भैया ने मुझे भाभी की चुत का रस पिलाया: Antarvasana
मेरा नाम साहिल है और मेरी उम्र उस वक़्त 25 साल थी। मेरे बड़े भैया का नाम वरुण है, जो मुझसे पाँच साल बड़े थे, और मेरी भाभी का नाम अंकिता है, जिनकी उम्र उस वक़्त 28 साल थी। हम तीनों एक ही घर में रहते थे, क्योंकि मेरे माँ-पापा गाँव में रहते थे और मैं अपनी नौकरी की तैयारी के लिए भैया-भाभी के साथ शहर में रहता था। भैया एक बड़ी कंपनी में सीनियर इंजीनियर थे और उनका काम इतना व्यस्त था कि कई बार उन्हें हफ्ते में तीन-चार दिन बाहर ही रुकना पड़ता था।
भाभी अंकिता बहुत खूबसूरत थीं, लंबी, गोरी और उनका शरीर ऐसा तराशा हुआ था जैसे किसी कारीगर ने बड़े प्यार से बनाया हो। वह हमेशा घर में सलवार-कुर्ती या फिर हल्की साड़ी पहनती थीं, और उनके लंबे काले बाल कमर तक झूलते रहते थे। उनकी आँखें बहुत बड़ी और गहरी थीं, जिनमें जब वह मुस्कुराती थीं तो पूरी दुनिया रोशन हो जाती थी। मैं उन्हें पहली बार तब देखा था जब भैया उन्हें शादी के बाद घर लाए थे, और उस दिन से मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई थी। मैं जानता था कि यह गलत है, वह मेरी भाभी हैं, लेकिन मेरी Antarvasana मुझे बार-बार उसी दिशा में धकेल देती थी।
भैया जब भी बाहर जाते, भाभी मेरा बहुत ख्याल रखतीं। वह मेरे लिए खाना बनातीं, मेरे कपड़े धोतीं, और कभी-कभी रात को देर तक मेरे साथ बैठकर बातें करतीं। उनकी बातों में एक अपनापन था, लेकिन मैं उनके शरीर की तरफ देखने से खुद को रोक नहीं पाता था। जब वह झुककर कुछ उठातीं तो उनके स्तनों का उभार उनकी कुर्ती में साफ दिखाई देता और मेरा लंड अपने आप तन जाता। मैं रात को अपने कमरे में लेटकर उनके बारे में सोचता और अपने लंड को सहलाता, लेकिन सुबह उठकर खुद पर शर्मिंदा होता।
उस दिन की बात है जब भैया दो हफ्ते के लिए एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में बाहर गए थे और घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। पहले कुछ दिन सब सामान्य रहे, लेकिन फिर एक रात की बात है, बिजली चली गई और पूरा घर अंधेरे में डूब गया। मैं अपने कमरे से निकलकर बैठक में आया तो भाभी वहाँ मोमबत्ती जलाकर बैठी हुई थीं। उन्होंने मुझे देखकर कहा, |साहिल, बैठ जाओ, अंधेरे में अकेले क्या करोगे| मैं उनके पास सोफे पर बैठ गया और हम दोनों कुछ देर तक चुपचाप बैठे रहे, सिर्फ मोमबत्ती की लौ हमारे चेहरों को रोशन कर रही थी।
भाभी ने धीमी आवाज़ में कहा, |तुम्हारे भैया तो हमेशा बाहर ही रहते हैं, मुझे अकेले बहुत बोरियत होती है| मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी आँखों में एक अजीब सी उदासी और एक अजीब सी भूख दिखाई दे रही थी। मैंने हिम्मत करके कहा, |भाभी, मैं तो हूँ ना, आपको बोर होने की जरूरत नहीं| भाभी ने मेरी तरफ देखा और उनके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आ गई। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे हाथ पर रख दिया और धीरे से दबाया। उनका स्पर्श इतना गर्म था कि मेरे पूरे शरीर में एक झुरझुरी दौड़ गई।
