कामवाली और बीबी के साथ गर्मी की दोपहर में ग्रुप सेक्स: Antarvasna3
- Kamvasna
- Aug 4
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ये Antarvasna3 की एक ऐसी दास्तान है जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, अपनी ज़िंदगी का वो राज़ जो कभी किसी को बताने की हिम्मत नहीं हुई। ये एक ऐसी Sex Story है जो मेरे साथ उस भयंकर गर्मी की दोपहर में घटी, जब पूरा मोहल्ला पंखों की हवा में बेहोश पड़ा था और मेरे घर के अंदर एक ऐसा तूफ़ान उठने वाला था जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। मेरा नाम अर्जुन है, उम्र 28 साल, और ये कहानी है मेरी बीबी रागिनी और हमारी कामवाली शबाना के साथ उस जून की दोपहर की, जिसने मेरी ज़िंदगी की सारी परिभाषाएँ बदल कर रख दीं। ये कोई बनावटी किस्सा नहीं, बल्कि मेरी अपनी ज़िंदगी का वो सच है जो मेरे सीने में दबा हुआ था, एक ऐसा भोगा हुआ यथार्थ जो अब आपके सामने शब्दों का जामा पहनकर आ रहा है।
जून का महीना था, और लखनऊ की गर्मी अपने पूरे शबाब पर थी। बाहर की सड़कें सुनसान पड़ी थीं, जैसे कुदरत ने भी हार मान ली हो सूरज की तपिश के आगे। मैं अपने दो कमरों के उस फ्लैट में एसी के सामने बैठा कुछ ऑनलाइन काम निपटा रहा था। रागिनी, मेरी 26 साल की ख़ूबसूरत बीबी, किचन में कुछ कर रही थी। शबाना, हमारी 23 साल की कामवाली, जो पिछले छह महीने से हमारे यहाँ काम कर रही थी, बर्तन साफ़ कर रही थी। शबाना की ख़नकती चूड़ियों की आवाज़ और बर्तनों की खटखट मेरे कानों में पड़ रही थी, लेकिन मेरा ध्यान तब टूटा जब रागिनी ने आकर मेरे कंधे पर हाथ रखा। उसने एक हल्की पीली सूती साड़ी पहन रखी थी, जिसमें उसका साँवला बदन और भी निखर रहा था। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उसकी भरी हुई गोलाई का संकेत मिल रहा था। उसने मेरे कान में धीमी, मीठी आवाज़ में कहा, |अर्जुन, आज मन बहुत ऊब रहा है। गर्मी ने हाल बेहाल कर रखा है। कुछ मज़ेदार करते हैं|
रागिनी की ये अदा मुझे हमेशा दीवाना बनाती थी। शादी को तीन साल हो गए थे, लेकिन उसका जोश और प्रयोगों की भूख कम नहीं हुई थी। दरअसल, हम दोनों के बीच एक ख़ास किस्म की समझ थी। हम अपनी ज़िंदगी में कुछ मसालेदार पल जोड़ने के लिए कभी-कभी नई चीज़ें आज़माने को तैयार रहते थे, और इस बार रागिनी की आँखों में जो चमक देखी, वो कुछ और ही बयान कर रही थी। उसने गर्दन हिलाकर शबाना की तरफ़ इशारा किया। शबाना अभी पानी की टंकी के नल के पास झुकी बर्तन माँज रही थी, उसकी पीठ का कर्व साफ़ दिख रहा था। वो एक गरीब लेकिन बहुत ही आकर्षक लड़की थी। साँवला रंग, बड़ी-बड़ी काली आँखें, भरा हुआ शरीर, और काम करते वक्त उसकी चुस्ती एक अलग ही आकर्षण पैदा करती थी।
मैंने रागिनी की तरफ़ देखा, मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं। क्या वो सच में वही सोच रही थी जो मैं सोच रहा था? हमने कई बार फंतासी में एक से ज़्यादा लोगों के साथ होने की बात की थी, लेकिन असल में कभी हिम्मत नहीं जुटा पाए थे। आज रागिनी शायद उस ख्वाब को हकीकत में बदलना चाहती थी। उसने फिर कहा, |देखो, कितनी प्यारी लग रही है। काम करते-करते पसीने से तरबतर। मुझे लगता है इसे भी गर्मी बहुत परेशान कर रही है। क्यों न हम इसकी थोड़ी मदद कर दें?| रागिनी की आवाज़ में एक शरारत थी, एक ऐसा संकेत जिसने मेरे शरीर में बिजली दौड़ा दी। मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा था, सिर्फ इस सोच से ही कि एक नहीं, बल्कि दो औरतें मेरे सामने होंगी।
