गांड मराने वाले को लिफ्ट देकर मजा लिया - Gay Sex Stories
- Kamvasna
- Jul 6
- 10 min read
फ्रेंड्स, बिना किसी भूमिका के सीधे इस Gay Sex Stories में चलते हैं.
सोमवार को प्रोजेक्ट सबके सामने पेश होने वाला था इसलिए आज कैसे भी करके प्रोजेक्ट के सारे मुद्दे हल करने ही थे.
मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि मुझे सप्ताहांत पर काम करना पड़े, इसलिए ऑफिस में देर तक रुककर मैंने पूरा प्रोजेक्ट खत्म कर दिया था.
वैसे भी बीवी-बच्चे गांव गए थे तो मैं घर पर अकेला ही था.
मैंने सोचा कि आज देर तक रुककर काम निपटा ही देता हूँ.
बस इसी चक्कर में बहुत देर हो गई थी.
ऑफिस से निकलते-निकलते मेरी नजर घड़ी पर गई तो रात के एक बजे का समय हो गया था.
मैं बाइक लेकर चल दिया.
सड़कें सुनसान थीं.
कभी-कभी कोई एक-दो गाड़ियां निकलती हुई दिख जातीं, पर बाद में रोड फिर सुनसान हो जाती और रात का सन्नाटा पसर जाता.
आपका शहर कितना भी सुरक्षित हो, पर रात में सुनसान रास्ते पर जब आप अकेले होते हो, तो मन में संदेह और डर के विचार तो आते ही हैं.
कुछ उन्हीं ख्यालों में मैं खोया आगे बढ़ता जा रहा था कि तभी एक बंदा दिखा, जो लिफ्ट के लिए हाथ दिखा रहा था.
वह 28-30 साल का बंदा था; दिखने में ठीक-ठाक और मजबूत शरीर वाला.
उसने चुस्त सी टी-शर्ट पहनी थी, जिससे उसका गठीला बदन साफ झलक रहा था और नीचे लोअर पहना हुआ था.
मन में बुरे विचार आ रहे थे कि सुनसान सड़क है, कुछ भी हो सकता है.
पर यह भी ख्याल आया कि यदि सच में जरूरतमंद हुआ तो?
ये इतनी रात को वह कहां जाकर मदद लेगा?
मैंने उसके पास जाकर बाइक रोक दी.
वह पीछे बैठ गया और मैं फिर से ड्राइव करने लगा.
हमारे बीच कोई बात नहीं हुई.
न मैंने उससे पूछा कि कहां जाना है, न उसने बताया.
हम दोनों खामोश थे.
वही सुनसान सड़क और रात का गहरा सन्नाटा … मैं बाइक चला रहा था और वह चुपचाप बैठा था.
थोड़ी आगे जाने पर 8-10 छोटे-छोटे गति अवरोधक एक साथ आए … जिससे बाइक ‘डग-डग-डग’ करके चलने लगी.
संतुलन बनाने के लिए उसने मुझे सहारे के लिए कमर के पास से पकड़ लिया.
मैंने कॉटन की पतले कपड़े की शर्ट पहनी हुई थी और अन्दर बनियान भी नहीं थी. इस कारण मुझे उसके हाथों का गर्म स्पर्श एकदम ऐसे अनुभव हुआ, जैसे उसने मेरे नंगे बदन को छू लिया हो.
मैंने एकदम से किसी का ऐसा स्पर्श अपने बदन पर महसूस किया, तो मुझे बहुत बेचैनी होने लगी … जिस्म में एक अजीब सी उत्तेजना होने लगी.
कभी गौर करना, जब आप वाहन चलाते वक्त बहुत जोश में होते हो या गुस्से में होते हो, तो गाड़ी की स्पीड अपने आप बढ़ने लगती है और आपको पता भी नहीं चलता कि ऐसा कब हो गया.
उसने जब मेरी कमर पर हाथ रखा, तो मेरे अन्दर हलचल मच रही थी, इसी बेचैनी में मेरा ध्यान सड़क से हटा और गति बढ़ गई.
तभी एक बड़ा सा गति अवरोधक सामने आ गया.
‘अरे…’
मैंने एकदम से जोर से ब्रेक लगाया, पर फिर भी गाड़ी को जोर का झटका लगा.
उस धक्के के कारण वह आगे की तरफ सरक आया और उसने सहारे के लिए अपने दोनों हाथ मेरी दोनों जांघों पर मजबूती से रख दिए.
