इत्तेफाक:२ - Indian Sex Stories
- Sagar Patel
- 1 hour ago
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कहानी का पहले भाग पढ़े: इत्तेफाक:१
रात को डिनर करके, थोड़ी देर टीवी देखकर मैं अपने कमरे में आ गया, नीलम थोड़ी देर नीचे टहलने चली गई, शायद रोमा भी उसके साथ थी।
आधे घंटे के बाद नीलम घर आके हमारे कमरे में आई। उसने अपनी योजना के हिसाब से दरवाज़ा बंद नहीं किया। मैंने ये सब नोटिस किया और उससे मालूम हुआ कि रोमा भी आ गई होगी।
लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं और कुछ पूछा नहीं। नीलम को शायद आज चूदवाने की बहुत जल्दी थी, क्यूं कि रोमा भी हमारी चूदाई देखनेवाली थी। शायद इसी वजह से आज उसने नाइटी तो नहीं पहनी, लेकिन अंडरगार्मेंट्स भी नहीं पहने।
मैंने अपना ट्राउज़र और टी शर्ट पहले से ही निकाल दी थी। मैं सिर्फ़ एक अंडरवीयर में था।
मैंने रोमेंटिक अंदाज़ में पूछा, आज बड़ी हॉर्नी हो रही हो, क्या बात है, चूत मरवाने की बड़ी जल्दी है!!?? ऐसा कुछ नहीं, आज थोड़ी गर्मी ज़्यादा है, इस लिए कपड़े नहीं पहने, नीलम अपनी योजना छुपाते हुए बोली।
ऐसे ही सोते सोते हम थोड़ी देर बात कर रहे थे। और मैंने अपना एक हाथ नीलम की चूत पर रख दिया और होंठ, नीलम के होंठ पर रख दिए। हम दोनों की आँखें बंद हो गई और मेरे सामने अचानक से रोमा का चेहरा आ गया, जैसे मेरे बेड पे मेरे साथ नीलम नहीं बल्कि रोमा हो।
मेरे हालात ऐसे थे कि मैं नीलम को रोमा समझ के किस कर रहा था, मैंने उनके मम्मे पकड़े और हल्के हाथ से धीरे धीरे दबाने का आनंद लेने लगा, मुझे रोमा के शरीर की अनुभूति हो रही थी। मैं अपने शरीर और लिंग में पहले के मुकाबले कुछ ज़्यादा ही ब्लड सर्कुलेशन का अनुभव कर रहा था, जो मेरे पुरुषत्व को पहले से ज़्यादा बढ़ा के असर दिखाने को तत्पर हो रहा था।
मुझे मेरे ही लंड में पहले से ज़्यादा तनाव महसूस हो रहा था। मैं बंद आंखों से ही नीलम को रोमा समझ के उनकी नाभि, जांघ और नितंबों को चूमते, चाटते, सहलाते और दबाते हुए आगे बढ़ रहा था।
मैंने मेरा अंडरवीयर निकाल फेंका। नीलम ने मेरा लंड पकड़ लिया, थोड़ी देर लंड सहलाने और हिलाने के बाद बोली, आज तुम्हारा लंड कुछ ज़्यादा ही बड़ा लग रहा है!! कोई दवाई ली है क्या? मैंने कोई जवाब ना दे के मेरे होंठों को उसके होंठ पर रख दिए और बेतहाशा चूमने लगा।
तब नीलम ने मुझसे अपने होंठ छुड़वाते हुए फ़िर से पूछा, बताओ तो सही कोई दवाई वगैरह लिया है, क्या? मैंने नीलम को उलटा किया और उनकी पीठ पर मेरी छाती आए वैसे मैंने अपने दोनों हाथ से उनके स्तनों को अपने दोनों हाथों में कैद कर लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और उनकी गरदन और कान के पीछे चूमने लगा।
मैंने चूमते हुए कान में धीरे से कहा, बता दूं तो बुरा तो नहीं मानोगी!?
इस वक्त इतना बड़ा और मोटा लंड देखके कोई भी औरत बुरा मानेगी क्या? ऐसा मोटा लंड अपनी चूत में लेने का अलग ही मज़ा है, नहीं मानूंगी बुरा, बताओ..
खाओ मेरे लंड की कसम..
अरे.. बाबा तुम्हारे लंड की कसम बस..!! सोच लो, बुरा मानोगी और मेरे लंड को कुछ हो गया तो ज़िंदगी भर ऐसी चूदाई से वंचित रह जाओगी!!