ये मेरी सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा से छुपाकर रखना चाहता था, क्योंकि समाज की नज़रों में ये गलत है, लेकिन उस दोपहर जो हुआ, वो इतना स्वाभाविक था, इतना प्यार और इच्छा से भरा हुआ था, कि उसे गलत कहने का मन ही नहीं करता। रागिनी मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराई, फिर धीरे-धीरे किचन की तरफ़ बढ़ी। उसने पीछे से जाकर शबाना की कमर पर हाथ रखा। शबाना चौंकी, लेकिन पलट कर देखा तो मालकिन को मुस्कुराते पाकर वो भी शर्माई सी मुस्कान दे गई। रागिनी ने कहा, |शबाना, आज बहुत गर्मी है। तुम थक गई हो। ज़रा अंदर आकर ठंडा शरबत पी लो, फिर काम करना| शबाना ने हाथ पोंछे और सिर हिलाया। उसकी सूती सलवार कमीज़ पसीने से कई जगह चिपकी हुई थी, उसके जिस्म का हर उभार साफ़ झलक रहा था। मैंने सोफ़े पर बैठे-बैठे ही अपनी पैंट में तकलीफ़ महसूस करनी शुरू कर दी थी।
रागिनी शबाना को लेकर हमारे बेडरूम में आ गई, जहाँ एसी चल रही थी और ठंडी हवा थी। मैं भी पीछे-पीछे चला आया। कमरे का माहौल एकदम बदला हुआ था। खिड़की से हल्की रोशनी आ रही थी, और पंखा बंद था। रागिनी ने शबाना को पलंग पर बैठने को कहा। शबाना थोड़ी सकुचाई हुई थी, लेकिन रागिनी के प्यार भरे व्यवहार से सहज हो गई। रागिनी ने मेरी तरफ़ देखा और आँखों ही आँखों में इशारा किया। फिर उसने शबाना के बालों को सहलाते हुए कहा, |तुम्हें पता है शबाना, अर्जुन तुम्हें बहुत पसंद करते हैं। अक्सर तुम्हारी तारीफ़ करते रहते हैं| शबाना शर्मा गई, उसके गाल लाल हो गए। उसने धीरे से कहा, |मेमसाब, मैं तो बस एक गरीब कामवाली हूँ| रागिनी ने उसका हाथ थाम लिया। |बिल्कुल नहीं, तुम बहुत ख़ूबसूरत हो। और इतना काम करने के बाद तुम्हारे शरीर की मालिश भी तो बनती है। लाओ, आज मैं तुम्हारी थकान उतारती हूँ|
ये सुनकर शबाना ने चौंककर देखा। रागिनी ने मुस्कुराते हुए उसके कंधों पर हल्के हाथ रखे और दबाने लगी। शबाना ने पहले तो मना किया, लेकिन रागिनी के हाथों के जादू ने उसे चुप कर दिया। उसकी आँखें बंद हो गईं। मैं दरवाज़े पर खड़ा ये सब देख रहा था। रागिनी उसे आराम देने के बहाने धीरे-धीरे छू रही थी, उसकी पीठ, बाँहें और गर्दन। फिर रागिनी ने मेरी तरफ़ देखा और होंठों से बिना आवाज़ के कहा, |अंदर आओ| मैं धीरे-धीरे पास गया। रागिनी ने शबाना के कान में फुसफुसाया, |शबाना, मैं चाहती हूँ कि आज हम सब साथ मिलकर इस गर्मी को भुला दें। बस एक दूसरे का साथ, प्यार और सुकून। तुम तैयार हो न?|