मैंने बाइक को थोड़ा स्लो किया और फिर पहले की तरह ही चलाने लगा.
अब भी हम दोनों शांत थे.
चारों ओर रात का सन्नाटा और सुनसान सड़क थी, पर मेरे अन्दर बहुत हलचल मची हुई थी.
उसके दोनों हाथ मेरी दोनों जांघों पर थे.
छोटे-मोटे झटकों से उसके हाथ ऐसे आगे-पीछे होते, जैसे कोई मेरी जांघों को सहला रहा हो.
कभी-कभी मुझे ऐसा लगता कि मामूली से धचकों में भी उसके हाथ जानबूझ कर आगे-पीछे हो रहे हैं.
जैसे वह जान-बूझकर मेरी जांघों को सहला रहा हो.
मेरा लंड पूरी तरह तन कर खड़ा हो चुका था.
थोड़ी देर बाद मुझे अहसास हुआ कि उसका हाथ मेरी जांघों के जोड़ की तरफ बढ़ रहा है.
मेरा लंड तो पहले ही फड़फड़ा रहा था, ऊपर से उसके हाथ अब मेरे लंड के काफी पास आ चुके थे.
हम दोनों एकदम चुपचाप और शांत थे, पर मेरे जिस्म में तो आग लगी थी.
मौन, स्वीकृति का ही दूसरा नाम है.
मैं मौन था, जिसे वह मेरी स्वीकृति मान रहा था और उसकी हरकतें बढ़ती ही जा रही थीं.
मेरे अन्दर उठते तूफान और फड़फड़ाते लंड के कारण दिमाग में तरह-तरह के विचार चल रहे थे.
मैं अपने ही ख्यालों में खोया था कि तभी आगे एक गड्ढा आ गया और मैंने तुरंत ब्रेक लगा दिया.
गाड़ी पूरी तरह रुक चुकी थी.
एकदम ब्रेक लगने से वह झटके से आगे की तरफ आया और उसकी छाती मेरी पीठ से बिल्कुल चिपक गई.
खुद को संभालने के लिए उसने सीधे हाथ से मेरे पेट को पकड़ लिया, जबकि उसका उल्टा हाथ अब भी मेरी जांघ पर ही था.
बाइक को एकदम रोकने पर उसने बस इतना ही कहा- ईज़ी!
मैंने फिर से ड्राइव करना शुरू किया.
गड्ढा आना, ब्रेक लगाना और उस तेज झटके के बीच मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि कब उसने मुझे अपने जिस्म से चिपका लिया.
जब थोड़ा आगे गए और ठंडी हवा लगी, तब मेरा दिमाग कुछ शांत हुआ.
उस ठंडक में मुझे अपनी पीठ पर उसके जिस्म की गर्माहट महसूस हुई.
उसका उल्टा हाथ मेरी जांघ पर, मेरे लंड के एकदम पास था; बल्कि उसका अंगूठा तो मेरी गोटियों के उभारों को महसूस भी कर रहा था.
उसका सीधा हाथ मेरे पेट से धीरे-धीरे ऊपर मेरी छाती की तरफ सरक रहा था और उस हाथ का हल्का दबाव भी महसूस हो रहा था, जैसे उसने मुझे अपनी बांहों में जकड़ रखा हो.
मेरे बदन में आग लग चुकी थी, जिस्म पूरी तरह गर्मा गया था और रग-रग में हवस दौड़ रही थी.
मेरा लंड बेतहाशा फड़फड़ा रहा था.
तभी उसने मेरे कान के पास झुककर कहा- आगे से राइट में मोड़ लो, मैं अकेला रहता हूँ … आपको हर तरह से खुश कर दूँगा!
मैंने चुपचाप गाड़ी राइट में मोड़ ली, जैसे मैं उसके घर जाने को ही निकला था.
उसे ग्रीन सिग्नल मिल चुका था और अब कोई डर नहीं था.
उसने अपने उलटे हाथ को मेरे फड़फड़ाते लंड पर रख दिया और सीधे हाथ को मेरी छाती पर रखकर मेरे निप्पल को सहलाने लगा.
वह मुझे आगे का रास्ता बताता जा रहा था.
महज 5 मिनट में हम दोनों उसकी सोसाइटी की पार्किंग में थे.
उसका फ्लैट चौथी मंजिल पर था.
लिफ्ट से हम दोनों फ्लैट के अन्दर आ गए.
मैं हॉल में रखे सोफे पर धप्प से पसर गया और अपने बैग को सामने की टेबल पर रख दिया.
