चुदासी पड़ोसन ने मुझसे चुदवाकर अपनी आग बुझाई - Hindi Sex Stories
- Kamvasna
- Feb 12
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ये बात इस समय की है जब मैंने उत्तर प्रदेश के बिलारी जिले में एक नई फैक्ट्री में सुपरवाइजर के तौर पर जॉइन करा था। मैं बिलारी के ही एक मोहल्ले में किराए पर एक अलग कमरा लेकर रहता था।
बिलारी जिले की सोच से अगर आप वाकिफ हैं तो आपको पता होगा कि वहां मोहल्ले के अंदर ही अंदर छुपी चुदाई एक साधारण-सी बात है। मैं अपनी फैक्ट्री में बड़ी मेहनत से काम करता जा रहा था।
मेरे ऊपर काम का बोझ बढ़ता जा रहा था तो मेरी फैक्ट्री ने मुझे एक हेल्पर ट्रेनी के रूप में एक लड़की दे दी। वह छह महीने की ट्रेनिंग के लिए मेरे साथ काम करने आई थी। वह लड़की मूल रूप से कानपुर की रहने वाली थी और बहुत सुंदर लड़की थी।
उसकी 28 की चूचियां बहुत मस्त थीं और उसकी 32 की गांड भी बहुत फैली हुई थी। मैं सुबह-सुबह ही फैक्ट्री चला जाया करता था।
एक दिन उसने मुझसे कहा- रवि भैया, मैं आपके साथ मूवी देखना चाहती हूँ! मैं भी बोर हो रहा था तो मैंने कहा- चलो!
हम दोनों रात 8 बजे के शो में मूवी देखने चले गए। मूवी खत्म होने पर उसने कहा- अब मैं अपने घर नहीं जा सकती बहुत ज़्यादा रात हो गई है।
कोई परेशानी न हो तो मैं आपके साथ चलूँ? अगला दिन रविवार का था, तो फैक्ट्री जाने की कोई टेंशन भी नहीं थी। मगर बिलारी एक छोटा इलाका है तो वहां एक घर के कमरे से अंजान लड़का लड़की का निकलते दिखाना ऐतराज़ की बात थी।
फिर भी मौके की नज़ाकत को देखते हुए मैंने कहा- हां चलो, पहले बाहर डिनर कर लेते हैं ,फिर कमरे पर चलेंगे! उसने ओके कहा और हम दोनों ने एक ढाबे में साथ में डिनर करा।
फिर साइकिल पर हम दोनों मेरे रूम पर आ गए। मेरे रूम में एक ही बेड था, तो मैंने कहा- तुम बेड पर सो जाओ, मैं नीचे सो जाऊंगा। तब उसने कोई जवाब नहीं दिया। हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े बदले।
मैं हाफ पैंट में था और वह लोअर में। लोअर में उसकी चूत का आकार देखकर मेरा मन विचलित हो गया। उसने ब्रा खोलकर गेट के पीछे टांग दी थी और उसकी हिलती चूचियों को देखकर मेरा मन मचलने लगा।
अचानक मैंने देखा के उसकी नजरें बार-बार मेरे लंड के उभार को भाँपने में लगी थीं। खैर, मैंने अपने लिए नीचे गद्दा लगाया और लेट गया। मैंने उससे कहा- कोई दिक्कत हो तो जगा देना।
वैसे नींद तो मुझे आ नहीं रही थी लेकिन मैं आंखें बंद करने का नाटक कर रहा था। नाइट बल्ब की रोशनी में मैंने देखा तो मुझे अहसास हुआ की वह अपनी चूत को अपने हाथों से रगड़ रही थी और सिसकारियां ले रही थी।
मैं और मजा लेने के मूड में था तो चुपचाप देख रहा था। वह अपनी चूचियों को भी मसल रही थी लेकिन शर्म की वजह से मुझसे कुछ कह नहीं रही थी क्योंकि मैं उसका सीनियर था।
अचानक मैं उठा और पानी पीने लगा, तो उसने कहा- मुझे ऐसे सोने की आदत नहीं इसलिए नींद नहीं आ रही है। या तो आप ऊपर आ जाइए या मैं नीचे आ जाऊंगी सोने के लिए!
