पुनर्मिलन: Gay Sex Stories
कामवासना के सभी पाठकों को अपने प्रिय लेखक डॉ कामेश और भ्राता श्री का अभिनंदन।
साइट के संचालक मण्डल को मेरी हसीन गांड़ का तोहफ़ा एडवांस में कहानी छापने केलिए प्रेषित है।
आइए मजा लीजिये भ्राता श्री और उनके चेले के पुनर्मिलन (इसको उन्होने करीब दो साल पहिले ही गे सेक्स का प्रथम पाठ पढ़ाया था) की कहानी का उनकी ही भाषा शैली में।
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वो आया, पुराना परिचय था, सो आते ही, "हाय अंकल" कहके लिपट गया। क्या गज़ब लग रहा था ब्लैक जींस और क्रीम कलर टी शर्ट में। इन 2-3 सालों में लौंडा और गबरू जवान हो गया था, अंदाजन अब ये 21-22 वर्ष का हो रहा था। शरीर किशोरावस्था की सीमाओं को लांघ कर पूर्ण यौवन के उपवन का शेर बन चुका था। गलमुच्छें अब रोमावली से स्थायी कटीली दाढ़ी में बदल चुकी थीं। मूंछे भी अब पहिले से घनी हो गई थीं। शरीर भी भरा-2 लग रहा था । और लिपटने पर भुजाएं और बलिष्ठ लगीं, शायद जिम जाता था, पूछने पर उसने हामी भरी। और लग रहा था कि आज का मिलन काफी रोमांचक होने वाला है। थोड़े हाल चाल के आदान प्रदान के बाद मैने पूछा कि इतने दिन बाद कैसे याद आयी। बोला, बस अंकल, छुट्टियाँ चल रही हैं, आपका मैसेज पढ़ कर आपसे मिलने की इच्छा हुईं। थैंक्स फार योर कर्टर्सी। मैने कहा इट्स ओके स्वीटहार्ट। और कह कर दोनों लोगों ने एक दूसरे को और जोर से जकड़ लिया। उसकी मांसल बॉडी मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर रही थीं। उधर उसका लौड़ा टनटना कर खड़ा हो गया था और मेरे लौड़े और नाभि के बीच में अच्छा दबाव डाल रहा था। उसका लौड़ा अनुज की अपेक्षित माप से कुछ ज्यादा स्वस्थ लग रहा था जिसका अवलोकन एक दो मिनट में होने वाला था।
फिर कोई संवाद नहीं, सब कुछ फिक्स मैच जैसे चल रहा था। उसने मुझे कस कर चूमा, और मेरा पूरा शरीर झनझना गया। उसने मेरी टी शर्ट और बनियान एक साथ उतार दी और वही कृत्य मैने भी दोहराया। क्या बॉडी थी, वक्षस्थल पर कसरती उभार, एक एक इंच के बाल। बाहों के नीचे थोड़ा बड़े बाल झांकते हुए। मैने उसकी एक चुचि मुँह में ले ली और चूसना शुरू किया, लौंडा बोला अरे अंकल बहुत गुदगुदी हो रही है। पर मैने साथ साथ दूसरी को मलना भी जारी रखा और लौंडा गुदगुदी के मारे फैल सिकुड़ रहा था। मुझे भी मजा आ रहा था उसको तड़पते देख कर।
उधर वो भी मेरे लोअर के ऊपर से ही मेरे नितंब मसलने लगा, जिसकी वजह से मेरी पकड़ ढीली पड़ गई। और इसका फायदा उठा कर उसने मेरी लोअर चढ्ढी के साथ उतार दी और मेरा लौड़ा सहलाने लगा। बोला मस्त है अंकल। मैने कहा जो पहलवान तू लेकर घूम रहा हैं उसके सामने तो बच्चा है ये। उसने लजाते हुये बहुत हसीन लेकिन कुटिल मुस्कान दी। मैने कहा, तू भी अपना औजार बाहर कर दे, बोला, अंकल आप ही कीजिये। ओके कहकर मैने भी उसकी जींस और चढ्ढी उतार दी और 18×4 सेमी से थोड़ा अधिक बड़ा औज़ार मुक्त हो गया था। टोपी लगभग पूरी खुली थी और लौड़ा अंग्रेजी में रॉक हार्ड हो रहा था। पर झांटे काफी बड़ी थीं, मैने पूछा, झांटे साफ नहीं करते। बोला, सोचा था अंकल, पर आपने कॉल करते ही तुरंत बुला लिया, सो टाइम ही नहीं मिला। मैने कहा, कोई बात नहीं, झांटो के रोकने से आज तक कोई लौड़ा रुका है क्या, लौंडा खिलखिला कर हंस दिया। वास्तव में झांटे किसी वृक्ष के आधार पर उगी घास के समान प्रतीत हो रही थीं।