अरे... अब बता भी दो, सच में तुम्हारे लंड की कसम।
बाहर खड़ी रोमा ना सुने, इतने धीरे से मैंने नीलम के कान में कहा, तो सुनो... वास्तव में मैं अभी चूदाई तो तेरी कर रहा हूं, लेकिन मैं किसी और को इमैजिन कर के तुमको चोद रहा हूं और शायद इसी रोमांच की वजह से मेरा लौड़ा उनके सम्मान में बयालीस तोपों की सलामी दे रहा है।
ओहो... कौन है, वो खुशनसीब मोहतरमा, जिसके लिए तुम्हारा लौड़ा बयालीस तोपों की सलामी दे रहा है और फूला नहीं समा रहा है??
बता दूं? पक्का??
अरे,, बता भी दो, आखिर मैंने तुम्हारे लंड की कसम खाई है, कौन है जो मेरे इस तगड़े लंड का तुम्हारी कल्पना में हक मारना चाहती है? मैं कुछ नहीं कहूंगी और बुरा भी नहीं मानूंगी।
रोमा...
रोमा!??
कौन ये अपनी पड़ोस वाली??
हां,, वही रोमा, जब से मैंने उसको देखा है, तब से मेरा लंड इतना फड़फड़ा रहा है और उसकी चूत में घुसने को बेताब हो रहा है। सोचता हूं उसके पूरे शरीर को निचोड़ दूं, उनके जिस्म का कोना कोना चूमना, सहलाना चाहता हूं, लेकिन अपनी कल्पना में..
इसी बातचीत के बीच मैंने नीलम को पीठ के बल सुलाया और में उसके ऊपर 69 पोजिशन में आ गया, नीलम की मखमली चूत को चुंबन करने लगा और चाटने लगा।
में फ़िर से आँखें बंद कर के रोमा की कल्पना करने लगा और धीरे धीरे मेरी जीभ उसकी चूत में डालने लगा, मैंने ज़्यादा से ज़्यादा मेरी जीभ नीलम की चूत में पेनेट्रेट करने की कोशिश कर के मैं अपना सर आगे पीछे करने लगा।
उसी तरह नीलम ने भी मेरा पूरा लंड अपने मुंह में भर लिया और आईसक्रीम की तरह चूसने लगी और मैं भी अपनी कमर हिला के नीलम का मुंह चोदने लगा।
इसी दौरान मैंने तिरछी आँखों से दरवाज़े पे एक नज़र डाली। रोमा बाहर खड़ी हमारी लाइव चूदाई देख के मज़ा ले रही थी। बहोत देर तक इसी स्थिति में नीलम की चूदाई करता रहा, अब नीलम से रहा नहीं जा रहा था, तो वो बोली, बस अब रहा नहीं जा रहा, मेरी चूत में तुम्हारा ये लंड डाल दो।
मैंने कहा तुम मेरे ऊपर आ जाओ, वो मेरे ऊपर काऊ गर्ल पोजिशन में आ गई, वैसे तो मेरा लंड जल्दी हार माननेवाला नहीं था। मैंने नीलम की कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ ली और ज़ोर ज़ोर से स्ट्रोक मरवाने में नीलम की मदद करता रहा।
आठ दस मिनिट ऐसी स्थिति में नीलम को चोदने के बाद हम लोटस पोजिशन में आ गए, नीलम मेरा लंड अपने अंदर समाने लगी, मेरे लंड को मैक्सिमम पेनेट्रेशन मिल रहा था।
मैंने नीलम की और देखा और वो मुस्कुराई, मैने उनको पूछा कि कैसा लग रहा है?
