top of page

खालु और दामाद के रुप मैं मौसी और भतीजी कि चुदाई: Antarvasana

मैंने सभी पाठकों को मेरे जिंदगी मैं बीबी के गुज़र जाने बाद मेरे जिंदगी मैं आईं औरतों कि कहानी या यहां लिखी हैं।


पिछली कहानी" जब चुत को प्यास होती हैं वह लन्ड खोजतीं हैं" मैं आपने कमल कि कहानी पढ़ी। आप लोगों ने कहानी को बहुत प्यार किया इस लिए सभी पाठको का आभार अब आगे। मेरी सभी पिछली कहानियां पढ़ने के लिए मेरे नाम के ऊपर क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं ।


अब आगे


मैंने आपको फैजा और नगमा कहानी पिछे बताई थी। उसे बाद नगमा और मेरा रिश्ता अच्छा बढ़ गया था। उसके बाद जब मेरा कमल से संबंध बने थे, उसके बाद तीन महीने बाद फैजा ने मुझे शाम फोन किया और मिलने बुलाया । मैं और अनघा पुना से वापस हि आ रहें थे। तो मैं अनघा के साथ हि फैजा के पास गया।


फैजा ने मेरे साथ पहली बार किसी औरत को उसके घर आया देख वो परेशान हो गयी थीं। अनघा उसे बताया हम साथ थे जब आपका फोन आया तो हम साथ हि आ गये। फैजा ने घर मैं एक छोटी बच्ची खेल रहीं थीं। फैजा ने बताया पोती हैं। फैजा ने "हिबा बच्ची को अंदर ले जा" यह आवाज लगाई। हिबा आयी तो मुझे देखते देखते बोली "खाला, निलेश हैं ना" और अनघा दे कर बोली यह ? तो अनघा बोली "मैं अनघा हुं निलेश कि बेगम " । फैजा जैसे शाॅक हो गयी थीं।


फिर मैं और फैजा बाल्कनी मैं और बातें करने लगे। फैजा अनघा के बारे मैं बताया तो उसका टेंशन कम हुआ। फैजा तुम अकेले क्यूं नहीं आये पुछताछ कर रहीं थीं। मैं सीधे पुछ लिया "फैजा तुम मुझे हिबा के साथ सुलाना चाहती हो क्या" ? फौजा बोली " हां" । मैने अनघा को आवाज लगाई अनघा आते हि फैजा से बोली अब "हिबा ना" ? मैं बोला "हां"। अनघा बोली चलो हमें जाना हैं, फैजा जी मुझे भी अब यह सब ठिक नहीं लग रहा। बोहोत हो चुका हैं , मैं आप को सब बता नहीं सकती मग अब नहीं। फैजा बोली "उसे सब मालूम हो चुका हैं, नगमा और तुम्हारा" वह खुद तैयार हैं । उसकी ज़बान बंद करने के लिए प्लिज मना मत करों। यह मेरी आखरी विनंती। मैं और अनघा एक दुसरे को हि देख रहे थे।


मैंने फैजा घर मैं भेज दिया और नीलम, पुनम और अनघा छोटी आवाज मैं गाली देने लगा। यहां क्या चल रहा हैं। माना मेरी ग़लती हैं मगर अब क्या एक के बाद एक एक के बाद यहीं चलता रहैगा। अनघा बोली यहां नहीं अपने घर जाके बात करेंगे चलो। फैजा बोली खाना त्यार हैं । अनघा बोली मैंने घर पर भी बनाया हैं फिर कभी। मिलने बुलाया था आपने मिल लिए अब हम चलते हैं। मैं गाड़ी मैं अनघा बोहोत गालीया दे रहा था, अपने आप को भी दोषी दे रहा था। यह चल क्या रहा हैं एक सहारा दिया तो दुसरे को सुनकर कर रही थी, वो दोनों तीसरे से बदला लेने के लिए मुझे इस्तेमाल कर रही थी। फिर तिसरी भी बदला लेने के मेरा इस्तेमाल करती हि । अब तक बीबी के बाद बात औरत मेरे जिंदगी आयीं हैं । अब मुझे छोड़ दो मुझे अब यह सब अच्छा नहीं लग रहा । अनघा शांत थी। घर जाकर भी शांत थी।


