परिवार में ही ससुर बहू की चुदाई देख सभी ने बजाई ताली: Hindi Sex Stories
यह कहानी है मेरे अपने परिवार की, जहाँ एक अजीब सी घटना ने सबके बीच की सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। मेरा नाम अर्जुन है और मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में रहता हूँ। हमारा संयुक्त परिवार है जिसमें मेरे पिताजी, मेरी माँ, मेरी पत्नी, मेरे चाचा-चाची और उनके बच्चे सब साथ रहते हैं। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हूँ और मेरी पत्नी रोशनी एक स्कूल में टीचर है। मेरे पिताजी का नाम महेंद्र सिंह है और वे रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हैं। शुरू से ही हमारे घर का माहौल बहुत खुला और आधुनिक विचारों वाला रहा है, पर उस दिन जो हुआ उसने मेरी सोच को पूरी तरह बदल दिया।
रोशनी से मेरी शादी को अभी दो साल ही हुए थे। वह बेहद खूबसूरत, समझदार और सबका दिल जीतने वाली औरत है। उसकी उम्र 26 साल है और उसका शरीर ऐसा है कि कोई भी मर्द उसे देखकर अपनी नजरें नहीं हटा पाता। लंबे काले बाल, गोरा रंग, भरी हुई छातियाँ और पतली कमर — वह सच में किसी अप्सरा से कम नहीं लगती। मेरे पिताजी उम्र में 52 साल के हैं लेकिन अपनी फिटनेस की वजह से 40 के लगते हैं। उनकी कद काठी जबरदस्त है और रिटायरमेंट के बाद भी वे रोज सुबह जिम जाते हैं। माँ का स्वर्गवास मुझे बचपन में ही हो गया था, इसलिए पिताजी ने मुझे अकेले ही पाला और पढ़ाया-लिखाया। अब रोशनी के आने के बाद उन्हें भी एक बेटी का साथ मिल गया था और वे उसे बहुत प्यार करते थे।
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घर का माहौल अक्सर हंसी-मजाक से भरा रहता था। रोशनी पिताजी का बहुत ख्याल रखती थी, उनके खाने-पीने से लेकर उनकी दवाइयों तक का ध्यान रखती थी। पिताजी भी उसे अपनी बेटी की तरह मानते थे और कभी-कभी उसके लिए बाजार से साड़ियां और कपड़े भी लाते थे। मुझे यह सब देखकर बहुत अच्छा लगता था कि घर में सब कितने प्यार से रहते हैं। लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह प्यार एक दिन ऐसे मोड़ पर पहुंच जाएगा जिसने हमारी पूरी जिंदगी बदल दी। उस दिन की घटना ने साबित कर दिया कि अन्तर्वासना की कोई सीमा नहीं होती और वह कभी भी, कहीं भी, किसी भी रिश्ते में जन्म ले सकती है।
वह दिन मुझे आज भी याद है जब सब कुछ बदल गया। हफ्ते का आखिरी दिन था और घर में सब लोग मौजूद थे। शाम को हम सब लोग छत पर बैठे थे और ठंडी हवा का मजा ले रहे थे। पिताजी ने कहा कि आज वे कुछ स्पेशल खाना बनाना चाहते हैं और रोशनी उनकी मदद करेगी। मैं और मेरे चाचा जी नीचे बैठक में टीवी देख रहे थे जबकि चाची जी और बच्चे बाजार गए हुए थे। रोशनी और पिताजी रसोई में थे और उनकी हंसी की आवाजें हमें बैठक तक आ रही थीं। मुझे लगा कि वे दोनों खाना बनाने में मस्त हैं और मैं भी टीवी देखने में खो गया।
करीब एक घंटे बाद मुझे प्यास लगी तो मैं रसोई की तरफ पानी लेने गया। जैसे ही मैंने रसोई का दरवाजा धीरे से खोला, मेरे पैर वहीं जम गए। अंदर का नजारा देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। मैंने जो देखा वह मेरी सोच से परे था। रोशनी की साड़ी का पल्लू पूरी तरह से खुला हुआ था और उसकी छातियाँ पिताजी के हाथों में दबी हुई थीं। पिताजी ने अपनी शर्ट निकाल दी थी और उनका मजबूत शरीर पसीने से चमक रहा था। रोशनी उनके गले लगी हुई थी और उनके होंठ आपस में जुड़े हुए थे। मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था। मैं दरवाजे के पीछे छिपकर यह सब देखने लगा, मेरी सांसें थम गई थीं और मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई।