तो वो बोली, ऐसा लगता है कि आज तो तुम्हारा लंड मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा।
और ज़ोर से चोदो, किसी को भी इमैजिन करो लेकिन आज मेरी चूत का कचूंबर बना दो। ऐसा सुनते ही मैने उसको पीठ के बल लेटा दिया और क्लासिक मिशनरी पोजिशन में आ गया और मैंने नीलम की टांगे उठाके मेरे कंधों पे ले ली और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। दोनों में से कोई हार मानने को तैयार नहीं था, इतने में नीलम बोली और ज़ोर से, मैं आने वाली हूं।
मैंने भी मेरे पिस्टन की और स्पीड बढ़ाई। आह.. आह.. की मादक आवाज़ों से और फच फच की आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा, उतने में मुझे महसूस हुआ कि नीलम ने अपना पानी छोड़ दिया, मैंने उनसे पूछा कि, तुम्हारा हो गया क्या? तो उसने कहा, हां.. लेकिन तुम अपना चालु रखो।
थोड़ी देर में मैं भी आने वाला था, मैंने नीलम से कहा, मैं आ रहा हूं, बता मैं अपनी मलाई कहां छोड़ु, वो बोली रुको, मेरे चेहरे पे ही छोड़ दो, तुम्हारे इसी माल से ही मेरा चेहरा ग्लो करता है। मैंने नीलम की चूत से अपना लंड निकाला और नीलम के ऊपर मेरा लंड उसके मुंह के सामने आए वैसे बैठ गया।
मैं ज़ोर ज़ोर से मूठ मारने लगा, आठ दस स्ट्रोक मारने के बाद मेरा गरम गरम लावा बाहर आ गया और नीलम के मुंह परतीन चार पिचकारी मार दी।
नीलम भी अपनी जीभ निकाल के अ..मम.. अ..म.. कर के अपने मुंह पर गिरी सफेदी चाटने लगी, मैं भी अपने हाथ से मेरा व्हाइटनर उनके चेहरे पर लगाने लगा और फेस क्रीम की तरह उनके चेहरे को मालिश देने लगा। नीलम ने मेरा लंड मुंह में लेके लंड पे लगी वीर्य की मलाई आइसक्रीम की तरह चाटने लगी और मेरा पूरा लंड चाट के साफ़ कर दिया।
एक राऊंड के बाद में निढाल होके नीलम के बाजू में सो गया, दस मिनिट के बाद मैंने नीलम से पूछा, एक और राऊंड हो जाएं?
नीलम बोली, नहीं बेबी, आज नहीं, आज मैं बहोत थक गई हूं। मैंने कहा ठीक है, सो जा। नीलम तो अपने चेहरे पे फेस क्रीम लगा के सो गई, उसको थोड़ी देर में नींद भी आ गई।
लेकिन मेरा कामाग्नि अभी भी शांत नहीं हुआ था। मैं भी सो ने जा रहा था, तो सोचा किचन में जा के पानी पी लेता हूं। मैं नंगा ही किचन में पानी पीने चला गया, वापस लौटते वक्त मैंने देखा कि रोमा जिस कमरे में सो रही थी, वहां लाइट जल रही थी, वहां से ऊंह... अ..मम की आवाज़ आ रही थी और दरवाज़ा अधखुला था।
मैंने दरवाज़े को थोड़ा सा धक्का दे के अंदर झांका, मैंने देखा कि रोमा ने टी शर्ट पहना हुआ था, वो नीचे से पुरी नंगी थी, उसका शॉर्ट और पेंटी नीचे पड़ा हुआ था और वो आँखें बंद कर के अपनी चूत में उंगली डाल के अपने आप को संतुष्ट करने की कोशिश कर रही थी।
वो इतनी मशगूल थी कि मैं धीरे से दरवाज़ा खोल के अंदर आ गया और धीरे से दरवाज़ा बंद भी कर दिया और उनको भनक भी नहीं लगी। उसका गोरा, चिकना जिस्म और मुलायम चूत देख के मैं उसकी और खींचता चला जा रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे चूत के आसपास के बाल आज ही वैक्स किए हो। मैं दो तीन मिनिट उसको ऐसे ही देखते रहा। उनकी टी शर्ट ऊपर उठी हुई थी। वो काफ़ी गरम हो रही थी। मैं सोच रहा था कि इस गर्मी में रोमा को चोद के अपनी कामाग्नी बुझा दूं।
मैं अपने हाथ की दो उंगली उसकी नाभि के आसपास हल्के हाथ से फिराने लगा। तभी उसने आँखें खोली और एकदम से उठ कर मुझे अपनी और खींच लिया, अपने जलते होंठ मेरे के होंठों पर टिका दिये और पागलों की तरह मुझे चूमने लगी।