हम दोनों खाना न खाएं सो गये। सुबह अनघा ने पहली बार मेरे निंद से जागा तो उठते हि मेरे पैर छुए और बोली "तुम अलग इन्सान हो"। नीलम, पुनम और मैं सच मैं ग़लत किया हैं मगर अब आगे नहीं होंगा। यह सब अब हमारे मैं हि खत्म होंगा आगे नहीं। मैं बाथरूम मैं था तब नीलम और पुनम भी अनघा घर आ गयी थीं। अनघा ने कल जो हुआ वह सब बताया। मैं बाथरूम से बहार आया तो नगमा भी आ गयी। मैं अनघा से बोला "अब फैजा, शोभा और कमल हि बाकी हैं वो अब आयेगी क्या ?"। अनघा बोली "उन्होंने नहीं बुलाया हैं "।


नीलम बोली "नगमा छोड़ हम तिनों को तुम्हारी जरुरत हैं, मैं मर जाऊंगी अगर तुम्हे छोड़ दिया तो"। मैं हंस रहा था। मैं बोला "बात तुम लोगों को छोड़ने नही हैं"। पुनम बोली हा अब आगे कोई भी नया हिस्से नहीं होंगा, हम सब अब आगे इस विषय मैं किसी को भी नहीं लाये गैं। अनघा बोली शोभा कि बात खत्म हैं। पुनम बोली मुझे मेरी बिमारी से ज्यादा बची जिंदगी सिर्फ तुम लोगों साथ बितानी हैं।


अनघा "बोली नगमा अब मेरे आना बात खत्म मिलना हैं तो नहीं तो छोड़ दो"। नगमा बोली " मेरी बहन हिबा का जब बच्चा चार महीने का पेट मैं था तब हि तलाक हो चुका हैं" अब उसका पंती चार साल बाद वापस शादी का बोल रहा हैं, तो हिबा को हलाला होंगा तो मेरी मां ने उसकी मानसिकता बदलने के लिए तुम्हारा इस्तेमाल करने का सोचा था। हिबा को तुम्हारे और मेरे बारे मैं किसी ने बताया नहीं एक रात उसने तुम्हें और मुझे देखा था अम्मी घर आते बंस और कुछ नहीं।


मैंने फैजा को फोन लगाया "फैजा बोली मैं कब दफ़न हो जाऊंगी मगर वापस ऐसा ख्याल नहीं लाऊंगी"। मैं बोला "हिबा के बाद सिलसिला खत्म होंगा याद रखना"। नगमा सब के सामने मुझे आकर चिपक गयी। अनघा बोली "अब नगमा तुम्हें और मुझे कुत्ता को झेलना हैं ? याद रखना । सब हंसने लगे । मैं बोला अनघा तुम अब सब बंद करों, बोहोत हो गया हैं अब"। इसमें पुनम बोली "मैं ठिक नहीं इस लिए नहीं तो "? अनघा बोली "मालुम हैं छोड़ती नहीं कुत्ता को, वापस सब हंसने लगे।


हम सब ने अब निश्चित किया कि जो अब तक हैं वहीं सब खत्म करना हैं। इससे आगे और कोई भी किसी से भी कुछ भी नहीं कहेगा। किसी और इन्सान को अब इसमें शामिल नहीं करना। नीलम बोली " नीलेश यह सब पुनम और मेरे कारण हुवा हैं"। अनघा बोली " किसी का नुक़सान हुआ नहीं हैं मगर बोहोत हो चुका हैं अब सब खत्म"।


नीलम, पुनम, अनघा और नगमा चारों सामान्य हो चुके थे। नगमा चाय नाश्ता कर के निकल गयी। मैं नीलम और पुनम अपने घर निकल लगे तो अनघा बोली "मुझे माफ़ कर देना मैंने भी बोहोत हि ज्यादा किया हैं"। पुनम बोलो "तुम हमेशा सब ज्यादा हि करती हैं, हमने जितना बिगाड़ा नहीं नीलेश को उससे ज्यादा तुमने बिगाड़ा हैं सब बारे मैं"। वापस सब हंसने लगे। मैंने अनघा बोला "चलो सब को क्या ग़लत हो रहा था पता चला मेरी जान बचीं"। हम घर निकल आये।