शबाना ने आँखें खोलीं। उसने पहले रागिनी को देखा, फिर मुझे। उसकी आँखों में डर नहीं था, बल्कि एक अजीब सी उत्सुकता थी। शायद उसने भी कभी ऐसा सपना देखा था, या फिर इस माहौल की गर्माहट ने उसके रोम-रोम को पिघला दिया था। उसने हामी में सिर हिलाया। बस फिर क्या था, रागिनी ने अपना पल्लू सरकाया और शबाना के पास बैठ गई। उसने शबाना का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके माथे पर एक लंबा, गहरा चुंबन लिया। शबाना की साँसें तेज़ हो गईं। मैंने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। मेरा लंड अब पूरी तरह तन चुका था, और मेरी पैंट में एक तंबू बन गया था।
रागिनी ने शबाना के कान की लौ को हल्के से चूसा, और शबाना के मुँह से एक हल्की सी आह निकली, |उह्ह्ह्ह| उसका शरीर सिहर उठा। रागिनी ने अपनी उँगलियाँ शबाना के पेट पर फिराईं, उसकी कमीज़ के ऊपर से ही। शबाना की पेट की मांसपेशियाँ सिकुड़ गईं। रागिनी ने कहा, |अभी तो बहुत कुछ बाकी है, जानू। आराम करो, बस महसूस करो| मैंने पीछे से आकर रागिनी के कंधों को सहलाया। वो पलटी और मेरे होंठों को चूम लिया। हमारी ज़बानें आपस में गुथ गईं। शबाना अपलक ये सब देख रही थी। रागिनी ने मुझसे अलग होते हुए कहा, |पहले शबाना का ख्याल रखो, फिर मेरा|
मैं शबाना के पास गया। उसकी साँसें बुरी तरह फूल रही थीं। मैंने उसकी कमीज़ के पहले बटन पर हाथ लगाया, और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। एक-एक करके मैंने उसके सारे बटन खोल दिए। अंदर उसने एक पुरानी सी लेकिन साफ़ ब्रा पहन रखी थी, जो उसके उभारों को पूरी तरह नहीं ढक पा रही थी। मैंने कमीज़ हटाई, तो रागिनी ने पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। शबाना ने चौंककर अपने हाथ स्तनों पर रख लिए, लेकिन रागिनी ने प्यार से उसके हाथ हटा दिए। |शर्माने की ज़रूरत नहीं है, ये तुम्हारा ही घर है| उसके स्तन बाहर आ गए। साँवले, भरे हुए, गोल-मटोल, और सिरे पर गहरी भूरी निपल्स।
रागिनी ने पीछे से अपनी साड़ी का पल्लू खोलकर फेंक दिया, और अपने ब्लाउज़ के बटन खोलने लगी। उसके स्तन और भी गोरे और बड़े थे, उन पर नीली नसें दिख रही थीं। कमरे में तीन गर्म जिस्म थे, और ठंडी हवा भी इस आग को भड़का रही थी। मैंने शबाना के एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया। वो तुरंत कराह उठी, |आआह्ह्ह्ह… अर्जुन बाबू…| उसकी निप्पल मेरी ज़बान पर सख्त हो गई। मैं उसे चूसता रहा, दाँतों से हल्के-हल्के दबाता रहा, और मेरा दूसरा हाथ उसके दूसरे स्तन को मल रहा था। इतने में रागिनी ने आकर मेरी पैंट की ज़िप खोल दी। मेरा तना हुआ लंड उछलकर बाहर आ गया। शबाना ने नज़रें नीची करके देखा तो उसकी साँस रुक सी गई।
रागिनी ने मेरे लंड को थाम लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसने शबाना से कहा, |देखो, ये तुम्हारी वजह से इतना गर्म और सख्त हो गया है। अब तुम्हें इसकी गर्मी शांत करनी है| शबाना ने काँपते हाथों से मेरे लंड को छुआ। उसकी उँगलियाँ बहुत मुलायम थीं, जो काम करते-करते थोड़ी खुरदरी हो गई थीं, लेकिन उनका स्पर्श बिजली की तरह था। रागिनी ने उसके बाल पीछे किए और उसका सिर मेरी जाँघों की तरफ़ धकेला। शबाना ने अपनी ज़बान बाहर निकाली और मेरे लंड के सिरे को हल्के से छुआ। मैं सिहर गया। फिर उसने पूरे सिरे को अपने गर्म मुँह में ले लिया।