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इससे पहले कि कुछ आगे बात चले, मैने लपक कर लौड़े को मुंह में भर लिया, शायद अब तक का सबसे लंबा और मोटा लौड़ा था। मेरा उद्देश्य गांड़ में दूसरे राउंड में लेने का था ताकि अधिक समय तक ये टिक सके। लौड़ा मुख की श्लेष्म कला को घर्षण करता हुआ मुंह में प्रविष्ट हुआ। लौंडा बोला ये क्या अंकल? मेरे मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी सो इशारों से बताया कि मुख मैथुन कर बेटा!! लौंडा प्रसन्न हो गया और मेरे सिर पर दोनों हाथ रख कर गपगपाने लगा। मुंह छील रहा था लौड़े के आवागमन से, पर न वो रुका न मैने रोका। लगभग 4-5 मिनट तक निर्बाध मुख मैथुन के उपरांत लौंडा थोड़ा स्लो हुआ और लो, सुर्र सुर्र करके गाढ़ा लिंग द्रव लगभग मेरे घांटी द्वार पर उतर गया। उधर लौंडा हा हा हा करके अपनी सांस नियंत्रित करने में लगा था। अब चूंकि आधा क्षारीय द्रव गले से नीचे उतर चुका था सो मैने पूरा ही गटक लिया!! लौड़ा बाहर निकाला तो झड़ने पर भी करीब 12-13 सेमी का औजार था।
मैने पूछा लौंडे से, मजा आया,
बोला हां अंकल,
मैने पूछा नेक्स्ट,
बोला 10 मिनट अंकल।
मैने कहा, तब तक मैं तेरी चोद लूं।
बोला, ओके अंकल,
मैने पूछा, इतने दिनों तक किसी और लौंडे की गांड मारी या लौंडियां की चूत चोदी क्या। बोला नहीं अंकल, चांस नहीं मिला। मैने कहा, कोई गर्ल फ्रेंड है क्या। बोला, जी अंकल। तो उसकी अभी तक "यूज" नहीं किया। बोला, अभी हाल ही में फ्रेंडशिप हुई है, अभी बस किसिंग तक बात आयी है। मौके और जगह की तलाश है। मैने कहा, ऑल द बेस्ट, अपडेट करते रहना। बोला, जी अंकल।
मैने कहा ओके, लेट जा बेटा।
बोला ओके, और, कह कर लेट गया उल्टा। मैने पिछली बार की तरह एलोवीरा जेल निकाला और उसको अपने लौड़े पर पोत लिया, साथ साथ उसकी गांड़ का भी संलेपन किया। दो उंगली गांड़ में डाल कर गुपगुपाया तो लौंडा बोला, अंकल थोड़ा दर्द हो रहा है। मैने कहा ओके, फिर थोड़ा सा जेल और लगा के लौड़ा रखा और थोड़ा प्रेस किया तो आधा लौड़ा अंदर। लौंडा "अम्माआंआं" कहकर थोड़ा चीखा, मैने कहा, क्या हुआ। बोला थोड़ा दर्द हुआ अंकल। ओके, निकाल कर फिर से लौड़े पर जेल लगाकर पूरे जोर से घुसेड़ा तो पूरा लौड़ा अंदर हो गया। लौंडा, "ओह नो ओह नो" करने लगा, पर अब मैने उसे थोड़ा जकड़ कर चोदना शुरू किया। थोड़ी देर तक कराह कर लौंडा शांत हुआ, शायद गांड़ लौड़े को एडजेस्ट कर चुकी थी। चोदता रहा, चोदता रहा, करीब 3-4 मिनट बाद मैं चरम पर और लौड़ा झर्र झर्र करके अपना मॉल उगल दिया। मैं और लौंडा साथ साथ रिलैक्स हुए और लौड़ा निकाला तो थोड़ा खून लगा था। मतलब लौंडा वास्तव में पीड़ा में था। खैर उसको बाँहो में पकड़ते हुए पूछा, बहुत दर्द हुआ क्या?? बोला, हां अंकल, शायद बहुत दिन बाद डलवाया था, इसलिए। मैने कहा, कोई बात नहीं, मजा आया। बोला जी अंकल, आपका झड़ने से थोड़ी देर पहले बहुत मजा आ रहा था।
ओके, नेक्स्ट। बोला, अब अंकल मैं...