उस दिन बाद दो महीने तक सिर्फ नीलम, अनघा और कभी कभी कमल और नगमा से मिलता था। उस के बाद फैजा का फोन आया बोली नीलेश तुमने भुल गये, मैंने फैजा को "नहीं बोल दिया" मगर फोन हिबा बोलने लगीं बोली "हमें नीलम ने सब बता दिया हैं"। मैं बोला "तुम उससे शादी मत करो दुसरे इन्सान शादी करों लो"। मैंने फोन कट कर दिया। फिर रात को नगमा का फोन आया और नगमा बोली " नीलेश हिबा शादी भी दुसरे हि आदमी से करने वाली हैं, पर अब तुम्हें से हि" । मैं बोला "समझ गया"। मैंने अनघा से बात की अनघा बोली "फ़ैसला तुम्हें लेना हैं मैं अब बीच नहीं आऊंगी"।


मेरा मन एक निर्णय नहीं ले पा रहा था। एक महिना हि गया। अनघा भी अब सलाह दे नहीं रहीं थी । मैंने नगमा से मिलने के लिये फोन किया तो नगमा बोली "मेरा घर मेरे पती से मेरा झगड़ा हुआ हैं, आज नहीं बाद मैं कभी मिलेंगे"। तो मैंने हि खुद हि फैजा को फोन किया और मिलने आ रहा हुं बोला। फैजा घर जानें से पहले मैंने अनघा को फोन किया और "फैजा के यहां जा रहा हुं" बोला दिया। अनघा बोली "तीन महीने पहले मैं भी यह भी बोलने वाली थी तुम हिबा से मील दो", "मगर सब बातें बोहत हो चुकी थी, इस लिए मैंने भी कुछ नहीं बोला" । अनघा बोली "फैजा और हिबा को बात खत्म कर के आना वापस उस गली मैं जाना नहीं हैं यह याद रखना। मैं बोला "समझ गया"।


मैं शाम को बस से फैजा के घर गया। दरवाजा हि हिबा ने खोला। हिबा बोली "बोहोत हि देर लगा दि आने मैं आपने हमें बोहत इंतजार करना पडा"। मैं हिबा से बोला "खाला कहा हैं"। हिबा हंस पड़ी मुझे कुछ समझ मैं नहीं आया कि हिबा हंसी किस कारण । हिबा ने जवाब दिया "बाजार गयी हैं आ जायेंगी"। मैं सोपा सेट पर जाकर बैठ गया और हिबा को देखने लगा। हिबा पच्चीस छब्बीस साल थी। फैजा कि बहन कि लड़की थी। हिबा ने सलवार पहना था। चुडिदार इतना फिट था कि, हिबा कि पुरे बदन को दिखा रहा था।


हिबा मेरे लिए चाय, दुध और खारी ले कर आयी बोली खाला ने खाने तैयारी करने को बोला हैं कुछ जरुरत हो तो आवाज देना। मैं बोला यहां बैठो मुझे बातें करनी हैं। मैंने हिबा को उसकी सारी पुरानी बातों कि पुछताछ कि, उसने भी सभी जवाब दिये। उसके पती को उसपे भरोसा हि नहीं था। उसने चार बच्चों को गिराया था कारण वो बच्चे उसके नहीं हैं यह वो शक करता था। जो लड़की हुई हैं वो चार महीने पेट मैं थी तब भी शक लिया था। गिराना असंभव था तो तलाक हि दे दिया। मैं सब सुनकर हि सुन्न था। हिबा भी भावुक हो चुकी थी। इतने मैं डोअर बेल बजीं, हिबा ने दरवाजा खोला फैजा और हिबा कि बच्ची आ चुकी थीं।


