गभरू नौजवान लौंडे और अनुज के साथ भ्राता श्री: Hindi Sex Stories
कामवासना के प्यारे कद्रदानों को लेखक डॉ कामेश का प्यार भरा नमस्कार, अभिवादन और मैनेजिंग टीम को धन्यवाद। प्रस्तुत है एक नई कहानी जिसमे भ्राताश्री से मिलने और उनके शिष्य के साथ लेखक की मस्ती का विवरण भ्राता श्री और मेरी ओर से है, इसे पढ़कर आप सभी का मन मचल उठेगा।
भ्राता श्री के मुखारविंद से:
मोबाइल स्क्रीन पर एक मैसेज आया -हेलो अंकल कैसे हो आप?
हाय डियर, मैं अच्छा हूं, तू कैसा है?
अच्छा हूँ अंकल, आपकी बहुत याद आ रही है।
तो आ जा, परेशान क्यों है।
ओके अंकल,
बात चीत से पता लग गया कि लौंडा चोदने को आतुर है।
खैर, डेट और टाइम फिक्स हुआ, और यह क्या उसी दिन मेरे प्रिय अनुज (लेखक डॉ कामेश) ने भी आने को बोल रखा है। तभी मन मे विचार आया लगता है अब ये त्रिपक्षीय कार्यक्रम होगा।
मैने सोचा, अनुज को भी सूचित कर दूं, देखें क्या रिस्पांस रहता है। और लो, अनुज की तो बांछे खिल गईं। वह चहकते हुये बोला, वाउ भ्राता श्री! क्या ये वही है 18 x 4 सेमी वाला जिसने आपकी जमकर चुदाई की थी। मैने कहा, हां हां, वही। अनुज ने आग्रह किया, हो सके तो एक बार मुझे भी डलवाने का मौका दीजिये। मैं सोच रहा था कि मैं तो उसका स्थाई "मित्र" हूं, पर अनुज को देख कर वह कहीं भड़क न जाए। फिर सोचा कि पहले नहीं बताता हूं, उसी दिन उसको सरप्राइज देता हूं, अगर बात बनी तो ठीक थ्रीसम का मजा लिया जाएगा, नहीं तो अनुज को मै ही बाद में निबटा दूंगा।
खैर, तय दिन और समय आया। अनुज पहले ही आ चुके थे, और हम ने फॉर्मल काली पैंट और हल्की नीली कमीज पहिन रखी थी, पर असल में हम दोनों को इंतजार तो लौंडे का था। वो आया, भूरी बैगी टाइप जींस और सफेद टी शर्ट में। आते ही मैने उसे कस कर गले लगाया और उसका भी रिस्पांस मस्त था, उसने तो मुझको लगभग 2 मिनट तक गले में चूस ही लिया। अंदर से अनुज भी यह दृश्य देख कर आगे का सोच कर आनंदित हो रहे थे। अब लौंडे को अंदर लाया, और अनुज को देख कर लौंडे के चेहरे की थोड़ी रंगत फ़ीकी पड़ती दिखी। ये कौन हैं अंकल? मैने कहा तू इन्हें मेरा ही स्वरूप जान। मेरे मित्र और अनुज हैं, और इनकी लिखी कहानियाँ तो तुम भी चाव से पढ़ते हो, डॉ कामेश। सुनकर लौंडा थोड़ा झेंपा। आगे की स्थिति अनुज ने संभाला, बोले हाय, और उसे गले लगाना चाहा, पर उसका रेस्पॉन्स थोड़ा ठंडा था। मैंने कहा तुम्हारे बारे में सब जानते हैं, तो वह कुटिल मुस्कान के साथ अनुज के गले लग गया और पीछे खड़े मुझ को आँख मारी। मैने उसे कहा हाँ आज तुझे दोनों को चोदने का मौका है। ओके अंकल।
