गरबा डांस साथ करके गरम हुई दोस्त की वाइफ: Antarvasna Sex Story
यह कहानी मेरी ज़िंदगी की वो Antarvasna यानी अन्तर्वासना वाली सच्ची घटना है। मेरा नाम मैं इस कहानी में नीरव बता रहा हूँ और मेरी उम्र उस वक़्त 28 साल थी। मेरे सबसे अच्छे दोस्त का नाम मैं इस कहानी में मनन बता रहा हूँ, जो मेरे साथ कॉलेज में पढ़ता था और अब एक बड़ी कंपनी में काम करता था। मनन की शादी दो साल पहले हुई थी और उसकी पत्नी का नाम मैं इस कहानी में जानकी बता रहा हूँ, जिनकी उम्र उस वक़्त 26 साल थी। मनन और जानकी दोनों मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे और हम तीनों अक्सर एक साथ बाहर जाते थे और पार्टियों में मिलते थे।
जानकी बहुत खूबसूरत थीं, लंबी, गोरी और उनका शरीर ऐसा तराशा हुआ था जैसे किसी कारीगर ने बड़े प्यार से बनाया हो। वह हमेशा अच्छे कपड़े पहनती थीं और उनके लंबे काले बाल कमर तक झूलते रहते थे। उनकी आँखें बहुत बड़ी और गहरी थीं, जिनमें जब वह मुस्कुराती थीं तो पूरी दुनिया रोशन हो जाती थी। मैं उन्हें पहली बार तब देखा था जब मनन उन्हें शादी के बाद हमारे ग्रुप में लाया था, और उस दिन से मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई थी। मैं जानता था कि यह गलत है, वह मेरे दोस्त की पत्नी हैं, लेकिन मेरी अन्तर्वासना मुझे बार-बार उसी दिशा में धकेल देती थी।
उस साल नवरात्रि का त्योहार आया और हमारे शहर में एक बड़ा गरबा डांस का आयोजन हुआ था। मनन ने मुझे बताया कि वह और जानकी भी उस गरबा में जा रहे हैं और मुझे भी साथ चलने के लिए कहा। मैंने हामी भर दी और उस शाम के लिए तैयार हो गया। जब मैं उनके घर पहुँचा तो जानकी ने एक बहुत ही सुंदर लाल रंग का चनिया-चोली पहना हुआ था, जिसमें उनका पूरा शरीर निखर कर आ रहा था। उनकी चोली उनके स्तनों को अच्छे से उभार रही थी और उनकी चनिया उनकी कमर को पतला दिखा रही थी। उन्होंने अपने हाथों में चूड़ियाँ पहनी हुई थीं और उनके माथे पर बिंदी चमक रही थी।
गरबा का मैदान बहुत बड़ा था और वहाँ सैकड़ों लोग जमा हुए थे। ढोल की आवाज़ और गरबा के गाने पूरे माहौल को जोश से भर रहे थे। मनन, जानकी और मैं गरबा करने के लिए सर्कल में शामिल हो गए। शुरू में हम तीनों साथ-साथ गरबा कर रहे थे, लेकिन कुछ देर बाद मनन को किसी दोस्त से मिलने के लिए सर्कल से बाहर जाना पड़ा और वह हमें छोड़कर चला गया। अब सर्कल में सिर्फ मैं और जानकी थे और हम दोनों एक-दूसरे के सामने गरबा कर रहे थे।
गरबा करते हुए हमारे हाथ बार-बार एक-दूसरे से टकरा रहे थे और हमारी आँखें एक-दूसरे से मिल रही थीं। जानकी की आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उनके होंठों पर एक हल्की मुस्कान थी। जैसे-जैसे गाने की गति तेज होती गई, हमारे शरीर भी और करीब आने लगे। एक बार जब हम दोनों घूम रहे थे, तो मेरा हाथ जानकी की कमर पर चला गया और उनका शरीर मेरे शरीर से टकरा गया। मैंने महसूस किया कि उनका शरीर बहुत गर्म था और उनकी साँसें तेज चल रही थीं।
