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कॉलेज गर्ल हेमा साथ पहली लेस्बियन चुदाई - Antarvasna Sex Stories

कैसे है आप दोस्तों देखिए मैं पहले ही बता दूं के मैं एक सीधी सादी लड़की हूं इस कहानी में जो हुआ वो कैसे हुआ उसके बारे में मेरे पास कोई सफाई नहीं है, मैं रितु हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की एक ऐसी घटना सुनाने जा रही हूँ जो मेरे लिए कभी न भूलने वाली बन गई।


यह मेरी पहली लेस्बियन चुदाई की कहानी है, जो दिल्ली में मेरी पढ़ाई के दौरान हुई। मैं एक छोटे शहर मुरादाबाद से हूँ, और कॉलेज की पढ़ाई के लिए दिल्ली आई थी।


वहाँ मुझे हॉस्टल में रहना पड़ा, और मेरी रूममेट बनी हेमा जो एक विदेशी लड़की थी, वो अमेरिका से दिल्ली आई थी अपनी मास्टर्स की पढ़ाई के लिए।


हेमा दिखने में दूध सी गोरी-चिट्टी थी, वो मुझसे लंबी और दिखने में बेहद आकर्षक थी। उसका फिगर 34-28-36 का था जिसे देखकर किसी का भी मन डोल सकता था, और वो ही हमेशा खुशमिजाज रहती थी।


जब मैं पहली बार उससे मिली तो शुरू के दो दिन सब कुछ नॉर्मल रहा, लेकिन तीसरे दिन से चीजें बदलने लगीं।


मैं आपको पूरी कहानी विस्तार से बताती हूँ। उम्मीद है आपको पसंद आएगी कुछ गलती हो तो माफ करना क्योंकि ये लिखते समय मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैं हूं रितु, उम्र 21 साल, और मैं एक साधारण परिवार से हूँ। मेरी हाइट 5 फुट 5 इंच है, और फिगर 34-30-36 का है, और मैं थोड़ी शर्मीली टाइप की लड़की हूँ।


लेकिन सेक्स के बारे में जाने के लिए मेरे मन में हमेशा जिज्ञासा रहती थी। मगर मैंने कभी किसी लड़के के साथ कुछ नहीं करा था, लेकिन फिल्में और कामवासना की कहानियाँ पढ़कर मन में कई ख्वाब थे। दिल्ली आने से पहले मैं घर पर रहती थी, लेकिन अब हॉस्टल की आजादी मिली थी।


मेरा हॉस्टल दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास था, मैं जिधर रहती थी वो जगह छोटी थी मगर कमरे छोटे लेकिन आरामदायक थे। मेरी रूममेट हेमा से पहली मुलाकात हॉस्टल के रिसेप्शन पर हुई थी। वो मुझसे मुस्कुराते हुए बोली, "हाय, आई एम हेमा। वेलकम टू द रूम!"


उसकी अंग्रेजी में जोशीला अमेरिकन एक्सेंट था, जो मुझे बहुत प्यारा लगा। मैंने भी उसे हंसकर जवाब दिया, "हाय, मैं रितु हूँ। नाइस टू मीट यू।" पहले दो दिन हम दोनों अपनी-अपनी रूटीन में व्यस्त रहे।


मैं कॉलेज जाती, पढ़ाई करती, और शाम को कमरे में वापस आती। हेमा भी अपनी क्लासेस अटेंड करती और अपनी मेहनत में लगी रहती।


हम दोनों में थोड़ी-बहुत बातें होतीं थी कभी मौसम की कभी पढ़ाई की तो कभी फूड के बारे में। वो अक्सर कहती के वो दिल्ली आई है इंडियन कल्चर और बिजनेस स्टडीज सीखने के लिए।