मैंने सोचा था कि मैं अंदर जाकर उन्हें रोकूंगा, लेकिन मेरे अंदर कुछ और ही चल रहा था। मेरा लंड मेरी पैंट में तनकर खड़ा हो चुका था और मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका था। पिताजी रोशनी की गर्दन चूम रहे थे और रोशनी की आंखें बंद थीं, उसके मुंह से धीमी सिसकियां निकल रही थीं। वह पिताजी के बालों में हाथ फिरा रही थी और उन्हें अपनी तरफ खींच रही थी। पिताजी ने धीरे से उसका ब्लाउज उतारा और उसकी भरी हुई छातियों को अपने मुंह से चूसने लगे। रोशनी जोर से आहें भर रही थी और उसके मुंह से आआह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… की आवाजें आ रही थीं।
मैं वहां से हिल नहीं सका। मेरी अपनी पत्नी को मेरे पिता के साथ इस हालत में देखकर मेरे अंदर गुस्से और उत्तेजना का एक अजीब सा मिश्रण बन गया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। पिताजी ने रोशनी की साड़ी को पूरी तरह से उतार दिया और अब वह सिर्फ अपनी पेटीकोट में थी। उसका गोरा बदन रसोई की रोशनी में चमक रहा था और उसकी जांघें दिखाई दे रही थीं। पिताजी ने उसे रसोई के स्लैब पर बैठा दिया और उसकी जांघों के बीच अपना चेहरा कर दिया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या देख रहा हूँ। पिताजी रोशनी की चूत को अपनी उंगलियों से सहला रहे थे और रोशनी की आंखें मजे से बंद हो गई थीं।
उसके बाद पिताजी ने अपनी पैंट भी खोल दी और उनका बड़ा सा लण्ड बाहर निकल आया। रोशनी ने उसे अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरी पत्नी इतनी आजाद ख्यालों की है। उसने पिताजी के लौड़े को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी। पिताजी उसके बाल पकड़कर उसे और अंदर करने की कोशिश कर रहे थे। यह सब देखकर मेरा लंड फटने को आ रहा था। रोशनी की चूत से रस टपक रहा था और पिताजी उसे अपनी उंगलियों से अंदर तक उंगलियां कर रहे थे। रोशनी के मुंह से बार-बार आआअह्ह्ह्हह की आवाजें निकल रही थीं।
तभी मुझे किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि मेरे चाचा जी और चाची जी भी रसोई की तरफ आ रहे थे। मैंने जल्दी से खुद को संभाला और एक तरफ छिप गया। चाचा जी ने दरवाजा खोला और अंदर का नजारा देखकर वे भी वहीं ठिठक गए। चाची जी ने उनका हाथ पकड़ लिया और उनके कान में कुछ फुसफुसाया। दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर धीरे से मुस्कुराए। मुझे यह सब बहुत अजीब लग रहा था। लगता था कि यह सब पहले से तय था और घर के बाकी लोगों को इसकी जानकारी थी।
चाचा जी ने धीरे से दरवाजा और खोला और अंदर चले गए। चाची जी ने भी उनका पीछा किया। मैं अभी भी बाहर खड़ा देख रहा था। रोशनी और पिताजी ने अब अपनी हरकतें तेज कर दी थीं। पिताजी ने रोशनी को स्लैब से उठाकर नीचे खड़ा किया और उसे झुका दिया। फिर उन्होंने अपना लंड उसकी चूत के दरवाजे पर रखा और धीरे से अंदर डाल दिया। रोशनी जोर से चीखी — आआह्ह्ह… पिताजी… धीरे से… उसकी चूत में पिताजी का पूरा लंड समा गया और उन्होंने उसे जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। रोशनी के मुंह से बार-बार आआह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… मजा आ रहा है… की आवाजें आ रही थीं।