जानकी ने मेरी तरफ देखा और उनकी आँखों में एक अजीब सी भूख थी। मैंने उनकी कमर पर अपना हाथ रखा और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। हम दोनों का गरबा अब एक अलग ही तरह का हो गया था, जैसे हम दोनों एक-दूसरे के शरीर को महसूस कर रहे हों। ढोल की आवाज़ हमारे दिल की धड़कनों से मिल रही थी और हमारी साँसें एक-दूसरे में मिल रही थीं। कुछ देर बाद जानकी ने मेरे कान के पास आकर फुसफुसाया, |नीरव, मुझे यहाँ से चलो, बहुत गर्मी लग रही है|
मैं उन्हें गरबा के मैदान से बाहर ले गया और हम एक पेड़ की छाँव में खड़े हो गए। वहाँ अंधेरा था और कोई हमें नहीं देख सकता था। जानकी ने अपनी चनिया ठीक की और अपने पसीने से भीगे चेहरे को अपनी चुनरी से पोंछा। उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, |नीरव, तुम्हें पता है, आज तुम बहुत हैंडसम लग रहे हो| मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा और मैंने उनकी आँखों में देखा। उनकी आँखों में जो भावना थी, वह शायद मेरे अंदर भी थी।
जानकी ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने और करीब खींच लिया। उनका शरीर मेरे शरीर से सट गया और मैंने उनकी गर्म साँसों को अपने चेहरे पर महसूस किया। उन्होंने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। पहला चुंबन बहुत तीव्र था, जैसे उन्हें मेरा इंतज़ार बहुत लंबा लग रहा हो। उनकी जीभ मेरे होंठों को चाटने लगी और मैंने अपना मुँह खोलकर उन्हें अंदर आने दिया।
हमारी जीभें आपस में लड़ने लगीं और उन्होंने अपना एक हाथ मेरे बालों में फेर दिया और दूसरा हाथ मेरी पीठ पर रखकर मुझे और कसकर अपनी तरफ खींच लिया। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था और मैंने अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया। जानकी का शरीर इतना नरम और गर्म था कि मुझे लगा जैसे मैं किसी आग में जल रहा हूँ। चुंबन के दौरान मैंने उनकी चोली के हुक खोलने शुरू किए और उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए।
कुछ ही देर में हम दोनों के कपड़े धीरे-धीरे कम होने लगे। जानकी की चोली खुल गई और उनके बड़े-बड़े स्तन मेरे सामने नंगे हो गए। उनके निप्पल सख्त हो चुके थे और मैंने उन्हें अपने दोनों हाथों में भरकर मसलना शुरू किया। जानकी ने अपना सिर पीछे कर लिया और उनके मुँह से एक धीमी आह निकली। मैंने उनके एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया और दूसरे को अपने हाथ से दबाने लगा। उनकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी और वह बीच-बीच में उसे हल्के से काट भी रही थीं।
जानकी ने मेरी पैंट का बटन खोला और ज़िप खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे लंड को सहलाया और फिर झुककर उसे अपने मुँह में ले लिया। उनकी गर्म जीभ जैसे ही मेरे लंड के सिरे पर पड़ी, मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया। जानकी ने मेरे लंड को अपने मुँह में गहराई तक लिया और अपनी जीभ से उसे चूसने लगीं। मैंने अपने हाथों से उनके बालों को पकड़ लिया और उनके सिर को हल्के से आगे-पीछे करने लगा।