मैंने भी उनका हाथ पकड़ लिया और हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखने लगे। भाभी की आँखों में जो भावना थी, वह शायद मेरे अंदर भी थी, लेकिन हम दोनों किसी तरह उसे दबाए हुए थे। फिर भाभी ने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ से निकाला और मेरे गाल पर रख दिया। उनकी उंगलियाँ मेरे चेहरे पर फिसलने लगीं और मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। भाभी ने धीरे से मेरे चेहरे को अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहला चुंबन बहुत कोमल था, लेकिन फिर धीरे-धीरे वह गहरा होता गया। भाभी की जीभ मेरे होंठों को चाटने लगी और मैंने अपना मुँह खोलकर उन्हें अंदर आने दिया। हमारी जीभें आपस में लड़ने लगीं और भाभी ने अपना एक हाथ मेरे बालों में फेर दिया और दूसरा हाथ मेरी पीठ पर रखकर मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था और मैंने अपना हाथ भाभी की कमर पर रख दिया। भाभी का शरीर इतना नरम और गर्म था कि मुझे लगा जैसे मैं किसी बादल पर हूँ।
चुंबन के दौरान भाभी ने धीरे से मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए और मैंने उनकी कुर्ती के हुक खोलने शुरू किए। जब हमारे कपड़े धीरे-धीरे कम होने लगे तो मोमबत्ती की रोशनी में हमारे शरीर एक-दूसरे को दिखने लगे। भाभी की ब्रा और कच्छी मेरे सामने थी और मेरा लंड उनकी नज़रों के सामने तना हुआ था। भाभी ने मेरे लंड को देखकर अपने होंठों को गीला किया और धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ लिया। उनकी उंगलियों का स्पर्श मेरे लंड पर इतना सुखद था कि मैंने एक गहरी साँस ली।
भाभी ने मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया और फिर झुककर उसे अपने मुँह में ले लिया। उनकी गर्म जीभ जैसे ही मेरे लंड के सिरे पर पड़ी, मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया। भाभी ने मेरे लंड को अपने मुँह में गहराई तक लिया और अपनी जीभ से उसे चूसने लगीं। मैंने अपने हाथों से उनके बालों को पकड़ लिया और उनके सिर को हल्के से आगे-पीछे करने लगा। भाभी के मुँह से आआह्ह्ह जैसी आवाज़ें आ रही थीं और उनकी लार मेरे लंड से नीचे टपक रही थी।
कुछ देर तक भाभी मेरे लंड को चूसती रहीं, और मैंने महसूस किया कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने उन्हें रोका और कहा, |भाभी, मैं अभी झड़ जाऊँगा, मुझे तुम्हारी चूत में जाना है| भाभी ने मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और मुस्कुराते हुए कहा, |तो फिर आ जाओ, मेरी चूत तुम्हारा इंतज़ार कर रही है| और उन्होंने अपनी कच्छी को खुद उतार दिया।
भाभी की चूत पूरी तरह से गीली थी और उससे रस टपक रहा था। उन्होंने मुझे सोफे पर लिटाया और अपनी जाँघों को फैलाकर मेरे लंड के सिरे को अपनी चूत के द्वार पर रखा। मैंने धीरे से अपने लंड को आगे बढ़ाया और उसका सिरा भाभी की चूत के अंदर घुस गया। भाभी ने ज़ोर से साँस ली, |आआह्ह्ह| और अपने पैरों को मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिया। मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे और अंदर धकेला और भाभी की चूत की दीवारें उसे कसकर पकड़ने लगीं। जब मेरा पूरा लंड भाभी की चूत के अंदर समा गया तो मैंने अपने कूल्हों को आगे-पीछे करना शुरू किया।
भाभी ने अपनी उंगलियों से मेरी पीठ को खरोंचना शुरू किया और अपने कूल्हों को मेरे धक्कों के साथ मिलाने लगीं। सोफा चरमरा रहा था और हमारी चुदाई की आवाज़ें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। भाभी मेरे कान के पास आकर कहने लगीं, |साहिल, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, मेरी चूत पूरी तरह से भर गई है, तुम सच में चुदक्कड़ हो| मैं उनकी इन बातों से और भी उत्तेजित हो गया और मैंने उन्हें और ज़ोर से चोदने के लिए कहा।
