सास को साले के साथ चुत मरवाते देख दिया: Hindi Sex Stories
मेरा नाम अर्जुन है और ये घटना मेरी बीबी दिया, मेरी सास शकुंतला और मेरे साले रोहित से जुड़ी हुई है। हम लोग लखनऊ के पास एक छोटे से कस्बे में रहते थे जहाँ घर आपस में सटे हुए थे और खिड़कियाँ अक्सर दूसरे के आँगन में खुलती थीं।
मेरी शादी दिया से हुए चार साल हो चुके थे। दिया 24 साल की थी, गोरा रंग, लंबे काले बाल, और शरीर ऐसा कि हर कोई पलट कर देखे। उसकी माँ शकुंतला यानी मेरी सास उम्र में 45 साल की थीं लेकिन उनका शरीर किसी 30 साल की औरत जैसा था। चौड़े कूल्हे, भारी छाती, और चेहरे पर ऐसा नूर कि मोहल्ले के सारे मर्द उन्हें देख कर सिर्फ सोचते रह जाते थे। रोहित मेरा साला था, दिया का छोटा भाई, उम्र 19 साल। लंबा, गठीला शरीर, और आँखों में हमेशा एक अजीब सी चमक रहती थी।
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सबसे बड़ी बात ये थी कि रोहित और शकुंतला का रिश्ता देखने में जितना सामान्य लगता था, अंदर से उतना ही अजीब था। रोहित अपनी माँ के बहुत करीब था, हद से ज़्यादा करीब। वो हर वक़्त अपनी माँ के आस-पास मंडराता रहता, उनके कंधे पर हाथ रखता, उनकी साड़ी का पल्लू सही करता, और कभी-कभी तो ऐसे छूता जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को छूता हो। दिया को ये सब अजीब लगता था लेकिन उसने कभी खुल कर कुछ नहीं कहा था। मैं भी चुप रहता था क्योंकि मुझे लगता था कि शायद माँ-बेटे का प्यार ऐसा ही होता है।
उस शाम की बात है जब सब कुछ बदल गया। दिसंबर का महीना था, ठंड बहुत बढ़ गई थी और हम सब अपने-अपने कमरों में रजाई में दुबके हुए थे। मैं और दिया अपने कमरे में थे, हल्की-हल्की बातें कर रहे थे। अचानक दिया को प्यास लगी और वो पानी लेने किचन की तरफ गई। हमारा घर पुराने ढंग का था, किचन से सटा हुआ आँगन था और आँगन के उस पार शकुंतला का कमरा था।
दिया किचन में गई ही थी कि उसे कुछ आवाज़ सुनाई दी। पहले उसने सोचा कि चूहे होंगे या हवा से कुछ गिर गया होगा। लेकिन फिर आवाज़ साफ हुई। वो रोहित की आवाज़ थी, धीमी और काँपती हुई। दिया ने ध्यान से सुना तो उसे अपनी माँ की भी आवाज़ सुनाई दी। दोनों की आवाज़ें एक साथ आ रही थीं, जैसे दोनों बहुत करीब हों।
दिया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने धीरे से किचन की खिड़की से झाँकने की कोशिश की। खिड़की आँगन में खुलती थी और सामने शकुंतला के कमरे की खिड़की थी जिसका परदा आधा खुला था। दिया ने साँस रोक कर देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। अंदर रोहित अपनी माँ शकुंतला के बिल्कुल करीब बैठा था, इतना करीब कि दोनों के शरीर आपस में सटे हुए थे।
शकुंतला बिस्तर पर लेटी हुई थीं और रोहित उनके ऊपर झुका हुआ था। दिया ने देखा कि रोहित ने अपनी माँ की साड़ी का पल्लू हटा दिया था और उनके गले को चूम रहा था। शकुंतला की आँखें बंद थीं और उनके मुँह से हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं। दिया को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसका भाई और उसकी माँ ऐसा कुछ कर सकते हैं।
वो वहीं जमी रह गई, हिल भी नहीं पा रही थी। उसके पैरों में जान ही नहीं थी। उसने देखा कि रोहित ने अपनी माँ की साड़ी को और नीचे सरका दिया और उनकी भरी हुई छातियों को अपने हाथों से दबाने लगा। शकुंतला ने अपने होंठ भींच रखे थे लेकिन उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। दिया को समझ में नहीं आ रहा था कि वो चिल्लाए या भाग जाए या वहीं खड़ी रहे। उसकी अपनी साँसें भी अब तेज़ हो गई थीं।