मैंने कहा- मैं ऊपर आ जाता हूँ। चूंकि नीचे मुझे भी नींद नहीं आ रही थी। मैं उसके बगल में बेड पर लेट गया और सोने की कोशिश कर रहा था के अचानक उसका हाथ मेरे पेट पर आ गया।
मैंने उसे देखा तो वह बोली- मैं ऐसे ही सोऊंगी, मैं घर पर अपनी बहन के साथ इस तरह सोती हूं तो वही आदत पड़ गई है। अब मेरी नज़रे भी बहक रही थी तो मैने विरोध नहीं करा।
उसकी चूचियों का दबाव मेरे सीने पर पड़ रहा था और उधर मेरा लंड भूचाल मचाने लगा था।
लंड के अकड़ने का अहसास सीमा को हो गया था, तो उसने अपना घुटना मेरे लंड पर रख दिया और उसकी मर्दानगी को महसूस करने लगी। इधर मेरा लंड लोहे की रॉड की तरह तन रहा था और उधर वह अपनी चूत की वजह से बेचैन होने लगी थी।
अचानक मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और किस करने लगा। किस करने में उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया हमममम! उम्मम, हाफफॉफ! उम्मम की आवाज़ धीरे धीरे कमरे को गरमा ने लगी।
अचानक मेरा हाथ उसकी चूचियों की गोलाइयों को नापने लगा और उसका हाथ मेरे लंड की लंबाई और मोटाई को नापने लगा। मैंने उसकी चूचियों में मुँह लगाया, तो वह हम्मम! अआआह! सर आह! सिसकारने लगी।
एक पल के लिए मुझे डर लगा कि कहीं सिसकारी की आवाज बगल वाली आंटी न सुन ले, जिसका रूम मेरे रूम से सटा था। उस आंटी की कहानी बाद में सुनाऊंगा। फिर मैंने सोचा की आंटी सुन भी ले, तो क्या फर्क पड़ता है।
साली आज चुदाई की सिसकारी भी सुन लेगी तो उसकी चूत में भी पानी आ जाएगा। वैसे भी आंटी की चुदासी नजरें मुझ पर रहती थीं। मैंने सीमा की चूचियों को खूब मसला और उसने बड़े प्यार से अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को मेरे मुँह में डालकर खूब चुसवाया।
अचानक मैंने कहा- मेरा लंड चूसोगी ? उसने झट से अपनी स्थिति 69 की बनाई और मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुँह में भर कर मजा लेती हुई चूसने लगी। आह! साला लंड चुसवाना भी हसीन नज़ारे का मजा होता है। मुझे सच में उस समय बड़ा आनन्द मिल रहा था।
मैंने भी आव देखा न ताव, उसकी चूत में अपना मुँह रख दिया और चूत चाटने लगा। अब तो उसका चुदासापन चरम पर पहुंच गया और वह बोली- अआआह! अब जल्दी से चोदो मुझे! मैंने एक एक कर के उसके पूरे कपड़े खोल दिए और मैं भी पूरी तरह नंगा हो गया।
फिर मैंने चुदाई वाली पोजीशन बनाई और अपने मोटे लंड को उसकी चूत पर लगा कर घिसा, तो वह गांड मटकाने लगी वो हमममम! डालना हम्मम! बर्दाश्त नहीं होती अब। उसी वक्त मैंने जोर से धक्का मार दिया।
मेरा मोटा तना हुआ लंबा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया और वह कसमसाती हुई बोली- आह अआआह! जरा धीरे से चोदो ना मेरे राजा! उन्नन्ह! मैंने कहा- धीरे की मां की चूत!
यह कह कर मैंने पूरी ताकत से एक और धक्का मार दिया। वो अआआह! मां चूद गई बेटी तेरी! ओंह्ह्ह! कहते हुए चिहुंक गई और अपने नाखूनों को मेरी पीठ में गड़ाने लगी।
सीमा के सेक्स के सुख की कोई सीमा नहीं थी। वह अब मजा लेकर चुदवा रही थी उसकी अआआह! हमममम! रजा चोदो आगाह! ओह रवि मेरी जान अआआ! अच्छा लग रहा है। बोलते हुए उसने कहा- मेरी कई दिनों से चाहत थी की आप मुझे चोदें!
मैंने उसकी चुदाई के समय ही उससे पूछा के मुझसे पहले किस किस को अपनी चूत का मज़ा दे चुकी है, तो उसने बताया की कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह अपने एक प्रोफेसर और अपने बॉयफ्रेंड से नियमित चुदवाया करती थी। लेकिन बिलारी में उसे किसी से चुदवाना सुरक्षित नहीं लग रहा था।
उसकी चुदने की आदत उसे बेचैन किए जा रही थी, तो उसने मुझसे चुदवाना सही समझा, क्योंकि मैं उसकी प्राइवेसी को कहीं लीक नहीं करता। खैर, वह तो अआह ! आआह! का मजा लेकर चुदवाती रही। मैंने पूछा- तो तुम्हारी चूत को तीन लंड का स्वाद मिला है।
कौन-सा लंड ज्यादा पसंद आया? उसने सटीक जवाब देते हुए कहा- चूत को समय पर जो भी लंड मिल जाए, वही बेस्ट होता है! मोटा लंबा लंड तो चूत को अच्छा लगता ही है!