जानकी मेरे लंड को बहुत ही कुशलता से चूस रही थीं, जैसे उन्हें यह काम बहुत अच्छे से आता हो। उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी और वह बीच-बीच में उसे गहराई तक अपने मुँह में ले जाती थीं। उनकी लार मेरे लंड से नीचे टपक रही थी और उनके मुँह से आआह्ह्ह जैसी आवाज़ें आ रही थीं। कुछ देर तक वह मेरे लंड को चूसती रहीं, और मैंने महसूस किया कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने उन्हें रोका और कहा, |जानकी, मैं अभी झड़ जाऊँगा, मुझे तुम्हारी चूत में जाना है|
जानकी ने मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और मुस्कुराते हुए कहा, |तो फिर आ जाओ, मेरी चूत तुम्हारा इंतज़ार कर रही है| और उन्होंने अपनी चनिया और कच्छी खुद उतार दी। उनकी चूत पूरी तरह से गीली थी और उससे रस टपक रहा था। उन्होंने मुझे पेड़ के नीचे घास पर लिटाया और अपनी जाँघों को फैलाकर मेरे लंड के सिरे को अपनी चूत के द्वार पर रखा। मैंने धीरे से अपने लंड को आगे बढ़ाया और उसका सिरा जानकी की चूत के अंदर घुस गया।
जानकी ने ज़ोर से साँस ली, |आआह्ह्ह| और अपने पैरों को मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिया। मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे और अंदर धकेला और जानकी की चूत की दीवारें उसे कसकर पकड़ने लगीं। जब मेरा पूरा लंड जानकी की चूत के अंदर समा गया तो मैंने अपने कूल्हों को आगे-पीछे करना शुरू किया। जानकी ने अपनी उंगलियों से मेरी पीठ को खरोंचना शुरू किया और अपने कूल्हों को मेरे धक्कों के साथ मिलाने लगीं।
घास पर लेटे हुए हमारी चुदाई की आवाज़ें और हमारी कराहें पेड़ के नीचे गूंज रही थीं। जानकी मेरे कान के पास आकर कहने लगीं, |नीरव, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, मेरी चूत पूरी तरह से भर गई है, तुम सच में चुदक्कड़ हो| मैं उनकी इन बातों से और भी उत्तेजित हो गया और मैंने उन्हें और ज़ोर से चोदने के लिए कहा। मैंने अपनी गति तेज कर दी, अब मेरे धक्के इतने ज़ोरदार थे कि जानकी का पूरा शरीर घास पर ऊपर-नीचे हो रहा था।
उनके स्तन मेरे धक्कों के साथ हिल रहे थे और मैं बारी-बारी से उन्हें अपने मुँह में भरकर चूस रहा था। जानकी की चूत से लगातार रस निकल रहा था जो मेरे लंड और उनकी जाँघों को पूरी तरह से भिगो रहा था। जानकी बार-बार आआह्ह्ह, उह्ह्ह्ह, आआअह्ह्ह्हह जैसी आवाजें निकाल रही थीं और उनकी आँखों में एक अलग ही तरह का आनंद था।
कुछ देर तक इसी पोजीशन में जानकी को चोदने के बाद मैंने उन्हें घुटनों के बल कर दिया। अब जानकी कुत्ते की तरह झुकी हुई थीं और उनकी चूत पीछे से मेरे सामने पूरी तरह से खुली हुई थी। मैंने उनके कूल्हों को पकड़कर अपना लंड फिर से उनकी चूत में डाल दिया। इस पोजीशन में मेरा लंड जानकी की चूत की और भी गहराई तक जा रहा था और हर धक्के के साथ उनकी भगनासा रगड़ खा रही थी।
जानकी बार-बार कराह रही थीं, |आआह्ह्ह, नीरव, और तेज करो, मेरी चूत को पूरी तरह से चोद दो| और मैं उनकी बात सुनकर और भी उत्तेजित होकर उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। मेरे लंड का हर धक्का जानकी की चूत के अंदर एक अलग ही तरह का आनंद पैदा कर रहा था। जानकी की चूत की माँसपेशियाँ सिकुड़ने लगी थीं और वह अपने चरम के करीब पहुँच रही थीं। मैंने भी महसूस किया कि मैं झड़ने वाला हूँ और मैंने अपनी गति और तेज कर दी।
