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कजिन की बीवी की चुदाई: Antarvasna Sex Stories

6 days ago
12 min read

मेरा नाम सावन है, 22 साल का। कॉलेज की गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं और मेरे मामा के लड़के अनुज ने मुझे गाज़ियाबाद बुलाया था। अनुज भाई मिस्त्री का काम करते हैं, चिरोड़ी में रहते हैं। मैंने सोचा चलो घूम आते हैं, लेकिन सच तो ये है कि मैं अनुज भाई को देखने नहीं, उनकी बीवी कोमल को देखने जा रहा था।


पहली बार कोमल भाभी को मैंने तब देखा था जब अनुज भाई की शादी हुई थी। तब से ही मेरा दिमाग खराब था। कोमल भाभी... उनका चेहरा, उनका बदन, उनका चलना... सब कुछ ऐसा था कि मैं रात को अपने कमरे में जाकर उनके बारे में सोचता और मुट्ठी मारता। उन्हें देखकर मेरा लंड पत्थर जैसा हो जाता था।


जब मैं उनके घर पहुँचा, तो अनुज भाई ने बाहर से ही आवाज़ दी, "कोमल! देख कौन आया है!"


कोमल भाभी अंदर से निकलीं। मैंने उन्हें पहली बार इतने करीब से देखा। उन्होंने हल्का सा सूट पहना था - हल्के पीले रंग की कुर्ती और सलवार। उनके बाल खुले हुए थे, और चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी। उनकी गोरी गर्दन, उनकी नाज़ुक कलाइयाँ, और उनके सीने का वो उभार जो कुर्ती के अंदर से साफ़ दिख रहा था... उनके चूचे कुर्ती के अंदर से ऐसे झलक रहे थे जैसे दो पके फल हों। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।


"अरे सावन! कितना बड़ा हो गया है तू!" कोमल भाभी ने कहा और मेरे पास आकर मेरा हाथ पकड़ा। उनका हाथ इतना नरम था... मैं तो बस उन्हें घूरता रह गया।


अनुज भाई ने कहा, "सावन, तू यहीं रह कुछ दिन। मैं कल सुबह साइट पर जा रहा हूँ, दो-तीन दिन में आऊँगा। कोमल का ध्यान रखना।"


मेरे लिए ये सुनहरा मौका था। अनुज भाई चले गए, और मैं अकेला था कोमल भाभी के साथ।


पहले दिन तो मैंने अपने आपको संभाला। लेकिन कोमल भाभी का हर मूव, हर अदा... वो जब भी झुकती थीं, उनकी कुर्ती आगे खिसक जाती थी और उनकी गोरी गर्दन दिखती थी। वो जब भी हाथ उपर करती थीं, उनकी कुर्ती उपर चढ़ जाती थी और उनकी कमर का हिस्सा दिखता था। मैं अपना ध्यान नहीं लगा पा रहा था।


रात को मैं अपने कमरे में गया। कोमल भाभी ने मेरे लिए अलग से बिस्तर लगा दिया था। मैं लेटा तो था, पर नींद नहीं आ रही थी। मेरा दिमाग कोमल भाभी के बारे में सोच रहा था। उनका वो चेहरा, वो बदन, वो सूट के अंदर का हिस्सा जो मैं देखना चाहता था...


रात करीब 1 बजे होंगे। मैंने धीरे से उठकर कोमल भाभी के कमरे की तरफ देखा। दरवाज़ा अभी भी खुला था। मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना लंड पकड़ा। वो पहले से ही सख्त हो चुका था। मैंने आँखें बंद कीं और कोमल भाभी को इमेजिन किया - उन्हें अपने नीचे लेटा हुआ, उनके कपड़े उतारते हुए, उनके चूचों को अपने मुँह में लेते हुए...


"कोमल... कोमल भाभी..." मैं फुसफुसाया, और अपना हाथ तेज़ी से हिलाने लगा। मेरे दिमाग में सिर्फ वो थीं। उनकी गोरी जाँघें, उनका पतला कमर, उनके चूचे जो कुर्ती के अंदर से झलक रहे थे...