फैजा ने हाथ का सामान हिबा को दिया और मेरे पास आकार बैठ गयी। फैजा ने हिबा को खाना बनाने को बोल दिया। फिर फैजा ने नगमा कि और उस के पती के झगड़े कि बात बताई। मैंने बोला मुझे मालुम हैं मैंने फोन किया था। रात के आठ बज रहे थे। मुझे बाथरूम जाना था मैंने फैजा बोला तो फैजा बोली तुम जैसे नये घर मैं आये हो। मैं बेडरूम गया तो फैजा भी मेरे पिछे आ गयी। फैजा बोली तुम्हारे लिये मैं नाईटी और टि शर्ट ले आयी हुं वह पहन लो। मैंने अपने कपड़े निकाले उतारें निकर पर मैं बाथरुम चला गया। फैजा बेडरूम हि थी । बाथरूम का दरवाजा भी खुला था । फैजा और मैं बातें भी कर रहे थे । हिबा बेडरूम आयी और आवाज आयी "खाला" मगर आगे मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया। मैं नहा धोकर बाहर आया तो हिबा कपड़े बदल रही थी। फैजा बेडरूम मैं नहीं थी।


हिबा चुड़ीदार निकाल रही थी, उपर कुर्ता निकाल चुकी थी। हिबा ने चुड़ीदार निकाला तो हिबा सिर्फ ब्रा और निकर पर थी। मैं हिबा से बोला "फैजा कब गयी पता नहीं चला"। हिबा मेरे तरफ देखने लगी तो मैं लन्ड सहला रहा था। हिबा ने बेड पर का गाऊन उठाया तो मैं हिबा के नजदीक गया और हिबा को बाहों में भर लिया। बाहों मैं भरते हि मैने हिबा के ब्रा निकाल दिये। हिबा के बदन को सहलाने लगा। हिबा शांत खड़ी थी। मैंने हिबा के बालों को खोला, मैं हिबा के निकर को निचे सरकाया। हिबा ने फिर झुक कर अपने हाथों से निकर को निचे किया, तब तक मैं अपने कमर का टावल खोला।


मैं पुरा नंगा और हिबा भी पुरी नंगी थी। फैजा किचन से बोल रही थी, "खाना तैयार हो गया हैं"। हम दोनों को सिर्फ एक दुसरे को चिपकर चुम रहें थे। फैजा बेडरूम मैं आ गयी और देखा हिबा और मैं चिपके हुए हैं तो फैजा बोली "हिबा तु तो चिपक गयी"। मैंने हिबा को बेड पर सुलाया और मैं भी बेड पर चला गया। हिबा लन्ड को देख रही थी। फैजा बोली "नील अब हम दस बारा दिन जानें नहीं देने वाले इसलिए आराम से"। मैंने हिबा के चुत पर को हाथ से दबाया और बोला "तीन महीने से बोहोत सोचने बाद फैसला किया हैं फैजा चिंता मत करो"।


मैंने हिबा को पेशाब करके आने बोला तो हिबा नंगी हि बाथरूम गयी। मैं बेड उठकर नंगा हि फैजा और गया तो फैजा बोली पड़ी "बोहोत तंग किया हैं तुम्हारे लिये हिबा ने यह ध्यान रखना"। मैं फैजा के पास गया तो उसने लन्ड को भैंस से सड को सहलाते वैसे सहला और दबाया। मैं फैजा को भी अपने और खिंचा तो बोल नहीं। तो मैं बेड और गया हिबा बाथरूम से आयी तो मैंने हिबा को चिपक गया। हिबा को बेड पर सुलाया, हिबा के पैरों को बेड के नीचे छोड़ दिया।


हिबा कि चुत बड़ी थी। उसकी प्राकृत डिलेवरी हुं थी बच्ची की। मैंने हाथ से चुत पहले दबाया फिर चुत का मुंह उंगलियों से खोला और एक उंगली को चुत के अन्दर डाल चुत को सहलाया। फिर दुसरी उंगली को अन्दर डाल दिया। चुत के अन्दर पेशाब कि जगा और चुत अन्दर का बार-बार उंगली से चोदने लगा। एक हाथ कि उंगलियों को हिबा कि दोनों जांघों और कंबर को सहलाता रहा। हिबा पुरी उत्तेजित हो चुकी थी। बार-बार अपनी कंबर उठा रही थी। मैंने अपने उंगलियों को चुत मैं जी पाईट पर बार-बार उपर नीचे करता रहा तो हिबा नील नील करते आहे भर पानी छोड़ चुकी थी।