आखिरकार जानकी अपने चरम पर पहुँच गईं और उनकी चूत से रस की धारा बह निकली। वह ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह| और उनका पूरा शरीर काँपने लगा। मैंने उन्हें झड़ते हुए देखकर अपने लंड को और ज़ोर से उनकी चूत के अंदर धकेला और कुछ ही पलों में मैंने भी अपना वीर्य जानकी की चूत की गहराई में छोड़ दिया। मेरा गर्म वीर्य जानकी की चूत के अंदर फैल गया और उन्होंने एक लंबी आह भरी। मैं जानकी की पीठ पर झुक गया और हम दोनों कुछ देर तक उसी पोजीशन में पसीने से लथपथ पड़े रहे।
उस रात के बाद जानकी और मेरे बीच का रिश्ता पूरी तरह से बदल गया। जब भी मनन बाहर होता या हमें कोई मौका मिलता, हम दोनों एक-दूसरे की भूख को बुझाते। जानकी मुझे हर बार पहले से ज्यादा ज़ोर से चुदवातीं और मैं उनकी चूत की आदी हो गया था। मैंने कई बार उन्हें अलग-अलग पोजीशन में चोदा, कभी उन्हें दीवार के सहारे खड़े-खड़े, कभी बिस्तर पर उनके ऊपर लेटकर, और कभी उन्हें अपनी गोद में बैठाकर।
एक रात की बात है, मनन किसी काम से बाहर गया हुआ था और मैं जानकी के घर गया। जानकी ने मुझे अपने बेडरूम में ले जाकर अपने कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। उन्होंने मेरे लंड को इतनी बेसब्री से चूसा कि मैं जल्दी ही झड़ गया और उन्होंने मेरा वीर्य पूरी तरह से पिया। फिर उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड पर रखकर धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।
उन्होंने अपने कूल्हों को ऊपर-नीचे करना शुरू किया और मेरा लंड उनकी चूत में अंदर-बाहर होने लगा। उनके स्तन उनकी गति के साथ उछल रहे थे और मैंने अपने हाथ बढ़ाकर उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने अपनी गति तेज कर दी और अब वह मेरे लंड पर ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थीं। हर बार जब वह नीचे बैठतीं तो मेरा लंड उनकी चूत की गहराई में जा रहा था और हम दोनों एक साथ कराह उठते।
कुछ देर तक वह मेरे ऊपर उछलती रहीं, और फिर मैंने उन्हें अपने नीचे लिटा दिया। अब मैं उनके ऊपर था और उनकी जाँघें मेरे कंधों पर थीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाला और पूरी ताकत से उन्हें चोदने लगा। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी और हर धक्के के साथ वह ज़ोर से चीख रही थीं। मैंने उनके होंठों को चूमा और उनकी गर्दन पर अपने होंठ फेरने लगा।
उन्होंने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए और अपने पैरों को मेरी कमर के चारों ओर और कसकर लपेट लिया। मैंने अपनी गति और तेज कर दी और कुछ ही पलों में हम दोनों एक साथ अपने चरम पर पहुँच गए। उनकी चूत से रस बह निकला और मेरे लंड से वीर्य की धारा उनकी चूत के अंदर समा गई।
आज भी जब मैं उन दिनों को याद करता हूँ, तो मेरे लंड में वही हरकत होती है और मेरे अंदर की अन्तर्वासना जाग उठती है, जो उस पहली रात गरबा के मैदान में जागी थी। गरबा डांस साथ करके गरम हुई दोस्त की वाइफ और यह राज मैं अपने साथ लेकर मरूँगा, क्योंकि यह वो सच है जिसे मैं कभी किसी को नहीं बता सकता, लेकिन जिसे मैं कभी भूल भी नहीं सकता।
Antarvasna Sex Story

Comments