"आह... कोमल..." मैंने कराहते हुए कहा, और मेरा शरीर काँप उठा। मेरा वीर्य मेरी हथेली और पेट पर फैल गया। मैं कुछ देर वैसे ही लेटा रहा, साँसें भारी थीं। फिर मैंने उठकर हाथ धोए और कपड़े पहने। लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात थी - मुझे कोमल को पाना है, किसी भी तरह।


अगली रात कोमल भाभी ने हल्का गुलाबी सूट पहना था। खाने के बाद वो अपने कमरे में गईं और सो गईं। मैंने देखा कि उन्होंने इस बार दरवाज़ा आधा बंद किया था, लेकिन बंद नहीं किया था।


रात करीब 2 बजे, मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया। कोमल भाभी करवट लेकर सो रही थीं, उनकी साँसें धीमी और गहरी थीं। स्ट्रीट लाइट की रोशनी में उनका बदन साफ़ दिख रहा था।


मैं धीरे-धीरे उनके पास गया और चारपाई के किनारे बैठ गया। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और कोमल भाभी के बालों को धीरे से सहलाया। उन्होंने करवट बदली, लेकिन नींद में ही रहीं।


मेरा हाथ धीरे-धीरे उनके चेहरे से होता हुआ उनकी गर्दन पर पहुँचा। मेरी उँगलियाँ उनकी नरम त्वचा पर फिसल रही थीं। उन्होंने हल्की सी आह भरी, लेकिन फिर भी नींद में ही थीं।


मेरा हाथ और नीचे खिसका - कोमल भाभी की कुर्ती के बटनों पर। मैंने धीरे से पहला बटन खोला, फिर दूसरा। उनके चूचों का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा, उनकी गोरी त्वचा स्ट्रीट लाइट की रोशनी में चमक रही थी। उनके चूचे कुर्ती के अंदर से ऐसे उभर रहे थे जैसे दो पहाड़ हों।


मैंने अपनी उँगलियाँ कोमल भाभी के चूचों पर रखीं, और धीरे-धीरे उन्हें सहलाने लगा। उनकी नींद में हलचल हुई, उनके होंठों से एक हल्की सी कराह निकली।


"अनुज...?" कोमल भाभी ने आधी नींद में कहा।


मैंने कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि मेरा हाथ और आगे बढ़ा। मैंने उनकी कुर्ती के बटन पूरी तरह खोल दिए, और उनके चूचे अब पूरी तरह खुले थे - सफेद, गोल, और बिल्कुल पके फलों जैसे। उनके निप्पल गुलाबी और सख्त थे, मानो मेरे स्पर्श की प्रतीक्षा कर रहे हों।


मैंने अपना मुँह कोमल भाभी के चूचों पर रखा, और अपनी जीभ उनके निप्पल पर घुमाने लगा। उनकी नींद अब टूट रही थी, उनकी आँखें धीरे-धीरे खुलीं।


"सा...सावन? तू... तू यहाँ क्या कर रहा है?" कोमल भाभी ने घबराते हुए कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में घबराहट से ज़्यादा हैरानी थी।


"भाभी... मैं... मैं आपके बिना सो नहीं पा रहा था," मैंने कानाफूसी में कहा, मेरी आँखों में लालसा थी।


"पागल हो गया है क्या? अनुज आ जाएगा तो क्या होगा?" कोमल भाभी ने कहा, लेकिन उन्होंने मुझे दूर नहीं धकेला।


"अनुज भाई तो साइट पर हैं, कल सुबह तक नहीं आएँगे," मैंने कहा और फिर से उनके चूचों पर अपना मुँह रख दिया।


कोमल भाभी ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन मेरे होंठों का स्पर्श उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था। अनुज भाई के खुरदरे हाथों की जगह मेरे नरम, जवान होंठ... उनकी आँखें बंद हो गईं, और उनके होंठों से एक हल्की सी कराह निकली।


"सावन... रुक जा... ये ठीक नहीं है," कोमल भाभी ने कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में कोई ज़ोर नहीं था।