|आआअह्ह्ह्हह| मेरे मुँह से चीख निकल गई। शबाना के मुँह की गर्मी और नमी लाजवाब थी। वो बहुत आराम से मेरे लंड को चूसने लगी, जैसे किसी आइसक्रीम को चाट रही हो। उसकी ज़बान नसों पर नाच रही थी। रागिनी ये देखकर मुस्कुराई और शबाना के बगल में आकर बैठ गई। उसने शबाना को चूसते हुए देखकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल लिया, और अपना हाथ अपनी चुत पर फिराने लगी। उसकी उँगलियाँ अपने रस में भीग चुकी थीं।
शबाना अब पूरी तरह से खुल चुकी थी। उसने मेरा पूरा लंड मुँह में लेने की कोशिश की, और गले तक उतार लिया। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और हल्के-हल्के अपने कूल्हे हिलाने लगा। मैं उसके मुँह को चोद रहा था। रागिनी ने अब अपनी साड़ी पूरी तरह उतार फेंकी और मेरे पास आई। उसने मेरा हाथ अपनी चुत पर रखा, जो पूरी तरह से गीली और तैयार थी। मैंने दो उँगलियाँ उसकी चुत में डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। रागिनी ज़ोर से कराह उठी, |उह्ह्ह्ह… हाँ… और तेज़… चोद अपनी उँगलियों से मुझे…|
अब माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका था। मैंने शबाना को सिर से पकड़कर हटाया। उसके होंठ चमक रहे थे और ठुड्डी पर लार बह रही थी। मैंने उसे पलंग पर लिटा दिया और उसकी सलवार खींचकर उतार दी। उसकी चुत पर हल्के बाल थे, लेकिन वो बहुत साफ़ और भीगी हुई थी। मैंने झुककर उसकी चुत को चाटना शुरू कर दिया। शबाना तड़प उठी, |आआह्ह्ह्ह… नहीं, बहुत अच्छा लग रहा है…| मेरी ज़बान उसकी भगनासा पर तेज़ी से घूम रही थी। रागिनी ने मौका देखकर शबाना के स्तनों को दबाना शुरू किया और उसके होंठों को चूमने लगी। दोनों औरतें एक-दूसरे से लिपट गई थीं, उनकी ज़बानें आपस में लड़ रही थीं।
मैंने शबाना की चुत को ज़बान से पूरी तरह तर कर दिया, और अब मैं अपने लंड को उसकी चुत के द्वार पर रगड़ने लगा। रागिनी ने शबाना का मुँह अपने स्तनों पर रख लिया था, और शबाना उसे चूस रही थी। मैंने धीरे-धीरे अपने लंड का सिरा अंदर डाला। शबाना ने कराहते हुए रागिनी का स्तन छोड़ा और चीखी, |आआअह्ह्ह्हह… अंदर डाल दिया…| मैंने एक ज़ोरदार झटके में अपना पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया। वो एकदम कसी हुई और गर्म थी। शबाना की पीठ उठ गई।
मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। मेरा लंड तेज़ी से उसकी गीली चुत के अंदर आ-जा रहा था। चिक-चिक की आवाज़ें गूँज रही थीं। रागिनी ने एक तरफ़ बैठकर अपनी चुत पर चपत मारी और ज़ोर से चिल्लाई, |हाँ, ऐसे ही चोदो इसे, अर्जुन! इसे पूरी तरह चुदवाने दो!| शबाना की आँखें पलट गई थीं और वो बस लगातार कराहे जा रही थी, |आह… उह्ह्ह्ह… और ज़ोर से… चोदो मुझे… चोदते रहो…| मैं उसकी चुत को बेरहमी से चोद रहा था। मेरे गोले उसकी चूतड़ों पर ज़ोर से टकरा रहे थे।
शबाना के पूरे शरीर में एक झटका लगा, उसकी चुत की मांसपेशियाँ मेरे लंड पर ज़ोर से सिकुड़ीं, और वो एक ज़ोरदार चीख के साथ झड़ गई। उसका सारा बदन पसीने से तर था, और वो हाँफ रही थी। मैंने अपना लंड बाहर निकाला, जो उसके रस से पूरी तरह से भीगा हुआ था। मैंने रागिनी को पकड़ा, जो पहले से ही गर्म थी। मैंने उसे चारों हाथों-पैरों पर लिटा दिया और पीछे से उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया।