चाचा जी और चाची जी दोनों अब पिताजी और रोशनी के पास खड़े होकर उन्हें देख रहे थे। चाची जी ने अपनी साड़ी का पल्लू उठाकर अपनी छातियाँ दबानी शुरू कर दीं और चाचा जी ने अपनी पैंट खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया। चाची जी उसे हाथ से सहलाने लगीं। मैं यह सब देखकर हैरान था कि मेरे घर में इस तरह की अन्तर्वासना पनप रही है और सब इसमें शामिल हैं। मैं भी अब अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। मेरा लंड मेरी पैंट में तड़प रहा था और मैं चाहता था कि मैं भी अंदर जाकर इसमें शामिल हो जाऊं।
मैंने हिम्मत जुटाई और दरवाजा खोलकर अंदर चला गया। मुझे देखकर किसी ने कुछ नहीं कहा, बल्कि सब मुस्कुरा दिए जैसे मेरा स्वागत हो रहा हो। रोशनी ने मुझे देखा और उसकी आंखों में शरारत थी। वह बोली — |अर्जुन, आओ ना… तुम भी मेरे साथ आओ…| उसकी आवाज में ऐसी मिठास थी कि मैं उसे मना नहीं कर सका। पिताजी ने रोशनी को चोदना जारी रखा और मैंने अपनी पैंट उतार दी। मेरा लंड सबके सामने खड़ा था और रोशनी ने उसे अपने मुंह में ले लिया। वह एक साथ पिताजी का लंड अपनी चूत में ले रही थी और मेरा लंड अपने मुंह में। यह मेरे लिए एक नया अनुभव था और मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था।
चाचा जी भी अब अपनी पत्नी को चोदने लगे थे। चाची जी ने अपनी साड़ी उठा दी थी और चाचा जी उन्हें खड़े-खड़े पीछे से चोद रहे थे। पूरी रसोई में चोदने की आवाजें गूंज रही थीं। रोशनी के मुंह से निकलती आहें, पिताजी के धक्कों की आवाज, चाची जी की चीखें — सब मिलकर एक अजीब सा संगीत बना रहा था। मैंने रोशनी के बाल पकड़कर उसके मुंह में अपना लंड और अंदर तक धकेल दिया। वह गटक-गटक कर उसे चूस रही थी और मुझे लग रहा था कि मैं कभी भी झड़ जाऊंगा।
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पिताजी ने रोशनी को अब दूसरी पोजीशन में लिटा दिया। उन्होंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और उसकी चूत में अपना लंड और गहराई तक घुसा दिया। रोशनी जोर-जोर से चिल्ला रही थी — आआह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… और गहरा… और तेज… पिताजी भी उसे पूरी ताकत से चोद रहे थे। मैंने रोशनी की छातियों को अपने हाथों से दबाना शुरू कर दिया और उसके निप्पल चूसने लगा। रोशनी का शरीर पसीने से भीग चुका था और उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं।
चाचा जी ने अपनी पत्नी को नीचे बैठा दिया और उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया। चाची जी उसे जोर-जोर से चूसने लगीं। फिर चाचा जी ने उसे उठाकर स्लैब पर बैठा दिया और उसकी चूत में अपनी उंगलियां डालने लगे। चाची जी की चूत से रस बह रहा था और वह बार-बार चाचा जी का नाम लेकर चिल्ला रही थीं। मैंने देखा कि मेरी चाची जी कितनी गर्म हैं और उन्हें चुदाई की कितनी भूख है।