"भाभी... आपको भी तो ये चाहिए था। मैंने देखा है, आप कैसे मुझे देखती हैं," मैंने कहा, मेरी आवाज़ में एक अलग ही अंदाज़ था।


मैंने कोमल भाभी की सलवार की डोरी खोलनी शुरू की। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा, लेकिन कमज़ोर हाथ से - जैसे वो रोकना चाहती हों, लेकिन रोक नहीं पा रही हों।


"सावन... नहीं... ये गलत है," कोमल भाभी फुसफुसाईं, लेकिन उनकी आँखों में आँसू नहीं, बल्कि एक चमक थी।


"गलत है, भाभी... लेकिन आपको अच्छा लगेगा। अनुज भाई आपको कभी ऐसा प्यार नहीं कर सकते जैसे मैं करूँगा," मैंने कहा और उनकी सलवार उतार दी।


कोमल भाभी का बदन अब सिर्फ कुर्ती में था, जो पूरी तरह खुली हुई थी। उनकी गोरी जाँघें, उनका पतला कमर, और उनके बीच का वो रास्ता... उनकी सफेद पेटी के ऊपर से उनकी चूत का उभार साफ़ दिख रहा था। मेरी साँसें रुक गईं।


मैंने अपने कपड़े उतारे और कोमल भाभी के ऊपर लेट गया। मेरा लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। कोमल भाभी की साँसें भारी हो गईं, उनकी आँखें बंद थीं।


"भाभी... मैं अंदर जा सकता हूँ?" मैंने पूछा, मेरी आवाज़ काँप रही थी।


कोमल भाभी ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने अपनी जाँघें थोड़ी खोल दीं। ये मेरे लिए हाँ थी। मैंने अपना लंड उनकी चूत के अंदर डाला, और दोनों के होठों से एक लंबी, गहरी कराह निकली।


"आह... सावन... तू तो अनुज से भी ज़्यादा... मजबूत है," कोमल भाभी ने बेचैनी से कहा।


मेरी हरकतें धीमी और गहरी थीं, और कोमल भाभी मेरे साथ ताल मिला रही थीं। उनकी चूत में मेरा लंड पूरी तरह अंदर जा रहा था, और हर बार जब मैं अंदर जाता, कोमल भाभी की कराह और तेज़ हो जाती।


"आह... सावन... और ज़ोर से... और गहरा..." कोमल भाभी ने कहा, उनके नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे।


मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी, और चारपाई की चरमराहट तेज़ हो गई। कोमल भाभी के चूचे हिल रहे थे, और मैंने अपना मुँह उन पर रख दिया। मैंने उनके चूचों को चूसा और अपना लंड उनकी चूत में तेज़ी से घुसाता रहा।


"सावन... मैं... मैं आ रही हूँ..." कोमल भाभी चिल्लाईं, और उनका शरीर काँप उठा। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया, और मैं भी अपना वीर्य उनकी चूत के अंदर छोड़ने लगा।


"आह... कोमल... मैं भी..." मैंने कराहते हुए कहा, और मेरा वीर्य उनकी चूत के अंदर फूट पड़ा।


हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे, साँसें भारी थीं। फिर कोमल भाभी ने धीरे से मेरे बालों को सहलाया और कहा, "सावन... ये... ये हम दोनों के बीच रहेगा। अनुज को कुछ नहीं पता चलना चाहिए।"


"हाँ, भाभी। मैं वादा करता हूँ," मैंने कहा और उनके माथे पर चूम लिया।


अगली रात कोमल भाभी ने हल्का नीला सूट पहना था। खाना खाने के बाद वो मेरे कमरे में आईं। उनकी आँखों में वही चमक थी।


"सावन... आज रात मैं तुझे कुछ सिखाऊँगी," कोमल भाभी ने कहा और मेरे पास आकर बैठ गईं।


मैंने उनकी तरफ देखा, मेरा दिल धड़क रहा था। कोमल भाभी ने धीरे से मेरी पैंट उतारी और मेरा लंड पकड़ा। वो पहले से ही सख्त हो चुका था।


"इतना बड़ा लंड है तेरा... अनुज का तो आधा भी नहीं," कोमल भाभी ने कहा और अपना मुँह मेरे लंड पर रख दिया।