मैं कमरे में लेटा हुआ दिया का इंतज़ार कर रहा था। काफी देर हो गई थी और वो वापस नहीं आई थी। मुझे लगा कि शायद पानी गर्म कर रही होगी या कुछ और काम आ गया होगा। लेकिन जब पंद्रह मिनट बीत गए तो मैं उठ कर किचन की तरफ गया। वहाँ जा कर देखा कि दिया खिड़की के पास खड़ी थी, बिल्कुल सहमी हुई, और उसका चेहरा पीला पड़ गया था।
मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा तो वो चौंक गई। उसने मुझे देखा और फिर अपनी उंगली होंठों पर रख कर चुप रहने का इशारा किया। मैंने धीरे से पूछा, |क्या हुआ दिया? इतनी देर से यहाँ क्या कर रही हो?| उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आँखों से खिड़की की तरफ इशारा किया। मैंने भी झाँक कर देखा और जो देखा उससे मेरे होश उड़ गए।
अंदर शकुंतला अब पूरी तरह नंगी थीं और रोहित भी अपने कपड़े उतार चुका था। दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे और रोहित अपनी माँ के शरीर को चूम रहा था। शकुंतला के मुँह से अब आवाज़ें निकल रही थीं, |आआह्ह्ह… रोहित… बेटा… धीरे से…| रोहित ने कहा, |माँ… आज मैं आपको बहुत प्यार करूँगा…| मैं सुन्न हो गया। ये माँ-बेटे का रिश्ता नहीं था, ये कुछ और ही था।
दिया और मैं वहीं खड़े-खड़े सब कुछ देखते रहे। दिया की आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन साथ ही उसके चेहरे पर एक अजीब सी उत्सुकता भी थी। मैं उसे वापस कमरे में ले जाना चाहता था लेकिन मेरे अपने कदम वहीं रुके हुए थे। मैं भी अंदर का नज़ारा देखने से खुद को रोक नहीं पा रहा था। ये गलत था, मुझे पता था, लेकिन फिर भी मेरी नज़रें वहीं जमी हुई थीं।
रोहित ने शकुंतला की टाँगों को फैलाया और उनके बीच अपना चेहरा ले गया। शकुंतला ने ज़ोर से आह भरी और अपने हाथों से रोहित के बाल पकड़ लिए। |उह्ह्ह्ह… बेटा… ये क्या कर रहा है…| वो कह रही थीं लेकिन उनकी आवाज़ में कोई रोक-टोक नहीं थी। रोहित ने अपनी माँ की चुत को अपने मुँह से चूसना शुरू कर दिया। शकुंतला की कमर बिस्तर पर उछल रही थी। |आआअह्ह्ह्हह… रोहित… और… और तेज़…| उसकी आवाज़ अब पूरी तरह बदल चुकी थी, वो अब माँ नहीं बल्कि एक औरत बन चुकी थी।
दिया ने मेरा हाथ कस कर पकड़ लिया। मैंने देखा कि उसकी साँसें भी तेज़ हो गई थीं और उसके होंठ सूख रहे थे। मैंने उसे धीरे से अपने पास खींचा और उसके कान में फुसफुसाया, |चलो यहाँ से चलते हैं…| लेकिन दिया ने सिर हिला कर मना कर दिया। वो और देखना चाहती थी। मुझे उसकी आँखों में एक अलग ही भाव दिखा, जैसे वो सदमे में होने के साथ-साथ उत्तेजित भी हो रही थी।
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अंदर रोहित ने अपनी माँ की चुत को चाटना बंद किया और ऊपर आकर उनके होंठों को चूमने लगा। शकुंतला ने अपनी टाँगें रोहित की कमर से लपेट दीं। रोहित का लंड पूरी तरह खड़ा था और शकुंतला की चुत के दरवाज़े पर रगड़ रहा था। शकुंतला ने कहा, |अंदर डाल दे… बेटा… अब और मत तड़पा…| रोहित ने अपने लण्ड को शकुंतला की चुत में घुसाना शुरू किया।
|आआआह्ह्ह्ह…| शकुंतला ज़ोर से चीखी। रोहित ने अपना पूरा लौड़ा उनकी चुत में घुसा दिया और फिर धीरे-धीरे चोदने लगा। शकुंतला के मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं। |हाँ… ऐसे ही… चोद मुझे… बेटा… और ज़ोर से…| वो चिल्ला रही थीं। रोहित उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए कह रहा था, |माँ… आपकी चुत बहुत गर्म है… मैं पागल हो रहा हूँ…|