मैने उसके मुंह पर हाथ रखा और कहा, स्योर
उसका लौड़ा देख के थोड़ा डर लग रहा था। फिर भी डलवाना तो था ही। मैने उसके लौड़े पर पर्याप्त मात्रा में जेल लगाया और लेपन किया, फिर उससे कहा कि मेरी गांड़ में भी जेल लगा दे। उसने मेरे नक्शे कदम पर चलते हुए दोनों उंगलियों पर काफी सारी जेल लगा कर पूरी गांड़ में पोत दिया। और पकड़ कर मुझे उल्टा लिटा दिया। मेरी टांगे बिस्तर से नीचे झूल रही थीं। और लौंडा अपने लौड़े को मलते सहलाते हुए अपना टोपा रखा, साला लग रहा गांड की सीमा के बाहर रखा है। लौंडे ने जोर लगाया तो किसी तरह टोपी घुसी पर जैसे लगा कि गांड़ की बाउंड्री रगड़ गई। मेरे मुंह से "ऊंह" निकला। लौंडा बोला, क्या हुआ अंकल, मैने कहा कुछ नहीं, निकाल ले और थोड़ा जेल और लगा ले। बोला ओके। जेल लगाकर फिर चढ़ा, और इस बार करीब 2-3 गुना जोर से धक्का दिया, फलतः लौड़ा जो निस्संदेह टोपी से ज्यादा परिधि का था, अंदर घुसता गया। साफ पता चल रहा था लौड़े की यात्रा का मार्ग। पर दर्द बहुत हुआ। अनुज के अंदाज से थोड़ा और लंबा और मोटा हो गया था लंड इसका। मैंने कहा, ओह नो, ओह नो, निकाल ले।
क्या हुआ अंकल, मैने कहा बहुत दर्द हुआ रे। 2 मिनट रुक जा। देखा, लौड़े पर खून लगा था मतलब मेरी गांड़ फट चुकी थी। उधर लौंडा लौड़े को सहला सहला कर टन्नाए जा रहा था। मैने कहा, चल फिर से घुसेड़। बोला ओके, इस बार मैने खुद जेल पूरे लौड़े पे पोता। लौंडा फिर चढ़ा और इस बार शायद उससे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। सो उसने मुझे लगभग जकड़ कर पूरे जोर से लौड़ा घोंप दिया। सरसराते हुए पूरा लौड़ा गांड़ में उतर गया, और काफी दर्द हुआ, पर अब क्या होना था, लौंडे ने 15-16 सेमी के स्ट्रोक्स लगाने शुरू किए। करीब 1-2 मिनट तक तो काफी तकलीफ देह था पर उसके बाद शायद मैं भी अभ्यस्त हो गया। चोदता रहा, 5 मिनट, 7 मिनट; लगभग 10-11 मिनट तक समान गति से चोदने के बाद थोड़ा स्पीड कम हुई और सरसरा कर लौंडे ने मॉल उगल दिया। और सेकंड राउंड का ऊर्जा शोषक चुदाई थी सो लौंडा ऊपर ही लेटा रहा। करीब 2 मिनट बाद उसने निकाला तो लौड़े जगह जगह पर रक्त लगा था। मतलब लौंडे ने कहर बरपाने वाली चुदाई की। बोला सारी अंकल, आपको बहुत दर्द हुआ। नहीं रे, इट्स ओके।
तत्पश्चात दोनों ने जाकर बाथरूम में अपने लौड़े और गांड को धोया और पोंछ कर एंटीसेप्टिक क्रीम का लेपन किया। मैने पूछा, तुझे मजा आया रे। बोला, इतनी टाइट थी अंकल कि एक बार लौड़ा अंदर जाने पर मैं खुद को रोक ही नहीं पा रहा था। बहुत बहुत मजा आया अंकल। मैने मन में सोचा कि चिथड़ा कर दी, मजा तो आया ही होगा।
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कपड़े पहन कर मैने पूछा चाय पियेगा बच्चे। बोला, ओके अंकल। चाय पिलाकर लौंडे को विदा किया। पर जाते हुये बोला, अंकल विल लव टू कम अगेन। मैने कहा, स्योर, जल्दी आना मेरे प्यारे शिष्य।
कहानी सुनाते हुये भ्राता श्री का सीना गर्व से चौड़ा होगया और औज़ार भी फिर से टनटना गया, आखिर हर गुरु का सपना होता है कि उसका शिष्य नाम रोशन करे। आप लोगों मे से जिनके भी औज़ार खड़े हो गए हों या नितंब लेने को लालायित हो रहे हों, कृपया कहानी को लाइक जरूर करें।
आपका डॉ कामेश।
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