मैंने अपनी गति तेज कर दी, अब मेरे धक्के इतने ज़ोरदार थे कि भाभी का पूरा शरीर सोफे पर ऊपर-नीचे हो रहा था। उनके स्तन मेरे धक्कों के साथ हिल रहे थे और मैं बारी-बारी से उन्हें अपने मुँह में भरकर चूस रहा था। भाभी की चूत से लगातार रस निकल रहा था जो मेरे लंड और उनकी जाँघों को पूरी तरह से भिगो रहा था। भाभी बार-बार आआह्ह्ह, उह्ह्ह्ह, आआअह्ह्ह्हह जैसी आवाजें निकाल रही थीं और उनकी आँखों में एक अलग ही तरह का आनंद था।
कुछ देर तक इसी पोजीशन में भाभी को चोदने के बाद मैंने उन्हें सोफे से उठाया और घुटनों के बल झुका दिया। अब भाभी कुत्ते की तरह झुकी हुई थीं और उनकी चूत पीछे से मेरे सामने पूरी तरह से खुली हुई थी। मैंने उनके कूल्हों को पकड़कर अपना लंड फिर से उनकी चूत में डाल दिया। इस पोजीशन में मेरा लंड भाभी की चूत की और भी गहराई तक जा रहा था और हर धक्के के साथ उनकी भगनासा रगड़ खा रही थी। भाभी ने अपने हाथों को सोफे के किनारे पर टिका दिया और अपने कूल्हों को मेरे धक्कों के साथ पीछे धकेलने लगीं। मैंने भाभी के बालों को पकड़कर उनकी गर्दन को हल्के से पीछे खींचा और उनकी पीठ पर अपने होंठ फेरने लगा।
भाभी बार-बार कराह रही थीं, |आआह्ह्ह, साहिल, और तेज करो, मेरी चूत को पूरी तरह से चोद दो| और मैं उनकी बात सुनकर और भी उत्तेजित होकर उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। मेरे लंड का हर धक्का भाभी की चूत के अंदर एक अलग ही तरह का आनंद पैदा कर रहा था। भाभी की चूत की माँसपेशियाँ सिकुड़ने लगी थीं और वह अपने चरम के करीब पहुँच रही थीं। मैंने भी महसूस किया कि मैं झड़ने वाला हूँ और मैंने अपनी गति और तेज कर दी।
आखिरकार भाभी अपने चरम पर पहुँच गईं और उनकी चूत से रस की धारा बह निकली। वह ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह| और उनका पूरा शरीर काँपने लगा। मैंने उन्हें झड़ते हुए देखकर अपने लंड को और ज़ोर से उनकी चूत के अंदर धकेला और कुछ ही पलों में मैंने भी अपना वीर्य भाभी की चूत की गहराई में छोड़ दिया। मेरा गर्म वीर्य भाभी की चूत के अंदर फैल गया और भाभी ने एक लंबी आह भरी। मैं भाभी की पीठ पर झुक गया और हम दोनों कुछ देर तक उसी पोजीशन में पसीने से लथपथ पड़े रहे।
उस रात के बाद भाभी और मेरे बीच का रिश्ता पूरी तरह से बदल गया। जब भी भैया बाहर जाते, हम दोनों एक-दूसरे की भूख को बुझाते। भाभी मुझे हर बार पहले से ज्यादा ज़ोर से चुदवातीं और मैं उनकी चूत की आदी हो गया था। मैंने कई बार उन्हें अलग-अलग पोजीशन में चोदा, कभी उन्हें दीवार के सहारे खड़े-खड़े, कभी बिस्तर पर उनके ऊपर लेटकर, और कभी उन्हें अपनी गोद में बैठाकर। भाभी की चूत अब सिर्फ मेरे लिए ही तैयार रहती थी और मेरी अन्तर्वासना ने मुझे पूरी तरह से उनके हवाले कर दिया था।
लेकिन फिर एक दिन भैया अचानक घर लौट आए। वह रात का वक़्त था और मैं भाभी के साथ उनके कमरे में था। भाभी मेरे नीचे लेटी हुई थीं और मेरा लंड उनकी चूत में था, जब अचानक दरवाज़ा खुला और भैया अंदर आ गए। मेरे होश उड़ गए और मैं भाभी के ऊपर से हट गया। भाभी भी घबराकर उठ बैठीं और उन्होंने अपनी साड़ी से अपना शरीर ढँक लिया। भैया ने हमें देखा और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। मैंने सोचा कि वह गुस्सा करेंगे और मुझे मारेंगे, लेकिन उन्होंने कुछ और ही किया।
भैया ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया और हमारे पास आकर बैठ गए। उन्होंने कहा, |साहिल, मुझे पता है कि तुम और अंकिता के बीच क्या चल रहा है, मैं कई दिनों से देख रहा हूँ| मेरी साँसें रुक गईं और मैंने अपनी नज़रें नीची कर लीं। भैया ने आगे कहा, |लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि मैं खुद अंकिता को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता। मैं चाहता हूँ कि तुम उसे संतुष्ट रखो| मैं यह सुनकर हैरान रह गया और मेरी आँखों में यकीन नहीं आ रहा था।