दिया अब पूरी तरह काँप रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसने मुझसे कहा, |अर्जुन… मुझे समझ नहीं आ रहा… ये सब कैसे हो रहा है…| मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, |शायद ये दोनों बहुत पहले से ऐसा कर रहे हैं…| दिया ने कहा, |लेकिन ये गलत है… ये बहुत गलत है…| फिर भी उसकी नज़रें अंदर से हट नहीं रही थीं।
रोहित अब शकुंतला को पीछे से चोदने लगा था। शकुंतला चारों हाथों और घुटनों के बल बिस्तर पर थीं और रोहित उनके पीछे घुटनों के बल बैठा उनकी चुत में अपना लंड घुसा रहा था। उसके हाथ शकुंतला के कूल्हों पर थे और वो उन्हें ज़ोर-ज़ोर से धक्के दे रहा था। शकुंतला की भारी छातियाँ बिस्तर पर झूल रही थीं और उनके मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं। |उह्ह्ह्ह… आह्ह्ह… बेटा… तू बहुत तेज़ कर रहा है…|
अचानक दिया ने मेरी तरफ देखा और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उसने मेरा हाथ अपनी छाती पर रख दिया। मैंने महसूस किया कि उसकी धड़कनें बहुत तेज़ हो रही थीं। उसने फुसफुसा कर कहा, |मुझे भी कुछ अजीब सा हो रहा है अर्जुन…| मैंने उसे अपने पास खींचा और उसके होंठों को चूम लिया। दिया ने भी मेरा साथ दिया और हम वहीं किचन की खिड़की के पास एक दूसरे से लिपट गए।
अंदर का नज़ारा अब और भी गर्म हो गया था। शकुंतला अब रोहित के ऊपर बैठी थीं और उसके लंड को अपनी चुत में लेकर उछल रही थीं। उनकी साँसें फूल गई थीं और वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थीं। |रोहित… मैं आ रही हूँ… बेटा… और ज़ोर से…| रोहित ने उनके कूल्हों को पकड़ कर उन्हें और तेज़ उछाला। |माँ… आप बहुत प्यारी हो… मैं आपके बिना नहीं रह सकता…|
दिया अब मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरी छाती को सहला रही थी। मैंने भी उसकी कमीज़ के बटन खोलने शुरू कर दिए। हम दोनों की साँसें अब एक साथ चल रही थीं। मैंने उसकी कमीज़ उतार दी और उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी छातियों को दबाने लगा। दिया ने मेरी पैंट की ज़िप खोल दी और मेरा लंड बाहर निकाल कर पकड़ लिया।
|उह्ह्ह्ह… अर्जुन… तुम भी बहुत गर्म हो…| वो फुसफुसाई। मैंने उसकी ब्रा उतार दी और उसकी नंगी छातियों को अपने मुँह में ले लिया। दिया ने अपना सिर पीछे झुका दिया और हल्की-हल्की आहें भरने लगी। अंदर से शकुंतला की चीखें अब और तेज़ हो गई थीं। |आआअह्ह्ह्हह… रोहित… मैं गई… मैं गई…| रोहित ने भी ज़ोर से कहा, |माँ… मैं भी…|
कुछ ही पलों में अंदर सब शांत हो गया। शकुंतला और रोहित एक दूसरे से लिपट कर लेट गए थे। दिया ने मुझसे कहा, |चलो अब हम अपने कमरे में चलते हैं…| मैंने हाँ में सिर हिलाया। हम दोनों चुपचाप अपने कमरे में आ गए। दरवाज़ा बंद करते ही दिया मुझसे लिपट गई और बोली, |अर्जुन… आज मुझे बहुत अजीब लग रहा है… मुझे बहुत तेज़ भूख लगी है तुम्हारी…|
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी बाकी के कपड़े उतार दिए। दिया पूरी तरह नंगी होकर मेरे सामने लेटी थी। उसका शरीर पसीने से भीगा हुआ था और उसकी चुत पहले से ही गीली थी। मैंने उसकी टाँगों को फैलाया और उसकी चुत को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। दिया ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा, |नहीं… सीधे अंदर डालो… मैं और इंतज़ार नहीं कर सकती…|