वो अपने रेहान सहन के अनुसार बहुत ओपन माइंडेड थी, जबकी उसकी तुलना में मैं थोड़ी रिजर्व्ड रहती थी। लेकिन उसकी कंपनी मुझे अच्छी लगती थी वो मुझे आज़ाद होने का एहसास दिलाती थी। वो रात को शॉर्ट्स और टॉप पहनकर सोती, और मैं हमेशा पजामा ही लेती। यहां तक तो सब नॉर्मल था।


फिर आया तीसरा दिन था। वो जुलाई का महीना था, दिल्ली की गर्मी चरम पर थी। हॉस्टल में कूलर था, लेकिन वो ठीक से काम नहीं कर रहा था। सुबह हम दोनों किचन में ब्रेकफास्ट बना रही थीं जैसे के रोज़ ही होता था।


हॉस्टल की एक कॉमन किचन थी, लेकिन सुबह सुबह में कम लोग होते थे। मैंने पहली बार शॉर्ट्स और स्लीवलेस टॉप पहना था, और हेमा ने एक छोटी सी स्कर्ट और क्रॉप टॉप ले रखा था। गर्मी की वजह से हम दोनों पसीने से तर हो गईं थीं।


मैं ब्रेड टोस्ट कर रही थी, और हेमा कॉफी बना रही थी। उसका गोरा बदन पसीने से चमक रहा था। उसके क्रॉप टॉप के नीचे से उसके बूब्स की आउटलाइन साफ दिख रही थी, और पसीने से वो भी गीले हो चुके थे। उसके निप्पल्स हल्के से उभरे हुए थे, जो मुझे अजीब सा महसूस करा रहे थे।


मैंने कभी किसी लड़की को ऐसे नहीं देखा था, लेकिन उस दिन मेरी नजर बार-बार उसके भिगे हुए जिस्म पर पसीने की चमकती बूंदे देखे जा रही थी। उसके चूंचे इतने परफेक्ट थे जो मैने कभी किसी के नहीं देखे थे – गोल, भरे हुए, और पसीने से चिपके हुए उफ्फफ!


मैंने अनजाने में अपने होंठों पर जीभ फेरी, जैसे खाने के लिए कोई स्वादिष्ट चीज देख रही हूँ। हेमा ने मुझे देखा और हंसकर बोली, "इट्स सो हॉट हियर, राइट? आई एम स्वेटिंग लाइक क्रेजी!" मैंने हंसकर हाँ कहा, लेकिन मेरे मन में कुछ और चल रहा था।


मुझे मेरी चूत में हल्की सी गुदगुदी महसूस हो रही थी। ब्रेकफास्ट खत्म करके हम अपने कमरे में लौटे, लेकिन वो दृश्य मेरे दिमाग से नहीं गया। रात को सोते समय मैंने उसके बारे में सोचा, और पहली बार खुद को एक औरत की तरह टच कर लिया।


उसके बाद खिड़की से अगला दिन निकला। मैं हेमा से बिना नज़रे मिलाई हॉस्टल से निकल गई फिर कॉलेज से शाम को लौटी। अंदर से कमरा खुला था, और हेमा बेड के नीचे कुछ ढूंढ रही थी। वो एक सेक्सी घोड़ी बनी हुई थी – मतलब हाथ जमीन पर थे और घुटनों के बल रहकर गांड़ उठी हुई थी।


तब उसने छोटी सी स्कर्ट पहनी थी, जो ऊपर उठ गई थी। उसके नीचे से उसकी चूत साफ दिख रही थी – वो पैंटी नहीं पहनी हुई थी! उसकी गोरी, चिकनी चूत, हल्के गुलाबी रंग की क्लिट दिख रही थी, और गोर से देखने पर थोड़ी सी गीली लग रही थी।


मैं इस नज़ारे को देखने दरवाजे पर रुक गई, मेरे मुँह में पानी आ गया। मेरी चूत में भी पानी आने लगा। मैंने कभी ऐसी मस्त चीज नहीं देखी थी, लेकिन वो दृश्य इतना हॉट था की मैं बस देखती रह गई। हेमा ने पीछे मुड़कर देखा और हंसकर बोली, "ओह, सॉरी! आई लॉस्ट माय ईयररिंग अंडर द बेड।"