वह मुझसे एकदम चिपक कर बैठा और मुझे बांहों में कस कर मेरे होंठों को चूमने लगा.
मैंने अपने होंठों को कस कर बंद किया और ‘मम्म आह म्माआह …’ करके उससे कुछ कहने की कोशिश करने लगा.
जब वह मेरे होंठों से अलग हुआ तो मैंने उससे कहा- मैं दिन भर से ऑफिस में था, मुझे हाथ-मुँह धो लेने दो. तुमसे ज्यादा मैं तड़प रहा हूँ, मुझे ही पता है कि कितनी मुश्किल से खुद को कंट्रोल कर रहा हूँ!
मैंने उससे एक टॉवल लिया और बाथरूम में जाकर नहाया.
टूथपेस्ट अन्दर ही था, तो उंगली पर पेस्ट लेकर उसी से मुँह साफ किया.
बाहर आकर मैंने सिर्फ टॉवल लपेटा हुआ था और अपने सारे कपड़े बाहर टेबल पर रख दिए.
वह दूसरे कमरे के बाथरूम से फ्रेश होकर पहले ही सोफे पर बैठा मेरा इंतज़ार कर रहा था.
उसने सेंडो बनियान और छोटी कट वाली ब्लैक अंडरवियर पहनी थी.
उसे इस तरह देख कर मेरा लंड एकदम कड़क हो गया.
जब मैंने टॉवल लपेटा था, तब मेरा लंड लटक रहा था … पर उसे देखते ही वह फड़फड़ा उठा.
अब टॉवल के अन्दर लंड सीधा खड़ा तो हो नहीं सकता था इसलिए वह एकदम से आगे की तरफ आड़ा हो गया, जिससे टॉवल आगे से 6 इंच ऊपर उठ गया.
मैं वैसे ही उसके सामने जाकर खड़ा हो गया.
वह सोफे पर बैठा था और मैं उसके सामने टॉवल में अपने लंड का 6 इंच का पहाड़ लिए खड़ा था.
अब तो कोई रुकावट नहीं थी और न ही हम दोनों में कंट्रोल करने की हिम्मत बची थी.
उसने तुरंत अपनी सेंडो बनियान निकाली और मेरे टॉवल के अन्दर दोनों हाथ डाल कर मेरी दोनों जांघों को सहलाया.
फिर उसने मेरे लंड को पकड़ कर टॉवल ऊपर किया और उसे अपने मुँह में ले लिया.
ओहह … लंड चुसाई का सुख ही कुछ और होता है.
अच्छे-अच्छे ईमान वाले इसके आगे डगमगा जाएं.
जो लोग खुद को ‘स्ट्रेट’ बोलते हैं, एक बार किसी बॉटम से लंड चुसवा कर देखो, फिर देखना कि तुम्हारा स्ट्रेट होने का घमंड कैसे मिट्टी में मिलता है!
अच्छे-अच्छे स्ट्रेट मचल उठेंगे बॉटम्स से लंड चुसवाने के लिए!
कब टॉवल नीचे गिरा, पता ही नहीं चला.
उसकी लार से भरी गीली लंड चुसाई ने मेरे नंगे बदन में आग लगा दी थी.
कभी वह मेरा लंड चूसता, तो कभी मैं उसका सिर पकड़ कर उसके मुँह को चोदता.
कोई 15-20 मिनट तक पूरी शिद्दत से मेरे लंड की चुसाई करने के बाद वह उठा और अपनी ब्रीफ निकाल दी.
अब वह भी पूरा नंगा हो गया था. उसने अपने गठीले बदन की बांहों में मेरे नंगे बदन को कसकर जकड़ लिया.
हम एक-दूसरे को चूमते हुए, एक-दूसरे के नग्न शरीर से खेल रहे थे.
हमारे नग्न जिस्म होंठों से लेकर पैरों तक एक-दूसरे से चिपके हुए थे और हमारे होंठ निरंतर एक-दूसरे को चूम रहे थे.
बांहों में कसकर जकड़े होने के कारण हमारी छाती और पेट पूरी तरह आपस में मिले हुए थे.
हम अपने फड़फड़ाते अंगों से एक-दूसरे को रगड़ रहे थे और एक पैर पर खड़े होकर, दूसरे पैर से एक-दूसरे की जांघों को सहला रहे थे.
ऐसा लग रहा था मानो दो जिस्म एक हो चुके हों.