मैंने अपना लंड उसकी चुत के दरवाज़े पर रखा और धीरे से अंदर घुसाया। दिया ने ज़ोर से आह भरी। |आआह्ह्ह्ह… अर्जुन… तुम आज बहुत बड़े लग रहे हो…| मैंने उसे चोदना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़। दिया की टाँगें मेरी कमर से लिपटी हुई थीं और उसके नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे। |और ज़ोर से… मुझे चोदो… अर्जुन…| वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसे पीछे से चोदने के लिए घुमा दिया। दिया ने अपने कूल्हे ऊपर उठाए और मैंने उसकी चुत में फिर से अपना लौड़ा घुसा दिया। इस बार मैं उसे बहुत तेज़ चोदने लगा। हमारे शरीर टकराने की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं। दिया के मुँह से सिर्फ आहें निकल रही थीं। |उह्ह्ह्ह… हाँ… वहीं… और तेज़… मुझे चोदो… मेरी चुत को पूरा भर दो…|
मैंने उसे उठा कर दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उसकी एक टाँग उठा कर अपने कंधे पर रख ली। फिर उसकी चुत में अपना लंड घुसा कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा। दिया दीवार से सटी हुई थी और उसकी छातियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं। |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन… मैं मर रही हूँ… बहुत अच्छा लग रहा है…|
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अचानक दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। हम दोनों चौंक गए। दरवाज़ा खुला तो सामने शकुंतला खड़ी थीं, सिर्फ एक पतली सी चादर लपेटे हुए। उनके बाल बिखरे हुए थे और चेहरा लाल था। दिया और मैं दोनों सकते में आ गए। शकुंतला ने कहा, |तुम लोगों ने सब देख लिया, है ना?| उनकी आवाज़ में कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक अजीब सी स्थिरता थी।
दिया ने अपने कपड़े समेटते हुए कहा, |माँ… आप… रोहित… ये सब क्या है?| शकुंतला ने कमरे में आते हुए दरवाज़ा बंद कर लिया और बोलीं, |जो तुमने देखा, वो सच है। रोहित और मैं एक दूसरे से प्यार करते हैं।| दिया की आँखें फटी रह गईं। |प्यार? माँ, वो आपका बेटा है…| शकुंतला ने कहा, |हाँ, वो मेरा बेटा है, लेकिन वो मेरा आदमी भी है। हम बहुत समय से साथ हैं।|
मैं चुपचाप खड़ा सुन रहा था। मेरे शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था और मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था। शकुंतला की नज़र मेरी तरफ गई और वो मुस्कुराईं। |अर्जुन, तुम्हें भी ये सब अजीब लग रहा होगा, लेकिन अन्तर्वासना ऐसी ही होती है। जिसे हम छुपाते हैं, वो कभी न कभी बाहर आ ही जाती है।| दिया ने कहा, |लेकिन माँ, ये गलत है…| शकुंतला ने उसकी बात काटते हुए कहा, |गलत क्या है? प्यार कभी गलत नहीं होता।|
तभी रोहित भी कमरे में आ गया। उसने भी सिर्फ एक तौलिया लपेट रखी थी। दिया उसे देख कर और भी घबरा गई। रोहित ने कहा, |दीदी, मुझे माफ कर दो। लेकिन माँ और मेरा रिश्ता बहुत गहरा है। हम एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते।| दिया ने कहा, |तुम दोनों पागल हो गए हो…| शकुंतला ने मुस्कुराते हुए कहा, |शायद, लेकिन ये पागलपन हमें खुशी देता है।|
मैंने देखा कि दिया का गुस्सा अब धीरे-धीरे कम हो रहा था। उसकी आँखों में अब भी उत्सुकता थी। शकुंतला ने कहा, |तुम लोग भी तो एक दूसरे के साथ थे। हमने भी तुम्हें देखा।| दिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया। शकुंतला ने मेरी तरफ देखा और कहा, |अर्जुन, तुम्हारा शरीर बहुत अच्छा है। दिया बहुत खुशनसीब है।|
माहौल अब अजीब हो गया था। चारों तरफ सन्नाटा था लेकिन उसमें भी एक गर्माहट थी। रोहित ने धीरे से कहा, |दीदी, अगर तुम चाहो तो हम सब मिल कर रह सकते हैं…| दिया ने उसे घूर कर देखा। |तुम क्या कह रहे हो रोहित?| शकुंतला ने आगे बढ़ कर दिया का हाथ पकड़ लिया और कहा, |बेटी, अब जब सब सामने आ ही गया है तो क्यों न हम सब एक दूसरे के और करीब आ जाएँ?|