मेरी साँसें रुक गईं। कोमल भाभी का गर्म मुँह मेरे लंड पर था, और उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। उन्होंने धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया, और मेरी जाँघों के बीच अपना सिर हिलाने लगीं।


"आह... भाभी... ये... ये क्या कर रही हैं आप?" मैंने कराहते हुए कहा।


कोमल भाभी ने कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि और तेज़ी से मेरा लंड चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, और उनके होंठ मेरे लंड को कसकर पकड़ रहे थे। मैंने अपना सिर पीछे झुका लिया और उनकी चूसने की आवाज़ें सुनने लगा।


"म्म्म... म्म्म..." कोमल भाभी की आवाज़ें मेरे लंड पर गूंज रही थीं।


"भाभी... मैं... मैं आ रहा हूँ..." मैंने कहा, मेरा शरीर काँप रहा था।


कोमल भाभी ने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला और अपने हाथ से तेज़ी से हिलाने लगीं। मेरा वीर्य उनके मुँह पर फूट पड़ा, और उन्होंने अपना मुँह खोलकर मेरा सारा वीर्य निगल लिया।


"म्म्म... कितना मीठा है तेरा वीर्य," कोमल भाभी ने कहा और अपने होंठ चाटे।


मैं अभी भी साँसें फूल रहा था। कोमल भाभी ने अपना सूट उतारा और मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत के अंदर डाला और ऊपर-नीचे होने लगीं।


"आह... सावन... तेरा लंड मेरी चूत में कितना अच्छा लग रहा है," कोमल भाभी ने कहा, उनके चूचे हिल रहे थे।


मैंने उनके चूचों को पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया। कोमल भाभी की चूत में मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था, और उनकी कराहें तेज़ होती जा रही थीं।


"सावन... मैं... मैं फिर आ रही हूँ..." कोमल भाभी चिल्लाईं, और उनका शरीर काँप उठा।


मैंने भी अपना वीर्य उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया, और हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। कोमल भाभी मेरे ऊपर गिर गईं, और हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे।


कुछ रातों बाद, कोमल भाभी मेरे कमरे में आईं। उन्होंने इस बार सिर्फ एक नाइटी पहनी थी, जो उनकी जाँघों के बीच से झलक रही थी।


"सावन... आज कुछ अलग करेंगे?" कोमल भाभी ने कहा, उनकी आवाज़ में शरारत थी।


"क्या, भाभी?" मैंने पूछा।


कोमल भाभी ने अपनी नाइटी उतारी और चारपाई पर पेट के बल लेट गईं। उनकी गोरी गांड साफ़ दिख रही थी - गोल, मुलायम, और बिल्कुल सफेद। मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया।


"आज मेरी गांड में... लंड डालना चाहता है?" कोमल भाभी ने कहा, उनकी आवाज़ में कुछ अलग ही था।


मेरी साँसें रुक गईं। "भाभी... क्या... क्या आप सच में चाहती हैं?"


"हाँ, सावन। अनुज ने कभी मेरी गांड नहीं ली। वो हमेशा सिर्फ चूत में ही करता है। मैं जानना चाहती हूँ कि गांड में कैसा लगता है," कोमल भाभी ने कहा और अपनी गांड मेरी तरफ उठा दी।


मैंने अपना लंड उनकी गांड पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। कोमल भाभी ने आह भरी। फिर मैंने धीरे से अपना लंड उनकी गांड के अंदर डालना शुरू किया।


"आह... सावन... धीरे से... पहली बार है," कोमल भाभी ने कहा, उनकी आवाज़ में दर्द और सुख दोनों था।


मैंने धीरे-धीरे अपना लंड उनकी गांड के अंदर डाला, और फिर धीरे-धीरे हिलाने लगा। कोमल भाभी की कराहें धीरे-धीरे तेज़ होती गईं, और उन्होंने मेरी गति के साथ ताल मिलाना शुरू कर दिया।


"आह... सावन... तेरा लंड मेरी गांड में... इतना अच्छा लग रहा है..." कोमल भाभी ने कहा, उनका चेहरा तकिये में दबा हुआ था।


मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी, और कोमल भाभी की गांड पर ज़ोर-ज़ोर से लंड मारने लगा। उनकी गांड हिल रही थी, और मेरे लंड पर उनकी गांड कसकर पकड़ रही थी।


"सावन... मैं... मैं आ रही हूँ..." कोमल भाभी चिल्लाईं, और उनका शरीर काँप उठा।


मैंने भी अपना वीर्य उनकी गांड के अंदर छोड़ दिया, और हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। कोमल भाभी चारपाई पर गिर गईं, और मैं उनके ऊपर लेट गया।


उसके बाद के दिनों में, कोमल भाभी और मेरे बीच कुछ ऐसा हो गया कि दिन में हम दोनों सामान्य रहते, लेकिन रात को जब अनुज भाई साइट पर होते, तो कोमल भाभी मेरे साथ होतीं। लेकिन कुछ रातें ऐसी भी थीं जब कोमल भाभी थकी हुई होतीं और जल्दी सो जातीं। उन रातों में मैं उन्हें सोते हुए छेड़ता था।


एक रात कोमल भाभी ने सफेद सूट पहना था। वो दिन भर घर का काम करती रहीं, और रात को खाना खाने के बाद जल्दी सो गईं। मैंने देखा वो गहरी नींद में थीं।


रात करीब 1 बजे, मैं धीरे से उनके कमरे में गया। कोमल भाभी चारपाई पर पीठ के बल सो रही थीं, उनके हाथ ऊपर थे। उनकी कुर्ती उपर चढ़ी हुई थी, और उनकी सफेद पेटी का हिस्सा दिख रहा था। मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया।


मैंने धीरे से उनकी कुर्ती उपर खिसकाई, और उनकी सफेद पेटी देखी। उनकी पेटी के ऊपर उनकी चूत का उभार साफ़ दिख रहा था। मैंने अपना हाथ उनकी पेटी पर रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगा। कोमल भाभी ने नींद में ही करवट बदली, लेकिन नहीं उठीं।


मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना लंड पकड़ा। वो पहले से ही सख्त था। मैंने कोमल भाभी के चेहरे की तरफ देखा - वो गहरी नींद में थीं, उनके होंठ थोड़े खुले हुए थे। मैंने अपनी आँखें बंद कीं और उनके बारे में सोचते हुए अपना हाथ तेज़ी से हिलाने लगा।


"कोमल... कोमल भाभी..." मैं फुसफुसाया, और कुछ ही पलों में मेरा वीर्य फूट पड़ा। मेरा स्पर्म कोमल भाभी की पेटी के ऊपर और उनकी सलवार पर गिरा। मैंने अपना स्पर्म उनकी पेटी पर फैलाया, और फिर धीरे से उनकी कुर्ती नीचे खिसका दी।


अगली सुबह कोमल भाभी उठीं और नहाने चली गईं। मैंने देखा वो अपनी पेटी और ब्रा उतारकर बाथरूम में ले गईं। मेरा दिल धड़क गया - क्या उन्हें पता चल गया? मैं धीरे से बाथरूम के पास गया और दरवाज़े की दरार से अंदर झाँका।


कोमल भाभी ने अपनी पेटी और ब्रा उतारी और उन्हें देखा। उन्होंने पेटी पर सूखा हुआ स्पर्म देखा, और ब्रा के अंदर भी। उनके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी मुस्कान थी। उन्होंने पेटी और ब्रा को अलग रखा और नहाने लगीं।


मैंने देखा कोमल भाभी का नंगा बदन - उनके चूचे, उनकी चूत, उनकी गांड... सब कुछ साफ़ दिख रहा था। मेरा लंड फिर से सख्त हो गया। कोमल भाभी ने नहाकर तौलिया लिया और अपना बदन पोंछा। फिर उन्होंने दूसरी पेटी और ब्रा पहनी और बाहर आ गईं।


मैं जल्दी से अपने कमरे में भाग गया। कोमल भाभी ने मुझे देखा और मुस्कुराईं, लेकिन कुछ नहीं बोलीं। मैं समझ गया - उन्हें सब पता था, और उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी।


