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अंधेरे में दुल्हन साली की गांड़ चोद दी - Antarvasna Sex Stories

हेलो दोस्तो मेरा नाम अनुराग है और मेरी उम्र 32 साल हो गई है , मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं, जो मुंबई की चकाचौंध वाली जिंदगी में फंसा हुआ है।


मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं, और मेरी पत्नी मीनल मेरी जिंदगी का वो रंग है जो कभी फीका नहीं पड़ता। वो फिलहाल 28 साल की है, दिखने में मस्त गोरी-चिट्टी, लंबे काले बाल, और 32 का 28 x 30 के फिगर में तो ऐसी है के जो देखते ही किसी को भी दीवाना बना दे।


लेकिन पिछले गुज़र चुके दो महीने से मेरी जिंदगी नर्क बनी हुई है। क्यों? क्योंकि मीनल अपनी छोटी बहन कीर्ति की शादी के सिलसिले में अपने मायके चली गई थी और वो भी भोपाल में है।


जहां की वो मूल रूप से हैं। दो महीने! कल्पना कीजिए, दो महीने से मैं अपनी बीवी की गर्माहट, उसके नरम बदन की महक, और उसकी चूत-गांड की वो तंगाई से महरूम हूं।


रोज रात को बेड पर लेटकर मैं अपना लंड सहलाता हूं और मीनल के फोटोज देखता हूं और कल्पना करता हूं की वो मेरे नीचे अआआह ! आफ! ओहह्ह्ह्ह! से कराह रही है। लेकिन हाथ का सुकून कहां तक साथ दे पाता है?


असली मजा तो उसकी चूत में धक्के मारने पर ही आता है, जहां वो 'आह्ह... हमममम अनुराग... और जोर से' चिल्लाती है। मैं तरस रहा था, बिल्कुल तरस रहा था। फोन पर हम रोज बात करते, लेकिन वो कहती, "अरे, यहां तो शादी की तैयारी में सब व्यस्त हैं।


कीर्ति की शादी है ना, सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए। तू बस आ जा, फिर देखना कैसे तड़प मिटाती हूं अपने बाबू की।" हम दोनों में रिश्ता पति पत्नी का है लेकिन यारी दोस्तो वाली है।


फिर आखिरकार, शादी का दिन आया। मैंने ऑफिस से अपनी छुट्टी ली, फ्लाइट पकड़ी, और भोपाल पहुंच गया। मीनल का घर एक पुराने स्टाइल का दो मंजिला मकान था, जो शादी के मेहमानों से खचाखच भरा पड़ा था। रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी – सब इकट्ठे थे।


कीर्ति, मीनल की छोटी बहन है , 24 साल की फ्रेश-फ्रेश जवानी को पहुंची दुल्हन बनने जा रही थी उनके जिस्म ने अभी उभरना शुरू ही करा था 28 की चूची, 24 की कमर ओर 26 की गांड़, वो वैसी ही खूबसूरत जैसी मीनल। लेकिन कीर्ति थोड़ी शर्मीली, सादगी पसंद है।


उसकी शादी शाम को होनी थी, वो भी एक अमीर लड़के से, जो इंजीनियर था। घर में हंसी-मजाक, संगीत, और वो सारी शादी वाली रौनक थी। लेकिन मेरी आंखें बस मीनल को ढूंढ रही थीं।


मैं पहुंचा तो मीनल ने मुझे गेट पर ही गले लगा लिया। "हाय अनुराग! आखिर आ गए। कितना तरस गया ना तू?" वो कान में फुसफुसाई, उसके होंठ मेरे कान से सटे हुए थे। मैंने उसकी कमर दबाई, "तरस नहीं, जल रहा हूं बीवी जी। आज रात तो तुझे छोड़ूंगा नहीं।"


वो हंस पड़ी, लेकिन तुरंत अलग हो गई क्योंकि बुआ जी आ गईं थी। घर में इतने लोग थे के प्राइवेसी का नामोनिशान न था। मैं थकान के बहाने ऊपर कमरे में चला गया, लेकिन मीनल को साथ ले जाना मुश्किल था। वो नीचे संगीत की तैयारियों में व्यस्त थी।