मैं ये सब सुन कर हैरान था लेकिन मेरे अंदर भी कुछ हलचल हो रही थी। शकुंतला की बातों में एक अजीब सी कशिश थी। दिया ने मेरी तरफ देखा, मानो जवाब चाह रही हो। मैंने कहा, |दिया, जो तुम चाहो…| शकुंतला ने मुस्कुराते हुए कहा, |देखो, दिया भी चाहती है, बस कह नहीं पा रही।|
शकुंतला ने अपनी चादर गिरा दी। उनका पूरा शरीर सामने था। भारी छातियाँ, चौड़े कूल्हे, और उनके बीच की वो गीली चुत। दिया की साँसें तेज़ हो गईं। शकुंतला ने दिया के पास आकर उसके होंठों को चूम लिया। दिया पहले तो सहमी लेकिन फिर उसने भी अपनी माँ को पकड़ लिया। मैं और रोहित ये देख कर हैरान थे।
रोहित ने मेरी तरफ देखा और कहा, |जीजाजी, अब आप भी शामिल हो जाइए।| मैंने कुछ सोचा और फिर दिया की तरफ देखा। उसने अपनी माँ की छातियों को चूसना शुरू कर दिया था। शकुंतला के मुँह से आहें निकल रही थीं। मैंने भी अपनी हिचक छोड़ दी और आगे बढ़ गया।
मैंने दिया के पीछे आकर उसकी चुत को पीछे से सहलाना शुरू किया। दिया ने अपने कूल्हे पीछे किए। शकुंतला ने कहा, |हाँ, अर्जुन, दिया को अंदर से भर दो। ये बहुत प्यासी है।| मैंने अपना लंड दिया की चुत में पीछे से घुसा दिया। दिया ने ज़ोर से चीखा। |आआह्ह्ह्ह… अर्जुन…| शकुंतला ने दिया का मुँह अपनी चुत पर लगा दिया। अब दिया मेरे लंड को अपनी चुत में ले रही थी और अपनी माँ की चुत को चाट रही थी।
रोहित ने मेरे पास आकर कहा, |जीजाजी, अब मैं आपकी पत्नी के साथ…| मैंने उसे रोकते हुए कहा, |पहले मैं तुम्हारी माँ के साथ…| रोहित मुस्कुराया और बोला, |जैसा आप चाहें।| मैंने दिया को छोड़ दिया और शकुंतला के पास गया। उनकी चुत पहले से ही बहुत गीली थी। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया।
|आओ अर्जुन… मुझे भी चोदो…| शकुंतला ने कहा। मैंने अपना लौड़ा उनकी चुत में घुसा दिया। वो बहुत गर्म और तंग थी। शकुंतला ने ज़ोर से आह भरी। |उह्ह्ह्ह… तुम्हारा लंड बहुत मोटा है…| मैंने उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया। उनकी भारी छातियाँ उछल रही थीं और वो मेरे नाम की रट लगा रही थीं।
इधर रोहित दिया के साथ था। उसने दिया को लिटा कर उसकी चुत में अपना लंड घुसा दिया था और उसे भी चोद रहा था। दिया के मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं। |रोहित… भाई… तुम बहुत अच्छा चोदते हो…| ये सुन कर मुझे और भी तेज़ होने की इच्छा हुई। मैंने शकुंतला को घुमा कर पीछे से चोदना शुरू किया।
कमरे में अब चारों तरफ सिर्फ चुदाई की आवाज़ें थीं। शकुंतला की चीखें, दिया की सिसकियाँ, रोहित की गुर्राहटें और मेरी साँसें। सब एक साथ मिल कर एक अजीब सी धुन बना रही थीं। शकुंतला ने मुझसे कहा, |अर्जुन… मुझे अपनी चुत में और गहरा लो…| मैंने उनके कूल्हों को पकड़ कर अपना लंड पूरा अंदर घुसाया और तेज़ी से चोदने लगा।
|आआअह्ह्ह्हह… हाँ… वहीं…| शकुंतला चिल्लाई। उनकी चुत अब पूरी तरह से मेरे लंड को जकड़ चुकी थी। मैंने उनकी छातियों को पीछे से पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए चोदता रहा। रोहित ने दिया को उठा कर बैठा लिया और उसे अपनी गोद में बैठा कर चोदने लगा। दिया उसके ऊपर उछल रही थी और उसकी छातियाँ रोहित के मुँह के सामने थीं।
रोहित ने दिया की छातियों को चूसना शुरू कर दिया। दिया ने अपना सिर पीछे झुका दिया। |उह्ह्ह्ह… भाई… मुझे बहुत मज़ा आ रहा है…| मैंने शकुंतला को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर लेट कर उन्हें मिशनरी पोज़ में चोदने लगा। शकुंतला की टाँगें मेरी कमर से लिपटी हुई थीं और वो मुझे चूम रही थीं।