एक और रात कोमल भाभी ने हल्के नीले रंग का सूट पहना था। वो दिन भर बहुत थकी हुई थीं, और रात को खाना खाने के बाद जल्दी सो गईं। मैंने देखा उन्होंने अपनी कुर्ती उतारकर अलग रख दी थी और सिर्फ ब्रा और सलवार में सो रही थीं।


रात करीब 2 बजे, मैं धीरे से उनके कमरे में गया। कोमल भाभी करवट लेकर सो रही थीं। उनकी पीठ मेरी तरफ थी, और उनकी ब्रा का हुक दिख रहा था। उनकी गोरी पीठ, उनकी नाज़ुक कमर... मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया।


मैंने धीरे से उनकी ब्रा का हुक खोलने की कोशिश की, लेकिन कोमल भाभी ने करवट बदल दी और अब वो मेरी तरफ मुँह करके सो रही थीं। उनकी ब्रा अब सामने से दिख रही थी - नीले रंग की ब्रा जिसमें उनके चूचे भरे हुए थे।


मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उनकी ब्रा के ऊपर से उनके चूचों को सहलाया। कोमल भाभी ने नींद में ही आह भरी, लेकिन नहीं उठीं। मैंने धीरे से उनकी ब्रा की पट्टी नीचे खिसकाई, और उनका एक चूचा बाहर निकल आया। उनका निप्पल सख्त था, मानो ठंड से या सपने में कुछ देख रही हों।


मैंने अपना मुँह उनके चूचे पर रखा और धीरे-धीरे चूसने लगा। कोमल भाभी ने नींद में ही करवट बदली और उनके होंठों से एक हल्की सी कराह निकली। मैंने जल्दी से अपना मुँह हटाया और उनकी ब्रा ठीक कर दी।


फिर मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना लंड पकड़ा। मैंने कोमल भाभी के चेहरे की तरफ देखा - वो अब भी गहरी नींद में थीं। मैंने अपनी आँखें बंद कीं और उनके चूचों को चूसते हुए कल्पना की, और अपना हाथ तेज़ी से हिलाने लगा।


"आह... कोमल..." मैंने कराहते हुए कहा, और मेरा वीर्य फूट पड़ा। मेरा स्पर्म कोमल भाभी की ब्रा के अंदर गिरा, उनके चूचों पर। मैंने धीरे से उनकी ब्रा के अंदर अपना स्पर्म फैलाया, और फिर उनकी कुर्ती उनके ऊपर डाल दी।


अगली सुबह कोमल भाभी उठीं और नहाने चली गईं। मैंने फिर से बाथरूम के पास जाकर झाँका। उन्होंने अपनी ब्रा उतारी और देखा - अंदर सूखा हुआ स्पर्म था। उन्होंने फिर वही मुस्कान दिखाई और ब्रा अलग रख दी। फिर उन्होंने नहाया और बाहर आ गईं। उन्होंने मुझे देखा और कहा, "सावन, आज रात मेरे कमरे में आना।"


मेरा दिल धड़क गया। उस रात मैं कोमल भाभी के कमरे में गया, और हमने फिर से प्यार किया। इस बार कोमल भाभी ने मुझे अपनी चूत चाटने दी, और फिर मैंने उनकी चूत में अपना लंड डाला। हमने कई बार प्यार किया, और कोमल भाभी की चूत और गांड दोनों में मेरा वीर्य छोड़ा।


उसके बाद के दिनों में, जब भी कोमल भाभी सो जातीं, मैं उन्हें छेड़ता, उनकी पेटी और ब्रा में अपना स्पर्म निकालता, और उनकी सलवार के ऊपर भी। और जब वो जागतीं, तो हम प्यार करते। कोमल भाभी अब जान-बूझकर सोने का नाटक करती थीं, और मुझे अपने साथ जो चाहे करने देती थीं।


बस, इसी तरह चलती रही गाज़ियाबाद के चिरोड़ी में उन रातों की कहानी, जिसके बाद कोमल भाभी और मेरे बीच का रिश्ता कभी पहले जैसा नहीं रहा।

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