मैंने हिबा के बेड पर सरकाया। दोन तकिये हिबा के कमर के नीचे लगाये। हिबा दोनों पैर फैलाये और चुत पर लन्ड को रगड़ शुरू किया। फैजा देख रही थी । मैं हिबा के चुत एक हाथ से लन्ड रगड़ता और दुसरे हाथ से हिबा के स्तन दबाता। हिबा कि स्तन मैं दुध भी था। मैं निप्पल को उंगली से दबाता फिर स्तनों को जोर से दबाया। अब हिबा वापस अपनी कमर उठाने लगी थी, मैंने लन्ड चुत पर रगड़ा हि था रहा था। हिबा बोली डाल दो ना अब क्या तड़पाकर मारोगे । हिबा ने खुद हि हाथ मैं लन्ड दिया और चुत के मुंह मैं लन्ड का चमड़ा पिछे कर डाल दिया।


मैंने हिबा कि कमर कस कर पकड़ी और पुरा जोर लगाकर लन्ड चुत मैं गाड दिया। हिबा "ऊं मां" कहकर चिल्लाई। मैंने अपना बदन हिबा के बदन पर डाल दिया। मिशनरी पोजीशन मैं मैंने हिबा को आगोश मैं भर लिया। मैंने हिबा के मुंह को मुंह मैं लिया और जीभ हिबा को चुसने को दिया हिबा भी अब मेरी जीभ चुसती और मुझे जीभ चुसने के लिए अपनी जीभ मुझे मेरे मुंह मैं भेजती। जब हिबा मुझे जीभ भेजने लगी तब मैंने कमर को उठाकर लन्ड को थोड़ा बाहर खींचा और जोर देकर वापस लन्ड को चुत मैं गाड दिया। हिबा इस बार तैयार थी सिर्फ आउच कि आवाज आई।


मैंने हिबा कि पोजीशन हि चेंज नहीं की मिशनरी पोजीशन मैं हि मैने हिबा को चोदते रहा। हिबा स्तनों से मैं निचोड़ निचोड़ दुध पिया। फैजा सब देख कर गरम हो चुकी थी, मगर समझ चुकी थी, मैं अब हिबा का छोडुंगा नहीं, इसलिए निकल गयी थीं। हिबा कि चुत अच्छी चुदाई बाद, हिबा वापस पानी छोड़ चुकी थी, तो मैंने हिबा से दुर हो गया और उसके बगल मैं सो गया। हिबा के बदन पसीना पसीना हुआ था। हिबा पांच मिनट शांत पड़ी रही और फिर मेरे बदन पर चढ़ गयी। मेरे माथे को चूम कर हिबा "क़बूल क़बूल क़बूल" बोली रहीं थी। मेरे लन्ड पर अपनी चुत दबाकर मेरे कमर पर बैठ गयी।


हिबा ने खुद हि लन्ड हाथ से सीधे खड़ा कर उसपर चुत का मुंह लगाकर सीधे पुरा लन्ड चुत मैं गांड लिया। दस मिनट हिबा बड़े हि प्यार से मुझे उपर से चोदती रही। फिर उठकर मेरे पैरों और मुंह कर वापस अपने चुत मैं लन्ड डालकर धीरे-धीरे ऊपर नीचे करने लगी। मेरे लन्ड अब पानी छोड़ने वाला था। मैंने हाथों से हिबा के कुल्हा दबा रहा था, मैं ने हिबा कि कमर अच्छी पकड़कर नीचे से उपर कमर उठा उठा कर लन्ड को चुत मैं डालना शुरू किया था। हिबा आहे भर भर चुत चुदवा रही थी। हिबा का वापिस पानी छुटा मैं हंस पड़ा और मेरा भी पानी निकल गया। दोनों भी शांत हो चुके थे। हिबा ने कमर उठाकर लन्ड को निकाल दिया और बेड पर मेरे पैरों के बगल मैं सो गयी। मैं भी वैसे हि सो गया।