|अर्जुन… तुम बहुत अच्छा चोदते हो… दिया सच में खुशनसीब है…| उन्होंने कहा। मैंने कहा, |आप भी कम नहीं हो शकुंतला जी…| वो हँसी और बोली, |अब मुझे शकुंतला मत कहो… मुझे बस अपनी औरत की तरह चोदो…| मैंने उनकी बात मान ली और उन्हें और तेज़ चोदने लगा।
रोहित ने अचानक कहा, |जीजाजी, चलिए हम दोनों मिल कर दीदी को चोदते हैं।| मैंने देखा कि दिया की आँखों में भी इस बात की चमक थी। मैंने शकुंतला को छोड़ दिया और दिया के पास गया। रोहित ने दिया को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चुत में अपना लंड घुसा दिया। मैंने दिया का मुँह अपने लंड के सामने किया।
दिया ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। रोहित उसकी चुत में लंड घुसा कर चोद रहा था। दिया के मुँह से मेरे लंड के साथ-साथ आहें भी निकल रही थीं। शकुंतला ये सब देख कर मुस्कुरा रही थीं। फिर उन्होंने मेरे पास आकर मेरी पीठ को सहलाना शुरू किया।
|अर्जुन, तुम्हारा शरीर बहुत गर्म है…| उन्होंने कहा। मैंने उन्हें अपने पास खींचा और उनके होंठों को चूमने लगा। शकुंतला ने मेरी जीभ को अपने मुँह में ले लिया। हम दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे जबकि नीचे रोहित दिया को चोद रहा था। दिया का मुँह मेरे लंड पर था और वो उसे ज़ोर से चूस रही थी।
अचानक रोहित ने ज़ोर से कहा, |दीदी… मैं झड़ने वाला हूँ…| दिया ने अपना मुँह मेरे लंड से हटा लिया और कहा, |रोहित… बाहर मत निकालना… अंदर ही डाल देना…| रोहित ने उसकी चुत में और तेज़ धक्के दिए और फिर उसके अंदर ही झड़ गया। |आआआह्ह्ह्ह…| दिया ज़ोर से चीखी।
रोहित के झड़ने के बाद मैंने दिया को अपनी तरफ खींचा और उसकी चुत में अपना लंड घुसा दिया। उसकी चुत अब पहले से भी ज़्यादा गीली थी, रोहित के वीर्य से भरी हुई। मैंने उसे ज़ोर से चोदना शुरू किया। दिया मेरी बाहों में थी और उसकी टाँगें मेरी कमर से लिपटी हुई थीं। |अर्जुन… मुझे और चोदो…| वो चिल्ला रही थी।
शकुंतला ने रोहित के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे फिर से खड़ा करने लगीं। रोहित ने कहा, |माँ… आप बहुत शैतान हो…| शकुंतला ने कहा, |तेरी चुदक्कड़ माँ है मैं…| और फिर उन्होंने रोहित के लंड को अपने मुँह में ले लिया। रोहित ने अपना सिर पीछे झुका दिया और आहें भरने लगा।
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मैं दिया को खड़े होकर चोद रहा था। उसने अपनी एक टाँग मेरे कंधे पर रखी हुई थी और मैं उसकी चुत में ज़ोर-ज़ोर से लंड घुसा रहा था। दिया की छातियाँ उछल रही थीं और उसके मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं। |उह्ह्ह्ह… अर्जुन… तुम मुझे पागल कर रहे हो…|
शकुंतला रोहित के लंड को चूस रही थीं और उसकी टाँगों के बीच अपनी उंगलियाँ फेर रही थीं। रोहित का लंड अब फिर से पूरी तरह खड़ा हो गया था। शकुंतला ने उसे अपनी चुत में ले लिया और उसके ऊपर बैठ गईं। अब शकुंतला रोहित के लंड को अपनी चुत में लेकर उछल रही थीं और रोहित उनकी छातियों को दबा रहा था।
मैंने दिया को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चुत को अपने मुँह से चाटने लगा। दिया ने अपनी टाँगें फैला दीं और मेरे बाल पकड़ लिए। |हाँ… अर्जुन… ऐसे ही… मेरी चुत को चाटो…| मैंने उसकी चुत के अंदर अपनी जीभ घुसाई और उसे चूसने लगा। दिया के शरीर में कंपन दौड़ गया।
शकुंतला अब रोहित के ऊपर ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थीं। |रोहित… बेटा… तू मुझे बहुत अच्छा चोदता है…| रोहित ने उनके कूल्हों को पकड़ कर उन्हें और तेज़ उछाला। |माँ… आपकी चुत मुझे पागल बना देती है…| दोनों की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं।