अब मुझे भी रोशनी की चूत में अपना लंड डालने का मन कर रहा था। पिताजी ने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, मैंने तुरंत अपना लंड रोशनी की चूत के अंदर डाल दिया। वह बहुत गर्म और गीली थी। रोशनी ने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे जोर से चोदने के लिए कहने लगी। मैंने उसे पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी और मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं उसे अलग-अलग तरीकों से चोद रहा था — कभी सीधा, कभी उल्टा, कभी उसकी टांगें उठाकर, कभी उसे घोड़ी बनाकर।
पिताजी ने अब रोशनी के मुंह में अपना लंड डाल दिया। रोशनी एक साथ मेरा लंड अपनी चूत में और पिताजी का लंड अपने मुंह में लेकर पूरी तरह से चुदवाने में लगी थी। वह एक चुदक्कड़ औरत की तरह व्यवहार कर रही थी और उसे दो-दो मर्दों के साथ मजा करने में कोई शर्म नहीं आ रही थी। उल्टा उसकी चाहत और बढ़ती जा रही थी। वह बार-बार कह रही थी — |मुझे और चोदो… मैं कमीनी हूँ… मुझे तो बहुत मजा आ रहा है… मेरी चूत में और लंड डालो…| उसकी ये बातें सुनकर हम सब और भी गर्म हो गए।
चाची जी भी अब पिताजी के पास आ गईं और उन्होंने पिताजी का लंड पकड़ लिया। वे बोलीं — |महेंद्र भैया, मुझे भी चोदो ना… मैं भी बहुत दिनों से तुम्हारे साथ सोना चाहती हूँ…| पिताजी ने चाची जी की साड़ी उतार दी और उन्हें नीचे लिटाकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। चाची जी जोर से चीखीं — आआअह्ह्ह्हह… भैया… तुम्हारा लंड कितना मोटा है… मेरी चूत फट रही है… पिताजी ने उन्हें जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। चाचा जी यह देखकर बहुत खुश हो रहे थे और अपना लंड हिला रहे थे।
मैंने रोशनी को स्लैब पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगें खोलकर उसकी चूत को अपने मुंह से चूसने लगा। उसकी चूत से मीठा सा रस निकल रहा था और मैं उसे पी रहा था। रोशनी मेरे बाल खींच रही थी और कह रही थी — |हाँ अर्जुन… ऐसे ही… मेरी चूत चाटो… मुझे बहुत मजा आ रहा है…| मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाली और उसे अंदर तक चाटने लगा। रोशनी की कमर ऊपर उठ रही थी और वह बार-बार चरम सुख के करीब पहुंच रही थी।
अब घर में सभी लोग इस चुदाई में शामिल हो चुके थे। पिताजी चाची जी को चोद रहे थे, चाचा जी रोशनी के मुंह में अपना लंड डाल रहे थे और मैं रोशनी की चूत चाट रहा था। यह एक साथ कई लोगों की चुदाई थी और सब एक दूसरे के साथ मस्त थे। किसी को कोई शिकायत नहीं थी, कोई जलन नहीं थी, बस सबको एक दूसरे के साथ यौन संबंध बनाने में मजा आ रहा था। मैंने सोचा कि शायद इसी को आधुनिक परिवार कहते हैं जहाँ सब अपनी इच्छाओं को खुलकर जीते हैं।
रोशनी अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और उसका शरीर पसीने से लथपथ था। उसकी छातियाँ हिल रही थीं और उसकी चूत पूरी तरह से खुली हुई थी। चाचा जी उसके पीछे खड़े होकर उसकी गांड में अपनी उंगलियां डाल रहे थे जबकि मैं उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था। रोशनी को दोनों जगहों से मजा आ रहा था और वह जोर-जोर से चिल्ला रही थी — |हाँ… मुझे दोनों जगह से चोदो… मेरी चूत और गांड दोनों में लंड डालो…| मैंने उसे और जोर से चोदा और चाचा जी ने उसकी गांड में अपनी उंगलियां और गहरी कर दीं।