भैया ने भाभी की तरफ देखा और कहा, |अंकिता, तुम साहिल के साथ जो कर रही हो, वह ठीक कर रही हो। मैं चाहता हूँ कि आज तुम दोनों मेरे सामने करो| भाभी ने शर्माते हुए अपना चेहरा झुका लिया, लेकिन उन्होंने मना नहीं किया। भैया ने मेरी तरफ देखा और कहा, |साहिल, आज तुम भाभी की चूत का रस पियो, मैं देखना चाहता हूँ| मेरा लंड फिर से तन गया और मैं भाभी की तरफ बढ़ गया।
भैया के सामने मैंने भाभी की साड़ी हटाई और उनकी चूत को अपने मुँह के सामने किया। भाभी की चूत पूरी तरह से गीली थी और उससे रस टपक रहा था। मैंने अपनी जीभ भाभी की चूत पर रखी और उनके रस को चाटने लगा। भाभी ने ज़ोर से कराहते हुए अपने हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया। भैया हमें देख रहे थे और उनका लंड भी अपनी पैंट में तन चुका था। मैंने भाभी की चूत को चाटते हुए उनकी भगनासा को चूसा और उनके रस को पीने लगा। भाभी की चूत का रस इतना मीठा था कि मैं उसे पीता ही चला गया।
भैया ने कहा, |साहिल, अब भाभी की चूत में अपना लंड डालो और उसे चोदो| मैंने अपना लंड भाभी की चूत में डाला और उन्हें चोदने लगा। भैया हमारे सामने बैठे हुए अपने लंड को सहला रहे थे और हमें देख रहे थे। भाभी की चूत में मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था और भाभी बार-बार कराह रही थीं। भैया ने कहा, |अंकिता, तुम्हारी चूत का रस साहिल को पिलाओ| भाभी ने अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डालीं और उन्हें मेरे मुँह में दिया। मैंने उनकी उंगलियों को चूसा और उनकी चूत का रस पिया।
भैया ने हमें कई पोजीशन में चोदते हुए देखा और हर बार मुझे भाभी की चूत का रस पीने के लिए कहा। उस रात के बाद भैया, भाभी और मेरे बीच एक अलग ही तरह का रिश्ता बन गया। भैया जब भी घर होते, हम तीनों एक साथ होते और भैया मुझे भाभी की चूत का रस पिलाते। भाभी की चूत का रस मुझे इतना पसंद आ गया था कि मैं उसे कभी पीना नहीं छोड़ता।
एक रात की बात है, भैया ने मुझे भाभी की चूत को चाटने के लिए कहा और खुद भाभी के स्तनों को चूसने लगे। मैं भाभी की चूत को चाट रहा था और भाभी मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं। भैया ने भाभी की चूत में अपनी उंगलियाँ डालीं और उन्हें मेरे मुँह में दिया। मैंने उनकी उंगलियों को चूसा और भाभी की चूत का रस पिया। फिर भैया ने अपना लंड भाभी की चूत में डाला और उन्हें चोदने लगे, जबकि मैं भाभी की चूत के पास ही रहा और उनके रस को चाटता रहा। भैया के लंड और भाभी की चूत के मिलन से निकलने वाला रस मैंने अपने मुँह से पिया।
एक और रात की बात है, भैया ने मुझे भाभी की चूत में अपना लंड डालने के लिए कहा और खुद भाभी के मुँह में अपना लंड डाल दिया। भाभी एक साथ दो लंडों को संभाल रही थीं, एक उनकी चूत में और एक उनके मुँह में। मैं भाभी की चूत को चोद रहा था और भैया भाभी के मुँह को। भाभी की चूत से रस बह रहा था जिसे मैं बीच-बीच में चाट लेता था। कुछ देर बाद भैया ने भाभी के मुँह में अपना वीर्य छोड़ दिया और भाभी ने उसे निगल लिया। फिर मैंने भी भाभी की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया और भाभी की चूत से निकलने वाले रस को मैंने अपने मुँह से पिया।
आज भी जब मैं उन दिनों को याद करता हूँ, तो मेरे लंड में वही हरकत होती है और मेरे अंदर की Antarvasana जाग उठती है, जो उस पहली रात भाभी के कमरे में जागी थी।

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