सर बचाते हुए वो उठी, फिर अपनी स्कर्ट ठीक की, लेकिन मैं तो बस उसी को घूर रही थी। शाम को हमने साथ डिनर करा, लेकिन मेरे मन में वो मीठी सी चूत की तस्वीर घूम रही थी। रात को मैंने फिर खुद को टच करा, हेमा के बारे में सोचकर मैने अपने जिस्म को सहलाया।


फिर रात सोई और अगला दिन जागा। हमने उस दिन एक हॉरर फिल्म देखी थी तो मैंने बहाना बनाया की मुझे रात में डर लग रहा है, क्योंकि हॉस्टल में कुछ अजीब आवाजें आ रही हैं। हेमा ने हंसकर कहा, "ओके, कम ऑन, स्लीप विद मी इन माय बेड।"


हम दोनों फिर एक ही बेड पर सोईं। वो शॉर्ट्स और टॉप में थी, और अब मैं भी इन्हीं कपड़ो में रहना पसंद करती थी। बीच रात में, जब वो सो रही थी, तो मैं जाग गई। उसका मादक जिस्म आज मेरे पास था उसकी सांसे गर्म थी और उसकी स्किन नरम थी।


मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखा। और थोड़ा सा सहलाया। वो नींद में थी, तो हिली नहीं। मैंने हिम्मत करके उसके बूब पर हाथ रखा ओंह्ह्ह! वो इतने सॉफ्ट थे जैसे रुई की कोई गुड़िया हो! मैंने उन्हें धीरे-धीरे दबाया, और प्यार से निप्पल को रगड़ा।


फिर मैंने अपना हाथ उसके शॉर्ट्स में डाला, फिर अंदर ले जाकर उसकी चूत पर रखा। वो पहले से गीली थी! तो मैंने उंगली से सहलाया, फिर धीरे से अपनी उंगली अंदर डाली।


वो हल्की सी सिसकारी हमममम! ओंह्ह्ह की मीठी आवाज़ में लेने लगी, लेकिन बस जागी नहीं। मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी तो सावधानी से मैं आगे बढ़ी और मैंने उसके होंठों पर किस कर लिया, फिर मैने अपने होठ खोले और जीभ से उसके नर्म व मीठे होठों को चाटा।


उसकी जीभ को अपनी जीभ से टच भी कर लिया। वो मीठी लग रही थी मुझे वो स्वाद अच्छा लगा रहा था। मैं पूरी रात ऐसे ही उसको सहलाती रही, उंगली करती रही, और सो गई। कुछ दिन ऐसे ही चले। मेरी छुपी हुई हवस बढ़ती चली गई।


दिन में हम नॉर्मल दोस्तों की तरह रहते, लेकिन रात में मैं उसको चुपके चुपके टच करती जा रही थी। कभी रात में उठकर उसके चूंचे दबाती, कभी उसकी चूत को सहलाती। मुझे हैरानी थी के वो कसमसाने के बाद भी कभी जागती नहीं थी, या शायद जागकर भी कुछ नहीं कहती थी।


मुझे लगता था वो भी मेरा टच एंजॉय कर रही है। हम साथ में पढ़ाई करते, फिल्में देखते, लेकिन मेरी नजर हमेशा उसके जिस्म पर रहती थी। उसके गोरे पैर, उसकी कमर, उसके होंठ – सब मुझे आकर्षित करते थे। आखिरकार फिर वो दिन आया जब मेरे अरमान पूरे हुए।


हुआ कुछ ऐसा के हम दोनों पढ़ाई कर रहे थे। वो शाम का समय था, और कमरे में सिर्फ हम दो थे। हेमा को मस्ती चढ़ी थी वो मेरे से पेन लेकर शैतानी करने लगी – वो मेरी किताब छीनकर भागने लगी तो मैंने उसका पीछा करा, और हंसते-हंसते उसे बिस्तर पर गिरा दिया।