पिताजी ने चाची जी को भी अब चारों तरफ से घेर लिया था। उन्होंने चाची जी की गांड में अपना लंड डाल दिया और चाची जी की चीखें पूरे घर में गूंजने लगीं। चाची जी पहले कभी किसी और मर्द के साथ नहीं सोई थीं, लेकिन उस दिन उन्होंने पिताजी के साथ पूरी तरह से हदें पार कर दीं। वे खुद पिताजी के लंड को अपनी गांड में लेकर उछल रही थीं और उनके मुंह से आआह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… की आवाजें बिना रुके निकल रही थीं।
मैंने रोशनी को अब अपनी गोद में उठा लिया और खड़े-खड़े उसे चोदने लगा। उसकी टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं और मेरा लंड उसकी चूत में पूरी गहराई तक जा रहा था। रोशनी मेरे गले से चिपकी हुई थी और मेरे कंधे पर बुरी तरह से चूस रही थी। मेरी गर्दन पर उसके दांतों के निशान पड़ गए थे। मैं भी उसे पूरी ताकत से उछाल-उछाल कर चोद रहा था। उसकी चूत से रस की धारा बह निकली और मेरे लंड पर पूरी तरह से फैल गई।
चाचा जी ने अब मेरी चाची जी को अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें भी उसी तरह चोदने लगे। दोनों जोड़े अब रसोई के बीचों-बीच खड़े होकर एक दूसरे को चोद रहे थे। पिताजी बीच-बीच में रोशनी के पास आकर उसके मुंह में अपना लंड डाल देते और फिर चाची जी की चूत में लगा देते। यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। किसी को होश नहीं था कि कितना समय बीत गया है। बस सब एक दूसरे के शरीर में खोए हुए थे।
रोशनी की चूत अब पूरी तरह से लाल हो गई थी और उसमें से झाग जैसा निकल रहा था। वह थक चुकी थी लेकिन फिर भी चुदवाना नहीं छोड़ रही थी। उसकी भूख इतनी बढ़ गई थी कि वह बार-बार कह रही थी — |मुझे और चोदो… मैं अभी नहीं रुक सकती… मेरी चूत में और लंड डालो…| उसकी ये बातें सुनकर मेरा लंड और भी कड़क हो जाता और मैं उसे और जोर से चोदने लगता। मैंने उसे बताया कि मैं अब बहुत करीब हूँ और मैं जल्द ही झड़ने वाला हूँ।
पिताजी भी अब चाची जी की चूत में अपना लंड बहुत तेजी से घुसा-घुसा कर चोद रहे थे। चाची जी की आवाज बैठ गई थी लेकिन वह फिर भी चिल्ला रही थी — |हाँ भैया… मेरी चूत में… तुम्हारा लंड… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी हो गई हूँ…| पिताजी ने उसे झुकाकर उसकी गांड में भी अपनी उंगलियां डाल दीं और उसे दोनों जगह से चोदने लगे। चाची जी का शरीर कांप रहा था और उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे जो शायद खुशी के थे।
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चाचा जी ने अब रोशनी की गांड में अपना लंड डाल दिया। रोशनी पहले से ही गीली थी इसलिए उसे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई। वह बोली — |हाँ चाचा जी… मेरी गांड भी चोदो… मुझे गांड में भी बहुत मजा आता है…| चाचा जी ने उसकी गांड में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। रोशनी का मुंह खुला रह गया और उसकी आंखें ऊपर को घूम गईं। उसकी चूत से रस की एक तेज धारा निकली और फर्श पर गिरने लगी।
मैंने भी अब रोशनी की चूत में अपना लंड वापस डाल दिया। अब उसकी चूत में मैं और उसकी गांड में चाचा जी अपने-अपने लंड डालकर उसे एक साथ चोद रहे थे। रोशनी को इसका अलग ही मजा आ रहा था। वह बार-बार कह रही थी — |मुझे दोनों जगह से चोदो… मैं तो दोनों लंड लेना चाहती हूँ…| हमने उसे और तेज चोदा। उसका शरीर बुरी तरह से हिल रहा था और उसकी छातियाँ उछल रही थीं।