मैने पूछा बेटा शुरू करें,
थोड़ा झेंपता हुआ बोला, ओके अंकल। मैने कहा अनुज तू इसकी पैंट उतार, मैं ऊपर का उतारता हूं। अनुज को तो मानो मुंह मांगी मुराद मिल गई। वह पैंट उतरते समय थोड़ा शर्मा रहा था, पर अब गेम चेंज होने वाला था। पैंट चड्ढी उतरने पर आज उसका लौड़ा थोड़ा हतोत्साहित और लटका हुआ था। फिर भी करीब 12-13 सेमी का था। अनुज ने तुरंत उसका लौड़ा मुंह में ले लिया और चूसने लगे। लौंडा थोड़ा हतप्रभ हुआ, बोला ये क्या सर, अनुज ने उसे हाथ से समझाया, जिसे समझ कर लौंडा मुस्कराया। मैने कहा, कंफर्टेबल रहो बेटा, आज तुम्हें डबल मजा आएगा। कहते-2 मैने उसकी टी शर्ट और बनियान उतार दी। लौंडा बोला ओके अंकल। मैने भी उसको पीछे से आलिंगन में जकड़ा, उसकी चूचियां और काँख के नीचे मलना शुरू किया। लौंडा बोला अरे अंकल, गुदगुदी हो रही है। मैने कहा होने दे, कहकर उसके हाथ के नीचे से सर डालकर उसका पेट चूस लिया। उधर अनुज की प्रक्रिया जारी थी, मैने पीछे से इशारे में ही अनुज से पूछा कि लौड़ा टन्नाया क्या, अनुज ने भी इशारे से हामी भरी। मैने इशारा किया निकालो मुंह से, क्या मस्त टनटनाया लौड़ा, कहने की जरूरत नहीं कि 18+ सेमी लंबा और 4+सेमी मोटा था। पीछे से मैने भी उसका सहलाया तो लौंडा थोड़ा शर्मा गया। आज अनुज की उपस्थिति के कारण थोड़ा असहज था, पर आज अपने साथ साथ अनुज की भी गुदा विदीर्ण करानी थी। सो आज मस्ती मैनेजमेंट का दिन था।
अब मैने उससे पूछा कि पहले किसकी लेना चाहेगा? शायद अनुज ने मुंह से अच्छा अनुभव दे दिया था, सो बोला, अंकल, मैं पहले सर की चोदूंगा। देखा, अनुज की आँखों में चमक आ गई थी। लौंडा तो निर्वस्त्र था ही, सो मैने अनुज के कपड़े फटाफट उतार दिए, और उनके हसीन मस्त नितंब देखकर दंगरह गया। अनुज से रोज ही बात चीत होती रहती थी, पर आज अनुज की हसीन गांड और भरे भरे नितंब देख कर मेरी लार टपक गई, और सोचा मैं बाद मे अनुज की कभी भी ले लूंगा।
खैर, ये टाइम तो लौंडे का था, उसने मेरी तरफ देखा, मानो पूछ रहा हो कि अंकल मैं चढ़ जाऊं क्या, और मैने भी आंखों आंखों में ही उसको सहमति दे दी। आज शायद लौंडा मूड से था और मेरे लिए जो प्लान करके आया था, उसका कार्यान्वयन उसने अनुज पर प्रारंभ किया. शुरू में बस थोड़ा हिचकिचाहट के बाद अब वो काउबॉय जैसा हो गया। उसने अनुज की गांड पर दो बार चपत लगाई और अनुज को कमर से बिस्तर पर चेहरा ऊपर करके लिटा दिया। मतलब अनुज की टांगे लौंडे के कंधे पर जाने वाली थीं क्योंकि इस पोज में भेदन काफी अंदर तक होता है। फिर पूछा, अंकल, जेल कहां है?