कुछ देर बाद, उसने मुझे सोफे पर लेटा दिया और बेताबी से मेरे लंड को चूसने लगा.
उसके कठोर हाथ मेरी जांघों और मेरे नग्न लंड को सहला रहे थे.
मैं सोफे पर सीधा लेटा था; सोफे का जो पिछला हिस्सा था, उस तरफ का पैर मैंने सीधा रखा था और दूसरे पैर को घुटने से मोड़कर सोफे के नीचे लटका दिया था.
मेरा लंड चुसाई की वजह से पथरीला हो चुका था.
उसने कंडोम लिया, उसे मेरे लौड़े पर चढ़ा दिया.
फिर जिस तरह सोफे पर टेक लगाकर बैठते हैं, वैसे ही वह मेरे ऊपर बैठ गया.
उसका पूरा वजन मेरे ऊपर था, जिससे मेरा पूरा 6 इंच का लंड उसकी गांड में सीधा समा गया.
अब वह अपने पैरों पर जोर देकर अपनी गांड को ऊपर-नीचे करते हुए खुद को चुदवाने लगा.
थोड़ी देर इस तरह करने के बाद, मैंने उसे सोफे पर सीधा बैठाया और थोड़ा आगे खिसका कर उसके दोनों पैर पकड़ कर ऊपर उठा दिए.
फिर सामने खड़े होकर अपना लंड मैंने उसकी गांड में घुसेड़ दिया और उसे जोर-शोर से चोदने लगा.
करीब 10-15 मिनट तक चुदने के बाद उसने उत्तेजना में कहा- पोजीशन चेंज करें? अगर तुम्हें कोई कुछ अलग सी पोजीशन पता हो तो हम उसे ट्राई करते हैं!
मैंने जवाब दिया- ओके जान, जैसा मैं बताता हूँ, वैसा करो!
जहां सोफे पर बैठते समय हम पैर रखते हैं, वहां उसका सिर रखकर मैंने उसे कालीन पर सीधा लेटाया.
फिर उसके पैरों को उठाते हुए, सीधे उसके मुँह के ऊपर से ले जाकर उसके सिर के पीछे कालीन से छुआ दिया.
यह मुद्रा ‘हलासन’ की तरह थी, जिससे उसकी गांड का छेद एकदम ऊपर की ओर आ गया था.
अब मैंने अपने पैर सोफे पर फैलाए और अपने हाथ सोफे के सामने रखी मेज पर टिका दिए.
मेरी मुद्रा ‘एल्बो प्लांक’ या डिप्स मारने जैसी थी.
मेज मेरी कोहनियों में चुभे नहीं इसलिए मैंने वहां सोफे के कुशन रख लिए थे.
वह नीचे हलासन में था और मैं ऊपर प्लांक की पोजीशन में … मेरे पैर सोफे पर थे, हाथ मेज पर और बाकी जिस्म हवा में.
मैंने अपना कड़ा लंड उसकी गांड में डाल दिया और अपनी कमर को ऊपर-नीचे करते हुए उसे चोदने लगा.
इस तरह की पोजीशन में ताकत की बहुत ज़रूरत पड़ती है.
साधारणतः मैं 50-60 सेकंड से ज़्यादा बार डिप्स नहीं कर पाता, पर हवस की मदहोशी इंसान से सब कुछ करा लेती है.
मैंने उसे उसी पोजीशन में कुछ डेढ़ मिनट तक चोदा और जब मैं थक जाता, तो अपने शरीर का पूरा वजन उसकी गांड पर डाल देता, जिससे मेरा लंड पूरी गहराई तक उसके अन्दर समा जाता.
फिर 10-15 सेकंड आराम करके मैं फिर 30-35 सेकंड तक उसे चोदने लगता और फिर आराम करने लगता.
इसी तरह यह सिलसिला चलता रहा.
पांच मिनट में ही हम दोनों थक गए थे क्योंकि हलासन में पीठ पर पूरा खिंचाव होता है और पेट पूरा दबा हुआ होता है, और इस मुद्रा में अन्दर बाहर में तो करवाने वाले की समझो जान ही निकल जाती है.
हम दोनों उठे.
वह सोफे पर उल्टा लेट गया और मैं उसके ऊपर आ गया.
मैंने अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया.
पिछली पोजीशन से हम बहुत थक गए थे, तो दोनों को आराम चाहिए था.
हम दोनों लंड गांड के गठजोड़ को बनाए हुए कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे.