आखिरकार मैं अपने चरम सुख पर पहुंच गया और मेरा लंड रोशनी की चूत के अंदर जोर से धड़कने लगा। मैंने उसके अंदर अपना सारा वीर्य डाल दिया। रोशनी ने उसे महसूस किया और वह भी जोर से चीख पड़ी — |आआअह्ह्ह्हह… हाँ अर्जुन… मेरे अंदर… सब मेरे अंदर…| मेरा शरीर कांप गया और मैं उसके ऊपर गिर पड़ा। लेकिन चाचा जी अभी भी उसकी गांड में चोद रहे थे। कुछ देर बाद उन्होंने भी अपना माल रोशनी की गांड के अंदर डाल दिया।
पिताजी ने भी चाची जी की चूत में अपना वीर्य डाल दिया और चाची जी ने उसे पूरी तरह से अपने अंदर समा लिया। फिर दोनों वहीं फर्श पर लेट गए। पूरी रसोई में सेक्स की तेज गंध फैल गई थी और सबके शरीर पसीने से भीग चुके थे। सब लोग कुछ देर तक एक दूसरे के साथ नग्न अवस्था में लेटे रहे और एक दूसरे के शरीर को सहलाते रहे। उस दिन के बाद हमारे घर का माहौल पूरी तरह से बदल गया था।
अगली सुबह जब हम सब नीचे बैठक में इकट्ठे हुए तो सबके चेहरों पर एक अजीब सी मुस्कान थी। कोई शर्मिंदा नहीं था, कोई पछतावा नहीं कर रहा था। बल्कि सब एक दूसरे को और भी प्यार से देख रहे थे। पिताजी ने रोशनी को बुलाकर गले लगा लिया और कहा — |तुमने कल जो किया वह बहुत अच्छा था, रोशनी। मुझे तुम पर गर्व है।| रोशनी ने शर्माते हुए कहा — |पापा, मुझे भी बहुत मजा आया। अब हमें ऐसा अक्सर करना चाहिए।|
चाची जी ने भी कहा — |हाँ भैया, रोशनी सही कह रही है। अब हमारे घर में ऐसी कोई शर्म नहीं रहनी चाहिए। सब अपनी अन्तर्वासना को खुलकर जी सकते हैं।| चाचा जी ने हंसते हुए कहा — |मुझे तो पता नहीं था कि मेरी पत्नी इतनी गर्म है। कल तो उसने मुझे हैरान ही कर दिया।| चाची जी ने चाचा जी को हल्के से थप्पड़ मारा और कहा — |चुप रहो, सबके सामने ऐसी बात मत करो।| सब हंस पड़े।
उसके बाद हमने तय किया कि अब हम हर हफ्ते ऐसा करेंगे। घर में सबकी सहमति थी और सब इसके लिए तैयार थे। रोशनी और चाची जी ने भी कहा कि वे अब और भी खुलकर रहेंगी और अपने शरीर को छुपाएंगी नहीं। पिताजी ने कहा कि वे अपनी बहू को बहुत प्यार करते हैं और अब उनका रिश्ता और भी गहरा हो गया है। मुझे भी यह सब पहले अजीब लगा था लेकिन अब मैं इसे स्वीकार कर चुका हूँ क्योंकि इसमें किसी का नुकसान नहीं है।
अब हमारे घर में हर शुक्रवार की रात को ऐसा ही होता है। सब लोग अपने-अपने काम से लौटते हैं और फिर रात को साथ बैठकर खाना खाते हैं। उसके बाद जो होता है वह सिर्फ हमारे घर के लोग जानते हैं। कभी-कभी रोशनी और पिताजी अकेले में भी साथ होते हैं और कभी चाची जी और पिताजी। मैं भी कभी-कभी रोशनी के साथ और कभी चाची जी के साथ अकेले में समय बिताता हूँ। हमारे बीच अब कोई तकल्लुफ नहीं रह गया है। सब एक दूसरे के शरीर को पूरी तरह से जानते हैं और एक दूसरे की इच्छाओं को पूरा करते हैं।
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परिवार में ही ससुर बहू की चुदाई देख सभी ने बजाई ताली — यह सिर्फ एक घटना नहीं थी बल्कि हमारे घर की नई परंपरा बन गई है। अब जब भी पिताजी रोशनी को चोदते हैं, हम सब तालियां बजाते हैं और उनका उत्साह बढ़ाते हैं।

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