रात को ग्यारह बजे फैजा आईं और हमें उठाया। हिबा उठने को भी तयार नहीं थी, पर उसे भी उठाया और हम तीनों ने खाना खाया। हिबा खाना जल्दी जल्दी खा कर सोने को निकलने लगी थी। फैजा बोली "बेटा इतनी भी क्या जल्दी हैं"। हिबा बोली "खाला अब दामाद को खालु बना लो मैं सोने को जा रही हुं"। फैजा बोली "हिबा तुम भी ना"। मैं बोला "मतलब"। हिबा बोली "खाला तुम मतलब समझा वो मैं सोने जाती हुं"।


हिबा ने सोयी हुईं बच्ची को लिया और सोने को चली गयी। मैंने फैजा से पुछा "हिबा क्या बोल रही थी"। फैजा हंस पड़ी और बोली "अभी तुम बेटी के साथ थे, तो दामाद थे, अब मेरे साथ होंगें तो खालु हो गये", समझे। मैं बोला इसलिए हि मैं आया और खाला कहा हैं पुछा था तो हिबा हंस रही थी। खाना खाने बाद मैं और फैजा बातें करतें बैठ गये। फैजा ने हिबा कि बाताई बातें और हिबा कि बातें दोनों समान थी इसलिए हिबा सच बोल रही थी, बारा बजे थे।


फैजा गाऊन पर थी। अंदर कुछ भी नहीं पहना था। उस के स्तन मुझे कब से बुला रहे थे, मैं घर की सब लाईट बंद कि और फैजा को पकड़ लिया था। फैजा बोली रुको अभी आती हुं। फैजा बेडरूम मैं गयी और दो तकिया, कंबल लेकर आई, किचन से पानी बोतलें और पान डबा ले आयी। मैंने तबतक नाईटी और टि शर्ट निकाल दिये। फैजा ने पान तयार किया और पुरा पान खुद खाकर गाउन निकल कर मेरे पास आकर बैठ गयी। मैंने फैजा के बालों मैं हाथ डालकर सर को पकड़ा लिया और फैजा के मुंह को मुंह लगया दोनों ने पान को चबा चबा कर एक दुसरे के मुंह डाल डाल कर खाया। पान खाने बाद हि मैने फैजा का मुंह छोड़ा।


फैजा खुश हो गयी थीं। फैजा बोतल से थोड़ा पानी पिया और लन्ड को पकड़ लिया। मैंने भी फैजा के चुत को सहला शुरू किया। दोनों हि उनहत्तर सेक्स पोजीशन एक दुसरे को चिपकर उत्तेजित करने लगे। फैजा बोल रही थी " नील तुमने हिबा के चुत को चुमा भी नहीं" । मैं बोला "तुम हि बोली थी ना अब दस बारा दिन हैं आराम से" इसलिए। फैजा अपना पानी छोड़ चुकी थी और मुझसे चुत चटवा कर साफ़ भी करवा चुकी थी। मेरा लन्ड तैयार हो चुका था। लन्ड को तैयार देख फैजा पैर फैला कर सो गयी थीं।


मैंने फैजा उठाकर सोफ़ा सेट बिठाया और घुटनों बल बैठकर लन्ड को चुत पर लगया। तभी मैंने देखा कि हिबा सब देख रही थी। फैजा ने भी देखा हिबा को। फैजा बोली "अब खालु खाला कि कैसे बजाते हैं देखने आयी हैं क्या ?, नींद नहीं आयी क्या ? हिबा बोली "नहीं निंद हि नहीं आ रही थी"। मैंने फैजा को चुटकी निकाली और फैजा छोड़, हिबा और निकला तो हिबा भागकर बेडरूम जाने लगी मैंने हिबा को पकड़कर उठाकर ले आया। हिबा सोफ़ा पर उलटा सुलाया, गाऊन को उपर किया निकर को निकल फेंकी। हिबा के कुल्हा चुतड और चुत को हाथों से सहलाने और दबाने लगा।