कुछ मिनट बाद मैंने अपनी गांड को ऊपर-नीचे करना शुरू किया और उसे चोदने लगा.
जब उसे भी अच्छा लगने लगा, तो उसने भी अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दिया, ताकि मेरा पूरा लंड अन्दर जा सके.
थोड़ी देर बाद मैंने उसे वैसे ही उठा कर कुतिया के जैसे बना दिया.
अब मैंने अपना एक पैर सोफे पर और दूसरा पैर नीचे रख कर खड़े-खड़े उसे चोदना शुरू किया.
अलग-अलग आसनों में चोदते हुए करीब डेढ़ घंटा हो चुका था और अधिकतर पोजीशन में मैं ही एक्टिव था.
यानि मेरे शरीर के मूवमेंट्स ज्यादा थे.
चाहे उल्टा लेटकर चोदना हो, डॉगी स्टाइल, खड़े होकर या उसे लंड पर बैठाकर, इन सभी में मेरी मेहनत ज्यादा लग रही थी.
अब मुझे थोड़ा आराम चाहिए था, इसलिए हम दोनों बेडरूम में आ गए.
मैं बेड पर सीधा लेट गया और वह मेरे लंड पर बैठकर चुदवाने लगा.
आह … क्या मज़ा आने लगा था.
उसका पूरा वजन मेरे लंड पर था, जिससे मेरा लंड उसकी गांड में गहराई तक घुसा हुआ था.
इसी मस्ती में वह जोर-जोर से उचक-उचक कर चुदवा रहा था.
मेरे लंड पर भी जबरदस्त खिंचाव पड़ रहा था और वह पूरी तरह उत्तेजित होकर और भी कड़क और फूल चुका था.
लंड का यह कड़कपन हम दोनों को ही पागल कर रहा था.
मेरा जिस्म अकड़ रहा था और मुँह से आहें निकल रही थीं.
उसकी स्पीड बढ़ती जा रही थी और पूरी मस्ती में गांड को उचका-उचका कर वह चुद रहा था.
मेरा टाइम करीब आ गया था.
मैं उसके नंगे जिस्म और उसकी जांघों को सहलाने लगा.
मैंने अपनी दो उंगलियां उसके मुँह में दीं, जिन्हें वह पागलों की तरह चूसने लगा.
वह लंड पर बैठकर अब और भी तेजी से उचकने लगा.
वह अपने लंड को पकड़ कर हिलाने ही वाला था कि तभी मेरा लंड फट पड़ा.
ठीक उसी समय उसने भी अपने लंड को दोनों हाथों की मुट्ठी में जकड़ा और उसका लंड भी डिस्चार्ज हो गया.
उसने बेड के पास से टॉवल लिया, अपने लंड और हाथों को पौंछा और वैसे ही मेरे नंगे जिस्म पर लेट गया.
दोनों के जिस्म अब ठंडे पड़ चुके थे.
वह काफी देर तक मेरे नंगे बदन पर पड़ा रहा.
करीब 15 मिनट बाद उसके नंगे बदन के स्पर्श से मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा, पर वह अभी भी वैसे ही मेरे ऊपर शांत लेटा था.
जब वह पूरी तरह रिलैक्स हो गया तो उसने बेड पर एक सॉफ्ट प्लास्टिक की शीट बिछाई और मुझे बॉडी मसाज दी.
तेल से लथपथ बदन के साथ ही हमारा दूसरा राउंड शुरू हुआ.
जब हम दोबारा से ठंडे हुए, तब तक हम दोनों के नंगे जिस्म तेल से सन चुके थे.
हम दोनों ही इतने अधिक थक चुके थे कि एक-दूसरे के जिस्मों से चिपके हुए ही बेड पर पड़े रहे और कब नींद की आगोश में चले गए, पता ही नहीं चला.
जब दिमाग शांत हुआ, तब ठंडी हवा के बीच मुझे अपनी पीठ पर उसके जिस्म की गर्माहट महसूस हुई.
तब मुझे होश आया कि उसका उल्टा हाथ मेरी जांघ पर, मेरे लंड के एकदम पास था … बल्कि उसका अंगूठा मेरी गोटियों के उभार को छू रहा था.
यह अहसास मुझे एक मीठी मुस्कान दे गया और हम दोनों पुनः आनन्द के सागर में गोते लगाने के लिए तत्पर होने लगे.
दोस्तो, मेरी इस Gay Sex Stories में आपको कैसा लगा … प्लीज जरूर बताएं.

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