रागिनी ने अपनी कमर झुकाई और मुझे पूरी गहराई तक अंदर ले लिया। उसकी चुत ज़्यादा अनुभवी और ढीली थी, लेकिन उसमें एक अलग तरह की नमी और गर्मी थी। मैंने उसके कूल्हों को कसकर पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया। धड़-धड़ की आवाज़ें आने लगीं। रागिनी चिल्ला रही थी, |हाँ… हाँ… चोदो मुझे कुत्ते की तरह… और तेज़… मुझे आज पूरी चुदक्कड़ बना दो…| शबाना करवट लेकर लेटी हमें देख रही थी और उसकी उँगलियाँ फिर से अपनी चुत पर चली गई थीं।
रागिनी की चुत को चोदते हुए मैंने उसकी गांड पर एक चपत मारी, और वो और ज़ोर से चीखी। मैंने अपनी गति बढ़ा दी, अब मेरा सारा वज़न उसके ऊपर था। मैं उसे चोद रहा था और मेरा मुँह उसके कान के पास था। मैंने गुर्राकर कहा, |रागिनी, आज मैं तुम्हारी चुत को फाड़ कर रख दूँगा| वो हाँफते हुए बोली, |फाड़ दो… अपनी चुत समझकर चोदो इसे… उह्ह्ह्ह…| फिर मैंने रागिनी को पीठ के बल लिटा दिया। उसकी टाँगें उठाईं और उन्हें पूरा फैलाकर एक नए एंगल से अपना लंड उसकी चुत में डाला। इस बार वो और गहरा गया।
रागिनी अब सिर्फ चीख रही थी। मैंने उसके स्तनों को कुचलते हुए, उसकी टाँगों को मोड़कर, उसे बुरी तरह चोदा। मैं चाहता था कि वो पूरी तरह से चुदाई का मज़ा ले। शबाना ने भी हिम्मत जुटाई और आकर रागिनी का मुँह चूमने लगी, उसके स्तनों को दबाने लगी। रागिनी ने एक हाथ से शबाना के बाल पकड़े और दूसरे से अपनी चुत को सहलाने लगी, जहाँ मेरा लंड तूफ़ान मचा रहा था। मैंने अपनी रफ़्तार को स्लो कर दिया, धीरे-धीरे, लंबी-लंबी घुसन देकर उसे तड़पाया। फिर अचानक से तेज़ झटके दिए।
रागिनी ने मेरे लंड को अपने अंदर जकड़ लिया, उसकी चुत धड़कने लगी। वो चीखी, |आआअह्ह्ह्ह… मैं जा रही हूँ… चुदवाने में मज़ा आ गया… हाँ… उह्ह्ह्ह…| और वो झड़ गई। उसका रस मेरे लंड और गोलों पर बहने लगा। लेकिन मैं अभी तक नहीं झड़ा था। मेरा लंड एकदम पत्थर जैसा सख्त था, अब उसे और चुदाई चाहिए थी। मैंने शबाना की तरफ़ देखा। वो समझ गई।
मैंने शबाना को फिर से अपनी तरफ़ खींच लिया। इस बार मैंने उसे अपने ऊपर बैठने को कहा। शबाना मेरे लंड पर सवार हो गई। उसने अपनी चुत को मेरे लंड के ऊपर सटाया और धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा लंड अंदर चला गया। अब शबाना ऊपर-नीचे हो रही थी, उसके स्तन उछल रहे थे। वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर उसे और तेज़ चुदवाना शुरू किया। मेरा लंड उसकी चुत की छत को रगड़ रहा था।
रागिनी ने आकर मेरे मुँह पर अपनी चुत रख दी। मैंने अपनी ज़बान उसकी चुत में डाल दी और उसे चाटने लगा। रागिनी मेरे मुँह पर कसकर बैठ गई और अपनी चुत को रगड़ने लगी। मेरी ज़बान उसके अंदर तक जा रही थी। वो मेरे मुँह को चोद रही थी। शबाना मेरे लंड पर काउगर्ल पोज़िशन में ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थी। उसकी गति बेतहाशा तेज़ हो गई। मैंने अपना सारा ज़ोर लगाकर उसे ऊपर की तरफ़ धकेला। शबाना फिर से झड़ने वाली थी। उसने मेरी छाती पर अपने नाखून गड़ा दिए और ज़ोर से चीखी, |अर्जुन बाबू… आआअह्ह्ह्हह… चुदवाकर मर गई…| और बेहोश सी होकर मेरे ऊपर गिर गई।