दोस्तो, मैं रात भर उसे चोदता रहा। मैने एक पल खिड़की की तरफ देखा तो मुझे लगा शायद मेरी मकान मालकिन आंटी खिड़की से हम दोनों की चुदाई देख रही है।
लेकिन हो सकता है ये मेरा वहम हो मगर उस रात मजा बहुत आया रात भर में करीब पांच बार सीमा की चुदाई हुई और हर बार मैंने उसकी चूत में ही अपना रस गिराया। अपनी चूत में लंड कापानी लेने के लिए वह खुद बोली थी।
वो मुझे बोली ‘आप मुझे बस संतुष्ट कीजिए! बच्चा होने की टेंशन मत लीजिए। कल मैं अनवांटेड 72 खा लूँगी, लेकिन आपके लंड के गर्मागर्म लावे को फील करने का मौका नहीं छोड़ना चाहती हूँ!’ अगले दिन हम दोनों सुबह देर से जागे।
सुबह ग्यारह बजे बगल वाली आंटी ने गेट खटखटाया। मैंने अपनी उस हेल्पर लड़की सीमा को जगाकर वॉशरूम भेज दिया और आंटी के लिए गेट खोला। आंटी बोली- कोई लड़की आई थी रात में? खूब देर तक आवाज आ रही थी!
मैंने कहा- हां मेरी पड़ोसन सीमा आई हुई है। यहीं जॉब लगा है उसका। जब तक उसे अपने घर में शिफ्ट न करा दूँ, वह यहीं कुछ दिन रहेगी! आंटी ने अजीब-सी स्माइल दी और उसकी नजर मेरी हाफ पैंट के अन्दर तने हुए लंड पर थी।
वह बोली- अच्छा ठीक है, अपनी पड़ोसन को प्यार से रखना। वह जितने दिन भी रहना चाहे कोई दिक्कत नहीं है। तुम्हारी गैर हाजिरी में मैं भी उसका ख्याल रख लिया करूंगी! आंटी की आवाज़ में हवस भरी थी।
जवाब में मैंने कहा- आंटी, दो दिन में ये अपने घर चली जाएगी, फिर आप अपना ही ख्याल रखना अच्छे से! आंटी बोली- मैं रात में अजीब-सी आवाज सुन रही थी, तो मुझसे रहा नहीं गया और अभी आकर मिलने आ गई।
खैर, तुम दोनों फ्रेश हो और नाश्ता आदि करो … मैं इसके जाने के बाद मिलूँगी तुमसे मुझे तुमको कुछ दिखाना है! यह कह कर आंटी अर्थपूर्ण मुस्कान देती हुई चली गई।
आंटी के जाते ही मैंने वॉशरूम का दरवाजा नॉक किया। दरवाजा खुलते ही देखा कि वह नंगी होकर नहाने की तैयारी में थी। मैंने तुरंत उसकी चूची दबाना शुरू कर दिया और चूची को पीना शुरू कर दिया।
फिर उसे घुटनों पर बिठा कर उसके मुँह में अपना मोटा लंड डालकर चुसवाया और उसे शॉवर के नीचे कुतिया बनाकर खूब चोदा। दोस्तो, करीब छह महीने तक वह मेरे साथ ट्रेनिंग लेती रही।
वीकेंड पर उसकी चुदाई मस्त होती थी और बाकी दिन उसकी ट्रेनिंग। छह महीने तक उसने मेरे साथ चुदाई के खूब मजे किए एक दो बार तो मैने आंटी और सीमा को चूत रगड़ते हुए भी देखा जिसके बाद हम तीनों ने मिलकर Threesome Sex भी करा।
आज भी हॉट पड़ोसन सीमा की चुदाई के सारे लम्हे मुझे याद है लेकिन अब वह मेरे टच में नहीं है, लेकिन आज भी उसकी चुदाई को याद करते ही मेरा लंड नागराज की तरह फनफनाने लगता है।
जब भी मेरा लंड अपना सर उठाता है तो उसको आंटी शांत करती है जिसके बारे में मैं आपको अगली कहानियों में बताऊंगा उम्मीद है कि आपको मेरी ये Hindi Sex Stories पसंद आई होगी।

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