हिबा एक पैर को सोफ़ा सेट के उपर घुटनों मैं मोड़ लाड दिया । लन्ड को चुत पर सेट किया हिबा को घोड़ी बनाकर दबाकर चोदता रहा। हिबा इस बार दर्द महसूस कर रही थी। पांच मिनट बाद हिबा अब आहे भरने लगी थी और गर्म हो चुकी थी। मैं पुरा लन्ड अन्दर डालता और पुरा बाहर निकाल दस मिनट चुदाई बाद जब हिबा ने पानी छोड़ा तो मैंने हिबा छोड़ा दिया और फैजा और गया। बोतल उठाई लन्ड पर पानी डाला साफ किया और फैजा के चुत मैं लन्ड गाड़ दिया। फैजा पहले पानी छोड़ चुकी थी इसलिए पाच मिनट सोफ़ा सेट पर चुदाई के बाद मैं निचे क़ालीन पर सो गया। फैजा उठकर मेरे उपर आ गयी।


हिबा वैसे हि सोपा सेट पर सीधे हो कर सो गयी। हिबा बोल रही थी "मुझे हि बोहोत खुजली थी, जो देखने आ गयी, और खुद कि हि मरवा ली। मैं और फैजा हंस रहे थे। फैजा ने लन्ड को अपने चुत मैं डाल कर दस मिनट तक चुदवा और मेरा भी पानी निकला और खुद का भी आत्मा तृप्त कर मेरे उपर सो गयी।


तीन महीने चल रही मेरी मन कि चलबीचल शांत हो चुकी थी। मैं लगभग देड महिना भर फैजा और हिबा के साथ था। हिबा कि महावारी बंद हो चुकी थी यह समझ मैं आने तक मैंने हिबा चुत और पिछवाड़ा पुरा खोल दिया था। हिबा अब लन्ड को चुसना और लन्ड से खेलना भी सिख चुकी थी। हिबा अब सभी आसनों मैं सेक्स कर रही थी। हिबा को महावारी आयी नहीं यह फैजा को समझ आया था ।


मेरा बच्चा हिबा के पेट मैं था । हिबा कुछ अलग हि सोचने लग गयी थीं, पर मैं और फैजा ने उसे समझाया और बच्चा गिराया। मैंने वहां से निकलते वक्त हि दोनों को बताया था कि अब वापस मैं मिलने नहीं आऊंगा। फैजा भी थोड़ी नाराज थी मगर ओ समझ चुकी थी यह रिश्ता ठिक नहीं। अब हिबा कि शादी हो चुकी हैं। फैजा और नगमा अब साथ मैं रहते हैं।


तो कैसी लगी मेरी खालु और दामाद के रुप मैं मौसी और भतीजी कि चुदाई कहानी मुझे जरूर बताना।


अगली कहानी जल्द हि आपके लिए ले आऊंगा।


तो कैसी लगी कामवासना के पाठको मेरी कहानी मुझे प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.

आपका निलेश लोंके


Antarvasana

Recent Posts

See All
देवरानी अपने सेटिंग से मिलकर जेठानी की प्यास बुझाई : Hindi Sex Stories

सुमन शान्त रह, संभोग आनंद लें रहीं थीं। मैं निचे से सुमन को चोदता और सुमन मुझे उपर से चोदती, दस मिनट तक मैं इसी तरह सुमन कि चुदाई करता रहा, सुमन कुछ नया आनंद ले रही थी। सुमन के नितंबों को मैंने हाथ से

 
 
 
चाचाजी ने चुदाई करना सिखाया : Antarvasana

जब मैं और नितिन अमरीका में थे तो नितिन के दोस्त के चाचा जी का हमारे घर आना हुआ। वो अमरिका घूमने आये थे, तो हमारे घर में ही रुके।होली के दिन चाचा जी ने जेब से गुलाल निकालकर मेरे सीने पर मारा और बोले"इन

 
 
 

Comments


Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Desi Stories, Antarvasna, Free Sex Kahani, Kamvasna Stories 

कामवासना एक नोट फॉर प्रॉफिट, सम्पूर्ण मुफ्त और ऐड फ्री वेबसाइट है।​हमारा उद्देश्य सिर्फ़ फ्री में मनोरंजन देना और बेहतर कम्युनिटी बनाना है।  

Kamvasna is the best and only ad free website for Desi Entertainment. Our aim is to provide free entertainment and make better Kamvasna Community

bottom of page