अब सिर्फ मेरी बारी थी। मैं शबाना को साइड में लिटाकर खड़ा हो गया। रागिनी ने देखा कि मेरा लंड अभी भी खड़ा है और उस पर शबाना का रस लगा है। मैंने रागिनी को बेड के कोने पर झुका दिया। उसकी गांड बाहर की तरफ़ थी और चुत खुली हुई थी। मैंने अपना लंड झटके से उसकी चुत में डाला। अब मुझे सिर्फ अपना माल निकालना था। मैं रागिनी को बुरी तरह चोदने लगा। मेरी गोलियाँ उसकी गांड से टकराकर ज़ोर की आवाज़ कर रही थीं।
|रागिनी, ले मेरा माल…| मैंने ज़ोर से चिल्लाकर कहा। मेरा पूरा शरीर तन गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना लंड उसकी चुत में पूरी तरह से ठूँस दिया। मेरे गोले सिकुड़े और ज़ोरदार धार के साथ मेरा वीर्य उसकी चुत के अंदर भर गया। रागिनी ने खुद को और पीछे धकेला, ताकि एक-एक बूँद उसके गर्भ में जाए। मैं वहीं ढेर हो गया। रागिनी भी बिस्तर पर गिर गई।
कमरे में सिर्फ हाँफने की आवाज़ें थीं और पसीने की खुशबू। शबाना एक तरफ़ लेटी हमें देख रही थी, उसके चेहरे पर एक संतोषजनक थकान थी। उसने धीरे से कहा, |थोड़ा पानी मिलेगा मेमसाब?| रागिनी ने हँसते हुए सिर उठाया और शबाना को गले से लगा लिया। दोनों नंगी, पसीने में भीगी हुई औरतें एक-दूसरे से लिपट गई थीं। मैं लेटे-लेटे अपना लौड़ा देख रहा था, जो अब ढीला पड़कर सिकुड़ रहा था और उस पर से मेरे और उनके रस टपक रहे थे।
रागिनी ने मुझसे कहा, |उठो, अब नहा लेते हैं तीनों एक साथ| हम तीनों बाथरूम में गए। ठंडे पानी की बौछार के नीचे हमने एक-दूसरे के शरीर को साफ़ किया। इस दौरान भी कई बार हाथ फिसलकर गुप्तांगों पर चले गए, और ठंडे पानी के बावजूद हम फिर से गर्म होने लगे। लेकिन अब शरीर में थकान ज़्यादा थी। नहाने के बाद हमने तीनों ने एक साथ एसी की ठंडी हवा में खाना खाया। शबाना अब वो कामवाली नहीं थी, बल्कि हमारे बेडरूम की रानी बन चुकी थी।
उस शाम शबाना घर गई तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। रागिनी ने उसे कुछ पैसे देते हुए कहा, |ये तुम्हारी मेहनत का इनाम है, और हाँ, कल जल्दी आना| शबाना शरमाकर चली गई। रागिनी सोफ़े पर मेरे सीने से लगकर बैठ गई। उसने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से बोली, |अर्जुन, आज मैंने बहुत अच्छे से चुदवाया। तुमने भी बहुत अच्छे से चोदा। पर अगली बार, शबाना का पूरा ध्यान रखना, उसे भी पूरा चुदक्कड़ बना देना| मैंने हँसते हुए उसके बाल सहलाए।
रात को सोते वक्त मैं सोच रहा था कि ये जो कुछ हुआ, वो सिर्फ एक शुरुआत है। इस Antarvasna3 की लहर में हम तीनों बह गए थे, और इस Sex Story का अगला अध्याय जल्द ही लिखा जाने वाला था। गर्मी की उस दोपहर ने सिर्फ पसीना नहीं बहाया था, हमारे रिश्तों की सारी सीमाएँ भी पिघला दी थीं। और मैं जानता था, कि अब ये सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला, क्योंकि रागिनी और मेरी भूख अब और गहरी हो गई थी, और शबाना भी अब हमारे इस खेल का एक अहम हिस्सा बन चुकी थी। बस यही थी मेरी ज़िंदगी की वो सच्ची कहानी जिसे मैं हमेशा छुपाता रहा, लेकिन अब जब लिख रहा हूँ तो वो पल फिर से जीवंत हो उठे हैं।

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