मैंने दिया की चुत को चाटना बंद किया और उसके ऊपर लेट कर उसे फिर से चोदने लगा। इस बार मैं बहुत धीरे-धीरे चोद रहा था, उसे हर धक्के का एहसास दिला रहा था। दिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मेरे होंठों को चूमने लगी। |अर्जुन… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ…| मैंने उसकी आँखों को चूमा और कहा, |मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ दिया…|
उस पल हम दोनों के बीच का प्यार और भी गहरा हो गया। हमारी चुदाई अब सिर्फ शारीरिक नहीं थी, उसमें भावनाएँ भी थीं। मैंने उसे धीरे-धीरे चोदते हुए उसके पूरे शरीर को चूमा। दिया के मुँह से प्यार भरी आहें निकल रही थीं।
शकुंतला और रोहित अब एक दूसरे के साथ लेटे हुए थे और हमें देख रहे थे। शकुंतला ने कहा, |तुम दोनों बहुत प्यारे लग रहे हो।| मैंने मुस्कुराते हुए कहा, |तुम दोनों भी…| रोहित ने कहा, |जीजाजी, आप सच में बहुत अच्छे हो।|
फिर मैंने दिया को घुमा कर उसकी चुत में पीछे से लंड घुसाया। दिया ने अपने कूल्हे ऊपर उठाए और मैंने उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया। उसकी चुत से अब रोहित के वीर्य और उसके अपने रस का मिश्रण बह रहा था। मेरा लंड उसकी चुत में आसानी से फिसल रहा था। |आआह्ह्ह्ह… अर्जुन… बहुत अच्छा…|
शकुंतला ने मेरे पास आकर मेरे कंधों को पकड़ा और कहा, |अर्जुन, अब तुम हमें भी चोदो।| मैंने दिया को छोड़ दिया और शकुंतला को बिस्तर पर लिटा दिया। उनकी चुत में रोहित का वीर्य भरा हुआ था। मैंने उसी गीली चुत में अपना लंड घुसा दिया। शकुंतला ने ज़ोर से चीखा। |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन… तुम बहुत गर्म हो…|
मैंने शकुंतला को बहुत तेज़ी से चोदना शुरू किया। उनकी भारी छातियाँ बिस्तर पर उछल रही थीं और वो मेरे नाम की रट लगा रही थीं। |चोदो मुझे… अर्जुन… और ज़ोर से…| रोहित ने दिया को अपनी गोद में बैठा लिया और उसकी चुत में अपना लंड घुसा दिया। अब चारों तरफ सिर्फ चुदाई की आवाज़ें थीं।
मैंने शकुंतला को उठा कर दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उसकी टाँगें उठा कर उसे चोदने लगा। शकुंतला दीवार से सटी हुई थीं और उनकी चुत मेरे लंड को पूरी तरह से निगल रही थी। |उह्ह्ह्ह… अर्जुन… मुझे मत छोड़ो…| मैंने उन्हें और ज़ोर से चोदा।
रोहित ने दिया को बिस्तर पर लिटा कर उसकी चुत में अपनी उंगलियाँ डालीं और उसे चोदने लगा। दिया के मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं। |रोहित… भाई… उंगलियाँ और अंदर…| रोहित ने उसकी चुत में तीन उंगलियाँ घुसा दीं और उसे तेज़ी से चोदने लगा। दिया का शरीर काँप रहा था।
अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने शकुंतला से कहा, |मैं आ रहा हूँ…| शकुंतला ने कहा, |मुझमें ही डाल दो…| मैंने उनकी चुत में अपना लंड और गहरा घुसाया और ज़ोर से झड़ गया। |आआआह्ह्ह्ह…| शकुंतला ने मेरे साथ ही अपना रस छोड़ दिया। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए।
मैं थक कर बिस्तर पर गिर गया। शकुंतला मेरे पास लेट गईं और मेरी छाती पर सिर रख दिया। इधर रोहित ने दिया को चोदते हुए उसे भी चरम पर पहुँचा दिया। दिया ज़ोर से चीखी और फिर रोहित के साथ लेट गई। कमरे में अब सिर्फ हमारी भारी साँसों की आवाज़ें थीं।
कुछ देर बाद शकुंतला ने कहा, |आज के बाद हम सब का रिश्ता और गहरा हो गया है।| दिया ने कहा, |हाँ माँ, लेकिन ये बात हमारे बीच ही रहनी चाहिए।| रोहित ने कहा, |बिल्कुल, ये हमारा राज़ है।| मैंने भी हाँ में सिर हिलाया।