मैंने रोमा के सिर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी ओर भींचा, उसके होंठ चूमने लगा। मैं भी उनकी गरदन, गला, कंधा बेकाबू होकर पागलों की तरह चूमने लगा, इसी दौरान मेरा एक हाथ मैंने टीशर्ट के ऊपर से ही उनके बूब्स पर रख दिया और दबाने लगा, उसने ब्रा पहनी हुई थी, दो मिनट के बाद मैंने उसकी टी शर्ट निकाल फेंकी और ब्रा के ऊपर से ही एक के बाद एक दोनों स्तनों को दबाने लगा और ब्रा के ऊपर से ही अपने मुंह में भरने लगा।
मैं उसके पूरे शरीर का मज़ा लेना चाहता था, इस लिए मैंने अपने दोनों हाथ उनकी कमर, पेट, पीठ के ऊपर घुमा घुमा के सहलाने लगा, पीठ पर मेरा हाथ जाते ही उसकी ब्रा का हूक एक ही झटके में खोल दिया और दोनों कबूतरों को ब्रा के पिंजरे से आजाद कर दिया।
मैं तो पहले से ही नंगा था, अब रोमा को पूरी तरह से नंगी कर दिया, पीठ सहलाते हुए नीचे झुक कर उनके दोनों स्तन बारी बारी अपने मुंह में भर के आम की तरह चूसने लगा। एक हाथ एक आम दबाता तो दूसरा वाला आम, मुंह में भरके चूसता था।
हाथ में एक निप्पल को पकड़ के उंगली और अंगूठे से धीरे धीरे ज़ोर देते हुए दबाने लगा, मैंने रोमा को पैर तलवों से लेकर कूल्हे और चूत और चूत से लेकर सिर तक पूरे शरीर के एक एक कोने को चूमना और चाटना शुरू किया। चूमना, चाटना, चूसना और चोदना... मानो की कमरे में सिर्फ़ "च" की ही हार माला सजी हुई थी।
रोमा के मुंह से निकलती आह... आह..., ओह... ओह..., हम्मम की मादक आवाज़ों से पूरा कमरा भर गया।
मैंने रोमा से पूछा, भाभी, कुछ नया ट्राई करें?
पहले तो मुझे भाभी मत कहो, सिर्फ़ रोमा कहो। आज तो मैं तुम्हारी पत्नी बनकर रहना चाहती हूं, बनाओगे न..??
क्यों नहीं, भाभी... सॉरी रोमा..
इतना सुनते ही वो हंसने लगी। मैंने फ़िर से पूछा कुछ और करें? तब वो बोली, मैं अभी तुम्हारा लंड मुंह में लेना चाहती हूं।
मैंने कहा, ले लो.. आज की रात ये तुम्हारा ही है, तुम जैसे चाहे यूज़ करो। लेकिन मुझे भी तुम्हारी चूत चाटनी है!!
हां, तो चांटों ना.. कौन मना कर रहा है? पहले मैं पीठ के बल लेट गया और रोमा मेरा लंड को ब्लो जॉब देने लगी। मैंने कहा, एक बात बताऊं, रोमा? मुंह में मेरा लिंग होने की वजह से वो जवाब में सिर्फ़ "हम्मम" बोली..
मैंने कहा, मैंने तुमको जब से पहली बार देखा था तब से तुम्हें भोगने के बारे में सोच रहा था, लेकिन संभव नहीं लग रहा था, तो मैं तुम्हारे बारे में सोच के मूठ मार लेता था और आज शाम को मैंने तुम्हारी और नीलम की बातें भी सुनी थी। मैं
ने सुना कि तुम भी उंगली से ही काम चला लेती थी। हां वो विकास तो फ़टाफ़ट कर के सो जाता था, इसलिए... विकास को छोड़ो, आप नीलम दीदी को चोदते वक्त मेरे बारे में क्या बोल रहे थे??
मुझे ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। मैंने कहा, नीलम को चोदते वक्त मैं तुम्हें अपनी कल्पना में चोदता था।
मतलब? मतलब, मैं चोदता तो नीलम को ही था, लेकिन आँखें बंद कर के सोचता की मैं रोमा को चोद रहा हूं।
ओह, ऐसा भी होता है, क्या?
हां, इस से हमारी सेक्स लाइफ़ में भी फ़र्क आता है, जैसे आज नीलम को मेरा लंड पहले से ज़्यादा लंबा और मोटा लगा।
मैं भी ऐसा कर सकती हूं, क्या? मतलब, जब विकास मुझे चोदे तब कल्पना में मैं तुम्हारा लंड के बारे में सोच सकती हूं?