मैंने लाकर उसे दिया। अब उसने पहले अनुज की गांड में खूब अंदर तक और फिर अपने लौड़े पर चुपड़ा और टोपा अनुज की गांड पर स्थापित कर बोला, डालूँ सर, अनुज ने एक बार मेरी तरफ देखा, मैने आँख मारी। अनुज बोले, ओके डीयर।
लौंडे ने अनुज की जांघे पकड़ कर थोड़ा जोर लगाया तो करीब आधा लौड़ा अनुज के अंदर। अनुज दर्द के मारे कराह उठे, बोले प्लीज धीरे से। बोला ओके। लौंडे की टोपी पर थोड़ा खून लगा था, मतलब अनुज की गांड पहले झटके में ही गई। मैने लौंडे को लौड़ा छुपाने का इशारा किया और फिर से जेल लगाने का इशारा किया। लौंडे ने पीछे मुंह घुमा कर फिर जेल लगाया और इस बार अनुज की जांघे अपने कंधे पर चढ़ाकर और थोड़ा और फैला कर लौड़ा रखा और पूरे जोर से घुसेड़ा, तो अनुज "ओह नो, ओह, मार डाला रे" कहकर चीख पड़े। पर लौंडा दूसरे राउंड में नहीं रुकता, ये मुझे पता था। सो अनुज को बिना ध्यान दिये हुए चोदना चालू किया। बड़ा लौड़ा होने के नाते और जांघे ऊपर होने से लगभग 15 सेमी का आगे पीछे मोशन होने लगा। अनुज पीड़ा में थे, पर लौंडा निर्बाध, सम गति से चोदता जा रहा था । जांघों पर पकड़ ऐसी थी कि हिलने डुलने का मौका ही नहीं था। अब अनुज को भी मजा आने लगा था, वह नितंब हिला हिला के पूरा ले रहे थे। लगभग 6-7 मिनट चोदने के बाद लौंडा थोड़ा धीमा पड़ा और अनुज "ऊ आआह आआआह" करके निढाल हो उठे। मतलब कार्य संपन्न हो चुका था। और लौड़ा निकलने पर कई जगह रक्त चिपका था। मतलब आज अनुज का कार्य पूर्णरूपेण संपन्न हो गया। मैने पूछा, अनुज ठीक हो, और मजा आया। बोले, शुरू में बहुत दर्द हुआ पर बाद में बहुत मजा आया, और लौंडे की तरफ देख कर बोले, तेरा वास्तव में बहुत बड़ा और मोटा है, और तू चोदता भी अच्छा है। लौंडे का चेहरा शर्म से लाल हो गया और मुसकरा दिया। मैने इस अवसर का फायदा उठाकर उसे जकड़ लिया और अवसर का फायदा उठाते हुए उसने चिपके चिपके ही मेरे कपड़े भी उतार डालें। अब तीनों लोग वस्त्र विहीन थे।
मैने कहा अब नेक्स्ट। तीनों एक दूसरे को देखने लगे। मैने लौंडे से कहा, मैं तेरी चोदूं बेटा। बोला ओके अंकल। मतलब आज पूरा एंजॉय करने के मूड में था। मैने कहा, "लेट जा", लौंडा औंधा हो के लेटा। मैने कहा, ना ना, जैसे सर की चोदी थी, वैसे। लौंडा मुस्कराया और बोला ओके अंकल, मेरा वार मेरे ऊपर। इस पर मैने उसका लौड़ा पकड़ कर मल दिया, और कहा, ना रे, बस एंजॉयमेंट के लिए। उधर मेरे अनुज इस कार्यक्रम का प्रवाह देख कर चकित हो रहे थे कि सब ऑटोमैटिक चल रहा था।
अब तक लौंडा चित लेट चुका था, मैने उसकी गांड़ थोड़ा सहलाया और अपने लौड़े को भी सहलाया। फिर एलोवेरा जेल लाकर उसकी गांड़ तर किया पर उंगली डालने पर लौंडा थोड़ा "ओह" कहकर थोड़ा कुन्मुनाया, पर कोई बात नहीं ये सब तो कॉमन था। अब वही जेल लौड़े में पोत कर उसकी टांगे अपने कंधे पर लादी और लौड़ा गांड़ पर लगाया। पूछा, डालूँ बेटा, बोला ओके। मैने थोड़ा जोर लगाया और लगभग आधा लौड़ा अंदर, लौंडा बोला, ओह नो। अब मैने लौड़ा निकाल कर थोड़ा और जेल लगाकर जांघे जकड़ी और पूरा जोर लगाकर घुसेड़ा तो पूरा लौड़ा घुस गया। लौंडा तो खेला खाया था ही, थोड़ा "ऊह ऊह" करके चुदता रहा और मैं भी भक्काभक चोदता रहा। 4-5 मिनट तक चोद कर मैं भी मस्त हो गया और सर्र सर्र करके अपना मॉल उड़ेल दिया। लौंडा भी आआह करके टांगे नीचे करके शांत हो गया। सबसे मजेदार बात तो ये हुई कि मुझे चोदते देखकर अनुज भी अनियंत्रित हो चुके थे सो बगल में वो हांथों का इस्तेमाल करके स्वयं को शांत कर रहे थे। उनको देख कर मैने और लौंडे, दोनों ने कस कर पकड़ कर चूम लिया, और अनुज गदगद हो चुके थे।
अब कहानी थी कि लौंडा अनुज की चोद चुका था, और मैने लौंडे की चोद दी थी, बचा खुचा अनुज भी सड़का मार चुके थे। तो अब आगे क्या। एक शून्य सा उत्पन्न हो गया था। पर लौंडा, जो मुख्य रूप से मुझसे मस्ती करने आया था, उसका मिशन अभी पूरा नहीं हुआ था, यद्यपि वो अनुज की फाड़ चुका था। तो शांति को भंग करते हुए लौंडा बोला, अंकल मैं आपकी चोद दूं क्या। मैने भी ज्यादा गणना किए बगैर कहा, चल चोद ले।
लौंडे ने मेरी चोद डाली!!