जब शाम ढली, तो संगीत का कार्यक्रम शुरू हुआ। महिलाएं ऊपर, पुरुष नीचे थे। लेकिन शादी का घर होने से सब मिक्स हो गया। मैं नीचे हॉल में बैठा था, जहां कीर्ति को मेहंदी लग रही थी। मीनल मेरे पास आकर बैठ गई, उसके हाथ मेरे कंधे पर आए। "कितना इंतजार करवाया तूने।"


मैंने धीरे से कहा, अपना हाथ उसकी जांघ पर रखते हुए। वो मुस्कुराई, "बस आज कुछ देर और कंट्रोल करो एक बार रात हो जाए। ऊपर कमरा खाली है, लेकिन रिश्तेदारों की वजह से जगह थोड़ी कम है।" उसकी आंखों में वही आग थी जो मेरी थी।


कीर्ति हमारे पास ही बैठी थी, मेहंदी लगवाते हुए, उसके चेहरे पर शरम की लाली थी। वो मीनल जैसी ही लग रही थी – वही कर्वी बॉडी, वही गोरा रंग। लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया, मेरी नजरें मीनल पर टिकी थीं।


फिर इंतज़ार करते हुए रात के 10 बजे, संगीत खत्म हुआ। मेहमान खाने पीने लगे। किचन में भागदौड़ मची हुई थी। मीनल वहां मदद कर रही थी। मैंने मौका देखा, चुपके से किचन में घुस गया। "मीनल, चल ऊपर," मैंने कहा।


वो बोली, "अभी नहीं, मां बुला रही हैं, तू इंतजार कर।" लेकिन मेरी बर्दाश्त खत्म हो चुकी थी। दो महीने का गर्म खून मेरी नसों में उफान मार रहा था। मेरा लंड पैंट में तन चुका था, जो बस फटने को तैयार था।


तभी अचानक लाइट चली गई। पूरा घर अंधेरा अंधेरा हो गया। शादी का घर होने से जनरेटर था, लेकिन वो स्टार्ट होने में 10-15 मिनट लगने वाले थे। चीख-पुकार मच गई – "अरे बिजली चली गई! कोई टॉर्च लाओ!" लेकिन किचन में अंधेरा अधिक घना था।


मीनल के पास में एक छोटा सा पर्दा था, जो किचन के कोने को छिपाता था – एक स्टोर रूम जैसा स्पेस, जहां बर्तन रखे थे। वो पर्दा मोटा था, बाहर से कुछ दिखाई न देता। मैंने मीनल का हाथ पकड़ा, "चल, यहां।"


वो हिचकिचाई, लेकिन मेरी जलन भरी नजर देखकर सहमत हो गई। हम दोनों पर्दे के पीछे घुस गए। बाहर मेहमानों की आवाजें आ रही थीं – हंसी, बातें, लेकिन अंधेरे में सब बेतरतीब था।


मेरा दिल धड़क रहा था। दो महीने का सूखा खत्म होने वाला था। मैंने मीनल को दीवार से सटा दिया, और उसके होंठ चूमने लगा। "शश्श... चुप," वो फुसफुसाई, लेकिन उसके हाथ मेरी शर्ट में घुस चुके थे। मैंने जल्दी से अपना बेल्ट खोला, और पैंट नीचे सरका दी।


मेरा 7 इंच का लंड बाहर आया, जिससे पहले से ही रस टपक रहा था। "मीनल, पीछे मुड़," मैंने कहा। वो मुड़ी, वो अपनी साड़ी ऊपर चढ़ाई, और पेटीकोट भी उठा दी।


उसकी 36 की गांड बिल्कुल नंगी हो गई – वो गोल, चिकनी और मोटी थी, वो जो मैं रोज सपनों में चाटता हूं। मेरा चुदाई का मन तो चूत में था, लेकिन समय कम था, और गांड में डालना आसान। "जल्दी अनुराग, कोई आ जाएगा," वो बोली।


मैंने थूक लगाया अपने लंड पर, और धीरे से उसकी गांड की दरार में सेट करा। वो पहले से ज़्यादा तंग थी, लेकिन दो महीने से सूनी होने से शायद ढीली न हुई हो। एक धक्के में टोपा अंदर घुसा ।


वो दांत किटकड़ाई, लेकिन चुप रही। बाहर मेहमान 'ओए, कब आएगा जनरेटर?' चिल्ला रहे थे। मैंने अपना पूरा लंड अंदर धकेल दिया – आह्ह, अब आया मजा! मेरे मुंह से निकल । मीनल ने अपना मुंह पर्दे में दबाया, लेकिन उसकी सांसें बहुत तेज थीं।


मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए वो भी चुपचाप, बिना आवाज करे। पर्दे के बाहर सिर्फ 5-6 फुट दूर मेहमान खड़े थे। हर कोई अंजान था की पर्दे के पीछे क्या हो रहा है।


मेरा लंड उसकी गांड में फिसल रहा था, हर धक्के के साथ वो सिकुड़ रही थी। "आह ओहद्ह... अनुराग... धीरे आआह," वो फुसफुसाई। लेकिन मैं रुकने वाला कहां? दो महीने का बदला ले रहा था। मैंने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी, दूसरे से उसके मम्मे दबाए वो भी साड़ी के ऊपर से ही।


बाहर किसी ने कहा, "मीनल कहां गई? किचन में थी ना?" किसी ने जवाब दिया, "हां, शायद अंदर है।" हम दोनों सिहर उठे, लेकिन चुदाई की गर्मी में रुक न सके। अंधेरा हमारा दोस्त था। मैंने और स्पीड बढ़ाई फिर धीरे लेकिन गहरे धक्के लगाए।


उसकी गांड मेरे लंड को निचोड़ रही थी, जैसे दूध निचोड़ रही हो। मजा इतना आरा था के मेरी कमर कांप रही थी। वो भी अब साथ दे रही थी अपनी गांड़ को पीछे धकेलकर।


चुदाई खामोशी से हो रही थी, बस सांसों की आवाज हमे उत्साहित कर रही थी। बाहर हंसी चल रही थी, "कीर्ति, तेरी शादी हो रही है, तू तो खुश हो!" कीर्ति की आवाज आई, "हां भाभी... लेकिन नर्वस भी हूं।"


मैं चोदते हुए सोच रहा था – ये शादी की रात है, लेकिन मेरी अपनी शादी की रात जैसी लग रही है। मीनल की गांड इतनी गर्म लग रही थी, जैसे आग की भट्टी हो। मैंने उसके बाल पकड़े, फिर सिर पीछे खींचा, और जोर से एक धक्का मारा।


वो हिलते हुए कांपी, लेकिन चुप रही वो बहुत अच्छे से खुद पर काबू रखे हुए थी । मेरा वीर्य अब उफान पर था। "झड़ रहा हूं मैं बीवी जी," मैंने उसके कान में कहा।


वो बोली, "अंदर ही झाड़ना चूत में नहीं, गांड में ही।" मैंने फिर आखिरी धक्के मारे अआआह! आह! ओंह्ह्ह! – तीन-चार गहरे लगाने के बाद, लंड फिर फूट पड़ा। मेरा गर्म वीर्य उसकी गांड में भर गया जो उसकी टांगों से बहने लगा।


वो अभी भी कांपी ही जा रही थी, शायद उसका भी क्लाइमेक्स आ गया था। हम दोनों हांफ रहे थे, मेरे हाथ उनके बूबे पर लिपटे हुए थे। मेरा लंड अभी भी अंदर था, जो नरम होता हुआ मुझे महसूस हो रहा था।


तभी जनरेटर चालू हुआ और लाइट आ गई। मैंने जल्दी से लंड उसकी गांड़ से बाहर निकाला और पैंट ऊपर चढ़ाई। मीनल ने साड़ी संभाली। लेकिन जैसे ही मैने पर्दा हटाया, तो मेरा दिल बैठ गया।


सामने जो गांड़ मरवाने खड़ी थी वो कीर्ति थी – उसकी नंगी गांड थी और साड़ी ऊपर चढ़ी हुई थी उसके चेहरे पर शरम और आंसू चालक थे थे। मैं तो सकपकाते हुए बोला “मीनल? वो कहां?” कीर्ति की आंखें मुझसे टकराईं, और वो चीखने ही वाली थी, लेकिन मैंने मुंह दबा दिया। "शश्श... कीर्ति, चुप!"