उस रात के बाद हमारी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। हम चारों अब अक्सर साथ समय बिताते और एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाते। दिया को अपनी माँ और भाई के साथ रहना अब अजीब नहीं लगता था। उसे लगता था कि ये सब कुछ स्वाभाविक है। मैं भी शकुंतला के साथ समय बिताने लगा और रोहित भी दिया के साथ।
लेकिन हम हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि बाहर किसी को कुछ पता न चले। हमारे घर की दीवारें ही हमारे राज़ की गवाह थीं। शकुंतला अब पहले से भी ज़्यादा खुश रहती थीं और रोहित भी उसका साथ देता था। दिया और मेरा रिश्ता भी पहले से बेहतर हो गया था।
एक दिन दिया ने मुझसे कहा, |अर्जुन, क्या तुम्हें कभी लगता है कि हम गलत कर रहे हैं?| मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, |प्यार में सही-गलत का कोई मतलब नहीं होता दिया। जब तक हम सब खुश हैं, तब तक सब सही है।| दिया ने मुस्कुराते हुए कहा, |तुम सही कहते हो।|
शकुंतला ने एक बार मुझसे कहा, |अन्तर्वासना हर इंसान के अंदर होती है अर्जुन। बस कुछ लोग उसे दबा देते हैं और कुछ उसे जी लेते हैं।| मैंने कहा, |आपने बहुत सही कहा शकुंतला जी।| वो हँसी और बोली, |अब मैं तुम्हारे लिए सिर्फ शकुंतला हूँ, कोई जी नहीं।|
रोहित और मेरा रिश्ता भी अब भाई जैसा ही था। हम दोनों एक दूसरे के साथ मिल कर दिया और शकुंतला को चोदते थे। कभी-कभी हम दोनों मिल कर दोनों औरतों को एक साथ चोदते थे। वो पल बहुत खास होते थे जब हम चारों एक साथ होते थे।
उस रात के बाद से हमारे घर में चुदाई की आवाज़ें आम बात हो गई थीं। शकुंतला और रोहित की चुदाई, दिया और मेरी चुदाई, और कभी-कभी हम चारों की एक साथ। घर की दीवारें इन सबकी गवाह थीं और हम सब अपनी-अपनी अन्तर्वासना को खुल कर जी रहे थे।
समय बीतता गया और हमारा रिश्ता और मज़बूत होता गया। दिया अब अपनी माँ के साथ भी बहुत करीब थी और रोहित के साथ भी उसका रिश्ता अच्छा था। शकुंतला मेरे साथ भी वैसे ही रहती थीं जैसे कोई अपने मर्द के साथ रहती है। हम सब एक दूसरे के सुख-दुख में साथ थे।
मैं अब समझ गया था कि अन्तर्वासना कोई बीमारी नहीं है, ये हमारे अंदर की वो भावना है जो हमें सच्चा बनाती है। जब तक सब लोग बालिग हैं और सबकी सहमति है, तब तक प्यार करने में कोई बुराई नहीं है। हमारी कहानी शायद समाज को गलत लगे, लेकिन हमारे लिए यही सच्चाई थी।
आज भी जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ तो मेरे शरीर में एक गर्माहट दौड़ जाती है। वो पहली बार जब मैंने अपनी सास को बेटे के साथ चुत मरवाते देखा, और फिर उसके बाद हम सब का एक साथ होना, ये सब मेरी ज़िंदगी के सबसे खास पल हैं। शकुंतला का शरीर, दिया की मासूमियत, रोहित की जवानी, और मेरी अपनी भूख, सब ने मिल कर उस रात को अविस्मरणीय बना दिया।
अब हमारी ज़िंदगी में कोई छुपाव नहीं है। हम सब एक दूसरे के साथ खुल कर रहते हैं। शकुंतला अब भी रोहित के साथ सोती हैं और दिया मेरे साथ। लेकिन कई बार हम अदला-बदली भी कर लेते हैं। ये सब हमारी सहमति से होता है और हम सब इससे खुश हैं।
अन्तर्वासना ने हमें सिखाया कि खुशी सबसे ज़रूरी है। अगर आप खुश हैं और आपके अपने खुश हैं, तो बाकी सब मायने नहीं रखता। मैं अपनी बीबी दिया से बहुत प्यार करता हूँ और शकुंतला से भी मेरा रिश्ता बहुत गहरा है। रोहित भी मेरा अच्छा दोस्त और साला है। हम सब एक खुशहाल परिवार हैं, बस थोड़े अलग ढंग से।
ये थी मेरी कहानी, मेरी Hindi Sex Stories।

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