मैं उसे पकड़ी फिर बिस्तर पर लिटाया, उसके ऊपर बैठ गई, वो भी उसकी सेक्सी कमर पर। हम दोनों की सांसें तेज हो गईं थीं। उसका चेहरा मेरे करीब था, उसके होंठ हल्के खुले हुए थे उसके होठों से मीठी सी खुशबू आ रही थी। मैंने उसे देखा, और अनजाने में उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।


एक दम वो चौंक गई, और मुझे धक्का देकर हट गई। "व्हाट आर यू डूइंग, रितु?" वो बोली, बिल्कुल अंजान व हैरान होकर। हमारी सांसे तेज थी हम दोनों एक-दूसरे को देखने लगीं।


कमरे में सन्नाटा छा गया था, सिर्फ हमारी सांसों की आवाज माहौल गर्म कर रही थी। मैं शर्मा गई थी, लेकिन मेरी आँखों में हवस साफ दिख रही थी। वो भी मुझे उन्हीं नज़रों से देख रही थी, उसकी आँखों में कुछ कामुकता भरा था – शायद वासना, शायद हवस।


धीरे-धीरे हम दोनों करीब आईं। मैंने उसका हाथ पकड़ा, और वो मेरा हाथ नहीं हटाई। फिर मैंने उसके गाल पर हाथ रखा, और उसके होंठों की तरफ थोड़ा झुकी। धीरे से हमारे होठ करीब आय और आखिर हमारे होंठ मिले – पहले हल्के से, फिर गहराई से हमारे होठों से एक दूसरे को चूमा।


वो भी अब मेरा साथ दे रही थी। हमारी जीभें एक-दूसरे से टकराईं जा रही थी, उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली जो मैने मज़ा लेकर चूसीं। ये किस इतनी इंटेंस थी कि हम दोनों गर्म हो गईं। फिर मैंने उसके टॉप में हाथ डाला, और उसके बूब्स को खुलकर जी भरकर दबाया।


वो सिसकारी लिए जा रहित ही, "ओह रितु, हम्मम! ओंह्ह्ह Yeah दबाओ ओंह्ह्ह।" मैंने उसका टॉप उतारा, फिर ब्रा भी उतार कर अलग कर दी। उसके गोरे और, गोल चूंचे मेरे सामने झूल रहे थे – उसके निप्पल्स गुलाबी व सख्त थे।


मैंने एक को मुँह में लिया, फिर जीभ से चाटकर चूसा। मैने मजे से उसे जीभ से चाटा, मैने उसके निप्पल को हल्का सा काटा फिर हल्के से निप्पल को होठ से दबाकर चूसा वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी, "Yes... दैट फील्स गुड...अआआह! ओंह्ह्ह रितु You So Good ओंह्ह्ह।"


फिर मैं नीचे गई। और मैने उसकी स्कर्ट उतारी, साथ साथ पैंटी भी अलग कर दी। उसकी चूत एक दम गोरी थी, वो हमेशा क्लीन शेव्ड रहती, मगर आज रस से गीली हो रही थी। मैंने उसके रस की जीभ से चाटा – ऊपर से नीचे मैने उसकी चूत को चखा।


वो आह भरी जा रही थी, "ओंह्ह्ह! रितु अआआह! अआआह Oh Yeah अआआह Fuck" मैंने पूरी जीभ अंदर डाली, और चूत चूसी। उसके क्लिट को जीभ से रगड़ा। वो मेरे होठों पर कमर उछाल रही थी। फिर मैंने चूत में उंगली डाली – पहले एक, फिर दो। और उनको अंदर-बाहर करने लगी मैं तेज अपनी दोस्त को चोद रही थी।