मुझसे बस गलती हो गई! अंधेरे में मैंने मीनल समझकर कीर्ति को पकड़ लिया था। बाहर सब सामान्य हो गया था – लाइट आने से हंसी-ठिठोली फिर शुरू हो चुकी थी। लेकिन किचन में तनाव पनप गया था।


कीर्ति ने धीरे से कहा, "भैया... तुम...वो भी मेरे साथ, ये सब?" उसकी आवाज कांप रही थी। जिससे मैं घबरा गया। "कीर्ति, माफ कर...देखो अंधेरा था... मैं सोचा मीनल है। तू... तू तो मेहंदी लगवा रही थी ना?"


वो बोली, "मैं पानी लेने आई थी... तुमने हाथ पकड़ा तो... मैं डर गई, लेकिन सोचा भाभी का हाथ है... ना कहने से डरने लगी।"


उसकी गांड से मेरा वीर्य रिस रहा था, साड़ी पर मेरे रस का दाग साफ दिख रहा था। वो शादीशुदा होने वाली थी, कल ही बरात आ रही थी।


तभी मीनल अचानक किचन में आई, "अरे, तुम दोनों यहां हो? लाइट आ गई ना?" उसने कुछ शक की नज़र से देखा, लेकिन अंधेरे की वजह से शायद न समझी हो गई। कीर्ति ने जल्दी से साड़ी संभाली और अपने आंसू पोंछे। "हां दीदी... बस पानी लेने आई थी"


मैं चुप खड़ा था, मेरा चेहरा सफेद हो रखा था। फिर बाहर मां जी चिल्लाईं, "कीर्ति, बेटा संगीत के लिए तैयार हो जा!" कीर्ति खामोशी से चली गई, लेकिन जाते-जाते उसने मुझे देखा उसकी आंखों में गुस्सा, शर्म, और डर था।


फिर सब सोने को जाने लगे मैं ऊपर कमरे में लेटा सोच रहा था। देखेंगे जो होगा अब, कीर्ति कल शादी कर रही है, लेकिन मेरी गलती ने सब बिगाड़ दिया।


क्या वो बता देगी सबको? मीनल मुझसे चुद कर सोई तो उठी नहीं लेकिन रात भर मैं जागता रहा। जब सुबह उठा तो कीर्ति तैयार हो रही थी – उसने लाल जोड़ा और मंगलसूत्र पहन रखा था। वो मुझे देखकर शरमाई, लेकिन कुछ बोली नहीं।


दिन भर शादी की रस्में चलीं। फिर बरात आई, दूल्हा आया। लेकिन मेरी नजरें कीर्ति पर टिकी थीं। फेरे के दौरान, जब वो मंडप में बैठी, मुझे लगा उसके चेहरे पर वो यादें घूम रही हैं।


जैसे तैसे शादी खत्म हुई। विदाई का समय आया। कीर्ति रो रही थी। मीनल ने उसे गले लगाया, "खुश रहना दी..." लेकिन कीर्ति ने मुझे देखा, और फुसफुसाया, "भैया... कल रात की बात... कभी किसी को मत बताना प्लीज़। जो हुआ उसे मैं... मैं भूल जाऊंगी।"


मैंने भी हां में सिर हिलाया। लेकिन उसके जाने के बाद, जब हम मुंबई लौटे, तो मीनल ने एक रात कहा, "अनुराग, शादी में तू कुछ उदास सा लग रहा था। क्या बात थी?"


मैंने उसे हंसकर टाल दिया। लेकिन अंदर से मैं जानता था – वो गलती मेरी जिंदगी का राज बनी रहेगी। फिर भी, दो महीने बाद, जब मीनल प्रेग्नेंट हुई, तो मैं सोचता – शायद वो रात का असर था?


नहीं, मजाक कर रहा हूं उस रात भी बस गांड़ चुदाई ही हुई थी मगर चूत का छेद अनछुआ रह गया हो ये यकीन से नहीं कहा जा सकता। लेकिन हकीकत ये है की गलतियां कभी-कभी अनचाहे रिश्ते जोड़ देती हैं।


कीर्ति अब शादीशुदा है, लेकिन कभी-कभी फोन पर बात होती है। "भैया, सब ठीक है ना, आप तो मेरे से बात ही नहीं करते नाराज़ हो?" और मैं उसकी बातों पर हंसता हूं, "हां बेटी, सब ठीक।" लेकिन वो रात की यादें... वो कभी मिटेंगी नहीं।


कैसी लगी ये शादी वाली Antarvasna Sex Stories? कमेंट में जरूर बताएं!

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