हां, क्यों नहीं!! कोई भी ऐसा कर सकता है और किसी के बारे में सोच के अपनी कल्पना में किसी को भी चोद सकता है।
चलो अब चूत चाटने की मेरी बारी, ऐसा कह के मैंने रोमा को लेटा दिया और पैर घुटने से मोड़ के V शेप में कर दिए, मैं उनके पैरों के बीच आ गया, और उनकी चूत को देखता रहा। मैंने चूत के होठों को मेरी दो उंगलीयो से चौड़ा कर के देखा।
उनकी गुलाबी नाज़ुक चूत देख के मदहोश हो रहा था, लेकिन मैं कोई जल्दी नहीं करना चाहता था। मैंने फ्रेंच किस की तरह रोमा की चूत को चूमने लगा, धीरे धीरे मैंने चूत में जीभ अंदर बाहर करना शुरू किया।
ओह... ईश... की आवाज़ से रोमा अपने कूल्हे उठा के मेरे मुंह की और धकेल रही थी और अपने दोनों पैर मेरी पीठ पे बांध के अपनी चूत की और धक्का मारते हुए बोली, चोदो सागर और ज़ोर से चोदो.. मेरा बस चलता तो मैं तुम्हें ही पूरा अंदर ले लेती।
मैंने रोमा की चूत को ऐसा चूसा कि रोमा तो कसमसा गयी और उसने अपना पानी छोड़ दिया, मैं भी जोश में आते हुए मेरा सिर उसकी चूत पर ही आगे पीछे करने लगा।
आह.. हम्मम... आह... ओह सागर... चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो, नीलम दीदी की चूत की तरह मेरी चूत का भी भोसड़ा बना दो। ऐसा सुनते ही मैं घूम गया और 69 पोजिशन में आ गया।
लो रोमा, मैं सिर्फ़ चूत नहीं मुख चोदन भी करूंगा। चोदो सागर मुख, चूत सब चोदो, सब कुछ करो, बस आज की रात में मेरी आग शांत करो।
मैं और रोमा दोनों ही ज़िंदगी में पहली बार किसी गैर की बाँहों में नंगे चिपटे हुए थे. अब दो जिस्म एक होने को तड़प रहे थे।
थोड़ी देर 69 में करने के बाद रोमा मेरा लंड अपने मुंह से निकाल के बोली, बस सागर... अब आपका ये मूसल मेरी चूत में डाल दो और मेरी चूत की चटनी बना दो, सागर.. अब नहीं रहा जाता।
रुको, मैं अपने रूम से प्रोटेक्शन ले के आता हूं।
नहीं सागर, ऐसे ही चोदो.. अब नहीं रहा जा रहा। लेकिन तुम प्रेग्नेंट हो गई तो? हो जाने दो, मैं तुम्हारे बच्चे की मां भी बन जाऊंगी.. कुछ भी हो बस जल्दी से मुझको चोदो, आज तक मैं कभी भी ऐसी नहीं चूदी।
इतना सुनते ही मैंने रोमा के पैर उठा के मेरे कंधे पर रख दिए और घुटनों के बल बैठ के मैंने मेरा लंड रोमा की चूत की फांट पर सेट किया, रोमा को और तड़पाने के लिए चूत की फांट पर मेरा लंड घिसने लगा।
अब बस भी करो, यार सागर.. मैं हंसा और मैंने एक ही झटके में रोमा की चूत में मेरा लंड पीरो दिया, रोमा, आ...ई... कर के चिल्ला उठी।
मैं शुरू में धीरे स्ट्रोक देने लगा, धीरे धीरे मैं अपनी स्पीड बढ़ाने लगा। ओह... रोमा... आह.. मज़ा आ गया, बेबी.. आज तो तुमने मुझे भाभी चोद बना दिया।
थोड़ी देर धक्का पेल के बाद मुझे लगा कि मैं छूटने वाला हूं तो मैंने रोमा से कहा - रोमा मेरा छूटनेवाला है, कहाँ निकालूँ?
पर रोमा को तो इतना मजा आ रहा था, उसकी आँखें बंद थीं और वो सीत्कारें ले रही थी, आह... मज़ा आ गया सागर! आज आपने मेरे सारे अरमान पूरे कर दिए… मेरी भूख मिटा दी.
इससे पहले वो कुछ और कह पाती, मैंने उसकी चूत अपने माल से भर दी और उसके ऊपर ही ढल गया। दोनों तृप्त होकर एक दूसरे से चिपक कर लेट गए।
सुबह 4 बजे मैं जब उठा तो मैंने सोती हुई रोमा के चेहरे को देखा, उसके चेहरे पर बच्चों जैसी हल्की सी मुस्कान थी, शायद वो कल रात के सेक्स की संतुष्टि थी।
मैं अब मेरे कमरे में सोने के लिए चला गया, ताकि नीलम को शक ना हो।
तो यह थी मेरी कहानी इत्तेफ़ाक से चूदाई की, जिसमें पत्नि भक्त मैं सागर भी परनारी के वश सम्भोग के लिए विवश हो गया.... सेक्स प्लेज़र की Indian Sex Stories का यह भाग आपको कैसा लगा?अपनी राय मुझे बताइएगा.

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