बोला लेटिए अंकल। मैने कहा कैसे, और लगा कि लौंडा आज पूरा प्लान से आया है। बोला साइडवाइज लेट जाइए। मैंने हैरान हो अनुज की ओर देखा, अनुज भी हतप्रभ थे कि लौंडे का क्या प्लान हो सकता है। खैर, उसने मुझे कुछ ऐसा लिटाया और खुद ऐसे लेता कि उसका दाहिना हाथ ऊपर था, शायद वो टाइट ग्रिप बनाने के लिए उसने ऐसी व्यवस्था किया था। अब उसने सेटिंग शुरू की। उसका पैर नीचे और उसके ऊपर मेरा पैर, इससे उसके लौड़े की मेरी गांड़ पर सीधी पहुंच थी। अब चूंकि दोनों लेट चुके थे सो उसने अनुज से जेल मांगी। और लेटे-2 ही अपने लौड़े व मेरी गांड़ का जेलीकरण किया। इस पूरी सेटिंग के दौरान उसका टनटनाया लौड़ा मेरी गांड़ को चूम रहा था। अब उसने पूछा कि चोदूं अंकल।
मैने कहा यस यस, और सिग्नल मिलते ही काफी जोर से घुसेड़ा तो खूब जेल लगी होने के कारण आधा लौड़ा अंदर घुस गया। दर्द काफी हुआ। मैने कहा, थोड़ा धीमे, बोला ओके। साले ने हरामीपना करते हुए बजाय निकालने के और जोर से घुसेड़ा, और टांगो की पोजिशन ऐसी थी कि मैं हिल भी नहीं सकता था, बस अब लौंडे ने घपाघप्प चोदना शुरू किया और लंबे आयाम से चोदने लगा। करीब 7-8 मिनट तक एकसार चोदते चोदते लौंडा थोड़ा थक सा रहा था और थोड़ा स्लो हुआ पर चोदता रहा।
आज की चुदाई 40/60 थी दर्द और आनंद के मामले में। इस दौरान अनुज मेरा लौड़ा सहला रहे थे। करीब 10 मिनट चोदने पर लौंडा हांफ गया और उसका मॉल सरसरा कर निकल गया। पर पोजीशन ऐसी थी कि साला न उठ रहा था न लौड़ा निकाल रहा था। बस मुस्कराए जा रहा था। मैने कहा क्या हुआ, निकाल क्यों नहीं रहा है। बोला, अंकल मजा आ गया, ये पोजिशन एक वीडियो में देखा था, पर वास्तव में आनंद आ गया। मैने कहा ओके, निकाल ले अब।
उधर हमारे अनुज भी अब तक के पूरे कार्यक्रम मे लिप्त थे, और लौंडे के उठते ही उन्होंने भी मेरा लौड़ा छोड़ दिया। लेकिन मेरा लौड़ा अनुज की लेने को अभी भी मचल रहा था, उसके लिए रात बाकी थी।
अब तीनों लोग संतृप्त हो गए थे। दो एक संयुक्त आलिंगन के उपरांत सबने अपने वस्त्र धारण किए। पर जाने से पहले लौंडे ने अनुज से कहा, सर अगली बार जब भी आप अंकल से मिलने आएं तो मुझे भी इनफॉर्म करवा दीजिएगा, मिलने आ जाऊंगा। मतलब लौंडे को अनुज की गांड भी पसंद आ गई थी।
भ्राता श्री ने रात मे मेरी हसीन गांड़ को प्यार से चोदा, जिससे दिन मे हुई पीड़ा की अनुभूति भी जाती रही, यह यादगार मुलाक़ात थी। तो भाइयो कैसी लगी, आप सब के खड़े लंडों को नमस्कार, कहानी पर विचार जरूर साझा करें, हो सकता है आपको भी मौका मिले कभी हम बंधुवों को मिलने का।
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