही थी।


मुझे पीठ पर निलेश काटे जा रहा था और मैं एक मछली की तरह मचल रही थी। अब दोनो अपने कपड़े निकाल कर नग्न हो चुके थे। निलेश का 7 इंच का मोटा लिंग देखकर मैं डर गई थी।


अमित उपर आया मुझे सीधा करके उपर से लिंग मेरे मुंह में डाल दिया जिसे बड़े मजे से मैं चूसने लगी। उसका लिंग गले तक जा रहा था। नीचे निलेश अपनी जीभ से मेरी योनि का भेदन कर रहा था।


मेने जांघो से निलेश का सिर दबा रखा था और योनि को चटवा रही थी। फिर हमने पोजिशन बदली और निलेश ने अपना लिंग मुझे चूसने दे दिया और अमित अपनी जीभ से जोर जोर से मेरी योनि का दाना चाट रहा था।


इसी बीच में एक बार अमित के मुंह में झर गई। मैं एक वैश्या जैसे निलेश का लिंग चूस रही थी और खो खो की आवाजे निकाल रही थी। अमित ने मुझे गोड़ी बनाने के लिए कहा।


मेने कहा “अमित कंडोम लगा लो”। अमित बोला ” भाभी आज तो आपको हम बिना कंडोम के सुख देंगे।” मेने माल बाहर गिराने का आश्वासन लेकर अनुमति दे दी।


अमित ने एक जोरदार झटके से अपना लिंग मेरी योनि में डाल दिया और फुल स्पीड से मुझे चोदने लगा। कमरे में पच पच की आवाज आ रही़ थी और मुंह से मै निलेश का लिंग चोद रही थीं। इस बीच में 1 बार और झड़ गई 15 मिनट बाद अमित बोला “भाभी में आने वाला हु”| मेने बोला ” अमित प्लीज बाहर निकालो”।


लेकिन उसने नही माना और एकजोरदार झटके से मेरी योनि को अपने वीर्य से भर दिया। उसके गरम पिचकारी मुझे अपनी कोख तक महसूस हुई और मुझे आनंदित कर गई।


अब निलेश आया और मुझे लिटाकर मेरे उपर आगया और अपने लिंग का सुपाड़ा मेरी योनि पर रघड़ने लगा। यह क्रिया उसने 3 मिनट करी। मैं फिर से गरम हो गई और मेरे होठ को होठों से बंद करके एक जोरदार झटके में उसने अपना पूरा लिंग मेरी योनि में उतार दिया। मेरी आंखों में दर्द से आंसू आ गये। अंदर डाल कर वो थोड़ी देर लेटा रहा।


मेरा दर्द कम होने पर उसने अंदर बाहर धक्के चालू किए। अब मुझे मजा आने लगा और उछल उछल कर निलेश का साथ देने लगी।


“ओह निलेश चोदो अपनी भाभी को, और जोर से आह आह… आओह्ह्ह्ह… मार डाला आआआह” निलेश और स्पीड में मेरा चोदन करने लगा।


मैं उसके लिंग से हवा में उड़ने लगी और उछल उछल कर मजा लेने लगी। में की चूदाई के बाद वो बोला “भाभी में अपना माल कहा निकालू.” मैं बोली “अंदर ही निलेश.” और फिर हम दोनो एक साथ अकड़ के साथ प्रेम जूस की पिचकारी छोड़ कर शांत हुए।

निलेश के वीर्य की गर्मी मेरे अंदर तक समा गई। फिर हम तीनो ने सामूहिक स्नान किया और में गीले कपड़े पहनकर घर आ गई।


आपको ये मेरी कहानी कैसी लगी ये कमेंट करे और मुजे मेल करे rinumali1976@gmail.com

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