फिर वो चिल्लाई, "अआआह! फास्टर, रितु... Yes ओंह्ह्ह! ओंह्ह्ह अआआह।" मैंने उसकी चूत को चाटते हुए उंगली की, और सिसकते हुए वो मेरे मुंह पर ही झड़ गई – उसका रस मेरे मुँह पर बह रहा था। मैंने उसके पूरे रस को चाट लिया, वो मुझे बहुत ही मीठा लगा।


अब उसकी बारी थी। उसने मुझे लिटाया, फिर मेरा टॉप उतारा। वो मेरे देसी चूंचे को देखकर बोली, "देय आर ब्यूटीफुल..." उसने मेरे चूंचे चूसे, और बेरहमी से दबाए उसकी अदाओं से लग रहा था ये उसका पहली बार नहीं है। उसने बहुत खूबसूरती से मेरे निप्पल्स को काटा।


फिर वो ऊपर से चूमते हुए मेरे नीचे गई, उसने दांतों से पकड़कर आंख मारते हुए मेरी शॉर्ट्स उतारी। मेरी चूत तो उसे देखकर पहले से गीली थी। वो मेरी चूत जीभ से चाटने लगी – वो भी इतनी एक्सपर्टली की मैं पागल हो गई।


"आह हेमा उन्ह्ह्ह! आआह ऐसे ही...हमममम! ओह अआआह।" उसने भी मेरे उंगली डाली, मगर साली ने एक बार में दो उंगलियाँ चढ़ा दी, वो मुझे तड़पाने के अंदाज में हसी और तेज उंगली अंदर बाहर कर के चुदाई की।


मैंने उसके सिर को अपनी चूत पर दबाया और मदहोश होकर वो मुझे चाटती रही, उंगली करती रही। मेरे पहली बार था इसलिए मैं जल्दी ही झड़ गई लेकिन मेरी रस की धार जोर से निकली, "ओह फक... यस...मज़ा आ गया।"


फिर हम 69 पोजीशन में आए। मैं ऊपर आई, वो नीचे पहुंची। मैं उसकी चूत चाट रही थी, वो मेरी चूत पी रही थी। हमारी जीभें एक-दूसरे की चूत में घूम रही थीं। उंगलियाँ अंदर-बाहर चल रही थी। हम दोनों सिसकारियाँ भर रही थीं – "आह... अआआह ! हमममम! ओह अआआह! Fuck Yes... अआआह ! फास्टर...ओंह्ह्ह!"


करीब 10 मिनट तक ये कार्यक्रम चला, और हम दोनों फिर से एक दूसरे के ऊपर झड़ीं। हमने अपना रस एक-दूसरे के मुँह में छोड़ दिया। फिर हम कडल करके लेटीं रही। वो बोली, "दैट वाज अमेजिंग, रितु। आई हैड नो आइडिया यू वेयर इनटू गर्ल्स।"


मैंने हंसकर कहा, "मैं भी नहीं जानती थी, लेकिन तुम्हारे साथ... ये मेरा पहला था।" उस रात हमने फिर से एक दूसरे को प्यार करा – इस बार ज्यादा पैशन से एक दूसरे का रस निकाला। मैंने उसकी गांड भी चाटी, उंगली की डाली। वो मेरी भी चूत में कुछ न कुछ नया डाले जा रही थी।


हम पूरी रात नंगे सोए, एक-दूसरे को सहलाते हुए अब ये रोज़ का काम हो गया था जब तक हमारी पढ़ाई चली तब तक हमारे राते रंगीन रही थी मुझे यकीन है मेरे जैसे बहुत लड़कियां होंगी जिनकी अपनी रातों की रंगीन कहानी होगी।


ये मेरी पहली लेस्बियन चुदाई थी, और हेमा के साथ ये रिश्ता आगे भी बढ़ा। हम रूममेट्स से लवर्स बन गईं।


दिल्ली की पढ़ाई अब और मजेदार हो गई थी।


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1 Comment


Golu Yadav
Golu Yadav
2 days ago

Mera bhi khud ka ek kahani hai

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